रायपुर। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम ने करवट ले ली है। प्रदेश में लगातार बारिश हो रही है। दिन भर भीषण गर्मी पड़ने के बाद रोज रात को जमकर बारिश हो रही है। रात में हो रही बारिश के चलते मौसम में ठंडक भी आ रही है। बुशवार की रात भी राजधानी रायपुर समेत अन्य कई इलाकों में जमकर बारिश हुई है।
बुधवार रात में हुई भारी बारिश के बाद मौसम सुहावना बना हुआ है। गुरूवार की सुबह से ही राजधानी रायपुर में बादल छाए हुए हैं। वहीं मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में जमकर बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि, प्रदेश के कई जिलों में आज जमकर बारिश होगी।
मौसम विभाग ने रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, बालोद, बलरामपुर, रामानुजगंज, कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर समेत कई अन्य इलाकों में भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की भी संभावना जताई है।
रायपुर। राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल छत्तीसगढ़ की रजत महोत्सव के रूप में 25वी बैठक आज सिविल लाईन स्थित न्यू सर्किट हाऊस में पी. दयानंद, सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, खनिज साधन विभाग एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में रजत बंसल, संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म एवं केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागो, उपक्रमों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, नए खनन परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करना और गत वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा करना रहा।
बैठक में वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे हुए खनन कार्यों और उनसे प्राप्त उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को खनिज राजस्व के रूप में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। यह उपलब्धि वर्ष 2023-24 की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि ने न केवल प्रदेश के आर्थिक ढांचे को मजबूती दी है, बल्कि खनन क्षेत्र में नए निवेश और अवसरों के द्वार खोले हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज अन्वेषण एवं खनिज दोहन के क्षेत्र में कार्यरत भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभागों एवं संस्थानों के द्वारा वर्ष 2024-25 में किये गये भू-वैज्ञानिक कार्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जहां वर्ष 2024-25 के सम्पादित कार्यों की उपलब्धियों पर चर्चा की गई वही प्रदेश में पाये जाने वाले खनिजों की खोज के लिए वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित भू-वैज्ञानिक कार्यों को अंतिम रूप दिया गया।
मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद ने अपने उद्बोधन में कहा कि खनिज किसी भी राज्य और देश के सर्वांगीण विकास की रीढ़ होती है। राज्य में स्ट्रेटजिक एवं क्रिटिकल मिनरल की खोज राज्य में विकास के एक नए युग की शुरूआत का संकेत देती है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज अधारित नये उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य में विद्यमान विभिन्न खनिजों का सतत् एवं व्यवस्थित तरीके से अन्वेषण किया जाना चाहिए। बैठक में उपस्थित अन्वेषण कार्यों से संबद्ध सभी विभागों एवं संस्थानों से यह आग्रह किया गया कि छत्तीसगढ़ के समग्र विकास हेतु वे अपनी कुशलता, संसाधन एवं उपलब्ध नवीनतम तकनीकियों का उपयोग कर प्रदेश में पाये जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण करे। मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री दयानंद ने छत्तीसगढ़ में खनिज के विकास के लिए कार्य करने वाली एजेंसियों के मध्य उत्पादित आंकड़ों के साझा किये जाने एवं समन्वय स्थापित किये जाने की सलाह दी।
बैठक में संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म छत्तीसगढ़ रजत बंसल के द्वारा क्षेत्रीय सत्र 2024-25 में सम्पन्न कार्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में लगभग 2500 मिलियन टन चूनापत्थर एवं लौह अयस्क के लगभग 93 मिलियन टन भण्डार आंकलित किये गये। आगामी क्षेत्रीय सत्र 2025-26 के अन्वेषण परियोजनाओं में विभाग द्वारा महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को शामिल किया गया है। यह परियोजना देश के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। यह आत्मनिर्भर भारत मिशन को सशक्त करेगी और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत् एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करेगी। उन्होने कहा कि "छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में एनएमइटी के तहत