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पीएम मोदी ने संसद भवन में की हाई लेवल मीटिंग : नड्डा, राजनाथ व शाह समेत ये वरिष्ठ बीजेपी सांसद रहे मौजूद, संसद सत्र के दौरान रणनीति पर हुई चर्चा
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का पहला दिन काफी हंगामेदार रहा। सरकार और विपक्ष एक दूसरे पर तमाम मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए। वहीं, संसद भवन में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई मंत्री शामिल हुए।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद परिसर में कई उपलब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बम और बंदूक पर संविधान की जीत हो रही है. तेजी से नक्सलवाद कम हो रहा है. रेड जोन धीरे-धीरे ग्रीन जोन में बदल रहा है. ये सत्र देश के लिए बहुत गर्व वाला है. ये विजयोत्सव जैसा है. देश के सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सौ फीसदी टारगेट को प्राप्त किया है. पूरी दुनिया ने हमारे सुरक्षाबलों का सामर्थ्य देखा.
देश हित में मन जरूर मिलें
प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में देश का पक्ष रखने गए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों की सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के आका पाकिस्तान को बेनकाब किया है. मैं सभी सांसदों और पार्टियों की देशहित में किए गए इस काम की सराहना करता हूं. सभी पार्टियों का एजेंडा अलग-अलग है, दल हित में मत भले ना मिलें लेकिन देश हित में मन जरूर मिलें.
22 मिनट में आतंकियों का खात्मा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमारे सुरक्षाबलों ने केवल 22 मिनट में आतंकवादियों का खात्मा करने के साथ ही उनके ठिकानों को जमींदोज कर दिया. पीएम ने भरोसा जताया कि मानसून सत्र में सभी सांसद एकता और विजय की भावना के साथ देश की सैन्य शक्ति, जन-प्रेरणा और मेड इन इंडिया रक्षा क्षमताओं को मजबूती देने वाले भाव को मुखरता से पेश करेंगे.
हमारा संविधान जीत रहा है
प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की निर्णायक कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से देश में नक्सलवाद रहा. मगर आज नक्सलवाद सिकुड़ रहा है. कल तक जो रेड कॉरिडोर थे वो आज ग्रोथ जोन में बदल रहे हैं. सुरक्षा बल नक्सलवाद के खात्मे के लक्ष्य के साथ उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे हैं. गर्व से कह सकता हूं कि देश के कई जिले अब नक्सलवाद से बाहर आ चुके हैं. हमारा संविधान जीत रहा है.
ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकले शुभांशु शुक्ला, चेहरे पर दिखी गर्व की मुस्कान..
नई दिल्ली। 15 जुलाई 2025 को दोपहर 3:00 बजे IST पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की 18 दिन की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) यात्रा का सफल समापन हुआ। वह स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतरे। यह मिशन न केवल भारत के लिए गौरव का विषय रहा, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी मानी जा रही है।
प्रवेश की तैयारी
ड्रैगन कैप्सूल की वापसी से पहले डीऑर्बिट बर्न की प्रक्रिया पूरी की गई। यह चरण अत्यंत अहम होता है, क्योंकि इससे यान को कक्षा से बाहर लाकर पृथ्वी के वायुमंडल में सुरक्षित प्रवेश कराने की दिशा तय होती है। यान का कोण और गति सही ढंग से सेट की गई ताकि वापसी की दिशा नियंत्रित रहे।
वायुमंडल में प्रवेश
स्पेसएक्स ड्रैगन ने लगभग 27,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। इस दौरान बाहरी तापमान 1,600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। गर्मी और घर्षण से उत्पन्न प्लाज्मा के कारण कुछ मिनटों के लिए कंट्रोल रूम और कैप्सूल के बीच संपर्क टूट गया। यह चरण तकनीकी दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
लैंडिंग और रिकवरी
वायुमंडल से सफलतापूर्वक निकलने के बाद ड्रैगन कैप्सूल के पैराशूट सक्रिय हुए। पहले छोटे और फिर बड़े पैराशूट खुले, जिससे कैप्सूल की गति धीमी हुई और वह सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरा। लैंडिंग के तुरंत बाद समुद्र में तैनात रिकवरी टीमें नावों और हेलीकॉप्टरों के जरिए मौके पर पहुंचीं और शुभांशु शुक्ला को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
डॉक्टरों की टीम ने उन्हें प्रारंभिक मेडिकल जांच के लिए विशेष सुविधा में स्थानांतरित किया। शुभांशु की यह यात्रा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में मील का पत्थर साबित हो सकती है। भारत सहित दुनियाभर से उन्हें बधाइयों का सिलसिला जारी है।
दिल्ली-एनसीआर में लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह लगातार दूसरा दिन है जब लोगों को धरती हिलती हुई महसूस हुई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, शुक्रवार शाम 7 बजकर 49 मिनट 43 सेकंड पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई।
भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई। हालांकि इस बार भूकंप की तीव्रता अपेक्षाकृत कम थी, इसलिए अधिकतर लोगों को झटके महसूस नहीं हुए। फिलहाल किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
लगातार दो दिन की हलचल से लोगों में चिंता
इससे पहले गुरुवार, 10 जुलाई को सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर भी दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई थी। वह झटका शुक्रवार के मुकाबले अधिक तेज था और कई इलाकों में लोग डर के मारे अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए थे।
गुरुवार के भूकंप का केंद्र भी हरियाणा के झज्जर में ही था, जो कि दिल्ली से लगभग 51 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। भूकंप की गहराई उस समय भी 10 किलोमीटर ही दर्ज की गई थी।
दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटकों से दहशत, डर से लोग अपने घर से बाहर निकले
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में गुरुवार सुबह भूकंप के तेज झटकों से लोग दहशत में आ गए। भारतीय समयानुसार सुबह 09 बजकर 04 मिनट 50 सेकंड पर महसूस किए गए इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में रहा। इसका अक्षांश 28.63°N और देशांतर 76.68°E दर्ज किया गया, जबकि भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर मापी गई है।
भूकंप के झटके दिल्ली के अलावा नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद सहित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी महसूस किए गए। झटकों के बाद कई लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि अभी तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
दिल्ली-NCR संवेदनशील जोन में
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से जोन-4 में आता है, जिसे भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। यहां अक्सर हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के झटके पृथ्वी के भीतर जमी हुई ऊर्जा को धीरे-धीरे मुक्त करते हैं, जिससे भविष्य में बड़े और विनाशकारी भूकंपों की संभावना कुछ हद तक कम हो सकती है।
देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंपीय हलचल
दिल्ली-एनसीआर से पहले इस सप्ताह देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंप दर्ज किए गए। मंगलवार को असम के कार्बी आंगलोंग जिले में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था। यह भूकंप सुबह 9:22 बजे महसूस किया गया, जिसकी गहराई 25 किलोमीटर थी और केंद्र 26.51°N तथा 93.15°E पर स्थित था।
वहीं, सोमवार को अंडमान सागर में 4.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसकी गहराई 10 किलोमीटर रही। रविवार को भी इसी क्षेत्र में समान तीव्रता और गहराई का भूकंप आया था, जिससे वहां के नागरिकों में चिंता देखी गई।
भूवैज्ञानिकों की चेतावनी
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि इन घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियां भविष्य में बड़े झटकों की चेतावनी हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें और आपदा प्रबंधन से जुड़े दिशानिर्देशों का पालन करें।
मंत्री जी, आप मासूम चेहरा बनाकर भाजपा नेताओं को बरगला सकते है, जनता को नहीं।
रायपुर/ बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने छत्तीसगढ़ राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार पर मेडिकल घोटाले का आरोप लगाया था। उनके नेताओं ने जोर-शोर से हर चुनावी मंच पर यह बात कही थी। जिससे प्रभावित होकर जनता ने भाजपा का साथ दिया और उसे सत्ता पर ले आई। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री बने श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने अधीनस्थ विभाग CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की एमडी पद्मिनी भोई के माध्यम से आरोपी घोटालेबाज कंपनी मोक्षित कॉरपोरेशन को लगभग 50 करोड़ का भुगतान करा दिया। यह बात जनता के लिए बेहद अचंभित करने वाली थी। सीधे तौर पर जनता से धोखाधड़ी थी। क्योंकि चुनावी बातें हवा हो गई और घोटालेबाजों से उनकी गलबहियां हो गई थी।
क्यों न मंत्री और एमडी को घोटाले में सह अभियुक्त माना जाए?
मेडिकल घोटाले की दुहाई देकर, दोषी मंत्री,ठेकेदार और अधिकारियों को जेल में डालने का वादा लेकर सत्ता में आई भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और एमडी को घोटाले में सह अभियुक्त अब जनता मान रही है।उनके द्वारा घोटाले के आरोपी मोक्षित कारपोरेशन को किया गया भुगतान बेईमानी का प्रत्यक्ष सबूत प्रस्तुत कर रहा है। टीवी पर मंत्री जी बड़ी मासूमियत के साथ ईमानदारी की बात करते हैं। परंतु जितनी बेईमानी उनके रहते स्वास्थ्य विभाग में हुई है और हो रही है उतनी कभी नहीं हुई। आए दिन अखबारों की सुर्खिया यह बात चीख चीख कर कहती है।
जांच EOW को सौंपने में क्यों लगे डेढ़ साल?
