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छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षा फीस बढ़ोतरी वापस लेने की मांग, कांग्रेस ने कहा—छात्रों पर आर्थिक बोझ डाल रही भाजपा सरकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के शुल्क समेत 22 अन्य मदों में लगभग दोगुनी की गई बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को सीधे तौर पर शिक्षा विरोधी करार देते हुए भाजपा सरकार पर गरीब, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा पर चर्चा” का नारा देने वाली भाजपा सरकार अब परीक्षा को ही महंगा बना रही है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता पर यह फैसला सीधा कुठाराघात है। फीस बढ़ोतरी के बाद सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और आरक्षित वर्ग के छात्रों को हो रही है। परीक्षा शुल्क बढ़ने से छात्र मानसिक तनाव में हैं, वहीं अभिभावकों की जेब पर भी सीधा असर पड़ा है। कांग्रेस ने मांग की है कि बोर्ड परीक्षा शुल्क में की गई बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए और छात्रों को राहत दी जाए।
कांग्रेस ने गिनाईं बढ़ी हुई फीस की दरें
कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार यह बताए कि आखिर फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत क्यों पड़ी। दसवीं–बारहवीं की नियमित परीक्षा फीस को 460 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। नामांकन शुल्क 80 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया, जबकि अतिरिक्त विषय की फीस 110 रुपये से 250 रुपये तक पहुंच गई है।
इसी तरह सम्पूर्ण विषय शुल्क 1230 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये किया गया है। एक विषय की फीस 280 से 500 रुपये, दो विषय की फीस 340 से 600 रुपये, परीक्षा केंद्र परिवर्तन शुल्क 240 से 400 रुपये कर दिया गया है। स्वाध्यायी छात्रों के लिए विलंब शुल्क 770 से 1000 रुपये और विशेष विलंब शुल्क 1540 से बढ़ाकर 2000 रुपये तक कर दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब छात्रों पर पड़ रहा है।
‘डबल इंजन’ नहीं, ‘ट्रबल इंजन’ सरकार
धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस डबल इंजन सरकार ने जनता को राहत देने का वादा किया था, वही आज जनता के लिए ‘ट्रबल इंजन’ बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आम लोगों को आर्थिक राहत दी जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार बनते ही शिक्षा की फीस लगभग दोगुनी कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बिल हाफ योजना में 400 यूनिट की छूट खत्म कर दी गई, जमीन रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 प्रतिशत छूट समाप्त कर दी गई और गाइडलाइन दरों में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था, लेकिन अब भाजपा सरकार छात्रों से भी फीस वसूल रही है।
शिक्षा विभाग पर भी दिख रहा आर्थिक दबाव
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। केंद्र से अपेक्षित आर्थिक मदद नहीं मिल रही है और मोदी की गारंटी पूरी करने के लिए राज्य सरकार लगातार कर्ज ले रही है। इसका असर अब शिक्षा विभाग पर भी साफ तौर पर नजर आने लगा है।
मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: दक्षिण बस्तर में 51 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम - मुख्यमंत्री साय
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।
एंटी-नक्सल ऑपरेशन को लेकर शुरू हुई अहम बैठक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में बन रहा ‘मार्च 2026’ के लक्ष्य को हासिल करने का एक्शन प्लान…
रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एंटी-नक्सल ऑपरेशन को लेकर आज रायपुर में होने वाली बैठकों में से पहली बैठक शुरू हो गई है. बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री विजय शर्मा के अलावा गृह विभाग के सचिव और डीजीपी के अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं.
दोपहर 12:45 बजे तक चलने वाली समीक्षा बैठक में नक्सलवाद खात्मे को लेकर मार्च 2026 की तय सीमा से पहले की यह आखिरी बड़ी बैठक है, जिसमें सुरक्षा की स्थिति, इंटेलिजेंस इनपुट्स, ऑपरेशन की गति पर चर्चा के साथ तय समय सीमा में बचे हुए एरिया से नक्सलियों को खत्म करने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा.
