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धमतरी में वनभूमि पर बड़ी कार्रवाई: 116 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमण मुक्त, 54 कब्जे ध्वस्त
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित दक्षिण सिंगपुर वन परिक्षेत्र में अवैध कब्जों को हटाने के लिए वन, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान 116.596 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया और 54 अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाकर झोपड़ीनुमा संरचनाओं को ध्वस्त किया गया।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला दक्षिण सिंगपुर वन परिक्षेत्र के पालगांव और गोंदलानाला क्षेत्र से जुड़ा है। यहां कक्ष क्रमांक 169 के जंगलों में कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर झोपड़ीनुमा मकान बना लिए गए थे। लंबे समय से वन विभाग इन अतिक्रमणों को हटाने की तैयारी कर रहा था, जिसके तहत मंगलवार को यह बड़ी कार्रवाई की गई।
जैसे ही प्रशासनिक टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची, अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। कई लोग अपने सामान को बचाने में जुट गए, जबकि कुछ ने कार्रवाई का विरोध भी किया। शुरुआती दौर में अतिक्रमणकारियों और प्रशासनिक अमले के बीच झूमा-झटकी की स्थिति भी बनी, लेकिन मौके पर तैनात पुलिस बल ने हालात को नियंत्रित कर लिया।
इस कार्रवाई में वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही, जिससे अभियान को सुचारु रूप से अंजाम दिया जा सका। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई और अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस देकर समझाइश दी गई थी।
एसडीओ एवं संयुक्त वनमंडल अधिकारी बिरगुड़ी एस.एस. नाविक ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को पूर्व में कई बार चेतावनी दी गई थी। साथ ही जिन लोगों ने वर्ष 2005 से पहले वनभूमि पर कब्जा किया था, उन्हें वन अधिकार पत्रक भी प्रदान किया जा चुका है। इसके बावजूद जो लोग अवैध रूप से नए कब्जे कर रहे थे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। वनभूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना विभाग की प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुशासन तिहार 2026: मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टरों को लिखा पत्र, जन शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान और जन समस्या निवारण शिविरों के आयोजन पर दिया जोर…
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से इस वर्ष भी “सुशासन तिहार 2026” के आयोजन व्यापक पैमाने पर किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर इस अभियान सफल आयोजन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुशासन की आधारशिला है तथा आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल एवं त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। गत वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इस वर्ष इसे और अधिक व्यापक रूप में संचालित किया जाएगा।
30 अप्रैल तक लंबित प्रकरणों के निराकरण के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 30 अप्रैल 2026 तक जिले में लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु विशेष अभियान चलाया जाए। इसके अंतर्गत भूमि संबंधी प्रकरण जैसे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, मनरेगा अंतर्गत लंबित मजदूरी भुगतान, हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, बिजली एवं ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याएं तथा हैंडपंप सुधार जैसे मुद्दों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
01 मई से 10 जून तक लगेंगे जन समस्या निवारण शिविर
सुशासन तिहार के अंतर्गत 01 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर आयोजित होंगे। इन शिविरों में शासन की विभिन्न योजनाओं के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा तथा पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही लाभ वितरण किया जाएगा। शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण, मुख्य सचिव एवं प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में शामिल होकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आमजन से संवाद स्थापित करेंगे।
मुख्यमंत्री करेंगे विकास कार्यों का औचक निरीक्षण एवं समीक्षा बैठकें
अभियान के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय स्वयं विभिन्न जिलों में पहुंचकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण करेंगे तथा हितग्राहियों से फीडबैक लेंगे। इसके साथ ही जिला मुख्यालयों पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित कर समाधान शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति एवं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक के उपरांत प्रेसवार्ता को संबोधित किया जाएगा तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से भेंट कर सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।
जनभागीदारी के लिए व्यापक प्रचार
जनसम्पर्क विभाग एवं जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि सुशासन तिहार के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रभावी कार्ययोजना बनाकर विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाए, ताकि अधिक से अधिक नागरिक इस अभियान से जुड़ सकें। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे आवश्यक अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें और अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करें, जिससे प्रदेश के आम नागरिकों को शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।
वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत, 15 घायलों का चल रहा इलाज
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब तक मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। प्रशासन की ओर से जारी ताजा सूची के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में 5 लोग छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, जबकि 15 मृतक अन्य राज्यों से हैं।
