आतंक का अंत, सुशासन का शंखनाद !
रायपुर। विजयादशमी पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हाथों रावण दहन का दृश्य केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं था बल्कि नए छत्तीसगढ़ के संकल्प और शौर्य का प्रतीक प्रतीत हो रहा था। हाथों में धनुष-बाण थामे मुख्यमंत्री की छवि मानो यह संदेश दे रही थी कि अन्याय, आतंक और भय के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष ही सच्चे सुशासन का मार्ग है। और इसी राह पर हम चल रहे है।
असल में यह वही छत्तीसगढ़ है, जहां दशकों तक नक्सलवाद ने विकास की राह रोकने, जनजीवन में भय पैदा करने और आदिवासी अंचलों को मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश की। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा बलों के साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इस चुनौती का मजबूती से मुकाबला किया।
आज नक्सलवाद की समाप्ति के साथ बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई उम्मीदें आकार ले रही हैं। उनका अब लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं रहा बल्कि उस भय से मुक्त समाज का निर्माण लक्ष्य है जहां आदिवासी युवाओं के हाथों में बंदूक नहीं, कलम हो, गांवों में आतंक नहीं, विकास की रोशनी हो और हर परिवार के पास बेहतर भविष्य का अवसर हो। रावण दहन की यह तस्वीर इसी परिवर्तन का प्रतीक है।
बुराई पर अच्छाई, आतंक पर साहस और भय पर विश्वास की विजय हो। मुख्यमंत्री साय अपने छत्तीसगढ़ के लिए संकल्प लेते हुए कहते है कि हमारा यह राज्य शांति और समृद्धि की नई पहचान बने, सुशासन जन-जन तक पहुंचे और राष्ट्रवाद की भावना के साथ प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छुए।