वर्ष 2024-25 में चूनापत्थर हेतु 01 एवं बाक्साइट हेतु 01 अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अधिसूचित निजी अन्वेषण संस्थान को एनएमइटी के तहत् राज्य के अन्वेषण कार्य हेतु दो प्रस्ताव स्वीकृत किये गये थे। जिसमें एक लिथियम, नियोबियम, टेण्टेलम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ एवं एक लौहअयस्क के प्रस्ताव सम्मिलित है। विभाग द्वारा निजी संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देकर अन्वेषण एवं खनिज संसाधनों के परिशोधन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागों, उपक्रमों के प्रतिनिधियों द्वारा भी छत्तीसगढ़ राज्य में किये गये खनिज अन्वेषण कार्यों की जानकारियों प्रस्तुत की गई। सर्व प्रथम भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के उप महानिदेशक डॉ. अमित धारवारकर द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बाक्साइट, गोल्ड, ग्लूकोनाईट, लिथियम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ, फास्फोराइट, फ्लोराईट, लेड एवं जिंक खनिज हेतु सर्वेक्षण कार्य किया गया है। वर्ष 2025-26 में विभिन्न खनिजों के कुल 29 परियोजनाओं पर कार्य लिया जा रहा है।
संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 11 अन्वेषण परियोजना को सर्वेक्षण / पूर्वेक्षण कार्य हेतु अनुमोदित किया गया। जिसमें स्ट्रेटजिक एवं किटिकल मिनरल पर 02, ग्लूकोनाईट पर 02, लेपिडोलाईट पर 01, चूनापत्थर पर 02, लौह अयस्क पर 02 एवं बॉक्साइट पर 02 परियोजना सम्मिलित है।
इस अवसर पर आईबीएम रायपुर के रीजनल कंट्रोलर प्रेम प्रकाश, रीजनल माइनिंग जियोलॉजिस्ट डी. दास, जीएसआई रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल अमित ए धारवाड़कर, एएमडी के सेंट्रल रीजन के क्षेत्रीय निदेशक एस.आर. मंथनवार सहित एन.एम.डी. सी., सीआईएल, वेदांता, अल्ट्राटेक, डेक्कन गोल्ड के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।
रायपुर/दिल्ली। छत्तीसगढ़ में हर साल आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का न्योता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच चुका है. बस्तर सांसद महेश कश्यप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य मुलाकात की और उन्हें विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे में शामिल होने का निमंत्रण दिया. पीएम मोदी ने इस आमंत्रण को स्नेहपूर्वक स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि वे समय निकालकर इस ऐतिहासिक पर्व का हिस्सा बनेंगे.
सांसद महेश कश्यप अपनी धर्मपत्नी चंपा कश्यप और सुपुत्री क्षमता कश्यप के साथ प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे थे. मुलाक़ात के दौरान क्षमता कश्यप ने पीएम मोदी को सादर नमस्कार किया, जिस पर प्रसन्न होकर प्रधानमंत्री ने उसे टॉफी भेंट की.
इस अवसर पर सांसद ने प्रधानमंत्री को बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक स्मृति चिन्ह भी भेंट किया. उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले ग्यारह वर्षों में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं.
रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने 25 सब इंस्पेक्टरों की इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति की घोषणा की है। इस लिस्ट में रायपुर जिले के भी 6 सब इंस्पेक्टरों के नाम शामिल हैं।लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे पुलिस अफसरों के लिए यह आदेश एक बड़ी राहत और खुशी की खबर है।
प्रमोशन आदेश के मुताबिक, अभी सभी नए इंस्पेक्टर अपने वर्तमान जिले और पदस्थापना स्थल पर ही काम करेंगे। डीजीपी ने साफ किया है कि उनकी नई पदस्थापना के आदेश अलग से जल्द ही जारी किए जाएंगे।सूत्रों के अनुसार, विभागीय कार्यों में सक्रियता, सेवा कार्यकाल और उपलब्धियों के आधार पर इन अधिकारियों का प्रमोशन तय किया गया है। प्रमोशन मिलने के बाद अफसरों के मनोबल में भी वृद्धि होगी और विभागीय कार्यों की गति तेज होने की उम्मीद है।
प्रमोशन आदेश जारी होने के बाद पुलिस महकमे में खुशी का माहौल है। साथी अफसरों ने भी अपने सहकर्मियों को बधाई दी है। विभाग का मानना है कि इस प्रमोशन से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अफसरों को लाभ होगा, बल्कि संगठनात्मक दक्षता भी बढ़ेगी।डीजीपी ने आदेश में यह भी कहा है कि सभी एसपी और वरिष्ठ अधिकारी प्रमोटेड अफसरों से उनके नए दायित्वों के अनुरूप काम करवाएं और आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नव नियुक्त आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने प्रदेश में हुए शराब घोटाले को लेकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में आबकारी विभाग में बड़ा घोटाला हुआ. कांग्रेस का नाम ही भ्रष्टाचार है.