आरोपों से घिरे स्वास्थ्य मंत्री कहते है मेडिकल घोटाले की जांच हम ही करा रहे है इसलिए हम पर लग रहे आरोप मिथ्या है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद जनता की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि बीते छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव होने के बाद भाजपा सरकार के पहले विधानसभा सत्र से लेकर छठवें सत्र तक भाजपा के ही विधायक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री विधायक राजेश मूणत, राजेश अग्रवाल, सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस सरकार के दौरान हुए मेडिकल घोटाले में जांच नहीं कराये जाने को लेकर अपनी सरकार के ही स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जयसवाल को घेरा था। रीएजेंट सहित मेडिकल घोटाले से कई अहम सबूत हर विधानसभा सत्र में भाजपा विधायकों ने रखे थे। इस दौरान मीडिया ने भी प्राथमिकता के साथ मेडिकल घोटाले की खबरों को प्रकाशित किया था। राष्ट्रीय टीवी चैनलों में घंटे घंटे भर की खबर दिखाते हुए घोटालों की परते खोली थी। पर पता नहीं क्यों स्वास्थ्य मंत्री जांच में आना कानी करते रहे। अंततः डेढ़ साल बाद मेडिकल घोटाले की EOW से जांच की घोषणा की गई। आज देखिए इसी मेडिकल घोटाले में 5 कर्मचारी और एक व्यापारी जेल में है।
मुख्यमंत्री को करते रहे गुमराह!
पाठकों को जानकारी देते हुए बता दूं की सरकार बनने के बाद बतौर पत्रकार मैने मुख्यमंत्री जी से भेंट के दौरान ढाई हजार करोड़ के रीएजेंट सहित संपूर्ण मेडिकल घोटाले की संक्षिप्त जानकारी उन्हें दी थी। जिस पर उन्होंने कहा था कि हमारे भी संज्ञान में ये सब है मंत्रिमंडल गठन के बाद निश्चित रूप से हम कार्रवाई करेंगे। मेरी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने सीजी एमएससी की गड़बड़ियों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। परंतु संगठन के एक बड़े नेता का हस्तक्षेप ऐसा हुआ कि जांच टलता गया। परंतु जब संगठन के नेता जी को लगा कि वो टूलकिट बन रहे है तो उन्होंने भी हाथ खींच लिया। तब जाकर मेडिकल घोटाले की जांच प्रारंभ होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
पुरी रथ यात्रा के दौरान घायल हुए 600 श्रद्धालु
जगन्नाथपुरी/ पुरी रथ यात्रा के दौरान श्रद्धा और आस्था का महासागर उमड़ पड़ा, जहां दस लाख से अधिक भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचे. हालांकि, इतनी भारी भीड़ और भीषण गर्मी के कारण यह पावन अवसर कई लोगों के लिए मुश्किलों भरा बन गया.
ओडिशा के स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक रथ यात्रा क्षेत्र से लगभग 600 मरीजों को पुरी जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है. विशेष स्वास्थ्य सचिव डॉ. विजय मोहापात्रा ने बताया कि करीब 70 लोगों को हल्की चोटें, जबकि 170 से अधिक श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आई हैं. इसके अलावा कई लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है.
डॉ. मोहापात्रा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी, उमस और भीड़भाड़ के चलते लोगों को सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं भी हुईं. राहत और बचाव कार्य में स्वास्थ्य विभाग की कई टीमें, एंबुलेंस और चिकित्सा शिविर लगातार सेवा में जुटे हुए हैं. राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें, भीड़ से बचें और ज़रूरत होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें. वहीं प्रशासन ने अस्पतालों में अतिरिक्त डॉक्टरों और दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित की है.
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहां वीर सावरकर का अपमान सहन नहीं किया जाएगा।
अदालत ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि अंग्रेजों को लिखे पत्र में महात्मा गांधी खुद को सेवक लिखते थे तो क्या कोई उन्हें अंग्रेजों का नौकर कह दे?
दिल्ली/ सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के लिए अपमानजनक बयान देने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि अगर वह इस तरह के बयान देंगे तो उस पर वह खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करेगा. हालांकि, कोर्ट ने राहुल को अंतरिम राहत देते हुए लखनऊ की एसीजेएम कोर्ट से जारी समन पर रोक लगा दी है. सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि 'महात्मा गांधी भी अंग्रेज वायसराय को भेजे पत्र में स्वयं को 'आपका निष्ठावान सेवक' लिखते थे. क्या उसके चलते कोई उन्हें भी अंग्रेजों का नौकर कह देगा? हाई कोर्ट के कई जज भी अपने पत्राचार में खुद को सेवक लिख देते हैं. क्या ऐसा लिखने भर से कोई नौकर हो जाता है?' कोर्ट ने राहुल को आगाह करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान सहन नहीं किया जाएगा. जिन्होंने हमें स्वतंत्रता दिलाई, उन्हें अपमानित नहीं करना चाहिए.