हादसे में घायल 15 लोगों का छत्तीसगढ़ के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। गंभीर रूप से घायल मरीजों के बेहतर इलाज के लिए 5 एयर एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है। इसके अलावा भविष्य में जरूरत पड़ने पर रेफर करने के लिए हैदराबाद के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों से भी टाई-अप किया गया है। घटना के बाद जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कलेक्टर और एसपी ने बुधवार को भी बॉयलर ब्लास्ट के घटना स्थल का निरीक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
मृतकों के शवों को एंबुलेंस से भेजा गया गृहग्राम
सक्ती जिले के 3 मृतकों में से 2 का आज अंतिम संस्कार किया गया। अन्य राज्यों के मृतकों के शवों को उनके गृहग्राम भेजने की प्रक्रिया जारी है, जिसके लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

मृतक के परिजन को 35-35 लाख और नौकरी देगी कंपनी
वेदांता प्रबंधन ने मृतक के परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे। PMO ने भी मुआवजे की घोषणा की है। PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान भी किया है।
हादसे में इन लोगों की हुई मौत –

रायपुर में “रक्षक” पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने पर मंथन, बाल अधिकार जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर। रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हम सभी का सामूहिक प्रयास है कि इस पहल को अंतिम स्वरूप देकर इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित एवं जागरूक बन सके।
यह बात विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और सुरक्षा संबंधी विषयों में प्रशिक्षित करने आज रायपुर में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप प्रदान करने विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कही।
इस बैठक में राज्य के तीन शासकीय और तीन प्राइवेट विश्वविद्याल शामिल हुए जिसमें पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी एवं अंजनेय यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव और अधिकृत प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षक पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार किए गए उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना रहा, ताकि पाठ्यक्रम को आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को अपने सुझाव एवं विचार साझा करने हेतु आमंत्रित किया गया तथा पाठ्यक्रम का गहन मूल्यांकन किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पाठ्यक्रम की उपयोगिता, संरचना एवं व्यवहारिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक में उपस्थित सभी कुलपतियों, कुलसचिव, एवं प्रतिनिधि प्रोफेसर्स ने आयोग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया और इसके सफल क्रियान्वयन हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम को शीघ्र ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, रायपुर द्वारा “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। “रक्षक” पाठ्यक्रम एक विशेष शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह एमओयू राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है।
सात सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों का घेराव, बीईओ के निलंबन की मांग तेज
महासमुंद। जिले में सर्व शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर अनियमितता, भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण रवैया एवं तानाशाही के आरोप लगाते हुए बीईओ कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की।
शिक्षकों ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर घेराव किया। उनकी मांग है कि संतान पालन अवकाश में अवैध वसूली, स्टेशनरी विद्यालयों को नहीं वितरित करना और अभिलेखों में वितरण दर्शाना, कार्यालय व्यय में गड़बड़ी एवं फर्जी बिल के माध्यम से आहरण करना, नियम विरुद्ध यात्रा भत्ता निकालना, पक्षपातपूर्ण अवकाश स्वीकृति करना, जांच समिति की निष्क्रियता एवं शालाओं के युक्तियुक्तकरण में व्यापक लापरवाही बरतना शामिल है।
वहीं एक पीड़ित शिक्षिका ने संतान पालन अवकाश के लिए बीईओ पर प्रत्येक माह 5 हजार रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। घेराव के बाद शिक्षक संघ ने बीईओ को तत्काल निलंबित करने की मांग को लेकर विधायक, डीईओ एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जहां शिक्षक बीईओ का निलंबन नहीं होने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे हैं। वहीं बीईओ ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
इस पूरे मामले में डीईओ ने शिकायत प्राप्त होने पर बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की बात कही है। गौरतलब है कि जब शिक्षा के मंदिर में ही इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, तो बच्चों को क्या सीख मिलेगी, यह सोचने वाली बात है।
UCC को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी संग्राम, कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों पर उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में आज राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। साय कैबिनेट की बैठक में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। वहीं इस फैसले के बाद प्रदेश में सियासी घमासान भी शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इसका विरोध करते हुए इसे आदिवासी अधिकारों के खिलाफ बताया है।
उन्होंने कहा कि UCC के लिए कमेटी बनाने का निर्णय लिया है, कांग्रेस पार्टी इसका विरोध करती है। बीजेपी UCC लागू करती है तो आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रही है। आदिवासियों के अधिकारों को यह समाप्त करना चाहती है। आदिवासी वर्ग ऐसा है जो सीधे-सीधे सरकार से विशेष संरक्षण प्राप्त है। आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को पावर दिया गया है।
दीपक बैज ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार UCC लागू कर आदिवासियों को प्राप्त अधिकारों को छीनना चाहती है? इसका मतलब है कि आदिवासी क्षेत्रों में खनिज संसाधनों को छीनने के लिए UCC लागू करना चाह रही है। यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में आदिवासी हित के खिलाफ कानून बनेगा, उसका हम विरोध करेंगे। यह कानून आदिवासियों को समाप्त करने वाला कानून है। उनके अधिकारों को खत्म करने वाला कानून है।
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मुख्यमंत्री और सरकार से पूछा यह सवाल
- क्या यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में पेसा कानून का अस्तित्व यथावत रहेगा?
