बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में प्रावधानों का पालन नहीं करने का दावा करते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पी. पी. साहू की बेंच ने शासन से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
दरअसल, राजनांदगांव निवासी प्रदीप शर्मा ने अपने अधिवक्ता अली असगर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जिसमें बताया गया है कि चयन प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं। नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट में नमित शर्मा और अंजलि भारद्वाज केस में दिए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट भर्ती प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग कर रहा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 में दो उम्मीदवारों को सूचना आयुक्त पद के लिए पहले अयोग्य माना गया। लेकिन मात्र छह महीने के भीतर उन्हें योग्य घोषित कर सूचना आयोग में चयनित कर लिया गया।
याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त पद के उम्मीदवार का इंटरव्यू उनके अधीनस्थ अतिरिक्त मुख्य सचिव गण एवं सर्च कमेटी के सदस्यों द्वारा लिया गया, जो प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित है। जबकि तमिलनाडु और महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों में रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को सर्च कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि छत्तीसगढ़ में अध्यक्ष और सभी सदस्य ब्यूरोक्रेट्स थे।
साथ ही संबंधित अधिकारी ने मुख्य सचिव पद पर रहते हुए ही मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए इंटरव्यू दिया, हालांकि इसके लिए विभागीय अनुमति और अवकाश लिया गया था।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के तारतम्य में 16 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की प्रक्रिया की शुरूआत हुई है। आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील ने स्व-गणना के तहत स्वयं अपनी जानकारी दर्ज की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ, छत्तीसगढ़ जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल सहित जनगणना निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद थे।
मुख्य सचिव ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपनी जानकारी स्वयं भरकर जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाएं। राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया गया है। आज अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ ने भी स्व-जनगणना के तहत अपनी जानकारी पोर्टल पर जानकारी दर्ज की। स्व-गणना के लिए se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर आसानी से विवरण भरा जा सकता है।
मुख्य सचिव ने कहा है कि यह पहल जनगणना प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और अधिक विश्वनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लोग अपनी सही और पूरी जानकारी स्वयं साझा कर सकेंगे। स्व-गणना अवधि समाप्त होने के बाद, 1 मई से 30 मई तक जनगणना टीम घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्रित करेगी। प्रगणक घर-घर आकर जानकारी दर्ज करेंगे। हर मकान की जानकारी दर्ज की जाएगी। घर की स्थिति, सुविधाएं और मूलभूत जानकारी संकलित की जाएगी। जिन्होंने स्व-गणना के तहत जानकारी दर्ज की है वे जनगणना प्रगणकों के घर आने पर उनसे SE ID जरूर साझा करें। यदि कोई स्व-गणना नहीं कर पाते है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य में 1 मई से 30 मई 2026 तक की अवधि में प्रगणक आपके घर आकर जानकारी अवश्य दर्ज करेंगे। सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस अवसर पर जनगणना निदेशालय के संयुक्त संचालक प्रदीप साव सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
रायपुर। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने आज को रायगढ़ जिले के शासकीय और निजी अस्पतालों का दौरा कर सिंघीतराई वेदांता प्लांट हादसे में घायल श्रमिकों का हालचाल जाना तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि सभी घायलों को सर्वोत्तम एवं समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाए। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी भी ली। उपचार-रत श्रमिकों ने मिल रहे उपचार के प्रति संतोष व्यक्त किया।
