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चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर फूटा युवा कांग्रेस का गुस्सा, ED का पुतला दहन कर दी चेतावनी…
दुर्ग। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के विरोध में युवा कांग्रेस ने भिलाई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का पुतला दहन किया. इस दौरान चेतावनी दी कि ED का दुरुपयोग बंद करे, नहीं तो युवा कांग्रेस मुख्यमंत्री व गृह मंत्री के निवास का घेराव करेगी.
प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार भाजपा सरकार के दबाव में ED विपक्ष की आवाज को दबाने का कार्य कर रही है. यह छत्तीसगढ़ को बदलापुर बनाने की ओर अग्रसर है. कभी देवेंद्र यादव के जन्मदिन पर ED भेजते हैं, तो कभी भूपेश बघेल के जन्मदिन पर. यहां तक चेतन्य बघेल के जन्मदिन पर भूपेश बघेल के घर पर ED आती है. भाजपा सिर्फ बदलापुर की राजनीति कर रही है, परन्तु ये विपक्ष की आवाज़ नहीं जनता की आवाज़ है. युवा कांग्रेस के दिलों में आग है. जितना भाजपा सरकार दबाने का कार्य करेगी, उतने दुगनी रफ़्तार से युवा कांग्रेस जनता की आवाज को तेज करने का काम करेगी।
पुतला दहन के दौरान मुख्यरूप से युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विभोर दुरगकर, भिलाई नगर अध्यक्ष अर्जुन शर्मा, वैशाली नगर अध्यक्ष पलाश लिमेष, प्रदेश सचिव सीखा रॉय, जिला उपाध्यक्ष शोएब, जिला महासचिव सतनाम,भाष्कर, अमन सेठिया, अमन सोनी, भारत राव, अफ़ज़ल, आर्यन, सद्दाम, दीपक पाटले, कबीर खान, हैदर, शुभम वर्मा, नितिन ,आकाश, नवीन अग्रवाल, जय शर्मा, लक्षित, गजेंद्र, सागर, पिंटू सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे.
पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी केके श्रीवास्तव पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
बिलासुपर। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के कथित करीबी के के श्रीवास्तव के खिलाफ 8 करोड़ की धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज किया गया है. आरोप है कि सने नर्मदा नगर के पास पार्टनरशिप में अमलताश कॉलोनी का निर्माण का कार्य शुरू किया. इसमें पार्टनर की मृत्यु के बाद परिजनों को लगाए गए रकम के आधार पर लाभ और पैसे देने का वादा किया. केके श्रीवास्तव ने लाभ की रकम का आठ करोड़ रुपए हड़प कर धोखाधड़ी की. इसके अलावा कॉलोनी की बंधक जमीन के बदले एक करोड़ रुपए भी नहीं दिए.
नर्मदा नगर इलाके में अमलताश कॉलोनी की रहने वाली रत्ना यादव ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराया है, जिसके मुताबिक उसके पति स्व. राजेश यादव और के.के. श्रीवास्तव अच्छे दोस्त थे. उसके पति राजेश यादव और के. के. श्रीवास्तव की नौकरी छूट जाने पर दोनों ने साथ मिलकर बिल्डर का काम शुरू किया. इसके लिए दोनों ने बराबर धन मिलाकर व्यवसाय शुरू किया. व्यवसाय अच्छा चलने लगा और प्रॉफिट भी होने लगी. इस बीच शिकायतकर्ता के पति राजेश यादव की 13 दिसंबर 2015 को मृत्यु हो गई. उस दौरान केके श्रीवास्तव पार्टनर स्व. राजेश यादव के घर आए और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के सामने बैठक में कहा कि स्व. राजेश यादव के द्वारा जो राशि अमलताश कॉलोनी में लगाई गई है. उसके हिसाब से उनके हिस्से का लाभ आश्रित पत्नी रत्ना यादव व उनके परिजनों को देंगे. इस बैठक की कार्रवाई का ऑडियो रिकॉर्ड भी किया गया.
रत्ना यादव ने पुलिस को बताया कि उसने खुद, बच्चों और जीजा फणेश्वर यादव कई बार आरोपी केके श्रीवास्तव से रकम की मांग की. लेकिन वह टालमटोल करने लगे. उन्होंने पैसे न होने पर आधी जमीन देने कहा, पर आरोपी ने उनकी बात नहीं सुनी. अमलताश कॉलोनी में 2020-21 में के.के. श्रीवास्तव ने जमीन बेचकर 8 करोड़ रूपए अर्जित किया. लेकिन उसने लाभ की रकम में से स्व. राजेश यादव के आश्रितों को कोई रकम नहीं दिया. कॉलोनी के बंधक भूखंड की रकम करीब 1 करोड़ रु भी उन्हें नहीं दी.