दूसरी समीक्षा बैठक दोपहर 2 बजे तक होगी. दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक के बाद 3 बजे 4:15 बजे तक फिर से बैठक होगी. इसके बाद 5 बजे से 6:10 बजे तक ‘छत्तीसगढ़ @ 25 शिफ्टिंग द लेंस’ थीम पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन होगा.
दो एजेंडों पर होगी बात – गृह मंत्री विजय शर्मा
गृह मंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक को लेकर कहा कि यह 31 मार्च 2026 से पहले की अंतिम बड़ी बैठक है. इस बैठक में LWE (लेफ्ट विंग एक्सट्रीम – वामपंथी उग्रवाद) प्रभावित प्रदेशों के डीजीपी और पुलिस अधिकारी शामिल होंगे. बैठक के दो बड़े विषय है, पहला 31 मार्च की डेडलाइन तक देश कैसे पूर्ण रूप से सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त हो और दूसरा एजेंडा बस्तर का रुका हुआ विकास कैसे शुरू करें.
इसके साथ गृहमंत्री विजय शर्मा ने भूपेश बघेल के पंजाब में दिए गए बयान, ‘मोदी न किसान के साथ हैं, न जवान के साथ’ पर कहा कि भूपेश बघेल को पहले राहुल गांधी से पूछना चाहिए कि उन्होंने सिखों को गद्दार कहा है, उस पर उनको क्या कहना चाहिए. पंजाब में जाकर इस तरह की बात करने से पहले उन्हें राहुल गांधी से पूछ लेना चाहिए.
रायपुर: कुशाभाऊ ठाकरे परिसर बना जन-समस्याओं का समाधान केंद्र, मंत्रियों की मौजूदगी से जगी उम्मीद
रायपुर। भाजपा प्रदेश कार्यालय स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संचालित सहयोग केंद्र इन दिनों कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए उम्मीद का केंद्र बन गया है। प्रदेश सरकार के मंत्री लगातार सहयोग केंद्र पहुँचकर कार्यकर्ताओं एवं आम लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं और उनके आवेदनों का त्वरित निराकरण कर रहे हैं।
सहयोग केंद्र में समस्याओं के समाधान से कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आमजनों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर सहयोग केंद्र पहुँच रहे हैं, जहाँ संबंधित मंत्रियों मौके पर ही निर्देश देकर समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।
मंत्रियों का निर्धारित कार्यक्रम —
9 फरवरी को प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। उनके साथ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही मौजूद रहेंगे।
10 फरवरी को कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव सहयोग केंद्र में आम जनता की समस्याएँ सुनकर समाधान करेंगे। उनके साथ प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष जी. वेंकटेश्वर राव उपस्थित रहेंगे।
11 फरवरी को कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव उनके साथ रहेंगे।
12 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहयोग केंद्र में आमजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। उनके साथ प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष नंदन जैन उपस्थित रहेंगे।
13 फरवरी को वन मंत्री केदार कश्यप सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती उनके साथ रहेंगे।
भाजपा प्रदेश संगठन द्वारा शुरू किया गया यह सहयोग केंद्र शासन और जनता के बीच सेतु का कार्य कर रहा है, जहाँ समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाता है।
बिलासपुर हाई कोर्ट ने जी.पी.एफ. वसूली मामले में रिटायर लेक्चरर को दी राहत, महालेखाकार के आदेश को किया रद्द
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला सुनाया है। एक रिटायर लेक्चरर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की रिटायरमेंट तिथि से छह महीने बाद जी.पी.एफ. से वसूली नहीं की जा सकती। इसी आधार पर रिटायर लेक्चरर को राहत देते हुए कार्यालय महालेखाकार, रायपुर द्वारा जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया गया।