- पांचवी अनुसूची की पंचायतों के अधिकारों में कोई छोड़छाड़ नहीं होगी?
- राज्य की संरक्षित जनजातियां बैगा, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया, पांडा को संविधान में विशेष संरक्षण मिला है क्या यूसीसी लागू होने पर इनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे?
- आदिवासियों की जमीनों पर उनके सामुदायिक अधिकारों का हनन नहीं किया जाएगा?
कैबिनट मीटिंग में UCC ड्राफ्ट के लिए समिति बनाने का लिया गया निर्णय
बता दें कि बुधवार को कैबिनट बैठक में छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code लागू करने के संबंध में Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया और समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करेगी। यह समिति वेब पोर्टल के माध्यम से फीडबैक भी आमंत्रित कर सकती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके।
पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया से शिक्षा के अधिकार को मिला नया विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन सुनिश्चित किया। मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से प्रारंभ हुई यह प्रक्रिया पारदर्शिता, समान अवसर और डिजिटल सुशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

राज्यभर से प्राप्त कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए गए, जिनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार राज्य स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की प्रगति आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।
उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सतत प्रयास कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके और निजी विद्यालयों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया और सुदृढ़ हो।
पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक के सभी चरण पूर्णतः पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम द्वारा निवास क्षेत्र से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी विद्यालयों की जानकारी एवं उपलब्ध सीटों का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, जिससे अभिभावकों को सूचित एवं सहज चयन का अवसर प्राप्त होता है। पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जिन विद्यालयों में सीटें रिक्त रह जाती हैं, वहाँ जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है। राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी परिवर्तन का संकेत है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 का पारित होना देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में नारी का स्थान सर्वोच्च है। हम भगवान से पहले भगवती की पूजा करते हैं और ऐश्वर्य के लिए माता लक्ष्मी, बुद्धि के लिए सरस्वती और बल के लिए दुर्गा की आराधना की जाती हैं। श्री साय ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के प्रयास पहले भी हुए, लेकिन इसे प्रभावी रूप से लागू करने का साहसिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो पाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हम इस वर्ष को प्रदेश में ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मना रहे हैं और महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हुआ है और प्रदेश विकास के नए मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नया संबल मिलेगा। कार्यक्रम में “पंचायत से पार्लियामेंट तक निर्णय में नारी—नए भारत की तैयारी” के संकल्प को दोहराया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं में पहले से ही 14 लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इस दौरान पुष्प के साथ महिलाओं का अभिनंदन कर बधाई और शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं की इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें बड़े निर्णय लेने में सक्षम बना रहे हैं। महिलाओं को जिम्मेदारी मिले तो वे देश की तस्वीर बदल सकती हैं। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने बताया कि यह अधिनियम वर्ष 2029 तक लागू होगा, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
कार्यक्रम में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पद्मश्री ऊषा बारले, विधायक पुरंदर मिश्रा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, पद्मश्री ऊषा बारले, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी नीता डोंगरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नवागढ़ अध्यक्ष हटाने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, सिद्धांत चौहान पद पर बरकरार
