प्रदेश / छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स में कार्यरत पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों ने सेवा शर्तों को लेकर लगाई याचिका, हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों से जुड़े एक सेवा मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। ये वे कर्मी हैं, जिन्हें बाद में छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किया गया था। याचिका में उनकी सेवा शर्तों, समानता के अधिकार और कथित लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

सलवा जुडूम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2005 के आसपास शुरू हुआ एक नक्सल-विरोधी अभियान था, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों और युवाओं ने भाग लिया। इस अभियान से जुड़े कुछ युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) के रूप में नियुक्त किया गया था।

वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने SPOs के सशस्त्र नक्सल-विरोधी अभियानों में इस्तेमाल पर रोक लगाई। बाद में सलवा जुडूम से जुड़े कुछ कर्मियों को छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किया गया। वर्तमान सेवा मामला इन्हीं कर्मियों के सेवा अधिकारों और समानता से जुड़े सवालों पर केंद्रित है।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता फतेश कुमार साहू और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट अधिवक्ता विद्याभूषण सोनी संयुक्त रूप से पैरवी कर रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों, उनके साथ कथित भेदभाव तथा समानता और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किए जाने से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं। पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया है कि उनकी सेवा से जुड़े अधिकारों एवं पात्रताओं पर उचित विचार किया जाए और कथित ऐतिहासिक भेदभाव का न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने मामले के संवैधानिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह विषय केवल सेवा लाभों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता के सिद्धांतों से भी जुड़ा है।

राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी। हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और मामले के अंतिम परिणाम पर निर्णय आगे की सुनवाई के बाद ही होगा।

फतेश कुमार साहू एवं विद्याभूषण सोनी याचिकाकर्ताओं की ओर से संयुक्त रूप से पैरवी कर रहे हैं। फतेश कुमार साहू सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता हैं, जबकि विद्याभूषण सोनी छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अधिवक्ता हैं। दोनों अधिवक्ता मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़े चर्चित ‘माउंटेन मैन’ ट्रेडमार्क विवाद के कानूनी पक्षों रणनीतिक भागीदारी में भी शामिल रहे हैं।