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13 माओवादियों ने किया सरेंडर, 62 लाख रुपये का था ईनाम, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
कांकेर। नक्सलवाद से जूझ रहे उत्तर बस्तर में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। कांकेर पुलिस और बीएसएफ के संयुक्त प्रयास से 62 लाख के इनामी कुल 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिनमें 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं। यह सरेंडर अभियान उत्तर बस्तर में नक्सल नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
सरेंडर करने वालों में दिग्गज नक्सली कमांडर मैनू नेगी और कंपनी कमांडर मंगलू उर्फ रूपेश कोमरा जैसे नाम शामिल हैं। मैनू नेगी पर 26 जवानों की हत्या, जबकि मंगलू पर 7 जवानों की हत्या का आरोप है। मैनू पर 8 लाख और मंगलू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सरेंडर करने वाले इनामी नक्सली:
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1 नक्सली पर 10 लाख
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4 नक्सली पर 8-8 लाख
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3 नक्सली पर 5-5 लाख
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5 नक्सली पर 1-1 लाख
अन्य सरेंडर करने वाले नक्सलियों में नरेश दुग्गा, कारु वेढ़दा, माड़वी सोनमती, शीला पुड़ो, सरोदा उसेंडी, मानुराम, सुकारो नूरेटी, सोमारी उर्फ कविता, राजू, पवन पड़दा और असनू राम शामिल हैं। ये सभी रावघाट एरिया कमेटी, परतापुर एरिया कमेटी और माड़ डिविजन में सक्रिय थे और लंबे समय से सुरक्षा बलों के निशाने पर थे।
नक्सलियों की कमर टूटी, बैकफुट पर संगठन
एसपी आई. कल्याण एलिसेला ने बताया कि लगातार चल रहे सघन अभियान और एनकाउंटर के चलते नक्सली अब बैकफुट पर हैं और जान बचाने के लिए जंगल छोड़कर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “नक्सली संगठन अब पूरी तरह बिखर रहा है। कई और भी आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं।” उन्होंने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने और विकास से जुड़ने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
जवानों के आत्मसमर्पण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूकें अब ख़ामोश हो रही हैं और बीजापुर बदलाव की राह पर है। बीजापुर जिले में ₹1 करोड़ 15 लाख के 23 इनामी समेत 25 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।यह बदलाव कोई संयोग नहीं, बल्कि हमारी सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और जनकल्याणकारी योजनाओं की व्यापक स्वीकार्यता का प्रमाण है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ जैसी पहलों ने आदिवासी अंचलों में विश्वास की नींव रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समूल उन्मूलन निश्चित है।हम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास एवं समाज में सम्मानजनक जीवन देने का हर प्रयास सुनिश्चित करेंगे।
लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया एमएसएमई का मुद्दा
नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ से लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लेकर एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने सार्वजनिक खरीद नीति के अंतर्गत एमएसएमई को मिलने वाले अवसरों, नीतियों के क्रियान्वयन की स्थिति और पारदर्शी प्रक्रिया की दिशा में गंभीर सवाल उठाए।
सांसद श्री अग्रवाल ने संसद में केंद्र सरकार से पूछा कि पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) द्वारा एमएसएमई से कितनी खरीद की गई है। इसके साथ ही उन्होंने देशभर में पंजीकृत एमएसएमई की संख्या, तथा छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इन उद्यमों की स्थिति की जानकारी मांगी।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या केंद्र सरकार ने इस नीति को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू करने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए हैं और यदि हां, तो उनका ब्यौरा क्या है। साथ ही उन्होंने यह मांग की कि एमएसएमई उद्यमियों को नीति की जानकारी देने हेतु व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी इसका लाभ ले सकें।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि, सार्वजनिक खरीद नीति 23 मार्च 2012 से लागू है, जिसे 2018 में संशोधित किया गया था। इसके तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को अपनी कुल वार्षिक खरीद में कम से कम 25% एमएसई से करना अनिवार्य है। इसमें से 4% खरीद अनुसूचित जाति/जनजाति स्वामित्व वाले उद्यमों से और 3% महिला उद्यमियों से की जानी चाहिए। 358 वस्तुएं विशेष रूप से एमएसई से खरीदने हेतु आरक्षित की गई हैं। एमएसई को बोली दस्तावेज निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं तथा उन्हें बयाना राशि से भी छूट दी जाती है।