जानिए पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ निवासी लक्ष्मीनारायण तिवारी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ससहा में व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। 31 जनवरी 2011 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त कर दिया गया था। इसके लगभग 12 वर्ष बाद, कार्यालय महालेखाकार, रायपुर ने उनके सामान्य भविष्य निधि (जी.पी.एफ.) में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए उनके खिलाफ वसूली आदेश जारी किया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए लक्ष्मीनारायण तिवारी ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच में हुई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने जबलपुर हाई कोर्ट के फैसले के अलावा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर द्वारा डी.आर. मण्डावी विरुद्ध छ.ग. शासन एवं अन्य और हृदयनारायण शुक्ला विरुद्ध छ.ग. शासन एवं अन्य में पारित न्याय दृष्टांत का हवाला दिया।
अधिवक्ता पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 का भी उल्लेख किया, जिसमें प्रावधान है कि किसी भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी के जी.पी.एफ. में ऋणात्मक शेष होने पर केवल रिटायरमेंट दिनांक से 6 माह के भीतर ही वसूली की जा सकती है। निर्धारित छह माह के बाद किसी भी प्रकार की वसूली नियमों के विरुद्ध मानी जाएगी।
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कार्यालय महालेखाकार, रायपुर द्वारा रिटायर लेक्चरर के खिलाफ जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारत में 'दोहरे मापदंड' के लिए ग्लोबल ब्रांड्स को घेरा; FSSAI से सख्त नियमों की मांग की
नई दिल्ली। लोकसभा में नियम 377 के तहत एक बहुत ही अहम मुद्दा उठाते हुए, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारत में काम कर रही कई विदेशी कंपनियों की "दोहरी मानसिकता" की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि ये कंपनियाँ ऐसे प्रोडक्ट बेचती हैं जिनकी क्वालिटी पश्चिमी बाजारों में बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की तुलना में काफी कम होती है।
बृजमोहन ने इन दोहरे मापदंडों के पक्के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि जो बेबी फूड यूरोप के बाजारों में बिकता है. उसमें अलग से कोई चीनी नहीं होती। लेकिन हैरानी की बात है कि वहीं ब्रांड जब भारतीय माताओं को अपना सामान बेचते हैं, तो वह चीनी से भरा होता है। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय उत्पादों में कोको बटर जैसी प्रीमियम चीजों को अक्सर सस्ते वनस्पति तेल से बदल दिया जाता है।
सांसद ने जोर देकर कहा कि ऐसी हरकतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वस्थ भारत' के सपने को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को खराब सामान खपाने के लिए "डंपिंग ग्राउंड" नहीं बनाया जा सकता और देश के नागरिकों की सेहत देश के भविष्य के लिए सबसे ज्यादा जरनी है।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, "हमारे नागरिकों की सेहत ही देश का भविष्य है। हम यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे कि ग्लोबल ब्रांड्स भारत में तो ज्यादा चीनी वाला बेबी फूड या सस्ते तेल का इस्तेमाल करें, लेकिन विदेशों में अच्छी क्वालिटी बनाए रखें। अब समय आ गया है कि FSSAI पूरी दुनिया में 'एक ब्रांड, एक क्वालिटी का नियम सख्ती से लागू करे। भारत दुनिया का एक लीडर है, न कि घटिया उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड।"
अग्रवाल ने केंद्र सरकार से तुरंत ये कदम उठाने की अपील कीः
1. FSSAI नियमों में बदलावः खाने की सुरक्षा और क्वालिटी के मौजूदा नियमों को और सख्त किया जाए।
2. वैश्विक समानता (Global Parity) लागू हो: यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत में काम करने वाला कोई भी ग्लोबल ब्रांड ठीक उसी क्यालिटी का पालन करे जो वह अपने मूल देश (country of origin) में करता है।
3. कड़ी निगरानीः ऐसे कम पोषण वाले उत्पादों की बिक्री रोकी जाए जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करते.