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता प्लांट में 14 अप्रैल को भीषण हादसा हुआ था, जिसमें कई श्रमिक प्रभावित हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया था। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टिस हॉस्पिटल,मेट्रो, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहीं गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रिफर किया गया।
मुख्यमंत्री द्वारा भी स्वयं इस घटना गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पूरे घटना क्रम की मजिट्रियल जांच के निर्देश दिए है। जांच में जो भी दोषी होंगे उन पर श्रम कानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 20 की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 16 घायल हैं और उनका उपचार जारी है। मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। वहीं प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।
इधर कंपनी प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया है। कंपनी द्वारा मृतक श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रखा जाएगा और काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे की जांच में प्रथम दृष्टया प्लांट प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। सभी के खिलाफ बीएनएस की धारा 106, 289, 3-5 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
बता दें कि वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 20 मजदूरों की मौत हुई है, जबकि 16 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से जारी सूची के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में 5 लोग छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, जबकि 15 मृतक अन्य राज्यों से हैं।
सीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए हैं निर्देश
इस घटना की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में जो भी दोषी होंगे उन पर श्रम कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री साय ने मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। PMO ने भी मुआवजे की घोषणा की है। PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।
मृतक के परिजन को 35-35 लाख और नौकरी देगी कंपनी
बता दें कि रायगढ़ के अलग-अलग अस्पतालों में 11 घायलों का इलाज चल रहा है। रायगढ़ के बालाजी मेट्रो हॉस्पिटल में बनवारी लाल, उपेंद्र और परदेशी लाल चंद्रा का इलाज जारी है। वहीं 2 मजदूर उमेंद्र और किस्मत अली का रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। वेदांता प्रबंधन ने मृतक के परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। वहीं घायलों को 15-15 लाख रुपए देने की बात कही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के वाणिज्यिक कर (GST) विभाग में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण पदोन्नति करते हुए असिस्टेंट कमिश्नर शारदा मिश्रा को डिप्टी कमिश्नर के पद पर पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति के साथ ही उन्हें नया रायपुर (अटल नगर) संभाग-1 में ऑडिट कार्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में ACB-EOW ने आज कोर्ट में पूरक चालान पेश कर दिया है। यह चालान 4 आरोपियों के खिलाफ पेश किया गया है, जो 3500 पन्नों से अधिक का है। इन आरोपियों में अभिषेक कौशल, राकेश जैन, प्रिंस कोचर और कुंजल शर्मा के नाम शामिल हैं। ये सभी आरोपी अभी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मामला अपराध क्रमांक-05/2025 के तहत दर्ज है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2) एवं 7(सी) के तहत कार्रवाई की जा रही है।
इन आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
आज पूरक चालान में जिन चार आरोपियों को नामजद किया गया है, वे इस प्रकार हैं—
अभिषेक कौशल, डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकुला
राकेश जैन, प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
प्रिंस कोचर, लायजनर (रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स)
कुंजल शर्मा, मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्रा. लि., नवी मुंबई।
‘हमर लैब’ योजना में की गई गड़बड़ी