11 साल पहले देश में कांग्रेस की सरकार थी, तब भी भ्रष्टाचार किया गया. छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार (कांग्रेस के कार्यकाल) में आबकारी विभाग में घोटाला हुआ. इसके चलते विभाग की बदनामी हुई और उनके मंत्री (पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा) समेत कई अधिकारी आज जेल में हैं.
मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार से लिप्त है. सरकार में आने के बाद कांग्रेस वादों पर काम करने के बजाय भ्रष्टाचार करने में लगे रहे. आबकारी घोटाला, कोयला घोटाला, DMF घोटाला, सब कांग्रेस सरकार में हुआ है.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि विधवा बहू पुनर्विवाह करने तक अपने ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार है। अदालत ने कहा कि यह अधिकार हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 में स्पष्ट रूप से दिया गया है।मामला कोरबा जिले का है। वर्ष 2006 में कोरबा निवासी चंदा यादव की शादी गोविंद यादव से हुई थी। लेकिन 2014 में एक सड़क हादसे में गोविंद की मौत हो गई। पति की मौत के बाद चंदा का ससुराल पक्ष से विवाद हो गया और वह अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगी।
भरण-पोषण के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका
पति की मृत्यु के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही चंदा यादव ने अपने ससुर के खिलाफ भरण-पोषण की याचिका दायर की। उन्होंने कोरबा फैमिली कोर्ट से प्रति माह 20,000 रुपये भरण-पोषण देने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका पर विचार करते हुए चंदा को मासिक 2,500 रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया।
हालांकि, चंदा यादव इस फैसले से असंतुष्ट थीं। उनका कहना था कि उनके और बच्चों के पालन-पोषण के लिए इतनी राशि पर्याप्त नहीं है। इसलिए उन्होंने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि विधवा बहू पुनर्विवाह न करने तक अपने ससुर से भरण-पोषण की अधिकारी होती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण की राशि ससुर की आर्थिक क्षमता और बहू की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय की जानी चाहिए।
फैसले का महत्व
इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला उन विधवा बहुओं के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें पति की मृत्यु के बाद ससुराल पक्ष से भरण-पोषण नहीं मिलता। अब विधवा बहुएं कानूनी रूप से ससुर से सहायता पाने की हकदार होंगी, बशर्ते उन्होंने पुनर्विवाह न किया हो।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में समान परिस्थितियों वाले कई मामलों को प्रभावित करेगा। इससे विधवा महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उनके अधिकारों को मजबूत आधार मिलेगा।
जगदलपुर। गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ बस्तर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी में फर्जी तरीके से बने 3000 राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई उस जांच का हिस्सा है, जिसमें हजारों संदिग्ध कार्डधारियों की सूची तैयार की गई थी। इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।
जांच के दौरान सामने आया कि जिन लोगों ने फर्जी तरीके से बीपीएल कार्ड बनवाए थे, उनमें बड़े किसान, सरकारी कर्मचारी और यहां तक कि व्यापारी तक शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से कुछ व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 25 लाख रुपये से अधिक है, जबकि सरकार द्वारा बीपीएल कार्ड केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बनाए जाते हैं।
63 हजार संदिग्धों की बनी थी सूची
राज्य सरकार को केंद्र सरकार की ओर से 63,134 संदिग्ध कार्डधारियों की सूची जांच के लिए सौंपी गई थी। इस सूची के आधार पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू की। इसमें कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने लंबे समय से राशन ही नहीं लिया था, फिर भी उनके नाम पर बीपीएल कार्ड जारी था। वहीं कुछ लोग आर्थिक रूप से मजबूत होते हुए भी सरकारी लाभ उठा रहे थे।
