प्रदेश
कोर्ट की गाइडलाइन का पालन, DJ-धुमाल संचालकों ने पुलिस से की समन्वय बैठक
रायपुर। विवाह सीजन के दौरान डीजे और धुमाल को लेकर होने वाली शिकायतों और विवादों को देखते हुए प्रदेश में पहली बार पुलिस अधिकारियों और डीजे-धुमाल संचालकों की प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डीजे और धुमाल संचालकों ने स्वयं पहल करते हुए पुलिस अधिकारियों से चर्चा की और नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया।
बैठक में डीजे-धुमाल संचालकों ने स्पष्ट कहा कि वे प्रशासन द्वारा तय सभी नियमों का पालन करेंगे, ताकि विवाह और अन्य कार्यक्रमों के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या विवाद की स्थिति न बने। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि रात 10 बजे के बाद किसी भी कार्यक्रम में डीजे या धुमाल नहीं बजाया जाएगा। संचालकों ने कहा कि वे समय सीमा और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करेंगे। अपने साथ जुड़े अन्य संचालकों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे।
वहीं पुलिस अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि विवाह सीजन में लोगों की सुविधा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। यदि कोई संचालक नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि कार्यक्रमों के दौरान पुलिस और डीजे संचालकों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाएगा, ताकि अनावश्यक विवाद और शिकायतों से बचा जा सके। इस पहल को विवाह सीजन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
कोर्ट की सख्त गाइडलान का पालन करने के निर्देश
होली पर्व समाप्त होने के बाद नवरात्रि, रामनवमी के बाद 27 मार्च से शादी सीजन शुरू हो जाएगा। शादी का सीजन शुरू होने के साथ ही रामनवमी में डीजे, धुमाल की डिमांड बढ़ जाती है। डीजे, धुमाल को लेकर हाईकोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइड लाइन है। ऐसी स्थिति में नियमों की अनदेखी करने पर डीजे, धुमाल वालों के साथ पुलिस कार्रवाई करती है। इस स्थिति से बचाव के लिए शुक्रवार को डीजे संचालकों का रायपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। डीजे संचालकों की सम्मेलन में विशेष रूप से रायपुर सेंट्रल के एडीसीपी तारकेश्वर पटेल, एसीपी सेंट्रल रमाकांत साहू के साथ एसीपी ट्रैफिक सतीश ठाकुर उपस्थित रहे।
पुलिस अफसरों ने नियम कानून की दी जानकारी
डीजे संचालकों के सम्मेलन में पुलिस अफसरों ने रायपुर के साथ दूसरे जिलों से आए डीजे संचालकों को परेशानी से बचने नियमों का कैसे पालन करना है, इस संबंध में विस्तार से नियम कानूनों के बारे में जानकारी दी। डीजे संचालकों ने अपने सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि उन लोगों द्वारा आगामी वैवाहिक सीजन व अन्य समारोह में तय मानक के आधार पर निर्धारीत डेसिबल में डीजे, धुमाल बजाएंगे। रात 10 बजे के बाद डीजे, धुमाल बंद कर दिया जाएगा। रायपुर के डीजे संचालकों ने कहा कि जो डीजे संचालक नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ वे स्वयं जुर्माने की कार्रवाई करेंगे।
देवभोग के गणेश सोनी का कमाल, ऑल इंडिया NCC कोर्स में दो ट्रॉफी जीतकर रचा इतिहास
गरियाबंद। जिले के देवभोग एनसीसी यूनिट के केयरटेकर गणेश सोनी ने ऑल इंडिया एएनओ (Associate NCC Officer) प्री-कमीशन कोर्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेकंड ऑफिसर पद पर कमीशन प्राप्त किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने सर्वोच्च अंक हासिल कर ऑल इंडिया स्तर पर छत्तीसगढ़ को प्रथम स्थान दिलाया और एक साथ दो ट्रॉफी जीतकर नया रिकॉर्ड भी बनाया।
दरअसल, डायरेक्टर जनरल नेशनल कैडेट कोर (NCC), नई दिल्ली के निर्देशन में भारतीय वायु सेना एनसीसी द्वारा तमिलनाडु के चेन्नई में 104वां जेडीपीसी प्री-कमीशन कोर्स 5 जनवरी से 28 फरवरी तक आयोजित किया गया था। 56 दिनों तक चले इस कठिन प्रशिक्षण शिविर में देशभर के विभिन्न एनसीसी यूनिट से 47 केयरटेकर ऑफिसर प्रशिक्षण के लिए शामिल हुए थे। इनमें आंध्रप्रदेश-तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु-पांडिचेरी, अंडमान-निकोबार, उत्तराखंड, बिहार-झारखंड, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, नॉर्थ-ईस्ट रीजन, पंजाब-हरियाणा-हिमाचल-चंडीगढ़, केरल-लक्षद्वीप, कर्नाटक-गोवा और दिल्ली के प्रतिभागी शामिल थे।
इस कोर्स में गणेश सोनी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए “फर्स्ट इन ऑर्डर ऑफ मेरिट” और “बेस्ट इन एकेडमिक” ट्रॉफी अपने नाम की। इस उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ को ऑल इंडिया स्तर पर पहला स्थान मिला। खास बात यह है कि किसी एक राज्य द्वारा एक साथ दो ट्रॉफी जीतने का यह पहला मौका बताया जा रहा है।
