रायपुर। छत्तीसगढ़ में खनिज कारोबार को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा डिजिटल बदलाव किया है। ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल लागू होने के बाद अब खदान संचालकों को रॉयल्टी पर्ची के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ई-रॉयल्टी और ई-ट्रांजिट पास की सुविधा 24 घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इससे न केवल समय और लागत बचेगी, बल्कि सिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगेगा।
नई व्यवस्था के तहत खदानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। अधिकारियों का दावा है कि इससे अवैध उत्खनन, ओवरलोडिंग और बिना परमिट खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। पहले जहां मैनुअल प्रक्रिया के कारण देरी और अनियमितताओं की शिकायतें आती थीं, वहीं अब हर ट्रांजैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे कभी भी जांचा जा सकेगा।
डीएमएफ फंड पर डिजिटल निगरानी
जिला खनिज संस्थान न्यास फंड, जिसमें हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं, उसे लेकर भी सरकार ने सख्ती बढ़ाई है। पहले इस फंड के उपयोग में पारदर्शिता की कमी और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। अब ‘डीएमएफ 2.0’ पोर्टल के जरिए सभी प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृतियां ऑनलाइन होंगी। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि पैसा किस योजना में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया।
रेत खदानों में एक समान नीति
रेत खदानों को लेकर राज्य में लंबे समय से अलग-अलग नियमों के कारण उपलब्धता और कीमतों में असंतुलन था। अब ‘वन स्टेट-वन पॉलिसी’ लागू कर दी गई है। खदानों का आबंटन ई-टेंडरिंग से किया जा रहा है और अब तक करीब 200 नई खदानों की नीलामी हो चुकी है। इससे रेत की सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद है।
बस्तर में आदिवासियों को सीधा फायदा
बस्तर संभाग में टिन संग्रह करने वाले आदिवासी परिवारों के लिए सरकार ने खरीदी दर 640 रुपए से बढ़ाकर 2800-2900 रुपए प्रति किलो कर दी है। साथ ही नकद भुगतान की जगह अब आधार आधारित सिस्टम से सीधे बैंक खाते में राशि दी जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और आदिवासियों की आय में सीधा इजाफा होगा।
खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर खनिज विभाग में डिजिटल मानिटरिंग और आनलाइन सिस्टम लागू किया गया है। इससे पूरे सेक्टर में नियंत्रण मजबूत हुआ है। जमीनी स्तर पर अवैध खनन और स्थानीय स्तर की अनियमितताओं में कमी आई हैं।
रायपुर/पहलगाम। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल सोमवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में प्राक्कलन समिति (Estimate Committee) की एक महत्वपूर्ण अध्ययन यात्रा में शामिल हुए।
"एमएसएमई और भारी उद्योग क्षेत्र के संवर्धन में बैंकों की भूमिका" विषय पर आयोजित इस अनौपचारिक चर्चा में वित्त मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, एसबीआई, जम्मू एवं कश्मीर बैंक और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इस दौरान श्री अग्रवाल ने प्रदेश के आर्थिक विकास, बैंकिंग सेवाओं की सुस्ती और युवाओं के रोजगार को लेकर केंद्र व राज्य प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी। बैठक के दौरान सांसद बृजमोहन ने धारा 370 हटने के बाद की प्रगति का विश्लेषण करते हुए कई प्रश्न उठाए।
बैंकिंग डिस्पर्समेंट में गिरावट पर चिंता
सांसद श्री अग्रवाल ने सवाल उठाया कि, वर्ष 2023-24 की तुलना में वर्ष 2025-26 में ऋण वितरण (Loan Disbursement) में कमी क्यों आई है? उन्होंने बैंकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुद्रा और स्वनिधि जैसी योजनाओं में कागजी रजिस्ट्रेशन तो हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर पैसा पहुंचने की गति अत्यंत धीमी है। उन्होंने बैंकों से ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹20 लाख के ऋणों का अलग-अलग विवरण मांगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने लोगों को बड़ा लाभ मिल रहा है।
कौशल विकास और पारंपरिक कारीगरी का संरक्षण
श्री अग्रवाल ने स्थानीय युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास (Skill Development) की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "हमारी पारंपरिक कारीगरी दम तोड़ रही है। बड़े लोग इस क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं और छोटे कारीगर पिछड़ रहे हैं।" उन्होंने विभाग से पूछा कि पारंपरिक कला को जीवित रखने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन सी नई योजनाएं शुरू की गई हैं।
एग्रीकल्चर से आगे: फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर जोर
सांसद ने कहा कि केवल खेती से आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी। जम्मू-कश्मीर में फलों और सब्जियों की प्रचुरता है, लेकिन प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी है। उन्होंने एसबीआई, जेके बैंक और उद्योग विभाग से पूछा कि वे राज्य की विशिष्ट संपदा को प्रोसेस कर वैल्यू एडिशन करने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं।
