<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Ram Raj Feed</title><link>https://ramraj.co</link><description>Ram Raj Feed Description</description><item><title>मिशन 2028, राष्ट्रपति का दौरा और धान खरीदी की तैयारी भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने दी अहम जानकारी</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20549</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में मिशन 2028 की तैयारी ने गति पकड़ ली है. भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि नवनियुक्त छत्तीसगढ़ भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी दो दिवसीय दौरे पर रायपुर आएगी. 25 और 26 अक्टूबर को अपने प्रवास के दौरान रायपुर में चुनावी रणनीति पर पूर्व सांसदों और विधायकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगी. स्मृति ईरानी संगठन के पदाधिकारियों से फीडबैक लेंगी. इसके साथ प्रदेश के 60 से ज्यादा पूर्व सांसद-विधायकों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है.
भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने मीडिया से चर्चा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर बताया कि राष्ट्रपति 2223 अक्टूबर को रायपुर और जगदलपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी. दोपहर 12:45 बजे रायपुर के लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होगी. पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी करेंगी.
इसके अलावा 4 बजे वे रायपुर के इंडोर स्टेडियम में नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी. सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी. 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति सुबह 11 बजे जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी. 12:45 बजे वे जगदलपुर में मुरिया दरबार एवं बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी.
वहीं धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार की तैयारियों की जानकारी देते हुए भाजपा विधायक ने बताया कि धान की साइकिलिंग और हेराफेरी रोकने डिजिटल निगरानी सख्त की है. अब हर बोरी पर क्यूआर कोड लगेगा. इसके साथ धान की कस्टम मिलिंग नीति 2026-27 जारी कर दी गई है. राइस मिलों को क्षमता का 75 प्रतिशत ही धान मिलेगा. 25 कार्य दिवस में स्टेक पूरा करना अनिवार्य होगा. नियम तोड़ने पर 10 रुपये प्रति क्विंटल पेनल्टी लगेगी. यही नहीं धान परिवहन करने वाले वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग होगी.</description><guid>20549</guid><pubDate>17-Oct-2026 4:09:07 pm</pubDate></item><item><title>धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता, मंत्री टंकराम वर्मा ने कांग्रेस को घेरा</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20548</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही पर तहसीलदार के निलंबन और SSR अभियान के बहिष्कार को लेकर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री ने पटवारियों की हड़ताल को लेकर कहा कि यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि धान खरीदी के लिए गिरदावरी का काम जरूरी है। वहीं उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का स्वभाव हमेशा विरोध करना है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि वर्तमान समय काफी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में धान खरीदी की तैयारियों के बीच गिरदावरी का काम करना भी आवश्यक है। अभी तक पटवारी संघ के साथ उनकी कोई बातचीत नहीं हो पाई है और न ही पटवारी संघ की ओर से बातचीत के लिए कोई आया है। मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार पर बेवजह आरोप न लगाए। वर्तमान सरकार कांग्रेस की तुलना में अधिक कीमत पर किसानों से धान खरीद रही है।
तहसीलदार निलंबित, कामकाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण में लापरवाही के मामले में तहसीलदार प्रमोद कुमार चंद्रवंशी के निलंबन को लेकर भी राजस्व मंत्री ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि निलंबन की कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम हेल्पलाइन आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य लोगों को घर बैठे उनकी समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराना है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे शिकायतों को गंभीरता से लें और समय पर उनका निराकरण करें।
SSR अभियान के बहिष्कार पर कांग्रेस को घेरा
SSR अभियान को लेकर कांग्रेस द्वारा किए गए बहिष्कार पर भी मंत्री टंकराम वर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग संबंधित क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची में क्यों होने चाहिए? ऐसे नाम हटाए जाने चाहिए और गलत तरीके से नाम जुड़ना उचित नहीं है। मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का स्वभाव हमेशा विरोध करना है और वह अपने इसी स्वभाव से लाचार है।</description><guid>20548</guid><pubDate>17-Oct-2026 3:54:10 pm</pubDate></item><item><title>दुर्ग में विकास कार्यों की समीक्षा: आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20547</link><description>रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग जिला मुख्यालय में अधिकारियों की बैठक लेकर विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बिजली, पानी, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के साथ जिले में संचालित विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता, समयबद्धता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि जिले के समग्र विकास के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग बढ़ाने के साथ मानवीय संवेदनाओं एवं जनहित को सर्वोपरि रखने को कहा।
आवास एवं राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश
जिले के प्रभारी सचिव श्री बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा पात्र हितग्राहियों को भूमि पट्टे एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा और बीबीजीआरवाई के अंतर्गत संचालित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालय निर्माण सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। उन्होंने तहसीलों और ग्राम पंचायतों में नामांतरण, बंटवारा तथा अन्य राजस्व प्रकरणों, विशेषकर एक वर्ष से लंबित मामलों का त्वरित और पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला पंचायत और नगरीय निकायों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए स्टडी-टूर और क्रॉस-लर्निंग विजिट आयोजित करने के निर्देश दिए।
स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
वन विभाग की समीक्षा के दौरान स्वामी आत्मानंद मॉडल कॉलेज, बोरी में पौधरोपण तथा तांदुला पार्क में नगर वन एवं हर्बल गार्डन की स्थापना जैसे नवाचारों की जानकारी दी गई। प्रभारी सचिव ने जिला शिक्षा अधिकारी को पीएमश्री सहित अन्य उत्कृष्ट विद्यालयों में साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, कचरा पेटी और उद्यान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पात्र गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
रैनबसेरों की सुविधाएं बेहतर बनाने कहा
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के कार्ड बनाने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही कुष्ठ रोग, सिकलसेल और टीबीमुक्त अभियान के अंतर्गत जारी जांच एवं उपचार कार्यों की समीक्षा की गई। प्रभारी सचिव श्री बोरा ने नगर निगम आयुक्तों को रैनबसेरों की सुविधाएं बेहतर बनाने तथा शहरी प्रधानमंत्री आवास क्षेत्रों में सामुदायिक भवन, बुजुर्गों के बैठने के लिए बेंच, बच्चों के लिए पार्क और बेहतर जल निकासी व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्री बोरा ने बैठक में सड़क निर्माण और अधोसंरचना विकास परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।
वन मंडलाधिकारी सी.पी. अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, एडीएम विरेन्द्र सिंह, भिलाई नगर निगम की आयुक्त सुरूचि सिंह, दुर्ग नगर निगम की आयुक्त लीना कोसम, रिसाली नगर निगम की आयुक्त मोनिका वर्मा और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी बैठक में मौजूद थे।
नारकोटिक्स नियंत्रण की भी समीक्षा की
दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने नारकोटिक्स नियंत्रण की समीक्षा के दौरान एनडीपीएस के मामलों, मादक पदार्थों की जब्ती और सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की। उन्होंने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने, तस्करी के नेटवर्क की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बैठक में बताया कि पिछले वर्ष एनडीपीएस के तहत 107 कार्रवाई की गई थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 157 हो गई है। इसी प्रकार गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 262 से बढ़कर 330 हो गई है। मादक पदार्थों की जब्ती का मूल्य भी पिछले वर्ष के 1.40 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर इस वर्ष 10.88 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। भिलाई-दुर्ग क्षेत्र के कुछ मोहल्लों और कुम्हारी के संवेदनशील इलाकों में अवैध नशा कारोबार पर निगरानी बढ़ाई गई है।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने स्कूलों, कॉलेजों और व्यावसायिक संस्थानों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा टोल-फ्री नंबर 1933 का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेंटिंग प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों और अन्य जनभागीदारी आधारित गतिविधियों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों एवं रोकथाम के उपायों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने पर जोर दिया। साथ ही नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, पुनर्वास और समय पर काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।</description><guid>20547</guid><pubDate>17-Oct-2026 1:30:10 pm</pubDate></item><item><title>Samsung Galaxy F70 5G की लॉन्च डेट का ऐलान, मिलेगा 50MP OIS कैमरा और sAMOLED डिस्प्ले</title><link>https://ramraj.co/technology.php?articleid=20546</link><description>Samsung भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन Samsung Galaxy F70 5G लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी ने फोन की लॉन्च डेट का ऐलान कर दिया है। इस स्मार्टफोन में 50 मेगापिक्सल का OIS सपोर्ट वाला कैमरा, sAMOLED डिस्प्ले और 5,000mAh की बैटरी जैसे फीचर्स मिलेंगे। फोन में Samsung का Exynos 1330 प्रोसेसर दिया जाएगा। लॉन्च के बाद यह स्मार्टफोन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart पर उपलब्ध होगा।
कंपनी ने फोन के डिजाइन और कई प्रमुख फीचर्स की जानकारी साझा की है। हालांकि, इसकी कीमत और रैम-स्टोरेज वेरिएंट का खुलासा अभी नहीं किया गया है।
Samsung Galaxy F70 5G Launch Date: कब होगा लॉन्च?
Samsung Galaxy F70 5G भारत में 18 अक्टूबर को लॉन्च होने वाला है। कंपनी ने इसके लिए एक माइक्रोसाइट भी लाइव की है, जहां फोन के डिजाइन और फीचर्स की जानकारी दी गई है।
यह स्मार्टफोन दो कलर ऑप्शन में आएगा:
Bold Black
Vivid Violet
लॉन्च के बाद फोन की बिक्री Flipkart के जरिए होने की जानकारी दी गई है। इसकी शुरुआती कीमत और सेल की तारीख का खुलासा होना अभी बाकी है।
Samsung Galaxy F70 5G Display: मिलेगा sAMOLED पैनल
Samsung Galaxy F70 5G में फ्लैट sAMOLED डिस्प्ले दिया जाएगा। इसकी स्क्रीन फुल HD+ रेजोल्यूशन सपोर्ट करेगी। डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass Victus मिलने की जानकारी दी गई है।
फोन की मोटाई 7.5mm बताई गई है। इसके फ्रंट में सेल्फी कैमरे के लिए वॉटरड्रॉप स्टाइल नॉच दिया गया है। पीछे की तरफ वर्टिकल कैमरा मॉड्यूल मिलेगा, जबकि फोन के निचले हिस्से में USB Type-C पोर्ट दिया जाएगा।
50MP OIS कैमरा से होगी फोटोग्राफी
फोटोग्राफी के लिए Samsung Galaxy F70 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया जाएगा, जो OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट करेगा। इससे फोटो खींचते समय हाथ हिलने के कारण होने वाले धुंधलेपन को कम करने में मदद मिल सकती है।
फोन के कैमरा सेटअप में ये सेंसर शामिल होंगे:
50MP प्राइमरी कैमरा, OIS सपोर्ट के साथ
5MP अल्ट्रावाइड कैमरा
2MP मैक्रो कैमरा
सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 13MP का फ्रंट कैमरा मिलेगा।
Exynos 1330 प्रोसेसर और 5,000mAh बैटरी
Samsung Galaxy F70 5G में कंपनी का Exynos 1330 प्रोसेसर दिया जाएगा। हालांकि, फोन की RAM और स्टोरेज के विकल्पों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बैटरी की बात करें तो इसमें 5,000mAh की बैटरी मिलेगी। यह 25W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी। बड़ी बैटरी के साथ यह फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल, वीडियो देखने और सोशल मीडिया चलाने वाले यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है।
Samsung Knox Security और AI फीचर्स भी मिलेंगे
इस स्मार्टफोन में Samsung Knox Security दी जाएगी, जो डिवाइस और निजी जानकारी की सुरक्षा में मदद करती है। इसके अलावा फोन में AI आधारित टूल भी मिलेंगे।
इनमें Circle to Search फीचर शामिल है। इसकी मदद से यूजर स्क्रीन पर किसी वस्तु, तस्वीर या टेक्स्ट को घेरकर उसके बारे में सीधे सर्च कर सकता है। फोन में Samsung का One UI इंटरफेस मिलेगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इसमें One UI का कौन-सा वर्जन दिया जाएगा।
Samsung Galaxy F70 5G के फीचर्स पर एक नजर
लॉन्च डेट: 18 अक्टूबर
डिस्प्ले: sAMOLED, फुल HD+ रेजोल्यूशन
प्रोसेसर: Samsung Exynos 1330
रियर कैमरा: 50MP + 5MP + 2MP
फ्रंट कैमरा: 13MP
बैटरी: 5,000mAh
चार्जिंग: 25W वायर्ड फास्ट चार्जिंग
डिस्प्ले प्रोटेक्शन: Gorilla Glass Victus
सिक्योरिटी: Samsung Knox
मोटाई: 7.5mm
कलर: Bold Black और Vivid Violet
बिक्री: Flipkart
Samsung Galaxy F70 5G खरीदना कितना फायदेमंद होगा?
