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रिटायरमेंट के बाद ग्रेच्युटी से वसूली पड़ी भारी: वन विभाग को हाईकोर्ट से झटका, कर्मी को राशि लौटाने का आदेश
पिथौरा। सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी से राशि काटना वन विभाग को भारी पड़ गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महासमुंद के सेवानिवृत्त वनरक्षक मकरध्वज यादव को राहत देते हुए विभाग की कार्रवाई निरस्त कर दी। कोर्ट ने ग्रेच्युटी से काटी गई 1,63,464 रुपए की राशि वापस करने का आदेश दिया है।
मकरध्वज यादव महासमुंद जिले के सांकरा के रहने वाले हैं। वे 31 मार्च 2020 को वनरक्षक के पद से रिटायर हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद संभागीय वन अधिकारी, महासमुंद ने वेतन निर्धारण में गलती बताते हुए उनकी ग्रेच्युटी से 1,63,464 रुपए काट लिए थे।
राशि वापस लेने के लिए यादव ने विभाग के अधिकारियों को कई आवेदन दिए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर विभाग के आदेश को चुनौती दी।
कोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 की धारा 4(6)(a) और 4(6)(b) में ग्रेच्युटी की जब्ती के लिए परिस्थितियां स्पष्ट की गई हैं। इन परिस्थितियों के बिना सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी से राशि काटना कानून के मुताबिक नहीं है। राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया और विभाग की ओर से की गई कटौती को सही बताया गया।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि यादव की सेवाएं धारा 4(6)(a) या 4(6)(b) में बताई गई किसी परिस्थिति के आधार पर समाप्त नहीं की गई थीं।
ऐसे में ग्रेच्युटी से राशि वसूलने के लिए कानून में जरूरी आधार मौजूद नहीं था। कोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना।
24 अप्रैल 2020 का आदेश निरस्त
हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल 2020 को जारी विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही विभाग को ग्रेच्युटी से काटी गई 1,63,464 रुपए की राशि मकरध्वज यादव को वापस करने का निर्देश दिया।
रिटायर कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
हाईकोर्ट के इस फैसले से साफ है कि ग्रेच्युटी से राशि की कटौती मनमाने तरीके से नहीं की जा सकती। यह कर्मचारी को कानून के तहत मिलने वाला वैधानिक लाभ है और इसकी जब्ती या कटौती के लिए संबंधित कानून में तय शर्तों का पालन जरूरी है।
यानी सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में गलती सामने आने मात्र से कर्मचारी की ग्रेच्युटी से वसूली नहीं की जा सकती, जब तक कानून में निर्धारित परिस्थितियां और प्रक्रिया पूरी न हों।
एनएमसी की बड़ी मंजूरी : सिम्स के 19 पीजी कोर्स में 91 सीटों पर प्रवेश की मिली अनुमति
रायपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड (PGMEB) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सिम्स के 19 स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण को अस्थायी स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों की कुल 91 सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है।
एनएमसी की स्वीकृति के अनुसार एमडी के 14 पाठ्यक्रमों में 69 सीटें और एमएस के 5 पाठ्यक्रमों में 22 सीटें शामिल हैं। यह स्वीकृति सिम्स में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इन विभागों में मिली सीटों की स्वीकृति
एमडी पाठ्यक्रमों में सामुदायिक चिकित्सा में 05, फॉरेंसिक मेडिसिन में 02, एनाटॉमी में 03, बायोकेमिस्ट्री में 04, फार्माकोलॉजी में 05, माइक्रोबायोलॉजी में 05, पीडियाट्रिक्स में 06, एनेस्थीसियोलॉजी में 08, त्वचा रोग में 03, जनरल मेडिसिन में 08, मनोचिकित्सा में 03, पैथोलॉजी में 09, रेडियो डायग्नोसिस में03 तथा रेस्पिरेटरी मेडिसिन में 02 सीटों को स्वीकृति मिली है। वहीं एमएस पाठ्यक्रमों में ईएनटी की 04, नेत्र रोग की 03, प्रसूति एवं स्त्री रोग की 06, ऑर्थोपेडिक्स की 06 तथा जनरल सर्जरी की 06 सीटें शामिल हैं।
छात्रों को मिलेंगे बेहतर व्यावहारिक व चिकित्सकीय प्रशिक्षण के अवसर
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति मिलना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि सिम्स परिवार, विशेषकर पीजी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी लोगों के लिए उत्साहवर्धक है। उन्होंने कहा कि एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति मिलना संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशिक्षण व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक एवं चिकित्सकीय प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और प्रदेश को भविष्य में अधिक संख्या में दक्ष एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति सिम्स के लिए एक महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक उपलब्धि है।
चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया विस्तार
एनएमसी की यह स्वीकृति सिम्स की शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति देने वाली मानी जा रही है। विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में पीजी सीटों की उपलब्धता से न केवल चिकित्सकीय शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में प्रदेश को विभिन्न विशेषज्ञताओं के प्रशिक्षित चिकित्सक भी मिलेंगे। एनएमसी ने अपने स्वीकृति पत्र में स्पष्ट किया है कि वास्तविक सीटों की संख्या मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) द्वारा अनुमत संख्या के अनुसार ही मान्य होगी।
