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स्वामी विवेकानंद ने दुनिया में बढ़ाया भारत की संस्कृति एवं सनातन का मान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अल्पायु में ही संपूर्ण विश्व को भारत की सनातन संस्कृति, अध्यात्म और दर्शन से परिचित कराते हुए देश का सम्मान बढ़ाया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित सेंड ऑफ सेरेमनी समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर प्रतिवर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है तथा राष्ट्रीय युवा उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह उत्सव भारत की युवा ऊर्जा, रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण की भावना का सशक्त प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हम छत्तीसगढ़ वासियों के लिए यह बड़े सौभाग्य की बात है कि स्वामी विवेकानंद ने अपना अधिकांश समय रायपुर में बिताया। बूढ़ा तालाब एवं डे-भवन जैसी पावन स्थलों की स्मृतियाँ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने के लिए 75 प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया गया है, जो पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। इनमें 45 युवा विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग से, 1 युवा डिजाइन फॉर भारत ट्रैक से तथा 29 प्रतिभागी सांस्कृतिक ट्रैक्स से शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ के युवाओं का प्रतिनिधित्व भारत की युवा शक्ति, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और विकसित भारत के संकल्प में सहभागी बनने का सुनहरा मौका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोकनृत्य, लोकगीत और युवा नेतृत्व का प्रदर्शन करेंगे। इससे छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू पूरे देश में बिखरेगी और राज्य गौरवान्वित होगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय स्तर पर चयनित सभी प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के युवा 9 जनवरी को नई दिल्ली पहुँचकर देश के विभिन्न प्रांतों से आए युवा कलाकारों एवं यंग लीडर्स से मुलाकात करेंगे और विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। 11 जनवरी को इसरो के गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मिलेंगे और उनके अंतरिक्ष अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस पर यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की पहचान है और युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश – “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” – का उल्लेख करते हुए युवाओं से इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि जहाँ युवा समूह होता है, वहाँ ऊर्जा का स्वाभाविक संचार होता है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश के यंग लीडर्स सभी क्षेत्रों में नेतृत्व करें। हमारी सरकार ने बेहतर व्यवस्थाओं के साथ विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक युवा महोत्सव का सफल आयोजन कराया है। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों की सराहना भी की। श्री साव ने भी सभी चयनित प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्य मंच से चयनित प्रतिभागियों को वेशभूषा किट प्रदान किए। साथ ही कुछ प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
इस मौके पर युवा आयोग अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण एवं प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्च शिक्षा व राजस्व विभाग की दो साल की उपलब्धियां गिनाईं
रायपुर। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मंगलवार को संवाद भवन में प्रेसवार्ता आयोजित कर अपने विभागों की दो साल की उपलब्धियां गिनाई। मंत्री टंकराम ने बताया, वर्ष 2023-24 में उच्च शिक्षा विभाग का बजट 1212.75 करोड़ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1822.75 करोड़ हो गया है। इस तरह 50 प्रतिशत की वृध्दि की गई थी।
मंत्री वर्मा ने बताया, सत्र 2024-25 से प्रदेश के 09 राजकीय विश्वविद्यालयों में से 07 विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत 42 स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (जैसे गार्डनिंग, मल्टीमीडिया एवं एनिमेशन), 108 जेनेरिक इलेक्टिव कोर्स एवं एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स का निर्माण किया गया है। इसके अंतर्गत शोध, गुणवत्ता एवं इन्डस्ट्री कोलेबोरेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रुसा कार्यालय में 2 सदस्यीय रिसर्च क्वालिटी इण्डस्ट्रियल एकेडमिया कोलेबोरेशन सेल (RQIACC) का गठन किया गया है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है।
उन्होंने बताया, वर्ष 2025 में 366 सहायक प्राध्यापकों को पदोन्नत प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई है। साथ ही 151 स्नातक प्राचार्य एवं 07 स्नातकोत्तर प्राचार्यों के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई है। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के 595 पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गई है। इसके अलावा इस वर्ष सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 एवं क्रीडाधिकारी के 25 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ है। प्रयोगशाला तकनीशियन के 233 पदों पर भर्ती की गई है। प्रयोगशाला परिचारक के 430 पदों पर व्यापम द्वारा परीक्षा आयोजित की गई एवं परीक्षा परिणाम जारी हो चुका है। वर्तमान में भर्ती प्रक्रियाधीन है।
मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया, शासकीय महाविद्यालयों के 474 सहायक प्राध्यापकों को वरिष्ठ वेतनमान प्रदान किया गया है। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कुल 324 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान प्रदान किया गया है। प्रदेश के कुल 343 शासकीय महाविद्यालयों में से 254 महाविद्यालय नैक मूल्यांकन के लिए पात्र है, जिसमें से 200 महाविद्यालयों का नैक से मूल्यांकन हो गया है। प्रदेश के 09 राजकीय विश्वविद्यालयों में से 05 विश्वविद्यालयों का नैक से मूल्यांकन हो गया है। प्रदेश के 02 राजकीय विश्वविद्यालय, 01 निजी विश्वविद्यालय एवं 01 शासकीय महाविद्यालय को नैक द्वारा A+ ग्रेड प्राप्त है। प्रदेश के 02 निजी विश्वविद्यालय, 02 शासकीय महाविद्यालय, एवं 08 निजी महाविद्यालय को नैक द्वारा A ग्रेड प्राप्त है।