बिलासपुर। बेमेतरा जिले के नगर पंचायत नवागढ़ के अध्यक्ष सिद्धांत चौहान को हटाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक लगा दी है। कोर्ट ने उन्हें हटाने के आदेश के प्रभाव एवं प्रचलन (इम्प्लीमेंटेशन) पर भी फिलहाल स्थगन दिया है। न्यायालय ने सिद्धांत चौहान को पद पर बने रहते हुए कार्य करते रहने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, सिद्धांत चौहान का चुनाव सीधे जनता के द्वारा नगर पंचायत नवागढ़ के अध्यक्ष के पद पर दिनांक 15.02.25 को हुआ, और पहली मीटिंग दिनांक 08.03.25 को हुई, जिसमें उपाध्यक्ष का चुनाव किया गया। 11.03.25 को सिद्धांत चौहान द्वारा प्रेसिडेंट इन काउंसिल का गठन किया गया, परंतु प्रेसिडेंट इन काउंसिल के सदस्यों द्वारा इस्तीफा प्रस्तुत किया गया, जिसे सिद्धांत चौहान द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।
इसके पश्चात नगर पंचायत नवागढ़ के विभिन्न कार्यों का संपादन नियमानुसार सिद्धांत चौहान द्वारा किया गया। पार्षदों द्वारा असहयोग किए जाने पर निर्माण व आवश्यक कार्यों से संबंधित सभी प्रस्ताव सामान्य सभा में प्रस्तुत किए गए और कोरम पूर्ण न होने पर स्थगित adjourn मीटिंग में उन सभी प्रस्तावों को पास किया गया और कार्य किए गए।
परंतु राजनीतिक विद्वेषवश राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41(क) के अंतर्गत दिनांक 04.12.25 को सिद्धांत चौहान को अध्यक्ष पद से हटाने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब सिद्धांत चौहान द्वारा विस्तार से सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
लेकिन जवाब को संतोषजनक न मानते हुए, नए-पुराने आधारों पर सिद्धांत चौहान को राज्य सरकार द्वारा आदेश दिनांक 20.03.26 के माध्यम से अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और अगले कार्यकाल के लिए अनर्ह घोषित किया गया। उक्त आदेश दिनांक 20.03.26 को सिद्धांत चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, प्रज्ञा वैष्णव एवं अरिंदम मित्रा के माध्यम से रिट याचिका प्रस्तुत कर चुनौती दी गई, जिसमें न्यायमूर्ति एन. के. चंद्रवंशी द्वारा सुनवाई के पश्चात आदेश दिनांक 20.03.26 के प्रभाव एवं प्रचलन पर रोक लगा दी गई है।
कोर्ट ने सरकार और प्रशासन से मांगा जवाब
अगली सुनवाई तक सिद्धांत चौहान को नगर पंचायत नवागढ़, जिला बेमेतरा के अध्यक्ष पद पर कार्य करते रहने की अनुमति दी गई है तथा राज्य सरकार, सचिव नगर विकास एवं प्रशासन, संचालक, अंडर सेक्रेटरी, कलेक्टर बेमेतरा और नगर पंचायत नवागढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
वेदांता पावर प्लांट हादसे पर JCCJ सख्त: 7 सदस्यीय जांच समिति की गठित
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले के वेदांता पावर प्लांट हादसे को जनता कांग्रेस ने दुखद, चिंताजनक और निंदनीय बताया है. जेसीसीजे का कहना है कि यह कोई साधाराण दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नामकों की गंभीर अनदेखी और मुनाफाखोरी की मानसिकता का परिणाम प्रतीत होती है. हादसे की जांच के लिए जनता कांग्रेस ने 7 सदस्यीय की जांच समिति का गठन किया है.
पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराकर मामले को दबाया नहीं जा सकता. जिम्मेदारी उन प्रबंधन स्तर के निर्णयकर्ताओं तक तय होनी चाहिए, जो मुंबई और लंदन में बैठकर संचालन संबंधी फैसले लेते हैं. उन्होंने मामले में हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से हादसे की जांच, दोषियों पर कठोरतम आपराधिक धाराओं में कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ और घायलों को 50 लाख रुपए के मुआवजे की मांग की है.
अमित जोगी का कहना है कि कंपनी द्वारा घोषित 35-35 लाख रुपए का मुआवजा और नौकरी का ऐलान पीड़ित परिवारों के दर्द को कम करने के लिए अपर्याप्त है. मानव जीवन का मूल्य इससे कहीं अधिक है.
JCCJ ने 7 सदस्यीय जांच समिति का किया गठन
सुशील निर्मलकर (कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष – अजीत जोगी श्रमिक संघ) – अध्यक्ष
संतोषी रात्रे (प्रदेश अध्यक्ष – अजीत जोगी महिला मोर्चा) – सदस्य
नवीन अग्रवाल (प्रदेश महामंत्री) – सदस्य
अर्जुन राठौर (जिला अध्यक्ष – सक्ती) – सदस्य
प्रशांत त्रिपाठी (जिला अध्यक्ष – बिलासपुर) – सदस्य
आशीष सुमेर (प्रदेश सचिव/ कोरबा) – सदस्य
प्रिंकल दास (प्रदेश सह-सचिव/ रायगढ़) – सदस्य
यह 7 सदस्यीय समिति घटनास्थल पर पहुंचकर घटना के कारणों, सुरक्षा व्यवस्थाओं की स्थिति और पीड़ितों को मिली सहायता का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जिसके बाद वह अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष को सौंपेगी.