अब ‘कबीर धर्म नगर’ के नाम से जाना जाएगा दामाखेड़ा, राजपत्र में अधिसूचना जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कबीरपंथियों की आस्था के प्रमुख केंद्र दामाखेड़ा के नाम परिवर्तन को लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब सिमगा तहसील स्थित ग्राम दामाखेड़ा को “कबीर धर्म नगर, दामाखेड़ा” के नाम से जाना जाएगा। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है।
बता दें कि सरकार ने यह निर्णय 4 जून 2025 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया था। इसके बाद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से सहमति मिलने पर नाम परिवर्तन को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस फैसले को लेकर 5 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी की।
देखें अधिसूचना

कबीर संत समागम मेले में सीएम साय ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद दामाखेड़ा पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध सतगुरु कबीर संत समागम मेला में भाग लिया था। इसी दौरान उन्होंने दामाखेड़ा का नाम बदलकर कबीर धर्म नगर, दामाखेड़ा करने की घोषणा की थी।
कार्यक्रम में उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने प्रकाश मुनि साहेब को प्रणाम किया और कहा था कि “एक छोटे किसान का बेटा आज मुख्यमंत्री बनकर आपके आशीर्वाद लेने आया है, ताकि छत्तीसगढ़ की जनता सुख-समृद्धि से भरपूर हो।” इस अवसर पर उन्होंने दामाखेड़ा के 10 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का उद्योग नहीं लगाए जाने का आश्वासन भी दिया था।
कबीरपंथियों की विश्वस्तरीय आस्था का केंद्र है दामाखेड़ा

रायपुर–बिलासपुर मार्ग पर सिमगा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित दामाखेड़ा भले ही भौगोलिक रूप से एक छोटा गांव हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व विश्वस्तर पर है। यह स्थान कबीरपंथियों के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।

कबीर के सत्य, ज्ञान और मानवतावादी विचारधारा पर आधारित इस पवित्र भूमि पर वर्ष 1903 में कबीरपंथ के 12वें गुरु उग्रनाम साहेब ने कबीर मठ की स्थापना की थी। तभी से दामाखेड़ा देश-विदेश से आने वाले लाखों कबीरपंथी अनुयायियों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
नाम परिवर्तन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
ग्राम का नाम आधिकारिक रूप से बदलने के बाद कबीरपंथी समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। समाज के लोगों का मानना है कि इससे दामाखेड़ा की धार्मिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी और कबीरपंथ की परंपरा को वैश्विक स्तर पर और पहचान मिलेगी।
छत्तीसगढ़ के रसायन उद्योग और एसएमई को मिलेगी नई दिशा, लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया सर्कुलर इकोनॉमी और अपशिष्ट पुनर्चक्रण का मुद्दा
नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में रसायन क्षेत्र में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण के साथ औद्योगिक विकास को संतुलित करने तथा छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक राज्यों की विशेष चुनौतियों को लेकर गंभीरता से मुद्दा उठाया।
सांसद श्री अग्रवाल ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से प्रश्न करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 60 प्रतिशत लघु उद्योग ‘लाल श्रेणी’ में आते हैं, जहां नदी प्रदूषण और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि खतरनाक अपशिष्ट नियम, 2016 के अंतर्गत चक्रीय अर्थव्यवस्था मानकों को पूरा करने के लिए एसएमई को किस प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और राज्यवार कार्यान्वयन की स्थिति क्या है।
उन्होंने एमएसई-स्पाइस और पीएलआई जैसी योजनाओं के एकीकरण, बढ़ती अनुपालन लागत, सीमित अनुसंधान एवं विकास व्यय तथा वर्ष 2030 तक रसायन क्षेत्र को 400-450 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के रोडमैप पर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं सीमा पार संचलन) नियम, 2016 लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। इन नियमों के तहत अपशिष्ट की रोकथाम, न्यूनीकरण, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और सह-प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 587 खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली इकाइयां, 36 पुनर्चक्रणकर्ता, 40 अधिकृत उपयोगकर्ता और 175 आंतरिक उपयोगकर्ता कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य में लगभग 2.12 लाख मीट्रिक टन खतरनाक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण या उपयोग किया गया, जो राज्य में सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में 127 मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित की गई हैं, जिससे अंतर-उद्योग अपशिष्ट पुनः उपयोग को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है।
एमएसई-स्पाइस योजना से छत्तीसगढ़ के उद्योगों को मिलेगा लाभ
सरकार ने एमएसई-स्पाइस (सर्कुलर इकोनॉमी में प्रोत्साहन एवं निवेश) योजना के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को संयंत्र और मशीनरी लागत पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 12.5 लाख रुपये प्रति इकाई) देने की जानकारी दी। यह योजना प्लास्टिक, रबर और ई-कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के एमएसएमई को नई तकनीक अपनाने और लागत घटाने में मदद करेगी।
छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी पहल
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं से छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और राज्य का रसायन क्षेत्र राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र-राज्य समन्वय और उद्योग-हितैषी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ सर्कुलर इकोनॉमी का मजबूत मॉडल बनकर उभरेगा।
सुकमा के बाद बीजापुर में बड़ा सरेंडर, 30 माओवादियों ने डाले हथियार, सिर पर था 85 लाख रुपए का ईनाम…
बीजापुर। एक तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं, वहीं दूसरी ओर बस्तर में एक के बाद एक जिले में माओवादियों का समर्पण जारी है. सुकमा में 21 माओवादियों के बाद बीजापुर में 30 माओवादियों ने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला लिया है. इन 30 माओवादियों के सिर पर करीब 85 लाख रुपए का ईनाम घोषित था.
