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आषाढ़ माह शुरू, जानें किस दिन रखा जाएगा योगिनी एकादशी व्रत

Yogini Ekadashi 2026— वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने की शुरुआत 30 जून से होने जा रही है, जो 29 जुलाई तक चलेगा। सनातन परंपरा में इस पूरे महीने का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवधि में भगवान विष्णु की आराधना के लिए दो सबसे बड़े व्रत योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी मनाए जाएंगे। देवशयनी एकादशी के साथ ही देश भर में चतुर्मास प्रारंभ हो जाएगा, जिसके बाद अगले चार महीनों के लिए सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा। स्थानीय ज्योतिषियों ने तिथियों के गणित को स्पष्ट करते हुए व्रत और पारण का समय जारी कर दिया है।

तिथियों का गणित: 10 जुलाई को रखा जाएगा योगिनी एकादशी व्रत

पंचांग गणना के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। उदया तिथि के नियमों के तहत योगिनी एकादशी का कठिन व्रत 10 जुलाई को ही रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस बार योगिनी एकादशी पर धृति योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह 07 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही शिववास योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे तंत्र और साधना के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

आचार्य और ज्योतिषियों का क्या है कहना

“एकादशी तिथि पर भगवान जनार्दन की सेवा और व्रत करने से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। 10 जुलाई को सूर्योदय के बाद एकादशी तिथि की व्याप्ति होने से गृहस्थ और संन्यासी दोनों ही इसी दिन व्रत रखेंगे। व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब द्वादशी तिथि के भीतर तय समय पर पारण संपन्न किया जाए। इस बार पारण का समय दोपहर के बाद बन रहा है।”
— मुख्य पंचांग कर्ता एवं ज्योतिषाचार्य, वाराणसी

व्रतियों के लिए जरूरी गाइडलाइन: पारण के समय का रखें ध्यान

इस व्रत को करने वाले नागरिकों को नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। 10 जुलाई को पूरे दिन निराहार या फलाहार व्रत रखने के बाद, अगले दिन यानी 11 जुलाई को व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) किया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 11 जुलाई को पारण का शुभ समय दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 36 मिनट के बीच रहेगा। इस समय सीमा के भीतर ही व्रतियों को अपना उपवास खोलना होगा। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी, जिसके बाद विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सामूहिक आयोजनों पर रोक लग जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने भी आषाढ़ मास के प्रमुख स्नानों को देखते हुए गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।