उन्होंने बताया, महाविद्यालयों में अध्ययन व्यवस्था को सुचारु रुप से संचालित करने प्रदेश के महाविद्यालयों में नवीन अतिथि व्याख्याता नीति-2024 का क्रियान्वयन किया गया है। वर्तमान सकल नामांकन अनुपात (GER) 27.5 प्रतिशत को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़ाने हेतु पोषक शाला संपर्क अभियान चलाया गया है। प्रदेश में सत्र 2024-25 एवं 2025-26 में 8 नवीन शासकीय एवं 11 नवीन अशासकीय महाविद्यालय प्रारंभ किये गये।
मंत्री वर्मा ने बताया, पीएम-उषा भारत सरकार की योजना के अंतर्गत बहु संकायी शिक्षा एवं शोध विश्वविद्यालय (MERU) के रूप में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर को विकसित करने 100 करोड़ का अनुदान दिया गया है। पीएम उषा के अंतर्गत ही पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर तथा अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर तथा पं. सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर को 20-20 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया गया है। पीएम-उषा योजना के अंतर्गत ही प्रदेश के 12 महाविद्यालयों को सुदृढीकरण के लिए 5-5 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया गया है।
उन्होंने बताया, प्रदेश में राष्ट्रीय सेवा योजना की कुल अनुदानित इकाईयों की संख्या 1083 एवं स्ववित्तीय इकाईयों की संख्या 15 है। वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय सेवा योजना राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य के 02 स्वयं सेवक छात्राओं को प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य के 01 कार्यकम अधिकारी एवं 01 स्वयं सेवक छात्रा को राष्ट्रीय सेवा योजना राष्ट्रीय पुरस्कार की प्राप्ति हुआ है। सत्र 2024-25 में प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कुल विद्यार्थियों की संख्या 2,95,743 है। इनमें से 2,44,072 विद्यार्थी स्नातक स्तर पर एवं 51,671 स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत है। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के सभी संकायों के स्नातक प्रथम वर्ष में कुल 1,46,492 सीटें हैं। राज्य की नीति के अनुरुप विभाग द्वारा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को त्वरित एवं पारदर्शी बनाने ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है।
मंत्री वर्मा ने बताया, छात्रवृत्तियों का वितरण NSP पोर्टल से किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की योजना ONOS (One Nation One Subscription) एवं NDLI (National Digital Library of India) क्लब के माध्यम से प्रदेश के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को डिजीटल अध्ययन एवं शोध सामग्री उपलब्ध कराया जा रहा है।
जानिए आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना
मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया GATI (गुड गवर्नेस, एक्सेलरेटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री) पर जोर देने छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन योजना तैयार कर वर्ष 2025-26 के बजट में 50 करोड़ रु. रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के महाविद्यालयों में संरचनात्मक एवं गुणात्मक वृध्दि तथा प्राध्यापकों को शोध के क्षेत्र में प्रोत्साहन देने के लिए सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस योजना एवं राज्य रिसर्च एवंइनोवेशन योजना (शोध प्रोत्साहन) प्रारंभ की गई है। कौशल विकास के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठानों से MOU किया जा रहा है। अब तक नंदी फाउंडेशन एवं नेसकॉम से अनुबंध हो चुका है। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों/ विषयों (इलेक्ट्रॉनिक्स, सेरिकल्चर, फिशरीज, टसरटेक्नॉलॉजी आदि) का अध्यापन आरम्भ किया जा रहा है।
उन्होंने बताया, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में नियुक्ति प्रदान किये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। कौशल विकास विभाग एवं तकनीकी विभाग से एमओयू कर कौशल/उद्यमिता आधारित पाठ्यचर्याओं को संचालित कर स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। औद्यागिक प्रतिष्ठानों एवं शैक्षणिक संस्थानों के मध्य सहयोगात्मक समन्वय स्थाापित कर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चार वर्षीय बीएड/आईटीईपी एवं बीपीएड आदि पाठ्यक्रम का संचालन किया जाना है।
जमीन से जुड़े काम के लिए अब तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं
मंत्री वर्मा ने बताया, जमीन से जुड़े किसी भी काम के लिए अब तहसील कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है। भूमि व्यपर्तन की प्रक्रिया के लिए 2 करोड़ रुपए का प्रावधान है। पूर्व सरकार द्वारा बेची गई सरकारी जमीन की जांच जारी है। तहसीलदार के 30 और नायब तहसीलदार के लिए 15 नए पदों की स्वीकृत की गई है। राजस्व प्रकरणों में सुधार के लिए तहसीलदार को अधिकार दिया गया है। अवैध कालोनी रोकने 5 डिसमिल से कम भूमि के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है। छत्तीसगढ़ जन आवास योजना के अंतर्गत TNC का पालन कर के अपनी जमीन बेच सकता है। हाउसिंग बोर्ड के लिए निर्माण के लिए जमीन देने का फैसला लिया गया है।
80 हजार हितग्राहियों को मिल चुका स्वामित्व कार्ड
उन्होंने आगे बताया, स्वामित्व कार्ड 80 हजार हितग्राहियों को मिल चुका है। 10 लाख हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के सभी तहसील कार्यालय में कंप्यूटर प्रिंटर के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राजस्व विभाग के रिक्त पदों को भरने के मुख्यमंत्री से चर्चा चल रही है। 2 साल राजस्व विभाग में बहुत से परिवर्तन लाए हैं। किसान ऋण पुस्तिका के लिए भटकते थे, जल्द ही उसका भी निराकरण किया जाएगा।
लगातार विवाद और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के चलते बालोद, छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जम्बूरी पर भ्रम की स्थिति
रायपुर। छत्तीसगढ़ भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जम्बूरी, जो बालोद में 9 जनवरी से आयोजित की जानी थी, उसे लगातार सामने आ रहे प्रशासनिक विवादों एवं गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को ध्यान में रखते हुए स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
यह निर्णय स्काउट्स एंड गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के वैधानिक अध्यक्ष एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में राज्य परिषद उपाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ सोमवार, 5 जनवरी को आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
