वंदे मातरम कहने से मेरा धर्म खतरे में नहीं आता-जावेद अख्तर
05-Oct-2026
दिल्ली/ वंदे मातरम पिछले कई महीनों से चर्चा में है। संसद में वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने के लिए नया बिल पास हुआ है, जिसके बाद यह कानून की शक्ल ले चुका है। इस पर कई विवाद भी हो रहे हैं। इन सबके बीच, जावेद अख्तर का कहना है कि वंदे मातरम कहने से मेरा धर्म खतरे में नहीं आता है, लेकिन उन्होंने धार्मिक अंतरे गाने से इनकार कर दिया।
'इंडियन एक्सप्रेस हिंदी' से बात करते हुए जावेद अख्तर ने कहा, ''वंदे मातरम कहने से बहुत से लोग होंगे, जिनका धर्म खतरे में आता है, लेकिन मेरा नहीं आता। वंदे मातरम मैंने गानों में कई बार इस्तेमाल किया है। लेकिन बतौर नास्तिक होते हुए आप मुझसे वे अंतरे गाने के लिए कहते हैं जोकि धार्मिक हैं तो मैं कहता हूं कि मैं अपने देश से प्यार करता हूं। मैं 100 बार वंदे मातरम कहूंगा और भारत माता की जय भी कहूंगा। मैंने वंदे मातरम लिखा भी है। ओरिजनल गाना हिंदी में लिखा है, लेकिन आप मुझसे धार्मिक बात मत गवाइए, फिर चाहे वह इस्लाम, हिंदू, क्रिश्चियनिटी कुछ भी हो। मैं नास्तिक हूं, मुझपर क्यों थोप कर रहे। बतौर भारतीय मुझे नास्तिक होने का हक है।''
उन्होंने कहा कि आप देश की बात करिए, हम आपके साथ हैं, लेकिन आप धर्म के अंतरे लगा रहे हैं तो वो मान्य नहीं होगा। जब पूछा गया कि क्या इस मामले में वे पीआईएल दाखिल करेंगे तो इस पर अख्तर ने कहा कि देखते हैं। उन्होंने कहा, ''शायद लोगों को अक्ल आ जाए कि ऐसा नहीं होना चाहिए। आप कहिए कि देश की तारीफ करो, भारत माता कहने से मेरा धर्म खतरे में नहीं आता। लेकिन जब आप अपना धर्म देते हैं तो कहता हूं कि मुझे किसी का भी नहीं चाहिए, तुम्हारा क्या लूंगा।''
क्या है वंदे मातरम पर पूरा विवाद
बता दें कि वंदे मातरम के पूरे अंतरे गाने का विरोध करने वालों का तर्क है कि तीसरे से पांचवें अंतरे में मातृभूमि को केवल देश या धरती के रूप में नहीं, बल्कि देवी के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है। तीसरे अंतरे में मातृभूमि की रक्षा के लिए करोड़ों हाथों और हथियारों का उल्लेख है, चौथे में उसके रूप को मंदिरों में प्रतिष्ठित बताया गया है और पांचवें में मातृभूमि की तुलनादुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती से की गई है। कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। वहीं, सरकार के नए दिशानिर्देश में सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो पदों के बजाय सभी छह अंतरे गाना अनिवार्य किया गया है।