प्रदेश / छत्तीसगढ़
डॉक्टर बनना मंजिल नहीं, समाज की सेवा करना असली लक्ष्य - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपने बड़ा लक्ष्य रखा और डॉक्टर बनने का सपना देखा, लेकिन डॉक्टर बनना ही अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। लक्ष्य केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि निरंतर आगे बढ़ने की यात्रा है। हमारा उद्देश्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि डॉक्टर बनकर समाज के लिए अच्छा कार्य करना होना चाहिए।

कबीरधाम जिले की चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया। शासकीय मेडिकल कॉलेज कवर्धा में प्रथम शैक्षणिक सत्र और प्रथम बैच की पढ़ाई का शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा और सांसद संतोष पाण्डेय ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का एप्रॉन, स्टेथोस्कोप, पेन और गुलाब का फुल देकर स्वागत किया। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ अपने नए शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की। मेडिकल कॉलेज के इतिहास के इस पहले दिन विद्यार्थियों ने अतिथियों के साथ अपने संघर्ष, तैयारी और सपनों को साझा किया।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जिस परिवार और समाज ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, उसके प्रति सेवा का भाव हमेशा बनाए रखना चाहिए। उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने लक्ष्य की तैयारी निरंतर जारी रखें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान अनावश्यक तनाव नहीं होना चाहिए। सफलता किसी एक व्यक्ति का परिणाम नहीं होती, बल्कि परिवार और सभी के संयुक्त प्रयासों से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अच्छे डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
सांसद संतोष पाण्डेय ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से कवर्धा में मेडिकल कॉलेज के प्रथम बैच का शुभारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है।

कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने कहा कि विद्यार्थियों ने कठिन मेहनत के बाद यहां तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की है, लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति डॉक्टर के पास आता है, तो उसके मन में स्वस्थ होने की उम्मीद होती है। इसलिए चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा भाव और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से किया संवाद, जानी तैयारी और सफलता की कहानी
प्रथम बैच के विद्यार्थियों के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी तैयारी, पढ़ाई की दिनचर्या, कोचिंग के अनुभव और प्रवेश परीक्षा के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने भी खुलकर अपनी तैयारी और सफलता की कहानी साझा की। किसी ने ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से तैयारी की, तो किसी ने लाइब्रेरी में स्व-अध्ययन को आधार बनाया।
पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया
संवाद के दौरान राजनांदगांव निवासी अतिथि देवांगन दूसरे प्रयास में सफल हुईं। उन्होंने बताया कि पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया, बल्कि गलतियों को पहचानकर सुधार करने और लगातार प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। वहीं भूपेंद्र सिंह ने ऑनलाइन कोचिंग से तैयारी की, जबकि कवर्धा के धरमपुरा निवासी आकाश धुर्वे ने लाइब्रेरी में स्व-अध्ययन कर सफलता हासिल की। भिलाई निवासी हर्षिता तीसरे प्रयास में सफल हुईं। भिलाई निवासी अंशिता सिंह के पिता ने बताया कि बेटी की तैयारी में उन्होंने मार्गदर्शन के साथ मॉक टेस्ट में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि भिलाई का पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल भी तैयारी में सहायक रहा।
उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से यह भी जाना कि वे प्रतिदिन कितने घंटे पढ़ाई करते थे और किताबों तथा डिजिटल स्क्रीन का कितना उपयोग करते थे। विद्यार्थियों ने बताया कि वे करीब 8 घंटे पुस्तकों से और 3 से 4 घंटे डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाई करते थे। एक विद्यार्थी ने किताब और स्क्रीन के उपयोग का अनुपात 50-50 प्रतिशत बताया। ऑनलाइन कक्षाओं के कारण कुछ विद्यार्थियों को रोज 7 से 8 घंटे तक स्क्रीन पर पढ़ाई करनी पड़ती थी। संवाद के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्रवेश परीक्षा के अनुभव भी पूछे। विद्यार्थियों ने परीक्षा के स्तर, तैयारी के दौरान आई चुनौतियों और सफलता तक पहुंचने के अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर राजेन्द्र चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, अधिष्ठाता डॉ प्रतिभा जैन शाह, सीएमएचओ डॉ देवेन्द्र तूरे सहित जनप्रतिनिधि और डॉक्टर उपस्थित रहे।
सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड पर होगी योजनाओं की जिलेवार निगरानी, मुख्य सचिव ने दिए पारदर्शिता के निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति और प्रत्येक पात्र परिवार तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति को लेकर आज उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने इस दौरान सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैश-बोर्ड पर दर्ज योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने की चल रही कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की।
डैश-बोर्ड के माध्यम से पारदर्शिता और निगरानी
सुघ्घर छत्तीसगढ़ ग्रामीण योजना के तहत शासन की विभिन्न योजनाओं के सभी पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए एक विशेष राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड तैयार किया गया है। इस डैश-बोर्ड पर राज्य एवं केंद्र शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं के सर्वेक्षित हितग्राहियों की सूची दर्ज है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड में शासन की सभी योजनाओं की जिलेवार संतृप्ति का स्पष्ट विवरण होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और त्वरित गति से योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रमुख योजनाओं की समीक्षा
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं के संतृप्तिकरण की स्थिति पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। प्रधानमंत्री किसान योजना एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राशन कार्ड एवं मुफ्त राशन वितरण, जॉब कार्ड एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जन-धन योजना व अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं के साथ ही, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक के कार्यवाही विवरण के अनुसार संतृप्ति अभियान की प्रगति, ग्रेन्यूल आंकड़ों, बस्तर संभाग के अंतर्गत संतृप्तिकरण, नियद नेल्ला नार-2.0 और सुघ्घर छत्तीसगढ़ पोर्टल में राशन कार्ड के आधार पर हितग्राहियों की सूची की भी गहन समीक्षा की गई।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, सुशासन एवं अभिसरण और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भंडारा सड़क हादसा: घायलों से मिलने एम्स पहुंचे डिप्टी CM विजय शर्मा, डॉक्टरों से ली उपचार की जानकारी