उन्होंने बताया कि 3.12.2016 को समय 12.37 बजे मेरे जीजाजी फणेश्वर यादव से बात कर दस्तावेज की मांग किये थे और के के. श्रीवास्तव का कर्मचारी दिनांक 13.12.2016 को प्रशांत धिरी मेरे निवास स्थान में आकर कलोनी से संबंधित दस्तावेज का बंडल बनाकर रखे और केके श्रीवास्तव का वाहन चालक समस्त दस्तावेज लेकर गये तब मैंने उस घटना की वीडियो रिकार्डिंग किया था. जिसे साक्ष्य के रूप में पुलिस को दिया गया है.
सिविल लाइन पुलिस ने मामले में के.के. श्रीवास्तव के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
JE का कहर: दो बच्चों की मौत, 15 अस्पताल में भर्ती, टीकाकरण अभियान तेज
जगदलपुर। बस्तर जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) ने दस्तक दे दी है, और इसकी चपेट में आकर अब तक दो मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 बच्चे इलाजरत हैं। यह स्थिति क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात पैदा कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग मृत बच्चों की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है, वहीं संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले के तोकापाल, दरभा, नानगुर, बकावंड और लोहंडीगुड़ा इलाकों में अब तक जेई के मरीज मिल चुके हैं। मृतक बच्चे लोहंडीगुड़ा और तोकापाल ब्लॉक के निवासी थे।
संक्रमण की आहट, सतर्कता जरूरी
संक्रमण के फैलाव की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। हालांकि ज़मीनी स्तर पर लोगों में अब भी जागरूकता की कमी देखी जा रही है, जिससे स्थिति और बिगड़ने का खतरा बना हुआ है।
टीकाकरण की रणनीति
टीकाकरण को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
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9 महीने से 1 साल तक के बच्चों को पहला डोज
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16 से 24 माह के बच्चों को दूसरा डोज
दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपील की है कि माता-पिता बच्चों का टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराएं और संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
भारतमाला घोटाला: 18 गुना मुआवजा घोटाले में फंसे पूर्व SDM निर्भय साहू, कोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई
रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित भारतमाला सड़क परियोजना घोटाले में रायपुर के तत्कालीन एसडीएम रहे निर्भय कुमार साहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। घोटाले में गिरफ्तारी से बचने के लिए साहू ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, लेकिन भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (EOW/ACB) की विशेष अदालत ने उनका आवेदन खारिज कर दिया।
निर्भय साहू पर आरोप है कि उन्होंने रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला कॉरिडोर निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि कुछ विशेष जमीन मालिकों को फायदा पहुंचाने के लिए उन्होंने जानबूझकर गलत मुआवजा वितरित किया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि साहू ने न केवल लापरवाही बरती, बल्कि सरकारी धन का दुरुपयोग भी किया जिससे राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
गौरतलब है कि इस घोटाले की शिकायत सबसे पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू और भाजपा किसान मोर्चा के नेता गौरीशंकर श्रीवास ने की थी। श्रीवास के अनुसार, यह मामला करीब साढ़े तीन साल पुराना है, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।
18 गुना ज्यादा मुआवजा, सरकारी धन की खुली लूट
घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अभनपुर इलाके में किसानों की जमीन अधिग्रहित कर रिकॉर्ड में हेरफेर कर मुआवजा राशि को 18 गुना तक बढ़ा दिया गया। इसके बाद इस रकम का बड़ा हिस्सा अधिकारियों और भू-माफियाओं की जेब में चला गया, जबकि किसानों को नाममात्र का भुगतान किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय जांच समिति गठित की गई थी। रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने पांच महीने पहले साहू को निलंबित कर दिया था, जब वे जगदलपुर नगर निगम के आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। अवर सचिव क्लेमेंटिना लकड़ा ने निलंबन की अधिसूचना जारी की थी।
अब जब कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, तो साहू की गिरफ्तारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। भारतमाला परियोजना घोटाले में यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में OPS खत्म: अब कर्मचारियों को मिलेगा सिर्फ UPS और NPS का लाभ, राजपत्र में हुआ प्रकाशन
रायपुर। छत्तीतसगढ़ में पुरानी पेंशन योजना खत्म हो गयी है। अब छत्तीसगढ़ में होने वाली नयी भर्ती में सिर्फ एनपीएस या यूपीएस चयन का ही आप्शन मिलेगा। छत्तीसगढ़ में यूपीएस यानि एकीकृत पेंशन योजना को लेकर राज्य सराकर ने राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। 1 अगस्त 2025 से छत्तीसगढ़ में यूपीएस लागू होगा। आपको बता दें किUPS सिर्फ और सिर्फ सरकारी कमचारियों के लिए लागू होगा, जो पहले से ही NPS के तहत रजिस्टर्ड हैं. सरकारी कर्मचारियों के पास विकल होगा कि वे NPS या UPS में से किसी एक को चुन सकते हैं।
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) क्या है?