सरकार की महत्वपूर्ण “नियद नेल्लानार” व पुर्नवास नीति से प्रभावित होकर एक डिवीसीएम सहित कुल 30 माओवादी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में 20 महिला माओवादी व 10 पुरुष माओवादी शामिल हैं. इन 30 माओवादियों पर कुलमिलाकर 85 लाख का ईनाम घोषित किया था. ये सभी आत्मसमर्पण माओवादी फायरिंग, आईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसे अन्य घटनाओं में शामिल थे.
माओवादियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ.जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू एवं अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया. पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को अधिकारियों ने 50-50 हजार रुपए नगद राशि प्रदान की गई.
वकीलों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर भड़का जिला अधिवक्ता संघ, सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर थाने में की शिकायत
मनेन्द्रगढ़। सोशल मीडिया पर वकीलों के विरुद्ध कथित तौर पर की गई अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर जिला अधिवक्ता संघ मनेन्द्रगढ़ ने कड़ा ऐतराज जताया है। अधिवक्ता संघ ने इस मामले में सिटी कोतवाली प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अधिवक्ता संघ द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, रघुनाथ पोद्दार उर्फ कल्लू और एक निजी चैनल के संचालक शराफत अली के खिलाफ यह तहरीर दी गई है। आरोप है कि 25 जनवरी 2026 को शराफत अली ने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से रघुनाथ पोद्दार का एक वीडियो इंटरव्यू प्रसारित किया था। इस इंटरव्यू में रघुनाथ पोद्दार ने वकीलों के खिलाफ कथित रूप से अमर्यादित, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वीडियो इंटरव्यू के दौरान रघुनाथ पोद्दार ने वकील समुदाय पर राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ मिलकर “नेक्सस” चलाने और प्रोपेगेंडा फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए। अधिवक्ता संघ का कहना है कि इस प्रकार के बयान न केवल निराधार हैं, बल्कि इससे पूरे वकील समुदाय की छवि को ठेस पहुंची है।
जिला अधिवक्ता संघ की बैठक में लिया गया कड़ा निर्णय
मामले की गंभीरता को देखते हुए 04 फरवरी 2026 को जिला अधिवक्ता संघ की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह के भ्रामक और अपमानजनक वीडियो प्रसारित कर अधिवक्ताओं के प्रति समाज में अनादर की भावना पैदा की जा रही है। संघ के अनुसार करीब 13 मिनट के इस वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वकील समुदाय को जानबूझकर बदनाम करने का प्रयास किया गया।
FIR और कड़ी कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता संघ ने पुलिस को सौंपे गए पत्र में कहा है कि दोनों व्यक्तियों ने एकराय होकर अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा और सम्मान को नुकसान पहुंचाया है। संघ ने मांग की है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और आईटी एक्ट सहित अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जिला अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि अधिवक्ताओं की गरिमा और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की हरकतों के खिलाफ कानूनी स्तर पर पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी।
खात्मे की ओर माओवाद: 21 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ किया आत्मसमर्पण, सिर पर था 76 लाख रुपए का ईनाम…
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. जिले में आज 21 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कुल 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
माओवादियों ने यह आत्मसमर्पण बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज, सीआरपीएफ डीआईजी आनंद राजपुरोहित और सुकमा एसपी किरण चव्हाण के समक्ष किया गया. आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने AK-47, SLR, इंसास जैसे ऑटोमैटिक हथियारों के साथ-साथ भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी.