बैठक में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि पूर्व में राज्य कार्यकारिणी एवं राज्य परिषद द्वारा राजधानी क्षेत्र नया रायपुर में राष्ट्रीय/आदिवासी रोवर–रेंजर जम्बूरी आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद राज्य परिषद एवं कार्यकारिणी की अनुमति और सहमति के बिना राज्य स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जम्बूरी का आयोजन स्थल बदलकर छोटे कस्बे बालोद में निर्धारित कर दिया गया, जो कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के संविधान, नियमों एवं प्रक्रियाओं का सीधा उल्लंघन है।
बैठक में यह भी गंभीर तथ्य सामने आया कि राज्य सरकार के बजट में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय जम्बूरी के लिए वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत 10 करोड़ रुपये की राशि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के खाते में स्थानांतरित न कर जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। यह कदम न केवल संस्था की स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि इसे स्पष्ट वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना गया।
इसके अतिरिक्त, बिना विधिवत टेंडर खुले, जम्बूरी स्थल पर निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने, तथा टेंडर आमंत्रण भी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किए जाने के आरोपों ने पूरे आयोजन को संदेह के घेरे में ला दिया है। इन तथ्यों के चलते आयोजन से जुड़े भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी समाचार पत्रों के माध्यम से सामने आ रहे हैं।
बैठक में यह दोहराया गया कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स एक स्वतंत्र, राष्ट्रीय स्तर की स्वायत्त संस्था है, जो अपने संविधान, नियमावली और रूल्स बुक के अनुरूप संचालित होती है, न कि किसी विभागीय आदेश के आधार पर। राज्य स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संस्था के उद्देश्यों, सेवा भाव एवं अनुशासनात्मक ढांचे के विपरीत लगातार हस्तक्षेप किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
इन सभी तथ्यों, विवादों और आरोपों पर गहन विचार–विमर्श के पश्चात यह निर्णय लिया गया कि बालोद में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जम्बूरी को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इसके बावजूद जम्बूरी का आयोजन किया जाता है, तो उसकी समस्त प्रशासनिक, वित्तीय एवं नैतिक जिम्मेदारी राज्य स्कूल शिक्षा विभाग की होगी।
उल्लेखनीय है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल वर्तमान में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, छत्तीसगढ़ के राज्य अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपने पद से किसी प्रकार का इस्तीफा नहीं दिया है।
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियाँ तेज़ — राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की प्रथम बैठक संपन्न
रायपुर। जनगणना 2027 के संदर्भ में छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (एस.एल.सी.सी.सी.) की प्रथम बैठक आज मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना) मनोज पिंगुआ, निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय कार्तिकेय गोयल, एनआईसी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह मनोज पिंगुआ द्वारा समिति को अवगत कराया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य में गृह विभाग जनगणना के लिए नोडल विभाग है, जो भारत सरकार, जनगणना निदेशालय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना संपादन में अपनी भूमिका का निर्वहन करता है।
बैठक के प्रारंभ में निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय कार्तिकेय गोयल द्वारा पावर प्वाइंट प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 की रूपरेखा, प्रारम्भिक तैयारियाँ, डिजिटल रोडमैप एवं संगठनात्मक ढाँचे के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जनगणना निदेशक द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि भारत की जनगणना 2027 देश की प्रथम डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल एप के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा तथा संपूर्ण कार्य की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन वेब-पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इस बार जनगणना में स्व-गणना (Self Enumeration) का प्रावधान भी किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य शासन के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था की जाएगी।
निदेशक जनगणना द्वारा समिति को यह भी सूचित किया गया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस वृहद कार्य में लगभग 63 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक कार्मिकों की भी आवश्यकता होगी। निदेशक द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि जनगणना के प्रथम चरण के पूर्व परीक्षण का कार्य छत्तीसगढ़ में जिला कबीरधाम की कुकदूर एवं जिला महासमुंद की महासमुंद तहसीलों के कुछ चयनित ग्रामों में तथा रायपुर जिले के रायपुर नगर निगम के एक वार्ड में 10 नवम्बर से 30 नवम्बर 2025 के दौरान संपादित कराया गया। यह पूर्व-परीक्षण का कार्य राज्य शासन एवं संबंधित जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। पूर्व-परीक्षण के अनुभवों को भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जनगणना 2027 के प्रथम चरण में मकान-सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के बीच 30 दिवस की अवधि में किया जाना प्रस्तावित है। मुख्य सचिव विकास शील द्वारा संबंधित विभागों को स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून आदि को ध्यान में रखते हुए उक्त 30 दिवस की अवधि निर्धारित करने के निर्देश दिए गए।
जनगणना 2027 के द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फरवरी 2027 में किया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव विकास शील द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे जनगणना के इस द्वितीय चरण को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करें। साथ ही सभी संबंधित विभागों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे आपस में समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना निदेशालय के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें, ताकि छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी जनगणना पूर्णतः डिजिटल स्वरूप में आयोजित की जा रही है, इसलिए सभी संबंधितों को उचित समय पर युक्तियुक्त प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की तैयारी की जाए। उन्होंने स्व-गणना की व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे नागरिक-अनुकूल और सुविधाजनक कदम बताया। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभागों में जनगणना 2027 के कार्य के समन्वय हेतु एक नोडल अधिकारी नामित करें।