सबसे पहले जान लेते हैं कि आखिर UPS है क्या? तो बता दें कि यूपीएस के तहत अब केंद्रीय कर्मचारियों को एक निश्चित पेंशन दी जाएगी, जो कर्मचारी के रिटायरमेंट के पहले के आखिरी 12 महीने की ऐवरेज बेसिक सैलरी का 50% होगा. कर्मचारी को यह पेंशन पाने के लिए कम से कम 25 साल तक सर्विस करनी होगी। वहीं अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो परिवार को भी एक निश्चित पेंशन मिलती रहेगी, जो उसे मिलने वाली पेंशन का 60 फीसदी होगी। इसके अलावा, मिनिमम एश्योर्ड पेंशन भी दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि जो लोग 10 साल तक नौकरी करते हैं तो उन्हें कम से कम 10 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी।
सरकारी योगदान कितना होगा?
न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कॉन्ट्रिब्यूट करना होता है और इसमें सरकारी कॉन्ट्रिब्यूशन 14 फीसदी होता है। वहीं 1 अप्रैल 2025 से लागू होने जा रही UPS में सरकार का ये कॉन्ट्रिब्यूशन या अंशदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 18.5 फीसदी होगा। इस यूनिफाइड पेंशन स्कीम को लागू किए जाने से करीब 23 लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचने वाला है और सरकारी खजाने पर बढ़ने वाला अतिरिक्त बोझ पहले साल 6250 करोड़ रुपये होगा।

जनविश्वास विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बना छत्तीसगढ़ : अब आपराधिक मुकदमा नहीं, लगेगा जुर्माना
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जनविश्वास विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ। यह विधेयक राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस ऐतिहासिक विधेयक का उद्देश्य अंग्रेजों के समय से चले आ रहे कई ऐसे कानूनों को संशोधित करना है, जो नागरिकों और कारोबारियों द्वारा की गई छोटी-मोटी त्रुटियों को भी आपराधिक कृत्य की श्रेणी मेें शामिल थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस विधेयक को विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाए गए भारतीय न्याय संहिता की तर्ज पर, छत्तीसगढ़ अब मध्य प्रदेश के बाद दूसरा राज्य बन गया है, जिसने जनविश्वास विधेयक पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में रोजगार व्यवसाय को आसान बनाने के साथ-साथ गैर अपराधिक श्रेणी के मामलों में व्यापारियों एवं आम नागरिकों न्यायालयीन मुकदमे से संरक्षित करना और एक सुगम व्यावसायिक एवं जिम्मेदारी पूर्ण वातावरण तैयार करना है। यह विधेयक दंड देने के बजाय व्यवसाय को दिशा देने और ऐसी नीति बनाने में सहायक है, जो व्यावहारिक और संवेदनशील हों।
इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह आम नागरिकों और कारोबारियों द्वारा किए गए छोटे-मोटे तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक श्रेणी से हटाकर जुर्माने (शास्ति) के दायरे में लाता है। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी और अदालतों पर बोझ कम होगा, साथ ही नागरिकों को छोटी गलतियों के लिए आपराधिक मामलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस विधेयक में छत्तीसगढ़ राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम, और छत्तीसगढ़ सहकारिता सोसायटी अधिनियम से संबंधित 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में बदलाव किया गया है।
विधेयक का लक्ष्य उद्यमियों को नियामकीय सूचनाओं से संबंधित देरी के लिए आपराधिक मुकदमे के डर से मुक्ति दिलाना है। अब ऐसे मामलों में केवल प्रशासकीय जुर्माना लगेगा, जिससे व्यापार व्यवसाय में आसानी होगी। विधेयक में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 के प्रावधान में भी संशोधन किया गया है। सार्वजनिक स्थल पर शराब के उपभोग के मामले में पहली बार सिर्फ जुर्माना और इसकी पुनरावृत्ति के मामले में जुर्माना और कारावास का प्रावधान किया गया है।
इसी तरह नगरीय प्रशासन विभाग के अधिनियम के तहत मकान मालिक द्वारा किराया वृद्धि की सूचना नहीं दिए जाने के मामले में आपराधिक मामला दर्ज किए जाने के प्रावधान को संशोधित कर अब अधिकतम 1,000 रुपये की शास्ति का प्रावधान किया गया है। इसी तरह किसी सोसायटी द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन दाखिल करने के मामले में विलंब की स्थिति में आपराधिक कार्रवाई के प्रावधान को संशोधित कर नाममात्र के आर्थिक दंड में बदल दिया गया है। विशेषकर महिला समूहों के मामलों में इसे और भी न्यूनतम रखा गया है। यदि कोई संस्था गलती से सहकारी शब्द का उपयोग कर लेती थी, तो उसे आपराधिक मुकदमे और दंड के प्रावधान के स्थान पर अब केवल प्रशासनिक आर्थिक दंड का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड विधेयक 2025 विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित, राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राज्य की आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को सुनिश्चित करने हेतु छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड विधेयक 2025 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। यह विधेयक राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विधेयक के उद्देश्यों, प्रावधानों और इससे होने वाले लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 दस्तावेज तैयार किया है, जिसके अंतर्गत राज्य को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। इसी कड़ी में राज्य की वित्तीय दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह विशेष फंड स्थापित किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में खनिज संसाधनों से होने वाली आय में निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2001-02 से 2024-25 के दौरान खनिज राजस्व में 30 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पूंजीगत व्यय में भी लगभग 43 गुना की वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय में पिछले वर्ष की तुलना में 38 प्रतिशत तथा वर्ष 2023-24 में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय से अर्थव्यवस्था को मल्टीप्लायर इफेक्ट मिलता है, जिससे एक रुपये के निवेश से अर्थव्यवस्था को तात्कालिक रूप से 2.45 रूपए और दीर्घकाल में 3.14 रूपए का लाभ मिलता है। इसी दृष्टिकोण से यह फंड राज्य के पूंजीगत व्यय को सुदृढ़ करने सहायक होगा।
फंड के प्रमुख प्रावधान और लाभ
वित्त मंत्री ने बताया कि यह फंड खनिज संसाधनों से प्राप्त वार्षिक राजस्व का न्यूनतम 1 प्रतिशत और अधिकतम 5 प्रतिशत तक निवेश की व्यवस्था करेगा। फंड से प्राप्त लाभांश को पुनः फंड में निवेश किया जाएगा। इस फंड का उपयोग केवल पूंजीगत व्यय के लिए ही किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में ही मूल राशि से आहरण किया जा सकेगा, वह भी एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 10 प्रतिशत तक। फंड की पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत नियम बनाए जाएंगे, जिनमें फंड प्रबंधन, निवेश प्रक्रिया और अनुमति योग्य निवेश साधनों का स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा।
राज्य के लिए ऐतिहासिक पहल
ओपी चौधरी ने कहा कि ऐसा फंड बनाने वाला छत्तीसगढ़ संभवतः देश का पहला राज्य है। मुख्य बजट 2025-26 में इस फंड के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा जिला खनिज न्यास निधि का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज समेत कई जिलों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा अधोसंरचना का निर्माण किया जा रहा है।
बिजली दरों में वृद्धि और ईडी की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन
मुंगेली। छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी और ईडी की हालिया कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में जरहागांव ब्लॉक के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज बरेला बिजली कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा। वहीं युवा कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई के विरोध में पुतला दहन किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर ब्लॉक मुख्यालय जरहागांव से रैली निकालकर कांग्रेसजनों ने बरेला बिजली कार्यालय पहुंचकर बढ़ती बिजली दरों और जर्जर सड़कों को लेकर ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष रामचंद्र साहू सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता उपस्थित रहे। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार ने चौथी बार बिजली दरों में बढ़ोतरी कर आम जनता और किसानों पर आर्थिक बोझ डाल दिया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 10 से 20 पैसे, गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 पैसे और किसानों के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त स्थानीय समस्याओं पर भी ध्यान आकर्षित किया गया।

इन मुद्दों पर जताया विरोध
कांग्रेसियों ने जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया उनमें बरेला से मनियारी पुल तक की जर्जर सड़क, स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल में शिक्षकों की कमी, बरेला बायपास की मरम्मत, नगर पंचायत में हो रही अनियमितताएं, जरहागांव तालाब में जलकुंभी की समस्या, अघोषित बिजली कटौती और मुख्य मार्गों में मवेशियों से हो रही दुर्घटनाएं शामिल हैं।
ईडी की कार्रवाई के विरोध में किया पुतला दहन