धारा 370 के बाद नई पहचान और रोजगार
बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "धारा 370 खत्म होने और आतंकवाद पर लगाम लगने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती यहां के लोगों को देश की मुख्यधारा के साथ एकात्म करना है।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ऐसी योजनाएं बनाएं जिससे युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उन्होंने हिमाचल की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर में बड़े हाइड्रो पावर प्लांट लगाने और बड़े उद्योगों की संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया।
विश्वकर्मा योजना और 'न्यू जम्मू-कश्मीर' का विजन
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 13,000 रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद कम वितरण पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने समिति के चेयरमैन (जो स्वयं कश्मीर से हैं) के समक्ष प्रस्ताव रखा कि एमएसएमई के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए एक विशेष रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक और विभाग मिलकर जम्मू-कश्मीर के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाएं। जब तक हम युवाओं को स्किल और रोजगार से नहीं जोड़ेंगे, तब तक विकास की परिकल्पना अधूरी है।"
भोपाल। राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट में रनवे पर दौड़ रही फ्लाइट में मेडिकल इमरजेंसी हो गई। एक शख्स के बीमार होने की वजह से इसे अचानक रोक दिया गया। जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
दरअसल, सुबह 8:55 पर एयर इंडिया की फ्लाइट (AI-1886) दिल्ली जा रही थी। फ्लाइट रनवे पर थी और उड़ान भरने के लिए दौड़ रही थी। तभी इसमें बैठे एक पैसेंजर की तबीयत खराब खो गई और उन्होंने विमान रोकने के लिए कहा।
मेडिकल इमरजेंसी को देखते हुए टेक-ऑफ रोककर विमान वापस स्टैंड पर लाया गया। मरीज को इलाज के लिए उतार कर फ्लाइट दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।
यह उपलब्धि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।
रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। श्री शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई - के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।
प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।
रायपुर। भारतमाला घोटाले को लेकर सोमवार सुबह ईडी की टीम ने धमतरी के कुरुद में भूपेंद्र चंद्राकर के यहां दबिश दी है। भूपेंद्र पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई हैं। तीन गाड़ियों में दर्जनभर से ज्यादा अधिकारी चंद्राकर के घर पहुंचकर जांच कर रहे हैं। घर के बाहर सुरक्षा लगाई गई है।
किसी भी बाहर या घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है ईडी और ईओडब्ल्यू को मिली शिकायत के अनुसार भूपेंद्र चंद्राकर पर सिर्फ अभनपुर ही नहीं बल्कि अपने करीबियों को अलग-अलग तहसीलों में भारतमाला परियोजना में करोड़ों रुपए मुआवजा दिलवाने का आरोप है। इन आरोपों की शिकायत दस्तावेजों के साथ की गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार चंद्राकर ने अभनपुर के कायाबांधा में करोडों रुपए मुआवाजा पाया है। इसके अलावा दुर्ग तहसील, पाटन तहसील, राजनांदगांव के देवादा तहसील और मगरलोड तहसील में मुआवजा घोटाला में उनके करीबियों को करोड़ों रुपए मिले हैं।
बिलासपुर। सांसद भोजराज नाग को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कांकेर से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग पर ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए तत्कालीन उम्मीदवार बीरेश ठाकुर ने निर्वाचन रद्द करने याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मशीनों की दोबारा जांच के लिए कोई निर्देश तब तक जारी नहीं किया जा सकता, जब तक मौखिक या डॉक्यूमेंट के ज़रिए गड़बड़ी के बारे में कोई सबूत रिकॉर्ड पर न रखा गया हो. याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता को डॉक्यूमेंट्री सबूत रिकॉर्ड करने के बाद नई एप्लीकेशन फाइल करने की छूट दी गई है.
हाईकोर्ट में यह एप्लीकेशन कांकर से सांसद पद के उम्मीदवार बीरेश ठाकुर ने डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, रिटर्निंग ऑफिसर को 26 अप्रैल 2024 को कांकेर पार्लियामेंट्री सीट के लिए हुए इलेक्शन में इस्तेमाल हुई ईवीएम (बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट, वीवीपेट यूनिट) की चेकिग और वेरिफिकेशन करने की इजाज़त देने के लिए एक ऑर्डर जारी करने के लिए फाइल की है.
इस इलेक्शन पिटीशन में पिटीशनर ने आरोप लगाया है कि इलेक्शन प्रोसेस रिटîनग ऑफिसर ने गलत इरादे से किया था, और इसमें कई तरह की गड़बड़ियां और गलत काम किए, जिससे इलेक्शन के नतीजे पर काफी असर पड़ा.
पिटीशनर ने आरोप लगाया है कि दूसरी रैंडमाइजेशन रिपोर्ट में मशीन नंबर वीवीपेट यूनिट और अलग-अलग असेंबली सीटों गुंडरदेही नंबर 61, सिहावा नंबर 56, संजरीबालोड नंबर 59, डोंडी लोहारा (एसटी ) नंबर 60, और केशकाल नंबर 82 के पोलिग स्टेशनों के फॉर्म 17सी में मशीन नंबर में कुछ अंतर हैं.