शेयर बाजार में कोहराम मचाने वाली शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग और राहुल गांधी में साठगांठ! इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद को मिले सबूत:रिपोर्ट
हिंडनबर्ग वही कंपनी है जिसने अडानी ग्रुप पर शेयरों में हेराफेरी का आरोप लगाया था।जिसके बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी।
मुंबई/ स्पूतनिक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मोसाद ने भारतीय ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के होम सर्वर को निशाना बनाकर एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया था। ऑपरेशन के दौरान मोसाद को इनक्रिप्टेड चैटरूम्स और सीक्रेट बैकचैनल कम्युनिकेशन का सुराग मिला, जिनसे कथित तौर पर राहुल गांधी और हिंडनबर्ग रिसर्च की टीम के बीच संवाद के संकेत मिले। इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के बीच कथित सांठगांठ का खुलासा किया है। यह दावा 'स्पूतनिक इंडिया' ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मोसाद ने भारतीय ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के प्रमुख और राहुल गांधी के करीबी सहयोगी सैम पित्रोदा के होम सर्वर को निशाना बनाकर एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया था।
स्पूतनिक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या भारत की विपक्षी पार्टी का हिंडनबर्ग रिसर्च के साथ कोई कथित सांठगाठं था। बता दें कि हिंडनबर्ग रिसर्च वह संस्था है, जिसने जनवरी 2023 में अदाणी ग्रुप पर शेयर बाजार में हेराफेरी और अकाउंटिंग फ्रॉड के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद शेयर बाजार में कोहराम मचा था। और अडानी ग्रुप के शेयर 25 प्रतिशत तक नीचे आ गए थे।हालांकि अब हिंडनबर्ग रिसर्च अपना कारोबार बंद कर चुकी है।
स्पूतनिक इंडिया ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान मोसाद को इनक्रिप्टेड चैटरूम्स और सीक्रेट बैकचैनल कम्युनिकेशन का सुराग मिला, जिनसे कथित तौर पर राहुल गांधी और हिंडनबर्ग रिसर्च की टीम के बीच संवाद के संकेत मिले। इन संवादों का उद्देश्य गौतम अडानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों को कमजोर करना था।
नए आतंकियों की भर्ती नहीं, पर स्लीपर सेल बन रहे उनकी ताकत
सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतंकियों ने पहलगाम में जिस जगह पर हमला किया है, उसकी संरचना के बारे में निश्चित रूप से आतंकियों के पास सभी तरह की जानकारी थी। आतंकियों को सुरक्षा बलों एवं लोकल पुलिस की मूवमेंट के बारे भी पुख्ता सूचना रही होगी।
श्रीनगर / जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में मंगलवार दोपहर को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए हैं और 17 लोग घायल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने तीन आतंकियों के स्कैच जारी किए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी, पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' की जम्मू कश्मीर में सक्रिय प्रॉक्सी विंग 'द रजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने ली है। जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्रों का कहना है, भले ही घाटी में आतंकी संगठनों को दहशतगर्दों की संख्या बढ़ाने के लिए नई भर्ती का अवसर नहीं मिल रहा, लेकिन वहां मौजूद विदेशी एवं लोकल आतंकियों ने बड़ी संख्या में अपने 'स्लीपर सेल' तैयार कर लिए हैं। ये सेल, आतंकियों को सैन्य मूवमेंट की जानकारी मुहैया कराते हैं। पहलगाम सहित जम्मू कश्मीर के अधिकांश इलाकों में चाय बेचने वाले, पंक्चर लगाने वाले, ढाबा संचालक और 'खच्चर-घोड़े व पोटर्स दिखाई पड़ते हैं। कहीं न कहीं इन्हें संदेह के दायरे से दूर रखना, इंटेलिजेंस चूक बन रहा है। इन्हीं में ही आतंकियों के 'स्लीपर सेल' शामिल रहते हैं। लिहाजा ये लोग, स्थानीय होते हैं, ऐसे में सुरक्षा बल भी इन पर ज्यादा शक नहीं करते हैं।