Samsung Galaxy F70 5G में sAMOLED डिस्प्ले, OIS सपोर्ट वाला 50MP कैमरा, 5,000mAh बैटरी और AI फीचर्स जैसे विकल्प मिलेंगे। ये खूबियां इसे नए 5G स्मार्टफोन की तलाश कर रहे ग्राहकों के लिए एक संभावित विकल्प बनाती हैं।
हालांकि, फोन की कीमत, RAM-स्टोरेज वेरिएंट और वास्तविक कैमरा परफॉर्मेंस की जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी वैल्यू का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकेगा। अगर आप यह फोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो लॉन्च के दौरान सामने आने वाली कीमत और ऑफर्स पर नजर रखें।</description><guid>20546</guid><pubDate>17-Oct-2026 1:12:12 pm</pubDate></item><item><title>इंदौर अर्बन कॉन्क्लेव-2026: सीएम डॉ. मोहन का फोकस शहरों के भविष्य पर, जानें कैसे बदलेगी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की तस्वीर</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20545</link><description>भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहरी विकास के मॉडल, निवेश की संभावनाओं, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की शहरी जरूरतों पर फोकस कर रहे हैं। वे प्रदेश के विकास के लिए विशेषज्ञों, निवेशकों, स्टार्टअप्स और विभागों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करेंगे। इसमें मध्यप्रदेश को आगे ले जाने के लिए कई पहलुओं पर चर्चा होगी। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 28 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन होने जा रहा है। इसमें एक तरफ सीएम डॉ. यादव निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे, तो दूसरी तरफ नगरीय क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं, प्रस्तावित परियोजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बात होगी। इसी दौरान कई प्रोजेक्ट का शुभारंभ, भूमि-पूजन और लोकार्पण होंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश में निवेश, नवाचार, आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करना है। इसमें भाग लेने के लिए कई निवेशकों, स्टार्टअप्स और युवाओं को बुलाया गया है। इसमें भाग लेने वाले ugconclave.mp.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं।

गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों में जल राशि के सुदृढ़-वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रयुक्त जल के पुनः चक्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉन्क्लेव में उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्चक्रण विजन पर भी चर्चा होगी। इसका मुख्य उद्देश्य उपचारित जल का सुरक्षित-व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना, प्राकृतिक व ताजे जल स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता को कम करना, जल संरक्षण को नगरीय विकास की मुख्यधारा का अनिवार्य अंग बनाना है। इसके अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों, कृषि एवं उद्यानों की सिंचाई सहित विभिन्न गैर-पेयजल आवश्यकताओं में उपचारित जल के उपयोग को प्राथमिकता देने और प्रोत्साहित करने के सुदृढ़ प्रावधान जैसे विषयों पर भी मंथन होगा।
अहम विषय होंगे चर्चा में शामिल
कॉन्क्लेव में टियर-2 शहरों के सुनियोजित विकास पर विशेष चर्चाएं होंगी। इन चर्चाओं में घनत्व, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर), आवासीय पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारों, रेरा स्वीकृतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) जैसे विषय शामिल होंगे। इससे शहरों के विस्तार के साथ भूमि का बेहतर उपयोग, आवासीय सुविधाओं में सुधार और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बात पर जोर दे रहे हैं कि शहरों का जो भी विकास हो, वह निवेश अनुकूल, तकनीक आधारित और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप हो। इसलिए कॉन्क्लेव में नीतिगत सुधारों और आधुनिक विकास मॉडलों पर विचार कर शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं पर होगा मंथन
कॉन्क्लेव में अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख नगरीय विकास परियोजनाओं की भौतिक प्रगति, सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से जुड़े दूरगामी रणनीतिक पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव प्रदेश के शहरी परिदृश्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने, नगरीय विकास की भावी दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। अर्बन कॉन्क्लेव में अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए वित्तीय संस्थानों-बैंकों के साथ अनुबंध किए जाएंगे, संबंधित एजेंसियों को लेटर ऑफ अवॉर्ड प्रदान किए जाएंगे। अर्बन चैलेंज फंड के तहत प्रदेश के विभिन्न नगरों में संचालित और प्रस्तावित विकास कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 2,753.10 करोड़ रुपये है। इस वित्तीय नियोजन के माध्यम से इंदौर, उज्जैन और रीवा की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर की जलप्रदाय व्यवस्था के वितरण तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा सीवरेज नेटवर्क एवं उपचार संयंत्रों के व्यापक उन्नयन कार्य शामिल हैं। इसी श्रृंखला में धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में एकीकृत मंदिर क्षेत्र विकास की महत्वाकांक्षी परियोजना तथा रीवा नगर की सर्वसमावेशी जलप्रदाय योजना के कार्यों को धरातल पर उतारा जा रहा है।
युवाओं की भागीदारी
अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य नवाचार, आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप इकोसिस्टम से प्रदेश का विकास करना है। इसलिए इसमें इंवेस्टर्स के साथ-साथ स्टार्टअप्स और युवाओं को भाग लेने के लिए बुलाया गया है। जो भी इस कॉन्क्लेव में भाग लेना चाहते हैं वे ugconclave.mp.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश के शहरों में निवेश की संभावनाओं को विस्तार देने, विकास परियोजनाओं को गति देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, शहरी सुविधाओं में सुधार और पर्यावरण के अनुकूल विकास मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए साझा कार्ययोजना तैयार करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।</description><guid>20545</guid><pubDate>17-Oct-2026 12:59:15 pm</pubDate></item><item><title>सेवा की कहानी : सुनीता को रजिस्ट्री में मिली 3,940 रुपये की आर्थिक राहत, स्वतः नामांतरण से कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी भी हुई दूर</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20544</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ में संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को सरल, सुगम और किफायती बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधार आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सूरजपुर जिले की ग्रामीण क्षेत्र की गृहिणी श्रीमती सुनीता के लिए जमीन की रजिस्ट्री कराना अब पहले से अधिक सुविधाजनक और कम खर्चीला हो गया है। महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें 3,940 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। वहीं रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की सुविधा से उन्हें अलग से आवेदन करने और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। आर्थिक राहत के साथ समय की बचत ने उनके लिए संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सहज बना दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल और मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट, रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण और डिजिटल सेवाओं का विस्तार इन सुधारों में प्रमुख हैं। इन व्यवस्थाओं का लाभ हितग्राहियों तक किस प्रकार पहुंच रहा है, यह जानने के लिए विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं।
रजिस्ट्री में बचे 3,940 रुपये, घरेलू जरूरतों के लिए बनी सहूलियत
सेवा संकल्प अभियान के तहत अपना अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सुनीता ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिला क्रेता के लिए निर्धारित पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ मिला। इससे उनके 3,940 रुपये बच गए। ग्रामीण परिवेश से आने वाली गृहिणी श्रीमती सुनीता के लिए यह राशि महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में हुई बचत का उपयोग वे अपने परिवार की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में करेंगी।
राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित पात्र दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने से संपत्ति खरीदने वाली महिलाओं को आर्थिक राहत मिल रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन मिलने के साथ परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हो रहा है।
रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण, राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से मिली मुक्ति
श्रीमती सुनीता के लिए पंजीयन शुल्क में छूट के साथ स्वतः नामांतरण की सुविधा भी बड़ी राहत साबित हुई। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था और राजस्व कार्यालयों में जाना पड़ता था। अब ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। इससे उनके समय और प्रयास दोनों की बचत हुई।
पूर्व व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में 90 से 240 दिन तक का समय लग सकता था। नई व्यवस्था के अंतर्गत पंजीयन के बाद राजस्व अभिलेखों में क्रेता का नाम अद्यतन करने की प्रक्रिया को अधिक तेज और व्यवस्थित बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 42 हजार से अधिक स्वतः नामांतरण किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिली है।
पंजीयन सेवाओं में सुधार से महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा लाभ
वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को बढ़ावा देते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन भुगतान और स्वतः नामांतरण जैसी सुविधाओं से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया सरल हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को इन सुधारों का लाभ मिल रहा है।
सुनीता ने शासन के प्रति जताया आभार
श्रीमती सुनीता ने कहा कि पंजीयन शुल्क में छूट मिलने से उनके पैसे बचे और स्वतः नामांतरण की सुविधा से समय की भी बचत हुई। अब उन्हें जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से परेशान नहीं होना पड़ा। उन्होंने इन सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
सूरजपुर की श्रीमती सुनीता का अनुभव दर्शाता है कि पंजीयन विभाग के सुधारों का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। रजिस्ट्री में 3,940 रुपये की बचत और स्वतः नामांतरण की सुविधा उनके लिए आर्थिक राहत के साथ शासकीय सेवाओं में सुगमता का उदाहरण बन गई है।</description><guid>20544</guid><pubDate>17-Oct-2026 12:53:28 pm</pubDate></item><item><title>GPM में युवा उड़ान 2026 का आयोजन, युवाओं को शिक्षा, कौशल और राष्ट्र निर्माण के लिए किया प्रेरित</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20543</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के संकल्प में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मल्टीपर्पज स्कूल पेंड्रा के असेंबली हॉल में जिला स्तरीय युवा उड़ान 2026 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
  
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, कलेक्टर विजय दयाराम के. सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।
युवाओं की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प से बनेगा विकसित भारत : श्री तोमर
छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है और उनकी ऊर्जा, प्रतिभा, नवाचार तथा कठिन परिश्रम से ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प साकार हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि युवा उड़ान कार्यक्रम का शुभारंभ 31 अगस्त 2026 को बीजापुर जिले से किया गया था। इसी क्रम में आज 21वें जिले के रूप में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में इसका आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करना, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और उन्हें देश एवं प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
श्री तोमर ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक जानकारियों और अफवाहों से सावधान रहने तथा किसी भी सूचना की सत्यता जांचने के बाद ही उस पर विश्वास करने की अपील की। उन्होंने युवाओं को अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा एवं तकनीक का सदुपयोग करने का संदेश दिया।
श्री तोमर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं को पहचानकर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की सहभागिता आवश्यक : विधायक श्री मरपच्ची
मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं की सक्रिय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने युवाओं से शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपनी प्रतिभा, परिश्रम और सकारात्मक सोच के माध्यम से न केवल अपना भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
शिक्षा और खेल के क्षेत्र में जिले के युवाओं ने बढ़ाया गौरव : कलेक्टर
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के युवाओं में प्रतिभा और आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। जिले के युवाओं ने शिक्षा और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का गौरव बढ़ाया है।
उन्होंने युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, लक्ष्य निर्धारित करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने कहा कि युवाओं को उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करते हुए अपने कौशल और क्षमताओं का निरंतर विकास करना चाहिए। राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक युवा की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके सामूहिक प्रयासों से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।
नुक्कड़ नाटक से यातायात सुरक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) पेंड्रा के विद्यार्थियों ने प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से यातायात नियमों का पालन करने, सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनने, नशे से दूर रहने और युवा राजवीर योजना के संबंध में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बताया गया कि यातायात नियमों का पालन कर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है। वहीं नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
साइबर अपराधों से बचाव के लिए युवाओं को किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। उन्हें अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, संदिग्ध फोन कॉल से सावधान रहने, व्यक्तिगत एवं बैंकिंग संबंधी जानकारी गोपनीय रखने तथा सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की सलाह दी गई।
युवाओं को बताया गया कि डिजिटल तकनीक का सुरक्षित एवं जागरूक उपयोग आज के समय की आवश्यकता है। साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता अपनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य डिजिटल अपराधों से बचा जा सकता है।
वन नेशन, वन इलेक्शन की अवधारणा पर व्याख्यान
कार्यक्रम में डॉ. राजेश कुमार कुशवाहा ने वन नेशन, वन इलेक्शन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने युवाओं को इस अवधारणा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इस दौरान युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, नागरिक जिम्मेदारियों और शासन व्यवस्था के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।
जिला स्तरीय युवा उड़ान 2026 कार्यक्रम युवाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने, सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने और विकसित भारत @2047 के संकल्प में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बना। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा, अनुशासन, परिश्रम, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के बल पर वे विकसित छत्तीसगढ़ तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</description><guid>20543</guid><pubDate>17-Oct-2026 12:12:59 pm</pubDate></item><item><title>प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने एसटीपी प्लांट और पीएमई-बस डिपो का किया अवलोकन</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20542</link><description>रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग के उरला में निर्माणाधीन एसटीपी प्लांट और प्रधानमंत्री ई-बस योजना के डिपो का अवलोकन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से एसटीपी प्लांट के कार्यों की अद्यतन प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इसके कार्यों में तेजी लाते हुए काम जल्दी पूरा करने को कहा।
  
श्री बोरा ने अगले महीने नवम्बर में दुर्ग-भिलाई में प्रारंभ होने जा रहे ई-बस सेवा अंतर्गत बस डिपो का अवलोकन किया और आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्हों ने डिपो में चार्जिंग पाइंट लगाने के कार्य शीघ्र पूर्ण करने और स्थल में आवश्यक मरम्मत कराने के निर्देश दिये। दुर्ग नगर निगम की आयुक्त लीना कोसम, एसडीएम प्रफुल्ल गुप्ता, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और अधीक्षण अभियंता सुनील सिंह भी इस दौरान मौजूद थे।</description><guid>20542</guid><pubDate>17-Oct-2026 11:17:02 am</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री निवास में गरबा महोत्सव की धूम, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा आयोजन</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20541</link><description>रायपुर। मुख्यमंत्री निवास आज नवरात्रि की भक्ति, गरबा की लय और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत और गरबा की ताल के बीच पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मां दुर्गा की आराधना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित माताओं-बहनों, बेटियों एवं सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना, श्रद्धा और भक्ति के साथ नारी सम्मान का महापर्व है। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। यह पर्व हमें मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।
उन्होंने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति होने के साथ हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। गुजरात की धरती से निकली गरबा की परंपरा आज पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाती है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता के भाव को और मजबूत करते हैं।
हमारे पर्व समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत के पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये परिवार और समाज को जोड़ने, आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि आज गरबा देश-दुनिया में भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी गरबा के प्रति उत्साह लगातार बढ़ा है। बड़ी संख्या में माताओं-बहनों और बेटियों की सहभागिता इस उत्सव को और विशेष बनाती है।
महिला सशक्तीकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नारी शक्ति का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल भाव है और महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक संबल मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह हमारी मातृशक्ति के परिश्रम, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।
माता कौशल्या से मां दंतेश्वरी तक, छत्तीसगढ़ की धरती शक्ति आराधना की पावन भूमि
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है और यहां आदिशक्ति की आराधना की समृद्ध परंपरा सदियों से चली आ रही है। बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी सहित अनेक देवी धाम प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दंतेवाड़ा से डोंगरगढ़ और रतनपुर से चंद्रपुर तक माता के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। पूरा छत्तीसगढ़ शक्ति की आराधना में लीन दिखाई देता है। ये शक्तिपीठ केवल हमारी आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान के भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास भी, विरासत भी की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
विकसित छत्तीसगढ़ में गुजराती समाज की महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री श्री साय ने गुजराती समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुजराती समाज ने अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, सेवा भावना और सामाजिक एकता से देश के विकास में विशिष्ट पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी गुजराती समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव सभी समाजों और संस्कृतियों को आत्मीयता से अपनाने की रही है। गुजराती समाज ने भी छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। विकसित भारत के निर्माण के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में समाज की यह सहभागिता महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देती है। माता रानी के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए, यही कामना है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विभिन्न आयोग-मंडलों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतेश गांधी, पूर्व विधायक एवं एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष जयंती पटेल, मितुल कोठारी, नितिन डोलकिया, महेंद्र कोडियार, बाबू भाई पटेल, अशोक पटेल, मुकेश शाह, गौरंग काचा, कीर्ति व्यास, राजेंद्र फौजदार सहित गुजराती समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।</description><guid>20541</guid><pubDate>16-Oct-2026 10:18:42 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता एथलीट अनिमेष कुजूर ने की मुलाकात</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20540</link><description>रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाने वाले एथलीट अनिमेष कुजूर ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री कुजूर को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल खेल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर की माटी के बेटे अनिमेष कुजूर ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। भारतीय टीम द्वारा राष्ट्रीय रिकॉर्ड में सुधार करना इस उपलब्धि को और विशेष बनाता है।