रायपुर। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में घायल कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र के लोगों से उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने एम्स रायपुर पहुंचकर मुलाकात की। मंगलवार देर शाम रायपुर एम्स पहुंचे श्री शर्मा ने घायलों और उनके परिजनों से आत्मीयता से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी मुलाकात कर घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, चल रहे उपचार और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के संबंध में चर्चा की तथा सभी घायलों को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने ग्राम बांधाटोला निवासी पांच वर्षीय लुकेश पटेल, दो वर्षीय डाली पटेल और 26 वर्षीय ललिता पटेल से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मासूम बच्चों सहित हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों के बीच पहुंचकर श्री शर्मा ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि इस कठिन समय में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा हादसे के बाद लगातार परिवार जनों से संपर्क बनाए हुए हैं, अस्पताल में भर्ती से लेकर घायलों के उपचार तक निरंतर संपर्क कर पीड़ित परिवारों को सहायता प्रदान कर रहे हैं।
दिवंगतों के घर पहुंचकर पहले ही जता चुके हैं संवेदना
उल्लेखनीय है कि हादसे के बाद उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कबीरधाम जिले में दुर्घटना में दिवंगत हुए पीड़ितों के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था। इसी दौरान उन्होंने हादसे में घायल लोगों के परिजनों से भी मुलाकात कर उनके उपचार की जानकारी ली थी।
युवाओं, महिलाओं, किसानों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एचडीएफसी बैंक द्वारा छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाओं के 25 वर्ष पूर्ण किए जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि पर बैंक प्रबंधन, अधिकारियों-कर्मचारियों और ग्राहकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने बैंक के छत्तीसगढ़ में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तैयार किए गए विशेष लोगो का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैंक के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी प्रदेश की आर्थिक प्रगति में मजबूत और सर्वसुलभ बैंकिंग व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पिछले वर्षों में बैंकिंग सेवाओं में तेजी से विस्तार हुआ है और डिजिटल तकनीक ने वित्तीय सेवाओं को पहले से अधिक सहज बनाया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं का लाभ केवल बड़े शहरों और व्यावसायिक केंद्रों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक भी समान रूप से पहुंचे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बैंकिंग नेटवर्क का और विस्तार करते हुए विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा अंचल के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और जनजातीय बहुल है। इन क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के अधिक अवसर मिलेंगे और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक सुगमता से उन तक पहुंच सकेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गांव के नजदीक बैंक की शाखा या बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होने का प्रभाव केवल बैंकिंग लेन-देन तक सीमित नहीं रहता। इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम होते हैं। ग्रामीणों को अपने खाते से संबंधित सामान्य कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, उनका समय और संसाधन बचता है तथा बचत और औपचारिक बैंकिंग के प्रति उनका विश्वास बढ़ता है। ऋण, बीमा, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच मिलने से परिवारों के आर्थिक सशक्तीकरण का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केंद्र और राज्य सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। ऐसे में अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की सहज उपलब्धता सुशासन की व्यवस्था को भी मजबूत करती है। बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार का लाभ नागरिकों के साथ-साथ शासन को भी मिलता है, क्योंकि इससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध ढंग से हितग्राहियों तक पहुंचाने में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी नई ऊर्जा आती है। किसानों को कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता, युवाओं को स्वरोजगार और उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण तथा छोटे व्यवसायियों को अपने कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी आसानी से उपलब्ध हो सकती है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार होते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों और छोटे उद्यमों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बैंकिंग संस्थाएं यदि इन समूहों तक ऋण, वित्तीय साक्षरता और अन्य बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच को और मजबूत करें तो महिलाओं की उद्यमशीलता को बड़ा संबल मिल सकता है। आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं अपने परिवार के साथ पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास छत्तीसगढ़ में ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना है, जिसमें युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के भी अधिक से अधिक अवसर मिलें। प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और आगे बढ़ने की क्षमता है। उनके विचारों और उद्यमशीलता को वित्तीय सहयोग से जोड़ने में बैंक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों को समय पर वित्तीय सहायता मिलने से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास के नए दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में अधोसंरचना के विस्तार के साथ उद्योग, व्यापार, कृषि, सेवा क्षेत्र और नई अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य विकास के इन अवसरों का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि लोगों के सपनों और आर्थिक संभावनाओं को संसाधनों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसी युवा को अपना व्यवसाय प्रारंभ करना हो, किसी महिला समूह को अपने उत्पादों का विस्तार करना हो, किसी किसान को अपनी आय बढ़ाने के लिए नई गतिविधि शुरू करनी हो अथवा किसी छोटे व्यापारी को अपना कारोबार आगे बढ़ाना हो - सुलभ वित्तीय सहायता उनके प्रयासों को नई दिशा दे सकती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने वित्तीय साक्षरता पर भी जोर देते हुए कहा कि बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों को डिजिटल बैंकिंग, सुरक्षित लेन-देन, बचत, बीमा और वित्तीय प्रबंधन के संबंध में जागरूक करना भी आवश्यक है। विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाकर लोगों को आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की