जम्मू कश्मीर के सुरक्षा से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, देखिये इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि घाटी और दूसरे क्षेत्रों में आतंकियों के 'स्लीपर सेल' मौजूद हैं। उन्हें कहीं न कहीं, बड़े स्तर पर लोकल स्पोर्ट मिल रही है। चाय बेचने वाले, पंक्चर मेकेनिक, ढाबा संचालक और 'खच्चर-घोड़े व पोटर्स वाले, पहले भी शक के दायरे में रहे हैं, लेकिन ये सब स्थानीय होते हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां इनके साथ ज्यादा सख्ती से पेश नहीं आती। इनकी मौजूदगी हर इलाके में रहती है। घने जंगल में भी ये लोग रहते हैं। अनंतनाग से पहलगाम की ओर मुख्य सड़क के आसपास ऐसी बहुत सी जगहें हैं, जहां पर्यटकों के छोटे-छोटे समूह प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए पैदल यात्रा करते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए घोड़ों एवं खच्चरों की भी मदद ली जाती है। इस कड़ी में ढाबा व चाय वाले भी मिल जाते हैं।
सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतंकियों ने पहलगाम में जिस जगह पर हमला किया है, उसकी संरचना के बारे में निश्चित रूप से आतंकियों के पास सभी तरह की जानकारी थी। आतंकियों को सुरक्षा बलों एवं लोकल पुलिस की मूवमेंट के बारे भी पुख्ता सूचना रही होगी। उन्हें पुलिस गश्त की टाइमिंग का भी पता होगा। आतंकियों को यह जानकारी भी रही होगी कि बैसरन घाटी में गश्त का शेड्यूल क्या रहता है। जिस वक्त हमला हुआ, वहां पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि हमले के दौरान कोई क्रॉस फायर भी नहीं हुआ। घास के मैदानों में भी खाने-पीने की दुकानें हैं। वहां स्थानीय लोगों द्वारा काम धंधा किया जाता है। इन ढाबों के आसपास कई पर्यटक मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि कोई ढाबा संचालक और वहां काम करने वाले, आतंकियों का निशाना नहीं बनें। हमले के काफी देर बाद सुरक्षा बल वहां पहुंचे थे, तब तक सभी आतंकी, जंगलों की तरफ भाग चुके थे।
सूत्रों के मुताबिक, हमले के दौरान क्रॉस फायरिंग न होने का सीधा मतलब यही था कि आसपास पुलिस या सुरक्षा बल नहीं थे। इस जगह पर भारी संख्या में पर्यटक आ रहे थे तो उसके बावजूद वहां पर पुलिस चौकी तक दिखाई नहीं पड़ी। चाय की दुकान के मालिक या उसके किसी कर्मचारी को भी चोट नहीं लगी। आतंकियों को यह बात मालूम थी, इस क्षेत्र में फौरी तौर पर पुलिस मदद नहीं पहुंच सकती है। इसलिए उन्होंने पर्यटकों का धर्म पूछ कर उन्हें मारा। यानी दहशतगर्दों को वहां की सुरक्षा संरचना की जानकारी थी। आतंकियों ने जल्दबाजी में अंधाधुंध फायरिंग नहीं की। सुरक्षा बलों को चाय बेचने वाले, पंक्चर लगाने वाले, ढाबा संचालक और 'खच्चर-घोड़े व पोटर्स पर नजर रखनी चाहिए।
सड़क किनारे और घास के मैदानों के आसपास इन लोगों की उपस्थिति को लेकर पहले भी सुरक्षा एजेंसियों को सचेत किया जाता रहा है। साल 2020 में भी ऐसे कई अहम सबूत सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे थे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' ने आतंक का वह नया प्लान तैयार किया था। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लॉन्चिंग कमांडर अब्दुल मन्नान उर्फ डाक्टर की आतंकवादियों के साथ हुई बातचीत को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इंटरसेप्ट किया था। उस बातचीत में कई सनसनीखेज खुलासे हुए।
आईएसआई एवं आतंकी संगठन व उनके स्लीपर सेल, भारतीय सैन्य बलों की हर मूवमेंट की जानकारी जुटाते हैं। तब यह बात सामने आई थी कि जम्मू-कश्मीर हाईवे, कठुआ, सांबा, डोडा, पहलगाम और दूसरे इलाकों में सड़क के किनारे पर स्लीपर सेल को पंक्चर लगाने की दुकान खोलने के लिए कहा गया है। साथ ही चाय और ढाबा तैयार करने की योजना बनाई गई। इन जगहों पर प्लास्टिक कवर में हथियार एवं संचार के साधन रखने का जुगाड़ तैयार किया गया।