मुख्यमंत्री ने श्री कुजूर से एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन, प्रशिक्षण और खेल यात्रा के संबंध में आत्मीय चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना यह साबित करता है कि प्रतिभा को उचित अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले तो हमारे युवा दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस्तर से सरगुजा और जशपुर तक हमारे जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसी प्रतिभाओं की पहचान शुरुआती स्तर पर हो और उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास को युवाओं के सर्वांगीण विकास से जोड़कर आगे बढ़ रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक पदक जीतें तथा प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष जैसे खिलाड़ियों की सफलता प्रदेश में विकसित हो रही नई खेल संस्कृति को और मजबूत करती है। उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी में यह विश्वास जगाती हैं कि अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
अनिमेष कुजूर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी समर्पण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहें और आने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में देश के लिए और पदक जीतें।
जशपुर के छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
उल्लेखनीय है कि अनिमेष कुजूर मूलतः जशपुर जिले के कुनकुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुईटांगर के निवासी हैं। उन्होंने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की 4100 मीटर मिक्स्ड रिले स्पर्धा में भारतीय टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अर्जित किया। भारतीय टीम ने इस स्पर्धा में 41.06 सेकंड का समय दर्ज करते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी सुधार किया।
अनिमेष की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का अवसर है। जशपुर के ग्रामीण अंचल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने तक की उनकी यात्रा प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर अनिमेष कुजूर के पिता अमृत कुजूर, माता रीना कुजूर सहित एथलेटिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा खेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।</description><guid>20540</guid><pubDate>16-Oct-2026 9:21:28 pm</pubDate></item><item><title>आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही सीएम हेल्पलाइन 1076 : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20539</link><description>रायपुर। आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, संवेदनशील और प्रभावी समाधान सुशासन की पहली कसौटी है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 कम समय में ही प्रदेशवासियों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। राशन, पेंशन, बिजली, आवास, पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। नागरिक घर बैठे 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आज नवा रायपुर स्थित सीबीडी बिल्डिंग में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 के कार्यालय पहुंचकर इसके कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से लिए जा रहे फीडबैक तथा विभागवार और जिलेवार प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से जिलों में शिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न जिलों के शिकायतकर्ताओं से स्वयं बातचीत कर जाना कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं। नागरिकों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद में अपने अनुभव साझा किए और शिकायतों के निराकरण पर संतुष्टि व्यक्त की।
2.31 लाख शिकायतें दर्ज, 88.85 प्रतिशत का हो चुका निराकरण
समीक्षा बैठक में बताया गया कि 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सीएम हेल्पलाइन 1076 पर कुल 2 लाख 31 हजार 850 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 2 लाख 5 हजार 996 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 25 हजार 854 शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार अब तक प्राप्त कुल शिकायतों में से 88.85 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने हेल्पलाइन के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पिछली समीक्षा में दिए गए निर्देशों पर भी अच्छा कार्य हुआ है। इस व्यवस्था को निरंतर बेहतर बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का निराकरण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिक को वास्तविक रूप से राहत मिले और वह समाधान से संतुष्ट हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सबसे महत्वपूर्ण है। शिकायत बंद करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित नागरिक की समस्या वास्तव में दूर हुई है। नागरिकों से मिलने वाला फीडबैक ही इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता का आधार होना चाहिए।
एक शिकायत से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत, बदला गया खराब ट्रांसफॉर्मर
मुख्यमंत्री श्री साय ने समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के शिकायतकर्ता श्री दमन साहू से सीधे बातचीत की। श्री साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे गांव के लगभग 80 से 85 परिवार प्रभावित थे। स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत दर्ज होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। श्री साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब गांव में बिजली व्यवस्था सामान्य है और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित अधिकारियों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सीधे आम नागरिक के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसी शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिकायत का संवेदनशीलता से समाधान कई परिवारों के जीवन में राहत ला सकता है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के दस दिनों के भीतर मिली पीएम आवास की लंबित किस्त
जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड निवासी वीरेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उनके आवास निर्माण की दूसरी किस्त मिलने में विलंब हो रहा था। राशि नहीं मिलने से आवास निर्माण का काम भी प्रभावित हो रहा था।
उन्होंने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज कराई। शिकायत के लगभग दस दिनों के भीतर उनके बैंक खाते में आवास की दूसरी किस्त के रूप में 55 हजार रुपए की राशि प्राप्त हो गई। श्री यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि राशि मिलने से अब वे अपने आवास का निर्माण आगे बढ़ा पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। पात्र हितग्राहियों को योजना की किस्त समय पर मिलनी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे प्रकरणों में विशेष संवेदनशीलता बरतने को कहा।
नौ महीने से रुकी थी पेंशन, 1076 पर शिकायत के बाद मिला लाभ
मुंगेली जिले के ग्राम करही निवासी तोरण साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी माताजी को लगभग नौ महीने से पेंशन की राशि नहीं मिल रही थी। पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग द्वारा प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी माताजी की पेंशन पुनः प्रारंभ हुई और लंबित राशि का भी भुगतान किया गया। श्री साहू ने समस्या का समाधान होने पर संतुष्टि जताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन वृद्धजनों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल है। पात्र हितग्राहियों को इसके लिए परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
आम नागरिक के लिए छोटी समस्या भी हो सकती है बड़ी परेशानी : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासन-प्रशासन की दृष्टि में कोई प्रकरण सामान्य हो सकता है, लेकिन संबंधित नागरिक के लिए वही समस्या बहुत महत्वपूर्ण होती है। राशन कार्ड में सुधार, पेंशन का भुगतान, बिजली आपूर्ति, पेयजल, आवास की किस्त या राजस्व संबंधी छोटे से कार्य में देरी भी किसी परिवार को लंबे समय तक परेशान कर सकती है।
उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य यही है कि नागरिक की आवाज सीधे शासन तक पहुंचे और संबंधित विभाग उसकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा में समाधान करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से मुलाकात के दौरान भी सीएम हेल्पलाइन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अनेक नागरिक बताते हैं कि 1076 पर शिकायत करने के बाद उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने का भी माध्यम है।
अच्छा काम करने वाले अधिकारियों की सराहना, लापरवाही पर जवाबदेही हो सुनिश्चित
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन-प्रशासन में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों के कारण योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में लापरवाही या नागरिकों की समस्याओं के प्रति गंभीरता की कमी पूरे प्रशासन की छवि को प्रभावित करती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को यह समझना होगा कि जनता की समस्या का समाधान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिले और शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी अथवा लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।
शिकायतों के आंकड़े बनें नागरिक सेवाओं में सुधार का आधार
मुख्यमंत्री श्री साय ने समीक्षा के दौरान हेल्पलाइन पर कॉल रिसीव होने की स्थिति, शिकायतों के पंजीयन, विभिन्न स्तरों पर उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने की व्यवस्था तथा विभागवार शिकायतों के विश्लेषण की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को केवल व्यक्तिगत प्रकरणों के रूप में न देखा जाए। शिकायतों के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण कर यह पता लगाया जाए कि किस विभाग, योजना, सेवा या क्षेत्र से संबंधित शिकायतें बार-बार आ रही हैं। यदि एक ही प्रकृति की शिकायतें बड़ी संख्या में प्राप्त हो रही हैं, तो उनके मूल कारण की पहचान कर व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के साथ शासन की नीतियों और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक सिस्टम के रूप में भी काम करेगी।
बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक पहुंचे 1076 की सुविधा
मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के जिलों से प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और उनके निराकरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए सीएम हेल्पलाइन विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी समस्या लेकर जिला अथवा राजधानी स्तर के कार्यालयों तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन 1076 की जानकारी अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाए। ग्राम पंचायतों, उचित मूल्य दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटरों में वॉल पेंटिंग सहित विभिन्न माध्यमों से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। स्थानीय स्तर पर भी नागरिकों को बताया जाए कि वे किस प्रकार हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को दूर कर और मजबूत होगी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन अभी अपने प्रारंभिक दौर में है। इसलिए शुरुआती अनुभवों से सीखते हुए तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को लगातार दूर किया जाए। कॉल रिस्पॉन्स, शिकायत पंजीयन, संबंधित विभाग को शिकायत भेजने, निर्धारित समय-सीमा में निराकरण और शिकायतकर्ता से फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन ऐसी होनी चाहिए, जिसमें नागरिक को शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक सहज अनुभव मिले। तकनीक का उद्देश्य प्रक्रियाओं को जटिल बनाना नहीं, बल्कि शासन को नागरिकों के और करीब लाना है।
जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना सरकार का दायित्व है और सीएम हेल्पलाइन 1076 इस दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास हो कि उसकी बात शासन तक पहुंचेगी, उसे सुना जाएगा और उसकी जायज समस्या का समय पर समाधान होगा।
उन्होंने कहा कि शासन और जनता के बीच विश्वास जितना मजबूत होगा, सुशासन की व्यवस्था उतनी ही प्रभावी होगी। सीएम हेल्पलाइन इसी विश्वास की कड़ी को मजबूत कर रही है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है और इसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, विभिन्न विभागों के सचिव, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।</description><guid>20539</guid><pubDate>16-Oct-2026 9:11:45 pm</pubDate></item><item><title>मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की बैठक संपन्न</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20538</link><description>रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की एक उच्चस्तरीय महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में जल जीवन मिशन के तहत तैयार बुनियादी ढांचे के निर्माण के बाद अब इसके सुचारू संचालन, संधारण (रखरखाव) और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की सतत आपूर्ति और जल संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने राज्य में स्थित सभी आदिवासी बसाहटों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। बैठक में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

मुख्य सचिव ने राज्य में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पेयजल की शुद्धता की निरंतर एवं कड़ाई से जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत कार्ययोजना और रणनीति पर गहन चर्चा की गई। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय बसाहटों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को लेकर संसाधनों और रूपरेखा की समीक्षा की गई। भूजल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण व सुरक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
राज्य में संचालित सोलर व रेट्रोफिटिंग तथा बल्क वॉटर योजनाओं की वर्तमान प्रगति एवं वित्तीय भुगतानों की विस्तृत समीक्षा की गई। जल जीवन मिशन की गतिविधियों को तकनीकी एवं प्रबंधकीय रूप से सुदृढ़ करने हेतु जिला तकनीकी इकाई तथा परियोजना प्रबंधन इकाई की नियुक्ति को लेकर अहम निर्णय लिए गए।
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था हेतु प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। विशेष क्षेत्रों एवं बसाहटों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की गई। ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। 12 ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त निविदाओं की दरों की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। जलापूर्ति योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव हेतु (ऑपरेशन्स एंड मेंटेनेंस पॉलिसी) के नवीन ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में जल-जीवन मिशन के तहत कर्मचारियों का प्रशिक्षण तथा जनभागीदारी को मजबूत करने पर बल दिया गया। योजनाओं के दीर्घकालिक और सफल संचालन के लिए ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय समुदायों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए अधिकारियों को दिए गए है।
बैठक में वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, जल जीवन मिशन के मिशन डायरेक्टर रिमिजियुस एक्का सहित महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्कूल शिक्षा सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।</description><guid>20538</guid><pubDate>16-Oct-2026 7:24:29 pm</pubDate></item><item><title>नई सड़कों और पुलों से विभिन्न क्षेत्रों के बीच बारहमासी संपर्क होगा मजबूत : उप मुख्यमंत्री अरुण साव</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20537</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ में मजबूत और सुगम सड़क नेटवर्क के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़कों और पुलों के 18 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों के लिए कुल 243 करोड़ 81 लाख 11 हजार रुपए की निविदाओं को मंजूरी प्रदान की है। इनमें 12 पुल और 6 सड़क निर्माण एवं उन्नयन के कार्य शामिल हैं। निविदाओं की स्वीकृति के बाद अब चयनित निर्माण एजेंसियों को शीघ्र कार्यादेश जारी कर इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के विकास को नई ऊंचाई देने के साथ प्रदेश के हर क्षेत्र को प्रगति की मुख्यधारा से जोड़ना है। सड़कें और पुल केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि और सामाजिक बदलाव के मजबूत आधार हैं। लगभग 244 करोड़ रुपए के इन कार्यों के पूरा होने से संबंधित क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुलेंगे। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ ही लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच अधिक आसान होगी। विशेष रूप से दूरस्थ, ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मजबूत कनेक्टिविटी विकास की गति को और तेज करेगी।
बरसात की समाप्ति के बाद शुरू हुए वर्किंग सीजन का अधिकतम उपयोग करते हुए लोक निर्माण विभाग नए निर्माण कार्यों की निविदाओं को तेजी से स्वीकृति दे रहा है। पिछले महीने ही सड़कों और पुलों के 24 कार्यों के लिए 672 करोड़ रुपए से अधिक की निविदाओं को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद अब करीब 244 करोड़ रुपए के 18 नए कार्यों की निविदाओं को स्वीकृति मिलने से प्रदेश में सड़क और पुल अधोसंरचना के विस्तार को और गति मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रदेश में सड़कों और पुलों के निर्माण को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। इन 18 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की निविदाओं को मंजूरी देने के बाद अब इन्हें शीघ्र शुरू कर निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने पर विशेष जोर रहेगा। उन्होंने संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को चयनित निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों को तत्परता से कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।
श्री साव ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नदी-नालों पर नए उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण से स्थानीय लोगों को आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी और विभिन्न क्षेत्रों के बीच बारहमासी संपर्क मजबूत होगा। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की सड़कें मजबूत हों, पुल सुरक्षित हों और नागरिकों का सफर सुगम एवं सुविधाजनक बने।
निविदा समिति ने 243.81 करोड़ रुपए के कार्यों को दी मंजूरी
लोक निर्माण विभाग की निविदा समिति की 12 अक्टूबर को आयोजित बैठक में इन 18 कार्यों की निविदाओं को मंजूरी प्रदान की गई। विभाग ने सभी संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को अनुबंधित कार्यों का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित करने तथा निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत कार्यों को किसी अन्य एजेंसी को सबलेट नहीं किया जा सकेगा और कार्य संपादन के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी मान्य नहीं होगी। कार्यपालन अभियंताओं को अनुबंधित समयावधि में कार्य पूर्ण कराने तथा प्रशासकीय स्वीकृति एवं उपलब्ध आबंटन की सीमा में अनुबंध की शर्तों के अनुरूप कार्य संपादित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जांजगीर-चांपा और सूरजपुर में सड़कों का होगा सुदृढ़ीकरण
स्वीकृत सड़क कार्यों में जांजगीर-चांपा जिले के देवरी-तनौद-भुईगांव-शुक्लाभाठा-ससहा मार्ग के 17.40 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण शामिल है। इसके लिए 31 करोड़ 7 लाख 83 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है। सूरजपुर जिले में रिंग रोड के 16.85 किलोमीटर हिस्से के सुदृढ़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 16 करोड़ 8 लाख 59 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी मिली है।
रायपुर जिले में समोदा-बनरसी-तुलसी मार्ग के 8.20 किलोमीटर हिस्से में पुल-पुलियों सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 40 लाख 32 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है। बेमेतरा जिले में 9.20 किलोमीटर लंबे बहिंगा-तिवरैया-सिमगा पहुंच मार्ग के पुल-पुलियों सहित निर्माण के लिए 10 करोड़ 77 लाख 97 हजार रुपए तथा मुख्य जिला मार्ग मदराली-कटई-बेलटुकरी में पुल-पुलियों सहित 10.80 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 11 करोड़ 38 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है।
रायपुर में फुण्डहर चौक पर बनेगा ओव्हरपास, रायपुरा में सर्विस रोड होगी चौड़ी
राजधानी रायपुर में यातायात को अधिक सुगम बनाने के लिए भी दो महत्वपूर्ण कार्यों को मंजूरी दी गई है। वीआईपी रोड के फुण्डहर चौक पर ओव्हरपास निर्माण के लिए 29 करोड़ 80 लाख 12 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है। वहीं रिंग रोड नंबर-1 (एनएच-30) पर रायपुरा चौक फ्लाईओवर के दोनों ओर 3.66 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड के चौड़ीकरण के लिए 14 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है। इन कार्यों से राजधानी के महत्वपूर्ण मार्गों पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इन्द्रावती नदी पर 36.06 करोड़ रुपए से बनेगा उच्च स्तरीय पुल