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया।उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई समितियों के शुरू होने से अब पूरे प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सहकारिता के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांव और किसान समृद्ध बन सकें। उन्होंने बताया कि अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध होंगी। साथ ही धान बेचने की प्रक्रिया भी आसान होगी और किसान अपनी नजदीकी समिति में ही धान बेच सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से कार्यरत 2058 समितियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंप्यूटरीकृत किया गया है और इनमें माइक्रो एटीएम भी लगाए गए हैं, जिनसे किसान 20 हजार रुपये तक की राशि निकाल सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवगठित 515 समितियों में से 197 समितियां आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूर-दराज के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये समितियां केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन जैसे सहायक कृषि गतिविधियों से भी जुड़ेंगी। साथ ही समितियों में लोक सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर 25 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे इन समितियों के सदस्य बनकर इसका अधिकतम लाभ उठाएं और इनके संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप वर्चुअल उपस्थित रहे, साथ ही कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा सचिव सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता विभाग के प्रबंध संचालक के.एन. कांडे सहित विभिन्न जिलों से लगभग 2500 जनप्रतिनिधिगण, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: UCC के लिए समिति गठन, महिलाओं को रजिस्ट्री में 50% छूट समेत कई अहम निर्णय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इसका प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित करने का फैसला किया। समिति नागरिकों, संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर ड्राफ्ट तैयार करेगी।
कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
1. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code लागू करने के संबंध में Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया तथा समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करेगी। यह समिति वेब पोर्टल के माध्यम से फीडबैक भी आमंत्रित कर सकती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके।
2. मंत्रिपरिषद ने महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि महिलाओं के नाम पर होने वाले भूमि रजिस्ट्रेशन पर लगने वाले शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति अर्जन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस निर्णय से सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये राजस्व की कमी होगी, लेकिन महिला सशक्तीकरण के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
3. मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत उन्हें जीवनकाल में एक बार छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर 25 लाख रूपए तक की संपत्ति (भूमि/भवन) क्रय करने पर देय स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान किया जाएगा। देश सेवा में समर्पित सैनिकों का जीवन प्रायः स्थानांतरण और अस्थायित्व से भरा होता है, जिसके बाद वे स्थायी निवास के लिए संपत्ति क्रय करते हैं, ऐसे में यह निर्णय उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करेगा।
4. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन से सेवा क्षेत्र को आबंटन हेतु स्पष्ट वैधानिक पात्रता मिलेगी। भूमि आवंटन प्रावधानों में न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा का तार्किक सामंजस्य स्थापित होगा। लैंड बैंक भूखण्डों हेतु एप्रोच रोड का वैधानिक प्रावधान किया गया है। NBFC सहित वित्तीय संस्थाओं को सम्मिलित करने से उद्योगों के लिए ऋण उपलब्धता के विकल्प बढ़ेंगे। कंपनियों में शेयर धारिता परिवर्तन से संबंधित प्रावधानों में व्यावहारिक स्पष्टता आएगी और Ease of Doing Business सुनिश्चित होगा। PPP मॉडल के लिए स्पष्ट प्रावधान से निजी निवेश एवं औद्योगिक अवसंरचना विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
5. छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। अब केन्द्र अथवा राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पाेरेशन लिमिटेड को रेत खदानें आरक्षित की जा सकेगी। इससे पट्टेदार के एकाधिकार के फलस्वरूप उत्पन्न रेत की आपूर्ति-संकट में कमी आएगी तथा दुर्गम क्षेत्रों में रेत खदानों के सुगम संचालन सहित रेत की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
6. मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में व्यापक संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, नियंत्रण और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करना है, अवैध खनन को रोकना तथा प्रक्रिया का सरलीकरण करना है।