गिनती में गड़बड़ी के सबूत लाएं बताई गई कानूनी स्थिति और इलेक्शन पिटीशन में दी गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि इस समय ईवीएम मशीनों की दोबारा जांच के लिए कोई निर्देश तब तक जारी नहीं किया जा सकता जब तक पार्टियों द्बारा मौखिक या डॉक्यूमेंट्री सबूत के ज़रिए गड़बड़ी के बारे में कोई सबूत पहली नज़र में रिकॉर्ड पर न रखा गया हो.
याचिका को खारिज कर पिटीशनर को कांकेर संसदीय क्षेत्र नंबर 11 के इन विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती में गड़बड़ी के बारे में कुछ मौखिक या डॉक्यूमेंट्री सबूत रिकॉर्ड करने के बाद नई एप्लीकेशन फाइल करने की छूट दी है.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बस्तर को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में गर्मी का कहर देखने को मिल रहा है. लगातार दूसरे दिन रायपुर में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा. मौसम विभाग ने सोमवार को राजधानी में और ज्यादा गर्मी पड़ने का पूर्वानुमान जताया है. लू चलने की चेतावनी जारी करते हुए मौसम विभाग ने कहा है कि अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है.
जानकारी के अनुसार 24 घंटों में छत्तीसगढ़ में अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन नहीं आया. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में दर्ज किया गया. रविवार को भीषण गर्मी के चलते लोग घरों में रहे. जरूरी काम से निकलने वाले सिर पर कपड़ा बाँधे या छतरी लिए नजर आए.
रायपुर में आज 45 डिग्री वाली गर्मी!
मौसम विभाग ने रायपुर शहर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान जारी किया है. 27 अप्रैल को रायपुर में ग्रीष्म लहर चलने की संभावना है. अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.
दक्षिणी क्षेत्रों में राहत
मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने बताया कि प्रदेश के दक्षिणी भाग में बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाओं का आगमन प्रारंभ हो चुका है. पूर्वी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. वहीं उत्तर पूर्व झारखंड में दूसरा ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण फैला है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के मध्य भाग में तीसरा ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण फैला हुआ है. इसके चलते प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने की संभावना है. एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ वज्रपात होने तथा तेज हवा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे चलने की संभावना है. एक-दो हिस्सों में ग्रीष्म लहर चलने की चेतावनी दी गई है.
रायपुर। जिले में गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आदेश जारी करते हुए पूरे जिले को 15 जुलाई तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। इस दौरान बिना अनुमति किसी भी प्रकार के नलकूप (बोर) खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। जारी आदेश के अनुसार, अब जिले में कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के नया बोर खनन नहीं कर सकेगी। केवल पेयजल उपयोग के लिए ही अनुमति दी जाएगी, जबकि अन्य सभी उपयोगों के लिए बोर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि शासकीय, अर्द्धशासकीय संस्थाओं और नगरीय निकायों को अपने क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप खनन की अनुमति लेने से छूट दी गई है, ताकि आम जनता को जल संकट का सामना न करना पड़े। प्रशासन ने नलकूप खनन की अनुमति प्रक्रिया के लिए अलग-अलग प्राधिकृत अधिकारी भी नियुक्त किए हैं। नगर निगम क्षेत्र में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है, जबकि रायपुर, आरंग, अभनपुर और तिल्दा क्षेत्रों में संबंधित एसडीएम अनुमति जारी करेंगे.
ये यांत्रिकी विभाग और नगरीय निकाय से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद ही अनुमति देंगे। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि नलकूप खनन या उसकी मरम्मत केवल पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से ही कराई जाए। बिना पंजीकरण वाली एजेंसियों द्वारा कार्य किए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण को प्राथमिकता दें और अनावश्यक पानी के उपयोग से बचें। साथ ही सभी को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक रहने को कहा गया है। इस आदेश का उद्देश्य गर्मी के दौरान बढ़ते जल संकट को नियंत्रित करना और उपलब्ध जल स्रोतों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को पेयजल की कमी का सामना न करना पड़े।
यांत्रिकी विभाग और नगरीय निकाय से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद ही अनुमति देंगे। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि नलकूप खनन या उसकी मरम्मत केवल पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से ही कराई जाए। बिना पंजीकरण वाली एजेंसियों द्वारा कार्य किए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण को प्राथमिकता दें और अनावश्यक पानी के उपयोग से बचें। साथ ही सभी को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक रहने को कहा गया है। इस आदेश का उद्देश्य गर्मी के दौरान बढ़ते जल संकट को नियंत्रित करना और उपलब्ध जल स्रोतों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को पेयजल की कमी का सामना न करना पड़े।
रायपुर। भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन कारोबारी गोपाल गांधी समेत उनसे जुड़े लोगों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर ईडी ने आज छापा मारा है.
जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय के 13 अफसरों की बड़ी टीम छापामार कार्रवाई को अंजाम दे रही है. इस कड़ी में गोपाल गांधी के अभनपुर स्थित घर और उसके ऑफिस में छापा मारा गया है. सुबह पौ फटने से पहले पहुंची ईडी की टीम अभी तक दस्तावेजों के साथ-साथ तमाम डिजिटल साक्ष्यों की तलाश कर रही है.