बस्तर अंचल में संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए भी कई महत्वपूर्ण पुलों की निविदाओं को स्वीकृति मिली है। बीजापुर जिले में कुटरू से गुटमांगी मार्ग पर इन्द्रावती नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 36 करोड़ 5 लाख 75 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है।
बस्तर जिले में चंदेला-धर्माबेड़ा से अमलीधारा मार्ग पर भंवरडीह नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 12 करोड़ 74 लाख 95 हजार रुपए तथा बारसूर-लोहंडीगुड़ा-जगदलपुर मार्ग पर मांढेर नाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 10 करोड़ 98 लाख 39 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है।
जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से स्वीकृत छिन्दनार-कौरगांव मार्ग पर हान्दावाड़ा नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 5 करोड़ 73 लाख एक हजार रुपए की निविदा को भी मंजूरी दी गई है। इन पुलों के निर्माण से वनांचल के अनेक गांवों की बारहमासी कनेक्टिविटी मजबूत होगी और स्थानीय लोगों का आवागमन अधिक सुगम होगा।
राजनांदगांव, कोंडागांव, केसीजी और कांकेर में भी बनेंगे नए पुल
राजनांदगांव जिले में महाराजपुर से बरटोला मार्ग पर सूखा नाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 7 करोड़ 79 लाख 60 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है। कोंडागांव जिले में माकड़ी-हीरापुर मार्ग पर कलीबेड़ा नाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 7 करोड़ 35 लाख 45 हजार रुपए तथा परेदा-कोंगुड मार्ग पर परौदा नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 8 करोड़ 84 लाख 65 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के खैरागढ़-अकरजन मार्ग पर मोती नाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 6 करोड़ 77 लाख 12 हजार रुपए की निविदा मंजूर हुई है। कांकेर जिले में राजनांदगांव-बैलाडीला मार्ग पर निब्रा (मेढकी) नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 5 करोड़ 96 लाख 55 हजार रुपए तथा भानुप्रतापपुर-पखांजूर मार्ग पर पासंगी नाला में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 5 करोड़ 50 लाख 30 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी गई है।
सरगुजा जिले में दाहीडांड से सोनवरसा मार्ग पर मछली नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 7 करोड़ 93 लाख 17 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सड़क और पुल जैसी बुनियादी अधोसंरचनाओं का विस्तार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में भी मजबूत कनेक्टिविटी विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है। नई सड़कें और पुल बनने से लोगों का सफर आसान होने के साथ कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने, बच्चों को शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने, मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने और युवाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के अवसर भी बढ़ेंगे।</description><guid>20537</guid><pubDate>16-Oct-2026 7:06:30 pm</pubDate></item><item><title>किसानों की सुविधा सर्वोपरि, आगामी धान खरीदी के लिए समय रहते पूरी करें सभी तैयारियां : खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20536</link><description>रायपुर। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा है कि आगामी धान खरीदी के दौरान किसानों की सुविधा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को पंजीयन और टोकन प्राप्त करने से लेकर खरीदी केंद्र में धान विक्रय तक किसी भी स्तर पर परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं। उन्होंने अधिकारियों को धान खरीदी केंद्रों में बारदाना, इलेक्ट्रॉनिक तौल, बिजली, पेयजल सहित किसानों की सुविधा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
खाद्य मंत्री श्री बघेल की अध्यक्षता में आज आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की तैयारियों, कस्टम मिलिंग, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्यान्न भंडारण एवं परिवहन सहित विभागीय योजनाओं और गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी होनी चाहिए। खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों में आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं की उपलब्धता का परीक्षण कर कमियों को दूर किया जाए।
धान खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधा का रखें विशेष ध्यान
मंत्री श्री बघेल ने कहा कि खरीदी केंद्र तक पहुंचने वाले किसान को अनावश्यक प्रतीक्षा अथवा असुविधा का सामना न करना पड़े। टोकन व्यवस्था सुचारु रखी जाए और किसानों को प्रक्रिया से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। धान खरीदी से जुड़े अधिकारी अपने-अपने स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा करें और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने खरीदी केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में बारदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि बारदाने की कमी के कारण खरीदी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नए धान खरीदी केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक माप-तौल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी केंद्रों में बिजली, पेयजल एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहें।
खाद्य मंत्री ने कस्टम मिलिंग की स्थिति की समीक्षा करते हुए इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों अथवा केंद्रों में धान के उठाव या कस्टम मिलिंग से संबंधित समस्या सामने आ रही है, वहां वास्तविक स्थिति का आकलन कर समयबद्ध समाधान किया जाए। धान खरीदी, उठाव और कस्टम मिलिंग के बीच बेहतर समन्वय रखा जाए, जिससे पूरी व्यवस्था निर्बाध रूप से संचालित हो सके।
प्रदेश के 2.74 करोड़ लोगों तक पहुंच रही खाद्य सुरक्षा
बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 83.33 लाख राशन कार्ड प्रचलित हैं, जिनमें 274.04 लाख सदस्य पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 की अनुमानित 3.08 करोड़ आबादी के आधार पर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का कवरेज लगभग 89 प्रतिशत है।
मंत्री श्री बघेल ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली जरूरतमंद परिवारों की खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उचित मूल्य दुकानों तक खाद्यान्न की समयबद्ध आपूर्ति और हितग्राहियों को उनकी पात्रता के अनुरूप निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर खाद्यान्न की उपलब्धता अथवा वितरण में व्यवधान नहीं आना चाहिए।
उन्होंने सभी उचित मूल्य दुकानों में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। खाद्य मंत्री ने पीडीएस के लिए चावल का परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों द्वारा उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न तौलकर सौंपने की व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए, ताकि उचित मूल्य दुकानों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न मिले और पात्र हितग्राहियों तक पूरा राशन पहुंचे।
एनएफएसए के तहत 57.16 लाख राशन कार्ड
विभागीय आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत प्रदेश में 57.16 लाख राशन कार्ड प्रचलित हैं, जिनसे 198.16 लाख सदस्य जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत 26.17 लाख राशन कार्डों में 75.87 लाख सदस्य पंजीकृत हैं।
प्रदेश में श्रेणीवार 15.80 लाख अंत्योदय राशन कार्ड, 58.65 लाख प्राथमिकता राशन कार्ड, 8.43 लाख सामान्य राशन कार्ड, 0.28 लाख निराश्रित राशन कार्ड तथा 0.17 लाख निःशक्तजन राशन कार्ड प्रचलित हैं। सभी श्रेणियों को मिलाकर राज्य में कुल 83.33 लाख राशन कार्डों के माध्यम से 2.74 करोड़ से अधिक लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जोड़ा गया है।
खाद्य मंत्री श्री बघेल ने अधिकारियों से कहा कि खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पूरी पारदर्शिता और सुगमता से पहुंचना चाहिए। धान खरीदी से लेकर राशन वितरण तक विभाग की व्यवस्थाओं में किसानों और आम नागरिकों की सुविधा को केंद्र में रखकर कार्य किया जाए। उन्होंने मैदानी स्तर पर सतत निगरानी और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया।
बैठक में खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक फरिहा आलम, छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउस के संचालक आशीष टिकरीहा, संचालक माप-तौल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</description><guid>20536</guid><pubDate>16-Oct-2026 5:53:09 pm</pubDate></item><item><title>CM डॉ मोहन के आश्वासन के बाद भारतीय मजदूर संघ ने स्थगित किया आंदोलनः आउटसोर्स-ठेका कर्मचारियों के लिए निगम गठन पर बनी सहमति</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20535</link><description>भोपाल। मध्य प्रदेश में भारतीय मजदूर संघ (BMS) और राज्य सरकार के बीच बनी सहमति के बाद कर्मचारियों के आंदोलन टल गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक और मांगों पर सकारात्मक चर्चा के बाद भारतीय मजदूर संघ ने आगामी 26 अक्टूबर को होने वाले अपने प्रस्तावित आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया है। सरकार ने एक महीने के भीतर सभी मांगों का समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
उत्तर प्रदेश की तर्ज पर निगम या मंडल गठन पर सहमति
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में भारतीय मजदूर संघ ने अपने विभिन्न मुद्दों और समस्याओं को लेकर कुल 79 मांगें रखीं। बैठक के दौरान एक बड़ा निर्णय लेते हुए सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों के लिए अलग से मंडल या निगम बनाने पर सहमति व्यक्त की है।
27 अक्टूबर से शुरू होंगी विभागवार बैठकें
कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और मांगों पर ठोस रूप से विचार करने के लिए सरकार ने विभागवार बैठकें तय की हैं। यह बैठकें 27 अक्टूबर से शुरू होकर 17 नवंबर तक चलेंगी, जिनमें संभागवार और विभागवार चर्चा कर समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।
27 अक्टूबर: स्कूल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग
2 नवंबर: स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग
3 नवंबर: पंचायत तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग
10 नवंबर: कृषि और मछुआ कल्याण विभाग
13 नवंबर: श्रम विभाग
16 नवंबर: पीडब्ल्यूडी (PWD), पीएचई (PHE) और ऊर्जा विभाग
17 नवंबर: परिवहन और राजस्व विभाग

दो महीने के लिए आंदोलन स्थगित
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप गुर्जर ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने और एक महीने के भीतर उनका समाधान निकालने का आश्वासन दिए जाने के बाद, संघ ने फिलहाल अपना 26 अक्टूबर का आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों आउटसोर्स और नियमित कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।</description><guid>20535</guid><pubDate>16-Oct-2026 5:44:21 pm</pubDate></item><item><title>दूरस्थ वनांचलों में विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने की तैयारी तेज, मुख्य सचिव ने की समीक्षा</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20534</link><description>रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन की महत्वकांक्षी कार्यक्रम नियद नेल्ला-नार योजना 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को सीधे 31 व्यक्तिगत और 14 सामुदाियक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए कार्ययोजना के तहत कार्य किया जा रहा है। नियद-नेल्ला-नार 2.0 के तहत दूरस्थ वनांचल और पूर्व नक्सल प्रभावित 10 जिला- बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, कोण्डागांव, गरियाबंद, मोहला-मानपुर, अम्बागढ़ चौकी और छुईखदान शामिल है।
मुख्य सचिव ने 10 जिलों के दूरस्थ वनांचल एवं पूर्व नक्सल प्रभावित ग्रामों में रहने वाले परिवारों तक व्यक्तिगत हितग्राही मूलक योजनाएं जैसे- मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन-सक्रिय नल, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री जन-धन योजना शामिल है। इसी प्रकार किसान क्रेडिट कार्ड, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, जनधन योजना, व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टा, श्रम कार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पोषण आहार, टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, स्कूली छात्रों को मध्यान्ह भोजन-गणवेश-पाठ्य पुस्तक, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूूएस ई-प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, जननी सुरक्षा, वृद्धावस्था/विधवा/दिव्यांगता पेंशन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और उज्ज्वला योजना जैसी कुल 31 योजनाएं शामिल हैं। इसी तरह से 14 सामुदायिक योजना जैसे- पक्की सड़कें, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी, मोबाइल टॉवर, बैंकिंग सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं योजनाबद्ध ढंग से पहुंचायी जा रही है। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए है कि योजनाओं का लाभ सभी हितग्राहियों को समय-सीमा के अंदर पहुंचायें। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी तालमेल और समन्वय स्थापित कर मिशन मोड पर काम करने के लिए कहा है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, खनिज साधन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबंधित जिलों के कलेक्टर और अन्य विभागीय जिला अधिकारी भी शामिल हुए।</description><guid>20534</guid><pubDate>16-Oct-2026 5:32:48 pm</pubDate></item><item><title>उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का सख्त रुख, प्रधानमंत्री आवास निर्माण में अनियमितता पर दो ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20533</link><description>रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के आवास निर्माण में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही और हितग्राहियों के साथ धोखाधड़ी को लेकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना पूरा करने की महत्वपूर्ण योजना है। इसमें किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या हितग्राहियों के हक की राशि का दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवास निर्माण में कोताही बरतने और गरीबों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास मिले। विशेष रूप से दूरस्थ वनांचलों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गरीबों के आवास निर्माण के लिए स्वीकृत राशि पर केवल हितग्राहियों का अधिकार है। इस राशि का दुरुपयोग करने अथवा आवास निर्माण के नाम पर हितग्राहियों को परेशान करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
कबीरधाम में बड़ी कार्रवाई, दो ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज
कबीरधाम जिले के विकासखंड बोड़ला अंतर्गत प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर राशि लेकर निर्माण कार्य नहीं करने की शिकायतों पर दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों मामलों में कुल 9 हितग्राहियों से 5 लाख 9 हजार रुपए लेने की शिकायत सामने आई है। शिकायतों के आधार पर संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध थाना चिल्फी एवं थाना तरेगांव जंगल में अपराध दर्ज किया गया है।
ग्राम पंचायत राजाढ़ार के पांच हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर कुल 3 लाख 20 हजार रुपए लेने और निर्माण कार्य नहीं करने के मामले में ठेकेदार कुमार मेरावी के विरुद्ध 14 अक्टूबर को थाना चिल्फी में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
ग्राम राजाढ़ार निवासी देवसिंह से 60 हजार रुपए, मंधोर बाई से 60 हजार रुपए, पुसीया बाई से 60 हजार रुपए, कौशिल्या बाई से 80 हजार रुपए तथा ननकी बाई से 60 हजार रुपए आवास निर्माण के नाम पर लिए गए थे। शिकायत के अनुसार लगभग डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी न तो आवास निर्माण किया गया और न ही हितग्राहियों की राशि वापस की गई। इसके बाद हितग्राहियों की लिखित शिकायत पर ठेकेदार के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया।
ग्राम पंचायत आमानारा में भी कार्रवाई
इसी प्रकार विकासखंड बोड़ला की ग्राम पंचायत आमानारा में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के चार हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर राशि लेने की शिकायत पर ठेकेदार तुमेश गोड़ के विरुद्ध 13 अक्टूबर को थाना तरेगांव जंगल में एफआईआर दर्ज की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बैसाखू बैगा से 64 हजार रुपए, सुकोर बाई से 60 हजार रुपए, सोनिया बाई से 45 हजार रुपये तथा रनो बाई से 20 हजार रुपये सहित कुल 1 लाख 89 हजार रुपए लेने की शिकायत दर्ज कराई गई है। इस मामले में थाना तरेगांव जंगल में अपराध क्रमांक 420 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
गरीबों के आवास निर्माण में लापरवाही करने वालों को नहीं मिलेगी कोई रियायत  विजय शर्मा*
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व लाने का माध्यम है। विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत आवास निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों को बहला-फुसलाकर उनकी आवास राशि का दुरुपयोग करता है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि आवास निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना और हितग्राहियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसमें किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। गरीबों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।</description><guid>20533</guid><pubDate>16-Oct-2026 4:59:15 pm</pubDate></item><item><title>रायपुर एवं अंचलवासियों को रेलवे की बड़ी सौगात : सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रयासों से 3 नई मेमू ट्रेनों के परिचालन को मिली मंजूरी</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20532</link><description>रायपुर/नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधि बृजमोहन अग्रवाल के निरंतर और अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जनसुविधा के विस्तार और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय, भारत सरकार ने रायपुर से रावघाट और कुरुद के बीच 3 नई मेमू (MEMU) यात्री ट्रेनों के परिचालन को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल को पत्र लिखकर इन नई रेल सेवाओं की स्वीकृति की जानकारी दी है। पत्र के अनुसार निम्नलिखित नई रेलगाड़ियों के परिचालन की मंजूरी दी गई है:
गाड़ी सं. 68768 / 68769 : रायपुर  रावघाट मेमू
गाड़ी सं. 68772 / 68771 : रायपुर  कुरुद मेमू
गाड़ी सं. 68774 / 68773 : रायपुर  कुरुद मेमू
क्षेत्रीय विकास और आमजन की सुविधा को मिलेगी नई गति
इस ऐतिहासिक सौगात पर खुशी व्यक्त करते हुए सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, हमारा निरंतर संकल्प रहा है कि क्षेत्र की जनता को बेहतर, सुगम और किफायती आवागमन के साधन सुलभ हों। मैने रेल मंत्री से मेमू ट्रेनों के संचालन के लिए अनुरोध किया था, जिसके बाद इनके परिचालन को हरी झंडी मिल गई है। रायपुर से रावघाट और कुरुद के बीच नई मेमू ट्रेनों के शुरू होने से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा वर्ग, किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों तथा सुदूर अंचल से राजधानी आने-जाने वाले मरीजों एवं आम नागरिकों को सीधी और त्वरित यात्रा सुविधा मिलेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र के व्यापारिक और सामाजिक संपर्क को भी नई मजबूती प्राप्त होगी।
प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का जताया आभार
श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के विकास को सदैव प्राथमिकता देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जनभावनाओं के अनुरूप त्वरित निर्णय लेने वाले संवेदनशील रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे और रेल तंत्र का अभूतपूर्व आधुनिकीकरण एवं विस्तार हो रहा है।
</description><guid>20532</guid><pubDate>16-Oct-2026 4:42:07 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का किया भूमिपूजन</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20531</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के युवाओं तक रोजगार और आर्थिक अवसरों के रूप में पहुंचे, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से नई औद्योगिक विकास नीति में ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश के साथ बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करने की क्षमता है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रदेश की समृद्धि का माध्यम बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई इकाई छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना में 150 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और इससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इस इकाई में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
  
