रायपुर। बीजापुर जिले भोपालपटनम ब्लॉक के वरदली गांव की 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली 11 वर्षीय शांभवी गुरला की मासूम आंखों में एक ही सवाल था— “पापा, मुझे क्या हुआ है, मैं ठीक हो जाऊंगी ना?”
खेती-किसानी कर परिवार का गुजारा करने वाले उसके पिता इस सवाल पर अक्सर चुप हो जाते थे। तीन महीने पहले जिला अस्पताल बीजापुर में जब डॉक्टरों ने बताया कि शांभवी को रियूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) है, तो पिता के पांव तले जमीन खिसक गई। डॉक्टरों ने रायपुर में इलाज कराने की बात कही, लेकिन परिवार को लगा कि रायपुर में इलाज में तो बहुत ज्यादा खर्च लगता होगा, ये सोच कर परिवार की उम्मीदें टूटने लगीं।
घर में हर रोज यही चर्चा होती—“अब क्या होगा? हम अपनी बेटी का इलाज कैसे कराएंगे?” मां रोती और शांभवी को सीने से लगाकर कहती—“बेटा, सब ठीक होगा।” लेकिन उसके पिता की आंखों में चिंता साफ झलकती थी। आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और बेटी को लेकर सीधे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के पास पहुंचे। स्वास्थ्य मंत्री ने बच्ची से मुलाकात की और तुरंत ही रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट में डॉ. स्मित श्रीवास्तव से बात की। स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज तुरंत शुरू किया जाए। खर्च की चिंता मत करें, सरकार पूरी जिम्मेदारी लेगी।”
स्वास्थ्य मंत्री की यह बात सुनते ही शांभवी की मां की आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा— “मंत्री जी, आप हमारी बेटी को नया जीवन दे रहे हैं। आप हमारे लिए किसी डाक्टर से कम नहीं।” स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर शांभवी को इलाज के लिए एसीआई रायपुर में लाया गया है। यहां डॉक्टरों की टीम उसकी जांच करेगी और उसका इलाज शुरू करेगी। गौरतलब है कि सरकार का यह कदम सिर्फ एक बच्ची के लिए नहीं, बल्कि राज्य के हर एक गरीब परिवार के लिए भरोसे का संदेश है।
अब माता पिता के चेहरे पर खुशी के भाव देखकर आज शांभवी भी मुस्कुरा रही है और पिता से बार-बार पूछती है— “पापा, मैं जल्दी खेल पाऊंगी ना?” और इस बार पिता की आंखों में आंसू नहीं, बल्कि उम्मीद की चमक है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार और 14वें मंत्री के शपथ ग्रहण को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर आज अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
कोर्ट में हुई बहस
सुनवाई के दौरान सबसे पहले याचिकाकर्ता का शपथ पत्र स्वीकार किया गया। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इसी तरह का एक मामला वर्ष 2020 से सुप्रीम कोर्ट में एन.पी. प्रजापति बनाम राज्य सरकार शीर्षक से लंबित है। ऐसे में जब तक वहां निर्णय नहीं होता, इस याचिका पर सुनवाई संभव नहीं है।
याचिकाकर्ता के वकील किशोर भादुड़ी ने इस पर तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट का प्रकरण पहले ही निराकृत हो चुका है। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट केस की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
कैबिनेट विस्तार का विवाद
गौरतलब है कि अब तक छत्तीसगढ़ में 15 प्रतिशत सीलिंग नियम लागू होने के बाद मुख्यमंत्री को छोड़कर 12 मंत्रियों का प्रावधान रहा है। यही स्थिति डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल की सरकारों में भी रही।
हाल ही में 20 अगस्त को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में हरियाणा फार्मूला लागू करते हुए 3 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इसके बाद मुख्यमंत्री को छोड़कर मंत्रियों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।
याचिकाकर्ता वासु चक्रवर्ती ने इसे चुनौती दी है। उनका कहना है कि 90 सदस्यीय विधानसभा में 15 प्रतिशत की सीमा 13.5 होती है, जिसका मतलब है कि मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 13 मंत्री ही हो सकते हैं। ऐसे में 14वां मंत्री बनाना संविधान के अनुच्छेद 164(1A) का उल्लंघन होगा।
हरियाणा का उदाहरण
दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा विधानसभा की सदस्य संख्या भी 90 है, जहां मुख्यमंत्री सहित 14 मंत्रियों का मंत्रिमंडल कार्यरत है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार में भी 14वां मंत्री बनाए जाने की मांग उठी थी। उस समय वरिष्ठ विधायक अमितेष शुक्ल ने यह मांग रखी थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे लागू नहीं किया था।