जानिए क्या है मामला
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में हुए जमीन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं. रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली का आरोप है.
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी पत्रकार मोहन निषाद को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है. जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया.
मामले के अनुसार, बालोद जिले के डौंडीलोहारा थाने में दर्ज अपराध में मोहन निषाद पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2), 351(2), 3(5) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता मनीराम तारम, जो कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में सहायक अभियंता हैं.
उन्होंने आरोप लगाया था कि 17 अक्टूबर 2025 को एक व्यक्ति खुद को पत्रकार बताते हुए उनके पास आया और 11 वर्षीय बच्चे की करंट से मौत की खबर प्रकाशित करने की धमकी देकर 2 लाख रुपए की मांग की. शिकायत में यह भी आरोप था कि रकम नहीं देने पर आरोपी ने जातिसूचक गालियां दीं, धमकाया और सोशल मीडिया पर झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब की. पुलिस ने इस मामले में खिलावन चंद्राकर और मोहन निषाद के खिलाफ केस दर्ज किया था.
घटना के 4 महीने बाद FIR
अपील में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मोहन निषाद एक न्यूज पोर्टल के पत्रकार हैं और उन्होंने केवल बच्चे की मौत से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी. इसी कारण रंजिशवश उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया. साथ ही, घटना के करीब चार महीने बाद एफआईआर दर्ज होना भी संदेह पैदा करता है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी 18 मार्च 2026 से जेल में है और ट्रायल में समय लग सकता है. ऐसे में न्यायालय ने जमानत देना उचित समझा. इस फैसले से आरोपी को अंतरिम राहत मिली है, जबकि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी.
रायपुर। यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के आज के प्रसारण में छत्तीसगढ़ के काले हिरण के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख करते हुए सराहना की। इसने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को सुदृढ़ किया है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों का मनोबल भी बढ़ाया है। इस उल्लेख से राज्य की पर्यावरणीय पहल राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने आई हैं और बारनवापारा अभयारण्य को नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में 'मन की बात' कार्यक्रम की 133वी कड़ी के श्रवण के बाद यह बात कही।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित, लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में उभरा है।
एक समय ऐसा था जब यह अभयारण्य अपने प्रमुख वन्यजीव - काले हिरण - से लगभग खाली हो चुका था। लेकिन अब यही क्षेत्र करीब 200 काले हिरणों (ब्लैकबक) का सुरक्षित आवास बन गया है। यह उपलब्धि योजनाबद्ध प्रयास, वैज्ञानिक प्रबंधन और निरंतर निगरानी का परिणाम है।
बारनवापारा के खुले घास के मैदानों में काले हिरणों (Antilope cervicapra) की सक्रिय मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि लंबे समय बाद भी किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक परिवेश में पुनर्स्थापित किया जा सकता है। जो क्षेत्र कभी सूना हो गया था, वह अब पुनर्जीवन की एक सशक्त कहानी प्रस्तुत कर रहा है।
छत्तीसगढ़ में इस उपलब्धि तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही है। 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण काले हिरण इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो गए थे और करीब पांच दशकों तक यहां स्थानीय रूप से विलुप्त रहे।
अप्रैल 2018 में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया। इसके बाद एक सुविचारित योजना के तहत काले हिरणों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंची और इस सफलता को रविवार को प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उल्लेखित किया गया।
संरक्षण के शुरुआती चरण में कई चुनौतियां सामने आईं। वन अधिकारियों के अनुसार, निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रबंधन प्रणाली में सुधार किए गए। बाड़ों में मजबूत सतह के लिए रेत की परत बिछाई गई, जलभराव रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था विकसित की गई, अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया गया और एक समर्पित पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई।
इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काले हिरणों की आबादी पहले स्थिर हुई और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बेहतर पोषण, नियमित निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण आज इनकी संख्या लगभग 200 तक पहुंच चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि ये अपने नए परिवेश में सफलतापूर्वक अनुकूलित हो चुके हैं और भविष्य में इन्हें खुले जंगल में छोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।
काले हिरण के बारे में:
काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कोरबा जिले के डिस्टि्रक्ट मिनरल फंड से जुड़े फंड के इस्तेमाल में भ्रष्टाचार के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की तुरंत जमानत दिए जाने पेश आवेदन को खारिज कर दिया, कोर्ट ने कहा कि जुर्म की गंभीरता, आवेदक की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में आवेदक की स्थिति पर गौर किया गया, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. आर्थिक अपराध जानबूझकर और सोच-समझकर किया जाता है, जिसमें निजी फ़ायदे को ध्यान में रखा जाता है, चाहे समुदाय पर इसका कोई भी नतीजा हो, जिससे समुदाय का भरोसा और आस्था खत्म हो जाती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित को नुकसान होता है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई.