यात्रा में सरकार के साथ निजी क्षेत्र और वित्तीय संस्थानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में निवेश, उद्यमिता, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग संस्थाएं राज्य सरकार की विकासपरक पहलों में महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एचडीएफसी बैंक अपने अनुभव और व्यापक बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास एवं वित्तीय समावेशन में अपनी सहभागिता को आने वाले वर्षों में और विस्तार देगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में एचडीएफसी बैंक की 25 वर्षों की यात्रा को महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह अवसर बीते वर्षों की उपलब्धियों के साथ भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करने का भी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बैंक आने वाले समय में शहरों के साथ गांवों, विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों में अपनी पहुंच बढ़ाकर अधिक से अधिक परिवारों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ेगा।
इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड अरुण मेदीरत्ता, ब्रांच बैंकिंग हेड सेंट्रल इंडिया प्रतीक शर्मा सहित बैंक के माई प्रतिनिधि उपस्थित थे।
सरकारी धन का होगा Just-in-Time इस्तेमाल, छत्तीसगढ़ में लागू होगा S-SNA मॉडल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राज्य-पोषित योजनाओं में निधि के प्रवाह को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, कुशल और प्रभावी बनाना है।
S-SNA मॉडल के अंतर्गत विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों के अनेक बैंक खातों में राशि रखने के स्थान पर प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक केंद्रीकृत S-SNA Mother Account की व्यवस्था होगी। योजनाओं की राशि आवश्यकता के अनुसार ही जारी की जाएगी और भुगतान के समय S-SNA खाते से संबंधित Zero Balance Subsidiary Account (ZBSA) के माध्यम से सीधे वेंडर अथवा हितग्राही के खाते में भुगतान किया जाएगा। इससे सरकारी धन लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रहेगा और उपलब्ध निधि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य योजनाओं के लिए उपलब्ध प्रत्येक रुपये का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। S-SNA मॉडल से सरकारी धन के प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के साथ सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजनाओं की राशि अनावश्यक रूप से अलग-अलग बैंक खातों में पड़ी रहने के बजाय आवश्यकता के समय सीधे हितग्राही और वेंडर तक पहुंचेगी। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि S-SNA मॉडल राज्य के वित्तीय प्रबंधन को अधिक आधुनिक, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख बनाएगा। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह है कि सरकार को जिस राशि की आवश्यकता आज नहीं है, उसे पहले से बैंक खातों में रखने के बजाय आवश्यकता के समय ही उपयोग में लाया जाए। इससे राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि एक ओर सरकार को विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने पड़ते हैं और दूसरी ओर विभिन्न बैंक खातों में सरकारी राशि निष्क्रिय पड़ी रहती है। S-SNA मॉडल इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे अनावश्यक ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज के भार को कम करने में मदद मिलेगी तथा वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा।
भारत सरकार की SNA व्यवस्था की तर्ज पर राज्य योजनाओं में होगा क्रियान्वयन
केंद्र प्रायोजित योजनाओं में भारत सरकार द्वारा लागू Single Nodal Agency व्यवस्था के अनुरूप अब राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं में भी S-SNA मॉडल लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत योजनाओं के फंड फ्लो की शुरुआत State Treasury/e-Kosh से S-SNA खाते तक होगी। इसके बाद क्रियान्वयन एजेंसियों को राशि स्थानांतरित करने के बजाय निर्धारित Spending/Drawing Limit उपलब्ध कराई जाएगी और वास्तविक भुगतान के समय ही संबंधित हितग्राही या वेंडर को राशि जारी होगी।
एक योजना–एक बैंक खाता, फ्लोट लगभग शून्य
S-SNA मॉडल की प्रमुख विशेषता Just-in-Time Fund Release है। इसमें योजना की राशि को पहले से विभिन्न खातों में जमा रखने के बजाय वास्तविक आवश्यकता के समय ही भुगतान किया जाएगा। इससे बैंक खातों में अनावश्यक रूप से पड़ी राशि में कमी आएगी और योजनाओं की निधि का लगभग शून्य फ्लोट सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था में Mother–Child Account प्रणाली, DBT एवं Non-DBT दोनों प्रकार के भुगतान तथा जिला, ब्लॉक, पंचायत एवं ग्राम स्तर की चिन्हित Implementing Agencies को शामिल किया जा सकेगा।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
S-SNA मॉडल से योजनाओं के Fund Flow और व्यय की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। विभागों को उपलब्ध निधि, जारी व्यय सीमा, वास्तविक व्यय और अप्रयुक्त राशि की स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सकेगी। डिजिटल प्रणाली में Maker-Checker आधारित ऑडिट ट्रेल होने से वित्तीय लेन-देन की निगरानी मजबूत होगी तथा गबन, अनधिकृत भुगतान और बैंकिंग धोखाधड़ी की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि डिजिटल ऑडिट ट्रेल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से प्रत्येक स्तर पर निधि के उपयोग की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी। इससे वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाएं कम होंगी और विभागों को अपने संसाधनों एवं व्यय की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
निष्क्रिय राशि और अनावश्यक ऋण भार पर लगेगा नियंत्रण
वर्तमान व्यवस्था में आवश्यकता से पहले राशि आहरित होने के कारण विभिन्न विभागीय खातों में बड़ी मात्रा में राशि निष्क्रिय पड़ी रहती है। प्रस्तावित व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होगा। विभागीय निष्क्रिय खातों में लगभग 530 करोड़ रुपये तथा RBI के DEAF खातों में लगभग 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि जैसी समस्याओं को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
एक ओर सरकार को अपनी योजनाओं के लिए ऋण लेकर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न बैंक खातों में सरकारी राशि निष्क्रिय पड़ी रहती है। S-SNA मॉडल से उपलब्ध निधियों के बेहतर प्रबंधन के कारण अनावश्यक ऋण की आवश्यकता कम होगी और ब्याज भार एवं राजस्व घाटे को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।
अर्जित ब्याज राज्य की संचित निधि में जमा होगा
S-SNA व्यवस्था में योजनाओं की राशि के प्रबंधन से अर्जित ब्याज को राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा। इससे सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा और राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता मजबूत होगी।
महालेखाकार कार्यालय की आपत्तियों के निराकरण में भी मदद