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जनगणना 2027 राज्य के भविष्य की नीतियों, योजनाओं एवं संसाधन आवंटन की आधारशिला है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी विभाग साझा उत्तरदायित्व और समन्वित प्रयास के साथ इस राष्ट्रीय महत्त्व के कार्य को मिशन मोड में पूरा करेंगे। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे स्व-गणना एवं प्रत्यक्ष गणना दोनों प्रक्रियाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान करें, ताकि छत्तीसगढ़ राज्य में जनगणना 2027 का कार्य पूर्णतः सटीक, पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री साय ने सुकमा जिले के पंचायत प्रतिनिधियों से की आत्मीय मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन, रायपुर में हमर छत्तीसगढ़ जन भ्रमण योजना के अंतर्गत राजधानी भ्रमण पर आए सुकमा जिले की सुदूरवर्ती ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका हालचाल जाना।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अंचल का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को बस्तर के प्रत्येक गांव तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र में भी तीव्र गति से विकास कार्य संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदूर अंचलों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों को सुरक्षा और गति दोनों प्राप्त हो रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब अधिकांश गांवों में शासकीय राशन दुकानों की स्थापना की जा चुकी है तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में बस्तर क्षेत्र पूरी तरह नक्सलमुक्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर बस्तर के लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से बस्तर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को राजधानी भ्रमण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे यहां के विकास कार्यों को देखकर प्रेरित हों और अपने क्षेत्रों में भी चहुंमुखी विकास को बढ़ावा दें। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि हमर छत्तीसगढ़ जन भ्रमण योजना के अंतर्गत सुकमा जिले के सुदूरवर्ती विभिन्न ग्राम पंचायतों के लगभग 100 पंचायत प्रतिनिधि राजधानी रायपुर के दो दिवसीय भ्रमण पर आए हैं। भ्रमण के दौरान जनप्रतिनिधियों को मंत्रालय, जंगल सफारी, आदिवासी संग्रहालय, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और शॉपिंग मॉल जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन कराया गया।
धान खरीदी में करोड़ों की गड़बड़ी का खुलासा: अपेक्स बैंक रिपोर्ट के आधार पर 6 पर FIR, फड़ प्रभारी गिरफ्तार
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के धान खरीदी केंद्र कोनपारा में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान 6 करोड़ 55 लाख से अधिक की बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) जशपुर के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में खरीदी केंद्र के प्राधिकृत अधिकारी सहित कुल 6 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस ने धान खरीदी उपकेंद्र के फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव (39 वर्ष) निवासी ग्राम झारमुंडा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। मामले के अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि शीघ्र ही फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी राम कुमार यादव (61 वर्ष) की रिपोर्ट के अनुसार, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोनपारा के धान खरीदी उपकेंद्र में वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दर्शायी गई थी, जबकि मिलों एवं संग्रहण केंद्रों को केवल 1,40,663.12 क्विंटल धान ही भेजा गया। इस प्रकार 20,586.88 क्विंटल धान की कमी पाई गई। संयुक्त जांच दल ने भौतिक सत्यापन में पाया कि मौके पर धान उपलब्ध नहीं था और रिकॉर्ड के अनुरूप भारी कमी की पुष्टि हुई।
शासन को 6 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपए का नुकसान
जांच में प्रति क्विंटल 3100 रुपये की दर से धान की कीमत 6 करोड़ 38 लाख 19 हजार 328 रुपये आंकी गई। इसके अतिरिक्त धान पैकिंग में उपयोग किए गए 4,898 नग बारदाने (नए व पुराने) की कीमत 17 लाख 07 हजार 651 रुपये बताई गई। कुल मिलाकर शासन को 6 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपये की आर्थिक क्षति होना पाया गया। पुलिस ने इस मामले में भुनेश्वर यादव (प्राधिकृत अधिकारी), जयप्रकाश साहू (समिति प्रबंधक), शिशुपाल यादव (फड़ प्रभारी), जितेंद्र साय (कंप्यूटर ऑपरेटर),
अविनाश अवस्थी (सहायक फड़ प्रभारी), चंद्र कुमार यादव (उप सहायक फड़ प्रभारी) के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 320, 336, 338 एवं 61 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
फरार आरोपियों की तलाश जारी : एसएसपी
विवेचना के दौरान फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव की गिरफ्तारी की गई, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस टीम उनकी पतासाजी में जुटी हुई है। SSP शशिमोहन सिंह ने बताया कि अपेक्स बैंक जशपुर के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर धान खरीदी उपकेंद्र कोनपारा में करोड़ों रुपये की अनियमितता के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। शेष आरोपियों की तलाश जारी है। मामले में पुलिस की जांच निरंतर जारी है।
डबल इंजन सरकार का बड़ा ऐलान: बिलासपुर बनेगा छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन, 10–15 साल का विकास रोडमैप तैयार