ईओडब्ल्यू एवं एसीबी ने कोरबा जिले में डीएमएफ फंड घोटाला मामले में तत्कालीन इंडस्ट्रीयल डिपोर्टमेंट के एडिशनल सिक्रेटरी अनिल टुटेजा को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल किया है. जेल में बंद अधिकारी ने हाईकोर्ट में स्थाई जमानत दिए जाने आवेदन दिया था. आवेदन में सह आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिए जाने, मामले की सुनवाई में विलंब के आधार पर जमानत की मांग की गई थी. आवेदन पर जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की कोर्ट में सुनवाई हुई.
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश में कहा करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध करने में आवेदक की संलिप्तता साबित करते हैं. केस डायरी को और देखने पर, यह साफ़ पता चलता है कि सतपाल सिह छाबड़ा को उन फर्मों से गैर-कानूनी कमीशन के तौर पर 16 करोड़ रुपये मिले हैं. इसमें से आवेदक को पेमेंट किया गया है, इसलिए पहली नज़र में, आवेदक के इस अपराध में शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता. आवेदक ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके प्राइवेट कंपनियों द्बारा पब्लिक फंड का गलत इस्तेमाल किया है, जिससे पब्लिक के हित को बहुत नुकसान हुआ है. सतपाल सिह छाबड़ा के 18.02.2025 को पुलिस के सामने दिए गए बयान में लगाए गए आरोपों के बारे में सच्चाई सामने लाने के लिए, आवेदक की कस्टडी ज़रूरी है. आवेदक का यह भी कहना है कि दूसरे सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई है, इसलिए, मौजूदा आवेदक को पैरिटी बेसिस पर ज़मानत दी जा सकती है. इस पर कहा कि केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी दीपेश टांक 8 महीने से एक साल से ज़्यादा जेल में रहा, इसी तरह रानू साहू और सौम्या चौरसिया 2 साल से ज़्यादा जेल में रहे, जबकि आवेदक 23.02.2026 से यानी सिर्फ़ दो महीने जेल में रहा, इसलिए आवेदक इन आरोपियों के साथ पैरिटी का दावा नहीं कर सकता है. आवेदक का यह भी कहना है कि ट्रायल में ज़्यादा समय लग सकता है क्योंकि प्रॉसिक्यूशन को कई गवाहों से पूछताछ करनी है और चार्जशीट के साथ बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स फाइल किए गए हैं. इस पाइंट पर कोर्ट ने कहा ट्रायल में देरी हमेशा आरोपी को बेल पर रिहा होने का कोई हक नहीं देती. कोर्ट को जुर्म की गंभीरता, एप्लीकेंट की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में एप्लीकेंट की स्थिति पर गौर करना होगा, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और एप्लीकेंट ने सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. एप्लीकेंट पहले भी एक असरदार पद पर था, इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि अगर उसे इस कोर्ट ने बेल पर रिहा किया तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है, गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच में रुकावट डाल सकता है. इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की जमानत आवेदन को खारिज किया है.
रायपुर। केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा श्रीनगर में आयोजित खेल चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने 'गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स' (Good Governance in Sports) पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों पर बेस्ट प्रेक्टिसेस पर आधारित वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिया। श्री साव ने विभिन्न राज्यों से आए खेल मंत्रियों एवं अधिकारियों के समक्ष छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए लागू बेस्ट गवर्नेंस प्रेक्टिसेस (Best Governance Practices) को विस्तार से साझा किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से सुझाव भी प्राप्त किए। चिंतन शिविर में शामिल अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की भावी योजनाओं की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी मॉडल बताया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर के दौरान दो दिनों तक विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद कर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए छत्तीसगढ़ में बेहतर खेल अवसंरचना, प्रतिभा संवर्धन एवं खिलाड़ियों को अधिक अवसर प्रदान करने पर जोर दिया।
श्री साव ने कहा कि प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही भारत वैश्विक खेल शक्ति बनेगा। मजबूत खेल व्यवस्था और प्रोत्साहन से ही देश को ओलंपिक खेलों में बड़ी सफलता मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह चिंतन शिविर छत्तीसगढ़ और पूरे देश में खेलों के समग्र विकास, सुदृढ़ खेल व्यवस्था के निर्माण तथा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
चिंतन शिविर के दूसरे दिन भी आज अलग-अलग सत्रों में खेल प्रशासन, नीतिगत सुधार एवं युवा मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान राज्यों में खेल सामग्रियों के निर्माण, सरकारी योजनाओं तथा स्पोर्ट्स स्टार्ट-अप्स (Sports Startups) को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इसमें यह बात प्रमुखता से आई कि भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरणों का निर्माण किया जाए, जिससे देश का खेल उद्योग आत्मनिर्भर बन सके।
आज एक महत्वपूर्ण सत्र में सलेक्शन पॉलिसी और एज फ्रॉड (Selection Policy & Age Fraud) पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं स्पष्ट मापदंड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही उम्र में गड़बड़ी (Age Fraud) की रोकथाम के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया एवं तकनीकी उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि खेलों में ईमानदारी एवं विश्वसनीयता बनी रहे।