नई व्यवस्था से DDO एवं अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों के खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ी राशि की समस्या दूर होगी। साथ ही मैनुअल मिलान, विलंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र और ऑफलाइन सत्यापन से जुड़ी समस्याओं में कमी आएगी। डिजिटल फंड फ्लो और ऑडिट ट्रेल से वित्तीय रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध होगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा क्रियान्वयन
S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन के लिए छह प्रमुख चरण निर्धारित किए गए हैं। इनमें योजना की पहचान, वित्त विभाग से अनुमोदन, Scheme Code आवंटन, e-Kosh Mapping, S-SNA एवं ZBSA खाते खोलना तथा Treasury से S-SNA और Implementing Agency के माध्यम से हितग्राही/वेंडर को भुगतान शामिल है।
यह व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं तथा विभागों की अन्य चिन्हित योजनाओं पर लागू होगी। DBT एवं Non-DBT दोनों प्रकार की योजनाओं के साथ जिला, ब्लॉक, पंचायत एवं ग्राम स्तर की Implementing Agencies को इसके दायरे में लाया जा सकेगा। वहीं PFMS-SNA/SPARSH के अंतर्गत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, Central Sector योजनाएं तथा ऐसी योजनाएं जहां DDO सीधे e-Kosh के माध्यम से भुगतान करते हैं, इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगी।
मंत्रिपरिषद् ने S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन पर सहमति प्रदान करते हुए इससे संबंधित आवश्यक कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया है। यह व्यवस्था राज्य में पारदर्शी, कुशल एवं अनुशासित निधि-प्रवाह के साथ-साथ बेहतर वित्तीय प्रबंधन और सुशासन को नई मजबूती प्रदान करेगी।
गुढ़ियारी थाना विवाद गरमाया, भाजयुमो नेता पर आरोपों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
रायपुर। गुढ़ियारी थाने में भाजयुमो नेता पर तोड़फोड़ और थाना प्रभारी से धक्का-मुक्की के आरोपों के विरोध में कांग्रेस का थाना घेराव जारी है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता थाना परिसर के बाहर धरना देकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन कर रहे हैं।
कांग्रेस ने घटना को कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि पुलिस थाने में इस तरह की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजयुमो नेता पर थाने में हंगामे का आरोप
यह पूरा विवाद गुढ़ियारी थाना क्षेत्र में डीजे बजाने को लेकर पुलिस की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ। पुलिस ने निर्धारित समय के बाद डीजे बजाने के मामले में कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को थाने लाया था।
इसी दौरान भाजयुमो के जिला उपाध्यक्ष शुभांकर द्विवेदी अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति को छोड़ने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस की ओर से कार्रवाई जारी रखने की बात कहे जाने के बाद विवाद बढ़ गया।
तोड़फोड़ और TI से धक्का-मुक्की का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि विवाद के दौरान थाना परिसर में तोड़फोड़ की गई और थाना प्रभारी के साथ धक्का-मुक्की की गई। इसी घटना को लेकर कांग्रेस ने आज थाना घेराव और धरना शुरू किया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पुलिस थाने में पुलिस अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। प्रदर्शनकारियों ने मामले में कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई के दौरान थाने पहुंचे थे समर्थक
जानकारी के मुताबिक, डीजे के निर्धारित समय से अधिक देर तक बजने को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही थी। इसी कार्रवाई के बाद विवादित व्यक्ति को छुड़ाने के लिए समर्थकों के थाने पहुंचने की बात सामने आई।
फिलहाल घटना से जुड़े आरोपों की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी। वहीं, कांग्रेस के प्रदर्शन के चलते गुढ़ियारी थाने के बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
छत्तीसगढ़ में 11 साल बाद राष्ट्रीय निर्वाचन सम्मेलन, राज्यपाल रमेन डेका ने किया शुभारंभ
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का आज भव्य शुभारंभ हुआ। लगभग 11 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है। सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने दीप प्रज्वलित कर किया।

शुभारंभ समारोह के विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। यह प्रकाशन छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रिया, उपलब्धियों, नवाचारों और चुनावी व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करता है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनके निर्वाचन की प्रक्रिया में निरंतर सुधार तथा आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।
इस अवसर पर राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सम्मेलन में देशभर से आए राज्य निर्वाचन आयुक्तों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं निर्वाचन विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों और स्थानीय निकाय निर्वाचन को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकास शील ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने स्थानीय स्वशासन, निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा प्रशासन और निर्वाचन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों से जुड़े समसामयिक विषयों, डिजिटल पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है।
समारोह में राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह एवं आयोग की सचिव शिखा राजपूत तिवारी सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन के प्रथम दिन डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग, निर्वाचन प्रबंधन में नवाचार, पारदर्शिता तथा स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रियाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर परिचर्चा की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्तों की स्थायी समिति के अध्यक्ष विजय देव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्थायी समिति के संयोजक सुधांशु पांडे ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
दो दिवसीय यह सम्मेलन देश में स्थानीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, निर्वाचन व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक के समावेश तथा विभिन्न राज्यों के अनुभवों और नवाचारों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में आयोजित किया जा रहा है। कल 17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय नवा रायपुर अटल नगर में स्टैंडिंग कमिटी की बैठक होनी है। इसके बाद, नया रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी केपिटल सिटी, नया रायपुर के निर्माण और विकास के बारे में प्रस्तुतीकरण होगा। तत्पश्चात सभी अतिथियों को नया रायपुर के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जायेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा, छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का भ्रमण भी शामिल है।