अब देखना होगा कि हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाने वाली सुप्रीम कोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट इस संवैधानिक विवाद को किस दिशा में ले जाती है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मियों की हड़ताल ने सियासी रंग पकड़ लिया है। इस बीच पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने माना कि कांग्रेस सरकार संविदा कर्मियों की मांगों को पूरा करने में नाकाम रही।
वीडियो में सिंहदेव साफ कहते नजर आ रहे हैं— “हम लोग हारे क्योंकि हम एनएचएम कर्मियों की मांग पूरी नहीं कर पाए। कांग्रेस के घोषणा पत्र में नियमितीकरण का वादा किया गया था, लेकिन पांच साल में यह संभव नहीं हो सका। घोषणा पत्र बनाने में मेरी भी सीधी जिम्मेदारी रही। हारने के कई कारण होते हैं, यह भी एक कारण था। चुनाव में कई बातें असर डालती हैं, इसलिए पुनः समीक्षा करनी होगी।”
वहीं, दूसरी ओर भाजपा भी एनएचएम कर्मियों के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। रायपुर सांसद एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने हड़ताली कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया। एनएचएम संविदाकर्मियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सांसद को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने कर्मचारियों की ओर से नेतृत्व किया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांगें वाजिब हैं और उन्हें पूरा किया जाना चाहिए। उनके इस बयान से संविदा कर्मियों को बड़ी राहत मिली है।
लगातार दो सप्ताह से चल रही यह हड़ताल अब प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गई है। एक ओर जहां कांग्रेस की पिछली नाकामियों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं भाजपा नेताओं का समर्थन एनएचएम कर्मियों की उम्मीदें बढ़ा रहा है।
रायपुर/बिलासपुर। त्योहारों और आयोजनों के दौरान सार्वजनिक मार्गों पर पंडाल लगाने की परंपरा पर अब सख्ती होने जा रही है। हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शासन ने स्पष्ट किया कि नई पॉलिसी जारी कर दी गई है। इसके तहत अब कोई भी संस्था, संगठन या व्यक्ति बिना अनुमति सड़कों, चौराहों, सार्वजनिक स्थानों और बिजली तारों के नीचे पंडाल या अस्थाई संरचना खड़ी नहीं कर सकेगा।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ के समक्ष शासन की ओर से बताया गया कि 25 अगस्त 2025 को नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 और नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत नई नीति लागू की गई है।
छोटी और बड़ी संरचनाओं के लिए अलग नियम
शासन ने दिशा-निर्देश दो श्रेणियों में बांटे हैं:
पांच हजार वर्ग फीट से छोटे पंडाल/अस्थाई संरचना (अधिकतम 500 लोग):
स्थानीय निकाय से अनुमति अनिवार्य।
मुख्य मार्गों पर अनुमति नहीं मिलेगी, वैकल्पिक मार्ग तय होगा।
बिजली तारों के नीचे पंडाल नहीं बनेंगे।
अग्निरोधी सामग्री का उपयोग होगा।
आयोजक समिति सफाई की जिम्मेदारी लेगी।
पांच हजार वर्ग फीट से बड़े पंडाल/अस्थाई संरचना (500 से अधिक लोग):
एडीएम, थाना प्रभारी, बिजली विभाग और फायर ब्रिगेड से एनओसी जरूरी।
अनुमति शुल्क जमा करना अनिवार्य।
जनरेटर बैकअप की व्यवस्था करनी होगी।
नजदीकी भवन से कम से कम 15 फीट दूरी रखनी होगी।
गणेश उत्सव से होगी पहली टेस्टिंग
याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि इस नीति का पहला परीक्षण गणेश विसर्जन के दौरान होगा। वहीं शासन ने दुर्गा पूजा के बाद मामले की अगली सुनवाई करने का अनुरोध किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
नई पॉलिसी लागू होने के बाद आयोजकों को अब पंडाल लगाने से पहले कई नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। इससे जहां सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा, वहीं यातायात और सार्वजनिक सुविधा पर भी असर नहीं पड़ेगा।
रायपुर। रायपुर में गणेश विसर्जन और ईद मिलाद-उन-नबी पर जिला प्रशासन ने डीजे और पटाखों पर बैन लगा दिया है। शांति समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक में बताया गया कि चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती होगी। साथ ही हुड़दंगियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एडीएम उमाशंकर बंदे और एएसपी लखन पटले ने समाज प्रमुखों से बातचीत करते हुए कहा कि, लोग परंपराओं और उत्साह के साथ त्योहार मनाएं, लेकिन शांति और भाईचारा बनाए रखना सबसे अहम है। एएसपी ट्रैफिक प्रशांत शुक्ला और अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
डीजे और पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध
एएसपी लखन पटले ने कहा कि, जुलूस के दौरान समय का विशेष ध्यान रखा जाएगा। डीजे का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस बार जुलूस में पटाखों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रूट तय किए गए हैं।
हुड़दंगियों पर होगी सख्त कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान हुड़दंग और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। जिले के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में शांति समिति और स्थानीय नागरिकों के साथ बैठकें करें। यह बैठकें न केवल थानों में बल्कि मोहल्लों, कॉलोनियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी ली जा जाए।
हर चौक-चौराहे पर अतिरिक्त बल तैनात
त्योहारों के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सभी चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। पुलिस बल हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा। इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। अधिकारियों ने कहा कि गणेश विसर्जन और ईद-ए-मिलाद दोनों पर्व सौहार्दपूर्ण माहौल में भाईचारे के साथ मनाए जाएं। त्योहारों की खुशी में शांति और सुरक्षा का ध्यान रखना सभी की जिम्मेदारी है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल आज 16वें दिन भी जारी है। उधर इस प्रदेशव्यापी हड़ताल का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्षों को संयुक्त संचालक ने नोटिस जारी कर 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम जारी कर दिया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि इस अंतिम पत्र के जारी होने के 24 घंटे के भीतर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें अन्यथा संविदा शर्तो के अनुरूप सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जायेगी।
छत्तीसगढ़ में पिछले 15 दिनों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो रखा है। प्रदेश भर के 16 हजार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारी पिछले 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। अपनी 10 सूत्रीय मांगो को लेकर जहां हड़ताली कर्मचारी आर-पार की लड़ाई का दावा कर रहे है। उधर स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति को देखते हुए सरकार ने भी सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। पिछले दिनों हड़ताली कर्मचारियों को नो वर्क-नो पे का नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद भी जब कर्मचारी काम पर वापस नही लौटे, तब अधिकारियों द्वारा काम पर नही लौटने पर वैधानिक कार्यवाही की चेतावनी दी गयी।
इसके बाद भी जब हड़ताली एनएचएम कर्मचारी काम पर वापस नही लौटे तो अब सरकार ने जिलों में इस हड़ताल की कमान संभाल रहे एनएचएम के जिलाध्यक्षों को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने का अंतिम पत्र जारी किया है। संयुक्त संचालक द्वारा जारी इस नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि……इस अंतिम पत्र के जारी होने के 24 घंटे के भीतर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें अन्यथा संविदा शर्तो के अनुरूप सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जायेगी।
उधर प्रदेशभर के जिलाध्यक्षों को जारी हुए नोटिस को लेकर हड़ताली कर्मचारियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। हड़ताली कर्मचारियों और पदाधिकारियों ने साफ किया कि सरकार की नीति और नीयत समझ से परे है। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल मीडिया में खुद भ्रमित करने वाले बयान दे रहे है। रही बात सेवा समाप्ति की चेतावनी की तो अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जायेगी। हड़ताली कर्मचारियों की मांग पर जब तक सरकार मुहर नही लगाती, तब तक किसी भी हालत में हड़ताल खत्म नही होगा।
जगदलपुर। देशभर में वोट चोरी को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है और “वोट न्याय यात्रा” के जरिए राज्यों में माहौल बना रही है. अब छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस वोट चोरी का दावा कर रही है. कर्नाटक, बिहार, महाराष्ट्र की तरह छत्तीसगढ़ में वोट चोरी का दावा किया जा रहा है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस जल्द तथ्यों के साथ इसका खुलासा करेगी.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो जारी किया है. इसमें उन्होंने दावा किया है कि बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह यहां भी वोट चोरी के मामले सामने आएंगे. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि इस गठजोड़ से बीजेपी को अनुचित लाभ मिला है.