छत्तीसगढ़ में बदलेगा भूमि उपयोग का नियम, अब Negative List से तय होंगी प्रतिबंधित गतिविधियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।
मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।
आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता
आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन
वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।
कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था
कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।
नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव
प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।
निर्माण गुणवत्ता से समझौता नहीं: डिजाइन में खामियां मिलने पर वास्तुविद फर्म के 4 अनुबंध होंगे समाप्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने निर्माण कार्यों में तकनीकी गुणवत्ता, डिजाइन की शुद्धता और सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए वास्तुविद फर्म जी.टी. डिज़ाइन स्टूडियो, रायपुर के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। जिला कोरबा में निर्मित कन्वेंशनल हॉल के निर्माण के डिटेल डिजाइन में त्रुटियां एवं तकनीकी प्रस्ताव में कमियां पाए जाने के बाद मंडल ने फर्म के वर्तमान कार्यों से संबंधित अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रकरण में मंडल द्वारा संबंधित फर्म को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। फर्म द्वारा प्रस्तुत पालन प्रतिवेदन एवं स्पष्टीकरण का अपर आयुक्त द्वारा परीक्षण किया गया, जिसे संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मंडल ने संबंधित योजनाओं में फर्म के अनुबंध समाप्त करने की नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
चार योजनाओं में अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई
मंडल के निर्देशानुसार जी.टी. डिज़ाइन स्टूडियो, रायपुर द्वारा वर्तमान में विभिन्न संभागों के अंतर्गत वास्तुविद संबंधी कार्य की जा रही योजनाओं में अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इनमें रिडेवलपमेंट योजना, कैलाश नगर, राजनांदगांव; रिडेवलपमेंट योजना, रामानुजगंज, जिला बलरामपुर; आवासीय योजना, कबीर नगर फेस-02 (05 एकड़ भूमि); तथा अटल विहार योजना, बंधी, जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही शामिल हैं।
संबंधित योजनाओं के कार्यपालन अभियंताओं को निर्देशित किया गया है कि वे फर्म को लिखित रूप से सूचित करते हुए अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई नियमानुसार सुनिश्चित करें। अनुबंध समाप्ति के बाद इन योजनाओं में फर्म द्वारा किसी भी प्रकार का आगामी कार्य नहीं किया जाएगा। साथ ही, नियमानुसार किसी भी प्रकार के दावे के भुगतान की कार्रवाई भी नहीं की जाएगी।
गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर मंडल का स्पष्ट संदेश
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा गत दिनों वास्तुविदों की बैठक आयोजित कर निर्माण कार्यों में तकनीकी गुणवत्ता, डिजाइन की शुद्धता एवं सुरक्षा मानकों के पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया था कि निर्माण कार्यों में डिजाइन संबंधी त्रुटि पाए जाने पर संबंधित वास्तुविद फर्म की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा—जिम्मेदारी से समझौता स्वीकार नहीं
मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की योजनाएं सीधे आम नागरिकों के हितों से जुड़ी हुई हैं। इन योजनाओं में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप निर्माण मंडल की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की शुरुआत से लेकर उसके पूर्ण होने तक डिजाइन, तकनीकी मानकों और गुणवत्ता की जिम्मेदारी से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। वास्तुविद फर्मों एवं संबंधित तकनीकी एजेंसियों को पूरी गंभीरता और विशेषज्ञता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। डिजाइन अथवा तकनीकी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित फर्म की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा—तकनीकी लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी शुद्धता और सुरक्षा मानकों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वास्तुविद द्वारा तैयार किए गए डिजाइन और तकनीकी प्रस्ताव निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजाइन में त्रुटि अथवा तकनीकी लापरवाही के कारण यदि निर्माण कार्य प्रभावित होता है, तो संबंधित फर्म की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंडल द्वारा अपनी योजनाओं में गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित निर्माण सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है।
मंडल ने स्पष्ट किया है कि शासकीय योजनाओं में गुणवत्ता, तकनीकी शुद्धता और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। तकनीकी मानकों के उल्लंघन अथवा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी अथवा फर्म के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
UCC मसौदे को लेकर सामाजिक संगठनों से संवाद, समिति ने कहा- सभी सुझावों का होगा गहन विश्लेषण
रायपुर। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के पूर्व राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा विस्तृत चर्चा एवं सुझाव के लिए दो दिवसीय बैठक 10 सितंबर से आयोजित की गई, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्य एम. के. राउत की अध्यक्षता में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के वर्तमान नियमों एवं कानूनों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार उपस्थित थे।
पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित राज्य स्तरीय समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय परामर्श बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान समिति के सदस्यों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राज्य आयोगों के प्रमुखों के साथ विस्तारपूर्वक चर्चा की। दो दिनों तक चले इस गहन मंथन सत्र के दौरान मुख्य रूप से विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और विरासत, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर सभी पक्षों से खुलकर सुझाव लिए गए।

इस दौरान गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध किया। वहीं, दूसरी ओर राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने समाज में लैंगिक समानता की पुरजोर वकालत की। उन्होंने महिला एवं पुरुष को समान अधिकार देने, बेटे और बेटी को संपत्ति में बराबर का उत्तराधिकार सौंपने, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन कराने तथा संपत्ति व वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधान स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास करने का सुझाव दिया। क्रिश्चन समाज के राजेश जॉन पाल सहित समाज के आए प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव में कहा कि विवाह को ईश्वर के द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी मानी जाती है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। लिव-इन संबंध को समाज द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा भी उपस्थित रहीं और उन्होंने बच्चों के अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सुझावों को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभिन्न सामाजिक समूहों से प्राप्त इन सभी महत्वपूर्ण व्यावहारिक तथ्यों और सुझावों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा, ताकि एक समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार किया जा सके।
बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश पांडेय, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारती राठौर ने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक कारगर, स्पष्ट व पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा बैठक के द्वितीय सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा तथा आशीष बाजपेयी ने समान नागरिक संहिता पर अपने विचार एवं अभिमत समिति के समक्ष दर्ज कराया। इसी प्रकार मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे तथा डॉ. के.पी. आजमानी ने समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के संबंध में अपनी राय दी तथा उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों को सुझाव दिए।
बिलासपुर-प्रयागराज-दिल्ली फ्लाइट में बड़ा हादसा टला, मेरठ के पास इंजन फेल होने से मचा हड़कंप
बिलासपुर। बिलासपुर से दिल्ली जा रहे अलायंस एयर के विमान में शुक्रवार को हवा में तकनीकी खराबी आने से हड़कंप मच गया। उड़ान के दौरान विमान का एक इंजन फेल हो गया। विमान में क्रू सदस्यों समेत कुल 54 यात्री सवार थे। तकनीकी खराबी का पता चलते ही पायलट ने तत्काल एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को इसकी जानकारी दी और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी।
बताया जा रहा है कि मेरठ के आसपास पायलट को विमान में तकनीकी खराबी महसूस हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलट ने एटीसी से संपर्क किया। इसके बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI) पर फुल इमरजेंसी घोषित की गई और विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।
बिलासपुर से प्रयागराज होते हुए दिल्ली जा रहा था विमान
जानकारी के मुताबिक, अलायंस एयर का विमान शुक्रवार सुबह करीब 10:45 बजे बिलासपुर से प्रयागराज के लिए रवाना हुआ था। प्रयागराज से विमान ने दोपहर करीब 12:33 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरी। इसी दौरान मेरठ के आसपास विमान के एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई। पायलट की सूझबूझ और एटीसी के समन्वय से विमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया। विमान दोपहर करीब 2:15 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हुआ।
सभी यात्री और क्रू सुरक्षित, DGCA ने दिए जांच के आदेश
विमान के सुरक्षित लैंडिंग के बाद सभी 54 यात्रियों और क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। घटना को गंभीरता से लेते हुए विमानन नियामक DGCA ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विमान में तकनीकी खराबी किस वजह से आई और इंजन फेल होने के पीछे क्या कारण रहा, इसकी जांच की जाएगी।
छत्तीसगढ़ भाजपा में नई जिम्मेदारियां, RTI प्रकोष्ठ में संभाग और जिला स्तर पर नियुक्तियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा ने संगठन के सूचना का अधिकार (RTI) प्रकोष्ठ में महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। पार्टी ने प्रदेश के विभिन्न संभागों के लिए प्रभारियों के साथ ही तीन जिलों में जिला संयोजकों की सूची जारी की है।
जारी सूची के मुताबिक रायपुर संभाग की जिम्मेदारी संजय कोपुलवार को सौंपी गई है। वहीं दुर्ग संभाग का प्रभारी खिलेश्वर गोस्वामी को बनाया गया है। बस्तर संभाग की कमान सुरेन्द्र सोलंकी को दी गई है। इसी तरह बिलासपुर संभाग के प्रभारी विनोद भारती होंगे, जबकि सरगुजा संभाग की जिम्मेदारी डॉ. सुनील जायसवाल को मिली है।

तीन जिलों में जिला संयोजकों की नियुक्ति