मंत्री ने यह भी बताया कि 15 जुलाई 2025 तक देशभर में 6.58 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं और छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों का विवरण अनुबंध-II में प्रस्तुत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नीति केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और सीपीएसयू पर लागू है, राज्यों पर नहीं। हालांकि, 26 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी नीतियों को केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप बनाया है।
एमएसएमई में जागरूकता लाने हेतु सरकार द्वारा किए गए प्रयास
जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से एमएसएमई को सरकारी खरीद प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति हब (NSSH) योजना के अंतर्गत क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विक्रेता विकास कार्यक्रम तथा खरीद एवं विपणन सहायता योजना के तहत समय-समय पर सीपीएसई द्वारा जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सरकार की नीतियां सराहनीय हैं, किंतु इनका जमीनी क्रियान्वयन और उद्यमियों तक सही जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि स्थानीय उद्यमियों को सशक्त कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिल सके।
हरेली पर्व हमारी धरती, परिश्रम और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक – उपमुख्यमंत्री अरुण साव
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़े पर्व हरेली के पावन अवसर पर राजस्व मंत्री के निवास कार्यालय में पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, साथ ही गौरी-गणेश, नवग्रहों और कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव और विजय शर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर की महापौर मीनल चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली पर्व छत्तीसगढ़ की जीवनशैली, मेहनतकश किसानों की आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। हमारी सरकार किसानों के कल्याण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बच्चों में गेड़ी जैसी पारंपरिक विधाओं के प्रति आकर्षण बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा है। हमें चाहिए कि हम ऐसे पर्वों के माध्यम से अपनी नई पीढ़ी को भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जोड़ें।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली पर्व किसान, खेत-खलिहान और गोधन की पूजा का पर्व है। मान्यता है कि आज के दिन शिव-पार्वती स्वयं भू-लोक में आकर किसानों की खेती-किसानी को देखने आते हैं। हरेली से ही छत्तीसगढ़ में त्योहारों की श्रृंखला की शुरुआत होती है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है। यह हमारी धरती, परिश्रम और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व हमारे किसानों की आस्था और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाता है।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। हरेली जैसे पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और कृषि संस्कृति को जीवंत रखने की प्रेरणा देते हैं। इस पर्व में गेड़ी चलाने की प्रतियोगिता बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। साथ ही गोधन को पौष्टिक आहार देकर ग्रामीणजन पशुधन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
इस अवसर पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की प्रस्तुति, गेड़ी चढ़ने की प्रतियोगिता और लोकनृत्यों ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम स्थल छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोकपरंपरा की झलक से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में पारंपरिक कृषि औजारों की पूजा कर प्रकृति और कृषि परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प दोहराया।
अंबिकापुर में बेकाबू बाइक नदी में गिरी, दो युवक नदी के तेज बहाव में बहे, एक की मौत दूसरे की रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तलाश जारी
अंबिकापुर। अंबिकापुर जिला में तेज बाइक बेकाबू होकर नदी में गिर गयी। इस हादसे में बाइक सवार दो युवक नदी के तेज बहाव में बह गये। आज गुरूवार को एक युवक का शव पुलिस ने बरामद कर लिया है, वहीं दूसरे लापता युवक की तलाश रेस्क्यू आपरेशन चलाकर किया जा रहा है। पुलिस ने लापता युवक की तलाश के लिए डेम का गेट बंद कराया है, ताकि नदी का जल स्तर कम हो सके।