जांच एजेंसी ने बताया कि राज्य की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों में ‘हमर लैब’ योजना के अंतर्गत क्रय किए जाने वाले मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की निविदा प्रक्रिया में पुल टेंडरिंग के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा निविदा प्राप्त की गई। विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि प्रिंस कोचर, शशांक चोपड़ा का सगा जीजा है और रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. के लिए लायजनिंग का कार्य करता है। रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. एवं श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने भविष्य में सीजीएमएससीएल में अपना सप्लाई चेन मजबूत करने के उद्देश्य से मोक्षित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया।
तीनों फर्मों द्वारा अपनी अर्हता सुनिश्चित करने के लिए टेंडर की शर्तों के अनुसार वास्तविक क्षमता से भिन्न उत्पादक क्षमता, सर्विस, मेंटेनेंस एवं इंस्टॉलेशन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर निविदा में उपयोग किए गए, जिसके लिए प्रिंस कोचर द्वारा समन्वय कार्य किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कुछ फर्मों द्वारा आपसी समन्वय और कार्टेलाइजेशन किया गया। टेंडर में यही तीन फर्में शॉर्टलिस्ट हुई थीं, जिनके वित्तीय दर खोले गए। तीनों पात्र फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण समान पैटर्न में भरा गया। जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों द्वारा समान रूप से दर्शाया गया। दरें भी समान पैटर्न में कोट की गईं, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित द्वारा, उसके पश्चात आर.एम.एस. तथा श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई।
एमआरपी से तीन गुना तक की गई वसूली
साथ ही मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स के लिए डायसिस कंपनी ने निश्चित एमआरपी तय की थी। आरोपी कुंजल शर्मा द्वारा मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स के तय एमआरपी से कहीं अधिक दर सीजीएमएससी को डायसिस कंपनी की ओर से प्रेषित की गई। इसके कारण निविदा में सीजीएमएससी ने मोक्षित कॉर्पोरेशन की मनमानी दरों को मान्य कर लिया। फलस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा सीजीएमएससी को वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
अब तक 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश, जांच जारी
इस मामले में अब तक 10 आरोपियों के विरुद्ध चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब’ योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधितों के विरुद्ध कठोर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जांच कमेटी प्लांट पहुंची। इस हादसे को लेकर उन्होंने प्लांट के 11 साल पुराने प्लांट के संचालन, क्षमता से अधिक उत्पादन करने और सुरक्षा में भारी लापरवाही जैसे कई गंभीर सवाल उठाए।
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि इस प्लांट को सबसे पहले एथेना ने किसानों से जमीन लेकर पावर प्लांट तैयार किया और पूरा स्ट्रक्चर खड़ा किया। सभी काम लगभग पूरा करने के बाद, करीब 11 साल बाद वेदांता ने इस प्लांट को खरीदा और उसके बाद यह पावर प्लांट चालू हुआ। सवाल यह है कि लगभग 11 साल का जो गैप था, क्या वह एक बड़ा गैप नहीं है? जब प्लांट एक साल पहले शुरू हुआ, उससे पहले इसकी कमीशनिंग ठीक से हुई थी? कमीशनिंग से पहले इतने लंबे समय से खड़े स्ट्रक्चर की पूरी तरह से जांच की गई थी या नहीं?
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यहां प्रेशर सिस्टम की रीडिंग की गई थी? जो यहां पर सिस्टम चलती है, वह प्रेशर सिस्टम सही से काम कर रही थी या नहीं? क्या यहां का जलस्तर ठीक-ठाक था? कहीं जंग तो नहीं लगा था? कहीं बॉयलर में क्रैक तो नहीं था? और कहीं ऑयल लीकेज तो नहीं था? क्या थर्ड पार्टी से इसका इंस्पेक्शन कराया गया था?
ऐसे बहुत सारे सवाल हैं, जो हमारी टीम ने उठाए हैं और यह जांच का विषय है। आप देखेंगे कि पूरे प्रदेश में लगातार इस तरह के बॉयलर फटने और बड़े-बड़े प्लांटों में हादसे बढ़ते जा रहे हैं। इस तरह के हादसों में अब तक लगभग 300 से अधिक मजदूरों की मौत हो चुकी है।
दीपक बैज ने कहा कि इतने मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन है, यह जांच का विषय है। क्या आगे इस तरह की घटनाएं नहीं रुकनी चाहिए? क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती हो गई है? कहीं यह बड़ी लापरवाही तो नहीं है? इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिंतित है। सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी की मौत हो गई। लेकिन उस आम आदमी का परिवार पूरी तरह तबाह हो जाता है। इसलिए सवाल उठता है कि यह लापरवाही है या फिर हत्या है? इसकी जांच कौन करेगा?