भाजपा के RTI प्रकोष्ठ में जिला स्तर पर भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बलौदाबाजार जिले में विकास कुमार गुप्ता को जिला संयोजक बनाया गया है। मुंगेली में रविन्द्र केशरवानी को यह जिम्मेदारी मिली है, जबकि कोरबा जिले में मनोज राठौर RTI प्रकोष्ठ के जिला संयोजक होंगे।

इन नियुक्तियों के साथ भाजपा ने सूचना के अधिकार से जुड़े संगठनात्मक कामकाज को संभाग और जिला स्तर पर मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। माना जा रहा है कि नई टीम RTI से जुड़े विषयों और जनहित के मुद्दों को लेकर संगठन के स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएगी।
रायपुर: सदर बाजार में देर रात जर्जर भवन का हिस्सा गिरा, टला बड़ा हादसा
रायपुर। राजधानी रायपुर के सदर बाजार इलाके में शुक्रवार देर रात एक पुरानी और जर्जर इमारत का सामने का हिस्सा अचानक गिरने से इलाके में हड़कंप मच गया। इमारत गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। एहतियात के तौर पर पुलिस ने कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही बंद कर दी। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई अनहोनी नहीं हुई।
जानकारी के मुताबिक, यह जर्जर इमारत सहेली ज्वेलर्स के सामने स्थित है। इमारत के नीचे पान की दुकान संचालित होती है। बिल्डिंग का हिस्सा गिरने का आभास होते ही दुकानदार और वहां मौजूद लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गए। दिन के समय इस इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। देर रात घटना होने की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।
सीएम साय ने बैठक लेकर जर्जर भवनों को ढहाने के दिए थे निर्देश
बता दें कि दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दो दिन पहले ही जर्जर भवनों को लेकर सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को बैठक ली थी। सीएम ने निर्देश दिया था कि जर्जर भवन ढहाए जाएं और कलेक्टर-एसपी अपने-अपने क्षेत्रों में भवनों की नियमित निगरानी करें। अधिकारी सुनिश्चित करें कि शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो। मुख्यमंत्री ने कहा था कि यदि जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संभावित खतरों की पहचान कर समय पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
नगर निगम ने पहले ही जारी किया था नोटिस
नगर निगम जोन-4 के कमिश्नर के मुताबिक, संबंधित मकान काफी जर्जर स्थिति में था और नगर निगम की ओर से भवन मालिक को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। शुक्रवार देर रात अचानक इमारत का एक हिस्सा गिर गया। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने का काम शुरू किया। आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
तेज आवाज में डीजे बजाने से पुलिस ने किया मना
पुलिस ने आसपास के लोगों से भवन के पास तेज आवाज में डीजे या साउंड सिस्टम नहीं बजाने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, जर्जर हिस्से को हटाने और इलाके को सुरक्षित करने के दौरान किसी तरह की अतिरिक्त परेशानी या खतरा न हो, इसके लिए सावधानी बरती जा रही है। फिलहाल नगर निगम जोन अध्यक्ष और निगम की टीम मौके पर मौजूद है। क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने के साथ ही आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने की कार्रवाई जारी है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की समीक्षा की
रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज दन्तेवाड़ा में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रम केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि जनपद, तहसील, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी रूप से आयोजित किए जाएं।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वसहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विभागवार तैयारियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘सेवा की कहानी’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’ ‘जल जन सेवा संकल्प’ और ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं, आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण जागरूकता कार्यक्रम तथा स्वच्छता एवं जनसेवा से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी।
कलेक्टर देवेश ध्रुव ने जिले में अभियान की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि व्यापक जनभागीदारी के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर दिनवार एवं तिथिवार कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के साथ नियमित समीक्षा कर तैयारियों की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल शासकीय कार्यक्रमों की श्रृंखला न होकर सेवा, समर्पण और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत करने का अवसर बने। डीएफओ रामाकृष्ण रंगानाथा वाय. और अपर कलेक्टर राजेश पात्र सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
बालाघाट में बच्चों की मौत के विरोध में रायपुर में आदिवासी कांग्रेस का कैंडल मार्च
रायपुर। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के विरोध में रायपुर में आदिवासी कांग्रेस ने कैंडल मार्च निकालकर न्याय सत्याग्रह किया। प्रदर्शन के दौरान पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने, मामले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने की मांग उठाई गई।