12 साल से जेल में बंद आरोपी, आज तय होगी सजा; झीरम कांड में NIA कोर्ट सुनाएगा फैसला
जगदलपुर। बहुचर्चित झीरम हत्याकांड मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष ने NIA कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें रख चुके हैं। ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में आने वाले इस मामले में एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत आज शाम 4.30 बजे सजा सुनाएंगे। इस जघन्य हत्याकांड में दोषी ठहराए गए आरोपियों को क्या सजा मिलती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि झीरम हत्याकांड में 27 लोगों की जान गई थी, जिनमें राजनीतिक नेता, सुरक्षा कर्मी और आम नागरिक शामिल थे। अभियोजन के मुताबिक यह हमला अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित षड्यंत्र, रेकी और योजना के तहत किया गया था। जानबूझकर गोली चलाई गई और हमले में घायल लोगों तथा उनके परिवारों को भी गंभीर नुकसान उठाना पड़ा।
अभियोजन ने आरोपियों को अधिकतम सजा दिए जाने की मांग करते हुए मृत्युदंड और न्यूनतम आजीवन कारावास की दलील रखी। अभियोजन पक्ष के सहयोगी अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि आरोपियों पर लगाई गई धाराओं के तहत सजा दी जानी चाहिए। उनका तर्क था कि यदि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम करने की बात कह रहे हैं तो उसके समर्थन में कोई गवाह क्यों पेश नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि नक्सलियों तक राशन पहुंचाने से उन्हें ताकत मिली और अपराध की योजना को मदद मिली।
वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने मृत्युदंड का विरोध किया। उनका कहना था कि आरोपी करीब 12 साल से सजा भुगत चुके हैं, उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और वे ग्रामीण हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम कर रहे थे, और उन्हें सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा देने और अब तक भुगती गई सजा को देखते हुए शेष सजा में राहत देने की मांग की।
भूपेश बघेल की आपत्ति पर 17 सितंबर को हाईकोर्ट का फैसला, सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका पर टिकी नजरें
बिलासपुर। दुर्ग लोकसभा चुनाव से जुड़ी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद विजय बघेल के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अब अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 17 सितंबर को तय करेगा कि विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी या भूपेश बघेल की प्रारंभिक आपत्ति स्वीकार कर याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाएगा।
भूपेश बघेल ने आदेश 7 नियम 11 के तहत लगाई आपत्ति
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 9 सितंबर को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। इसमें विजय बघेल की चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई है। आवेदन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट ने इस आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आदेश के लिए 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
साक्ष्य दर्ज कराने हाईकोर्ट पहुंचे थे विजय बघेल
इस मामले में 18 अगस्त को अधिवक्ताओं की मौजूदगी में 10 सितंबर की तारीख चुनाव याचिकाकर्ता का साक्ष्य दर्ज करने के लिए तय की गई थी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे हाईकोर्ट पहुंचे थे।
हालांकि, सुनवाई शुरू होने पर भूपेश बघेल की ओर से आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पेश किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद कोर्ट ने पहले इसी आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
विजय बघेल ने उसी दिन पेश किया जवाब
भूपेश बघेल की ओर से आवेदन दाखिल किए जाने के बाद विजय बघेल की ओर से भी उसी दिन उसका जवाब प्रस्तुत कर दिया गया। दोनों पक्षों की सहमति से हाईकोर्ट ने आवेदन पर तत्काल सुनवाई की।
भूपेश बघेल की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिवक्ता मयंक जैन उपस्थित हुए। वहीं विजय बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
17 सितंबर को साफ होगी आगे की कानूनी दिशा
अब हाईकोर्ट के आदेश पर इस चुनाव याचिका की आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी। यदि भूपेश बघेल का आवेदन खारिज होता है, तो चुनाव याचिका की सुनवाई और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। वहीं, आवेदन स्वीकार होने पर याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो सकती है।
क्या है आदेश 7 नियम 11?
सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत प्रतिवादी किसी वाद या याचिका को शुरुआती चरण में खारिज करने की मांग कर सकता है, यदि उसमें कानूनन कार्रवाई का आधार नहीं बनता या वह निर्धारित कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। मौजूदा मामले में भूपेश बघेल की ओर से इसी प्रावधान के आधार पर विजय बघेल की चुनाव याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई है।
छत्तीसगढ़ में 42 GST निरीक्षकों की भर्ती रद्द, मूल पद पर भेजे गए कर्मचारी; जांच में मिलीं कई गड़बड़ियां
रायपुर। राज्य कर जीएसटी विभाग ने 42 वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की भर्ती को रद्द करते हुए उनके मूल पद पर पदावनत कर पदस्थ किया है. यह आदेश राज्यकर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा द्वारा जारी की गई है. भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के साथ विभाग ने आसन्न न्यायालयीन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर कर दिया है.
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सन् 2021 और सन् 2022 में सीमित भर्ती परीक्षा के माध्यम से 42 लिपिकों की पदोन्नति वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर की गई थी. भर्ती में लेन-देन के मामले सामने आए थे, जिसकी जाँच लंबे समय से की जा रही थी. इस संबंध में अनेकों बार छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी प्रश्न उठाए गए थे. कुछ कर्मचारियों द्वारा इसकी शिकायत लगातार की जा रही थी, जिसकी जाँच आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा द्वारा समिति गठित कर कराई गई.
जाँच समिति द्वारा पाया गया कि सीमित भर्ती परीक्षा में भारी मात्रा में गड़बड़ी की गई है. दोनों वर्षों की परीक्षा में बिना परीक्षा परिणाम घोषित किए सीधे चयन सूची जारी की गई थी, जिसमें आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया था. उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कर अंक बढ़ा कर चयन किया गया. सभी चयनित अभ्यर्थियों द्वारा प्रश्नों के समान उत्तर लिखे गए जाँच में पाए गए. इससे परीक्षा की विश्वसनीयता और गोपनीयता पर गंभीर सवाल उठा चयन निष्पक्ष नहीं था.
भर्ती परीक्षा की चयन समिति में तत्कालीन अपर आयुक्त कल्पना तिवारी, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त वर्तमान अपर आयुक्त टीआर धुर्वे और सहायक आयुक्त रौशन सिंह थे. तत्कालीन आयुक्त समीर विश्नोई द्वारा इस भर्ती को अंजाम दिया गया था, जिसमें बड़ी राशि के लेनदेन की शिकायत की गई थी.