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, लगातार बढ़ते सुरक्षाबलों के दबाव, सफल एंटी-नक्सल ऑपरेशनों और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादियों ने यह कदम उठाया. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली मुख्य रूप से दरभा डिवीजन और उड़ीसा सीमा क्षेत्र में सक्रिय थे.

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें. यह आत्मसमर्पण बस्तर अंचल में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक और मजबूत संदेश माना जा रहा है.
तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत
रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद संतोष पांडेय, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मीनल चौबे, विधायक मोतीलाल साहू, राजेश मूणत, मुख्य सचिव विकास शील, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह) मनोज पिंगुआ तथा रायपुर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला उपस्थित थे।
अमित शाह के दौरे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, तो सांसद बृजमोहन ने दिया करारा जवाब, कहा- छत्तीसगढ़ भाजपा का गढ़…
रायपुर। नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियानों की समीक्षा करने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. शाह के दौरे को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए, जिसे लेकर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पलटवार किया है. सासंद बृजमोहन ने कहा कि ये बीजेपी का गढ़ है तो बीजेपी के नेता आएंगे ही. छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बनेगा. आज देश में आतंकवाद और नक्सलवाद की दो सबसे बड़ी समस्या है, उन्होंने देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का ठाना है. केंद्रीय गृहमंत्री शाह नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए यहां आते हैं. कांग्रेस को धन्यवाद करना चाहिए. छत्तीसगढ़ के विकास में कोई बाधा थी तो वह नक्सलवाद थी.
राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे से बढ़ता है गौरव : सासंद बृजमोहन अग्रवाल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज बस्तर पंडुम में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ पहुंची. उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति के आने से हमारा गौरव बढ़ता है. हम सब का सौभाग्य है देश की राष्ट्रपति बस्तर पण्डूम के उद्घाटन में पहुचीं. हम सब उनका अभिनंदन स्वागत करते हैं.
भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता छत्तीसगढ़ के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोलेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता (India–US Interim Trade Agreement) भारत की वैश्विक आर्थिक साख और सामर्थ्य को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस समझौते से छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अमेरिकी बाजार तक नई पहुँच मिलेगी। विशेष रूप से राज्य के वन-आधारित उत्पाद, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, वस्त्र तथा कृषि आधारित उत्पादों के लिए निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को व्यापक लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस व्यापारिक ढांचे में किसानों के हितों और ग्रामीण आजीविका की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही यह पहल महिला सशक्तिकरण को गति देने, स्थानीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूती प्रदान करने और मेक इन इंडिया की भावना को और सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता छत्तीसगढ़ के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में छत्तीसगढ़ एक सशक्त और सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह समझौता राज्य के समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को नई गति देगा।
बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव - राज्यपाल रमेन डेका
राज्यपाल रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।
बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।
अब नया बस्तर - डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी बजती है। जहाँ कभी तिरंगा नहीं लहरा पाता था, आज वहाँ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की जीत है।
नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान विकास के मील के पत्थर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आदिवासी क्षेत्रों में विकास के मील के पत्थर हैं। इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के से जो लोग कभी बंदूक के रास्ते पर थे, वे अब सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। चिल्कापल्ली, तेमेनार और हांदावाड़ा जैसे गाँवों में वर्षों बाद बिजली पहुँची है, यह केवल रोशनी नहीं, बल्कि आशा और भविष्य का उजाला है।
जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज से भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गाँव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कोटमसर गुफाएँ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान हैं।
युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बदलाव का सबसे सशक्त प्रमाण है।
बस्तर की नई पहचान को मजबूत करने का आह्वान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी और बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे, जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।
कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
फर्जी आदेश के दम पर वर्षों तक सरकारी नौकरी कर रहे चार कर्मचारी हुए बर्खास्त, गंभीर धाराओं में एफआईआर भी दर्ज…
खैरागढ़। राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी आदेश के सहारे वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले चार कर्मचारियों को जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है. इसके साथ अब उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कराया है. इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.
