प्रतिबंधित प्लास्टिक पर हाईकोर्ट की सख्ती, अब निर्माता-परिवहनकर्ता और सप्लायर भी रडार पर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अब केवल बाजार में प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई और जुर्माने का आंकड़ा पर्याप्त नहीं होगा। हाईकोर्ट ने राज्य से पूछा है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक का निर्माण कहां हो रहा है, उसका परिवहन और आपूर्ति कौन कर रहा है और इसके स्रोतों पर क्या कार्रवाई की गई है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों से प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है। निकायों को 1 जुलाई से 7 अक्टूबर 2026 तक की कार्रवाई का ब्योरा निर्धारित प्रपत्र में देना होगा।
इस जानकारी के आधार पर मुख्य सचिव हाईकोर्ट में नया शपथपत्र और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
जनहित याचिका पर हाईकोर्ट कर रहा निगरानी
मामला नितिन सांघवी की जनहित याचिका से जुड़ा है। इस याचिका में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट निगरानी कर रहा है।
13 मई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल जुर्माना लगाने से प्रतिबंधित प्लास्टिक की समस्या का समाधान नहीं होगा। अदालत ने अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा था कि प्रतिबंधित प्लास्टिक का निर्माण कहां हो रहा है और उसका परिवहन व सप्लाई किन माध्यमों से की जा रही है।
इसके बाद 24 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को पहले दाखिल किए गए शपथपत्र के संबंधित हिस्सों पर नया शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए थे। अब इसी के तहत नगरीय निकायों से नए सिरे से कार्रवाई का ब्योरा जुटाया जा रहा है।
तीन हिस्सों में मांगी गई जानकारी
नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने निकायों से जानकारी तीन प्रमुख हिस्सों में मांगी है।
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सफाई और प्लास्टिक कचरा हटाने के लिए चलाए गए अभियान की जानकारी।
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सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ जनजागरूकता अभियानों का विवरण।
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प्रतिबंधित प्लास्टिक के निर्माण, परिवहन, भंडारण और आपूर्ति के खिलाफ की गई कार्रवाई।
इसके अलावा निकायों को दर्ज प्रकरणों की संख्या, जब्त किए गए प्रतिबंधित प्लास्टिक की मात्रा और आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा विवरण भी देना होगा।
रायपुर में 7.26 लाख की पर्यावरण क्षतिपूर्ति
अब तक की कार्रवाई में रायपुर में 7 लाख 26 हजार 500 रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई है। एक निर्माता के खिलाफ आपराधिक शिकायत भी दर्ज की गई थी।
वहीं, बिलासपुर में मई-जून 2026 के दौरान चलाए गए विशेष अभियानों में करीब 386 किलो प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त किया गया। इस कार्रवाई में 93,100 रुपये का जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई।
प्रदेश में 9,216 किलो प्लास्टिक जब्त
मुख्य सचिव की ओर से 7 जुलाई को हाईकोर्ट में दाखिल शपथपत्र के अनुसार, प्रदेश के 194 नगरीय निकायों में 1 जुलाई 2022 से मई 2026 तक कुल 16,497 निरीक्षण किए गए थे।
इस दौरान 9,216 किलो सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त किया गया और 59 लाख 75 हजार 574 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
अब हाईकोर्ट की निगरानी में कार्रवाई का दायरा केवल प्रतिबंधित प्लास्टिक इस्तेमाल करने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। निर्माण, परिवहन, भंडारण और सप्लाई के स्रोतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी राज्य को अदालत के सामने रखनी होगी।