जानकारी के मुताबिक ये घटना दरिमा थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि बुधवार की शाम घुनघुट्टा नदी में बाइक सवार दो युवक बह गये थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाइक की रफ्तार काफी तेज थी। जिसके कारण बेकाबू बाइक को युवक नियंत्रित नही कर सके और बाइक सहित दो युवक नदी में जा गिरे। घटना की जानकारी के बाद पुलिस नदी में बहे लापता युवकों की पतासाजी कर रही थी।
लापता युवकों के परिजनों ने बताया कि हिमांशु अपने साथी कार्तिकेय के साथ बुधवार की शाम कलगसा जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद उनके नदी में बहने की जानकारी पुलिस से मिली। आज गुरूवार की दोपहर पुलिस को घटनास्थल से आधा किलोमीटर दूर घुनघुट्टा नदी में एक युवक की लाश बरामद की गयी। स्थानीय लोगों की सूचना पर दरिमा पुलिस और गोताखोरों की मदद से युवक के शव को नदी से बाहर निकाला गया।
नदी से एक बाइक और एक जोड़ी जूते व एक जोड़ी चप्पल भी पुलिस ने बरामद किया है। मृतक की पहचान पलगड़ी निवासी हिमांशु के रूप में हुई है। हिमांशु का शव मिलने के बाद पुलिस ने दूसरे लापता युवक की तलाश तेज कर दी है। पुलिस ने बताया कि रेस्क्यू अभियान से पहले घुनघुट्टा डेम का गेट भी बंद कराया गया, ताकि नदी का जल स्तर कम हो सके। घुनघुट्टा नदी का जल स्तर कम होने के बाद पुलिस की टीम गोताखारों की मदद से नदी में बहे कार्तिकेय की तलाश में जुटी हुई है।
मुख्यमंत्री ने फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में की पूजा अर्चना, प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना की
रायपुर। सावन मास के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ आज बगिया स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचकर पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सुप्रसिद्ध कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी द्वारा किए जा रहे शिव महापुराण कथा का श्रवण भी किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे और हमारा देश और छत्तीसगढ़ सतत् रूप से विकास, शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि भगवान श्री भोलेनाथ के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। हमारी सरकार की नई उद्योग नीति से आकर्षित होकर बीते छह से आठ महीनों में लगभग साढ़े छह लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर सृजित किए हैं।
इस अवसर पर फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित 01 लाख 108 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं विशेष पूजन अनुष्ठान श्रद्धा, आस्था और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन 22 जुलाई से प्रारंभ हुआ था और इसका समापन आज 24 जुलाई को विधिपूर्वक किया गया। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। भक्तगण पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और भक्ति भाव से पार्थिव शिवलिंग निर्माण में सहभागी रहे। पूजन एवं अनुष्ठान का आयोजन प्रतिष्ठित विद्वान पंडितों द्वारा शास्त्र सम्मत विधियों के अनुसार किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के श्राप पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का जवाब, कहा-
रायपुर। बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी से आहत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डबल इंजन की सरकार गिरने की बात कही है. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार आती है-जाती है. किसी के श्राप से कुछ हो नहीं सकता. जो भ्रष्टाचार किया है उसका न्यायालय सही-सही फैसला करेगा. इसलिए इंतजार करना चाहिए, ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए.
खेल एवं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर हरेली पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे डॉ रमन सिंह ने गौठानों को बंद करने वाले भूपेश बघेल के बयान पर कहा कि गौठान की हालत खराब 5 साल में भूपेश सरकार ने की. भूपेश बघेल को बोलने का कोई हक नहीं है.
हरेली कार्यक्रम के दौरान डॉ. रमन सिंह ने कहा कि टंकराम वर्मा घर में शादी विवाह के अवसर पर बाहर से बुलाने की आवश्यकता नहीं, तीनों भाई गाना बजाने के लिए काफी है. चारों ओर खुशहाली आए, यह हम कामना करते है. बड़े-बड़े काम करने वाला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हमारे साथ बने हैं.

आवास में आयोजित कार्यक्रम में इस अवसर पर मंत्री टंकराम वर्मा ने गेड़ी भी चलाई. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली का त्यौहार मना रहा है. हम भी आज हरेली के रंग में रंग गए है. बचपन के दिनों को याद करते हैं. अब तक मै 6 पौवा वाली 10 फीट की गाड़ी चल चुका हूं. वहीं कांग्रेस के बयानों का पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें किसी का एकाधिकार नहीं है. हम जब से होश संभाले है. तब से खेल खेलने आ रहे हैं.
छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से महका मुख्यमंत्री निवास, ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया से सजी पारंपरिक थाली
रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी।
बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है।
इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।
वन विभाग में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर, जारी हुआ आदेश
रायपुर। राज्य सरकार ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया है. 60 वनपालों को दी गयी नई पदस्थापना।
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छत्तीसगढ़ की संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावनाः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। रायपुर सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज हरेली पर्व का गरिमामय आयोजन हुआ। त्यौहार मनाने के लिए पूरे परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा, प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमें अपने मूल से जोड़ता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली की खुशी में डूबा है। मुख्यमंत्री निवास में भी यह पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हरेली को मनाने का अपना-अपना अंदाज है। लेकिन सभी जगह इसका रंग एक ही है, आस्था और उत्साह एक ही है। जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है, उसी तरह हमें भी प्रकृति का ख्याल रखना चाहिए। हरेली केवल खेती-किसानी का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह अपनी धरती की हरियाली और प्रकृति पूजा का भी त्यौहार है। छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा हम सब पर बरसाती रहे और सभी किसान भाई खुशहाल रहें। यही मंगल कामना है।



उन्होंने कहा कि श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। हम सभी ने 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना देखा है और इसके लिए हमने अपना विजन डॉक्यूमेंट भी बनाया है। हमारी सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है।
हरेली त्योहार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसान जीवन का उत्सव है। इस पावन अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पशुधन से जुड़े हमारे जीवन मूल्यों की गूंज है। उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं धरती पर आकर किसानों के बीच उपस्थित होते हैं और उनके खेतों का निरीक्षण करते हैं। यही कारण है कि इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों, हल-बैल और खेत-खलिहानों की पूजा करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति कर रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीद और विभिन्न योजनाओं में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह हिंदुस्तान में किसी भी राज्य द्वारा किसानों के लिए किया गया सबसे बड़ा कार्य है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मुख्यमंत्री है, जो केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि धरातल पर किसानों के पसीने की कीमत चुका रहा है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा , महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायकगण, निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।
स्कूल शिक्षा विभाग में 1227 व्याख्याताओं की पदोन्नति, अब तक 7000 से अधिक पदोन्नति आदेश जारी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों पर राज्य सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में निरंतर सुधार और शिक्षक समुदाय के हित में त्वरित निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज दिनांक 23 जुलाई 2025 को विभिन्न विषयों के 1227 व्याख्याता (टी संवर्ग) शिक्षकों को पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। इन व्याख्याताओं की पदस्थापना काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी। इन विषयों में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान, राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और वाणिज्य जैसे मुख्य विषय शामिल हैं। यह निर्णय सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत राज्य के शिक्षकों को उनके कार्य, वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर समय पर पदोन्नति और अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि विगत एक वर्ष में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला एवं संभाग स्तर पर लगभग 7000 पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही संपन्न की गई है। इसके साथ ही, 2621 सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला) की सीधी भर्ती काउंसिलिंग के माध्यम से की गई, जिससे स्कूलों में प्रयोगात्मक शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
इससे पूर्व दिनांक 30 अप्रैल 2025 को लगभग 2900 प्राचार्यों के पदोन्नति आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में पदोन्नत टी संवर्ग के प्राचार्यों की पदस्थापना भी काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और स्थान-आवश्यकता के आधार पर समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
ई संवर्ग के प्राचार्यों का प्रकरण माननीय न्यायालय में लंबित है। माननीय न्यायालय के निर्णयानुसार समयबद्ध रूप से आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