दीपक बैज का कहना है कि जल्द ही कांग्रेस ठोस तथ्यों के साथ छत्तीसगढ़ में भी वोट चोरी का खुलासा करेगी. अभी यह महज़ इशारा है, लेकिन आने वाले समय में सबूत पेश किए जाएंगे. फिलहाल प्रदेश कांग्रेस ने सभी जिलों के जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर प्रशिक्षण अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है. कांग्रेस का दावा है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में धांधली हुई है और उसका पर्दाफाश बहुत जल्द किया जाएगा.
रायपुर। CM विष्णुदेव साय दिल्ली रवाना हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, "हम उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा के साथ एक दिवसीय दिल्ली दौरे पर जा रहे हैं। वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे।"
इस बीच सीएम साय ने आज सुबह एक ट्वीट भी किया है, जिसमें उन्होंने बताया, छत्तीसगढ़ के मेहनतकश किसानों के लिए बड़ी राहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का हृदय से आभार, जिनकी संवेदनशीलता और सहयोग से सितंबर माह हेतु राज्य को 60,800 MT यूरिया का आबंटन स्वीकृत हुआ है। यह अतिरिक्त उपलब्धता खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने, किसानों की मेहनत को संबल देने और उनकी चिंताओं को दूर करने में अहम भूमिका निभाएगी।
रायपुर। मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) आर. पुराम ने आज वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के जरिए राज्य के निर्माण विभागों के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर लंबित निरीक्षण प्रतिवेदनों के निराकरण की अद्यतन स्थिति की गहन समीक्षा की गई। बड़ी संख्या में लंबित निरीक्षण प्रतिवेदन के मद्देनजर उन्होंने सभी कार्यपालन अभियंताओं को इसके निराकरण के लिए एक सप्ताह की मोहलत देते हुए कहा कि इसमें चूक करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए नामजद प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा।
बैठक में पुराम ने 30 जून 2025 की स्थिति में लोक निर्माण विभाग से संबंधित 493, जल संसाधन के 308, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के 203, नगरीय प्रशासन एवं विकास के 11, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के 73, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज के 86 लंबित निरीक्षण प्रतिवेदनों की संभागवार समीक्षा की और संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को तत्परता से इसका परीक्षण कर उत्तर भिजवाने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा मुख्य तकनीकी परीक्षक के कार्यों के त्रैमासिक प्रगति की समीक्षा की जाती है। संगठन द्वारा स्थल निरीक्षण किये जाने के पश्चात् निरीक्षण प्रतिवेदन जारी किया जाता है, जिसका जवाब संबंधित कार्य विभागों से प्राप्त कर निरीक्षण प्रतिवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
रायपुर। कलेक्टर डाक्टर गौरव सिंह के निर्देश पर एवं उपसंचालक प्राची अवस्थी के मार्गदर्शन मे आज खनिज विभाग की टीम ने अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। टीम ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर वाहनों और मशीनरी को जब्त किया।
विभाग की जानकारी के अनुसार मंदिर हसौद और नवापारा में विभागीय टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए तीन हाइवा वाहनों को खनिज रेत, मुरुम और ईंट का अवैध परिवहन करते पकड़ा। इन वाहनों को जब्त कर संबंधित थाने में सुपुर्द किया गया है। साथ ही गोबरनवापारा के ग्राम पारागांव स्थित महानदी पर अवैध रेत उत्खनन करते हुए एक पोकलेन मशीन, एक रेत सक्शन मशीन और एक नाव को जब्त किया गया।
खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए वाहनों एवं मशीनरी के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
बालोद। सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन की सख्ती लगातार जारी है। नो हेलमेट-नो पेट्रोल अभियान के तहत नियमों की अनदेखी करने पर बालोद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एसडीएम नूतन कंवर ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर लाटाबोड़ स्थित केकेएस पेट्रोल पंप को सील कर दिया। इस कार्रवाई से पेट्रोल पंप संचालकों में हड़कंप मच गया है और जिला भर में इस घटना की चर्चा हो रही है।
कैसे हुआ खुलासा
एसडीएम नूतन कंवर ने बताया कि पंप पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इस पर प्रशासन ने पंप का निरीक्षण किया और ढाई घंटे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच में यह साफ हो गया कि पेट्रोल पंप संचालक लगातार बिना हेलमेट लगाए दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल दे रहा था। यह सीधे तौर पर नो हेलमेट, नो पेट्रोल अभियान का उल्लंघन था। इसके बाद प्रशासन ने पंप को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
1 अगस्त से शुरू हुआ