दूसरी ओर ईडी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र को हिरासत में लिए जाने के विरोध में युवा कांग्रेस ने बरेला बिजली ऑफिस के सामने पुतला दहन किया। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने कहा, “प्रदेश सरकार सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।”युवा कांग्रेस अध्यक्ष राजेश छेदइया ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र को उनके जन्मदिन पर हिरासत में लेना द्वेषपूर्ण राजनीति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर पूरे छत्तीसगढ़ में पुतला दहन किया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में थानेश्वर साहू, संजीत बनर्जी, चुरावन मंगेशकर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल रहे।
छात्रहित में ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर चिकित्सा प्रवेश नियमों में व्यापक सुधार
रायपुर। राज्य में चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहित करने और योग्य चिकित्सकों की नई पीढ़ी के लिए सरल, पारदर्शी एवं सुगम मार्ग सुनिश्चित करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी पहल पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए छात्रहित में महत्वपूर्ण नए नियम बनाए गए हैं। ये निर्णय चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में देखे जा रहे हैं।
चिकित्सा स्नातक (एम.बी.बी.एस., बी.डी.एस. एवं बी.पी.टी.) पाठ्यक्रमों में काउंसलिंग के लिए शासन द्वारा नवीन नियम संशोधन किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस वर्ष से काउंसलिंग प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को अधिक सुविधा एवं पारदर्शिता मिलेगी।
प्राथमिकता में संशोधन
निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रबंधन कोटा एवं एनआरआई कोटा में आरक्षित वर्गों (SC, ST, OBC) की रिक्त सीटों के आवंटन में छत्तीसगढ़ मूल निवासी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
बॉन्ड सेवा अवधि में छूट
पूर्व निर्धारित 2 वर्षों के स्थान पर अब न्यूनतम 1 वर्ष की बॉन्ड सेवा अवधि अनिवार्य की गई है।
काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन
समस्त काउंसलिंग प्रक्रिया अब पूर्ण रूप से ऑनलाइन होगी। सीट आबंटन एवं प्रवेश की सम्पूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की जाएगी।
ओबीसी श्रेणी हेतु आय प्रमाण पत्र में सरलता
ओबीसी वर्ग के लिए आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए प्रमाण-पत्र संबंधित मापदंडों को सरल किया गया है।
ईडब्ल्यूएस श्रेणी की रिक्त सीटें अब सामान्य वर्ग को
यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी की सीटें रिक्त रहती हैं तो उन्हें अब अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को आवंटित किया जाएगा।
प्रत्येक चरण में पंजीयन की सुविधा
काउंसलिंग के प्रत्येक राउंड में पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन नए नियमों के अनुसार काउंसलिंग की प्रक्रिया दिनांक 30 जुलाई 2025 से प्रारंभ होगी। यह निर्णय राज्य के चिकित्सा विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्रदान करने तथा प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ED के वकील सौरभ पांडे ने कहा- शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये चैतन्य को 13 करोड़ का हुआ लाभ, फैजल रिजवी बोले- गिरफ्तारी राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित

उन्होंने कहा कि चैतन्य बघेल ने “Proceeds of Crime” (अपराध की आय) से स्वयं को आर्थिक रूप से लाभान्वित किया है। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि उन्होंने लगभग 13 करोड़ रुपये का सीधा लाभ प्राप्त किया और करीब 1000 करोड़ रुपये की अपराध की आय को इधर-उधर करने में सिंडिकेट की मदद की है।
कंपनियों और ट्रांजैक्शन का जाल
सौरभ पांडे के अनुसार, चैतन्य बघेल की दो प्रमुख कंपनियां बघेल एसोसिएट्स और बघेल बिल्डकॉन के माध्यम से यह गतिविधियां की गई। जांच में सामने आया है कि उन्होंने सहेली ज्वेलर्स और ढिल्लन सिटी मॉल लिमिटेड के साथ मिलकर साइफनिंग का तरीका अपनाया।
इनका तरीका था किसी को नकद में लोन देना, फिर उस लोन को वापस न लेना और उस पर ब्याज भी न दिखाना। इसके अलावा ढिल्लन सिटी मॉल लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों के नाम पर कुछ फ्लैट बघेल बिल्डकॉन से खरीदे। परंतु जिन कर्मचारियों के नाम पर यह फ्लैट खरीदे गए थे, उनके स्टेटमेंट से स्पष्ट हुआ कि यह लेन-देन केवल कैश मनी को वैध रूप देने की प्रक्रिया थी, जो शराब घोटाले के “Proceeds of Crime” से संबंधित था।
घोटाले में अन्य नाम शामिल
ईडी के वकील सौरभ पांडे ने आगे बताया कि पप्पू बंसल का जो स्टेटमेंट हमारे पास उपलब्ध है, उसमें बंसल ने कई ट्रांजैक्शन का खुलासा किया है। इसमें बताया गया है कि दीपेंद्र चावड़ा, अनवर ढेबर के जरिए विपिन चावड़ा, दीपेंद्र चावड़ा के जरिए या तो केके श्रीवास्तव या फिर रामगोपाल अग्रवाल या चैतन्य बघेल के पास उस चैनल से पैसा आता था, और जिसे भी ये डील करते थे। यह बेसिकली अभी तक इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है। अभी तक की जांच में लगभग 13 करोड़ के आसपास की ‘Proceeds of Crime’ हमें बिल्कुल सही रूप से दिखाई पड़ रही है, जिससे चैतन्य बघेल लाभान्वित हुए हैं।
राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है गिरफ्तारी – फैजल रिजवी
वहीं इस मामले में चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि ईडी की ओर से 5 दिन की रिमांड मांगी गई है। वकील ने बताया कि आज तक चैतन्य बघेल को एक भी समन जारी नहीं किया गया है। लक्ष्मी उर्फ पप्पू बंसल के बयान को आधार मानते हुए आज चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने बताया कि आज चैतन्य बघेल का आज जन्मदिन था और सुबह जब वह पूजा कर रहे थे इस दौरान पूजा स्थल में जूते पहने हुए जाकर ED की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया। न्यायालय के सामने हमने यह बात रखी है कि इससे धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित ये गिरफ्तारी है। ये हमने न्यायालय को बताया है।
बता दें कि शुक्रवार की सुबह 6 बजे ईडी की टीम ने भिलाई स्थित भूपेश बघेल के आवास पर छापा मारा। छापेमारी करने करीब 8 अधिकारियों की टीम दो गाड़ियों में पहुंची और इस दौरान छानबीन के बाद भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन गिरफ्तार कर रायपुर की न्यायधीश डमरूधर चौहान विशेष कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने चैतन्य बघेल को 5 दिन की ईडी रिमांड पर भेजा है, जहां उनसे शराब घोटाले में पूछताछ की जाएगी। अब चैतन्य बघेल को ED की टीम 22 जुलाई को शाम 4 बजे विशेष कोर्ट में पेश करेगी।
नेशनल एआरटी और सरोगेसी बोर्ड की बैठक: तीन अहम मुद्दे सर्व सहमति से पारित, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने की स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सराहना
रायपुर। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में नेशनल एआरटी ऐंड सेरोगेसी एक्ट 2021 के तहत छठवें नेशनल एआरटी ऐंड सेरोगेसी बोर्ड की बैठक हाइब्रिड मोड में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं बोर्ड के सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बोर्ड के सदस्य के रूप में छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, तमिलनाडु और तेलगांना राज्य शामिल हैं। छत्तीसगढ़ राज्य की तरफ से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया तथा आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ प्रियंका शुक्ला बैठक में उपस्थित रहे।
बोर्ड की बैठक में तीन अहम मुद्दों को सर्व सहमति से पारित किया गया। इसके तहत देश के अंदर या बाहर भ्रूण/युग्मक के अंतरण के अनुमति के लिए 884 मामलों के प्रकरणों को स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही भारतीय मूल के दंपत्ति (ओसीआई) के 14 मामलों में अधिनियम के तहत सरोगसी के लिए स्वीकृति दी गई। एक अन्य मामले में एक केंद्र से दूसरे केंद्र में क्रायोप्रिजर्व के सामूहिक हस्तांतरण (केंद्र के बंद होने के कारण) के तीन प्रकरणों में स्वीकृति दी गई।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बैठक में एक अहम सुझाव देते सरोगेसी के लिए अधिनियम में निर्धारित उम्र सीमा पर पुर्नविचार कर एक्ट में संशोधन किये जाने की बात कही, इसके लिये केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सराहना की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एआरटी एवं सेरोगेसी एक्ट को मानवता के विकास के कदम में एक आवश्यक कदम बताया। उन्होंने बैठक में कहा कि आज जो एजेंडा पारित हुए हैं उससे समाज को लाभ मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के 11 जिलों को मिला कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस, डेढ़ साल में 1.80 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन, 351 लोगों ने किया नेत्रदान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा दृष्टिहीनता की रोकथाम हेतु वृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा है। दृष्टिहीनता के प्रमुख कारणों में से एक मोतियाबिंद है, जो सामान्यतः एक आयुजन्य नेत्र रोग है। एक निश्चित आयु के पश्चात इसका होना सामान्य माना जाता है, किन्तु इसका ऑपरेशन कर दृष्टि पुनः प्राप्त की जा सकती है। इसके उपचार हेतु गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क नेत्र ऑपरेशन की सुविधा राज्य के 25 जिला चिकित्सालयों एवं 10 चिकित्सा महाविद्यालयों सहित कुल 43 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है, जहाँ नियमित रूप से नेत्र ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