पाट जात्रा के साथ शुरू हुआ विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा, बड़ी संख्या में जनसमुदाय हुआ शामिल
रायपुुर। हरियाली अमावस्या के मौके पर बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी मन्दिर के सामने गुरुवार को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया। बस्तर दशहरा पर्व के इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, महापौर संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर दशहरा पर्व समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों के साथ ही बड़ी संख्या में जनसमुदाय शामिल हुआ।





बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के पहले पूजा विधान पाट जात्रा में रथ निर्माण के लिए बनाए जाने वाले औजार ठुरलू खोटला तथा अन्य औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रस्म पूरी की गयी। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया, जो इस वर्ष करीब 75 दिवस की अवधि तक पूरे आस्था, श्रद्धा और पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा।
बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख पूजा विधानों को निर्धारित तिथि अनुसार सम्पन्न की जाती है। जिसके तहत आगामी शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 01 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 02 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 03 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 04 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान एवं मुरिया दरबार होगा। वहीं रविवार 05 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी और मंगलवार 07 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।
मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: CM ने गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का किया अभिषेक
रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के पहले पर्व “हरेली” पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का अभिषेक किया।
पहली बार मुख्यमंत्री निवास में हरेली के पूजन में भिलाई की ग्रेजुएट धनिष्ठा शर्मा ने अपने बड़े भाई दिव्य शर्मा के साथ भगवान शिव के अभिषेक में मंत्रोच्चार किया, इससे मुख्यमंत्री श्री साय एवं उनके परिजनों सहित मौजूद सभी अतिथि प्रभावित हुए।
हरेली के पूजा-पाठ में विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खेती किसानी के कामों में उपयोग होने वाले नांगर, रापा, कुदाल व दूसरे कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर हरेली उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के किसानों समेत समस्त छत्तीसगढ़ वासियों की ख़ुशहाली एवं सुख-समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पशुधन संरक्षण के संदेश के साथ गाय और बछड़े को पारंपरिक लोंदी और हरा चारा खिलाया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली पर्व केवल किसानों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन से जुड़े हमारे गहरे रिश्ते को भी दर्शाता है। इस दिन गाय एवं अन्य मवेशियों को गेहूं के आटे, नमक और अरंडी के पत्तों से तैयार लोंदी खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पशुओं को कई प्रकार की बीमारियों से बचाव मिलता है और उनकी सेहत बेहतर रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पशुओं को परिवार का सदस्य माना गया है। हरेली का यह पर्व हमें पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं से जुड़ें और पशुधन की देखभाल एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस अवसर पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिवेश और पूजा-पद्धति के साथ लोक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।
राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मलेन रायपुर में 26 जुलाई को, राज्य भर के उद्योगपति होंगे शामिल
रायपुर। राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन का आयोजन 26 जुलाई को रायपुर में किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ और उद्योग विभाग के संयुक्त तत्वाधान में यह सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक स्थानीय जेल रोड स्थित होटल सेलिब्रेशन में दोपहर 2.30 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम में राज्यभर के उद्यमी शामिल होंगे।
राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम के सीएसआईडीसी के चेयरमैन राजीव अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विशेष अतिथि के रूप में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद शामिल होंगे।
यह सम्मेलन न केवल उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उद्योग क्षेत्र में आ रही चुनौतियों, संभावनाओं और योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघानिया, महासचिव सी. पी. दुबे एवं कोषाध्यक्ष दीपक उपाध्याय प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।
महिला टीचरों की मौत, कोरबा हादसे पर बड़ी अपडेट
कोरबा। कोरबा में एकलव्य विद्यालय के शिक्षक और छात्रों को लेकर जा रही विंगर वेन और माजदा ट्रक के बीच टक्कर हो गयी। इस भीषण हादसे में दो महिला शिक्षिका की दर्दनाक मौत हो गयी। वहीं गंभीर रूप से घायल 5 अन्य शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल मे रिफर किया गया है। आपको बता दे यह दुर्घटना आज सुबह कटघोरा से पोड़ी-उपरोड़ा स्थित एकलव्य विद्यालय जाने के दौरान घटित हुआ। दुर्घटना के बाद पुलिस की मदद से सभी घायल शिक्षक और छात्रों को अस्पताल पहुंचाया गया।