अभियान कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने 1 अगस्त 2025 को इस अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का उद्देश्य सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों में यातायात नियमों का पालन करने की आदत विकसित करना है। प्रशासन का मानना है कि हेलमेट पहनने से सड़क हादसों में होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
कलेक्टर की सख्त हिदायत
कलेक्टर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी हालत में नियम तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को आदेश दिए थे कि वे बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल न दें। यह न सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश है, बल्कि सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम भी है।
संचालकों में हड़कंप
पेट्रोल पंप सील किए जाने की कार्रवाई के बाद जिले के अन्य पंप संचालक भी सतर्क हो गए हैं। कई जगहों पर पेट्रोल पंप कर्मियों ने बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल देने से साफ इनकार करना शुरू कर दिया है। लोगों को भी यह संदेश गया है कि नियमों का पालन करना उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
सड़क सुरक्षा पर प्रशासन की गंभीरता
बालोद प्रशासन इस अभियान को पूरी सख्ती से लागू कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हादसों को रोकना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सिर्फ कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसे लागू करने के लिए सख्ती जरूरी है। इस कार्रवाई पर आम नागरिकों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि इससे लोगों की जानें बचेंगी और सड़क पर अनुशासन बढ़ेगा। वहीं कुछ लोगों ने इसे कठोर कार्रवाई माना और कहा कि प्रशासन को पहले लोगों को जागरूक करना चाहिए था। हालांकि, ज्यादातर लोग मानते हैं कि सड़क सुरक्षा के मामले में सख्ती बेहद जरूरी है।
रायपुर। गणेश उत्सव के पावन अवसर पर रोज़वुड रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इस वर्ष भव्य “आनंद मेला” का आयोजन किया गया। गणेशोत्सव की छटा, उल्लास और उमंग से सजी इस संध्या ने न केवल कॉलोनीवासियों बल्कि आगंतुकों को भी अद्भुत अनुभव प्रदान किया। यह आयोजन स्वाद, संगीत, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्वितीय संगम बनकर सामने आया।
पूरे प्रांगण को रंग-बिरंगी सजावट, रोशनी और उत्सवी माहौल से सजाया गया था। लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ बड़ी संख्या में मेले में पहुंचे। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरे पर उत्साह और उल्लास झलक रहा था। वातावरण में भक्ति संगीत और हंसी-खुशी की गूंज से पूरे क्षेत्र में उत्सव का अद्भुत नज़ारा बना हुआ था।
मेले में सबसे बड़ी आकर्षण रही स्वादिष्ट व्यंजनों की विविधता। अलग-अलग स्टॉलों पर घर-घर के विशेष पकवानों की खुशबू वातावरण को महका रही थी। खुशबू शर्मा के मुगेड़ी स्टॉल पर लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं। दीपिका द्वारा बनाए गए छोले चाट और बालूशाही का स्वाद सभी ने सराहा। कविता की भेल ने चटपटा स्वाद दिया, वहीं पल्लवी के मोमोस बच्चों और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। मिनाक्षी की चाउमिन और शशी द्वारा परोसे गए ब्रेड पकोड़े व भजिया ने व्यंजनों की विविधता को और बढ़ाया। ईश्वरी के फरा और मिर्ची भजिया ने परंपरागत स्वाद का परिचय दिया और सभी को प्रभावित किया। रूमा मजूमदार की कोल्ड कॉफी और अन्य बेवरीज ने लोगों को ताजगी दी और अंत में डॉली के गुपचुप ने सभी को स्वाद का ऐसा अनुभव कराया कि मेले का हर आगंतुक इसकी चर्चा करता नज़र आया।
सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि आपसी मेल-जोल और पारिवारिक वातावरण ने भी इस मेले को खास बना दिया। कॉलोनीवासियों ने बताया कि इस तरह के आयोजन एक-दूसरे से मिलने, बातचीत करने और अपने बच्चों को परंपरा से जोड़ने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। छोटे बच्चों ने खेलों और स्टॉलों का आनंद लिया तो बुजुर्गों ने पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए इस उत्सव को सराहा।
इस अवसर पर रोजवुड रेसिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत कोसरिया, कार्यकारी अध्यक्ष राकेश दास वैष्णव, सचिव सौरव सिंह, उपाध्यक्ष छन्नू लाल साहू, संगठन सचिव के सी मजूमदार, सलाहकार जी पी ताम्रकार एवं संतोष कुमार वाहने, ग्रीन्सविले सोसाइटी के अध्यक्ष देवता दिन दुबे , कोषाध्यक्ष राजेश द्विवेदी, अमित द्विवेदी, पंकज शर्मा, राजेंद्र सिंह गौर गोस्वामी, राम चन्द्र सोनी, नितेश लोखन्डे, ओमप्रकाश पटेल, संत राम साहू, अंशुल थूदगल राधा द्विवेदी, विनीता सक्सेना सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। समिति के पदाधिकारियों ने मेले को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों और स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया।