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन है। हमारी सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे उद्योग अधिक से अधिक स्थापित हों, जो प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएं। जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल और क्षमता के अनुरूप रोजगार मिलेगा तो उनके परिवार आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के दौरान नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि युवाओं के हाथ में नियुक्ति पत्र देना किसी भी औद्योगिक निवेश की सबसे सार्थक उपलब्धि है। एक रोजगार केवल एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और नई उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल के लिए यश ग्रुप की सराहना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, कुशल मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति 20242030 में रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया है। नीति तैयार करते समय इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करे। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ ही उद्योग लगाने और संचालित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार सुधार किए गए हैं। जन विश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की विशेष पहल की गई है। विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाया जा रहा है, ताकि निवेश प्रस्ताव तेजी से धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन शीघ्र प्रारंभ हो सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति को देश-विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। प्रदेश को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का विशेष जोर इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से धरातल पर उतारने पर है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना से लेकर संचालन तक हर स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि औद्योगिकीकरण का विस्तार केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों तक पहुंचे। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यश ग्रुप की यह नई इकाई नवा रायपुर और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण हो और शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करे, इसके लिए संबंधित विभाग आवश्यक समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करेंगे।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब निवेश का मूल्यांकन केवल निवेश की राशि से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के आधार पर भी किया जा रहा है। प्रदेश में लंबे समय तक अधिक पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत कम रोजगार देने वाले उद्योगों की प्रधानता रही है। इस स्थिति को बदलते हुए नई औद्योगिक नीति में श्रम आधारित और अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई इसी सोच का उदाहरण है। लगभग 150 करोड़ रुपए के निवेश से साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होना प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा को दर्शाता है। हमारा प्रयास है कि औद्योगिक निवेश का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के युवाओं तक पहुंचे।
श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर वित्त एवं उद्योग विभाग ने समन्वित रूप से औद्योगिक विकास नीति 20242030 तैयार की है। इसमें रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने के साथ केंद्र सरकार की रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं से भी समन्वय किया गया है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी के बजटीय प्रावधान को लगभग 200 करोड़ रुपए से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपए से अधिक किया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का पहला बजट ज्ञान अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के कल्याण को समर्पित था, जबकि दूसरे बजट में गति के माध्यम से सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देने का लक्ष्य रखा गया। आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को और सशक्त बनाने में किया जाएगा। औद्योगिक और आर्थिक प्रगति के माध्यम से जनकल्याण को स्थायी आधार देना सरकार का लक्ष्य है।
प्रदेश में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार : उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में छोटे-बड़े मिलाकर तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
श्री देवांगन ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण और सरकार की निवेश हितैषी नीतियों के कारण निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में निरंतर काम किया जा रहा है।
उन्होंने यश ग्रुप की नई औद्योगिक इकाई को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कंपनी प्रबंधन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि इकाई जल्द उत्पादन प्रारंभ करे और प्रदेश के युवाओं को रोजगार का लाभ मिल सके।
यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड के सीईओ श्री ए.एन. रविचंद्रन ने प्रस्तावित औद्योगिक इकाई की गतिविधियों, उत्पादन योजनाओं और रोजगार की संभावनाओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण और राज्य सरकार से मिल रहे सहयोग की सराहना की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, यश ग्रुप के चेयरमैन रितेश नरेडी, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि, कंपनी प्रबंधन के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।</description><guid>20531</guid><pubDate>16-Oct-2026 4:26:23 pm</pubDate></item><item><title>PWD सचिव मुकेश कुमार बंसल ने परखी सड़क निर्माण की गुणवत्ता, मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20530</link><description>रायपुर। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने कोरबा जिले में निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने कोरबा में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में निर्माणाधीन सड़कों, पुल-पुलियों एवं भवन निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने और उनकी कड़ी व नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कोरबा के कलेक्टर कुणाल दुदावत और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी इस दौरान मौजूद थे।
श्री बंसल ने अधिकारियों को सड़कों के बीटी पैच मरम्मत के कार्यों में तेजी लाने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुल-पुलियों की मरम्मत प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो तथा उन्हें सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। श्री बंसल ने निर्माण कार्यों में आने वाली समस्याओं का समय पर निराकरण सुनिश्चित करने को कहा, जिससे कि निर्माण कार्यों की प्रगति प्रभावित न हो। निर्धारित समयावधि में निर्माण कार्यों को पूर्ण कराकर लोगों को विकास कार्यों का लाभ जल्द दिलाएं।
  
इन कार्यों का किया निरीक्षण
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने कोरबा जिले में कटघोराहरदीबाजारबलौदाअकलतरा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तथा हरदीबाजारतरदासर्वमंगलाइमलीछापर मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक मार्ग तक निर्माणाधीन सीमेंट-कांक्रीट सड़क का भी निरीक्षण किया। उन्होंने 2.84 किलोमीटर लंबे इस सड़क के निर्माण की प्रगति की जानकारी ली और मौके पर मौजूद अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को इसे शीघ्र पूर्ण करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता आर.के. रात्रे, अधीक्षण अभियंता (वि/यां) सुरेश भूपल और कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता जी.आर. जांगड़े सहित विभागीय अनुविभागीय अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।</description><guid>20530</guid><pubDate>16-Oct-2026 4:03:42 pm</pubDate></item><item><title>आईआईएम रायपुर में पंजीयन विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, प्रशासनिक सुधारों को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पहचान</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20529</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को अब राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय 'वर्कशॉप ऑन केस राइटिंग एंड कोलैबोरेटिव पब्लिकेशन' 15 अक्टूबर को संपन्न हुई। 14 एवं 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में विभागीय सुधारों, महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों, उनके क्रियान्वयन में आई चुनौतियों तथा अधिकारियों द्वारा विकसित व्यावहारिक समाधानों को केस स्टडी के रूप में तैयार कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित कराने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पंजीयन विभाग द्वारा विगत तीन वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार एवं जनहितकारी पहल की गई हैं। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र मीणा के नेतृत्व में विभाग द्वारा पंजीयन सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन सुधारों के क्रियान्वयन से प्राप्त अनुभवों को अब व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत कर शोध, अध्ययन और प्रशासनिक प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने की पहल की गई है।
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक नवाचारों से सीख सकेंगे देश-दुनिया के नीति-निर्माता
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य पंजीयन विभाग में हुए सुधारों को केवल प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर उन्हें अध्ययन और शोध के उपयोगी उदाहरणों के रूप में विकसित करना है। विभागीय सुधारों को लागू करते समय अधिकारियों के सामने अनेक व्यावहारिक चुनौतियां आईं, जिनका समाधान स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक अनुभवों और नवाचारों के माध्यम से किया गया। इन अनुभवों को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करने से देश-दुनिया के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं को छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से सीखने का अवसर मिलेगा।
यह पहल प्रशासनिक सुधारों के अनुभवों को संस्थागत ज्ञान में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सफल कार्यप्रणालियों, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान को अन्य विभागों एवं संस्थानों के साथ साझा करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
दो दिनों तक केस स्टडी लेखन, शोध और प्रकाशन की बारीकियों पर प्रशिक्षण
कार्यशाला के प्रथम दिन विशेषज्ञों ने केस स्टडी लेखन की आवश्यकता, उसकी संरचना, उपयुक्त विषयों के चयन, समस्याओं की पहचान तथा प्रशासनिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि विभागीय कामकाज के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, उनके पीछे की परिस्थितियां, क्रियान्वयन में आई कठिनाइयां और उनके समाधान किस प्रकार एक उपयोगी एवं प्रभावशाली केस स्टडी का आधार बन सकते हैं।
दूसरे दिन केस स्टडी तैयार करने की व्यावहारिक प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। इसमें आवश्यक सूचनाओं का संकलन, तथ्यों का सत्यापन, संबंधित व्यक्तियों के साक्षात्कार, केस की रूपरेखा तैयार करने और विश्लेषणात्मक लेखन की विधियों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही टीचिंग नोट तैयार करने, उपयुक्त अकादमिक जर्नल एवं प्रकाशन मंच के चयन, समीक्षा तथा प्रकाशन की प्रक्रिया के संबंध में भी विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन प्रदान किया।
आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में पंजीयन विभाग के डीआईजी श्री मदन लाल कोर्पे एवं डीआईजी उषा साहू सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर, कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर तथा प्रो. आर.के. जना सहित अन्य विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
विशेषज्ञों ने प्रशासनिक अनुभवों को शोधपरक एवं तथ्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अच्छी केस स्टडी न केवल किसी समस्या और उसके समाधान को सामने लाती है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया, उपलब्ध विकल्पों और उनसे प्राप्त सीख को भी स्पष्ट करती है।
प्रशासनिक सुधारों के दस्तावेजीकरण से सुशासन को मिलेगी मजबूती
पंजीयन विभाग की यह पहल छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रशासनिक नवाचारों को व्यवस्थित रूप से संकलित करने और उन्हें व्यापक अध्ययन का विषय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभागीय अनुभवों पर आधारित केस स्टडी तैयार होने से भविष्य में अधिकारियों के प्रशिक्षण, नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
कार्यशाला के समापन अवसर पर पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे, आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर तथा कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। यह आयोजन पंजीयन विभाग और प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।</description><guid>20529</guid><pubDate>16-Oct-2026 3:29:30 pm</pubDate></item><item><title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर आगमन गौरव का अवसर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20528</link><description>रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास के संबंध में हमने राष्ट्रपति महोदया को बस्तर आने का आमंत्रण दिया था। पूर्व में बस्तर के मांझी-चालकी प्रतिनिधियों से भेंट के दौरान भी उनसे बस्तर आने का आग्रह किया गया था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। उनका 22 एवं 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर जाएंगी और वहां मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति महोदया का बस्तर आगमन हम सभी के लिए प्रसन्नता और गौरव का अवसर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सली हिंसा से प्रभावित एवं अन्य दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर को संबोधित किया है। सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता मिले और वे सम्मान एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के संबंध में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए प्रसन्नता का विषय है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले इस मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। इससे प्रदेश की माताओं-बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के साथ उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।</description><guid>20528</guid><pubDate>16-Oct-2026 3:15:12 pm</pubDate></item><item><title>समय से पहले जन्म, सांस लेने में तकलीफ और गंभीर एनीमिया डॉक्टरों की मेहनत से बची 900 ग्राम के बच्चे की जान</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20527</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे महज 900 ग्राम वजन के एक नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग दो माह तक लगातार उपचार एवं विशेष देखभाल प्रदान कर नया जीवन दिया है। अत्यंत कम वजन, समय से पूर्व जन्म, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे इस नवजात की सफल चिकित्सा ने जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता और चिकित्सकीय टीम के समर्पण को रेखांकित किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जिला चिकित्सालयों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात का सफल उपचार इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
महज 900 ग्राम वजन के साथ जिंदगी की जंग लड़ रहा था नवजात
गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पूर्व हुआ था। जन्म के बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। इसके साथ ही उसे श्वसन संबंधी परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या भी थी। इतनी कम उम्र और अत्यंत कम वजन के कारण शिशु को विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। नवजात के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई और उसकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार एवं पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई।
दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया
उपचार के दौरान नवजात को सांस लेने में हो रही परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। गंभीर एनीमिया की स्थिति में दो यूनिट रक्त ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। इसके अतिरिक्त शिशु के शारीरिक तापमान को संतुलित रखने, पोषण सुनिश्चित करने और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी), नियमित फीडिंग तथा अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी एवं लगभग दो माह के उपचार से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए और शिशु का वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर 8 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दूरस्थ वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना जीवनरक्षक सहारा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे वनांचल बहुल जिले में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का जिला स्तर पर सफल उपचार होना विशेष महत्व रखता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं और आवश्यक उपचार सुविधाओं के माध्यम से नवजात के स्वास्थ्य में सुधार संभव हो सका। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जिला स्तर पर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा जरूरतमंद नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेष रूप से नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए जिला चिकित्सालयों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में नवजात शिशु का सफल उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित करती है।
इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता, मरीजों की सतत निगरानी तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से मिली सफलता
नवजात शिशु के सफल उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम सहित एसएनसीयू के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लगभग दो माह तक शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी, आवश्यक उपचार, पोषण प्रबंधन और विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई। चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयासों और समर्पित सेवाओं से गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार संभव हुआ।
नवजात की मुस्कान बनी शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की सार्थकता का प्रतीक
मात्र 900 ग्राम वजन के साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। यह सफलता न केवल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को दर्शाती है, बल्कि शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध नवजात देखभाल सुविधाओं के महत्व को भी सामने लाती है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रेरक उदाहरण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में जारी प्रयासों के बीच इस नवजात को मिला नया जीवन शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था की सार्थकता और मानवीय संवेदनशीलता की एक उल्लेखनीय कहानी बनकर सामने आया है</description><guid>20527</guid><pubDate>16-Oct-2026 2:57:25 pm</pubDate></item><item><title>सेवा की कहानी: कभी बरसात में टपकती थी छत, अब पक्के घर में सुरक्षित जीवन बिता रहे पहाड़ी कोरवा दिलबंधु</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20526</link><description>रायपुर। कभी बरसात शुरू होते ही घर की टपकती छत की चिंता सताने लगती थी। मिट्टी के कच्चे मकान में रहने के कारण बारिश के दिनों में परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छत से पानी टपकने पर बार-बार खपरा लगाकर मरम्मत करनी पड़ती थी, लेकिन अब वे दिन बीते समय की बात हो गए हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर निवासी विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के दिलबंधु के जीवन में प्रधानमंत्री जनमन योजना ने महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने से उनका परिवार अब सुरक्षित और बेहतर वातावरण में रह रहा है। इसके साथ ही गांव में सड़क, पेयजल, गैस चूल्हा और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से उनके दैनिक जीवन की परेशानियां भी कम हुई हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रारंभ प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में भी इन सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई दिलबंधु की कहानी दर्शाती है कि पक्के आवास और गांव में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से जनजातीय परिवारों के जीवन में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।
बरसात में खपरा लगाकर करनी पड़ती थी छत की मरम्मत, अब मिली स्थायी राहत
दिलबंधु बताते हैं कि पहले उनका परिवार मिट्टी के बने कच्चे मकान में रहता था। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकना सबसे बड़ी परेशानी थी। बारिश के पानी से बचने के लिए उन्हें बार-बार खपरा लगाकर छत की मरम्मत करनी पड़ती थी। कच्चे मकान की स्थिति के कारण परिवार को हर वर्ष बारिश के दिनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के कारण स्वयं का पक्का घर बनाना आसान नहीं था, इसलिए परिवार लंबे समय से बेहतर आवास की आवश्यकता महसूस कर रहा था।
प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने से दिलबंधु के परिवार की यह परेशानी दूर हो गई है। अब उन्हें बरसात के समय छत से पानी टपकने या बार-बार मरम्मत करने की चिंता नहीं रहती। पक्के मकान ने परिवार को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के साथ रहने की बेहतर व्यवस्था भी प्रदान की है। दिलबंधु के लिए यह केवल मकान का निर्माण नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही कठिनाइयों से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।
सड़क और स्ट्रीट लाइट से आवागमन हुआ सुगम, पेयजल और गैस चूल्हे से मिली सुविधा