गरीबों के हक पर डाका
जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी कार्डधारी लंबे समय से बीपीएल श्रेणी के तहत मिलने वाले राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। ऐसे लोग जो वास्तव में गरीब और जरूरतमंद हैं, वे अक्सर पात्रता के बावजूद योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे। प्रशासन ने इस गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई तेज कर दी।
कार्ड रद्द, आगे और कार्रवाई संभव
अब तक 3 हजार फर्जी राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और जिनके पास गलत तरीके से कार्ड बने पाए जाएंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गलत तरीके से लिए गए राशन और सब्सिडी की रिकवरी भी संभव है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। दिल्ली से वे देर शाम अपने पहले विदेश प्रवास पर निकलेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा 10 दिनों का होगा, जिसमें वे जापान और दक्षिण कोरिया का भ्रमण करेंगे। इस प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री निवेश और उद्योग विकास के नए अवसरों की तलाश करेंगे।
सीएम साय ने रवाना होने से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और प्रदेश की जनता का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि छत्तीसगढ़ को उद्योग और निवेश के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण साबित होगा।
जापान वर्ल्ड एक्सपो में होंगे शामिल
मुख्यमंत्री ने बताया कि जापान वर्ल्ड एक्सपो का आयोजन हो रहा है, जिसमें वे विशेष रूप से शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जापान और साउथ कोरिया इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल्स जैसे क्षेत्रों में अद्भुत काम कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ में भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान वे नई उद्योग नीति को प्रस्तुत करेंगे और उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे।
एयरपोर्ट पर मंत्रियों ने दी विदाई
सीएम साय को एयरपोर्ट से रवाना करने के लिए कई मंत्री और विधायक मौजूद थे। इनमें मंत्री रामविचार नेताम, टंक राम वर्मा, गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत और विधायक पुरंदर मिश्रा शामिल थे। सभी ने मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह दौरा प्रदेश के लिए नए निवेश अवसर लेकर आएगा।
प्रदेश की नई उद्योग नीति पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने छत्तीसगढ़ के उद्योग जगत को नई दिशा देने के लिए एक समग्र और निवेशक अनुकूल उद्योग नीति बनाई है। इस नीति के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल्स, स्टार्टअप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में निवेशकों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जापान और साउथ कोरिया की कंपनियां तकनीकी विशेषज्ञता और बड़े उद्योगिक अनुभव से समृद्ध हैं। यदि वे छत्तीसगढ़ में निवेश करती हैं, तो राज्य में रोज़गार के अवसर भी बड़ी संख्या में बढ़ेंगे।
विदेश दौरे से खुलेंगे नए अवसर
सीएम साय ने अपने पोस्ट में लिखा कि छत्तीसगढ़ को उद्योग विकास और निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में उनका यह पहला कदम है। उन्होंने कहा कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों के साथ उद्योगिक संबंध मज़बूत होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में आबकारी अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है. बता दें कि शराब घोटाला मामले में 29 अधिकारियों को ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है. इनमें से एक अधिकारी की मौत हो चुकी है. बाकी 28 अधिकारियों की आज EOW की विशेष अदालत में पेशी थी, लेकिन एक भी अधिकारी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए. इसके चलते सभी अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है.
बता दें कि हाल ही में हाईकोर्ट ने घोटाले में शामिल 28 आबकारी अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी.
