जल जीवन मिशन पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों और योजना की प्रगति को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी है। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में योजना की मौजूदा स्थिति सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के साथ कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए.
कोर्ट ने अब तक हुए कार्यों और योजना की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2026 के तीसरे सप्ताह में होगी।
केंद्र से मिली बराबर राशि के बाद कितनी हुई प्रगति?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने योजना के कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य के हिस्से के बराबर राशि जारी कर दी है।
इस पर हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि राशि जारी होने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में कितनी प्रगति हुई है। कोर्ट ने इसी आधार पर योजना की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
पुरानी जिलावार रिपोर्ट की जगह मांगी वर्तमान स्थिति
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव की ओर से 20 फरवरी 2025 को दाखिल किए गए शपथपत्र का भी अवलोकन किया। इसमें जल जीवन मिशन की जिलावार स्थिति का विवरण दिया गया था।
हालांकि, कोर्ट ने अब पुरानी जिलावार रिपोर्ट के बजाय योजना की वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करने को कहा है। यानी राज्य सरकार को यह बताना होगा कि पिछली रिपोर्ट के बाद योजना के काम में कितनी प्रगति हुई है और वर्तमान में योजना की स्थिति क्या है।
शपथपत्र में देना होगा काम और प्रगति का पूरा ब्यौरा
हाई कोर्ट ने सक्षम अधिकारी के शपथपत्र में अब तक हुए कार्यों का पूरा विवरण देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही केंद्र से मिली राज्य हिस्से की मिलान राशि के बाद योजना की प्रगति की जानकारी भी शपथपत्र में प्रस्तुत करनी होगी।
कोर्ट के निर्देश के बाद अगली सुनवाई में जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों, अब तक की उपलब्धियों और मौजूदा स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट सामने आने की उम्मीद है।
2024 की स्वत: संज्ञान जनहित याचिका से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2024 में शुरू हुई स्वत: संज्ञान जनहित याचिका से संबंधित है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से भारत के उप सॉलिसिटर जनरल रमनकांत मिश्रा और हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता चेतना शर्मा ने भी अपना पक्ष रखा।
अब मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2026 के तीसरे सप्ताह में होगी, जिसमें राज्य सरकार की ओर से योजना की वर्तमान स्थिति और प्रगति का शपथपत्र कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है।