दिलबंधु के जीवन में बदलाव केवल पक्के आवास तक सीमित नहीं है। गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से भी उनके परिवार को राहत मिली है। वे बताते हैं कि पहले गांव में झाड़ी-झंखाड़ अधिक थे और सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण आवागमन में परेशानी होती थी। विशेष रूप से दैनिक जरूरतों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। अब सड़क निर्माण होने से ग्रामीणों का आवागमन पहले की तुलना में आसान हुआ है।
इसके साथ ही सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होने से प्रकाश की सुविधा उपलब्ध हुई है। गांव में पेयजल और परिवार को गैस चूल्हे की सुविधा मिलने से भी दैनिक जीवन अधिक सुगम हुआ है। इन सुविधाओं ने परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद की है। दिलबंधु बताते हैं कि पहले की तुलना में अब गांव में रहने की व्यवस्था बेहतर हुई है और रोजमर्रा के कामकाज में होने वाली परेशानियां कम हुई हैं।
पीएम जनमन से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा बेहतर जीवन का अवसर
प्रधानमंत्री जनमन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों तक आवास और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले इन परिवारों के लिए पक्का आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं जीवन स्तर में सुधार का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन सुविधाओं के विस्तार से परिवारों को सुरक्षित आवासीय वातावरण मिलने के साथ दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सुविधा होती है।
मानिकप्रकाशपुर निवासी दिलबंधु का अनुभव इस बदलाव का उदाहरण है। पहले उनका परिवार कच्चे मकान और खराब सड़क जैसी परेशानियों का सामना करता था, जबकि अब पक्के आवास और गांव में विकसित सुविधाओं से जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है। विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को योजनाओं से जोड़ने के प्रयास उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और बेहतर रहन-सहन के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
पक्का घर मिलने पर दिलबंधु ने जताई खुशी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार
प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने पर दिलबंधु ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि पहले मिट्टी के कच्चे मकान में बरसात के दौरान काफी कठिनाइयां होती थीं। छत से पानी टपकने के कारण बार-बार मरम्मत करनी पड़ती थी, लेकिन अब पक्का घर बनने से परिवार को इन परेशानियों से राहत मिली है। गांव में सड़क, पेयजल, गैस चूल्हा और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से उनका रहन-सहन भी बेहतर हुआ है।
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत दिलबंधु की यह कहानी विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के जीवन में शासकीय योजनाओं से आ रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। कभी बारिश के दिनों में कच्चे मकान की टपकती छत से परेशान रहने वाला उनका परिवार आज पक्के आवास में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहा है। इसके साथ ही गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया है। दिलबंधु का अनुभव दर्शाता है कि आवास और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को बेहतर और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</description><guid>20526</guid><pubDate>16-Oct-2026 2:01:41 pm</pubDate></item><item><title>नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर में नलकूप खनन पूरा, अब हर घर तक पहुंचेगा साफ पानी</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20525</link><description>रायपुर। ​छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा लगातार सशक्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम बागझर में नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस दूरदर्शी पहल से गाँव में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को उनके अपने गाँव में ही स्वच्छ व पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
​कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उम्मीद की नई किरण
​नारायणपुर के वनांचलों की भौगोलिक परिस्थितियाँ अक्सर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बड़ी चुनौती बनती रही हैं। भोजन पकाने, पीने तथा अन्य घरेलू कार्यों के लिए नियमित जल आपूर्ति ग्रामीणों की प्राथमिक आवश्यकता है। इन व्यावहारिक कठिनाइयों को प्राथमिकता पर लेते हुए बागझर में नलकूप खनन कराया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही एक मजबूत जलस्रोत तैयार हो गया है।
​महिलाओं व बुजुर्गों के जीवन में आएगा सुलभ बदलाव
​गाँव में ही जलस्रोत विकसित होने का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगा। अब पानी लेने के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे ग्रामीणों के श्रम और समय दोनों की भारी बचत होगी। समय की बचत होने से ग्रामीण अन्य आजीविका और पारिवारिक कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
स्वास्थ्य और विकास को मिलेगी नई गति
​स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सीधा ग्रामीणों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। बागझर में नलकूप खनन का कार्य पूरा होना केवल एक जलस्रोत का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। नलकूप के सुचारू संचालन और जल की गुणवत्ता सुनिश्चित होने से गाँव में जल जनित बीमारियों का खतरा कम होगा और ग्रामीणों का जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक एवं खुशहाल बनेगा।</description><guid>20525</guid><pubDate>16-Oct-2026 1:31:58 pm</pubDate></item><item><title>आदिवासियों की मांग पर मुख्यमंत्री ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेशः बुधनी विधायक की पहल पर समाप्त हुआ धरना और पदयात्रा</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20524</link><description>सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोनाझिर क्षेत्र में आदिवासियों के मकान तोड़े जाने और प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में चल रहा आंदोलन आखिरकार सकारात्मक परिणाम के साथ समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाने और प्रशासन के साथ सार्थक चर्चा के बाद आदिवासी समाज ने अपनी पैदल पदयात्रा और धरना प्रदर्शन को स्थगित कर दिया है।
विधायक रमाकांत भार्गव ने दी विस्तृत जानकारी
बुधनी के भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव ने मीडिया को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि आदिवासी समाज के लोग पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे।कलेक्टर के माध्यम से भेजा गया ज्ञापन: आदिवासी समाज की ओर से जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक विस्तृत मांग-पत्र भेजा गया था। मुख्यमंत्री का त्वरित संज्ञान: इस मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लिया। वन विकास निगम के अधिकारियों द्वारा किए गए अशोभनीय व्यवहार और कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच के आदेश मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं।
प्रशासन के साथ बनी सहमति
शिव राज भैया के नेतृत्व में आदिवासी समाज के एक 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ लगभग डेढ़ से दो घंटे तक विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बैठक में समाज की सभी प्रमुख मांगों पर गंभीर मंथन हुआ, जिससे आदिवासी समाज का प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह संतुष्ट नजर आया। प्रशासन के साथ बनी सहमति और मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आश्वासन के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आज की पदयात्रा को यहीं स्थगित किया जाए।
यातायात के लिए बसें उपलब्ध
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों और समाज के लोगों को उनके गांवों तक सुरक्षित वापस पहुँचाने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था की गई, जिसके बाद सभी लोग अपने घरों की ओर रवाना हुए। प्रशासनिक और शासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई होने से फिलहाल यह विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया है, और पीड़ित आदिवासियों को न्याय मिलने की उम्मीद बंध गई है।</description><guid>20524</guid><pubDate>16-Oct-2026 12:54:50 pm</pubDate></item><item><title>राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को दी नसीहत, बोले- टकराव नहीं, संवाद और राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुनें</title><link>https://ramraj.co/national.php?articleid=20523</link><description>नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) रद्द करने को लेकर राहुल गांधी लगातर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को लेकर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर करारा वार किया है। राजनाथ सिंह ने निशाने पर लेते हुए कहा कि राहुल गांधी की मंशा देश में आग लगाने की है। राहुल गांधी के पास वोट चोरी का कोई सबूत नहीं है। बावजूद इसके प्रदर्शन कर देश के नौजवानों को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश की है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव आयोग पर विपक्ष के आंदोलन के जरिए बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की साजिश हो रही है। सरकार को खुलेआम गिराने की बात की जा रही है। विपक्ष लोकतांत्रिक नहीं बल्कि देश को अराजकता में झोंककर सत्ता परिवर्तन चाहता है। ये उसकी पुरानी रणनीति रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव और अराजकता की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिजीम चेंज जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, SI या CEC ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है, बल्कि अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की है। इनका एक मात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। उनका इशारा वकील प्रशांत भूषण और आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा के बयानों की तरफ था। दोनों हाल ही में राहुल गांधी से भी मिले हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रिजीम चेंज जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, इससे स्पष्ट हो जाता है यह उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है। यह उनकी लड़ाई SIR के लिए नहीं है। ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है। नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए नहीं है। बल्कि देश में अराजकता पैदा कर सत्ता हासिल करने की कोशिश है।
राहुल गांधी को दी सलाह
सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को मेरी सलाह है कि कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर पॉलिटिक्स ऑफ डिसरप्शन करने के बजाय जनमत का सम्मान करते हुए अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए। जहां तक भारत के भविष्य का प्रश्न है, भारत के भविष्य की जिम्मेदारी सबकी बनती है। हमें टकराव नहीं संवाद और राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुनना है।
कांग्रेस के तीन अक्षम्य अपराध गिनाए
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए पार्टी पर तीन अक्षम्य अपराध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहला अपराध 1975 में आपातकाल लागू करना था, जब इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने लोकतंत्र को सलाखों के पीछे कैद कर दिया था। दूसरा आरोप उन्होंने 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर लगाया।तीसरे मामले में उन्होंने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कारसेवकों पर गोली चलाने वालों को संरक्षण देकर सरकार ने उन्हें बचाने का काम किया।</description><guid>20523</guid><pubDate>16-Oct-2026 12:28:51 pm</pubDate></item><item><title>छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से तीन सप्ताह में मांगा शपथपत्र</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20522</link><description>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की स्थायी बेंच नहीं होने पर छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम, बिलासपुर ने जनहित याचिका दायर कर गंभीर चिंता जताई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य शासन से इस संबंध में आवश्यक निर्देश लेकर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की ओर से अधिवक्ता बीपी राव, विकास बाजपेयी, अरविंद सिन्हा और पूजा सिन्हा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित कैट की प्रधान पीठ की सर्किट बेंच साल में पांच बार, प्रत्येक दो महीने में एक सप्ताह के लिए बिलासपुर में काम करती है। इसके कारण पक्षकारों को आवेदन जमा करने, त्रुटियां दूर कराने और अन्य प्रक्रियाओं के लिए जबलपुर जाना पड़ता है। इसके बाद मामलों की ऑनलाइन सुनवाई होती है, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
अधिवक्ताओं ने बताया कि बिलासपुर में कैट भवन के लिए जमीन आवंटित हो चुकी है, लेकिन वर्तमान में सर्किट बेंच जिला उपभोक्ता फोरम के प्रथम तल पर स्थित एक छोटे कमरे में संचालित हो रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए स्थायी बेंच की आवश्यकता है, ताकि पक्षकारों को बार-बार जबलपुर न जाना पड़े।
केंद्र सरकार की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा और अधिवक्ता अन्नपूर्णा तिवारी ने पक्ष रखा। मिश्रा ने स्थायी बेंच की स्थापना के लिए उठाए गए कदमों और वर्तमान स्थिति की जानकारी देने के लिए सक्षम अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करने हेतु समय मांगा। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर और उप शासकीय अधिवक्ता अनुजा शर्मा उपस्थित हुए।
डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वहीं राज्य शासन को छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच स्थापित करने के संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थायी बेंच की स्थापना बिलासपुर में किया जाना बेहतर होगा। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।</description><guid>20522</guid><pubDate>16-Oct-2026 11:26:58 am</pubDate></item><item><title>राज्य प्रशासनिक सेवा के 3 अधिकारी बने IAS, DOPT से आदेश जारी</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20521</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत किया गया है। भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। जारी अधिसूचना के अनुसार, इसके तहत अभिषेक अग्रवाल, सचिन भूतड़ा और राजीव कुमार पांडे को भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्त करते हुए छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया है।
जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नियुक्तियां वर्ष 2025 की चयन सूची के तहत की गई हैं। यह सूची 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच उत्पन्न रिक्तियों के आधार पर तैयार की गई है। अधिकारियों की नियुक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा (भर्ती) नियम, 1954 और भारतीय प्रशासनिक सेवा (पदोन्नति द्वारा नियुक्ति) विनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की गई है।
</description><guid>20521</guid><pubDate>16-Oct-2026 11:14:58 am</pubDate></item><item><title>सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, मांदर की थाप पर समाजजनों के साथ किया पारंपरिक कर्मा नृत्य</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20520</link><description>रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की।
 
कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री श्री साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया।
जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत
मुख्यमंत्री श्री साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को विशेष प्राथमिकता देते हुए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। इससे जनजातीय समाज के विकास के प्रयासों को संस्थागत आधार और नई गति मिली। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के एक बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। यह जनजातीय समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि नया रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां जनजातीय समाज के इतिहास, जीवनशैली, परंपराओं, संस्कृति और वीर महापुरुषों के योगदान को जानने-समझने का अवसर मिलता है। हमारी सरकार जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
कर्मा पर्व हमारी जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं।
उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है।
शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें
मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी।
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) जैसी योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों में रहने वाला कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखा है। समाज के वीर महापुरुषों और उनके योगदान को व्यापक पहचान दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति का आधार है और सांस्कृतिक एकता उसकी पहचान को सुदृढ़ करती है।
उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपरा, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला तथा प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मांदर की थाप पर जीवंत हुई जनजातीय लोक संस्कृति
कर्मा पूजा महोत्सव में आदिवासी समाज की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। लयबद्ध नृत्य के माध्यम से प्रकृति के प्रति प्रेम, सामूहिकता, उल्लास और आराध्य देवों के प्रति आस्था की सुंदर अभिव्यक्ति हुई।
कर्मा पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामाजिक एकजुटता और लोक परंपराओं से गहरे जुड़ाव की भावना को अभिव्यक्त करता है।</description><guid>20520</guid><pubDate>15-Oct-2026 10:08:47 pm</pubDate></item><item><title>माधुरी धीरही, संजय ध्रुव समेत 12 DSP बनाए गए ASP, देखें पूरी लिस्ट</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20519</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग ने राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक/सहायक सेनानी या समतुल्य रैंक के पदों पर पदस्थापना देने का आदेश जारी किया है। यह आदेश 15 अक्टूबर को मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार, 17 सितंबर को आयोजित विभागीय पदोन्नति/छानबीन समिति की बैठक में की गई अनुशंसाओं के परिप्रेक्ष्य में यह निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (राजपत्रित) सेवा भर्ती तथा पदोन्नति नियम, 2005 के नियम 14 और 23 की अनुसूची-पांच में निहित प्रावधानों के तहत यह पदस्थापना की जा रही है।
देखें आदेश-
</description><guid>20519</guid><pubDate>15-Oct-2026 9:41:41 pm</pubDate></item><item><title>धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20518</link><description>रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की।
मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।</description><guid>20518</guid><pubDate>15-Oct-2026 9:14:23 pm</pubDate></item><item><title>किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20517</link><description>रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के केंद्र में हमारे अन्नदाता हैं। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि सुशासन और जनसेवा के माध्यम से विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और छत्तीसगढ़ का प्रत्येक परिवार प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बने। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में आयोजित कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री साय का समाजजनों ने पारंपरिक गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने माँ रणेश्वरी रामचण्डी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्राम कोतरलिया के चंडी डोंगरी में सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए 30 लाख रुपए तथा नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के मंगल भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने बाउंड्रीवॉल निर्माण की भी घोषणा की।
नुआखाई अन्नदाता के परिश्रम और नई फसल की खुशियों का पर्व
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कोलता समाज सहित सभी प्रदेशवासियों को नुआखाई पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नुआखाई हमारी समृद्ध कृषि संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह नई फसल के स्वागत, अन्नदाता के परिश्रम के सम्मान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का उत्सव है। ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है और हमारी सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिले, खेती की लागत कम हो, सिंचाई की सुविधा बढ़े और कृषि के माध्यम से परिवारों में समृद्धि आए, इसी सोच के साथ सरकार लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायगढ़ अंचल के किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुँचाने के लिए केलो परियोजना का कार्य प्रारंभ किया गया है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगी। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। सरकार का प्रयास है कि अधोसंरचना के विकास का सीधा लाभ आम नागरिकों, किसानों, युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिले।
हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर का सपना हो रहा साकार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि अपना पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि गरीब परिवार के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार है। हमारी सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र जरूरतमंद परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।
सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा सरकार की कार्यसंस्कृति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा को अपनी कार्यसंस्कृति का आधार बनाया है। आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए भटकना न पड़े और शासन तक उसकी पहुँच आसान हो, इसके लिए तकनीक और आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित तथा समयबद्ध निराकरण के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सेवा सेतु और अटल डिजिटल सेवा केंद्र जैसी व्यवस्थाएँ प्रारंभ की गई हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के समयबद्ध समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अनुरूप राज्य सरकार ने अपने ढाई वर्षों के कार्यकाल में अधिकांश वादों को पूरा किया है। शासन की योजनाएँ तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुँचे। इसलिए सरकार की प्राथमिकता योजनाओं और सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।
नक्सलवाद के विरुद्ध मिली ऐतिहासिक सफलता, अब विकास की नई यात्रा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के साथ हमारे वीर सुरक्षा बलों के साहस तथा स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति और विश्वास का नया वातावरण बना है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जुड़े लोगों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापस आने का अवसर दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। हमारा उद्देश्य शांति की स्थापना के साथ प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती से आगे बढ़ता छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि की नई पहचान बना रहा है। बस्तर सहित प्रदेश के हर क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह में समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति, परिवार और समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। आज का युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और आधुनिक शिक्षा के बल पर किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए परिश्रम करने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी प्रतिभा से परिवार और समाज के साथ छत्तीसगढ़ का नाम भी देश-दुनिया में रोशन करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज द्वारा प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान करने की परंपरा सराहनीय है। इससे बच्चों और युवाओं को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है तथा समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।
कोलता समाज की संस्कृति और संस्कार अनुकरणीय : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी
वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने नुआखाई पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पुसौर और सरिया से लेकर तमनार, लैलूंगा तथा धरमजयगढ़ तक कोलता समाज के लोग अपनी ईमानदारी, सज्जनता, परिश्रम और संस्कारों के लिए विशेष पहचान रखते हैं। समाज की गौरवशाली संस्कृति और परंपराएँ सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने रायगढ़ क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साकरा में लिफ्ट सिंचाई परियोजना, पुसौर एवं सरिया में रजिस्ट्री कार्यालय, 100 बिस्तरों का अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज और नालंदा परिसर जैसी सुविधाएँ क्षेत्र के विकास को नई दिशा दे रही हैं। वित्त मंत्री ने बेलरिया में विधायक निधि से 25 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन बनवाने की घोषणा भी की।
शिक्षा और संस्कार से आगे बढ़े समाज
लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने नुआखाई पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि कोलता समाज सामाजिक उत्थान और सामुदायिक एकता के लिए सदैव समर्पित रहा है। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत को सहेजते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावक अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार दें। उन्होंने बच्चों को माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने तथा समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
समारोह में समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और समाजजनों के साथ नुआखाई का पारंपरिक भोजन भी ग्रहण किया। आयोजन के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, शिक्षा को प्रोत्साहन, सामाजिक एकजुटता और क्षेत्र के विकास का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, अरुणधर दीवान, गुरुपाल भल्ला, सुभाष पाण्डेय, श्रीकांत सोमावार, सत्यानंद राठिया, विकास केडिया सहित समाज के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में कोलता समाज के लोग उपस्थित थे।</description><guid>20517</guid><pubDate>15-Oct-2026 8:50:35 pm</pubDate></item><item><title>नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता और खुशहाल बनाना है : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20516</link><description>रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे मिले घावों पर मरहम लगाना, पीड़ितों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नक्सलवाद ने पाँच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब हमें नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रत्येक दिव्यांगजन और नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संकल्प को पूरा करने में भारत सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब उसकी पीड़ा और निशानियों को भी मिटाना है : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांग आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर 2026 के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर की उस पीड़ा का परिचय देती है, जिसे यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों ने दशकों तक सहन किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटों के माध्यम से निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बनाया। इससे बड़ा मानवाधिकारों का हनन कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया था और आज नक्सलवाद समाप्त हो चुका है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देने से पाँच दशकों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी। हमें इन घावों पर मरहम लगाना होगा। नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना होगा और उनके सम्मानपूर्वक जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग भाई-बहनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन में नई खुशियाँ लाई जा सकती हैं। इस सेवा कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और भारतीय जैन संघ सहित अनेक संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों में स्थानीय जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार से बदल रही बस्तर की तस्वीर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्ला नार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं तथा भय का वातावरण रहता था, वहाँ आज हजारों युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी परंपराओं को जीवित रख रहे हैं। बस्तर ओलंपिक ने युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। वहीं बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का बड़ा प्रयास हुआ है।
श्री शाह ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं। पाँच दशकों तक जिन क्षेत्रों तक आवश्यक सुविधाएँ नहीं पहुँच सकीं, वहाँ अब आधारभूत अधोसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार हो रहा है।
आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों के बैंक खाते नहीं थे, ऐसे 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसी प्रकार 455 लोगों को नौकरी दी गई है और 129 लोगों को भूमि का आवंटन किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है। क्षेत्र में आवागमन और संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएँ प्रारंभ की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।
श्री शाह ने कहा कि ये प्रयास नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। इनमें से 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को अब शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन शिविरों में कभी सुरक्षा बलों के जवान बैठकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, उन्हीं स्थानों पर अब भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी बैठकर विकसित बस्तर की नींव रखेंगे।
श्री शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सार्वजनिक सेवा केंद्रों के माध्यम से बस्तर में विकास और जनकल्याण के कार्यों को नई गति मिलेगी तथा विकसित बस्तर के निर्माण का संकल्प साकार होगा।
नक्सलमुक्त बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे वीर सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों तथा नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब यह विश्वास करना कठिन लगता था कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो पाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से आज हमने यह लक्ष्य प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और विशेष रूप से बस्तरवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध इस निर्णायक लड़ाई में बस्तर की जनता ने सुरक्षा बलों का भरपूर सहयोग किया। यहाँ के लोग भय और हिंसा से मुक्ति चाहते थे। वे शांति, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते थे। जनता के इसी विश्वास और सहयोग ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया। अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ाया जाए। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का भरोसा दिलाया है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से इस लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।
जहाँ कभी भय और हिंसा थी, वहाँ अब पहुँच रही शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की सुविधाएँ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के उन दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचा रही है, जो दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे।
उन्होंने बताया कि आज 500 से अधिक गाँवों में सड़क और बिजली की सुविधाएँ पहुँची हैं। घरों तक नल से जल पहुँचाने और दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ अंचलों के बच्चों, महिलाओं और परिवारों को बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अनेक गाँवों के लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बन पाते थे। राशन प्राप्त करने के लिए उन्हें कई दिनों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब गाँवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था कर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि बस्तर के अंतिम गाँव और अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचे। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
सुरक्षा शिविरों से सेवा केंद्रों तक, बस्तर में परिवर्तन का नया अध्याय
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित सुरक्षा शिविरों ने शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब इन शिविरों को सेवा और विकास के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खाली हो रहे सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरा के रूप में परिवर्तित करना राज्य सरकार का महत्वपूर्ण संकल्प है। इन केंद्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी, ताकि युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गाँव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। यहाँ स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियाँ भी प्रारंभ की गई हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा आजीविका गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बस्तर में हो रहे परिवर्तन की नई तस्वीर है। जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बलों की तैनाती आवश्यक थी, अब वहीं से जनसेवा, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित होंगे।
खेती, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से बढ़ेगी बस्तर के परिवारों की आय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी विशेष प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराई जा रही हैं। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़े और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए इंद्रावती नदी पर देउरगाँव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं हेतु लगभग दो हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की खेती अधिक लाभकारी बनेगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों और केंद्र सरकार के सहयोग से बस्तर के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
दिव्यांग भाई-बहनों के जीवन में आत्मविश्वास लौटाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण बस्तर के अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर खोए हैं। आईईडी विस्फोटों ने अनेक परिवारों को जीवनभर की पीड़ा दी है। ऐसे प्रभावित भाई-बहनों के जीवन को सुगम बनाना, उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाना और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से राज्य सरकार और भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर सहित सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर के माध्यम से दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजनों सहित कुल 768 लोगों को लाभान्वित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में अपने अंग खो चुके भाई-बहनों को कृत्रिम अंग मिलने से उनके जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार होगा। जो लोग वर्षों से चलने-फिरने या दैनिक कार्य करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, उनके लिए ये उपकरण बड़ी सहायता सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर प्रदान करना है।
उन्होंने इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाली भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और अन्य संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए माँ दंतेश्वरी से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की पीड़ा को दूर करने का अभियान निरंतर जारी रहेगा : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यक्रम में नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष ग्रामीणों का जीवन प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि कोई बच्चा अपने गाँव में खेलते हुए, कोई किसान अपने खेत की मेड़ पर चलते हुए और कोई ग्रामीण दैनिक कार्यों के दौरान आईईडी विस्फोट का शिकार हुआ। किसी ने अपना हाथ खोया, किसी ने पैर और किसी की आँखों की रोशनी चली गई। नक्सली हिंसा ने बस्तर के निर्दोष लोगों को ऐसी पीड़ा दी, जिसकी कल्पना करना भी कठिन है।
श्री शर्मा ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद बस्तर की जनता ने नक्सलवाद से मुक्ति का संकल्प नहीं छोड़ा। जनता के इसी विश्वास और सुरक्षा बलों के साहस के कारण आज बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता का यह अभियान निरंतर जारी रहना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और बस्तर के जनप्रतिनिधि प्रत्येक जरूरतमंद और प्रभावित व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
कृत्रिम अंग मिलने से दिव्यांगजनों के जीवन में लौटी नई उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिव्यांगजनों से संवाद किया और उनके अनुभव जाने।
सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायाँ पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण पैर काटना पड़ा। अब कृत्रिम पैर मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए फिर से तैयार हैं।
बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने स्थानीय गोंडी बोली में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में उन्होंने अपना दायाँ पैर खो दिया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चल पा रहे हैं। यह उनके जीवन का अत्यंत भावुक और यादगार क्षण है।
इसी प्रकार दंतेवाड़ा जिले के जावंगा एवं मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित दिव्यांगजन अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें दैनिक आवागमन में बड़ी सुविधा होगी।
लाभार्थियों ने इस संवेदनशील पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
विकसित बस्तर के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर अब विकास और खुशहाली की नई दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, दिव्यांगजनों की सहायता और दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा की स्थापना के बाद अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर का प्रत्येक गाँव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, हर युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए। जिस बस्तर ने दशकों तक हिंसा और भय की पीड़ा सही है, वही बस्तर अब शांति, समृद्धि और विकास की नई पहचान बनेगा।
इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।</description><guid>20516</guid><pubDate>15-Oct-2026 7:34:31 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंच रहा जरूरतमंद परिवारों तक</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20515</link><description>रायपुर। विकास की वास्तविक पहचान केवल सड़कों, भवनों और अधोसंरचनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से होती है। जब किसी परिवार का बिजली खर्च कम होने लगे, आर्थिक कठिनाइयों के बीच विद्यार्थी उच्च शिक्षा जारी रख सके, कोई महिला स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाले और एक उद्यमी उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर विकसित करे, तब जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित परिवारों की कहानियां ऐसे ही बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों से नागरिकों को शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी क्षमताओं को विकसित करने में भी सहायक बन रही हैं।
सरगुजा के पांच हितग्राहियों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का लाभ जब लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को नई दिशा मिलती है।
पीएम सूर्य घर योजना: कभी चार से पांच हजार रुपये आता था बिजली बिल, अब सौर ऊर्जा से मिल रही राहत

बढ़ती घरेलू बिजली जरूरतों के बीच सौर ऊर्जा नागरिकों के लिए बिजली खर्च कम करने का उपयोगी विकल्प बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी श्री पंकज साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है।
पंकज साहू बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। घरेलू बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल एक लाख आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता से सोलर सिस्टम स्थापित करने का खर्च कम हुआ।
सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। पंकज साहू के अनुसार, कई बार घरेलू आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है। पहले जहां बिजली बिल परिवार के नियमित खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा था, वहीं अब घर की छत पर स्थापित सोलर सिस्टम बिजली खर्च में राहत देने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बन गया है।
पंकज साहू का अनुभव दर्शाता है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से परिवार अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। इससे घरेलू खर्च कम करने के साथ पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलता है।
छात्रवृत्ति बनी कृष्णा यादव की उच्च शिक्षा का सहारा, किताबों और कॉलेज आने-जाने के खर्च में मिली मदद

शिक्षा किसी भी परिवार की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन सीमित आय वाले परिवारों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसका उदाहरण है।
कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। खेती से प्राप्त सीमित आय में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपियां, अध्ययन सामग्री और कॉलेज आने-जाने पर होने वाला खर्च परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को बढ़ा देता है। ऐसे में छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता कृष्णा की शिक्षा को निरंतर जारी रखने में उपयोगी साबित हो रही है।
कृष्णा छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और आवागमन के खर्च में करते हैं। इससे उनके परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल रही है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उनका प्रयास दर्शाता है कि छात्रवृत्ति योजनाएं जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
पीएमईजीपी से हर्षिता खत्री बनीं उद्यमी, 25 लाख रुपये के ऋण से स्थापित किया फर्नीचर निर्माण उद्योग

आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वरोजगार और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से इच्छुक उद्यमियों को स्वयं का उद्योग या व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है। अम्बिकापुर की हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है।
हर्षिता खत्री श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। परिवार लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता खत्री के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण स्वीकृत होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई की स्थापना संभव हो सकी।
इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। उद्योग स्थापना से हर्षिता खत्री के परिवार को स्वरोजगार का अवसर मिला है, वहीं इकाई से जुड़े कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।