गणेश सोनी का चयन ग्रुप हेडक्वार्टर रायपुर में साक्षात्कार के बाद पुरुष वर्ग से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में हुआ था। चेन्नई के एयरफोर्स स्टेशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में विदेशी देशों युगांडा और कनाडा के प्रतिभागियों के साथ भारतीय वायुसेना के गरुण कमांडो भी शामिल रहे। इस कोर्स का संचालन कैप्टन दिग्विजय सिंह चौहान द्वारा किया गया, जिन्होंने अब तक 13,000 से अधिक फ्लाइंग घंटे पूरे किए हैं।

सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक कड़ा प्रशिक्षण
56 दिनों के प्रशिक्षण में सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित होती थीं। इसमें ड्रिल ट्रेनिंग, वेपन ट्रेनिंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की जानकारी, टेक्निकल और स्पेशल सब्जेक्ट, कंट्रोल लाइन मॉडल, रेडियो कंट्रोल मॉडल, चक ग्लाइडर निर्माण सहित भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण विमान किरण, पिलाटस पीसी-7 और चेतक हेलीकॉप्टर से जुड़ी जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण के अंत में हुए प्रैक्टिकल, इंटरव्यू और थ्योरी परीक्षा में गणेश सोनी ने 92.16 प्रतिशत अंक हासिल किए।
कमीशन प्राप्त करने वाले जिले से पहले व्यक्ति हैं गणेश सोनी
इस उपलब्धि के साथ गणेश सोनी गरियाबंद जिले से भारतीय वायुसेना (एनसीसी) में सेकंड ऑफिसर (एएनओ) जूनियर डिवीजन के पद पर कमीशन प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। गणेश सोनी की इस उपलब्धि पर 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन एनसीसी रायपुर के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर विवेक कुमार साहू, सेजेस प्राचार्य गिरीशचंद्र बेहेरा, शाला प्रबंधन विकास समिति के अध्यक्ष सुशील यादव, उपाध्यक्ष धनसिंह मरकाम सहित समस्त स्टाफ और प्रबंधन समिति ने उन्हें बधाई दी है। गणेश सोनी ने अपनी सफलता का श्रेय 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन एनसीसी रायपुर, पीआई स्टाफ, अपने परिवार, जन्मभूमि देवभोग और विद्यालय परिवार को देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
BJP नेता के खेत में अफीम की खेती के बाद मचा बवाल, मौके पर पहुंचे पूर्व CM बघेल, पार्टी ने नेताजी को किया निष्कासित
दुर्ग। दुर्ग में भाजपा नेता के खेत में अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज मौके पर पहुंचे। वहीं बघेल के पीछे भारी संख्या में ग्रामीण भी खेत में पहुंच गए, जिन्हें रोकने के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर झूमाझटकी हो गई। वहीं इस घटना से फजीहत होने के बाद भाजपा ने बीजेपी नेता को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। आपको बता दे इस मामले को लेकर जहां कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं जिला प्रशासन और पुलिस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कह रही है।
गौरतलब है कि ये पूरा मामला दुर्ग के समोदा गांव का है। जहां भाजपा किसान मोर्चा के नेताओं के खेत में अफीम की खेती का मामला सामने आया था। अफीम की खेती की सूचना मिलने पर पुलिस ने 6 मार्च को खेत में छापामार कार्रवाई की थी। जिसमें डेढ़ एकड़ के करीब खेत में अफीम के पौधे बरामद हुए। पुलिस की जांच में ग्राम समोदा और झेंजरी के बॉर्डर पर स्थित खेत में अफीम की खेती मिली है। यह खेत ग्राम झेंजरी में आता है। खसरा नंबर 310 की इस जमीन के भूमि स्वामी मधुमति ताम्रकार और प्रीति बाला ताम्रकर पिता सीताराम बताए गए हैं। इस खसरे में कुल 9 एकड़ 92 डिसमिल जमीन है। जिसमें मक्के के फसल के बीच करीब 4 से 5 एकड़ में अफीम किये जाने की बात कही जा रही है। मौके पर पहुंची पुलिस को फिलहाल डेढ़ से दो एकड़ जमीन पर अफीम की फसल मिली है।
पूर्व CM बघेल पहुंचे बीजेपी नेता की खेत पर
पुलिस अभी इस मामले में एक्शन लेती, इसी बीच पूर्व सीएम भूपेश बघेल आज बीजेपी नेता के खेत में पहुंच गये। बघेल के पीछे उनके सैकड़ों समर्थक और स्थानीय ग्रामीण भी खेत तक पहुंचने लगे। मौके पर तैनात पुलिस बल ने जब भीड़ को रोकने का प्रयास किया गया, तो भीड़ के साथ जमकर झूमाझटकी हो गयी। आपको बता दे बीजेपी नेता की खेत में अफीम की खेती की खबर सामने आते ही जहां कांग्रेस इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने में जुट गयी है। वहीं बीजेपी नेता इस पूरे प्रकरण से खुद को अनभिज्ञ बताने में जुटे हुए है।
बीेजेपी नेता को पार्टी ने किया निष्कासित
मक्के की खेती की आड़ में अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद सूबे की राजनीति गरमायी हुई है। इस पूरे मामले में समोदा गांव के सरपंच और सरपंच संघ के उपाध्यक्ष अरुण गौतम ने उक्त जमीन यहां के जमींदार विनायक और बृजेश ताम्रकार की बतायी है। सरपंच ने बताया कि उनके परिवार के कई लोगों के नाम पर यह जमीन दर्ज है। जमीन अधिया में नहीं दी गई है, बल्कि वे खुद ही इसकी खेती कर रहे हैं। इस पूरे मामले में बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनायक ताम्रकर का नाम सामने आने के बाद पार्टी हाईकमान ने तुरंत एक्शन लेते हुए पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई की है।
भाजपा नेता ने अफीम की खेती से झाड़ा पल्ला