इस जांच कमेटी में पीसीसी चीफ दीपक बैज के साथ नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सहित कई विधायक और कांग्रेस नेता मौजूद रहें।
हादसे में अब तक 20 मजदूरों की हो चुकी है मौत
बता दें कि मंगलवार को वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट हुआ था। इस हादसे में अब तक मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है, जबकि 15 लोगों का उपचार चल रहा है। जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में 5 लोग छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, जबकि 15 मृतक अन्य राज्यों से हैं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कचहरी शाखा के नवीन एवं अत्याधुनिक परिसर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक प्रभाष कुमार सुबुद्धि, उप महाप्रबंधक रमेश सिन्हा, प्रबंधक अनिल यादव सहित बैंक के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि पिछले 50 वर्षों से संचालित एसबीआई की कचहरी शाखा अब नए आधुनिक भवन में स्थानांतरित होकर ग्राहकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इस नए परिसर में उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनके कार्य और अधिक सहज और त्वरित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैंकिंग व्यवस्था को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारतीय स्टेट बैंक अपने दायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन कर रहा है और आगे भी ग्राहकों की सेवा में इसी तरह अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शाखा के अधिकारियों और ग्राहकों को शुभारंभ की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उल्लेखनीय है कि एसबीआई की कचहरी शाखा ने हाल ही में अपनी सेवाओं के 50 वर्ष पूर्ण किए हैं। ग्राहकों को बेहतर, सुविधाजनक और उन्नत बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शाखा को पंडरी रोड स्थित आक्सीजोन क्षेत्र में नए परिसर में स्थानांतरित किया गया है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर बैंकिंग अनुभव सुनिश्चित किया जाएगा।
लरायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अब एक बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि अगर नीयत साफ हो और नेतृत्व मजबूत हो, तो व्यवस्था बदलते देर नहीं लगती। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ हुए वर्षों के खिलवाड़ पर निर्णायक विराम लगा दिया है।
रायपुर के पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 430 युवाओं को शासकीय सेवा में नियुक्ति पत्र सौंपना केवल एक भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस पुरानी व्यवस्था के खिलाफ सशक्त संदेश है, जिसमें प्रतिभा से ज्यादा पहुंच और सिफारिश का बोलबाला था।
मुख्यमंत्री साय ने साफ शब्दों में यह जता दिया है कि अब छत्तीसगढ़ में नौकरी “जुगाड़” से नहीं, बल्कि “योग्यता” से मिलेगी। यही कारण है कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने न सिर्फ सिस्टम बदला, बल्कि भ्रष्टाचार के रास्तों पर सीधा प्रहार किया। ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन और पूरी प्रक्रिया का डिजिटलाइजेशन इस बात का प्रमाण है कि सरकार केवल भाषण नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव में विश्वास रखती है।
सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब गया, जब पूर्व पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। यह कदम साफ तौर पर बताता है कि मुख्यमंत्री साय की सरकार किसी को बचाने नहीं, बल्कि सच सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं में नकल और गड़बड़ी पर सख्त कानून लागू कर यह सुनिश्चित किया गया है कि अब युवाओं का हक कोई नहीं छीन सके।
सरकार यहीं नहीं रुकी है भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ और तय परीक्षा कैलेंडर की दिशा में काम तेज किया गया है। यानी अब युवाओं को अनिश्चितता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रोडमैप मिलेगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री साय केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि नई औद्योगिक नीति के जरिए निजी क्षेत्र में भी स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर अवसर तैयार कर रहे हैं। यह एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति है, जो छत्तीसगढ़ को रोजगार के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त युवाओं से स्पष्ट कहा कि यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हर युवा की भागीदारी जरूरी है।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने भी इस पूरी प्रक्रिया को सुशासन की मिसाल बताते हुए साफ किया कि अब योग्य युवाओं को उनका अधिकार दिलाने में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
संदेश बिल्कुल साफ है कि छत्तीसगढ़ में अब राजनीति बदली है, प्राथमिकताएं बदली हैं और सबसे महत्वपूर्ण, व्यवस्था बदलने की इच्छाशक्ति दिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने यह साबित कर दिया है कि जब निर्णय मजबूत हो, तो परिणाम भी ऐतिहासिक होते हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवाओं के सशक्त भविष्य और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित गरिमामय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत चयनित 430 प्रयोगशाला परिचारकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन में शुचिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन किया गया है तथा मंत्रालय के कार्यों को ई-प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे भ्रष्टाचार के रास्तों को प्रभावी रूप से बंद किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पूर्व में हुए पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि पारदर्शिता और न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं, जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी।