बता दें कि आंदोलन का आयोजन अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया एवं छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष जनक ध्रुव के निर्देश पर किया गया। जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के संगठन महासचिव कुलदीप ध्रुव ने कहा कि बालाघाट में मासूम आदिवासी बच्चों की मौत बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार को पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर उन्हें तत्काल न्याय और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल ने कहा कि बच्चों की मौत का मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल बालाघाट के पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन, अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय है। आदिवासी कांग्रेस पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाती रहेगी।
कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह में आदिवासी कांग्रेस के जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने पीड़ित परिवारों को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
WhatsApp चैट बनी गिरफ्तारी का आधार! CGPSC केस में ADM चेतन बरघोरिया 6 दिन की ED रिमांड पर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC गड़बड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बरघोरिया को जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की गई है।
गिरफ्तारी के बाद चेतन बरघोरिया को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 6 दिनों की ED रिमांड पर भेज दिया है। अब ED रिमांड अवधि के दौरान उनसे मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर पूछताछ करेगी।
WhatsApp चैट को बनाया गया रिमांड का आधार
मामले में ED की ओर से उत्कर्ष चंद्राकर के साथ चेतन बरघोरिया की WhatsApp चैट मिलने का हवाला दिया गया है। इसी आधार पर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की गई थी। विशेष अदालत ने ED की मांग स्वीकार करते हुए चेतन बरघोरिया को छह दिन की रिमांड पर भेज दिया।
बलरामपुर-रामानुजगंज के ADM हैं चेतन बरघोरिया
ED ने जिस अधिकारी को गिरफ्तार किया है, वह बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में एडिशनल कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। अधिकारियों के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी CGPSC में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।
6 दिन की रिमांड में ED करेगी पूछताछ
अदालत से रिमांड मिलने के बाद अब ED चेतन बरघोरिया से मामले को लेकर विस्तृत पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी कथित CGPSC गड़बड़ी से जुड़े संपर्कों, लेन-देन और सामने आए डिजिटल साक्ष्यों के संबंध में जानकारी जुटा सकती है।
CGPSC से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान ED मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू को भी देख रही है। इसी जांच के क्रम में यह गिरफ्तारी सामने आई है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और CM साय ने सक्ती जिले को दी 122 करोड़ की सौगात
रायपुर। केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा में आयोजित कार्यक्रम में जिले को लगभग 122 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। दोनों अतिथियों ने 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक की लागत के कुल 38 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।

इनमें लगभग 79.25 करोड़ रुपए की लागत के 23 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा लगभग 42.46 करोड़ रुपए की लागत के 15 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इन कार्यों से जिले में सड़क संपर्क के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।
भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में लगभग 25.82 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा, बरतुंगा, तुलसीडीह, अण्डा, चरौदा होते हुए सपिया नहरपार तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तथा लगभग 15.30 करोड़ रुपए की लागत से छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली होते हुए सेमराडीह तक 12 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण शामिल है। इसके साथ ही अण्डी-किरकार-जगमहन से सातबहिनिया तक सड़क, नगझर-नवापारा मार्ग और गुरेराडीह किरारी से केसला मुख्य मार्ग सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया।
शिक्षा और युवाओं के लिए शासकीय कन्या महाविद्यालय सक्ती के नवीन भवन, बेदराम शासकीय महाविद्यालय मालखरौदा में अतिरिक्त भवन तथा नवीन लाइवलीहुड संस्थान भवन का भूमिपूजन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न ग्रामों में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तथा महिलाओं के लिए महतारी सदनों के निर्माण कार्यों की भी आधारशिला रखी गई।
लोकार्पित प्रमुख कार्यों में लगभग 14.35 करोड़ रुपए की लागत से मालखरौदा क्षेत्र में कलमी नहरपार से चिखली, छोटेकोट, बड़ेकोट, सिंघरा होते हुए बेल्हाडीह तक सड़क तथा लगभग 11.35 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा से कठरापाली, निमोही, सिंघीतराई, बेनीपाली होते हुए ओड़ेकेरा मुख्य मार्ग तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण शामिल है। बुंदेली-अड़भार मार्ग का भी लोकार्पण किया गया।
इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित सोलर ड्यूल पंप, चन्द्रपुर एवं हसौद के नवीन तहसील कार्यालय भवन, डभरा, चन्द्रपुर एवं जैजैपुर के नवीन पुलिस थाना भवन, अड़भार पुलिस चौकी भवन, सुलौनी हाईस्कूल भवन, गोपालपुर प्रशिक्षण भवन तथा गोबरा में महतारी सदन सहित अन्य विकास कार्य जनता को समर्पित किए गए।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद कमलेश जांगड़े सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