जैश-ए-मोहम्मद के लॉन्चिंग कमांडर अब्दुल मन्नान और आतंकवादियों के बीच हुई बातचीत में पता चला था कि आईएसआई अब स्लीपर सेल के जरिए ज्यादा से ज्यादा भारतीय सैन्य बलों की मूवमेंट का पता लगाने की कोशिश में है। किस मार्ग से, कब और कितने सैन्य वाहन गुजरे हैं, उनमें जवानों की संख्या, हथियार, गोला बारुद व दूसरा साजो सामान, ऐसी जानकारी जुटाने के लिए हाईवे पर पंक्चर लगाने की दुकानें खोली जा रही हैं। यह भी पता चला था कि पंक्चर की दुकान से करीब दो किलोमीटर पहले कुछ नुकीली वस्तु सड़क पर डाल दी जाती है। उसी जगह पर ऐसा साइन बोर्ड लगा देते हैं, जिस पर लिखा होता है कि पंक्चर की दुकान दो किलोमीटर आगे है। यह सब आतंकी हमले को अंजाम देने के मकसद से किया गया था। पंक्चर की दुकानों की तरह ही सड़क किनारे चाय की दुकान और ढाबे खोले गए।
स्लीपर सेल को बाकायदा उनके काम का मेहनताना भी देने की बात हुई थी। वे किस तरह की जानकारी आईएसआई और आतंकी संगठनों को देते हैं, मेहनताना की रेंज इसी पर निर्भर करती है। सैन्य वाहन एक साथ चल रहे हैं, उनके बीच कितनी दूरी है, ये सब तथ्य जुटाने की जिम्मेदारी, स्लीपर सेल को दी गई थी। किसी इलाके में इंटरनेट की स्थिति कैसी है, यह जानकारी भी स्लीपर सेल देंगे। जो बातचीत इंटरसेप्ट हुई थी, उसमें इंटरनेट और लोकल पुलिस को लेकर कई तरह के सवाल पूछे गए। डोडा के आसपास मौजूद हिजबुल मुजाहिदीन के आंतकियों की जानकारी मांगी गई थी। आतंकियों के नए ठिकानों बाबत सूचनाओं का आदान प्रदान कोड वर्ड के जरिए करने की बात हुई।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने कहा हिंदुओं के खिलाफ उगला था जहर...अब हिंदुओं पर हमला हो गया।
जम्मू/ जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से पूरा देश सन्न है और हर कोई आतंकियों को करारा जवाब देने की मांग कर रहा है.आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी घूमने आए पर्यटकों को उनका नाम और मजहब पूछकर निशाना बनाया है. यह हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के उस बयान के कुछ दिन बात हुआ, जिसमें उन्होंने कश्मीर को इस्लामाबाद के 'गले की नस' बताया था. हमले के बाद ये सवाल लगातार उठ रहे हैं कि असीम मुनीर के बयान ने आतंकियों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काने का काम किया. क्योंकि मुनीर ने बंटवारे का जिक्र करते हुए हिन्दुओं को मुस्लिमों से अलग बताया था और कहा कि हम साथ नहीं रह सकते. ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तानी जनरल के इसी बयान ने आतंकी गुटों को हिंसा फैलाने के लिए प्रेरित किया, खासकर तब जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की चार दिवसीय यात्रा पर हैं.
आतंकी विचार और उससे सहानुभूति रखने वालों को बेनकाब करना होगा
दिल्ली/ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर कवि कुमार विश्वास ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा," धर्म पूछकर निरपराध पर्यटकों को गोली मारने वाले भी किसी मज़हब के पैरोकार हो सकते हैं? दुनिया को, देश को जागना होगा और आतंकवादी विचार और उसके अंदर-बाहर के समर्थकों, सहानुभूति रखने वालों को बेनक़ाब करना होगा। जिनके परिजनों की मृत्यु हुई है उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति। आतंकी भेड़ियों को चेतावनी कि कश्मीरी व भारतीय न झुके थे न झुकेंगे। बदला लिया जाएगा।"
हे ईश्वर, अगले जन्म में मुझे भेड़िया ही बनाना -मनोज मुंतशिर
मुंबई/जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर गीतकार व पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता, आतंकवादी हिंदू या मुसलमान नहीं, सिर्फ़ आतंकवादी होता है. हे ईश्वर, अगले जनम में मुझे भेड़िया बनाना ताकि मैं ऐसा कहने वाले बुद्धिजीवियों का मुँह नोच लूँ!"