रायपुर। छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार ने आज यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि आने वाले दशक में बिलासपुर राज्य का अगला ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक ने बिलासपुर के समग्र विकास के लिए एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक अभियान का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। बैठक में जिस प्रकार केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी दर्ज हुई, उसने यह साबित कर दिया कि बिलासपुर का विकास केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता का विषय बन चुका है।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल , विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर पूजा विधानी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण सभी एक ही मंच पर उपस्थित थे। इस संयुक्त उपस्थिति ने यह शक्तिशाली संदेश दिया कि बिलासपुर का विकास दिल्ली और रायपुर दोनों स्तरों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय से आगे बढ़ेगा और योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय प्रावधान और क्रियान्वयन में गति लाने के लिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक इच्छा-शक्ति पूरी तरह सक्रिय है।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में स्वयं बिलासपुर के अगले 10–15 वर्षों के शहरी विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल वर्तमान समस्याओं पर नहीं, बल्कि भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन, आवास, जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और समग्र नगर नियोजन पर व्यापक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “नाली से लेकर नगर नियोजन तक” कोई भी विषय चर्चा से बाहर नहीं छोड़ा गया। यही संदेश यह स्थापित करता है कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं कर रही, बल्कि बारीकी से जमीन पर लागू होने योग्य योजना बना रही है। इस दृष्टिकोण ने मुख्यमंत्री की छवि एक दूरदर्शी शहरी विकास नेता के रूप में और सुदृढ़ की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह भी संकेत दिया कि बिलासपुर को सिर्फ एक बड़े शहर के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के नए आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य हब विकसित किया जाएगा। लॉजिस्टिक सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और निवेश के नए अवसरों के साथ बिलासपुर को मध्य भारत का प्रमुख शहरी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।आने वाले वर्षों में बिलासपुर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आधुनिक नगरीय सुविधाएं, स्वच्छता व्यवस्था, सस्टेनेबल शहरी ढांचा और रोजगार सृजन के नए अवसर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। इससे न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र को नई आर्थिक दिशा मिलेगी।
बैठक में जनप्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी ने समावेशी राजनीति का स्पष्ट संदेश दिया। विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह स्थापित किया कि बिलासपुर का विकास किसी एक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के भविष्य का सामूहिक संकल्प है। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि विकास के प्रश्न पर दलगत राजनीति को पीछे छोड़ दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इससे यह संदेश गया कि बिलासपुर विकास रोडमैप केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने आवश्यक बजट प्रावधान और दीर्घकालिक निवेश योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
केंद्र और राज्य समन्वय के इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की शहरी विकास योजनाएं अब सीधे राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ चुकी हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन, हाउसिंग, नगरीय परिवहन और आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, जिससे बिलासपुर को विशेष लाभ मिलेगा।
बैठक के बाद मीडिया में प्रमुखता से यह संदेश उभरा कि बिलासपुर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन बनेगा। औद्योगिक निवेश, शहरी रोजगार, रियल एस्टेट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से यहाँ विकास की नई लहर उत्पन्न होने जा रही है।
बिलासपुर के विकास का यह अभियान प्रदेश की समग्र राजनीति में भी महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। शहरी विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना पर केंद्रित यह एजेंडा डबल इंजन सरकार की विकासोन्मुखी राजनीति की पहचान बनेगा। आज की बैठक ने यह स्थापित कर दिया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिलासपुर का विकास केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकल्प है। डबल इंजन सरकार की ताकत के साथ बिलासपुर अब राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
बिजली सब स्टेशन में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी, आसमान में उठे काले धुएं के घने गुबार
बिलासपुर। मोपका स्थित बिजली सब स्टेशन में अचानक भीषण आग लग गई है। आग लगते ही सब स्टेशन से काले धुएं का घना गुबार उठने लगा, जो दूर-दूर तक दिखाई दिया। इस घटना से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई है। वहीं घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई है और आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटी हुई है।
शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं एहतियातन आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित की गई है। संबंधित विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। फायर ब्रिगेड की टीम आग पर काबू पाने की कोशिश में लगी हुई है।
कलेक्टर गौरव सिंह ने समय-सीमा बैठक में दिए सख्त निर्देश, ई-ऑफिस व ई-अटेंडेंस का अनिवार्य पालन, अवैध उत्खनन पर कार्रवाई के आदेश
रायपुर। कलेक्टोरेट परिसर स्थित रेडक्रास सभाकक्ष में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने समय-सीमा की बैठक ली। बैठक में जिले के सभी विभागों के अधिकारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने कहा कि 01 जनवरी 2026 से ई-ऑफिस की शुरुआत हो चुकी है, अतः सभी विभाग शीघ्र ऑनबोर्ड होते हुए फाइलों का निराकरण अनिवार्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से करें। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-ऑफिस प्रणाली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर ने सभी विभागों को ई-अटेंडेंस के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने के भी निर्देश दिए और इसका अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा। उन्होंने अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी शिकायत प्राप्त होने पर राजस्व एवं खनिज विभाग द्वारा तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही कलेक्टर ने सभी नगरीय निकायों को अवैध कब्जों के विरुद्ध अभियान चलाने तथा शहर में साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता जनहित से जुड़े कार्यों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निराकरण करना है।