गौण खनिज की ऐसी खदाने जो अकारण बंद रहती है अथवा शिथिल रहती है, में कठोर प्रावधान लाया गया है। अब इन खदानों के अनिवार्य भाटक दर में 30 वर्षाें के बाद वृद्धि की गई है। इन खदानों को व्यपगत (लैप्स) घोषित किए जाने संबंधी कठोर प्रावधानों को नियमों में शामिल किया गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसी खदानों का संचालन अनिवार्य रूप से किये जाने की बाध्यता सुनिश्चित हो सकेगी। खनिजों के अवैध उत्खनन/परिवहन/भंडारण पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें न्यूनतम जुर्माना 25 हजार रूपए निर्धारित किया गया है, जो कि 5 लाख रूपए तक भी हो सकता है। अवैध परिवहन के मामलों में सुपुर्दगी दिए जाने हेतु जमानत राशि का भी निर्धारण किया गया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र संबंधी प्रावधान को पूरे प्रदेश में एकसमान लागू किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त उत्खनन पट्टों के समामेलन, अनुबंध पश्चात भू-प्रवेश एवं पर्यावरणीय शर्तों के अनुरूप संचालन जैसे प्रावधानों को भी सुदृढ़ किया गया है, जिससे खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित दोहन और राज्य के आर्थिक सुदृढ़ीकरण को बल मिलेगा।
7. मंत्रिपरिषद द्वारा दुधारू पशु प्रदाय संबंधी पायलट प्रोजेक्ट योजना में समस्त सामाजिक वर्ग के हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने संबंधी संशोधन तथा एनडीडीबी के साथ निष्पादित एमओयू की संबंधित कंडिका में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इससे अनुसूचित जनजाति वर्ग सहित सभी सामाजिक वर्ग के हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा जिससे उनके स्वरोजगार और आय में वृद्धि होगी तथा प्रदेश के सर्वांगीण, सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सहयोग प्राप्त हो सकेगा।
8. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने हेतु आवश्यक टीकाद्रव्यों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए National Dairy Development Board (NDDB) की सब्सिडरी कंपनी Indian Immunologicals Limited, हैदराबाद से टीकों की खरीदी किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है। निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा न बन पाने एवं जेम पोर्टल पर दर उपलब्ध न होने के कारण टीकों की समय पर आपूर्ति में बाधा आ रही थी, जिससे पशुओं का नियमित टीकाकरण प्रभावित हो रहा था। निर्णय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनवरी 2027 तक आवश्यक टीकाद्रव्यों का क्रय उक्त एजेंसी से किया जाएगा, जिससे पशुओं में रोगों की रोकथाम, मृत्यु दर में कमी, पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा तथा दुग्ध, अंडा एवं मांस उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी।
9. मंत्रिपरिषद की बैठक में एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके तहत मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के प्रावधानों के अनुरूप छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के बीच पेंशन दायित्वों के प्रभाजन के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पूर्व वर्षों में किए गए 10,536 करोड़ रूपए के आधिक्य पेंशन भुगतान की राशि की वापसी पर सहमति दी गई। बैंकों द्वारा पूर्व में हुए त्रुटिपूर्ण लेखांकन के कारण यह अतिरिक्त भुगतान हुआ था, जिसका पुनर्मिलान एवं सत्यापन संयुक्त दल द्वारा किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन द्वारा 2,000 करोड़ रूपए की राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदान की जा चुकी है तथा शेष 8,536 करोड़ रूपए की राशि आगामी 6 वार्षिक किश्तों में दी जाएगी। मंत्रिपरिषद ने इस व्यवस्था को स्वीकार करते हुए वित्त विभाग को आवश्यक कार्यवाही हेतु अधिकृत किया है।
इसके अतिरिक्त मंत्रिपरिषद की बैठक में आगामी खरीफ सीजन हेतु उर्वरक की व्यवस्था तथा राज्य में LPG गैस की उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा की गई।
वेदांता पावर प्लांट हादसा : जिला प्रशासन ने दिए घटना के मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, कांग्रेस ने भी बनाई जांच समिति…
रायपुर। सक्ती जिला के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए बॉयलर हादसे की जांच के लिए सक्ती जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं. डभरा एसडीएम को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं. वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी ने भी हादसे की जांच के लिए समिति का गठन किया है.
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने जांच अधिकारी को आठ बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं. इनमें घटना कब और कैसे घटित हुई ? घटना दिनांक को घटना स्थल पर कौन-कौन मजदूर कार्यरत थे, एवं घटना में किन-किन मजदूरों की मृत्यु हुई तथा कौन-कौन मजदूर घायल हुये ? उन परिस्थितियों के कारण जिनके फलस्वरूप घटना घटित हुई थी?
इसके अलावा सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा पावर प्लांट से उत्पादन प्रारंभ होने से लेकर घटना दिनांक तक कब-कब निरीक्षण किया गया है? क्या निरीक्षण में कोई खामियां पायी गई है, यदि हां तो क्या कार्यवाही की गई?