एक्टर मनोज कुमार के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक, कहा- ‘इंडियन सिनेमा के आइकन थे दिग्गज अभिनेता’
नई दिल्ली। दिग्गज एक्टर और भारत कुमार के नाम से मशहूर मनोज कुमार का निधन हो गया है। 87 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। एक्टर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।
मनोज कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया है। पीएम ने एक्स पर पोस्ट कर दिग्गज अभिनेता को श्रद्धांजलि दी। पीएम ने लिखा, “मनोज कुमार जी, वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें विशेष रूप से उनकी देशभक्ति के लिए याद किया जाता है, जो उनकी फिल्मों में भी झलकती थी। मनोज जी के काम ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रज्वलित किया और पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति।
वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी पोस्ट कर दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार के निधन पर शोक जताया है। राजनाथ सिंह ने एक्स पर की गई अपनी पोस्ट में लिखा है, “श्री मनोज कुमार जी एक बहुमुखी अभिनेता थे, जिन्हें हमेशा देशभक्ति से भरपूर फ़िल्में बनाने के लिए याद किया जाएगा।
भारत के रक्षा मंत्री ने आगे लिखा कि ‘भारत कुमार’ के नाम से मशहूर, ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ जैसी फ़िल्मों में उनके अविस्मरणीय अभिनय ने हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है। उन्हें पीढ़ियों से लोगों का प्रिय बनाया है, उनकी सिनेमाई विरासत उनके कामों के ज़रिए ज़िंदा रहेगी। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं. ओम शांति।
मनोज कुमार का अंतिम संस्कार कल होगा
बता दें कि अभिनेता मनोज कुमार का पार्थिव शरीर आज अस्पताल में ही रखा जाएगा। मनोज कुमार के बेटे साथ है लेकिन कुछ करीबी परिजन विदेश में रहते हैं। आज विदेश से परिजन देर रात तक भारत लौट रहे हैं। मनोज कुमार की पत्नी की तबीयत भी खराब है और डॉक्टर उनके चेकअप के लिए घर पर मौजूद हैं। वहीं दिग्गज अभिनेता का अंतिम संस्कार 12 बजे विलेपार्ले में स्थित हिंदू शमशान भूमि पर होगा।
नम हुईं फैंस की आंखें
मनोज कुमार के निधन की खबर ने फैंस को गमगीन कर दिया है. सोशल मीडिया पर सभी अपने चहेते कलाकार को नम आंखों से विदाई दे रहे हैं। सेलेब्स ने भी दिग्गज एक्टर के निधन पर शोक जताया है. मनोज कुमार ने सहारा, चांद, हनीमून, पूरब और पश्चिम, नसीब, मेरी आवाज सुनो, नील कमल, उपकार, पत्थर के सनम, पिया मिलन की आस जैसी फिल्मों में काम किया था। वो नेशनल अवॉर्ड, पद्म श्री और दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित थे।
कैसा था मनोज कुमार का सफर?
मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 में पाकिस्तान में हुआ था। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था। मनोज कुमार एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में पैदा हुए थे। देश के बंटवारे के वक्त उनका परिवार दिल्ली आ गया था। बचपन से वो सिनेमा के दीवाने थे। फिल्में देखना उन्हें अच्छा लगता था। उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म शबनम में उनके किरदार मनोज कुमार के नाम पर अपना नाम रख लिया था।
एक्टर ने 1957 में फिल्म फैशन से एक्टिंग डेब्यू किया था. 1965 उनके करियर के लिए बड़ा गेमचेंजर था। इसी साल आई शहीद मूवी ने उनके करियर को माइलेज दी। बस इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। रोल चाहे कैसा भी हो, वो उसमें पूरी तरह ढल जाते थे। मनोज कुमार की फिल्में ही हिट नहीं हुईं, बल्कि इसके गाने भी लोगों की जुबां पर चढ़े। उनकी उपकार मूवी का गाना ‘मेरे देश की धरती’ आज भी लोगों को याद है। मनोज कुमार को फिल्म ‘उपकार’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था।
राज्यसभा में पेश हुआ वक्फ बिल, रिजिजू ने पेश किया विधेयक
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 बुधवार को लोकसभा में पास होने के बाद अब राज्यसभा में पेश किया गया है. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) उच्च सदन में विधेयक पेश कर अपनी बात रख रहे हैं. इस दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर जब मैं सदन में आया हूं, कुछ बातें रखना चाहता हूं कि सदन की मर्यादा भी बनी रहे.
लोकसभा में चली 12 घंटे के चर्चा के बाद वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार को पारित हो गया. इसके बाद गुरुवार को विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया है. चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि, कमिटी बनने से पहले लोगों ने कहा कि इसका कंसलटेशन जितना होना चाहिए था उतना नहीं है. हमने देश भर में जितने स्टेकहोल्डर से, वक्फ बोर्ड के ऑफिसर, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के बाद संसद में पेश किया.
उन्होंने कहा, जेपीसी ने जो काम किया है, इससे ज्यादा व्यापक काम आजतक नहीं हुआ है. अलग अलग क्षेत्रों के लोगों ने अपनी बातों को रखा और 97 लाख से भी ज्यादा और छोटे पत्रों को मिलाकर एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपना ज्ञापन सौंपा है. किसी बिल को एक करोड़ से ज्यादा सुझाव मिलना ऐतिहासिक है. आज में कमेटी के हर मेंबर को धन्यवाद देना चाहता हूं. अंत में सभी बोलने वालों को भी धन्यवाद दूंगा. सदन में तो मंत्री के रूप में बोल रहा हूं. जो अच्छा काम करेगा, उसे तारीफ भी मिलेगी. जिनकी इच्छा के लिए कर रहा हूं, उनसे भी तारीफ मिलेगी.