चयन सूची जारी होने के तुरंत बाद अनेक अभ्यर्थियों द्वारा अपनी उत्तर पुस्तिका की प्रति और रिजल्ट की सूची की माँग सूचना के अधिकार के तहत की गई मामले को छुपाने के लिए जनसूचना अधिकारी और अपीलीय जनसूचना अधिकारियों को तत्काल हटाया गया, और चयन समिति के अधिकारियों को जनसूचना अधिकारी और अपीलीय जन सूचना का प्रभार दिया गया.
जाँच में यह पाया गया कि कुछ अभ्यर्थी निर्धारित तिथि को निर्धारित स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं हुए थे, उन्हें लाभ देने के लिए अर्हतातिथि में परिवर्तन किया गया. कुछ अभ्यर्थी ऐसे थे, जो 10 साल पहले भृत्य के पद पर भर्ती हुए थे. पाँच वर्ष की सेवा अवधि के बाद निम्न श्रेणी लिपिक में उनकी पदोन्नति हुई और पाँच वर्ष के बाद निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दे दी गई.
जाँच समिति के समक्ष चयन समिति द्वारा यह स्वीकार किया गया कि परीक्षा हाल में प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाएं बिना शील्ड किये हुए सीधे तत्कालीन आयुक्त समीर विश्नोई द्वारा स्वयं पहुँचाए गए थे. यहाँ तक कि परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों की उपस्थिति का रिकार्ड भी जाँच समिति को उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे.
चयनित हुए अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं की जाँच पर पाया गया कि गलत उत्तर पर भी अंक दिए गए हैं, और मॉडल आंसर के अनुसार हु-ब-हू उत्तर लिखे गए हैं. चयनित अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रणेता डॉ ख़ूबचंद बघेल की जीवनी पर निबंध एक समान लिखा है. इससे स्पष्ट हो गया कि चयनित अभ्यर्थि तत्कालीन आयुक्त समीर विश्नोई और चयन समिति के सदस्यों से मिलीभगत कर चयनित हुए थे.
42 जीएसटी निरीक्षक, जिनकी भर्ती हुई रद्द
2021 भर्ती वाले
आकाश त्रिपाठी, दिव्य प्रकाश वर्मा, भरत लाल साहू, ओम नारायण बघेल, संतु राम सलाम, नीरज श्रीवास्तव, अमित हुमने, भूषण कुर्रे, तोमन लाल भुआर्या, यज्ञेश दीवान, पुष्पेंद्र करश, विधान रंजन कुल्लू, युगल किशोर साहू, मलिक राम बांधे, लाल साय राम, गो शिवेंद्र टांडे, सत्य नारायण नेताम, मोनिका दीवान, जितेंद्र नेताम, दुरूपरसाय मांझी, अनिल कुमार जांगड़े
2022 भर्ती वाले
सुरेश कुमार गुप्ता, प्रभात चन्द्र तिवारी, अजय कौशिक, हितेश कुमार दुबे, दीपा उधवानी, रितु सोनकर, दीपेश कुमार साहू, गायत्री सिन्हा, गजेंद्र कुमार तिवारी, ओम प्रकाश साहू, मनीष चेलक, ताम्रध्वज साहू, नंदनी साहू, दीपक तुरियाकर, अमर सिंह कंवर, उदयराम ध्रुव, रमेश कुमार धृतलहरे, दीप्ति मरकाम, चंद्रकांत ठाकुर, दीपक कुजूर, राकेश कुमार मिंज.
बिना नक्शे के निर्माण पर सख्ती, रावतपुरा फेस-2 में निगम ने शुरू की बुलडोजर कार्रवाई
रायपुर। राजधानी के रावतपुरा फेस-2 कॉलोनी में बुधवार सुबह नगर निगम की टीम बुलडोजरों के साथ पहुंची है. नक्शा पास कराए बिना निर्माण किए गए मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है. निगम अधिकारियों के साथ पुलिस टीम भी मौके पर मौजूद है.
40 मकानों को थमाया गया नोटिस
जानकारी के मुताबिक, रावतपुरा फेस-2 में करीब 40 मकानों को नोटिस जारी किया था. इन मकानों के मालिकों ने बिना नक्शा पास कराए मकान निर्माण कराया है. नोटिस के बाद अब निगम की टीम आज कार्रवाई करने पहुंची है.
पुलिस की मौजूदगी में निगम की कार्रवाई

निगम अमला करीब एक दर्जन बुलडोजर के साथ पहुंचा हुआ है. अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिसकर्मी मौजूद हैं. निगम की कार्रवाई से इलाके में हलचल बढ़ गई है.