इस अवसर पर निगम आयुक्त विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन तथा डीएफओ लोकनाथ पटेल सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
तात्यापारा के 18 परिवारों का पक्के मकान का सपना हुआ साकार, विधायक राजेश मूणत ने सौंपे ‘मोर जमीन मोर मकान’ के अनुज्ञा पत्र
रायपुर। राजधानी रायपुर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के ‘मोर जमीन मोर मकान’ घटक के अंतर्गत जोन-7 के तात्यापारा वार्ड क्रमांक 36 के 18 पात्र परिवारों को अपने भूखंड पर पक्का मकान निर्माण हेतु अनुज्ञा पत्र प्रदान किए गए।
विधायक निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने हितग्राहियों को अनुज्ञा पत्र सौंपे। वर्षों से कच्चे व जर्जर मकानों में जीवन यापन कर रहे परिवारों के चेहरों पर अपने पक्के घर की खुशी साफ नजर आई।



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक राजेश मूणत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर नागरिक को पक्का मकान’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में ‘मोर जमीन मोर मकान’ योजना एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास जमीन होने के बावजूद आर्थिक कारणों से मकान नहीं बन पा रहा था, उनके लिए यह योजना वरदान साबित हो रही है। तात्यापारा के 18 परिवारों को मिले ये अनुज्ञा पत्र केवल कागज नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की नींव हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में हर गरीब के सिर पर पक्की छत सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और आगे भी अन्य वार्डों में आवास स्वीकृत किए जाएंगे।
पक्के आवास की अनुमति पाने वाले हितग्राहियों में शमीम बानो, गणेश निषाद, नेमकुंवर देवांगन, भरत बरवे, राजेंद्र कुमार, बीना बाई उबाले, मनोहर साहू, कम्मु बाई निर्मलकर, फुलू साहू, लक्ष्मी बाग गडा, संगीता राव बाउने, अंजलि निर्मलकर, गुरुवारू बाघ, यामनी तिवारी, संजय भोंडेकर, साधना बागड़े और नंदी शर्मा शामिल हैं। इस अवसर पर नगर निगम जोन-7 की अध्यक्ष एवं पार्षद श्वेता विश्वकर्मा उपस्थित रहीं।
10 जनवरी तक स्कूल बंद, कड़ाके की ठंड को देखते हुए लिया गया फैसला
सरगुजा। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ती ठंड को देखते हुए मौसम विभाग ने कड़ाके की शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। चेतावनी के बाद सरगुजा जिला प्रशासन ने स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जिले में अत्यधिक ठंड के चलते 10 जनवरी तक कक्षा पहली से पांचवीं तक के स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार सरगुजा संभाग में तापमान गिरकर 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे शीतलहर और तेज कनकनी का असर देखा जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश जारी किया गया है कि कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए अवकाश रहेगा।
हालांकि आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी शिक्षक और स्कूल कर्मचारी पूर्व निर्धारित समय पर विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। साथ ही शिक्षा विभाग ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों को ठंड से बचाव हेतु आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश भी दिए हैं।

जनपद पंचायत तखतपुर में अनियमितताओं का खुलासा, बायोमैट्रिक के बिना वेतन भुगतान पर जनपद अध्यक्ष ने जताई कड़ी नाराजगी
तखतपुर। जनपद पंचायत तखतपुर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की शह पर कर्मचारियों की मनमानी एक बार फिर उस समय उजागर हो गई, जब जनपद अध्यक्ष माधवी वस्त्रकार ने जनपद कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निरीक्षण के समय अधिकांश कर्मचारी अपने-अपने टेबल पर उपस्थित मिले और कार्य करते नजर आए, लेकिन जब बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली की जांच की गई, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
आधे से अधिक कर्मचारियों की बायोमैट्रिक में एंट्री ही नहीं
जनपद अध्यक्ष द्वारा पूछे जाने पर बताया गया कि कार्यालय में बायोमैट्रिक मशीन चालू है और उसी के माध्यम से अटेंडेंस दर्ज किया जाता है। लेकिन जब यह पूछा गया कि क्या सभी कर्मचारियों का डेटा एंट्री बायोमैट्रिक मशीन में की गई है, तो जानकारी दी गई कि केवल आधे कर्मचारियों की ही एंट्री हुई है, शेष कर्मचारियों का अटेंडेंस बायोमैट्रिक में दर्ज ही नहीं होता।
इस पर जनपद अध्यक्ष ने सवाल किया कि फिर कर्मचारियों का वेतन किस आधार पर तैयार किया जाता है? क्या बायोमैट्रिक अटेंडेंस के आधार पर या मैन्युअल हस्ताक्षर वाले उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार? जिसका जवाब और भी चौंकाने वाला रहा। उन्हें बताया गया कि न तो बायोमैट्रिक अटेंडेंस के आधार पर और न ही मैन्युअल उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार वेतन पत्रक तैयार किया जाता है, बल्कि सीईओ के निर्देश के अनुसार उपस्थिति और वेतन पत्रक बनाकर वेतन आहरण किया जाता है।
जनपद अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
इस पर जनपद अध्यक्ष माधवी वस्त्रकार ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पूरी तरह गलत प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपस्थिति रजिस्टर या बायोमैट्रिक अटेंडेंस के आधार पर ही वेतन पत्रक तैयार होना चाहिए और उसी के अनुसार भुगतान किया जाना चाहिए।
मनरेगा शाखा में तकनीकी सहायक मिले अनुपस्थित
इसके पश्चात जनपद अध्यक्ष ने मनरेगा शाखा का निरीक्षण किया, जहां आधे से अधिक तकनीकी सहायक अनुपस्थित पाए गए। जब उपस्थिति रजिस्टर की जांच की गई तो सामने आया कि अनेक तकनीकी सहायकों के पिछले दो दिनों के हस्ताक्षर रजिस्टर में दर्ज नहीं थे।
इस संबंध में बताया गया कि 1 तारीख को व्यस्तता के कारण विजिट रजिस्टर में एंट्री नहीं हो सकी, जबकि 2 तारीख की एंट्री अभी शेष है। इस पर जनपद अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि जो भी कर्मचारी विजिट पर जाते हैं, उन्हें पहले मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट रहे कि कौन कर्मचारी कहां है और कार्यालय में उपस्थित हुआ है या नहीं। इसके बाद जनपद अध्यक्ष ने अनुपस्थित तकनीकी सहायकों को उपस्थिति रजिस्टर में अनुपस्थित दर्ज करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर के आदेश की अवहेलना!