इसके साथ घटना घटित होने का कारण तकनीकी या मानवीय क्या कारण है? उक्त घटना घटित होने के लिए कौन जिम्मेदार हैं? भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटना न हो, इस हेतु रोकथाम के उपाय एवं सुझाव और अंत में अन्य कोई बिन्दु जिन पर जांच अधिकारी से अभिमत मांगा गया है.

कांग्रेस ने भी गठित की जांच समिति
वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी जांच समिति का गठन किया है. अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में गठित जांच समिति में 9 लोगों को शामिल किया गया है. यह समिति पीड़ित परिवारों से मिलकर स्थिति का जायजा लेगी.
जांच समिति में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के अलावा पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, जैजेपुर विधायक बालेश्वर साहू, अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह, जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप, पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश, सक्ती जिला अध्यक्ष रश्मि गवेल और जांजगीर-चांपा जिला अध्यक्ष राजेश अग्रवाल शामिल हैं.

वेदांता पावर प्लांट हादसे में मौतों की संख्या हुई 14, प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख और घायलों को 15 लाख का मुआवजा किया घोषित
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को हुए बॉयलर ब्लास्ट हादसे ने झकझोर कर रख दिया. इस घटना में मौतों की संख्या को लेकर नया अपडेट है. ब्लास्ट की चपेट में आने से 33 लोग घायल हुए, जिनमें से मृतकों की संख्या अब बढ़कर 14 हो चुकी है. वहीं 4 गंभीर रूप से घायलों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर शिफ्ट किया गया है.
मृतकों के परिवारों को 35 लाख और घायलों को 15 लाख
बड़े हादसे के बाद वेदांता पावर प्लांट प्रबंधन ने मृतकों के परिवार के लिए 35 लाख रुपए और घायलों को 15 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है. साथ ही घायलों के इलाज और मृतकों के परिवार के सदस्य को प्लांट में नौकरी पर सहमति बनी है.
मौत का आंकड़ा 13 पहुंचा
अस्पताल में इलाज के दौरान एक और मजदूरों की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या 14 पहुंच गई है. अब तक 26 से अधिक घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है.
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, यह भीषण हादसा मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे डभरा थाना क्षेत्र के ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ, जहां अचानक बॉयलर फटने से जोरदार विस्फोट हुआ. विस्फोट के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए.
परिजनों का हंगामा
घटना के बाद प्लांट के बाहर परिजनों और मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा. आक्रोशित लोगों ने एम्बुलेंस को रोकते हुए घायलों को दिखाने की मांग की और जमकर नारेबाजी की. स्थिति को देखते हुए प्लांट का मुख्य गेट बंद कर दिया गया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया.
मुख्यमंत्री साय ने की मुआवजे की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदांता पावर प्लांट में हुई दुर्घटना अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है. इस हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की है. उन्होंने घोषणा की कि मृतक श्रमिकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि उन्हें तत्काल राहत और संबल मिल सके. सभी घायलों के समुचित एवं निःशुल्क उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की है.
न्याय में देरी बर्दाश्त नहीं: हाईकोर्ट ने राज्य को लगाई फटकार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन द्वारा दायर आपराधिक अपील को केवल देरी के आधार पर खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर लंबी देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता. इस मामले में राज्य शासन ने कोरबा के विशेष न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आरोपी संजय कुमार यादव (34 वर्ष) को आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया था. यह आदेश 15 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट), कोरबा द्वारा पारित किया गया था.
क्या था मामला
प्रकरण में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 तथा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) व 3(1)(एस) के तहत अपराध दर्ज था. यह मामला कोरबा जिले के अजाक थाना में दर्ज अपराध से संबंधित है. विशेष न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य ने हाईकोर्ट में अपील दायर की.
108 दिन की देरी बनी वजह
राज्य की ओर से दायर अपील में 108 दिन की देरी हुई थी. राज्य के वकील ने तर्क दिया कि फाइल प्रक्रिया, विधि एवं विधायी कार्य विभाग से अनुमोदन, तथा महाधिवक्ता से राय लेने में समय लगने के कारण देरी हुई, जो जानबूझकर नहीं थी. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने कहा कि, केवल विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता. राज्य को भी लिमिटेशन कानून का पालन करना होगा. सरकारी अधिकारियों की लापरवाही या ढिलाई को उचित कारण नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं दी जा सकती. हाईकोर्ट ने स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश बनाम रामकुमार चाैधरी (2024) मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अत्यधिक देरी पर सख्त रुख अपनाया है और 1788 दिनों की देरी वाली अपील को खारिज कर दिया था. इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने देरी माफी आवेदन को खारिज कर दिया. इसके साथ ही मुख्य आपराधिक अपील भी स्वतः खारिज हो गई.