उन्होंने आगे कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ के गठन तथा एक निश्चित ‘परीक्षा कैलेंडर’ लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। उद्योगों को प्रोत्साहन देकर रोजगार सृजन को गति दी जा रही है, ताकि सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र भी युवाओं के लिए सशक्त विकल्प बन सके।
मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों से निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने इस भर्ती प्रक्रिया को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक पहल है। मंत्री श्री वर्मा ने बताया कि पदस्थापना प्रक्रिया में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काउंसलिंग प्रणाली अपनाई गई। यह व्यवस्था सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह नई पीढ़ी छत्तीसगढ़ को प्रगति और समृद्धि के नए आयामों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हाल ही में लैब टेक्नीशियन और अब प्रयोगशाला परिचारकों की नियुक्तियाँ इस दिशा में सरकार की सक्रियता का स्पष्ट प्रमाण हैं।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ. संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
लंदन। World Homeopathy Summit 4 के अवसर पर ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित भव्य समारोह में रायपुर (छत्तीसगढ़) के प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।
इस गरिमामय कार्यक्रम में रायपुर, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न स्थानों के 100 होम्योपैथी चिकित्सकों एवं विदेशों से आए 25 चिकित्सकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। विशेष रूप से प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. नीतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रिटिश संसद के सदस्य लॉर्ड रावल एवं शिवानी राजा उपस्थित रहे। साथ ही इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एलिस्टर कुक, इयोन मॉर्गन, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोनाथन ट्रॉट एवं डेविड ग्रोवर जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया।
इस अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने ऑक्सफोर्ड में स्किन डिजीज (त्वचा रोग) विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान भी दिया, जिसमें उन्होंने होम्योपैथी के माध्यम से त्वचा रोगों के प्रभावी उपचार और उसके वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके इस व्याख्यान को उपस्थित विशेषज्ञों द्वारा सराहा गया।
डॉ. त्रिवेदी को यह सम्मान होम्योपैथी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य, मरीजों के प्रति समर्पण एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर रायपुर, छत्तीसगढ़ का नाम गौरवान्वित करने के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने इसे अपने माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के मार्गदर्शन एवं मरीजों के विश्वास का परिणाम बताते हुए इस उपलब्धि को अपने शहर रायपुर और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को समर्पित किया।
यह उपलब्धि न केवल डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी, बल्कि रायपुर, छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का विषय है।
बिलासपुर। 26 वर्षीय मानसिक दिव्यांग की सौतेली मां होने के बावजूद महिला उसकी गार्जियन बनने के लिए 2022 से कानूनी लड़ाई लड़ रही है। कानून की बाध्यता के कारण हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इंकार करते हुए लोकल कमेटी में आवेदन देने की याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता देते हुए कमेटी को कानून के अनुसार निर्णय करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता ने दिव्यांग पुत्री की सगी मां के मौत के बाद उसके पिता से 15 दिसंबर 2012 को दूसरी शादी की है। शादी के बाद पति-पत्नी में विवाद होने पर वह सौतेली पुत्री को लेकर मनेंद्रगढ़ स्थित अपने मायके आ गई। वह उसकी सगी मां से भी ज्यादा देखभाल करती है। पुत्री भी मां के साथ ही रहने की बात कहती है। जैविक पिता अक्टूबर 2022 में मनेन्द्गगढ़ आया और झगड़ा कर पुत्री को अपने साथ जबरदस्ती ले जाने का प्रयास किया। पुलिस बीच-बचाव के कारण वह सफल नहीं हुआ।
इस घटना के बाद शासकीय सेवारत सौतेली माँ ने बेटी का विधिवत गर्जियन नियुक्त करने की मांग को लेकर परिवार न्यायालय में आवेदन दिया। परिवार न्यायालय से आवेदन खारिज होने पर हाई कोर्ट में याचिका पेश की थी। हाईकोर्ट ने कानूनी बाध्यता एवं परिवार न्यायालय को इस एक्ट के तहत अधिकार नहीं होने के आधार पर याचिका को खारिज किया, किन्तु दिव्यांगों के कल्याण हेतु गठित लोकल कमेटी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने छूट दी है।
याचिकाकर्ता ने दिव्यांग बेटी की गार्जियन बनने परिवार न्यायालय में आवेदन दिया। परिवार न्यायालय ने नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफ़ेयर ऑफ पर्सन्स विद ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मेंटल रिटार्डे शन एंड मल्टीपल डिसेबिलिटीज एक्ट, 1999 के सेक्शन 14(1) के तहत फाइल की गई उनकी एप्लीकेशन को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि फैमिली कोर्ट के पास दिव्यांग व्यक्ति के लिए गार्जियन नियुक्त करने की एप्लीकेशन पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके खिलाफ मां ने हाईकोर्ट में याचिका पेश की थी।
रायपुर। रायपुर कमिश्नरेट में डीसीपी (ट्रैफिक-प्रोटोकॉल) के पद पर तैनात 2020 बैच के आईपीएस विकास कुमार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं. उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में पुलिस अधीक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है. इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को छ्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र जारी किया है.
नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ से नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने आज देश के गौरवशाली उच्च सदन (राज्यसभा) में सदस्यता की आधिकारिक शपथ ग्रहण की। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने न केवल प्रदेश की तीन करोड़ जनता के अधिकारों की आवाज को सदन में बुलंद करने का संकल्प लिया, बल्कि अपने परिधान के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अस्मिता को भी राष्ट्रीय पटल पर गरिमामय ढंग से प्रस्तुत किया।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सांसद लक्ष्मी वर्मा ने एक विशेष रूप से डिज़ाइन की गई साड़ी धारण की थी, जिसने संसद भवन में सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह परिधान पूर्णतः छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और धरोहर का प्रतिनिधित्व कर रहा था। साड़ी के मुख्य भाग पर प्रदेश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक गौरव ‘भोरमदेव मंदिर’ की सुंदर आकृति और प्रदेशवासियों की अगाध आस्था की प्रतीक ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का भव्य चित्र उकेरा गया था। इसके अतिरिक्त साड़ी की किनारी (बॉर्डर/लेयर) पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अभिवादन ‘जय जोहार’ स्पष्ट अक्षरों में लिखा हुआ था, जो प्रदेश की सादगी, आत्मीयता और भाईचारे का सशक्त संदेश दे रहा था।
अपने इस विशेष परिधान से मातृभूमि को नमन करते हुए लक्ष्मी वर्मा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे उच्च सदन में केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति की सच्ची संवाहक के रूप में उपस्थित हुई हैं। इस गौरवपूर्ण अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए सांसद लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “आज राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेना मेरे सार्वजनिक जीवन का अत्यंत भावुक और सर्वोच्च क्षण है। आज मैंने जो परिधान धारण किया है, वह मेरे लिए मात्र एक वस्त्र नहीं है, बल्कि यह मेरे प्रदेश की पहचान, हमारी गौरवशाली परंपरा और ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का साक्षात आशीर्वाद है। मैं शीर्ष नेतृत्व, प्रदेश नेतृत्व और छत्तीसगढ़ की देवतुल्य जनता का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।
उन्होंने कहा, उच्च सदन में मेरा हर कदम और मेरी हर आवाज प्रदेश के सर्वांगीण विकास और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण के लिए पूर्णतः समर्पित होगी। लक्ष्मी वर्मा द्वारा उच्च सदन में छत्तीसगढ़ की संस्कृति के इस अनूठे और गौरवशाली प्रदर्शन की प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना हो रही है। इस पहल ने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को गौरवान्वित किया है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर जनगणना अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर नागरिकों को इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान संचालित हो रहा है और छत्तीसगढ़ में भी आज से ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि नागरिक 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ हो सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार आने वाले वर्षों की योजनाएं तैयार करती है, ताकि विकास का लाभ हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा। 30 मई तक प्रगणक घर-घर जाकर आवासीय और गैर-आवासीय भवनों, उनकी स्थिति, उपयोग तथा बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और संचार व्यवस्था से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि जब भी प्रगणक घर आएं, तो उन्हें सही, स्पष्ट और पूर्ण जानकारी दें, क्योंकि प्रत्येक जानकारी राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है और “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” के संकल्प को साकार करने में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही आंकड़े ही बेहतर योजना और प्रभावी विकास की नींव रखते हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस महाअभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाने और सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