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष रहे विनायक ताम्रकर का बयान भी सामने आया है। उन्होने बताया कि उन्हे जानकारी मिली की मेरे बगल वाले गांव झिंझरी में अफीम बोया गया है। मैं अपने खेत को देखने आया हूं। यहां झिंझरी गांव में प्रीतिबाला और मधु बाला के खेत में कोई राजस्थानी लोग चोरी-छिपे अफीम की खेती कर रहे थे। उन्होने कहा कि मामले की जांच पुलिस विभाग की ओर से की जा रही है। खेत मेरा है और मैं अपने खेत में किसी को घुसने नहीं देता। सुरक्षा के लिहाज से मैं किसी को भी अपने खेत में आने से मना करता हूं।
कलेक्टर ने कहा…जांच में जो भी तथ्य सामने आयेंगे उसी आधार पर होगी कार्रवाई
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि अफीम की खेती होने की सूचना मिली थी, जो कि जांच में सही पाई गई है। खेत में मक्का की खेती के बीच मौके पर अफीम की खेती मिली है। अंधेरा होने की वजह से इसकी विस्तृत जांच आज 7 मार्च को भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच के दायरे में आने वाले कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पुलिस पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जायेगा।
महिला दिवस पर बड़ा कदम: 8 से 13 मार्च तक छत्तीसगढ़ में ‘महा जनसुनवाई सप्ताह’
रायपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने राज्य की महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक के नेतृत्व में 8 से 13 मार्च 2026 तक प्रदेश के सभी पांच संभागों में महा जन-सुनवाई सप्ताह आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों से जुड़े महिला उत्पीड़न और पारिवारिक विवादों के मामलों की सुनवाई संभाग स्तर पर की जाएगी, जिससे हजारों परिवारों को त्वरित न्याय और समस्याओं के शीघ्र निराकरण की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अनुसार पिछले साढ़े पांच वर्षों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 370 से अधिक जनसुनवाई आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें 8000 से अधिक मामलों का निराकरण किया गया है। इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए इस बार संभाग स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जगदलपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, अंबिकापुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और जशपुर जिलों के प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला संरक्षण अधिकारी, सखी वन स्टॉप सेंटर की प्रशासिकाएं तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के विधिक सलाहकारों का सहयोग लिया जा रहा है। सुनवाई के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की भी विशेष व्यवस्था रहेगी।
सुबह 10 बजे से होगी सुनवाई
आयोग ने बताया कि सभी संभागों में जनसुनवाई प्रातः 10 बजे से शुरू होगी। जिन आवेदकों के प्रकरण सूचीबद्ध हैं, उन्हें स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य होगा। वहीं जो महिलाएं पहले आवेदन नहीं कर पाई हैं, वे भी सुनवाई स्थल पर अपना नया आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं।
दो न्यायपीठों का गठन
मामलों की संख्या को देखते हुए आयोग ने सुनवाई के लिए दो न्यायपीठ गठित किए हैं। मुख्य न्यायपीठ का नेतृत्व अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और संबंधित संभाग की प्रभारी सदस्य करेंगी। यह पीठ महिला उत्पीड़न के गंभीर मामलों की सुनवाई कर त्वरित निर्णय देगी। सहायक न्यायपीठ में आयोग की अन्य सदस्य शामिल रहेंगी, जहां ऐसे मामलों की सुनवाई होगी जिनमें काउंसलिंग और आपसी समझौते के माध्यम से समाधान संभव है।
संभागवार कार्यक्रम
9 मार्च – सरगुजा संभाग
स्थान: जिला पंचायत सभाकक्ष, अंबिकापुर
जिले: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर
कुल प्रकरण: 101
10 मार्च – बिलासपुर संभाग
स्थान: प्रार्थना भवन, जल संसाधन विभाग परिसर, बिलासपुर
जिले: बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
कुल प्रकरण: 169
11 मार्च – दुर्ग संभाग
स्थान: प्रेरणा सभाकक्ष, जिला महिला एवं बाल विकास विभाग परिसर, दुर्ग
जिले: दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
कुल प्रकरण: 113
12 मार्च – रायपुर संभाग
स्थान: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग कार्यालय परिसर, शास्त्री चौक, रायपुर
जिले: रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद
कुल प्रकरण: 292
13 मार्च – बस्तर संभाग
स्थान: प्रेरणा सभाकक्ष, कलेक्ट्रेट परिसर, जगदलपुर
जिले: बस्तर (जगदलपुर), कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर
कुल प्रकरण: 87
अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बताया कि अब तक प्रदेश के जिलों में 370 से अधिक बार सुनवाई कर चुका है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हमारा यह महा जन-सुनवाई सप्ताह प्रदेश के सभी 33 जिलों की महिलाओं के लिए न्याय का एक बड़ा अवसर है। विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों, सखी सेंटर की टीम और पुलिस प्रशासन के सहयोग से हम इस अभियान को निर्णायक बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा सभी आवेदकों से आग्रह है कि वे सुबह 10 बजे अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। नए आवेदकों का भी स्वागत है हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की कोई भी महिला उत्पीड़न का शिकार न हो और उसे समय पर न्याय मिले।”
पुलिस अधिकारी रुस्तम सारंग खेल एवं युवा कल्याण विभाग में सहायक संचालक नियुक्त किए गए
रायपुर। छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग को खेल एवं युवा कल्याण विभाग में प्रतिनियुक्ति देते हुए सहायक संचालक के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सारंग ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन और उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त किया।
बता दें कि रुस्तम सारंग की खेल उपलब्धियों और अनुभव को सम्मान देते हुए उन्हें खेल एवं युवा कल्याण विभाग में सहायक संचालक के पद पर प्रतिनियुक्ति प्रदान की गई है। लंबे समय से खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की ओर से यह मांग की जा रही थी कि सारंग के अनुभव का लाभ प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को मिलना चाहिए।
रुस्तम सारंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं। खेल के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और उपलब्धियों को देखते हुए राज्य शासन ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीनों से अन्य दायित्वों के चलते वे खेल प्रशिक्षण और गतिविधियों से दूर थे, जिससे कई छोटे खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब नई जिम्मेदारी के साथ वे फिर से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने और खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।
कई उपलब्धियों से भरा रहा रुस्तम सारंग का खेल करियर
छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग का खेल करियर कई उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने वर्ष 2005 में जूनियर एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और छत्तीसगढ़ के पहले अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी बने। इसके बाद 2006 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य और 2007 गुवाहाटी नेशनल गेम्स में रजत पदक हासिल किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2009 मलेशिया, 2011 दक्षिण अफ्रीका और 2012 समोआ में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते। वहीं पेरिस (2011) और कजाखस्तान (2014) वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने कई जूनियर और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप तथा 2015 केरल नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार के शहीद कौशल यादव खेल पुरस्कार, शहीद राजीव पांडेय खेल पुरस्कार और गुंडाधुर सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
रुस्तम सारंग छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी के पद पर पदस्थ रहे और SAI पटियाला से स्पोर्ट्स कोचिंग में डिप्लोमा प्राप्त कर कई युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण भी दिया। हाल ही में उन्होंने खेल से संन्यास की घोषणा की थी। अब खेल एवं युवा कल्याण विभाग में नई जिम्मेदारी के साथ उनसे प्रदेश के खिलाड़ियों को नई दिशा देने की उम्मीद की जा रही है।
होली पर छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री का रिकॉर्ड, दो दिन में 179 करोड़ की मदिरा खपत
रायपुर। होली के मौके पर छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बना दिया। होली के दो दिनों में प्रदेश के मदिरा प्रेमी 1 अरब 79 करोड़ रुपये से ज्यादा की देसी और विदेशी शराब पी गए। जानकारी के अनुसार होली से एक दिन पहले 3 मार्च को ही 128 करोड़ रुपये से अधिक की शराब की बिक्री हुई, जो सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। वहीं 5 मार्च को भी 51 करोड़ रुपये से अधिक की शराब बिकी।
स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन के एमडी पदुम सिंह एल्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में प्रदेश में शराब की औसतन करीब 40 करोड़ रुपये की बिक्री होती है, लेकिन होली के कारण मांग काफी बढ़ गई। उन्होंने कहा कि 3 और 5 मार्च को कुल मिलाकर 179 करोड़ रुपये से अधिक की देसी और विदेशी मदिरा की बिक्री दर्ज की गई है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में एक करोड़ 87 लाख 30 हजार 914 मतदाता हैं और होली पर एक अरब 79 करोड़ से ज्यादा की शराब बिक्री हुई है।

दुबई में फंसी छत्तीसगढ़ की फैमली, वतन वापसी के लिए सरकार से मदद की लगाई गुहार, कहा-
रायपुर। ईरान–इजराइल युद्ध के दौरान पर्यटन के लिए दुबई गए छत्तीसगढ़ की राजधानी का एक परिवार वहां फंस गया है. फंसे हुए परिवार के मुखिया ने सरकार से सुरक्षित वापसी के लिए अपील की है. छत्तीसगढ़ के परिवार के अलावा अन्य राज्यों के लोग होटल में फंसे हुए हैं.
घूमने पहुंचे थे दुबई
राजधानी रायपुर के राजधानी विहार के रहने वाले आकाश साहू, उनकी पत्नी प्रियंका साहू और उनके दो बच्चे दुबई घूमने गए हुए थे. आकाश साहू ने बताया कि उनकी फ्लाइट पहले मुंबई से थी फिर नागपुर से रिशेड्यूल हुई थी. नागपुर से फ्लाइट पड़कर वह लोग 27 फरवरी को दुबई पहुंचे. चार दिनों के टूर के बाद तीन मार्च को वापसी होनी थी. पहला दिन तो सब ठीक रहा पर दूसरे दिन से इमरजेंसी अलर्ट आने शुरू हो गए. बुर्ज खलीफा में उन्होंने दूर से आ रही धमाकों की आवाज सुनी. गार्ड से पूछने पर बताया गया कि रमजान मनाने के लिए केनन फायर की जा रही होगी. अगले दिन एयरपोर्ट, जंगल सफारी और बुर्ज खलीफा बंद कर दिया गया. उनका परिवार दुबई के होटल में फंस गया. 3 मार्च को वापसी की फ्लाइट कैंसिल होकर 9 मार्च को रीशेड्यूल हो गई. इस दौरान बताया गया कि मोबाइल में इमरजेंसी अलर्ट आ रहे हैं. वह जंगल सफारी करना चाहते थे, लेकिन बंद हो गया और ट्रेन यात्रा भी बंद हो गई.
आकाश साहू ने बताया कि आबुधाबी में होटल फ्री कर दिया गया है. दुबई सरकार ने आदेश दिया है कि होटल अपने रेट नहीं बढ़ाएंगे. जो गेस्ट कुछ और समय रुकना चाहतें हैं, उन्हें होटल प्रबंधन को सहयोग करना होगा. आकाश साहू ने बताया कि हमारी होटल का किराया तो नहीं बढ़ाया गया. उन्होंने दो दिनों के लिए होटल एक्सटेंड किया है. सुबह दस बजे चेक आउट टाइम है, फिर भी सुबह पांच बजे से चेक आउट के लिए फोन आ जाता है. एडवांस पेमेंट करके ही होटल में रुक सकते हैं.
सौरभ साहू ने बताया कि तीन को हमारी मुंबई वापसी के बाद मुंबई से रायपुर के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट थी, जो रिशेड्यूल हो गई. टिकट रेट 22 हजार रुपए थी. उन्होंने एयर इंडिया से बात की तो रिशेड्यूलिंग फीस प्रति व्यक्ति 20 हजार रुपए मांगे गए, जिसके कारण टिकट कैंसिल कर दी गई.
आसमान छू रहे फ्लाइट के तत्काल टिकट के दाम : दावा
आकाश साहू ने बताया कि एयरपोर्ट अब खुल गया है. हालांकि तत्काल टिकट के भाव आसमान छू रहे हैं. दावा किया कि टिकट रेट फिलहाल 2 लाख तक चल रहा है. वहीं जो वापस जा पा रहा है, वह अधिक दाम में टिकट खरीद रहे हैं. उनके साथ अमरावती की फैमिली थी, फ्लाइट 9 मार्च को रिशेड्यूल हुई थी. उन्होंने ओमान से वापसी का वीजा और टिकट लिया, जिसमें उनके कुल 43 हजार रुपए खर्च हुए. दुबई से ओमान तक का एक लाख रुपए टैक्सी का किराया भी उन्होंने दिया.
वाई-फाई से कनेक्ट नहीं हो रहा आईफोन
आकाश साहू के अनुसार उनकी पत्नी प्रियंका और दो बच्चों के साथ होटल में नागपुर,अमरावती, खामगांव के 15 से 20 लोग फंसे हैं. उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल रोमिंग और सफिशिएंट डाटा करवा लिया था और डाटा सुरक्षित रखा था. जिसके माध्यम से उन्होंने अपने परिवार को सूचित कर दिया है. आकाश ने बताया कि उनके पास दो फोन हैं. एक आईफोन और दूसरा एंड्रॉयड. आईफोन यहां होटल के वाईफाई से कनेक्ट नहीं होता. आकाश ने विदेश जाने वाले टूरिस्टों को सलाह दी है कि अपने मोबाइल में इंटरनेशनल रोमिंग और पर्याप्त डाटा रखें ताकि किसी विपरीत परिस्थितियों में अपने परिवार को सूचना दे सकें.
सरकार से मदद की अपील
आकाश साहू ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि 9 मार्च की फ्लाइट भी रीशेड्यूल हो सकती हैं. अगर तत्काल की फ्लाइट ले तो काफी महंगी हैं. दुबई से इंडिया तक की फ्लाइट अरेंज कर दी जाए. इंडिया पहुंच कर वह खुदके खर्चे पर वापस घर चले जाएंगे.
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल प्रदेश के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के सभी अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने वैभवी अग्रवाल, दर्शना सिंह बघेल, डायमंड सिंह ध्रुव, रौनक अग्रवाल और संजय डहरिया को उनकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इन होनहार बेटे-बेटियों की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और यह दिखाती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए आवश्यक निर्देश
रायपुर। प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और जनजातीय अंचलों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का आयोजन 25 मार्च से 06 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रायपुर, सरगुजा और बस्तर के खेल मैदानों में होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक लेकर इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 न केवल वनांचल के खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच बनेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना, प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं की स्वीकृति एवं निर्माण, खेलो इंडिया की केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, खेल अकादमियों की गतिविधियों, खेल अलंकरण, युवा महोत्सव और आगामी कार्ययोजना की भी समीक्षा की। उन्होंने विगत वर्षों में स्वीकृत वृहद एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अधोसंरचना परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी छत्तीसगढ़ को प्रदान की गई है। इस आयोजन में कुल 7 प्रतिस्पर्धात्मक और 2 प्रदर्शनात्मक खेल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, स्वीमिंग और कबड्डी (डेमो), सरगुजा में कुश्ती एवं मलखम्ब (डेमो) तथा बस्तर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस प्रतियोगिता में देश के लगभग 30 राज्यों से करीब 2500 खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही मलखम्ब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखम्ब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में एक लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक स्तर के खेल आयोजनों के माध्यम से राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
बैठक में मुख्य सचिव विकाश शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक खेल तनुजा सलाम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बिरगांव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएं
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम नगर निगम बिरगांव में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को रंगों के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष होली का उत्साह प्रदेश में और भी अधिक है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों के खातों में धान उपार्जन के अंतर की राशि अंतरित की गई है। इससे किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है और त्यौहार की रौनक दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार समाज में एकता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है तथा लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने का अवसर प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मंशानुरूप प्रदेश में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अंचल में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, विकास और खुशहाली के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली द्वारा प्रस्तुत मनमोहक फाग गीत का आनंद लिया। साथ ही विधायक अनुज शर्मा की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने भी खूब उत्साह दिखाया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने पिचकारी चलाकर रंगों की बौछार की और लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं।
इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, योगेश साहू, निशक्तजन आयोग के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, सीआईडीसी अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शंशाक शर्मा, पूर्व विधायक एवं आरडीए अध्यक्ष नंदे साहू, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग, रमेश ठाकुर, भागीरथी यादव, मनोज जोशी सहित बिरगांव नगर निगम के पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
RTE भुगतान बढ़ाने की मांग पर निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि पिछले 13 वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है. इसे लेकर संगठन ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी. सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने अपने अंतिम आदेश में राज्य सरकार को छह माह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.
एसोसिएशन का कहना है कि आरटीई के तहत स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की जाए. प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये, माध्यमिक कक्षाओं के लिए 11,500 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये. हाई और हायर सेकेंडरी कक्षाओं के लिए अधिकतम सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की गई है. साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि बढ़ी हुई राशि पिछले तीन वर्षों से लागू की जाए.
एसोसिएशन ने कहा कि गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले व्यय पर स्कूल शिक्षा विभाग संवेदनहीन है और कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी कर रहा है.
इसी मुद्दे को लेकर 1 मार्च को छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक स्कूल शिक्षा विभाग आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक प्रदेश के सभी निजी स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे.
असहयोग आंदोलन के तहत प्रदेश के निजी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे. साथ ही विभाग द्वारा जारी किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब भी नहीं दिया जाएगा. संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिपूर्ति राशि को संगठन द्वारा प्रस्तावित स्तर तक नहीं बढ़ाये जाने तक आंदोलन जारी रहेगा.
राजधानी के रौनक अग्रवाल ने UPSC में पाया स्थान, कलेक्टर ने घर पहुंचकर दी बधाई
रायपुर। देश की प्रतिष्ठित चयन परीक्षा यूपीएससी का आज परिणाम घोषित किए गए। यह हमारे जिले के लिए गर्व के क्षण थे। इस परिणाम में हमारे राजधानी के रौनक अग्रवाल का नाम भी है, जिन्हें 772 रैंक प्राप्त हुआ है। श्री रौनक ने जिला प्रशासन के प्रोजेक्ट अनुभव के तहत इंटरव्यू की तैयारी की थी।
इस मॉक इंटरव्यू के पैनल में स्वयं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जिला पंचायत सीईओ कुमान बिश्वरंजन थे। रिजल्ट की घोषणा होने पर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ स्वयं रौनक के लोधीपारा में स्थित निवास पहुंचे, मिठाई खिलाकर उन्हें और उनके माता-पिता को शुभकामनाएं दी एवं शॉल पहनाकर विवेकानंद रचित ज्ञानयोग पुस्तक देकर सम्मान किया। कलेक्टर ने कहा कि यह हमारे पूरे जिले के लिए खुशी का क्षण है कि हमारे युवा यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परिक्षाओं में चयनित हो रहें हैं। निश्चित ही सारे यूवाओं को प्रेरणा मिलेगी साथ ही भविष्य में बड़ी मात्रा में युवा यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परिक्षाओं में चयनित होेंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में रौनक अग्रवाल ने जिला प्रशासन की पहल प्रोजेक्ट अनुभव के अंतर्गत अपना साक्षात्कार दिया था, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने अनुभव और सफलता की यात्रा साझा की थी। उनकी इस उपलब्धि से जिले के युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।
इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, एसडीएम नंदकुमार चौबे सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने रौनक अग्रवाल को उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र में पकड़े गए चीफ इंजीनियर केके कटारे
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है. राज्य की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) से जुड़े मुख्य अभियंता के.के. कटारे को छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक आरक्षण का लाभ लेने के लिए अयोग्य पाया है. समिति ने अपने आदेश में कहा है कि कटारे का मूल निवास महाराष्ट्र राज्य में होने के कारण उन्हें छत्तीसगढ़ में एसटी आरक्षण का लाभ प्राप्त करने की पात्रता नहीं बनती और उनके जाति प्रमाण पत्र को निरस्त किए जाने योग्य माना गया है. समिति द्वारा यह आदेश 26 फरवरी 2026 को जारी किया गया. आदेश के अनुसार यह मामला शिकायत के आधार पर जांच के लिए समिति के समक्ष प्रस्तुत हुआ था.
दस्तावेज के अनुसार इस मामले में शिकायतकर्ता विजय मिश्रा द्वारा उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति को शिकायत प्रस्तुत की गई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुख्य अभियंता के.के. कटारे ने दूसरे राज्य से संबंधित होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति वर्ग का लाभ लिया है. इसके अलावा जनपद पंचायत डोंगरगांव (जिला राजनांदगांव) के उपाध्यक्ष वीरेंद्र बोरकर द्वारा भी इस संबंध में शिकायत पत्र दिया गया था. इस मामले में राज्य सरकार के आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्रालय के माध्यम से भी पत्राचार समिति को प्राप्त हुआ था. इसके बाद समिति ने मामले की विधिवत जांच प्रारंभ की.
जांच के दौरान छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण में उल्लेख मिला कि के.के. कटारे के पिता अविभाजित मध्यप्रदेश में वर्ष 1962 से 1993 तक शासकीय सेवा में कार्यरत रहे थे. वहीं कटारे द्वारा प्रस्तुत अपने पिता के कोषालय पेंशन से संबंधित दस्तावेजों में ग्राम एवं पोस्ट तुमसर, जिला भंडारा (महाराष्ट्र) का पता दर्ज पाया गया. समिति ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि कटारे द्वारा ऐसा कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह सिद्ध हो सके कि उनके पिता या पूर्वज 10 अगस्त 1950 से पहले मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ की भौगोलिक सीमा के मूल निवासी थे.
समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान के.के. कटारे ने यह स्वीकार किया कि उनका मूल निवास तुमसर, जिला भंडारा (महाराष्ट्र) है. उन्होंने बताया कि पूर्व में यह क्षेत्र अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा था जिसकी राजधानी नागपुर थी. उन्होंने समिति को बताया कि उनके पिता वर्ष 1953 से बालाघाट में निवास कर नौकरी कर रहे थे, जिसके आधार पर वर्ष 1978 में तहसील वारासिवनी, जिला बालाघाट (मध्यप्रदेश) से उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था. वर्तमान में उनकी जाति संबंधी जांच मध्यप्रदेश में भी लंबित होने की जानकारी दी गई.
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया गया हवाला
समिति ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग निर्धारित होती है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक राज्य का अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य है और रोजगार या शिक्षा के उद्देश्य से दूसरे राज्य में जाता है, तो वह दूसरे राज्य में उस श्रेणी के आरक्षण का लाभ प्राप्त करने का पात्र नहीं होता.
जांच में यह भी सामने आया कि तुमसर नगर पालिका के वर्ष 1935 के जन्म पंजीयन रजिस्टर में कटारे के दादा का नाम दर्ज है, जिसमें उनकी जाति का उल्लेख किया गया है. इससे समिति ने यह माना कि उनकी जाति को लेकर संदेह नहीं है, लेकिन उनका मूल निवास महाराष्ट्र राज्य में होने के कारण छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का लाभ लेने की पात्रता नहीं बनती. समिति ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेजों, जांच प्रतिवेदन और सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध होता है कि के.के. कटारे के पूर्वजों का मूल निवास वर्तमान महाराष्ट्र राज्य की भौगोलिक सीमा में आता है. इस आधार पर समिति ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक आरक्षण का लाभ लेने के लिए वे पात्र नहीं हैं. साथ ही वर्ष 1978 में नायब तहसीलदार वारासिवनी, जिला बालाघाट (मध्य प्रदेश) द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त किए जाने योग्य माना गया है. समिति ने इस आदेश की प्रतिलिपि संबंधित विभागों को भेजते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं.
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध विस्तार पर जोर: कुलपति प्रो. मनोज दयाल
रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में नियुक्त कुलपति प्रो.मनोज दयाल ने पद भार ग्रहण करने के बाद विवि के सभी प्राध्यापकों और अतिथि शिक्षकों की बैठक ली. बैठक में उन्होंने विवि के सभी शिक्षकों से शैक्षणिक गतिविधिवों और पाठ्यक्रमों से सबंधित जानकारी लेते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की शिक्षा शोध में गुणात्मक और गणनात्मक दोनों प्रकार का विस्तार होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तकनीकी परिवर्तन तेजी से हो रहे हैं. ऐसे में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे विद्यार्थियों को बेहतर ज्ञान, कौशल और शोध के अवसर उपलब्ध कराएं.
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में मीडिया और संचार के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं. इसके चलते हमे भी बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए विश्वविद्यालयों को शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण के स्तर पर निरंतर नवाचार करना होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें मीडिया जगत की चुनौतियों के अनुरूप दक्ष, जिम्मेदार और संवेदनशील पेशेवर के रूप में तैयार करना है. इसके लिए पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाने और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जाये. साथ ही विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रमों, शोध परियोजनाओं और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जाये.
प्रो. दयाल ने विशेष रूप से कहा कि विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने पर कार्य किया जाये. बेहतर शोध वातावरण, मार्गदर्शन और संसाधनों के माध्यम से शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया जाये, ताकि पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र के लिए उपयोगी, समाजोपयोगी व गुणवत्तापूर्ण शोध सामने आ सकें. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में नैक ग्रेडिंग की तैयारी को लेकर भी कार्य किया जाये. इसके लिए अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के अनुभवों और मानकों का अध्ययन करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाए, ताकि विश्वविद्यालय बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ उत्कृष्ट ग्रेड प्राप्त कर सके. उन्होंने शिक्षकों से इस दिशा में सक्रिय सहयोग देने को कहा.
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया संस्थानों के साथ कोलैबरेशन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके. साथ ही विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाये, जिससे उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ मीडिया उद्योग से जुड़ने और करियर बनाने में मदद मिल सके.
इस संदर्भ में कुलपति ने विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं अतिथि प्राध्यापकों के साथ विस्तृत चर्चा की. बैठक में शिक्षण की गुणवत्ता, नए पाठ्यक्रमों की संभावनाओं, शोध गतिविधियों के विस्तार तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया. कुलपति ने शिक्षकों से सुझाव भी आमंत्रित किए और कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है. कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रशासन के सामूहिक प्रयास से विश्वविद्यालय पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा.
“टिकरापारा के 50 साल पुराने टेनामेंट का होगा पुनर्निर्माण, बनेंगे 144 आधुनिक फ्लैट”
रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण ने शहर के विकास एवं नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है. प्राधिकरण द्वारा लगभग 50 वर्ष पूर्व निर्मित टिकरापारा स्थित 96 टेनामेंट आवासीय परिसर का पुनर्निर्माण किया जाएगा. यह निर्णय वहाँ निवासरत रहवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
इस परियोजना के अंतर्गत रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा कुल 144 आधुनिक फ्लैट्स के निर्माण हेतु टेंडर जारी कर दिया गया है. प्रस्तावित आवासीय परिसर में 48 (1 BHK) तथा 96 (2 BHK) फ्लैट्स का निर्माण किया जाएगा. इस योजना के अंतर्गत मूल आवंटितियों को फ्लैट्स रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि शेष फ्लैट्स का विक्रय प्राधिकरण द्वारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा.
सभी फ्लैट्स को आधुनिक वास्तुशिल्प एवं नवीनतम निर्माण मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे निवासियों को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवास उपलब्ध हो सके.
प्रस्तावित भवन आठ मंजिला (8 स्टोरी) होगा, जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग की समुचित व्यवस्था की जाएगी. इसके अतिरिक्त परिसर में व्यावसायिक उपयोग हेतु दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा निवासियों को दैनिक आवश्यकताओं की सुविधाएँ भी निकट ही उपलब्ध हो सकेंगी.
यह परियोजना रायपुर विकास प्राधिकरण की पहली पुनर्निर्माण योजना है, जिसके माध्यम से पुराने एवं जर्जर आवासीय परिसरों को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है. इस योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल क्षेत्र के रहवासियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास प्राप्त होगा, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास को भी नई गति मिलेगी.
किसानों के विरोध के बाद कार्रवाई, भलेरा समिति के चार कर्मचारी बर्खास्त
अभनपुर। धान की बोरियों में पानी डालने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने पड़ी कार्रवाई करते हुए भलेरा समिति चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है. धान की बोरियों में पानी मिलने की वीडियो सामने आने के बाद आज सुबह आक्रोशित किसानों ने समिति के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया था.
किसानों से मिली शिकायत के बाद गठित जांच दल के सदस्य आरंग विकासखंड के सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना से बताया कि पूरे मामले की जांच कर आयुक्त को प्रतिवेदन सौंप दिया गया है. मामले में समिति में कार्यरत चार कर्मचारियों, समिति प्रबंधक विष्णु साहू, लिपिक उमेश साहू, चौकीदार इंदरमन निषाद, और दैनिक वेतनभोगी जितेंद्र कुमार साहू को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है.
जांच समिति के प्राधिकृत अधिकारी लीलूराम साहू, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर के शाखा प्रबंधक नरेंद्र चंद्राकर के अलावा सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना शामिल थे. बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे नियमों के तहत संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की तैयारी का जा रही है.
सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।
बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।
मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।