EOW ने शराब घोटाले में इन अधिकारियों को बनाया है आरोपी
रायपुर। छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रांतीय अध्यक्ष गिरीश पंकज को भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। यह मनोनयन भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा किया गया है। इसके पूर्व भी गिरीश पंकज साहित्य अकादमी के सदस्य एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं। गिरीश पंकज पिछले 45 सालों से साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं। विविध साहित्यिक विधाओं में इनकी 125 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साढ़े आठ हजार पेज़ों की' गिरीश पंकज रचनावली' भी हाल ही में प्रकाशित हो चुकी है।
इनके साहित्यिक अवदान के लिए हिंदी भवन,नई दिल्ली द्वारा व्यंग्यश्री सम्मान तथा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। पिछले दिनों राही रैंकिंग संस्था की ओर से जो सर्वे किया गया था, उसमें देश के दस महत्वपूर्ण लेखकों में गिरीश पंकज का नाम शामिल किया गया है। हिंदी सलाहकार समिति में गिरीश पंकज के अलावा चेन्नई की मीनाक्षी निधि सुंदर और जोधपुर के रजनीश मोहनोत को भी मनोनीत किया गया है। यहां उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में छत्तीसगढ़ के अन्य तीन लेखकों का भी चयन हुआ है। ये हैं डॉ. चित्त रंजन कर, माणिक विश्वकर्मा नवरंग एवं बलदाऊ राम साहू।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सौजन्य मुलाकात की। श्री देवांगन ने मुख्यमंत्री श्री साय को उनके प्रस्तावित जापान एवं दक्षिण कोरिया प्रवास के लिए शुभकामनाएं दीं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में तीव्र औद्योगिक विकास हो रहा है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और राज्य आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ एक पसंदीदा राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ रायपुर में भी इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन सम्मेलनों के माध्यम से अब तक राज्य को 6 लाख 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्रस्तावित जापान एवं दक्षिण कोरिया यात्रा से राज्य में औद्योगिक विकास तथा निवेश को और अधिक गति मिलेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत राजधानी रायपुर में 21 अगस्त को खनिज संसाधन विभाग द्वारा राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मण्डल की 25वीं बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक की अध्यक्षता खनिज संसाधन विभाग तथा मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद करेंगे। बैठक का आयोजन नवीन विश्राम भवन के कान्वेन्शन हॉल, सिविल लाइन रायपुर में प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होगा। इस अवसर पर राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, तकनीकी संस्थानों तथा निजी संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
खनिज संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य समन्वय स्थापित करते हुए खनिज नीतियों को नई दिशा प्रदान करना है, जिससे खनिजों का सतत और व्यवस्थित अन्वेषण किया जा सके। इससे निजी संस्थानों की भागीदारी से सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय और शोध को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा इस बैठक में प्रदेश में वर्ष 2024-25 के दौरान खनिजों की खोज हेतु किए गए कार्यों पर चर्चा की जाएगी तथा वर्ष 2025-26 में खनिजों की खोज से संबंधित कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ नए संसाधनों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म द्वारा वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित कुल 11 अन्वेषण परियोजनाओं तथा भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की 29 अन्वेषण परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी। इन परियोजनाओं के अंतर्गत मुख्य रूप से लिथियम, गोल्ड, ग्लूकोनाइट, लेपिडोलाइट, स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल्स, फॉस्फोराइट, फ्लोराइट, बॉक्साइट, चूना पत्थर तथा लौह अयस्क जैसे खनिजों के अन्वेषण कार्य शामिल हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा पेश प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 को सदन की मंजूरी मिल गई है। इस अवसर पर रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बिल का स्वागत करते हुए इसे देश के लिए एक गेम चेंजर कानून बताया।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह बिल देश के युवाओं, उनके परिवारों और समाज के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करेगा। आज ऑनलाइन गेमिंग की लत ने हजारों परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुँचा दिया है। कई युवा इस जाल में फंसकर आत्महत्या तक कर रहे हैं। ऐसे में यह बिल समय की मांग था।
उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से एक प्राधिकरण का गठन कर ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। अवैध और हानिकारक गेम्स पर रोक लगेगी तथा बच्चों और युवाओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
सांसद अग्रवाल ने यह भी कहा कि इस बिल के अंतर्गत पढ़ाई और खेलों से संबंधित सकारात्मक व शैक्षणिक गेमिंग ऐप्स को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगे और वे डिजिटल युग में भी स्वस्थ, सशक्त और सुरक्षित रह सकें।व
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ में NHM संविदा कर्मचारी संघ विगत 3 दिनों से नियमितीकरण और संविलियन समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इसी दौरान धरना प्रदर्शन के तीसरे दिन आज जब प्रदर्शनकारियों ने संविदा को कूप्रथा बताते हुए इसका पुतला दहन करने लगे, तो प्रशासननिक अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया. इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि शासन को पुतले की चिंता है, लेकिन अपने कर्मचारियों और उनके भविष्य की चिंता नहीं है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संविदा जैसी कुप्रथा से संबंधित पुतले का दहन करने से रोकना यह दर्शाता है कि शासन हमारी नहीं पुतले की ज्यादा चिंता करती है. इसके साथ ही उन्होंने पुतले की प्रशासनिक अधिकारी के सामने डंडे से पिटाई कर अपना आक्रोश प्रकट किया.
