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गुरु चुनने में न करें जल्दबाजी, योग्य गुरु न मिले तो शिव को मानें गुरु: पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कहा कि गुरु तत्व और भक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु चुनने में कभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और अगर जीवन में कोई सद्गुरु न मिले, तो भगवान शिव को ही अपना गुरु मान लेना चाहिए।

​जीवन की चार अवस्थाएं और चार मार्गदर्शक,​पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि मनुष्य के जीवन में चार मुख्य मार्गदर्शक होते हैं जो जीवन की अलग-अलग अवस्थाओं को सुधारते हैं। ​बचपन में मां, जो सही संस्कार और मार्गदर्शन देती है। जवानी में पिता, जो जीवन को सही दिशा और आधार देते हैं। अधेड़ावस्था में शिक्षक, जो ज्ञान और समझ का विस्तार करते हैं। बुढ़ापे में सद्गुरु, जो अध्यात्म और परमात्मा का मार्ग दिखाते हैं।

सोच-समझकर बनाएं गुरु, शिव ही हैं जगत गुरु  

​पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को सलाह देते हुए कहा कि गुरु दीक्षा लेने या किसी को गुरु बनाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यहां-वहां भटकने के बजाय 50 बार विचार करके ही गुरु का चयन करें। ​उन्होंने आगे कहा अगर आपको जीवन में कोई योग्य गुरु न मिले, तो बिल्कुल परेशान न हों। रोजाना एक लोटा जल भगवान शिव को अर्पित करें और संकटमोचन महादेव को ही अपना गुरु मान लें। वही आपके जीवन का कल्याण करेंगे। उन्होंने सभी देशवासियों और शिव भक्तों को गुरु पूर्णिमा की बधाई दी और कहा कि इस पावन दिन पर अपने गुरु के चरणों में प्रणाम जरूर करें। यदि परिस्थिति ऐसी हो कि आप अपने गुरु के पास न पहुंच सकें, तो भगवान शिव को जल चढ़ाकर अपने गुरु चरणारविंद का ध्यान करें और शिव भक्ति में लीन रहें।

वाणी में मधुरता लाएं और सनातन संस्कृति का मान बढ़ाएं

प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा कुबेरेश्वर धाम, सीहोर ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर विशेष बातचीत करते हुए देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और जीवन में गुरु तत्व के महत्व को रेखांकित किया। 

वाणी में मधुरता का महत्व 

पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जीवन में सबसे बड़ा संस्कार अपनी वाणी पर नियंत्रण और मिठास लाना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने मुख से हमेशा मीठे और कल्याणकारी शब्द ही बोलने चाहिए। गुरु तत्व व सनातन धर्म, उन्होंने बताया कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शन और प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का पूजन और उनके बताए सत्य व भक्ति के मार्ग पर चलना ही सच्चा उत्सव है। सनातन धर्म की ध्वजा को ऊँचा रखने के लिए संस्कार और भक्ति अनिवार्य हैं।

अपार जनसैलाब और व्यवस्थाएँ, कुबेरेश्वर धाम और कथा आयोजनों में उमड़ने वाली भक्तों की भारी भीड़ पर उन्होंने कहा कि भक्तों की निष्ठा और संख्या की गिनती करना कठिन है। ऑनलाइन और प्रांगण व्यवस्थाओं के माध्यम से यही प्रयास रहता है कि हर श्रद्धालु को सुलभ दर्शन व कथा का लाभ मिले। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर सबसे बड़ा संकल्प यही है कि हम अपने जीवन में गुरु के वचनों को उतारें, कटुता त्यागें और अपने मुख से सदैव मीठे शब्द प्रकट करें।

जिला मुख्यालय के समीपस्थ प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में शुक्रवार से छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का जारी है। गुरुपूर्णिमा के दिन देशभर से डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु कथा श्रवण एवं दर्शन के लिए पहुंचे। आज एक दिवसीय गुरु दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया है। छह दिवसीय महोत्सव में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का दावा किया गया है।प्रशासन और समिति ने यहां पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की है। करीब पांच एकड़ से अधिक भूमि पर भोजन प्रसादी के वितरण करने की व्यवस्था की है।श्रद्धालुओं की सेवा एवं व्यवस्थाओं के लिए देशभर से आए 5,000 से अधिक सेवादार भंडारे, भोजन प्रसादी वितरण, श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और अन्य सेवाओं में पूरे समर्पण के साथ जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं के बीच 10 क्विंटल से अधिक का भोजन प्रसादी वितरित किया जा रहा है।