रोज़वुड रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत कोसरिया ने अपने संदेश में कहा कि श्री गणेश उत्सव न केवल भक्ति और आस्था का पर्व है बल्कि यह समाज में भाईचारे, एकता और सहयोग की भावना को भी मज़बूत करता है। आनंद मेला इसी उद्देश्य की पूर्ति करता है, जहाँ हर कोई साथ मिलकर उत्सव की खुशी साझा करता है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनता के लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण मांग को आखिरकार सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने पूरा कर दिखाया है। अब छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों और स्कूल प्रबंधन को CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से संबंधित कार्यों के लिए भुवनेश्वर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। राजधानी रायपुर में CBSE का क्षेत्रीय कार्यालय प्रारंभ हो गया है।
पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी, विशेषकर बस्तर और सरगुजा जैसे सुदूरवर्ती अंचलों के बच्चे एवं स्कूल प्रबंधन, अपने कार्यों के समाधान के लिए भुवनेश्वर (ओडिशा) स्थित CBSE कार्यालय पर निर्भर थे। इससे उन्हें समय, धन और श्रम तीनों की हानि उठानी पड़ती थी।
इन कठिनाइयों को दूर करने का संकल्प सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने सांसद पद की शुरुआत से ही ले लिया था। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से लगातार संवाद कर, पत्र लिखकर और व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से छत्तीसगढ़ में CBSE कार्यालय स्थापित करने की मांग की थी।
उनके दृढ़ संकल्प, दूरदर्शिता और सतत् प्रयासों का ही परिणाम है कि आज रायपुर में CBSE का क्षेत्रीय कार्यालय खुल गया है। इससे न केवल रायपुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लाखों विद्यार्थी और सैकड़ों स्कूल प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
इस अवसर पर सांसद श्री अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार जताते हुए कहा है कि, यह कार्यालय छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगा। अब राज्य के विद्यार्थियों को किसी अन्य राज्य पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रायपुर में ही उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान मिलेगा। यह कदम छत्तीसगढ़ के शैक्षिक उत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
छत्तीसगढ़ की जनता ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल के इस अथक प्रयास के लिए उनका आभार व्यक्त किया है और इसे प्रदेश के शैक्षिक परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर किसानों के हित में एक बड़ी राहत मिल रही है। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, द्वितीय सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार संवेदनशील है और यह अतिरिक्त आबंटन उनकी खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने में सहायक होगा।
मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 28 अगस्त की स्थिति में सहकारी क्षेत्र में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन, इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके विरुद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन वितरण से अधिक है, जो इस बार की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था का प्रमाण है।
प्रदेश में किसानों के लिए नैनो खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140, इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भंडारण हुआ है। इसी प्रकार सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 और निजी क्षेत्र में 79 हजार 810, कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है। अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है।
प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है। यह व्यवस्था बताती है कि समितियों और निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की आपूर्ति उनकी समयबद्ध जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता से की जा रही है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का 98 प्रतिशत यूरिया किसानों तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को मौसम और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी और उनकी उपज सुरक्षित रहेगी।
इस संबंध में गत दिनों कृषि मंत्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क किया गया और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 60 हजार टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सहकारी सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। किसान समितियों में आसानी से खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित होने के बजाय और मजबूती पा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध होने से बुवाई और फसल प्रबंधन का काम सुचारू रूप से हो रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से खरीफ सीजन में किसानों को समुचित राहत मिलेगी और छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर बाढ़ से प्रभावित दंतेवाड़ा की पूनम पटेल की प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी आगे भी निर्बाध जारी रहेगी। पूनम पटेल, दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में रहकर पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में दंतेवाड़ा में आई बाढ़ से प्रभावित होने के कारण पूनम का पूरा परिवार राहत शिविर में है। आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूनम से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। मुख्यमंत्री की पहल पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी हेतु पूनम को आवश्यक पुस्तकें और एक नया टेबलेट उपलब्ध कराया गया है। अब पूनम की यूपीएससी तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