इस दौरान अपर मुख्य सचिव तथा जनगणना के नोडल मनोज कुमार पिंगुआ, कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह, संचालक जनगणना कार्तिकेय गोयल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
रायपुर। प्रदेश में बढ़ती भीषण गर्मी और लू के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर स्कूलों के ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि में आंशिक संशोधन किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बढ़ती भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करना हम सब की जिम्मेदारी है। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूर्व निर्धारित ग्रीष्मकालीन अवकाश को पहले लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि इस भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत सुरक्षित रह सके।
स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पूर्व में दिनांक 01 मई 2026 से 15 जून 2026 तक घोषित ग्रीष्मकालीन अवकाश में संशोधन करते हुए अब दिनांक 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश प्रदेश के समस्त शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त एवं अशासकीय शालाओं पर लागू होगा।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर महिला आरक्षण को लेकर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण की बात तो करती है, लेकिन उसका पालन खुद नहीं कर रही है। सीएम मोहन यादव ने कहा, “कांग्रेस की नीति और नियत में फर्क दिख रहा है। वे कहती जरूर हैं कि महिला आरक्षण होना चाहिए, लेकिन जब सवाल आता है तो इसका पालन नहीं करतीं। महिला आरक्षण पर कांग्रेस बेनकाब होती दिख रही है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि महिला आरक्षण संबंधी बिल को सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए था, लेकिन विपक्ष हमेशा मीन-मेक निकालता रहता है। उन्होंने कहा, “जब कोई बात कहनी हो तो सदन के फ्लोर पर कहें, जनता के बीच विरोध करने से गलत संदेश जाता है। कांग्रेस को यह भी सोचना चाहिए कि आधी आबादी उसके बारे में क्या सोचेगी।” सीएम मोहन यादव ने तीन तलाक कानून का जिक्र करते हुए कहा कि तीन तलाक खत्म करने का पाप भी कांग्रेस के माथे पर था। वहीं, महिला सशक्तिकरण को लेकर भाजपा की पूरी प्रतिबद्धता है। “जो हम करते हैं, उसे खुले मन से कहते हैं।”
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले सीएम:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को क्रांतिकारी निर्णय बताया। उन्होंने कहा, “यह बहनों के लिए और लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा निर्णय है। इससे आधी आबादी को पूरा बल मिलेगा।” सीएम ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू है। अब नए परिसीमन से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।
रायपुर। राजधानी रायपुर के फाफाडीह टिंबर मार्केट में बुधवार देर रात भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग पायनियर मार्केटिंग के कैलाश टिंबर गोदाम में भड़की, जिसने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
दमकल की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। शुरुआत में 6 फायर ब्रिगेड भेजी गई थीं, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए अब तक 12 से अधिक दमकल वाहन तैनात किए जा चुके हैं। दमकल कर्मी लगातार आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटे हुए हैं और सुबह तक राहत कार्य जारी है।
एम्स से मंगाया जा रहा पानी
आग बुझाने के लिए अतिरिक्त पानी की व्यवस्था की जा रही है। जानकारी के अनुसार, एम्स अस्पताल परिसर से भी पानी लाकर आग बुझाने में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
लाखों का नुकसान, प्लाईवुड जलकर खाक
आग की चपेट में आने से गोदाम में रखा प्लाईवुड सहित लाखों रुपए का सामान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। टिंबर मार्केट में आग लगने से आसपास के व्यापारियों में भी दहशत का माहौल रहा।
पुलिस-प्रशासन मौके पर, कारण अज्ञात
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम संयुक्त रूप से हालात पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। यह पूरा मामला देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है।