भूपेश बघेल के निवास में धूमधाम से मनाया गया तीजा पोरा तिहार, लोक गीतों पर जमकर थिरकीं कांग्रेस महिला विधायक
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सिविल लाइन रायपुर स्थित निवास में शुक्रवार को तीजा पोरा तिहार का आयोजन किया गया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं तीजा पोरा मनाने पहुंची थी। कांग्रेस की महिला विधायक, कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से तीजा पोरा तिहार मनाया। इस दौरान महिलाओं ने छत्तीसगढ़ लोक गीतों पर जमकर डांस किया। रईचुली झूला का भी लुत्फ उठाया।

लोक गायिका ममता चंद्राकर ने भी गाना गाकर महिलाओं को नाचने पर मजबूर किया। पूरे परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल नजर आया। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को तीजा पोरा की शुभकामनाएं भी दी।





आयोजन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यहां विधायक, कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि बहनें उपस्थित हैं। तीजा, पोरा का तिहार है और गणेश चतुर्थी भी नजदीक है। प्रदेशवासियों को तीजा पोरा और गणेश चतुर्थी की बधाई। तीजा पोरा का त्योहार हमारे लिए बहुत खास है और सभी मिलकर इसे उत्साह के साथ मना रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास हो रहे पूर्ण : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
रायपुर। छत्तीसगढ़ में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपने को साकार करने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा। सक्ती में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में 2 लाख नवनिर्मित आवासों का गृह प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से उनके नए घरों की चाबी सौंपी गई।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति संबंधी पत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।

छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 1600 से अधिक पीएम आवास हो रहे पूर्ण : केंद्रीय मंत्री श्री चौहान
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प को जमीन पर साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकास कार्यों की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार जो कहती है, उसे पूरा करके दिखाती है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई गति मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के आवास, सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से गरीब परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, निःशुल्क राशन, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में व्यापक बदलाव लाने का कार्य किया जा रहा है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कर रहे काम
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। प्रदेश अब केवल धान के कटोरे के रूप में ही नहीं, बल्कि तेजी से सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और कृषि संबंधी वैज्ञानिक मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।
गरीब का पक्का घर हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि श्री चौहान का छत्तीसगढ़ के प्रति विशेष स्नेह रहा है और उनके प्रत्येक प्रवास से प्रदेश को विकास की नई सौगातें मिली हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आज अपने नए पक्के घर में प्रवेश कर रहे 2 लाख हितग्राही परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के अंतर्गत आवासों के लक्ष्य की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल शेष पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से किया गया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।
13.85 लाख बहनें बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में हमारी माताओं-बहनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे बड़े बदलाव का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को लाभान्वित किया जा रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिजली बिल समाधान योजना के अंतर्गत अब तक 750 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल माफ किए जा चुके हैं।
ग्रामीण विकास के कई अभिनव अभियानों का शुभारंभ
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत निर्मित 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ ही विभिन्न ग्रामीण विकास अभियानों और नवाचारों का भी शुभारंभ किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश की चाबी प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन का शुभारंभ किया गया। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान प्रारंभ किए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 270 नवीन इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन किया गया। साथ ही इन्क्यूबेशन प्रोग्राम ‘अथ उद्यमिता की ओर’ के अंतर्गत चैलेंज फंड इवेंट का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों एवं डीलर दीदियों तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
अंत्योदय के संकल्प के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : तोखन साहू
केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का चिंतन सरकार के लिए मार्गदर्शक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसी भावना के अनुरूप गरीब, किसान, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में विकास को नई गति मिली है और गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। गरीब परिवारों के साथ नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी चिंता की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है। 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मुक्तिधाम शेड और आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण भी वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत कराया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों पर बारकोड लगाया जा रहा है। नागरिक इसे स्कैन कर संबंधित विकास कार्य की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे ग्रामीण विकास में पारदर्शिता बढ़ने के साथ आम नागरिक भी विकास कार्यों की निगरानी में सहभागी बनेंगे।
कार्यक्रम के अंत में जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष द्रौपती कीर्तन चंद्रा सहित जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, लखपति दीदियां, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की
रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज दंतेवाड़ा में लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने चारों विभागों के स्वीकृत, निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा कर कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा योजनाओं का लाभ नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश दिए।

श्री साव ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देशित करते हुए कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अपनी कार्य शैली और कार्य संस्कृति में बदलाव लाते हुए परिणाम आधारित कार्य करने के निर्देश दिए। कलेक्टर देवेश ध्रुव भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में कहा कि लोक निर्माण विभाग सहित सभी निर्माण एजेंसियां सड़कों, भवनों, पुल-पुलियों एवं अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। कार्यों में अनावश्यक विलंब होने पर जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी शासकीय कार्यालयों एवं परिसरों को स्वच्छ, व्यवस्थित एवं नागरिकों के अनुकूल रखने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बनाए जा रहे आवासों के निर्माण में तेजी लाने तथा निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल जीवन मिशन की पूर्ण हो चुकी योजनाओं को संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने को कहा। उन्होंने प्रगतिरत नल जल योजनाओं को शीघ्र पूरा करने तथा ठेकेदारों व संबंधित एजेंसियों के लंबित बिलों के भुगतान के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जल आपूर्ति योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा।
श्री साव ने बरसात की समाप्ति के तुरंत बाद सभी निर्माण कार्यों में तत्परता से गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आज की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करें। सभी अधिकारी अपने दायित्वों का पूरी गंभीरता, सक्रियता और जवाबदेही के साथ निर्वहन करें। विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का असर धरातल पर दिखाई देना चाहिए। वनमंडलाधिकारी रामाकृष्ण रंगानाथा वाय. और अपर कलेक्टर राजेश पात्रे सहित लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के बस्तर संभागीय कार्यालय और दंतेवाड़ा जिला कार्यालय के अधिकारी बैठक में मौजूद थे।
राशन वितरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: CM साय, हर पात्र परिवार को समय पर मिले पूरा राशन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को उसके अधिकार का पूरा राशन समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राशन प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। राशन वितरण में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर तत्काल कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की नियमित निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा खाद्यान्न वास्तविक हितग्राही तक निर्धारित मात्रा में और समय पर पहुंचे, यह संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों में अधिकारी अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ राशन की उपलब्धता और वितरण की निगरानी करें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आमानारा गांव में पहाड़ी कोरवा परिवारों को राशन नहीं मिलने की शिकायत को गंभीरता से लिया। उन्होंने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली और प्रभावित पात्र परिवारों को तत्काल राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर से कहा कि शिकायत से जुड़े वितरण अभिलेखों की समुचित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र परिवार अपने हक के खाद्यान्न से वंचित न रहे। ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण और हितग्राहियों को वास्तव में दिए गए खाद्यान्न का मिलान कर किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री श्री साय को अवगत कराया कि शिकायत सामने आते ही मामले की जांच कराई गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पहाड़ी कोरवा परिवारों एवं अन्य हितग्राहियों को राशन मिलने में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में चिड़ोडी की राशन दुकान से संबद्ध किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देश दिए कि इस प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई के साथ ही जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सतत निगरानी की जाए, ताकि ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। हर हितग्राही को समय पर और गुणवत्ता के साथ राशन वितरण सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सहज, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पहुंचाना हमारी सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। प्रत्येक पात्र परिवार को उसका अधिकार बिना किसी बाधा के मिले, इसके लिए अधिकारी संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।