जनपद अध्यक्ष माधवी वस्त्रकार ने बताया कि कलेक्टर महोदय के स्पष्ट आदेश हैं कि 1 जनवरी से सभी शासकीय कार्यालयों में बायोमैट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य है। इसके बावजूद जनपद पंचायत तखतपुर में तीन महीने पहले बायोमैट्रिक मशीन लगने के बाद भी आधे से अधिक कर्मचारियों की एंट्री नहीं की गई, जिससे उनकी उपस्थिति दर्ज ही नहीं हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति लापरवाही है या जानबूझकर की गई मनमानी, यह जांच का विषय है, लेकिन यह तथ्य सामने आया है कि वेतन भुगतान उपस्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि सीईओ के निर्देश पर किया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
जनपद सदस्यों ने भी उठाए सवाल
निरीक्षण के दौरान मौजूद जनपद सदस्य मनहरण कौशिक ने कहा कि बायोमैट्रिक मशीन लगने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन सीईओ के निर्देश पर दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे जनप्रतिनिधियों के सम्मान को ठेस पहुंचती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
जनपद सदस्य रामकुमार सिंगरौली ने कहा कि जनपद पंचायत तखतपुर में सीईओ की मनमानी चरम पर है। जब मन होता है तब कार्यालय आते हैं और जब नहीं चाहते तो अनुपस्थित रहते हैं। आधे से अधिक कर्मचारियों की बायोमैट्रिक एंट्री न होना सीईओ की घोर लापरवाही को दर्शाता है। वहीं जनपद सदस्य ऋषभ कश्यप ने कहा कि जनपद के सीईओ तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं, जिससे आम जनता की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने शासन से मांग की कि ऐसे सीईओ को तत्काल हटाकर किसी ईमानदार, नियमों का पालन करने वाले और समय के पाबंद अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान जनपद अध्यक्ष माधवी वस्त्रकार के साथ जनपद सदस्य मनहरण कौशिक, रामकुमार सिंगरौल एवं ऋषभ कश्यप उपस्थित रहे।
5 लाख की इनामी महिला नक्सली भूमिका ने किया आत्मसमर्पण, धमतरी पुलिस को बड़ी सफलता
धमतरी। नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत धमतरी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सक्रिय 5 लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता उर्फ लता उर्फ सोमारी ने पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। वह नगरी एरिया कमेटी की सदस्य और गोबरा एलओएस कमांडर के रूप में कार्यरत थी। छत्तीसगढ़ ओडिशा सीमावर्ती इलाकों में संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती थी। आत्मसमर्पण के बाद शासन की नीति के अनुरूप भूमिका को 50 हजार की प्रोत्साहन राशि दी गई। वहीं पुनर्वास का लाभ भी दिया जाएगा।
मूलतः ग्राम पुसनार, थाना गंगालूर जिला बीजापुर की रहने वाली 37 वर्षीय भूमिका पर शासन ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। लंबे समय तक माओवादी संगठन से जुड़े रहने के अनुभवों ने भूमिका को भीतर से तोड़ दिया था। संगठन के भीतर भेदभावपूर्ण व्यवहार, हिंसा पर आधारित विचारधारा और पारिवारिक व दांपत्य जीवन से लगातार वंचित रहना उसके लिए मानसिक बोझ बन चुका था। इन्हीं परिस्थितियों से क्षुब्ध होकर उसने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया।
2005 से माओवादी संगठन में रही सक्रिय
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भूमिका वर्ष 2005 से माओवादी संगठन में सक्रिय रही। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद वह वर्ष 2010 तक प्लाटून-01 में शामिल रही। इसके पश्चात उसे ओडिशा राज्य कमेटी में भेजा गया, जहां विभिन्न इकाइयों में कार्य करते हुए वर्ष 2011 से 2019 तक वह शीर्ष माओवादी नेता सीसीएम संग्राम की सुरक्षा में तैनात रही। वर्ष 2019 से 2023 के बीच उसने सीनापाली एरिया कमेटी में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में जिम्मेदारी निभाई, जबकि सितंबर 2023 में उसे गोबरा एलओएस कमांडर बनाया गया।
इन घटनाओं में शामिल थी भूमिका
संगठन में लगातार घटती संख्या के चलते हाल के समय में भूमिका नगरी एवं सीतानदी एरिया कमेटी के साथ संयुक्त रूप से सक्रिय थी। अपने लंबे नक्सली जीवन के दौरान वह कई गंभीर मुठभेड़ों में शामिल रही। वर्ष 2010 में ओडिशा के पड़कीपाली क्षेत्र में हुई मुठभेड़, जिसमें आठ नक्सली मारे गए, से लेकर बीजापुर, गरियाबंद और धमतरी के जंगलों में हुई अनेक घटनाओं में उसका नाम सामने आता रहा। वर्ष 2018 में बीजापुर के तिमेनार जंगल में मुठभेड़, वर्ष 2023 में गरियाबंद के ताराझार जंगल, वर्ष 2024 में धमतरी के एकावरी जंगल और वर्ष 2025 में मांदागिरी जंगल में हुई मुठभेड़ों में भी उसकी संलिप्तता रही। उसके विरुद्ध विभिन्न धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
बस्तर के जंगलों में फिर गूंजी बाघ की दहाड़, दशकों बाद वापसी के सबसे मजबूत संकेत
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर जंगलों से उम्मीद की आहट सुनाई दे रही है। दशकों बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत ने न सिर्फ वन विभाग बल्कि पूरे संभाग को चौकन्ना कर दिया है। कभी राष्ट्रीय पशु बाघ का मजबूत गढ़ रहा बस्तर, अब एक बार फिर उसी पहचान की ओर लौटता दिख रहा है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर से सटे जंगलों में, भानपुरी और मारेंगा बायपास के आसपास बाघ के ताज़ा पगमार्क मिले हैं। खास बात यह है कि इन निशानों के साथ एक शावक का पगमार्क भी देखा गया है, जिससे यह संभावना मजबूत हो गई है कि एक बाघ नए शिकार क्षेत्र की तलाश में आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि बीते करीब तीन दशकों से कांगेर नेशनल पार्क क्षेत्र में बाघ की सक्रिय मौजूदगी दर्ज नहीं की गई थी। ऐसे में यह पहला मौका हो सकता है जब इस इलाके में बाघ की वापसी को लेकर ठोस संकेत सामने आए हैं।
हालांकि यह खबर जितनी उत्साहजनक है, उतनी ही संवेदनशील भी। बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने विशेष निगरानी टीमें गठित कर दी हैं, जो लगातार बाघ के मूवमेंट रूट पर नजर रखे हुए हैं ताकि उसे किसी तरह का खतरा न हो। क्योंकि यह भी सच्चाई है कि छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों में बाघ की खाल तस्करी के सबसे ज्यादा मामले कांकेर जिले से सामने आए हैं। ऐसे में बस्तर जैसे प्राकृतिक पर्यावास में बाघ की वापसी, सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी भी साथ लेकर आई है।
वहीं बस्तर के सीसीएफ आलोक तिवारी के अनुसार, इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फिलहाल छह बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है। अब देखना होगा कि क्या बस्तर के जंगल एक बार फिर बाघों का सुरक्षित घर बन पाएंगे, या यह वापसी सिर्फ एक अस्थायी दस्तक बनकर रह जाएगी.