दंतेवाड़ा जिले के चूड़ीटिकरा पारा वार्ड की रहने वाली पूनम पटेल पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में आई बाढ़ में उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया और घर का सारा सामान बह गया। पूनम ने बताया कि बाढ़ के पानी में उनकी सभी पुस्तकें बह गईं और टेबलेट भी खराब हो गया। पूनम ने कहा कि उनके पिता संतोष पटेल किराना दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उन्हीं की आमदनी से बड़ी मुश्किल से एक-एक पैसा जोड़कर यूपीएससी की पढ़ाई के लिए टेबलेट खरीदा था। बाढ़ के पानी में पुस्तकें और टेबलेट खराब हो जाने से पूनम आगे की तैयारी को लेकर बेहद चिंतित थीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा पूनम को नया टेबलेट और प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इस सहायता से पूनम को बड़ी राहत मिली है। अब पूनम के प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह में बाढ़ भी बाधा नहीं डाल पाएगी।
बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का गुस्सा एक बार फिर सड़क पर फूट पड़ा। सोमवार को प्रदेश के 33 जिलों में एक साथ काम बंद और तालाबंदी की गई। इस आंदोलन में एक लाख से अधिक महिला कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने हिस्सा लिया। बिलासपुर जिले की भी करीब 2 हज़ार महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर रैली निकाली और कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
मांगें अभी भी अधूरी
आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि दशकों से सेवाएं देने के बावजूद आज तक उन्हें न तो कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही जीने लायक वेतन। पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन तक उन्हें नहीं मिल रहा है, जबकि उनके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
डिजिटल कामकाज से परेशान
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार डिजिटल युग में उन्हें बिना संसाधन उपलब्ध कराए ऑनलाइन कार्य करने के लिए मजबूर कर रही है। मोबाइल, टैबलेट और इंटरनेट सुविधा के अभाव में फेस कैप्चर, पोषण ट्रैकर और THR वितरण जैसे काम बेहद कठिन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना सुविधा दिए जबरन ऑनलाइन काम कराने का दबाव उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से चुनौती है।
गैर विभागीय कामों का बोझ
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार गैर विभागीय कार्यों में उलझाकर रखा जा रहा है। कभी चुनावी कार्य, कभी जनगणना और कभी सर्वेक्षण जैसे अतिरिक्त काम उन पर थोपे जाते हैं। इसके चलते वे अपने मूल विभागीय कार्यों पर ध्यान नहीं दे पातीं। उन्होंने मांग की कि उन्हें ऐसे गैर विभागीय कार्यों से अलग रखा जाए और केवल विभागीय कार्य कराए जाएं।
सरकार से सीधी अपील
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि बार-बार आंदोलन करने के बावजूद अभी तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। अगर जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
आंदोलन का असर
प्रदेशभर में तालाबंदी और काम बंद से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पोषण आहार वितरण और आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित गतिविधियाँ ठप रहीं। ग्रामीणों को भी इसकी परेशानी झेलनी पड़ी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए।
इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई।
बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।
रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के हड़ताली कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आज रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। लगभग दो सप्ताह से आंदोलनरत एनएचएम कर्मचारियों का नेतृत्व छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने किया।
इस अवसर पर सांसद श्री अग्रवाल ने कर्मचारियों की मांगों को पूरी गंभीरता से सुना और उन्हें हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि एनएचएम के कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में 24 घंटे आम जनता की सेवा करने वाले इन कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वे जल्द ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से भेंट कर एनएचएम कर्मचारियों की समस्याओं के शीघ्र निराकरण हेतु चर्चा करेंगे।
एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सकारात्मक रुख और समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया हैं।