आज का अंतिम सत्र 'माई भारत' (MY Bharat) की योजनाओं और इसकी कार्ययोजना (Action Plan) पर केंद्रित रहा। इसमें खेलों के साथ-साथ युवा मामलों को भी समान महत्व देते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक इनका लाभ पहुंच सके।
चिंतन शिविर के समापन के दौरान केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने घोषणा की कि जल्दी ही केवल युवा मामलों पर केंद्रित एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय चिंतन शिविर में देश के दिग्गज खिलाड़ी ओलंपियन अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग सहित खेल प्रशासक और नीति निर्माता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
रायपुर। दुर्ग जिले के ग्राम भरर (जामगांव-आर) में आयोजित तहसील स्तरीय विशाल कर्मा महोत्सव एवं सामूहिक आदर्श विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सहभागिता करते हुए 13 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखमय दांपत्य जीवन एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने साहू समाज भवन पाटन में शेड निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही ग्राम भरर पंचायत में शौचालय एवं शेड निर्माण तथा ग्राम पंचायत में सीसी रोड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा भी की, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने साहू समाज को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और गौरवशाली समाज बताते हुए माता कर्मा के योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि माता कर्मा की भक्ति और सेवा भावना समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही है। इस दौरान उन्होंने स्वर्गीय ताराचंद साहू को भी नमन किया और उनके साथ कार्य करने के अपने अनुभव साझा किए।
राज्य सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले 28 महीनों में राज्य में सुशासन स्थापित करने के साथ-साथ “मोदी की गारंटी” को पूरा करने की दिशा में ठोस कार्य किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि राज्य में 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। किसानों को बकाया बोनस राशि का भुगतान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी तथा “महतारी वंदन योजना” के माध्यम से महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और सिलाई-कढ़ाई, किराना दुकान सहित अन्य छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “रामलला दर्शन योजना” के अंतर्गत दो वर्षों में लगभग 42 हजार लोगों को लाभ मिला है । उन्होंने बस्तर क्षेत्र में नक्सल समस्या के उन्मूलन और विकास कार्यों में आई तेजी को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
ऊर्जा क्षेत्र की पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 की शुरुआत मार्च 2026 में की गई है, जो उन उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जिनका बिजली बिल लंबे समय से बकाया है। “मोर बिजली ऐप” के माध्यम से उपभोक्ता मोबाइल से ऑनलाइन पंजीकरण कर अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं। इस योजना के तहत बकाया राशि पर लगने वाले ब्याज या सरचार्ज में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि गांव-गांव में अटल डिजिटल केंद्र खोलकर डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाया जा रहा है, जबकि प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में सुशासन को सुदृढ़ करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए गए हैं, जिससे विकास कार्यों में तेजी आई है।
इस अवसर पर सांसद विजय बघेल, कमिश्नर सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर अभिजीत सिंह, अध्यक्ष जिला साहू संघ नंदलाल साहू, अध्यक्ष तेलघानी बोर्ड जितेन्द्र साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में छत्तीसगढ़ में काले हिरण के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का लगातार जिक्र होना न केवल राज्य की पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि प्रदेशवासियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में विशाल जनसमूह के साथ “मन की बात” की 133वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “मन की बात” आज देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचार, जनभागीदारी और जमीनी स्तर के उत्कृष्ट प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देशवासियों से संवाद करते हुए न केवल प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस संवाद के माध्यम से लोगों में सहभागिता की भावना मजबूत होती है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बांस को पेड़ की श्रेणी से अलग कर विशेष श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं की आय में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा की आवश्यकता और संभावनाओं पर दिए गए विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने एक अनूठी पहल करते हुए उपस्थित जनसमूह के साथ घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को साझा कर साथ में भोजन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास, अपनापन और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, अजय जामवाल, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। विविधताओं से भरे भारत देश की सबसे बड़ी शक्ति है धर्म, संस्कृति और परंपराओं की बहुलता। ऐसी दशा में जब किसी राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कानूनों में बड़ा बदलाव होता है तो उसका गहरा प्रभाव समाज, संस्कृति और राजनीति के विभिन्न आयामों पर भी पड़ता है। छत्तीसगढ़ में पारित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संरचना और प्रशासनिक व्यवस्था को एक नया रूप दे रहा है।