संघ के अध्यक्ष कौशलेश तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत प्रदेश के 16 हज़ार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी इस समय अनिश्चितकालीन आंदोलन पर हैं जिसमें बलौदा बाजार जिले में काम करने वाले 500 कर्मचारी भी स्थानीय दशहरा मैदान में आंदोलन के दौरान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान विविध प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से सरकार की नीतियों का विरोध किया जा रहा है. इस कड़ी में आज संविदा कुप्रथा का पुतला दहन करने का प्रयास किया गया जिसे प्रशासन ने रोक दिया तथा पुतला को पुलिस उठा कर ले गई. जाते-जाते कर्मचारियों ने इस संविदा कुप्रथा के पुतले की लाठी डंडों से पिटाई करते हुए अपना विरोध प्रदर्शन किया.
पुतला दहन करने जा रहे कर्मचारियों ने बताया कि, कानून का सम्मान करते हुए उन्होंने पुतला दहन के संबंध में फोन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया था जिस पर प्रशासन ने इसे रोक दिया. कर्मचारियों ने इस बात से दुःख और आक्रोश जताया कि प्रशासन को जिंदा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी के दुख दर्द की चिंता से अधिक बेजान पुतले की परवाह ज्यादा है.
संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत सिन्हा ने बताया कि आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पताल की भी स्वास्थ्य व्यवस्था डगमगा रही है. आने वाले मरीजों को भी इलाज उपचार तथा जांच के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है या फिर परेशान होकर वह वापस लौट जा रहे हैं. और यह सरकार जो कहती है वह कर नहीं रही मोदी की गारंटी की घोषणा आज तक अमल में नहीं लाई है इनके कहने और करने में अंतर नजर आ रहा है.
ये हैं 10 सूत्री मांग-
संविलियन एवं स्थाईकरण
पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
ग्रेड पे निर्धारण
लंबित 27% वेतन वृद्धि कार्य
मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता
नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
अनुकंपा नियुक्ति
मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा
स्थानांतरण नीति
न्यूनतम 10 लाख तक कैशलेश चिकित्सा बीमा सुविधा
प्रदर्शन में यशवंत पटेल, विनोद देवांगन, आलोक दुबे, फ्रैंकलिन रात्रे, विनोद साहू, मोहिंदर कुमार संगीता, खोगेश्वर पटेल ,राजेश डहरिया, विकास जायसवाल डोमन कुमार, हेमंत सिन्हा, गौतम साहू , दिनेश कुमार, नरेंद्र वर्मा, गंगाराम धीवर, मंजू साहू सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए अब स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। लंबे समय से कैशलेश कर्मचारी कल्याण संघ राज्य सरकार से कैशलेश और निःशुल्क चिकित्सा सेवा की मांग करता आ रहा है। प्रदेश के लगभग 5 लाख कर्मचारी और उनके परिजन इस सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। अब स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की सकारात्मक प्रतिक्रिया से इस दिशा में रास्ता साफ होता दिख रहा है।
इलाज का बढ़ता खर्च बना बड़ी चुनौती
कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा समय में इलाज पर होने वाला खर्च दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। छोटी-मोटी बीमारियों से लेकर गंभीर इलाज तक के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां भारी रकम चुकानी पड़ती है। कई बार कर्मचारियों को इलाज के लिए कर्ज तक लेना पड़ता है। ऐसे में यदि सरकार कैशलेश और निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है, तो यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।
स्वास्थ्य सचिव से मिला संघ का प्रतिनिधिमंडल
इसी मांग को लेकर कैशलेश कर्मचारी कल्याण संघ का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष उषा चंद्राकर के नेतृत्व में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से मिला। बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं और चिकित्सा खर्च के बोझ पर विस्तार से चर्चा हुई। संघ ने सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए मांग रखी कि सभी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेश आधार पर मुफ्त इलाज की सुविधा मिले, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ और किफायती हो सकें।
सचिव ने दिए सकारात्मक संकेत
बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया और शुभ संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की इस समस्या को समझती है और जल्द ही ठोस कदम उठाने पर विचार कर रही है। सचिव के इस रुख से कर्मचारियों और संगठन में खुशी और उम्मीद का माहौल है।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे शामिल