राज्य में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 1,45,580 तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 27,245 मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं। प्रदेश में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी "राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना" संचालित है, जिसके अंतर्गत सभी जिलों को ‘‘कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस’’ (सीबीबीएफएस) प्रदान किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत दोनों आंखों में मोतियाबिंद से दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर ऑपरेशन द्वारा उन्हें दृष्टिहीनता से मुक्त किया जाता है।
अब तक राज्य के 11 जिलों — कबीरधाम, रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़, रायगढ़, कोरबा एवं बस्तर — को दृष्टिहीनता मुक्त घोषित किए जाने हेतु दावा भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। वहीं कांकेर एवं बेमेतरा जिलों के दावों का सत्यापन कार्य प्रगति पर है, जिसके उपरांत प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा।
दृष्टिहीनता के एक अन्य प्रमुख कारण "ग्लॉकोमा" की भी पहचान और उपचार हेतु विभाग सजग है। यह आंख की एक जटिल बीमारी है, जिसकी प्रारंभिक अवस्था में रोगी को जानकारी नहीं होती और जब पता चलता है, तब तक दृष्टि का ह्रास हो चुका होता है। इसकी गई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती। इसकी पहचान केवल नियमित नेत्र परीक्षण से ही संभव है। अतः 40 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक 6 माह में नेत्र परीक्षण कराने की सलाह दी जाती है। राज्य के सभी विकासखंड केन्द्रों में इसकी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
कॉर्नियल दृष्टिहीनता की रोकथाम के लिए "कॉर्नियल दृष्टिहीनता मुक्त राज्य योजना" भी संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत सभी जिलों में कॉर्नियल दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर, नेत्र प्रत्यारोपण केन्द्रों से उनका सत्यापन कराते हुए नेत्र बैंक में पंजीयन कराया गया है। नेत्रदान प्राप्त होते ही प्राथमिकता के आधार पर इनका प्रत्यारोपण किया जाता है। जनजागरूकता के माध्यम से नेत्रदान को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 263 और अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 88 नेत्रदान संपन्न हुए हैं।
अन्य सामान्य नेत्र रोगों के उपचार की सुविधा राज्य के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। सभी जिला चिकित्सालयों में निर्धारित दिवसों पर स्पेशल क्लीनिक आयोजित किए जाते हैं, जिनके अंतर्गत ग्लॉकोमा, रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी सहित अन्य नेत्र रोगों का उपचार किया जाता है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक ऐसे 81,000 से अधिक तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 25,000 से अधिक रोगियों का उपचार किया गया है।
गुणवत्तापूर्ण नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित स्क्रीनिंग शिविर, आधुनिक उपकरणों से जांच तथा तत्काल सर्जरी की सुविधा के माध्यम से प्रदेशवासी निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता को बेहतर, प्रभावी और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
कोल घोटाले में बड़ी कार्रवाई: फरार आरोपी देवेंद्र डडसेना गिरफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। EOW-ACB (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा व एंटी करप्शन ब्यूरो) ने लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी देवेंद्र डडसेना को गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ के लिए उसे रिमांड पर लिया गया है और घोटाले की परतें तेजी से खुल रही हैं।
कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल पर गंभीर आरोप
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि देवेंद्र डडसेना ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के साथ मिलकर करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की थी। बताया जा रहा है कि यह रकम कथित रूप से राजनीतिक गतिविधियों में खर्च की गई थी।
पूछताछ में हो सकते हैं और नाम उजागर
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान और भी बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईओडब्ल्यू की टीम पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कर रही है।
पूर्व मंत्री कवासी लखमा को झटका, उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका की खारिज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। लखमा की ओर से दाखिल की गई जमानत याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया है। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में इस याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए लखमा को जमानत नहीं दी जा सकती है.