स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, राजीव गांधी चौक पर केंद्र के आदेश की प्रतियां और पुतला फूंका
रायपुर। स्मार्ट मीटर को अनिवार्य किए जाने के कथित केंद्रीय आदेश के विरोध में शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को राजीव गांधी चौक पर प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के आदेश की प्रतियां और उसका पुतला जलाकर विरोध जताया।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, 12 अगस्त को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की सचिव अंकिता वर्षणेय की ओर से देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें अपने-अपने राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से आगे बढ़ाने की बात कही गई है। कांग्रेस ने इसी आदेश को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
एक महीने से स्मार्ट मीटर हटाओ अभियान

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी पिछले करीब एक महीने से ‘स्मार्ट मीटर हटाओ अभियान’ चला रही है। रायपुर में शहर जिला कांग्रेस के कार्यकर्ता अलग-अलग वार्डों में घर-घर जाकर लोगों से स्मार्ट मीटर हटाने को लेकर फॉर्म भरवा रहे हैं। जिन इलाकों में अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां लोगों से इसे नहीं लगवाने की अपील भी की जा रही है।
कांग्रेस का दावा है कि अभियान को मिल रहे जनसमर्थन के बाद राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है।
विजय शर्मा के बयान का हवाला देकर सरकार पर निशाना
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के उस कथित बयान का भी हवाला दिया, जिसमें स्मार्ट मीटर को स्वैच्छिक बताया गया था। कांग्रेस नेताओं ने महंगाई और बढ़े हुए बिजली बिलों से जुड़े पोस्टर भी प्रदर्शन के दौरान लहराए।
कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर जनता के साथ कथित तौर पर धोखा करने का आरोप लगाते हुए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को ‘संगठित लूट का अभियान’ करार दिया।
पुतला जलाने के दौरान पुलिस से झूमाझटकी

राजीव गांधी चौक पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए जुटे। इस दौरान पुलिस बल ने पुतला जलाने से कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया। इसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झूमाझटकी भी हुई।

इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के आदेश की प्रतियां और पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
सरकार पर लगाया महंगाई का दोहरा बोझ डालने का आरोप
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने केंद्र और राज्य सरकार पर जनता पर दोहरी मार डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम लोगों को राहत देने के बजाय सरकारें उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली नीतियां लागू कर रही हैं।
मेनन ने नए करों, जीएसटी, ट्रैफिक चालान और बढ़े हुए बिजली बिलों का उल्लेख करते हुए स्मार्ट मीटर को भी जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला माध्यम बताया। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की महिलाओं को 1,000 रुपये देने की योजना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि दूसरी ओर बिजली बिल और अन्य माध्यमों से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
पुराने मीटर को कुछ समय तक रखने की मांग
पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय और पंकज शर्मा ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने की स्थिति में पुराने मीटर को भी कुछ समय तक चालू रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि नए स्मार्ट मीटर की दो से तीन महीने तक टेस्टिंग की जाए और उपभोक्ता के संतुष्ट होने के बाद ही पुराने मीटर को हटाया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां विधानसभा चुनाव को देखते हुए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर अलग रुख अपनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र के निर्देशों के बजाय उपभोक्ताओं की मांग को प्राथमिकता देते हुए पुराने मीटर को बनाए रखने का आदेश जारी करे।
बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में श्रीकुमार शंकर मेनन, कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, पंकज शर्मा, जसवीर ढिल्लन, अरुण जंघेल, सुशांत डे, अविनय दुबे, प्रवीण चंद्राकर, दीपक चौबे, सुरेश धीवर, ओम श्रीवास, आसिफ खान, अनिल रायचूरा, अंजुमन ढेबर, संदीप शर्मा, मिलिंद गौतम, सुजीत सिंह, कमल घीतलहरे, जावेद नकवी, हिरेंद्र देवांगन, देव कुमार साहू, जीतू भारती, सत्तू सिंह, मुन्ना मिश्रा, महेंद्र सेन, वेंकट कुमार, राजू दुबे, मोहसिन खान, अजीत, अनीश मनीहार, राजू नायक, जीवन सागर, सागर टांडी, हेमु डिकेडे, पप्पू बागडे, अभिषेक ठाकुर, मोहम्मद इमरान, भारत यादव, बालेश्वर सोना, भागवत साहू, सुधीर बंजारे, गौतम यादव, आकाश दीवान, मोहम्मद कासिम, वास्टो बेहरा, आकाश नाग, फिरोज चिश्ती, नवीन भारती, बिरजू साहू, शिव साहू, मुकेश त्रिवेदी, सुनील कुमार ध्रुव, सुशील बरोलिया और रतन सोनी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे।