रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही वर्षा तथा मौसम विभाग द्वारा कई जिलों के लिए जारी रेड एवं येलो अलर्ट को देखते हुए सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उच्च सतर्कता (हाई अलर्ट) पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे संभावित बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखें तथा संवेदनशील स्थानों की पहचान कर आवश्यक एहतियाती कदम तत्काल उठाएं। जिन क्षेत्रों में आवश्यकता हो, वहां लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की संभावना न रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में राहत एवं बचाव की समुचित तैयारियां पहले से सुनिश्चित की जाएं। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों, प्राथमिक उपचार, बिजली, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहे। साथ ही वृद्धजनों, महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांगजनों जैसे संवेदनशील वर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत वितरण कंपनी तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता बनाए रखें। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों, उपकरणों, नावों तथा राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला एवं राज्य स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए तथा मौसम की स्थिति, जलाशयों के जलस्तर, नदी-नालों की स्थिति और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित समीक्षा की जाए। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लेते हुए राहत एवं बचाव कार्य तत्काल प्रारंभ किए जाएं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि वे मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अनावश्यक रूप से नदी-नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन की सतर्कता, समयबद्ध कार्रवाई और जनसहयोग से किसी भी संभावित आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार, नई रेल परियोजनाओं तथा लंबित रेल लाइनों की प्रगति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडे उपस्थित थे।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के औद्योगिक, खनिज एवं कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल यातायात सुविधा का विषय नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन, जनजातीय अंचलों के विकास तथा क्षेत्रीय संतुलित प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है और राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है।
बैठक में कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों संस्थाओं की साझेदारी में एक स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। यह रेल लाइन कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी तथा ऐसे अनेक क्षेत्रों को पहली बार रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा लाखों नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।
बैठक में रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 140 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है तथा रेलवे द्वारा निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने से बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की तीन अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं - सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) तथा अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) - को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किलोमीटर) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) (490 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर आगामी कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिससे बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो सके तथा विकास एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को गति मिले।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।
रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव आज जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित कार्यशाला में महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जल आपूर्ति की योजनाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए बारिश के पानी का संचय और जल संरक्षण आवश्यक है। यह भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही दीर्घ काल तक जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बनाए रखेगा।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यशाला में सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। उन्होंने नल जल योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए पंचायतों द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में पूछा। उन्होंने गांवों में जलस्रोतों, जल की गुणवत्ता के नियमित परीक्षण तथा रखरखाव शुल्क की भी जानकारी ली। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।
कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत पर व्यापक विचार-विमर्श और बेस्ट प्रेक्टिसेस पर गहन चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने इस दौरान जल जीवन मिशन के तहत अपनी-अपनी पंचायतों में जल आपूर्ति की व्यवस्था तथा नल जल योजना के संचालन-संधारण के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को नल जल योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के गुर बताए।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यशाला में कहा कि जल आपूर्ति के लिए उपयोग हो रहे जल स्रोतों की देखभाल और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है। इसके टिकाऊपन (Sustainability) पर ही योजना की दीर्घकालीन सफलता निर्भर है। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के काम पूर्ण होने तथा पंचायतों को इसके हस्तांतरण के बाद इसका संचालन व संधारण ग्राम पंचायतों को करना है। जल जीवन मिशन हमारे घर और हमारे गांव के लिए योजना है। ग्राम पंचायतों को गांववालों के साथ मिलकर जल आपूर्ति की व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। श्री साव ने जल स्तर बनाए रखने तथा भू-जल स्रोतों को रिचार्ज करने स्टॉपडैम बनाने और बारिश के पानी को संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव के अवरोधों व अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को अच्छे से भरने की व्यवस्था सभी गांवों को करना चाहिए।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ श्वेता पटनायक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता समीर गौड़ भी कार्यशाला में मौजूद थे।
रायपुर। महानदी जल बंटवारे से जुड़े विषयों के सौहार्दपूर्ण एवं स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। इसका जल किसानों की आजीविका, पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को किसी विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच संवाद और सहयोग का जो वातावरण बना है, वह भविष्य में स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मजबूत आधार बनेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ओडिशा की सिंचाई, पेयजल तथा हीराकुंड परियोजना से जुड़ी आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करती है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी अंचलों, सूखा प्रभावित क्षेत्रों तथा राज्य की भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं और समाधान भी ऐसा होना चाहिए जिससे किसी भी पक्ष के हित प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञ उपलब्ध जल की मात्रा तथा उससे जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन कर चुके हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर भविष्य उन्मुख एवं व्यवहारिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कम वर्षा वाले सालों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार की जाए, जिससे किसी भी राज्य को कठिनाई का सामना न करना पड़े। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित किया जाए, जो समय-समय पर जल उपलब्धता, उपयोग और आवश्यकताओं की समीक्षा करता रहे।
मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर अधिकतम विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत महत्व के विषयों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर विचार के लिए लाया जाए। उन्होंने कहा कि इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल तथा केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने तथा दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सकारात्मक पहल दोनों राज्यों के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी तथा समाधान की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद और राज्यों के बीच समन्वय की भावना ने वर्षों से लंबित जटिल विषयों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण तथा भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बने।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर। बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।
प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।
राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।
बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।
उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।
राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की अनुपम कलाकृति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।
लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ तथा मिटकी को ‘गप्पा देई’ के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विशेष सचिव रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर। हाल में राज्य में तीन लोगों की मलेरिया से मौत हुई है, इसे छिपाया नहीं जा सकता है. लेकिन एक भी मौत मलेरिया से न हो, इस दिशा में सरकार काम कर रही है. यह बात स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने आज पत्रकारों से चर्चा के दौरान मलेरिया के खिलाफ जारी लड़ाई को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता बताते हुए कही.
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने आज लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों का लेखा-जोखा पेश किया. मलेरिया के खिलाफ जारी लड़ाई को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मलेरिया नियंत्रण में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय मॉडल बना. कभी बस्तर की पहचान मलेरिया जैसी गंभीर चुनौती से होती थी. लेकिन आज वहीं क्षेत्र मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की सफलता का राष्ट्रीय उदाहरण बनकर उभरा है.
उन्होंने बताया कि सरकार की रणनीतिक कार्ययोजना, स्वास्थ्य विभाग के सतत् प्रयासों एवं जनसहभागिता के परिणामस्वरूप घर-घर सर्वेक्षण, समय पर जाँच, त्वरित उपचार, प्रभावी वेक्टर नियंत्रण तथा व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है. जबकि राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 पर पहुँच गया है.
श्याम बिहारी ने बताया कि वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2025 तक मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है. उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में 16.97 लाख कीटनाशकयुक्त मच्छरदानियों का वितरण कर मलेरिया नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया. इन उपलब्धियों के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में सम्मानित किया गया है.
मंत्री जायसवाल ने कहा कि बस्तर जहाँ लोगों ने दवा, नर्स, डॉक्टर नहीं देखे थे, उन्हें घर पहुंच इलाज मिल रहा है. नक्सलवाद के वजह विकास बाधित था. नक्सलवाद मुक्ति के बाद मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान चलाया गया, जिसमें 34 लाख से ज़्यादा लोगों तक स्वास्थ्य विभाग पहुंचा.
उन्होंने कहा कि बीमारी देखे, खून चेक किया गया, बीमारी पकड़ में आई, फिर इलाज कराया गया और कुछ का इलाज जारी है. 60 हजार मरीजों को रेफर उच्च हॉस्पिटल भेजा गया. 10 हजार से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर काम किया गया. दो सालों में एक हज़ार डॉक्टरों की भर्ती की गई है. मातृत्व मृत्यु दर 142 से घट कर 122 हुआ है.
आधारभूत संरचनाओं का विकास
स्वास्थ्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य के आधारभूत संरचनाओं के विकास की जिक्र करते हुए कहा कि अति महत्वपूर्ण 3 नवीन मेडिकल कॉलेज कांकेर, कोरबा एवं महासमुंद के लिए निर्धारित कार्य किया गया है. जिनकी लागत क्रमशः राशि 321.71 करोड़, रुपए, 322.85 करोड़ रुपए, 321.80. करोड़ रुपए (कुल लागत राशि 966.36 करोड़ रुपए है. जिन्हें दिसंबर 2026 तक पूर्ण किए जाने का लक्षित किया गया है.
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में चार नवीन चिकित्सा महाविद्यालय भवन, मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम एवं गीदम (दंतेवाड़ा) का शिलान्यास प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है. जिसका निर्माण लागत क्रमशः राशि 362.586 करोड़ रुपए, 357.247 करोड़ रुपए, 357.247 करोड़ रुपए एवं राशि 366.515 करोड़ रुपए मिलाकर कुल लागत राशि 1443.57 करोड़ रुपए है.
इसके साथ बताया कि निर्माणाधीन चारों नवीन चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण त्वरित गति से किया जा रहा है. आगामी 2 वर्षों में पूर्ण किए जाने का लक्षित किया गया है. इसके अतिरिक्त आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र जिला जशपुर के कुनकुरी में नवीन चिकित्सा महाविद्यालय सृजन एवं निर्माण कार्य के लिए राशि 359.00 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है. निविदा की कार्रवाई अंतिम चरण में है. आगामी 2 वर्षों में पूर्ण करने के लिए लक्षित किया गया है.
सिम्स के लिए निविदा कार्रवाई प्रक्रियाधीन
उन्होंने बताया कि बिलासपुर जिले के कोनी में छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान एवं चिकित्सालय के अधोसंरंचना एवं चिकित्सा सुविधाओं में आधारभूत परिवर्तन करने के लिए कोनी जिला बिलासपुर में भवन निर्माण एवं अधोसंरचना कार्य के लिए राशि 1412.44 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें निविदा की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
रायपुर में 700 बेड एकीकृत चिकित्सालय
मंत्री ने बताया कि रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सा महाविद्यालय में 700 बेड एकीकृत चिकित्सालय भवन निर्माण के लिए 376.22 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें निविदा दर स्वीकृति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. इसके अलावा बिलासपुर में आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिए 93.24 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. कार्य प्रगतिरत पर है, जिसको नवम्बर 2027 में पूर्ण करने का लक्षित किया गया है.
5 नवीन नर्सिंग कॉलेजों का कार्य प्रगति पर
राज्य में कुल 14 नवीन नर्सिंग महाविद्यालय, जिसमें 11 नर्सिंग महाविद्यालय एवं 3 नर्सिंग एवं छात्रावास शामिल हैं, के निर्माण की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 5 नवीन नर्सिंग महाविद्यालय का कार्य प्रगतिरत है, वहीं 10 नर्सिंग महाविद्यालय निर्माण कार्य का कार्यदिश जारी किया जा चुका है. इसके अलावा 2 कार्य मनेन्द्रगढ़ एवं सारंगढ़-बिलैगढ़ के सरिया की निविदा की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
नवीन जिला अस्पताल
मंत्री ने बताया कि जिला अस्पताल, मनेन्द्रगढ़, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मोहला-मानपुर-गंडई, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 190 करोड़ रुपए की लागत से 200 बेड अस्पताल का कार्य त्वरित गति से प्रगतिरत है. मनेन्द्रगढ़ एवं कुनकुरी में 220 बेड अस्पताल का निर्माण कार्य 72.25 करोड़ रुपए की लागत से त्वरित गति से प्रगतिरत है.
नवीन सिविल अस्पताल 100 बिस्तर
उन्होंने बताया कि रायपुर जिले के सरोना और धमतरी जिला के कुरूद, कोरबा जिला के कटघोरा, सांरगढ़-बिलाईगढ़ जिला के सरिया में 100 बेड अस्पताल का कार्य त्वरित गति से प्रगतिरत है. इसके साथ जिला गौरेला-पेड्रा-मरवाही, जिला महासमुंद के बसना एवं रायपुर जिला के राखी नवा रायपुर में 100 बेड अस्पताल का कार्य का कार्यादेश जारी किया गया है. जिला रायगढ़ के पुसौर, जिला-गरियाबंद एवं जिला बेमेतरा में 100 बेड अस्पताल का कार्य निविदा दर स्वीकृति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. जिसकी कुल लागत राशि रू. 180.44 करोड़ का कार्य प्रारंभ किया गया है.
नवीन फिजियोथेरेपी महाविद्यालय
इसके साथ उन्होंने बताया कि राज्य में 06 जिलों में नवीन फिजियोथेरेपी महाविद्यालय का निर्माण के लिए 83.63 करोड़ रुपए, प्रत्येक कार्य की राशि 13.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जशपुर में नवीन फिजियोथेरेपी महाविद्यालय का निर्माण कार्य त्वरित गति से प्रगतिरत है तथा जिला मनेन्द्रगढ़ एवं जिला बस्तर में निर्माण कार्य का कायदिश जारी किया गया है.
10 बिस्तरीय शैय्यायुक्त योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्रों
उन्होंने बताया कि जिला रायगढ़ एवं जिला जशपुर में 10 बिस्तरीय शैय्यायुक्त योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्रों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, एवं बस्तर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर जिले में 11.22 करोड़ रुपए की लागत से 10 बिस्तरीय शैय्यायुक्त योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र निर्माण कार्य की स्वीकृति पत्र जारी किया गया है. वहीं जिला दुर्ग के शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में 10.50 करोड़ रुपए की लागत से नवीन 30 बिस्तर जिला आयुर्वेदा हॉस्पिटल भवन के निर्माण की निविदा प्रक्रियाधीन है.
राज्य कैंसर संस्थान का 80 प्रतिशत काम पूर्ण
बिलासपुर में बनाए जा रहे राज्य कैंसर संस्थान का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 80% तक पूर्ण किया जा चुका है. निर्माण की कुल लागत राशि 42.00 करोड़ रुपए है. इसके अलावा 50 बेड क्रिटिकल केयर यूनिट राज्य के 21 स्थानों में निर्माण कार्य के लिए 349.23 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत है, जिसमें 19 कार्य प्रगतिरत है, वहीं 2 कार्यदर स्वीकृति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. बिलासपुर जिला में 24.95 करोड़ रुपए की कुल लागत से 75 बेड क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण प्रगति पर है.
रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम ‘मुस्कुराता बस्तर’ इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।
इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।
कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। ‘मुस्कुराता बस्तर’ अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक प्रयास है।
रायपुर। उत्तरप्रदेश के ललितपुर में हुए सड़क हादसे में घायल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को बेहतर इलाज के लिए आज सुबह झांसी से दिल्ली रेफर किया गया। उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक किरण सिंह देव की हालत खतरे से बाहर है। उनके पैर और कमर में चोट आई है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और जगदलपुर विधायक किरण देव बुधवार को उत्तरप्रदेश में सड़क हादसे के शिकार हुए थे। हादसा झांसी-ललितपुर हाईवे पर उस समय हुआ था, जब वह परिवार के साथ बागेश्वर धाम से दर्शन कर लौट रहे थे। उन्हें तत्काल झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर किरण देव अपने परिवार के साथ बागेश्वर धाम गए थे। वापसी के दौरान झांसी-ललितपुर मार्ग पर सामने से आ रहे एक वाहन को बचाने की कोशिश में उनके चालक ने अचानक ब्रेक लगाया। इससे कार का संतुलन बिगड़ गया और कार ट्रक में घुस गई।
हादसे के वक्त किरण देव के साथ उनकी सुरक्षा में तैनात पीएसओ भी वाहन में मौजूद थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य दूसरी कार में सफर कर रहे थे। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। इस हादसे में किरण सिंह देव का चालक भी घायल हुआ है।
सूरजपुर। जिले के नए एसपी योगेश पटेल ने बड़ा फेरबदल किया है। कई थाना और चौकी प्रभारियों को इधर से उधर किया गया है। सूरजपुर, विश्रामपुर, प्रेमनगर, जयनगर, झिलमिली, रामानुजनगर समेत कई थाना प्रभारी बदले गए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से निरीक्षक, उपनिरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षकों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किया गया है। तत्काल प्रभाव से सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका आदेश जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सूरजपुर से जारी हुआ है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सेक्स CD कांड मामले में हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इस मामले में CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह अंतरिम आदेश जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की अदालत ने जारी किया है।
भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 24 जनवरी 2026 को CBI की विशेष अदालत द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। विशेष अदालत ने अपने पूर्व के आरोपमुक्ति आदेश को रद्द करते हुए बघेल के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
याचिका में भूपेश बघेल की ओर से विशेष अदालत के उस आदेश पर आपत्ति जताई गई थी, जिसमें पहले दिए गए आरोपमुक्ति आदेश को निरस्त कर उनके खिलाफ मामले में आरोप तय करने की दिशा में कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया था। अब हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। इससे फिलहाल बघेल के खिलाफ इस मामले में ट्रायल कोर्ट स्तर पर आगे की प्रक्रिया थम गई है।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह अंतरिम राहत है और मामले में अंतिम निर्णय अभी बाकी है। कोर्ट की आगे की सुनवाई में इस याचिका पर विस्तृत विचार किया जाएगा।
भोपाल। मूंग खरीदी को लेकर किसानों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके हित में बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब पात्र किसानों से 25 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत MSP पर मूंग खरीदेगी।
सरकार ने बताया कि भारत सरकार ने इस साल ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। भारत सरकार की योजना के अंतर्गत राज्य के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार के इसी नियम के अंतर्गत निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपार्जित किया जाएगा।
आज किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा के उपरांत, किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर एवं हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा और हमारा प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है।
जहां तक खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था से संबंधित शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं का प्रश्न है, यह व्यवस्था राज्य शासन का एक महत्वपूर्ण सुधार है और आने वाले समय में इससे किसानों को काफी सुविधा एवं लाभ मिलेगा।
यह एक नई व्यवस्था है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त, की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे। सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई -टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में संचालित मिड-डे मील योजना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछते हुए लिखित जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से पूछा कि जब मिलेट चिक्की योजना लागू है, तो सिर्फ 7 जिलों के बच्चों को ही इसका लाभ क्यों दिया जा रहा है, जबकि राज्य के बाकी 26 जिलों के बच्चे इससे वंचित हैं।
अदालत ने इस व्यवस्था पर समानता के अधिकार का सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि सभी जिलों में एक समान व्यवस्था क्यों नहीं लागू की गई।
मिड-डे मील व्यवस्था पर कोर्ट की निगरानी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मिड-डे मील योजना के संचालन को लेकर भी कई अहम निर्देश दिए। अदालत ने खाद्यान्न आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दिया, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की अनियमितता की संभावना कम हो।
इसके साथ ही कोर्ट ने कूपन व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दिए। अदालत का मानना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।
सेंट्रलाइज्ड किचन को सैद्धांतिक मंजूरी
हाईकोर्ट ने मिड-डे मील व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सेंट्रलाइज्ड किचन प्रणाली को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इससे भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। तब तक राज्य सरकार को अदालत के सभी सवालों का विस्तृत लिखित जवाब प्रस्तुत करना होगा।
रायपुर। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को सरकार के खिलाफ बड़े जनआंदोलन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी अब प्रदेशभर में संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ जनता से जुड़े मुद्दों पर व्यापक आंदोलन चलाने की रणनीति पर काम करेगी।
बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर जनता के बीच जाने और विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा संभाग में बड़े जनआंदोलन खड़े करने का निर्देश दिया है। पार्टी का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की जरूरत है।
स्मार्ट मीटर के खिलाफ आंदोलन होगा तेज
बैठक में प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस को इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज करने का टास्क दिया गया है। पार्टी बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाएगी।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की रणनीति
प्रदेश कांग्रेस को संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की भी जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
कांग्रेस का लक्ष्य आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए संगठन को अधिक मजबूत बनाना और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरना है। दिल्ली में हुई बैठक के बाद प्रदेश नेतृत्व अब इन रणनीतियों को जमीन पर उतारने की तैयारी में जुट गया है।
रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी नई दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठक में बेहतर संगठन निर्माण एवं छत्तीसगढ़ कांग्रेस कनेक्ट सेंटर की रिपोर्टिंग के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन-प्रशासन) मलकीत सिंह गैंदू ने प्रदेश कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों, बूथ अध्यक्षों और समस्त कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।
मलकीत सिंह गैंदू ने कहा कि यह गौरवपूर्ण उपलब्धि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व, छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के मार्गदर्शन का परिणाम है। सह-प्रभारियों एस. संपत कुमार, ज़रीता लैथफ्लांग और विजय जांगिड़ के समन्वय तथा बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कार्यरत सभी कांग्रेसजनों के अथक परिश्रम से प्रदेश कांग्रेस को यह उपलब्धि हासिल हुई है।
संगठन को और मजबूत बनाने का आह्वान
गैंदू ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता के परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने सभी कांग्रेसजनों का आह्वान करते हुए कहा कि संगठन को और अधिक मजबूत बनाते हुए जनता के हक और अधिकार की लड़ाई को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे, ताकि पार्टी की गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
रायपुर। मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक की बुधवार को संपन्न हुई। बैठक को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि धान खरीदी को अधिक सरल, सुगम और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
25% नहीं, केवल 10% ब्रोकन चावल लिया जाएगा
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि धान खरीदी के दौरान बारदाने की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कोई भी पूल से 25% ब्रोकन चावल नहीं लिया जाएगा। अब केवल 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल ही लिया जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि सेंट्रल पूल और राज्य पूल में धान देने के बाद जो धान बच जाता था, उसे राज्य सरकार नीलाम करती थी। अब नीलामी के लिए धान बचेगा ही नहीं।
उन्होंने बताया कि धान खरीदी को सरल और सुलभ बनाने को लेकर भी चर्चा हुई है। धान मिलिंग और धान खरीदी को लेकर रणनीति बनाई गई है।
उप मंत्रिमंडलीय समिति में मंत्री दयालदास बघेल, मंत्री टंकराम वर्मा, मंत्री रामविचार नेताम और श्याम बिहारी जायसवाल शामिल हैं। बता दें कि देशभर में सर्वाधिक मूल्य पर छत्तीसगढ़ में किसानों से धान खरीदा जाता है। राज्य में प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जाती है।
बीजापुर। झारखंड राज्य में सक्रिय 8 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 5 महिलाएं शामिल हैं। इन सभी पर कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था। झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सहयोग से यह आत्मसमर्पण कराया गया।
पुलिस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, बीजापुर जिले में संचालित पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रमों तथा पूर्व माओवादी कैडरों के सफल पुनर्वास से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। लंबे समय से झारखंड के विभिन्न इलाकों में सक्रिय रहे इन कैडरों ने संगठन की हिंसक और जनविरोधी विचारधारा से मोहभंग, सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों को भी आत्मसमर्पण का प्रमुख कारण बताया।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडर
अश्विन उर्फ लच्छू — DVCM/ZCM, दक्षिण जोनल कमेटी, झारखंड; इनाम 8 लाख रुपये।
रंगा उर्फ सोहन — सरांडा सब जोनल कमेटी सदस्य/DVCM; इनाम 8 लाख रुपये।
दोबा माड़वी उर्फ राहत — सरांडा सब जोनल कमेटी सदस्य/DVCM; इनाम 8 लाख रुपये।
फगनी पोयम उर्फ रजनी — कोल्हान एरिया कमेटी सदस्य/ACM; इनाम 5 लाख रुपये।
सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी — कोल्हान एरिया कमेटी सदस्य/ACM; इनाम 5 लाख रुपये।
हिड़मे कड़ती उर्फ रीता — कोल्हान एरिया कमेटी सदस्य/ACM; इनाम 5 लाख रुपये।
बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा — कोल्हान एरिया कमेटी सदस्य/ACM; इनाम 5 लाख रुपये।
सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी — ERB स्टॉप पार्टी सदस्य/पार्टी मेम्बर; इनाम 5 लाख रुपये।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत नियमानुसार आर्थिक सहायता और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित करने के लिए निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग भी दिया जाएगा।
पुलिस ने बताया कि इस आत्मसमर्पण में झारखंड पुलिस, CRPF और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, विश्वास निर्माण और संवेदनशील कार्यशैली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुरक्षा बलों की सक्रियता और पुनर्वास की सकारात्मक पहल से प्रभावित होकर इन माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन जीने का निर्णय लिया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। राज्य सरकार द्वारा अपने वादे के अनुरूप बजट वर्ष 2026-27 में घोषित ‘कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना’ को धरातल पर उतारने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस महात्वाकांक्षी योजना को सुचारू और पारदर्शी तरीके से लागू करने के उद्देश्य से सोमवार को नया रायपुर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में एक विशेष बैठक बुलाई गई।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रदेश के प्रमुख कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य योजना के ड्राफ्ट पर कर्मचारियों की राय लेना और उनकी शंकाओं का समाधान करना था। स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसी त्रुटिहीन व्यवस्था बनाना है, जिससे किसी भी शासकीय सेवक को बीमारी के समय इलाज के लिए भटकना न पड़े या दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
स्वास्थ्य विभाग ने दिया प्रेजेंटेशन
बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के तकनीकी और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक विस्तृत डिजिटल प्रस्तुतीकरण दिया। इस प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना के प्रमुख पहलुओं को रेखांकित किया गया, जिसमें सबसे पहले शासकीय सेवकों को योजना का लाभ देने के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सरल पंजीकरण प्रक्रिया को समझाया गया। इसके साथ ही राज्य और राज्य के बाहर के प्रमुख निजी एवं सरकारी अस्पतालों को इस योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध करने और अस्पतालों व सरकार के बीच दावों के निपटारे के लिए एक मजबूत आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर पारदर्शी क्लेम सेटलमेंट सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई ताकि अस्पतालों को समय पर भुगतान हो सके और इलाज में कोई बाधा न आए।
मंत्रालय कर्मचारी संघ ने रखा सुझाव
बैठक में मंत्रालय कर्मचारी संघ ने इस योजना का जोरदार स्वागत किया और इसे शासकीय सेवकों के हित में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम बताया। संघ ने योजना को तैयार करने में सम्मिलित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही योजना के शत-प्रतिशत सफल और व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए संघ द्वारा स्वास्थ्य सचिव के समक्ष कई महत्वपूर्ण और दूरगामी सुझाव रखे गए।
संघ ने सुझाव दिया कि योजना को सुचारू रूप से संचालित करने वाले प्रशासनिक अमले की पर्याप्त व्यवस्था की जाए और योजना के मुख्य हेड में पर्याप्त राशि का प्रावधान हमेशा रखा जाए ताकि कर्मचारियों के क्लेम भुगतान में देरी न हो और इलाज के दौरान कोई दिक्कत न आए। सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संघ ने मांग की कि किसी इमरजेंसी (आपात स्थिति) में यदि गैर-मान्यता प्राप्त अस्पताल में भी भर्ती होना पड़े, तो वहां भी कैशलैस इलाज की त्वरित व्यवस्था के लिए विशेष निर्देश जारी किए जाएं।
इसके अलावा ऐसे मान्यता प्राप्त अस्पताल जहां एमआरआई, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी या एक्स-रे जैसी आवश्यक डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें अन्य सुसज्जित जांच संस्थानों से संबद्ध (Link) किया जाए ताकि किसी भी गंभीर परिस्थिति में कर्मचारियों को जांच के लिए भटकना न पड़े। संघ ने यह सुझाव भी दिया कि जो कर्मचारी केवल ओपीडी के माध्यम से अपना इलाज करा रहे हैं, उन्हें सरकारी केंद्रों या संबद्ध काउंटरों से बेहतरीन और उच्च क्वालिटी की दवाइयां मुफ्त मुहैया कराने की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
स्वास्थ्य सचिव ने सुझावों को अंतिम ड्राफ्ट में शामिल करने का दिया आश्वासन
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने मंत्रालय कर्मचारी संघ के इन सभी व्यावहारिक सुझावों को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि दूरस्थ क्षेत्रों के कर्मचारियों की सुरक्षा और अस्पतालों में उच्च स्तरीय जांच व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इन बिंदुओं को योजना के अंतिम ड्राफ्ट और गाइडलाइंस में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
इस बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार जल्द ही इस कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना की आधिकारिक लॉन्चिंग तिथि की घोषणा कर सकती है, जिससे राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी।
नई दिल्ली/रायपुर। भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल को जानकारी देते हुए बताया कि देश की गैर-जीवाश्म (नॉन-फॉसिल) बिजली उत्पादन क्षमता 30 जून 2026 तक बढ़कर 297.36 गीगावॉट हो गई है, जो देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 548.85 गीगावॉट का 54.18 प्रतिशत है। साथ ही, पिछले दो वित्तीय वर्षों में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 5.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 22 जुलाई 2026 तक 48.02 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं, जिससे 14,180.89 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ी है। वहीं, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने से सोलर मॉड्यूल के आयात में 77 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। वित्त वर्ष 2023-24 में 4,354 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात घटकर 2025-26 में 994 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी इस राष्ट्रीय लक्ष्य में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है और विकेंद्रीकृत सौर परियोजनाओं, पीएम सूर्य घर योजना तथा बिजली ग्रिड के विस्तार के माध्यम से वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में योगदान देगा।
मंत्रालय के अनुसार, देश में वर्तमान गैर-जीवाश्म क्षमता में 162.15 गीगावॉट सौर ऊर्जा, 57.44 गीगावॉट पवन ऊर्जा, 52.06 गीगावॉट बड़े जलविद्युत, 11.75 गीगावॉट जैव ऊर्जा, 5.18 गीगावॉट लघु जलविद्युत और 8.78 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
इसके अलावा, वर्ष 2014-15 में 190.96 बिलियन यूनिट रहे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी होकर 2025-26 में 477.79 बिलियन यूनिट हो गई है। कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी भी 17 प्रतिशत से बढ़कर 25.97 प्रतिशत पहुंच गई है।
केंद्र सरकार ने 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल क्षमता हासिल करने के लिए पीएलआई योजना, ग्रिड और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, ऊर्जा भंडारण प्रणाली, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजनाओं और पीएम-कुसुम योजना को तेजी से लागू करने की रणनीति पर काम करने की जानकारी दी।