राज्यसभा किस पार्टी के कितने सदस्य?
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं. एनडीए के पास 125 सांसद हैं. इसमें से बीजेपी के 98, जेडी(यू) के चार, टीडीपी के दो, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तीन, शिवसेना का एक और आरएलडी का एक सांसद है. 245 सदस्यों वाले सदन में इस विधेयक को पारित कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. एनडीए को भरोसा है कि उसे असम गण परिषद और तमिल मनिला कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ-साथ छह मनोनीत सदस्यों का समर्थन भी मिल जाएगा. ऐसे में यानी एनडीए के पास राज्यसभा में संख्याबल ज्यादा है.
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली का कमाल…सरकार का भरा खजाना, मार्च में 9.9 फीसदी बढ़ा GST कलेक्शन
मुंबई। GST के क्षेत्र में अच्छी खबर है. मार्च में ग्रॉस GST संग्रह 9.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो कि अब तक का दूसरा सबसे बड़ा संग्रह(GST Collection) है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से GST राजस्व 8.8 प्रतिशत बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि आयातित वस्तुओं से प्राप्त राजस्व 13.56 प्रतिशत बढ़कर 46,919 करोड़ रुपये हो गया. सकल संग्रह में केंद्रीय जीएसटी का हिस्सा 38,145 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी का 49,891 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का 95,853 करोड़ रुपये है. मार्च में उपकर संग्रह 12,253 करोड़ रुपये रहा, और कुल रिफंड 41 प्रतिशत बढ़कर 19,615 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
रिफंड समायोजित करने के बाद, मार्च 2025 में शुद्ध GST राजस्व 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. अप्रैल 2024 में जीएसटी संग्रह 2.10 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था. डेलॉयट इंडिया के साझेदार एम एस मणि ने बताया कि मार्च के लिए सकल जीएसटी संग्रह में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि व्यवसायों द्वारा वर्ष के अंत में बिक्री को बढ़ावा देने का परिणाम है. उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना उत्साहजनक है कि यह केवल एक बार की घटना नहीं है, क्योंकि जीएसटी संग्रह में हर महीने लगातार वृद्धि हो रही है, जो वार्षिक सकल जीएसटी संग्रह में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है.

पूरे साल कितना रहा कलेक्शन
अप्रैल से मार्च के बीच का सकल जीएसटी संग्रह 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. मणि ने बताया कि प्रमुख विनिर्माण और उपभोक्ता राज्यों में जीएसटी संग्रह की वृद्धि दर में काफी भिन्नता देखी गई है. महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जबकि गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में वृद्धि एक प्रतिशत से लेकर सात प्रतिशत के बीच रही है, जो मार्च महीने के लिए असामान्य है. इन राज्यों में क्षेत्रीय वृद्धि और अनुपालन दरों का विश्लेषण करके इसके कारणों को समझना आवश्यक है.
केपीएमजी इंडिया के साझेदार और अप्रत्यक्ष कर के प्रमुख अभिषेक जैन ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में कर संग्रह में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि आर्थिक स्थिरता और कंपनियों के मजबूत कर अनुपालन का संकेत है. जैन ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष के अंत में समायोजन और समाधान की प्रक्रिया जारी रहने के कारण, हम अगले संग्रह में मासिक वृद्धि में और सुधार की उम्मीद कर सकते हैं.
जनवरी में हुआ इतना कलेक्शन
सरकार का जीएसटी संग्रह जनवरी 2024 में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12.3 प्रतिशत बढ़ा. इस महीने केंद्रीय जीएसटी संग्रह 36,100 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी संग्रह 44,900 करोड़ रुपये रहा. दिसंबर 2023 में जीएसटी संग्रह 1.76 लाख करोड़ रुपये था, जो वार्षिक आधार पर 7.3 प्रतिशत अधिक था. जनवरी का यह आंकड़ा अब तक के सबसे उच्चतम जीएसटी संग्रह से थोड़ा कम है, जबकि अप्रैल 2024 में यह 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया था.
2017 में लागू किया गया था GST
भारत में पहली जुलाई 2017 को पुरानी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के स्थान पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया. इसे स्वतंत्रता के बाद का सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार माना जाता है. केंद्र सरकार के अनुसार, जीएसटी के लागू होने से आज से सात वर्ष पूर्व, देशवासियों पर कर का बोझ कम करने में सहायता मिली है.
GST को आसान भाषा में समझें