जानकारी के मुताबिक ये हादसा कटघोरा थाना क्षेत्र के तानाखार मुूख्य मार्ग पर आज सुबह घटित हुआ। बताया जा रहा है कि पोड़ी-उपरोड़ा में संचालित एकलव्य विद्यालय में पदस्थ 10 शिक्षक-शिक्षिका और 2 छात्र विंगर वेन से सुबह के वक्त रवाना हुए थे। विंगर वेन तानाखार मुख्य मार्ग के पास से गुजर रही थी, तभी दूसरी तरफ से आ रहे तेज रफ्तार माजदा ट्रक के चालक ने विंगर को चपेट में लेकर जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में माजदा की टक्कर से विंगर के परखच्चे उड़ गये।
जिससे उसमें सवार शिक्षक और छात्रों को गंभीर चोटे आई है।घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 की मदद से सभी घायलों को कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाकर भर्ती कराया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 7 शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल कोरबा रिफर किया गया है। जहां उपचार के दौरान दो शिक्षिका की मौत् हो गयी। मरने वाली महिला शिक्षक का नाम अंजना शर्मा और मंजू शर्मा बताया जा रहा है। वहीं घायल अन्य शिक्षकों का उपचार जारी है। पुलिस ने इस दुर्घटना पर अपराध दर्ज कर माजदा वाहन को जब्त कर लिया है।
रेत भरी हाइवा की आपस में भिड़ंत, हेल्पर की मौके पर मौत, घंटों की मशक्कत के बाद निकाला गया ड्राइवर…
धमतरी। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सिहावा रोड पर दो रेत से भरी हाइवा की आपस में भिड़ंत हो गई. भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि हाइवा के परखच्चे उड़ गए. दुर्घटना में एक हेल्पर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं घंटों की मशक्कत के बाद ड्राइवर को बाहर निकाला गया.
घटना शांति कॉलोनी के समीप पूजा राइस मिल के सामने रात 2 से 3 बजे घटित हुई बताई जा रही है. दुर्घटना में हाइवा के हेल्पर 16 वर्षीय ग्राम सुखरी, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव निवासी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. वहीं करीबन पांच घंटे की मशक्कत के बाद हाइवा में फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला गया.
घटना के बाद तत्काल सूचना मिलने पर मौके पर कोतवाली पुलिस पहुंची. एम्बुलेंस में घायलों को तत्काल नजदीकी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है. फिलहाल, कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है.
CG PSC भर्ती घोटाला में आरोपियों को कोर्ट से नही मिली राहत, हाईकोर्ट ने कहा….अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हत्या से भी गंभीर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती सरकार में हुए बहुचर्चित CG PSC भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। भर्ती घोटाले शामिल एग्जाम कंट्रोलर सहित 3 आरोपियों की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस पूरे मामले में जस्टिस बीडी गुरु ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि… प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक कर लाखों युवाओं के भविष्य से जो खेलता है, यह कृत्य हत्या से भी गंभीर अपराध है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रश्नपत्र लीक कर PSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था को शर्मसार किया है। इस सख्त टिप्पणी के साथ कोर्ट ने एग्जाम कंट्रोलर और अन्य दो आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दी। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में साल 2020 में हुए CG PSC भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई। इस पूरे मामले पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने सवाल उठाते हुए सरकार से CBI जांच की मांग की थी। इसके साथ ही ननकीराम कंवर ने इस मामले में जनहित याचिका भी लगाई थी।
जिसमें बताया गया प्रश्न पत्र लिक कर अफसर और कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों का चयन कर डिप्टी कलेक्टर जैसे पद दिए गए। इस पूरे मामले में जांच के बाद सनसनीखेज खुलासा होने के बाद भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार कर धांधली करने वालों की गिरफ्तारी की गयी थी। राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद इस मामले में ACB-EOW ने दो अलग-अलग FIR दर्ज की। फिर बाद में मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।
हाईकोर्ट ने भी इस पूरे मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक साथ इस तरह से रिश्तेदारों का चयन इत्तेफाक नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने भर्ती की जांच के आदेश भी दिए। सीजी पीएससी भर्ती परीक्षा में धांधली करने वाले एग्जाम कंट्रोलर सहित 3 आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगायी थी। जिस पर हार्हकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करने हुए उनकी जमानत को खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा
रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।
काठा
सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।
खुमरी
सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।
कांसी की डोरी
यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।
झांपी
ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।
कलारी
बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।