पिछले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़ी घटनाएं विशेष रूप से चर्चा का विषय रही है। छत्तीसगढ़ सरकार का मानना है कि बहुत से मामलों में धर्मांतरण स्वेच्छा से नहीं बल्कि प्रलोभन, दबाव या धोखाधड़ी के माध्यम से कराया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मौजूदा स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 भी अपर्याप्त महसूस हो रहा है, इसे अधिक प्रभावी और सख्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
राज्य के मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को राज्य के सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए “मील का पत्थर” बताया है। मुख्यमंत्री साय के अनुसार यह कानून समाज के कमजोर वर्गों को संरक्षण देने और सामाजिक सद्भाव कायम रखने के उद्देश्य से लाया गया है। कुछ विशेषताओं को देखते हुए इस बात के लिए आश्वस्त हुआ जा सकता है कि यह अधिनियम अपने होने को सार्थक करेगा।
इस अधिनियम मे सख्ती और पारदर्शिता का गजब संतुलन देखा गया है। धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 कई दृष्टि में अपने पूर्ववर्ती कानून से अधिक व्यापक और कठोर है। इसमे अवैध धर्मांतरण के मामलों में 3 से 10 साल तक की सजा और 1 से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। यदि मामला सामूहिक धर्मांतरण का हो तब यही सजा आजीवन कारावास तक भी बढ़ सकती है और जुर्माना न्यूनतम 25 लाख रुपये तक हो सकता है।
कमजोर वर्गों को विशेष सुरक्षा देने की व्यवस्था इस अधिनियम में है। नाबालिगों, महिलाओं और SC/ST वर्ग के लोगों के धर्मांतरण पर विशेष सख्ती रखी गई है। ऐसे केस में 10 से 20 साल तक की सजा और कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है। धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 मे पारदर्शिता को काफ़ी महत्व दिया गया है। इसमे धर्म परिवर्तन करने वालों को धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन की नोटिस देनी होगी और उसके बाद 21 दिनों के भीतर रिपोर्टिंग करना अनिवार्य होगा।
अधिनियम की इस प्रक्रिया से बहुत हद तक यह सुनिश्चित हो जाता है कि धर्मांतरण पूरी तरह स्वैच्छिक हो और उसमें किसी भी प्रकार का दबाव या प्रलोभन न हो। इस कानून का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि अब धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर ही इस बात को साबित करने की जिम्मेदारी भी होगी कि धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले धर्मांतरण को भी इस कानून के दायरे में रखा गया है। केवल विवाह के उद्देश्य से किए गए धर्म परिवर्तन को भी तब तक अवैध माना जाएगा जब तक कि निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन न किया गया हो।
सीएम की दृष्टि में सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक संतुलन
राज्य के मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को केवल एक कानूनी सुधार के अलावा सामाजिक संतुलन का माध्यम बताया है। उनका मानना है कि समाज के कमजोर वर्गों को लक्षित कर किए जा रहे धर्मांतरण से सामाजिक पारंपरिक व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 उन प्रवृत्तियों पर भी अंकुश लगाने का काम करेगा जो भ्रम, प्रलोभन और दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराते हैं। अधिनियम की पारदर्शी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण स्वेच्छा से ही किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि “पूर्व में लागू कानून अपेक्षाकृत कमजोर था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।“
ऐतिहासिक संदर्भों से ली प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के धर्मांतरण के विरुद्ध चलाए गए जनजागरण अभियान को प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व. दिलीप सिंह जूदेव के अनुसार “धर्मांतरण केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ विषय है। कबीरधाम जिले के विकासखंड पंडरिया के गांव ग्राम पिपरहा की पुनीता बाई धुर्वे
पति का नाम भानु राम धुर्वे और विकासखंड पंडरिया जिला कबीरधाम, ग्राम पंचायत सिंगपुर के भानु सिंह धुर्वे पिता चैतूसिंह धुर्वे ने घर वापसी करके समाज को एक गुप्त मगर सशक्त संदेश दिया है।
धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
यह कानून स्थानीय परंपराओं और आदिवासी संस्कृति की रक्षा करते हुए सांस्कृतिक संरक्षण मे भी सहायक हो सकता है ।दबाव पूर्वक किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाए जाने से सामाजिक तनाव में कमी लाकर सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा मे बढ़ा जा सकता है। स्पष्ट प्रक्रिया और समय सीमा से न्यायिक पारदर्शिता का एक शानदार उदाहरण बन रहा है यह अधिनियम, इससे न्यायिक व्यवस्था मजबूत होगी। संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार तो देता है फिर भी इस अधिनियम की सख्त जरूरत है क्योंकि यह कानून एक संतुलन बनाने का प्रयास है। एक ऐसा संतुलन जिसमे व्यक्ति की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे और समाज को अवैध और अनैतिक गतिविधियों से भी बचाया जा सके। इस कानून की सफलता इस बात पर आधारित होगी कि इसका क्रियान्वयन कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता से किया जाता है।
प्रशासनिक व्यवस्था और क्रियान्वयन
इस अधिनियम मे मामलों की जांच उप-निरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा की जाएगी। विशेष न्यायालयों में ही इसकी सुनवाई होगी और 6 महीने के भीतर निर्णय दे दिया जाएगा। धर्म परिवर्तन की सूचना को सार्वजनिक किया जाएगया ताकि जन निगरानी संभव हो सके।