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर जांच तेज, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक को तत्काल कार्रवाई करने पत्र जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री राजवाड़े के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक ने छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक को पत्र जारी कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने कहा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में साड़ी वितरण के लिए जारी किए गए क्रय आदेश के तहत कुछ जिलों से गुणवत्ता में कमी और निर्धारित मापदंडों में विचलन की शिकायतें प्राप्त हुई है।
जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई
विभागीय स्तर पर गठित जांच समिति द्वारा किए गए परीक्षण में कुछ स्थानों पर मानकों से विचलन की पुष्टि भी हुई है। इसके बाद अब मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। संचालक महिला एवं बाल विकास की ओर से जारी पत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित कर साड़ियों की पुनः गुणवत्ता जांच कराएं। यदि जांच में मापदंडों से किसी प्रकार का विचलन पाया जाता है तो संबंधित एजेंसियों और आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
खराब साड़ियों को वापस लेकर नई साड़ियां देने के निर्देश
इसके अलावा जिन स्थानों पर निम्न गुणवत्ता की साड़ियां वितरित हुई हैं, वहां उन्हें तत्काल वापस लेकर गुणवत्तापूर्ण नई साड़ियां उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ लोगों द्वारा इस मामले को लेकर भ्रामक एवं नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि शासन स्तर पर पूरे मामले को संज्ञान में लेकर पारदर्शी ढंग से आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
रायपुर निगम की बड़ी कार्रवाई: 8 बकायादारों के व्यवसायिक परिसरों पर लगा ताला
रायपुर। रायपुर नगर पालिक निगम जोन 8 के राजस्व विभाग ने विगत कई वर्षों से बकाया राशि जमा नहीं कर रहे वार्ड 1 एवं 2 क्षेत्र के 8 बड़े बकायादारों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनके संबंधित 8 व्यवसायिक परिसरों को तत्काल सीलबंद कर दिया।
रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त विश्वदीप के आदेशानुसार और अपर आयुक्त राजस्व कृष्णा खटीक, उपायुक्त राजस्व जागृति साहू तथा जोन 8 जोन कमिश्नर राजेश्वरी पटेल के निर्देशानुसार, नगर निगम जोन 8 सहायक राजस्व अधिकारी महादेव रक्सेल के मार्गदर्शन एवं राजस्व निरीक्षक राजेश मिश्रा, सहायक राजस्व निरीक्षक सर्वश्री नरेंद्र ठाकुर, खगेंद्र सोनी, राम कुमार औसर की उपस्थिति में यह कार्रवाई की गई।
नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 8 के अंतर्गत वीर सावरकर नगर वार्ड क्रमांक 1 और पंडित जवाहर लाल नेहरू वार्ड क्रमांक 2 क्षेत्र में 8 बड़े बकायादारों द्वारा कई वर्षों से बकाया राशि जमा नहीं की जा रही थी। निगम द्वारा डिमांड बिल, डिमांड नोटिस और अंतिम नोटिस जारी किए जाने के बाद भी भुगतान नहीं करने पर अभियान चलाकर संबंधित परिसरों में ताला लगाकर सीलबंदी की कार्रवाई की गई।
जोन कमिश्नर राजेश्वरी पटेल एवं सहायक राजस्व अधिकारी महादेव रक्सेल ने बताया कि वीर सावरकर नगर वार्ड क्रमांक 1 में 91,572 रुपये के बकायादार रामपाल लहरी, 91,572 रुपये के बकायादार सुकलहीन लहरी, 2,05,000 रुपये के बकायादार मो. अब्दुल कलाम, 4,00,389 रुपये के बकायादार बलविंदर सिंह, 77,859 रुपये के बकायादार ओमप्रकाश तिवारी तथा 2,05,879 रुपये के बकायादार अंकित साव के परिसरों को सीलबंद किया गया।
इसी प्रकार पंडित जवाहर लाल नेहरू वार्ड क्रमांक 2 में 5,07,539 रुपये के बकायादार निखिल ट्रेडर्स और 8,36,874 रुपये के बकायादार संतोषी देवी/रामनिवास के व्यवसायिक परिसरों में भी ताला लगाकर सीलबंदी की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई नगर निगम जोन 8 राजस्व विभाग की टीम द्वारा मौके पर की गई।