मामला वर्ष 2021 का बताया जा रहा है, जब टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को जिले के अलग-अलग स्कूलों में सहायक ग्रेड-3 तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति दी गई थी. इसके साथ ही डोलामणी मटारी, सादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा और अमीन शेख भी मोहला-मानपुर जिले के विद्यालयों में पदस्थ थे. नियुक्ति के दस्तावेजों की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
जांच में पता चला कि सितंबर 2021 में राज्य शिक्षा आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के नाम से जारी जिस आदेश के आधार पर नियुक्तियां की गई थीं, उक्त क्रमांक का पत्र वास्तव में बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया गया था. इतना ही नहीं, दस्तावेजों पर मौजूद सचिव के हस्ताक्षर भी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे.
शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेने और आयोग के आदेश को फर्जी पाए जाने के बाद डीईओ लालजी द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया. इसके बाद उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला पंजीबद्ध किया है.

हाई और हायर सेकेंडरी में मिली थी तैनाती
फर्जी आदेश के आधार पर शिक्षा विभाग ने मई 2022 में टीकमचंद साहू को हाईस्कूल मोहगांव, फगेंद्र सिंहा को उच्चतर माध्यमिक शाला बकरकट्टा, रजिया अहमद को उमा शाला पैलीमेटा में सहायक ग्रेड-3 और अजहर अहमद को छुईखदान बीईओ कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में पदस्थ किया था. इनके अलावा सीएच एंथोनी को ठाकुरटोला उमा शाला में सहायक ग्रेड-3 नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने कभी कार्यभार नहीं संभाला.
कलेक्टोरेट में भी कर चुके थे काम
जिले के गठन के बाद रजिया अहमद को कलेक्टोरेट की डीएमएफ शाखा और अजहर अहमद को अभियोजन शाखा में अटैच किया गया था. वहीं फगेंद्र सिंहा और टीकमचंद साहू से डीईओ कार्यालय में काम लिया जा रहा था. अगस्त 2025 में मामला उजागर होने के बाद चारों ने अलग-अलग कारण बताते हुए अवकाश ले लिया था, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और बचाव संतोषजनक नहीं पाए गए. लंबी जांच प्रक्रिया के बाद विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस अब इस पूरे रैकेट की तह तक जाने की तैयारी कर रही है.
फर्जी था नियुक्ति पत्र – डीईओ
खैरागढ़ जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर ही नियुक्ति पत्रों की सत्यता को लेकर गंभीर संदेह था, जिसके बाद राज्य शिक्षा आयोग से औपचारिक सत्यापन कराया गया. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस आदेश के आधार पर इन कर्मचारियों को नियुक्ति और पदस्थापना दी गई थी, वह फर्जी था, और सचिव के हस्ताक्षर भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे.
विभाग सुनिश्चित करेगा निष्पक्ष जांच
उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा में किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती, इसलिए नियमानुसार चारों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, और कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है. विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा और यदि इसमें कोई और व्यक्ति संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी.
SIR में एक ही समुदाय के मतदाताओं के नाम पर आपत्ति से भड़के वोटर, थाने में की शिकायत
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। गौरेला नगर पालिका क्षेत्र में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। SIR प्रक्रिया के दौरान एक ही समुदाय के सैकड़ों मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज किए जाने से क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है। इससे नाराज मतदाताओं ने आपत्तिकर्ता के खिलाफ गौरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में जानबूझकर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत एक विशेष समुदाय के लोगों के नाम कटवाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि वे पीढ़ियों से—आजादी से पहले के समय से—इस क्षेत्र में निवासरत हैं और अब तक देश में हुए सभी चुनावों में मतदान करते आ रहे हैं।
मतदाताओं ने बताया कि SIR से संबंधित सभी अनिवार्य दस्तावेज उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समय पर उपलब्ध करा दिए हैं, इसके बावजूद उनके नामों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। इसे वे दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई मान रहे हैं।
पीड़ित मतदाताओं ने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक व्यक्ति द्वारा उनकी नागरिकता और मताधिकार पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। इसी के विरोध में उन्होंने गौरेला थाने पहुंचकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है।