चिल्फी घाटी में शासकीय भूमि से अवैध कब्जा हटाया गया, प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर की कार्रवाई
कवर्धा। जिले के चिल्फी घाटी क्षेत्र में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। यह कार्रवाई एसडीएम बोड़ला सागर सिंह की मौजूदगी में पुलिस और ग्राम पंचायत प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
जानकारी के अनुसार, चिल्फी क्षेत्र में वर्ष 2019 में पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों ने हाल ही में गृह मंत्री विजय शर्मा से शिकायत की थी। शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच के बाद अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई।
एसडीएम सागर सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत चिल्फी द्वारा पूर्व में प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन इदरीश नामक व्यक्ति द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर धार्मिक प्रतीक का निर्माण कराया जा रहा था। पूर्व में पंचायत की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए, इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। बाद में तीन दिन का अतिरिक्त समय भी दिया गया ताकि संबंधित व्यक्ति अपना सामान हटा सके, लेकिन नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इसके बाद आज ग्राम पंचायत, प्रशासन और पुलिस के द्वारा मिलकर अवैध अतिक्रमण को खाली कराया गया है।
एसडीएम ने बताया कि इस स्थान का उपयोग ग्राम पंचायत द्वारा बिरसा मुंडा चौक के रूप में किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है और आगे की भूमि ग्राम पंचायत को सुपुर्द की जाएगी।
PM श्री स्कूल में आवारा कुत्तों का हमला मामले पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर शिक्षा सचिव से मांगा शपथपत्र
बिलासपुर। खमतराई स्थित PM श्री स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के हमले से एक छात्र और दो शिक्षिकाएं घायल हो गईं। घटना के बाद स्कूल परिसर में दहशत का माहौल है और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने इस मामले में शिक्षा सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव को भी पूर्व में दिए गए आदेशों के पालन की स्थिति पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। यदि पहले जारी निर्देशों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो इस तरह की घटना रोकी जा सकती थी।
फिलहाल घायल छात्र और शिक्षिकाओं का इलाज जारी है। वहीं, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को कोर्ट के समक्ष जवाब देना होगा।
सैनिक स्कूल स्थल चयन को लेकर बवाल, भाजपा नेता ने DEO पर लगाया पक्षपात का आरोप…
गरियाबंद। गरियाबंद जिले में स्वीकृत सैनिक स्कूल के लिए स्थल आबंटन की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है. राजिम क्षेत्र में कथित तौर पर गुपचुप तरीके से स्थल चयन की तैयारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी फूट पड़ी है. वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक मुरलीधर सिन्हा ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पर पक्षपात और जनप्रतिनिधियों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया है.

मुरलीधर सिन्हा का आरोप है कि सैनिक स्कूल के लिए जिले के सभी पांचों अनुविभागों में उपयुक्त भूमि की जानकारी मंगाई जानी थी, लेकिन इसके बजाय जिला शिक्षा अधिकारी ने केवल राजिम अनुविभाग के एसडीएम को पत्र लिखकर राजिम के आसपास 70 एकड़ भूमि की मांग कर दी. उन्होंने इसे प्रभावशाली नेताओं के इशारे पर लिया गया फैसला बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के खिलाफ है और किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है.

सिन्हा ने जारी बयान में कहा कि गरियाबंद जिले को सैनिक स्कूल की स्वीकृति 13 साल के लंबे संघर्ष के बाद मिली है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार द्वारा 100 नए सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा के बाद उन्होंने तत्कालीन विधायक डमरूधर पुजारी के साथ मिलकर दिल्ली में लगातार प्रयास किए. इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह, सांसद चंदूलाल साहू, पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई स्तरों पर पत्राचार और संपर्क के बाद गरियाबंद को यह सौगात मिली. ऐसे में अब स्थल चयन को लेकर किसी भी तरह का विवाद खड़ा होना दुर्भाग्यपूर्ण है.
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय में स्थल उपलब्ध नहीं होने जैसी अधूरी जानकारी देकर किसी एक विशेष क्षेत्र में स्कूल खोलने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जैसे कृषि महाविद्यालय भवन के स्थल को लेकर अफसरों ने विवाद खड़ा किया, वैसा ही साया सैनिक स्कूल पर नहीं पड़ना चाहिए.
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर ने सफाई देते हुए कहा कि अब जिले के सभी पांचों अनुविभागों के एसडीएम को 70 एकड़ भूमि उपलब्धता की जानकारी के लिए पत्र जारी किया जा रहा है. प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर ही उपयुक्त स्थल का चयन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले केवल राजिम एसडीएम को पत्र लिखे जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग ने यह कदम उठाया है.