एक संतुलित भविष्य की ओर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम। यह अधिनियम सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान भी है। छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिया गया यह कदम राज्य को एक सशक्त, संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्धि की दिशा में ले जाने का एक सु-प्रयास है। यह कानून न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है बशर्ते इसका क्रियान्वयन निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और इससे प्राप्त राजस्व का प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता है कि इन संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और नियमों के तहत हो, ताकि प्रदेश को किसी प्रकार की आर्थिक क्षति न हो। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है। समय-समय पर समीक्षा कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
इसी क्रम में संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, इंद्रावती भवन, नया रायपुर के केन्द्रीय खनिज उड़नदस्ता दल और जिला स्तरीय संयुक्त जांच टीम ने संचालक खनिज के निर्देश पर 24 एवं 25 अप्रैल की रात और सुबह आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाया। जिला सक्ती और जांजगीर-चांपा के विभिन्न स्वीकृत रेत खदानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान सक्ती जिले की घुरघट्टी, डोटमा, मरघट्टी, मिरौनी, सकराली, किकिरदा, देवरीमठ और करही खदानों में उत्खनन व परिवहन कार्य बंद पाया गया, जिससे नियमों के पालन की पुष्टि हुई। लेकिन जांजगीर-चांपा जिले में मध्य रात्रि के समय निरीक्षण के दौरान हसदेव नदी के पास हथनेवरा घाट क्षेत्र में अवैध रूप से मशीनों का संचालन करते हुए दो चैन माउंटेन मशीनें पकड़ी गईं। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन्हें मौके पर ही जब्त कर लिया।
इसके अतिरिक्त ग्राम नवापारा में भी दो एक्सकेवेटर मशीनें जब्त की गईं, जिन्हें अग्रिम आदेश तक कोटवार की सुपुर्दगी में दिया गया है। कुल चार मशीनों की जब्ती कर प्रकरण दर्ज किया गया है। इन मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 एवं छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के नियम 71 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि खनिज संसाधनों की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। केन्द्रीय उड़नदस्ता और जिला टास्क फोर्स को राज्यभर में लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले समय में ऐसे अभियान और तेज किए जाएंगे, जिससे अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
इस कार्रवाई में संयुक्त संचालक (खनि प्रशासन) भूपेंद्र चंद्राकर, खनि अधिकारी हीरादास भारद्वाज सहित जिला स्तरीय टीम के अधिकारी शामिल रहे
रायपुर। विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ पशु चिकित्सा अधिकारी (अज-अजजा) संघ द्वारा “पशु चिकित्सकों का मानव स्वास्थ्य एवं पोषण आहार पूर्ति में विशेष योगदान” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पशुधन के महत्व, उनके स्वास्थ्य और प्रकृति के संतुलन में उनकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
पशुधन ही असली समृद्धि का प्रतीक
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा, “हमारे देश में एक समय था जब समृद्धि की गणना घर में मौजूद पशुओं की संख्या से होती थी। जिसके पास जितने अधिक पशु, वह उतना ही धनी माना जाता था। दुर्भाग्यवश, कालांतर में मनुष्य स्वार्थी होता गया और पशुओं की चिंता छोड़ दी। आज केवल 10% किसानों के पास पशु बचे हैं, जिसका मुख्य कारण चारे की चिंता और संवेदनशीलता की कमी है।”
सड़क दुर्घटनाएं और संवेदनशीलता की आवश्यकता
सांसद ने सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पशुओं के प्रति हमारा लगाव खत्म हो गया है, जिससे वे बेज़ुबान सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, “जब उन्हें चारा नहीं मिलता, तो वे कचरे के ढेर से प्लास्टिक खाने को मजबूर होते हैं। हमें और हमारे वेटनरी डॉक्टरों को अधिक संवेदनशील होने की ज़रूरत है। हर जिले और ब्लॉक में पशु एम्बुलेंस की संख्या बढ़ानी होगी ताकि समय पर घायल पशुओं का इलाज हो सके।”
जैविक खेती और व्यक्तिगत अनुभव
अपने व्यक्तिगत जीवन का उदाहरण देते हुए श्री अग्रवाल ने बताया, “मेरे घर में पिछले 80 सालों से भैंस का दूध नहीं आया है। मेरे खेतों में 90 गाएं हैं, जिन्हें दूध के लिए नहीं बल्कि खेती के लिए रखा गया है। आज मेरे घर में जो चावल, गेहूं, सब्जियां और ड्रैगन फ्रूट पैदा होते हैं, वे पूरी तरह गोबर और गौमूत्र पर आधारित ऑर्गेनिक खेती की देन हैं। मेरी 40 वर्षों की सक्रिय राजनीति और ऊर्जा का राज़ यही पशु और प्राकृतिक जीवनशैली है।”
प्रकृति का संतुलन और पशु चिकित्सा का महत्व
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पशु कम होंगे, तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ेगा और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। श्री अग्रवाल ने पशु चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे न केवल पशुओं के इलाज पर ध्यान दें, बल्कि समाज में अवेयरनेस भी लाएं। उन्होंने सरकार की ‘बरसीम घास’ उगाने जैसी योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सांसद ने पशु चिकित्सा संघ को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य की चिंता करना असल में मानव स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करना है। उन्होंने पशुओं के प्रति प्रेम और संवेदना बनाए रखने की अपील की है।