हर्षिता की सफलता बताती है कि उद्यमिता के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध होने पर लोग अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्योग में बदल सकते हैं। ऐसे उद्यम स्थानीय स्तर पर उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के अवसर विकसित करने में भी योगदान देते हैं।
पति के निधन के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी, सक्षम योजना से इंदु लता ने शुरू किया डेयरी व्यवसाय

महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक तस्वीर श्रीमती इंदु लता गुप्ता के जीवन में दिखाई देती है। पति के निधन के बाद चार बेटियों के पालन-पोषण और उनकी शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। परिवार के पास नियमित आय का पर्याप्त साधन नहीं था। ऐसे में घर चलाने के साथ बेटियों की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और स्वरोजगार के माध्यम से परिवार को संभालने का निर्णय लिया।
इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त होने पर उन्होंने अपनी ओर से भी राशि मिलाकर दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। अब दोनों भैंसों से प्राप्त दूध की बिक्री उनके परिवार की आजीविका का सहारा बन रही है।
इंदु लता के लिए डेयरी व्यवसाय का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि वे अपनी चारों बेटियों की शिक्षा जारी रख पा रही हैं। उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और दो अन्य बेटियां स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। पति के निधन के बाद उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इंदु लता की कहानी बताती है कि आर्थिक सहायता मिलने पर महिलाएं कठिन पारिवारिक परिस्थितियों में भी स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकती हैं। सक्षम योजना से मिले ऋण ने उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया, जिससे वे परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों के भविष्य को भी संवार रही हैं।
महतारी वंदन योजना से सरिता तिग्गा के हुनर को मिला सहारा, सिलाई कार्य से बढ़ा रहीं परिवार की आमदनी

महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके घरेलू खर्चों के साथ छोटी स्वरोजगार गतिविधियों को भी संबल प्रदान कर सकती है। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा इसका उदाहरण हैं। उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं और परिवार में तीन बच्चे हैं। सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों का पालन-पोषण करना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।
सरिता तिग्गा घर पर सिलाई का काम करती हैं और अपने हुनर से परिवार की आय में योगदान देती हैं। सिलाई कार्य को नियमित रूप से जारी रखने के लिए उन्हें धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी पड़ती है। इसके लिए महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।
सरिता इस राशि का उपयोग सिलाई कार्य से जुड़ी आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं, जिससे उन्हें अपना काम जारी रखने में मदद मिलती है। मजदूरी से होने वाली पारिवारिक आय के साथ सिलाई कार्य से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है।
सरिता का अनुभव बताता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके छोटे व्यवसाय और कौशल आधारित स्वरोजगार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे महिलाएं परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी बढ़ाने के साथ अपनी कार्यक्षमता का भी उपयोग कर पाती हैं।
योजनाओं से मिल रहा अवसर, परिवारों के बेहतर भविष्य की मजबूत हो रही नींव
सरगुजा जिले के इन पांच हितग्राहियों की कहानियों में परिस्थितियां और जरूरतें अलग-अलग हैं, लेकिन सभी में एक समानता हैशासकीय योजनाओं से मिले सहयोग का उपयोग कर अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास। पंकज साहू ने सौर ऊर्जा अपनाकर बिजली खर्च कम किया, कृष्णा यादव को छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिली, हर्षिता खत्री ने उद्योग स्थापित कर स्वरोजगार के साथ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया, इंदु लता गुप्ता ने डेयरी व्यवसाय से चार बेटियों की शिक्षा को संबल दिया और सरिता तिग्गा ने महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग अपने सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने में किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद नागरिकों तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। इन योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली सहायता परिवारों को आर्थिक चुनौतियों से निपटने, अपने कौशल का उपयोग करने और आय के नए साधन विकसित करने में सहयोग प्रदान कर रही है।</description><guid>20515</guid><pubDate>15-Oct-2026 6:46:37 pm</pubDate></item><item><title>हल्दी बीज वितरण में अनियमितता: कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दिए जांच के निर्देश, दोषी अधिकारी-कर्मचारी पर होगी कार्रवाई</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20514</link><description>रायपुर। कृषि विभाग के अनुशांगिक संस्था उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत हल्दी बीज वितरण में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देशानुसार मामले की जाँच प्रारंभ कर दी गई है तथा जाँच के लिए संचालनालय स्तर से टीम भी गठित की गई है।
जिलों में हल्दी बीज वितरण से संबंधित शिकायतों के परिप्रेक्ष्य में संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा जिला अधिकारियों से हितग्राहीवार रोपित बीज की मात्रा, बीज प्रदायक संस्थाओं द्वारा प्रदाय बीज की मात्रा एवं गुणवत्ता तथा हल्दी बीज रोपण करने वाले कृषकों को भुगतान की गई अनुदान राशि की स्थिति सहित आवश्यक जानकारी और अभिलेख माँगे गए हैं।उद्यानिकी विभाग द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कृषकों द्वारा रोपित किये गये हल्दी बीज से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज, भुगतान संबंधी विवरण तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराई जाए, ताकि शिकायतों की तथ्यात्मक जाँच कर शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा सके।
डिजिटल क्रॉप सर्वे के भी निर्देश
जाँच प्रक्रिया के अंतर्गत किसानों के खेतों में रोपित हल्दी फसल की वास्तविक स्थिति, रोपित रकबा का सत्यापन करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही बीज वितरण से संबंधित अभिलेखों, बीज प्रदायक संस्थाओं के विवरण, देयकों, पंजीयन टैग तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी का परीक्षण किया जाएगा। किसानों के खेतों में रोपित फसल के जीपीएस आधारित फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके।
अनुदान भुगतान पर रोक
उल्लेखनीय है कि राज्य में उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य पोषित योजनांतर्गत 1300 हेक्टेयर हल्दी क्षेत्र विस्तार का कार्यक्रम लिया जा रहा है। इस योजनांतर्गत स्वयं के स्तर से प्रमाणित हल्दी बीज का रोपण करने वाले कृषकों को प्रति हेक्टेयर 46 हजार रूपए तक अनुदान देने का प्रावधान है। योजनांतर्गत बीज की व्यवस्था स्वयं कृषक द्वारा की जाकर अनुदान हेतु आवेदन जिला अधिकारी को प्रस्तुत करने पर मैदानी अमले से सत्यापन उपरांत अनुदान की राशि कृषक के बैंक खाते में भुगतान की जाती है। कृषकों द्वारा रोपित की गई हल्दी फसल के प्रमाणित बीज वितरण से संबंधित शिकायतों एवं सत्यापन की प्रक्रिया को देखते हुए विभाग द्वारा अनुदान भुगतान की कार्यवाही फिलहाल रोक दी गई है। कृषकों द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिलेखों, रोपित बीज की मात्रा एवं रकबा तथा फसल की स्थिति के सत्यापन की जाँच के बाद ही आगे की भुगतान प्रक्रिया के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
जाँच में अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित संस्था दोषी पाए जाते हैं कानूनी कार्रवाई की जायेगी
मंत्री श्री नेताम के निर्देश पर प्रारंभ की गई जाँच का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुँचाना है। विभाग ने निर्देशित किया है कि जाँच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित संस्था दोषी पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। जाँच पूरी होने तथा संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। जाँच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।</description><guid>20514</guid><pubDate>15-Oct-2026 6:30:14 pm</pubDate></item><item><title>कुपोषण और एनीमिया से लड़ने छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी पहल, घर-घर पहुंचेंगे मुनगा के पौधे</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20513</link><description>रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य में कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से समाप्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई।
मुनगा के औषधीय और पोषण संबंधी गुण
बैठक में बताया गया कि मुनगा (सहजन) की फलियों और पत्तियों में पोषक तत्वों का अपार भंडार होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे नियमित भोजन में शामिल करने से कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम में काफी मदद मिलती है, विशेषकर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद फायदेमंद है।
अभियान की मुख्य रूपरेखा और निर्देश
अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे और हर घर में इनका रोपण व देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। नर्सरी में पौधों का तैयार होना उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में मुनगा के पौधे तैयार किए जाएंगे। फरवरी से मार्च माह के दौरान इन्हें घर-घर वितरित कर रोपित किया जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टर इसकी निगरानी करेंगे।
आंगनबाड़ी, स्कूल और छात्रावासों में लगाए जाएंगे मुनगा के पौधे
राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी मुनगा के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराकर लगाए जाएंगे। पौधों के रोपण, उनकी सुरक्षा और सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि हर पौधे के जीवित रहने की दर और पोषण स्तर पर सीधी नजर रखी जा सके।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई प्रमुख विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग इस अभियान का नोडल विभाग होगा, जो आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राही चयन, पोषण शिक्षा और दैनिक निगरानी करेगा। राज्य के करीब 23 हजार 500 स्कूलों में मुनगा पौधे का रोपण कर शाला पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा और मध्याह्न भोजन में मुनगा भाजी शामिल की जाएगी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
ग्राम पंचायत स्तर पर बाड़ियों की पहचान, नर्सरी तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से जन-जन तक अभियान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग गुणवत्तापूर्ण मुनगा कलम व उन्नत पौधे तैयार करने, रोपण तकनीक, जैविक खाद और पौध सुरक्षा में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। इसके लिए वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।
बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव भूवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</description><guid>20513</guid><pubDate>15-Oct-2026 5:54:18 pm</pubDate></item><item><title>सेवा संकल्प अभियान : धान के पैरे से धनेश्वरी ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई पहचान, कला को बनाया कमाई का जरिया</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20512</link><description>रायपुर। खेतों में धान की कटाई के बाद बचने वाला पैरा भी किसी के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकता है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम अवरीद निवासी धनेश्वरी धीवर ने अपनी मेहनत, लगन और रचनात्मकता से इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने पैरा आर्ट की कला सीखी और आज इसी हुनर के बल पर घर बैठे अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। कभी केवल अपनी रुचि के लिए सीखी गई कला अब उनकी आजीविका का आधार बन गई है। इतना ही नहीं, धनेश्वरी अब दूसरों को भी पैरा आर्ट का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बिहान से मिला अवसर, नाबार्ड के प्रशिक्षण ने संवारा हुनर
धनेश्वरी धीवर की आत्मनिर्भरता की यात्रा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद शुरू हुई। नाबार्ड के सहयोग से उन्हें पैरा आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पैरे से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करने की बारीकियां सीखीं। अपनी रुचि और निरंतर अभ्यास के माध्यम से उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल की। धीरे-धीरे उनका हुनर निखरता गया और उन्होंने पैरा आर्ट को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
आज धनेश्वरी घर पर ही पैरा आर्ट की कलाकृतियां तैयार कर रही हैं और उनसे अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। इस कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें रोजगार के लिए घर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अपनी कला को समय देकर आय अर्जित कर पा रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
अपने हुनर से दूसरों के सपनों को भी दे रहीं आकार
धनेश्वरी धीवर की सफलता केवल स्वयं तक सीमित नहीं है। पैरा आर्ट में दक्षता हासिल करने के बाद वे अब प्रशिक्षक की भूमिका भी निभा रही हैं। वे अन्य लोगों को पैरा आर्ट की तकनीक और कलाकृतियां तैयार करने का प्रशिक्षण दे रही हैं, ताकि वे भी इस कला को सीखकर स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकें। इस तरह उनका हुनर न केवल उनकी अपनी आजीविका का माध्यम बना है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार की संभावनाएं तैयार कर रहा है।
श्रीमती धनेश्वरी बताती हैं कि पैरा आर्ट ने उन्हें घर बैठे काम करने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर दिया है। बिहान से जुड़ाव और नाबार्ड के प्रशिक्षण ने उनके हुनर को नई दिशा दी। आज वे अपनी कला के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और दूसरों को प्रशिक्षण देकर अपने अनुभव का लाभ भी पहुंचा रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रहा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं की रुचि और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियां उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
धनेश्वरी धीवर ने अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनकी कहानी इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को पहचान देकर न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और आत्मविश्वास की नई राह खोल सकती हैं।</description><guid>20512</guid><pubDate>15-Oct-2026 5:10:21 pm</pubDate></item><item><title>सेवा की कहानी- उन्नत उपकरण सहायता योजना से टोकेश्वरी साहू को बुनाई कार्य में मिली सहूलियत</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20511</link><description>रायपुर। हाथकरघा विभाग द्वारा संचालित उन्नत उपकरण सहायता योजना पारंपरिक बुनकरों के लिए आधुनिक सुविधाओं का माध्यम बन रही है। योजना के तहत बुनकरों को नए उन्नत करघे और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनका कार्य आसान होने के साथ उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हो रही है। योजना का लाभ राजनांदगांव जिले के मुख्यालय में गायत्री नगर वार्ड क्रमांक 13 निवासी एवं आशा नगर उप समिति की सदस्य टोकेश्वरी साहू को भी मिला है।
टोकेश्वरी साहू लंबे समय से बुनाई कार्य से जुड़ी हुई हैं। पहले उन्हें लकड़ी की मशीन से काम करना पड़ता था। पारंपरिक मशीन से कार्य करने में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। काम में अधिक समय और मेहनत लगती थी तथा उत्पादन को बेहतर बनाना भी चुनौतीपूर्ण था। उन्नत उपकरण सहायता योजना के तहत उन्हें लोहे का नया उन्नत करघा उपलब्ध कराया गया। आधुनिक करघा मिलने से अब उनके बुनाई कार्य में काफी सहूलियत हो रही है। पहले की तुलना में काम करना आसान हुआ है और वे बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इस उन्नत उपकरण सहायता योजना पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, उनके कार्य को सुविधाजनक बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
श्रीमती साहू ने बताया कि उन्नत करघा मिलने से बुनाई कार्य में समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। अब वे अधिक सुविधा के साथ अपना काम कर पा रही हैं। आधुनिक उपकरण से उन्हें अपने कार्य को विस्तार देने और उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिला है। योजना से मिली सहायता उनके लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। योजना के माध्यम से बुनकरों को अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ बेहतर आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। टोकेश्वरी साहू ने उन्नत उपकरण सहायता योजना के तहत नया उन्नत करघा एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस सहायता से उनके बुनाई कार्य में नई सुविधा और आत्मविश्वास आया है।</description><guid>20511</guid><pubDate>15-Oct-2026 3:55:42 pm</pubDate></item><item><title>विशेष लेख- गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन, किसानों को अब 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान, नई दर 2025-26 सत्र से ही लागू</title><link>https://ramraj.co/state.php?articleid=20510</link><description>धनंजय राठौर
सयुक्त संचालक जनसंपर्क, रायपुर
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ का आधार है। किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हों, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने किसानों के हितों को ध्यान में रखकर शक्कर कारखानों के लिए गन्ने की खरीदी 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025- 26 में की गई खरीदी का भुगतान भी बढ़े हुए दर पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत को कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों के हितों को अपनी नीतियों और निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। किसानों की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति सरकार संवेदनशील है। किसान हित से जुड़े विषयों पर प्राथमिकता से निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समृद्धि में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांव मजबूत होंगे। गांवों की समृद्धि से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने के लिए गन्ने के खरीदी मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रूपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रूपए प्रति क्विंटल कर दिया है। इस बढ़े हुए मूल्य का लाभ पेराई सत्र 2025-26 के गन्ने पर भी मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ का बोनस वितरित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी
देश के कुल गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान भले ही कम है लेकिन गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में राज्य अब नंबर वन हो गया है। राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से छत्तीसगढ़ में गन्ने की खरीदी दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की तुलना में अधिक हो गई है। खास बात यह है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी। इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।राज्य में पहले गन्ने की खरीदी 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती थी। नई दर से किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे। गन्ना मूल्य में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब खेती की लागत और किसानों की आमदनी के बीच संतुलन बनाना कृषि नीति की प्रमुख चुनौती है। 

देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के आधार पर निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य दिलाना तथा खेती को सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका बनाना है। गन्ना खरीदी दर में वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया कदम है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों को उनकी कुल बिक्री के अनुपात में अतिरिक्त आमदनी मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और हमारे अन्नदाता निरंतर समृद्ध हों-इसी संकल्प के साथ हमारी सरकार आगे बढ़ रही है। नई दर का लाभ कीमतों में बढ़ोतरी से पहले बेचे गए गन्ने पर भी लागू होगी। इससे चालू पेराई सत्र में अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके किसानों को भी राहत मिलेगी। यह व्यवस्था मूल्य वृद्धि के लाभ को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।गन्ने की खरीदी दर में वृद्धि का असर केवल किसानों की आमदनी तक सीमित नहीं है। बेहतर मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन
गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में 14 वां स्थान है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 4 प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं, भोरमदेव सहकारी चीनी मिल (कवर्धा), महामाया सहकारी चीनी मिल (सूरजपुर), सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी चीनी मिल (पंडरिया, कबीरधाम) और मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल (बालोद) है। छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर, सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर व रायपुर जिलो में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है । सर्वाधिक उत्पादन देने वाले जिलो में कबीरधाम, जगदलपुर एवं सरगुजा जिले आते है।</description><guid>20510</guid><pubDate>15-Oct-2026 3:45:59 pm</pubDate></item></channel></rss>