रायपुर कमिश्नरेट में पुलिसकर्मियों का तबादला, देखें लिस्ट…
रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के उत्तर क्षेत्र (नॉर्थ जोन) में पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस उपायुक्त, उत्तर क्षेत्र कमिश्नरेट रायपुर ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से 6 पुलिसकर्मियों का तबादला आदेश जारी किया है। इनमें प्रधान आरक्षक और आरक्षक शामिल हैं। सभी पुलिसकर्मियों को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से नई पदस्थापना पर भेजा गया है।
इन पुलिसकर्मियों का हुआ तबादला
जारी आदेश के अनुसार, महिला प्रधान आरक्षक ज्योति भोई को थाना उरला से चौकी रामनगर भेजा गया है। वहीं आरक्षक सुनील कुमार कौशिक को थाना खमतराई से चौकी रामनगर पदस्थ किया गया है। इसी तरह आरक्षक जितेंद्र मज्जी को चौकी रामनगर से थाना खमतराई, आरक्षक जयंत साहू को चौकी रामनगर से थाना उरला और आरक्षक ऋषभ कुमार आनंद को चौकी रामनगर से थाना उरला भेजा गया है। इसके अलावा आरक्षक दीपक मिश्रा को थाना खमतराई से थाना पंडरी पदस्थ किया गया है।
देखिये लिस्ट-

पांच दिवसीय विश्वकर्मा जयंती महोत्सव के दूसरे दिन शामिल हुए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को शहीद स्मारक भवन श्री विश्वकर्मा समाज द्वारा विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पांच दिवसीय समारोह के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने पूरे विश्वकर्मा समाज और उपस्थित जनसमूह को विश्वकर्मा जयंती की बधाई दी और समाज के योगदान को सृष्टि के निर्माण की असली रीढ़ बताया।
अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए सांसद अग्रवाल ने कहा, "रामसागरपारा और बढ़ईपारा दोनों अलग नहीं हैं। हम बचपन के दौर से विश्वकर्मा समाज की कलाकारी और हुनर को देख रहे हैं। उस दौर में जब बैलगाड़ियां चलती थीं, तो सुबह 4 बजे से ही लकड़ी आनी शुरू हो जाती थी। बैलगाड़ी और उसके पहियों के निर्माण का काम हमारा यही विश्वकर्मा समाज करता था और यहाँ से बने पहिए पूरे छत्तीसगढ़ में जाते थे। जिस परिवार में एक शिल्पकार या कलाकार होता है, उसके छोटे बच्चे भी सहज ही वह हुनर सीख जाते हैं और पूरा परिवार शिल्प साधना में जुट जाता है।"

उन्होंने आगे कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी जमीनी हुनर की कद्र करते हुए ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ शुरू की, ताकि हमारे लोहार, बढ़ई, स्वर्णकार और अन्य पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक संबल और पहचान मिल सके।
छत्तीसगढ़ की खनिज और औद्योगिक शक्ति का उल्लेख करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा, "भगवान विश्वकर्मा ने पूरी सृष्टि की रचना की और आज उनके वंशज इस निर्माण परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। अब देश में रॉकेट और चंद्रयान बन रहे हैं। हमारे भिलाई स्टील प्लांट से निकली लोहे की चादरों से चंद्रयान, हवाई जहाज और रेलवे की पटरियां बन रही हैं। छत्तीसगढ़ पर भगवान विश्वकर्मा का विशेष आशीर्वाद है कि यहाँ लोहा, बॉक्साइट, एल्युमिनियम, पत्थर, बिजली, निकल और टिन सब मौजूद है। अब तो सोलर और मोबाइल बैटरी में काम आने वाला लिथियम भी हमारे कोरबा में मिल चुका है।"

उन्होंने कहा कि जिस निर्माण की नींव में भगवान विश्वकर्मा की पूजा और आशीर्वाद होता है, वह निर्माण सदैव अटूट और मजबूत रहता है। सांसद अग्रवाल ने भव्य आयोजन के लिए आयोजकों का आभार जताते हुए सभी प्रदेशवासियों की समृद्धि और उन्नति की कामना की।
कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा, छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
PM मोदी के जन्मदिन पर ‘जल जन सेवा संकल्प यात्रा’, 100 युवाओं की टीम वडनगर के लिए रवाना, CM साय ने दिखाई हरी झंडी
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘जल जन सेवा संकल्प यात्रा’ के तहत छत्तीसगढ़ से 100 युवाओं की टीम रवाना हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा तथा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने झंडा दिखाकर यात्रा को रवाना किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस यात्रा में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 सितंबर को जन्मदिन है। उन्होंने कहा कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कर्मक्षेत्र है, जबकि वडनगर उनकी जन्मभूमि है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रेरक बाइक यात्रा होनी है, इसके लिए दो बसों में युवाओं को भेजा गया है। ये लोग छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। दस नदियों के जल से जलाभिषेक होगा। 22 सितंबर तक लगातार यात्रा करेंगे।
वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में छत्तीसगढ़ की पहल, टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन पर वैश्विक विशेषज्ञों से चर्चा
रायपुर। गुजरात के गांधीनगर में आयोजित 10वें वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF 2026) में छत्तीसगढ़ ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के नेतृत्व में राज्य से गई टीम ने फोरम में शामिल होकर सर्कुलर इकोनॉमी, संसाधन दक्षता और कचरे को संसाधन में बदलने के आधुनिक समाधानों पर वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। राज्य शहरी विकास अभिकरण के सीईओ सुमीत अग्रवाल भी प्रतिनिधि मंडल में शामिल हैं।

राज्य की टीम के प्रमुख श्री बोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के अधिकतम उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य का प्रयास है कि नवाचार और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कचरे का बेहतर प्रबंधन करते हुए उसे उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जाए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छ, मजबूत और टिकाऊ शहरों के निर्माण को गति मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में राज्य की पहल और मजबूत होगी।
फोरम में दुनिया के विभिन्न देशों के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नवाचारी तकनीक विकसित करने वाले संस्थान और क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने, संसाधनों के बेहतर उपयोग, टिकाऊ उत्पादन एवं उपभोग तथा वेस्ट-टू-रिसोर्स जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
राज्य की टीम ने प्रदर्शनी केंद्रों का किया अवलोकन
छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने फोरम के दौरान प्रदर्शनी केंद्रों का भी अवलोकन किया। यहां रिसाइक्लिंग, संसाधनों की रिकवरी, कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने, टिकाऊ सामग्री तथा सर्कुलर बिजनेस मॉडल से जुड़ी नवीन तकनीकों और समाधानों को प्रदर्शित किया गया था। टीम ने इन तकनीकों और मॉडलों के जरिए कचरे को बोझ के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की संभावनाओं को समझा।
छत्तीसगढ़ के शहरी विकास के लिए उपयोगी समाधानों की तलाश
विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में सहभागिता के दौरान राज्य की टीम को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को समझने तथा छत्तीसगढ़ के शहरी विकास और अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र के लिए उपयोगी नवाचारों की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला। इनमें विशेष रूप से संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और वेस्ट-टू-वैल्यू से जुड़े समाधानों पर फोकस रहा।
जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता- मंत्री राजेश अग्रवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को नई ऊंचाई देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से जनजातीय अंचल के गांवों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के साथ-साथ स्थानीय परिवारों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे तैयार किए जाने का प्रस्ताव है। इस क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है। इसमें होमस्टे निर्माण के साथ गांव स्तर पर आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान किया गया है।