बता दें कि शराब घोटाला मामले में ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को इसी साल 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में EOW ने भी केस दर्ज किया है और गिरफ्तारी की। जिसकी जांच के बाद चार्ज शीट पेश की गई। कवासी लखमा ने अपने वकील हर्षवर्धन के माध्यम से अलग-अलग याचिका दायर की है। शुक्रवार को EOW की गिरफ्तारी के केस में बेल पर सुनवाई हुई, जिसमें तर्क दिया गया कि साल 2024 में केस दर्ज किया गया था, जिसमें डेढ़ साल बाद गिरफ्तारी की गई है, जो गलत है। इस दौरान कभी उनका पक्ष ही नहीं लिया गया। लेकिन जब उन्हें गिरफ्तारी का शक हुआ और अग्रिम जमानत अर्जी लगाई, तब अरेस्ट कर लिया गया।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि केवल बयानों के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है। जबकि, उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। पूर्व मंत्री को राजनीतिक षडयंत्र के तहत फंसाने का आरोप लगाया गया है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान EOW की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने बताया कि चार्जशीट के मुताबिक कवासी लखमा के बंगले में हर महीने 2 करोड़ रुपए कमीशन पहुंचता था। शराब घोटाला सिंडीकेट की तरह चलता था, जिसमें अधिकारी से लेकर मंत्री तक कमीशन लेते थे। EOW के अधिकारियों ने लखमा के 27 करीबियों से बयान लेकर इस बात का साक्ष्य इकट्ठा किया है। जिसमें उनकी भूमिका और मिलीभगत के सारे साक्ष्य मौजूद हैं।
पूर्व मंत्री को घोटाले में मिले 64 करोड़ रुपये
शराब घोटाला मामले की जांच में अबतक यह पता है कि पूर्व मंत्री लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से सुनियोजित घोटाले को क्रियान्वित किया गया। इस घोटाले से हासिल की गई रकम को व्यक्तिगत और परिवार के हितों में खर्च किया गया, जिससे उन्हें अत्यधिक और अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। अब तक तीन पूरक अभियोग पत्रों सहित कुल चार अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इसके अलावा मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। घोटाले की जांच जारी है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर गरमाई सियासत, ED के खिलाफ कल प्रदेशभर में प्रदर्शन करेगी कांग्रेस
रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए केंद्र सरकार और ईडी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं पार्टी ने ऐलान किया है कि 19 जुलाई को पूरे प्रदेशभर में ED के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश भेजा गया है। जिसमें सभी जिला मुख्यालयों में पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के सांसद, विधायक, पार्षद, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे।
इस मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास पर जिस तरह से छापा मारा, वह पूरी तरह से बदले की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल के परिवार को डराने और धमकाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता अब इस सरकार से बुरी तरह त्रस्त हो चुकी है। यही वजह है कि कभी केंद्रीय मंत्रियों के काफिले को रोका जा रहा है, तो कभी उपमुख्यमंत्री की गाड़ियों को। सत्ता पक्ष के सांसदों तक को अब जनता का सामना करने में मुश्किल हो रही है। सरकार डराने की कोशिश कर रही है। यह छत्तीसगढ़ की जनता को भी मंजूर नहीं है।
दीपक बैज ने साफ किया कि यह कार्रवाई लोकतंत्र के खिलाफ है और कांग्रेस इसका जोरदार विरोध करेगी। उन्होंने ऐलान किया कि 19 जुलाई, शनिवार को छत्तीसगढ़ के सभी ज़िलों में ईडी के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन किया जाएगा। कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई को सत्ता का दुरुपयोग बताया है और आगामी 19 जुलाई को पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन की तैयारी में जुट गई है।