इस प्रतिनिधिमंडल में संगठन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। इनमें विशेष रूप से विजय कोचेद्र, आजूराम सिंह, लिखेश कुमार वर्मा, विनोद सिंह, मिर्ज़ा बेग, कासिम, दिलेश्वर साव, मंजुलता सोरी, पीयूष कुमार गुप्ता, रमेश नेगी, देव कुमार साहू (रायपुर संभाग अध्यक्ष), पंकज कुमार राठौर (दुर्ग संभाग अध्यक्ष), विनोद सोनी (सरगुजा संभाग अध्यक्ष), प्रहलाद साहू (बिलासपुर संभाग अध्यक्ष) सहित आईटी सेल प्रभारी धीरज तिवारी और अन्य कई जिलों से आए प्रतिनिधि शामिल रहे।
28 अगस्त को होगा बड़ा सम्मेलन
संघ ने घोषणा की है कि 28 अगस्त 2025 को जिला दुर्ग में कर्मचारियों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। संगठन ने कहा कि यदि सरकार इस मांग को लागू करती है, तो यह प्रदेश के कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक निर्णय होगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री साय के मंत्रिमंडल का विस्तार आखिरकार हो गया है, लेकिन 14 मंत्रियों की नियुक्ति ने राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे कानून के उल्लंघन का मामला बताया है और सवाल उठाया है कि क्या सरकार को इतनी बड़ी मंत्रिपरिषद बनाने की अनुमति मिली थी। इसको लेकर भूपेश बघेल ने सीएम साय से जवाब भी मांगा है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साय सरकार में 14 मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2003 में बने कानून के मुताबिक विधानसभा सदस्यों की संख्या में 15% तक ही मंत्री बन सकते हैं। जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो मैंने भारत सरकार को पत्र लिखा था। छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20% तक करने की मांग की गई थी। इसके पीछे छत्तीसगढ़ का भौगोलिक रूप से बड़ा होना और विधानसभा परिषद न होने का तर्क दिया था। लेकिन पत्र का कोई जवाब नहीं आया और न ही अनुमति मिली। ऐसे में अब सवाल उठ रहा साय सरकार को अनुमति कब मिली ? बिना अनुमति अगर 14 मंत्री बनाए गए तो यह अवैधानिक है। मुख्यमंत्री साय को इसका जवाब देना चाहिए।
हरियाणा की तर्ज पर हुआ मंत्रिमंडल का विस्तार
हरियाणा में भी 90 विधायक हैं। हरियाणा में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। इस लिहाज से हरियाणा के फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ में भी लागू करते हुए 3 और मंत्री बनाए गए हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से 13 मंत्री ही बनते आ रहे थे। नियमों के तहत विधायकों की संख्या के आधार पर 15 प्रतिशत ही मंत्री बन सकते हैं, इसलिए 90 विधायकों में 13.5 मंत्री के तहत मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री बनाए गए हैं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर जिले के तिलसिवां में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव कार्यक्रम का वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया और 211 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने सूरजपुर के नए बस स्टैंड स्थित अटल परिसर में भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया तथा किसान मेला सह जैविक मेला का वर्चुअली शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हम सभी रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। यह अवसर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है। बीते 25 वर्षों में राज्य ने विकास के अनेक आयामों को स्पर्श किया है और अब हमें नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने सभी नागरिकों से एकजुट होकर प्रदेश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता अटल जी को नमन करता हूँ। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर यहां के लोगों को नई पहचान दी। वे देश और प्रदेश के युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। मुख्यमंत्री ने वाजपेयी जी के राजनीतिक जीवन, काव्य प्रतिभा और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों का भी स्मरण किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत 20 महीनों में मोदी की गारंटी के तहत अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। इनमें धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से, 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता, तेंदूपत्ता संग्राहकों को पुनः चरण पादुका वितरण, किसानों को धान बोनस, 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि मजदूरों को 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद, श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन योजना, बुजुर्गों के लिए 19 तीर्थ स्थलों की यात्रा और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की स्थापना शामिल है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल उन्मूलन पर बोलते हुए कहा कि देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त करने के प्रयास