पर्यटक जशपुर को सिर्फ देखेंगे नहीं, यहां के जीवन को भी अनुभव करेंगे
यह परियोजना पारंपरिक होटल आधारित पर्यटन से आगे बढ़कर कम्यूनिटी बेस्ड को प्रोत्साहित करेगी। होमस्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर की सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने के साथ गांवों में सामूहिक उपयोग की आधारभूत सुविधाएं भी विकसित होंगी।
प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों से जुड़ेगा होमस्टे क्लस्टर
क्लस्टर का चयन क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। प्रस्तावित गांव बगीचा और जशपुर नगर के साथ-साथ कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़, लोरोघाट सहित अनेक प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के निकट स्थित हैं। होमस्टे सुविधा विकसित होने से पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों में ठहरने के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे जशपुर में पर्यटकों की ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना है और पर्यटन गतिविधियों का लाभ स्थानीय स्तर पर व्यापक रूप से पहुंच सकेगा।
गाइडिंग से लेकर स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प तक बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
होमस्टे क्लस्टर का प्रभाव केवल आवास सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। परियोजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, स्थानीय व्यंजन, पर्यटक गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प तथा अन्य पर्यटन सेवाओं से जोड़ने की संभावनाएं विकसित होंगी। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खान-पान और हस्तशिल्प की मांग में भी वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार पर्यटन गतिविधियां गांवों में रोजगार और आय के अनेक सहायक अवसरों को जन्म देंगी।
जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है और सरकार का प्रयास है कि इस विरासत को संरक्षित करते हुए स्थानीय समुदायों को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि जशपुर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विशिष्ट लोक परंपराओं से समृद्ध क्षेत्र है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत स्वीकृत यह क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय परिवारों को इसके आर्थिक लाभ से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि पर्यटक जब जशपुर आएं तो वे यहां की प्रकृति के साथ-साथ जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करें।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को पर्यटन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में अवसर मिलने से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विकसित पर्यटन मॉडल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि जशपुर की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पर्यटन का लाभ गांव और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे-सौमिल रंजन चौबे
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों अथवा होटल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव और स्थानीय परिवारों को भी इसका सीधा भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जशपुर का यह होमस्टे क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बनेगा। इससे पर्यटकों को प्रामाणिक छत्तीसगढ़ी अनुभव मिलेगा और जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आय के नए अवसर विकसित होंगे।
जशपुर को जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कदम
क्लस्टर होमस्टे परियोजना के माध्यम से जशपुर में पर्यटन का विस्तार प्रमुख पर्यटन स्थलों से आगे आसपास के गांवों तक होने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन का अनुभव मिलेगा और ग्रामीण समुदाय पर्यटन मूल्य-श्रृंखला का सक्रिय हिस्सा बनेगा।
प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता: मंत्री राजेश अग्रवाल
रायपुर। सरगुजा दौरे के दौरान नगर पंचायत लखनपुर पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से मुलाकात कर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने हितग्राहियों से आवास निर्माण की स्थिति, योजना से मिले लाभ तथा आवास से जुड़ी आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार गरीब तथा जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना इसी संकल्प का महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसके माध्यम से अनेक परिवारों को अपने पक्के घर का सपना साकार करने का अवसर मिला है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों के सम्मान, स्वाभिमान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने का जो संकल्प लिया है, उससे देश के लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पक्का मकान मिलने से परिवारों को न केवल सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद भी मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि पात्र हितग्राहियों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचे। प्रधानमंत्री आवास योजना ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी जरूरतमंद परिवार को आवास जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित न रहना पड़े।

हितग्राहियों से चर्चा के दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने उनकी व्यक्तिगत समस्याओं और आवास निर्माण से संबंधित आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी हितग्राहियों की समस्याओं के निराकरण तथा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की।
‘सेवा संकल्प अभियान‘ से जुड़कर जनभागीदारी को मजबूत करने का आह्वान
मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से सेवा संकल्प अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सेवा, जनकल्याण और जनभागीदारी के भाव को निरंतर मजबूती मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान इसी भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने हितग्राहियों से आग्रह किया कि 17 सितंबर की संध्या 7 बजे अपने-अपने घरों में आशीर्वाद का दीया प्रज्ज्वलित करें और सेवा, समर्पण तथा जनभागीदारी के इस संकल्प से जुड़ें। उन्होंने कहा कि घरों में प्रज्ज्वलित होने वाला आशीर्वाद का दीया समाज में सेवा और सकारात्मकता का संदेश भी देगा।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान‘ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सेवा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना ने जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा और खुशहाली का प्रकाश फैलाया है, उसी तरह ‘आशीर्वाद का दीया‘ सेवा, विश्वास और संकल्प की भावना को घर-घर तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों सहित नागरिकों से अपील की कि वे 17 सितंबर को अपने घरों में आशीर्वाद का दीया प्रज्ज्वलित कर सेवा संकल्प अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और अधिक से अधिक लोगों को इस जनभागीदारी से जोड़ें।
इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों ने मंत्री श्री अग्रवाल से अपने अनुभव साझा किए और योजना से मिले लाभ के संबंध में जानकारी दी। हितग्राहियों ने बताया कि पक्का आवास मिलने से उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की उम्मीद बढ़ी है। मंत्री श्री अग्रवाल ने हितग्राहियों की बातों को सुना और शासन की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से संबंधित सुझावों पर भी चर्चा की।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण और जनसेवा को केंद्र में रखकर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीब परिवारों को पक्की छत देकर उनके जीवन में सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर समाज की मजबूत नींव तभी तैयार होगी, जब प्रत्येक परिवार के पास सुरक्षित आवास, सम्मानजनक जीवन और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनभागीदारी को मजबूत करते हुए सेवा और सामाजिक सरोकारों की इस भावना को और व्यापक बनाया जा सकता है।