तेज गति से चल रहे हैं और मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि कुख्यात नक्सली बसवराजू का सफाया किया गया है तथा बड़ी संख्या में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य ने स्थापना के 25 वर्षों में विकास की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के अनावरण पर उपस्थित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की ही देन है। उन्हीं के द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई, जिससे गांव-गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ा गया और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निरंतर जनहित एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पुल-पुलियों, पेयजल आपूर्ति और शहरी विकास के क्षेत्र में हुए कार्यों से न केवल ग्रामीण अंचलों में कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि नगरीय निकायों में भी आधारभूत संरचना का तेजी से विस्तार हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सूरजपुर जिले को 211 करोड़ 33 लाख रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 78 करोड़ 78 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 37 कार्यों का लोकार्पण किया गया, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 04, लोक निर्माण विभाग (सेतु) के 03, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 20, नगरीय निकाय विभाग के 04, आदिवासी विकास विभाग के 03 तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 03 कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही 132 करोड़ 55 लाख रुपये की लागत से होने वाले 55 कार्यों का भूमि पूजन किया गया, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 14, लोक निर्माण विभाग (सेतु) के 04, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 22, जल संसाधन विभाग सूरजपुर के 07, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 04, पुलिस विभाग का 01 तथा आदिवासी विकास विभाग के 03 कार्य सम्मिलित हैं।
समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने किसान मेला सह जैविक मेला सह प्रदर्शनी सह प्रशिक्षण का भी शुभारंभ किया। आयोजित मेले में कृषि यंत्रों, जैविक खाद, कीटनाशक एवं बीज की नवीनतम किस्मों के साथ-साथ विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को फसल चक्र परिवर्तन, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने रोजगार से जुड़े ऐसे आयोजनों को युवाओं के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए सभी हितग्राहियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों की योजनाओं से हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। मछली पालन विभाग से आइस बॉक्स व नाव-जाल, समाज कल्याण विभाग से मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, स्वास्थ्य विभाग से वयवंदन, आयुष्मान एवं सिकल सेल कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी और चेक, महिला एवं बाल विकास विभाग से एलआईसी बॉण्ड, महिला समूहों को ऋण चेक व बकरी पालन हेतु ऋण, कृषि विभाग से सिंचाई पंप, रामतिल बीज और नलकूप-पंप अनुदान प्रदान किए गए। साथ ही एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के 25 हितग्राहियों को रोजगार स्वीकृति आदेश भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष चन्द्रमणी पैकरा, रेखा राजवाड़े, लवकेश पैकरा, सूरजपुर जिले के रेडक्रॉस सोसाइटी अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
कोरबा। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे एनएचएम कर्मियों ने आज खून से खत लिखकर अपना विरोध जताया। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर हड़तालियों ने अपनी मांगों की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है।
एनएचएम कर्मचारियों ने संविलियन, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, लंबित वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। खास बात यह है कि इस बार आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद रहेंगी।प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा होने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
हड़ताल की वजह से राज्यभर के अस्पतालों में न केवल नियमित सेवाएं बाधित है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। इस हड़ताल का सबसे गंभीर असर विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) पर पड़ेगा। संघ ने साफ किया है कि इस बार न तो आपातकालीन सेवाएं दी जाएंगी और न ही कलम उठाई जाएगी। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा जिन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी कई लंबित मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं: