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छत्तीसगढ़ चुनेगा अपनी पहली राजकीय तितली: 31 अगस्त तक आम नागरिकों से मांगे गए सुझाव, ऐसे कर सकते हैं वोट
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और तितलियों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य की पहली “राजकीय तितली” घोषित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत प्रदेशवासियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा ऑनलाइन जनमत (Google Form Voting) आमंत्रित किया गया है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल शासन का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। राजकीय तितली का चयन जनभागीदारी से होने पर लोगों में प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ेगी।
तीन तितली प्रजातियों का किया गया चयन
राजकीय तितली के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक मानकों के आधार पर निम्नलिखित तीन तितली प्रजातियों का चयन किया गया है—
Common Banded Peacock (कॉमन बैंडेड पीकॉक)
Orange Oakleaf (ऑरेंज ओकलीफ)
Spot Swordtail (स्पॉट स्वोर्डटेल)
इन प्रजातियों का चयन उनके पारिस्थितिक महत्व, राज्य में उपलब्धता, संरक्षण मूल्य, विशिष्टता (Uniqueness), पहचान की सरलता तथा जनसामान्य में आकर्षण (Charisma) जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों के आधार पर किया गया है।
31 अगस्त तक कर सकेंगे मतदान
वन विभाग द्वारा नागरिकों की राय प्राप्त करने हेतु Google Form के माध्यम से ऑनलाइन मतदान प्रारंभ किया गया है। प्रदेश का प्रत्येक नागरिक अपनी पसंद की तितली के पक्ष में मतदान कर सकता है। मतदान की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
प्राप्त जनमत एवं विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर राज्य की राजकीय तितली के नाम का अंतिम प्रस्ताव तैयार कर नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रदेश के सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों से अपील की है कि वे इस जनभागीदारी अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें तथा अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करें, ताकि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के इस महत्वपूर्ण प्रतीक के चयन में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित हो सके।
Google Form के माध्यम से ऐसे करें मतदान
इच्छुक नागरिक Google Form के माध्यम से 31 अगस्त 2026 तक मतदान कर सकते हैं। मतदान के लिए इस लिंक https://forms.gle/7Mqa1kBLx4dnFA6b7 पर क्लिक करें।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की, गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश
रायपुर। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने प्रदेश के विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आज आयोजित बैठक में जिलों के कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी बैठक में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग के विभिन्न संभागों के कार्यपालन अभियंता, ठेकेदार और जेल अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठक में जुड़े।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में प्रदेश की विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन बैरकों, बाउंड्रीवॉल्स, शौचालयों और वॉच टॉवर्स के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ ही सभी जेलों के अधीक्षकों से निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित दौरा कर कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों को भी निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए कार्यों में तेजी लाने और उन्हें समय पर पूरा करने को कहा।
श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और जेल अधीक्षकों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए जेल परिसर के भीतर निर्माण सामग्रियों के परिवहन की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने जेल अधीक्षकों को श्रमिकों को रोज काम के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बैठक में कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। नए बैरकों के निर्माण और मौजूदा सुविधाओं के विस्तार से राहत मिलेगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मैदानी अधिकारियों, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को तेज गति से काम कर कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने को कहा।
इन कार्यों की हुई समीक्षा
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में रायपुर केन्द्रीय जेल में पार्किंग शेड, पाठशाला शेड, मुलाकातियों-परिजनों के लिए शेड व शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर के नगोई में 1500 आवास क्षमता के विशेष जेल, जिला जेल धमतरी और गरियाबंद में बाउंड्रीवॉल, जिला जेल जांजगीर, रामानुजगंज, सूरजपुर, कांकेर, संजारी-बालोद तथा उप जेल सारंगढ़ में बैरक निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागीय सचिव ने कवर्धा उप जेल में मुख्य दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के कार्य, केन्द्रीय जेल अंबिकापुर और जगदलपुर में कैदियों के लिए बैरक एवं शौचालय निर्माण, जिला जेल दंतेवाड़ा में शौचालय निर्माण, जिला जेल सुकमा की मुख्य दीवारों के चारों ओर कंसर्टीना वायर फेंसिंग तथा वॉच टॉवर निर्माण एवं उप जेल बीजापुर में वॉच टॉवर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल का असर, संसद में उठाए गए मुद्दे पर केंद्र ने स्पष्ट की स्तिथि
रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के जनहित, वनों की अमूल्य संपदा और पारंपरिक आयुष उद्योग के संवर्धन को लेकर रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल निरंतर मुखर हैं। संसद के वर्तमान सत्र में उन्होंने छत्तीसगढ़ समेत देशभर के हर्बल उद्यमियों, लघु वनोपज संग्राहकों और आयुष औषधियों की गुणवत्ता जांच तंत्र की मजबूती का मुद्दा प्रखरता से उठाया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की औषधि परीक्षण व्यवस्था, दवा निरीक्षकों की उपलब्धता और राज्य में गुणवत्तापूर्ण औषधि जांच तंत्र को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।
लोकसभा में पूछे गए अपने प्रश्न में सांसद अग्रवाल ने जानना चाहा था कि क्या छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाया जाएगा, पर्याप्त दवा निरीक्षकों की नियुक्ति होगी तथा औषधि उद्योग से जुड़े लाइसेंस एवं प्रमाणन की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 34 आयुष औषधि निरीक्षक कार्यरत हैं तथा रायपुर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त औषधि परीक्षण प्रयोगशाला संचालित है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में नियामकीय व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार एवं संबंधित हितधारकों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ औषधीय पौधों, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा की समृद्ध विरासत वाला राज्य है। ऐसे में यहां की औषधियों की गुणवत्ता, परीक्षण व्यवस्था और नियामकीय ढांचे को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए मजबूत परीक्षण प्रयोगशालाएं, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रमाणन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा बल्कि स्थानीय उद्यमियों, लघु उद्योगों और औषधि निर्माताओं को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य, आयुष और औषधि गुणवत्ता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना है। संसद के माध्यम से वे लगातार ऐसे विषय उठा रहे हैं जिनका सीधा लाभ प्रदेश की जनता, आयुष चिकित्सकों, औषधि निर्माताओं और युवाओं को मिले।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की औषधि परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा प्रदेश आयुष आधारित उद्योगों और औषधि निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।
द्वीप्ति योजना से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं बन रही हैं सौर ऊर्जा उद्यमी
रायपुर। छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के विस्तार को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। द्वीप्ति (DWEEPTI) योजना, अर्थात डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन (Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion), के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के तहत इस नीति को विकसित किया है।

छत्तीसगढ पहला राज्य महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति को अपनाया है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित करने, 50,000 हरित रोजगार सृजित करने तथा राज्य के पांच लाख परिवारों और 10,000 संस्थानों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' की जा रही है तैयार
योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 संकुल स्तरीय संघो (सीएलएफ) को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत विक्रेता के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सौर संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और जनजागरूकता का प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' तैयार की जा रही हैं, जो अपने ही क्षेत्रों में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी।
प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर
सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह वित्तीय मॉडल जहां स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है, वहीं महिला संचालित उद्यमों को टिकाऊ व्यवसाय विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह पहल प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच
यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच को भी प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर बल देते रहे हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को सतत ग्रामीण विकास का आधार मानते हैं। द्वीप्ति योजना इन दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ते हुए महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की मुख्यधारा में ला रही है।
ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से है जोड़ना
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने कहा कि अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से लाभार्थी तक सीमित रही है। ड्वीप्टि योजना इस सोच को बदलते हुए महिलाओं को विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के लखपति दीदी विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ती है।
कबीरधाम में नीति से धरातल तक पहुंची पहल
द्वीप्ति योजना का प्रभाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। कबीरधाम इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले शुरुआती जिलों में शामिल है। सीएसपीडीसीएल- आरएपीएम, रायपुर के सहयोग से जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) ने वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन, कवर्धा को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया। टाटा के तकनीकी सहयोग से बिहान के स्व-सहायता समूहों की लगभग 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली 'सोलर दीदी' टीम तैयार की गई।
पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर में
योजना के तहत पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर गांव में स्थापित किया गया। प्रगति आजीविका ग्राम संगठन के अंतर्गत माता भवानी स्व-सहायता समूह की सदस्य अंजनी पटेल इस प्रशिक्षण से लाभान्वित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं।
अंजनी पटेल ने कहा, "इस कार्य ने हमारे लिए आजीविका का नया रास्ता खोला है। हमें गर्व है कि अब स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्वयं सोलर सिस्टम स्थापित कर रही हैं। इससे यह विश्वास बढ़ा है कि यह अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।"
सोलर सिस्टम की बढ़ती मांग से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर
कबीरधाम कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि यह पहल आजीविका संवर्धन और अक्षय ऊर्जा को एक साथ जोड़ने का सफल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर सिस्टम की बढ़ती मांग से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह मॉडल महिलाओं के लिए कौशल आधारित और टिकाऊ आजीविका विकसित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर सिस्टम की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। कबीरधाम जिले में अब तक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लगभग 40 ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं तथा कई संयंत्र स्थापित भी किए जा चुके हैं।
राज्य के अन्य जिलों में द्वीप्ति योजना के विस्तार के साथ महिला नेतृत्व वाले पंजीकृत महासंघों, प्रशिक्षित स्थानीय तकनीशियनों और आसान वित्तीय व्यवस्था पर आधारित यह मॉडल छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर लागू किए जाने योग्य एक प्रभावी उदाहरण के रूप में उभर रहा है।
द्वीप्ति योजना एक नजर में
• अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित किए जाएंगे।
• 50,000 हरित रोजगार सृजित होंगे।
• 5 लाख परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
• 10,000 संस्थानों को योजना से जोड़ा जाएगा।
• 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघ अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत।
• कबीरधाम में 35 महिलाओं को 'सोलर दीदी' के रूप में प्रशिक्षित किया गया।
• कबीरधाम जिले में रूफटॉप सोलर सिस्टम के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए।
20 साल पुराने वित्तीय अनियमितता मामले में EOW की दबिश, अनिल मेडिकल से जब्त किए दस्तावेज
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शुक्रवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब (EOW) आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने शहर के नया बस स्टैंड के पास स्थित अनिल मेडिकल पर अचानक दबिश दी। इस कार्रवाई से शहर के व्यापारियों और मेडिकल कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला साल 2004 का है। छत्तीसगढ़ में लोक कला जत्था योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन के नाम पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। जांच के दौरान इस प्रकरण में अनिल मेडिकल की संलिप्तता और वित्तीय लेन देन की बात सामने आई थी, जिसके आधार पर EOW की टीम ने आज छापेमार कार्रवाई की है।
जब्त दस्तावेजों से खुल सकते हैं कई अहम राज
EOW की टीम ने रणनीति के तहत तड़के सुबह ही अनिल मेडिकल स्टोर में पहुंचकर छापा मारा। टीम ने दुकान को अपने कब्जे में लेकर घंटों तक दस्तावेजों की सघन जांच की और दुकान के संचालकों से पूछताछ की। घंटों चली इस कार्रवाई के बाद EOW की टीम अपने साथ कई महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज लेकर रवाना हुई है। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों से लोक कला जत्था घोटाले से जुड़े कई और अहम राज खुल सकते हैं। फिलहाल EOW की टीम जब्त किए गए दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
सेवा भूमि पर भू-स्वामी अधिकार का दावा खारिज, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम निर्णय
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कोटवारों और उसके उत्तराधिकारियों की सेवा भूमि पर मालिकाना हक के एक महत्वपूर्ण मामले में निर्णय सुनाया है. चीफ जस्टिस समेत तीन जजों की फुल बेंच ने कहा कि 1950 में जमींदारी उन्मूलन से पूर्व मालगुजारों या जमींदारों द्वारा कोटवारों को सेवा के बदले दी गई जमीन पर कोटवार या उनके वारिस भू स्वामी अधिकार का दावा नहीं कर सकते. बता दें, कि दो डिवीजन बेंच के ऑर्डर में विरोधाभास के बाद सिंगल बेंच ने मामला पूर्ण पीठ (फुल बेंच) को रेफर किया था.
दरअसल, कबीरधाम जिले के गजेंद्र दास और स्थानीय जरहाटोला निवासी सुकृत दास ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर पूर्व में हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देकर सेवा भूमि पर मालिकाना हक देने की मांग की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने पाया कि दो अलग अलग डिवीजन बेंचों के निर्णय में परस्पर विरोधाभास है. इसी विरोधाभास को देखते हुए मामले को फुल बेंच के लिए रेफर कर दिया गया था, जहां कोटवारों के विरुद्ध हाईकोर्ट का निर्णय सामने आया है.
महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल, सीएसआर से मजबूत होंगे पोषण और बाल विकास कार्यक्रम
रायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से राज्य में पोषण, बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से आज सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा संचालित योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में उद्योगों की सामाजिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने उद्योगों से विभाग के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा, "आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।"
महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग तीन प्रमुख आयामों—महिला सशक्तिकरण, बच्चों का संरक्षण तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण—पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, पोषण संवर्धन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।
बैठक में विभाग द्वारा तैयार की गई संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका एवं मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।
बैठक के दौरान उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों में रुचि व्यक्त करते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए। यह निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देगा। विभाग इसके लिए उद्योगों के साथ नियमित संवाद, समन्वय एवं समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगा।
उल्लेखनीय है कि सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 'पंखुड़ी' पोर्टल विकसित किया गया है। वहीं राज्य शासन द्वारा 'सर' (State CSR) पोर्टल का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और सीएसआर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
पुलिस के आश्वासन के बाद कांग्रेस ने खत्म किया धरना, दीपक बैज ने की घोषणा
रायपुर। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेसी अपनी मांगों को लेकर गुरुवार से खम्हारडीह थाने में धरने पर बैठे थे। तीन बिंदुओं पर पुलिस के साथ सहमति बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी है।
दीपक बैज ने कहा है कि पुलिस ने आश्वासन दिया है कि कांग्रेस के आवेदन पर सात दिनों के अंदर जांच कर कांग्रेस भवन पर हमला करने वाले भाजपाइयों पर FIR दर्ज किया जाएगा। घायल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का डॉक्टरी मुलाहिजा कराकर दोषियों पर नए सिरे से एफआईआर दर्ज किया जाएगा। जिन कांग्रेसियों पर गैर जमानतीय धराएं लगाई गई है उसकी विवेचना कर गैर जमानतीय धराए हटाई जाएगी।
आवारा कुत्तों और मवेशियों पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव से मांगी नई प्रगति रिपोर्ट
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने प्रदेश में आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाएं, रेबीज के खतरे और राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर घूमते आवारा मवेशियों के प्रबंधन को लेकर ने चिंता जाहिर की है. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पूर्व सुनवाई में दिए गए निर्देश के मद्देनजर मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड आफ इंडिया के मानक संचालन प्रक्रिया के अनुपालन के तहत शपथ पत्र के साथ जानकारी पेश की.
मुख्य सचिव ने राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है, यह विषय सीधेतौर पर आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा है. इसलिए केवल योजनाएं बनाना काफी नहीं है, बल्कि सभी जिलों में इसकी निरंतर निगरानी जरूरी है.
कोर्ट ने मुख्य सचिव को आगे की प्रगति रिपोर्ट के साथ 22 सितंबर को नया शपथपत्र पेश करने कहा है.
रायपुर में अवैध पार्किंग पर ट्रैफिक पुलिस की सख्ती, 20 ट्रक-ट्रेलरों पर चालानी कार्रवाई
रायपुर। सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रायपुर यातायात पुलिस ने हीरापुर रिंग रोड और सर्विस रोड पर विशेष अभियान चलाकर अवैध रूप से खड़े 20 ट्रक और ट्रेलर वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की। पुलिस ने वाहन चालकों और मालिकों को भविष्य में दोबारा नियमों का उल्लंघन नहीं करने की अंतिम चेतावनी भी दी है।
ट्रैफिक डीसीपी डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में कमिश्नरेट रायपुर की यातायात पुलिस शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रही है। अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, यातायात को सुचारु बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इसी क्रम में 22 जुलाई 2026 को यातायात थाना टाटीबंध क्षेत्र के अंतर्गत हीरापुर रिंग रोड और सर्विस रोड पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान सर्विस रोड पर अवैध रूप से खड़े पाए गए 20 ट्रक और ट्रेलर वाहनों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत चालानी कार्रवाई की गई।
अक्सर भारी वाहनों को मुख्य मार्ग और सर्विस रोड पर लंबे समय तक खड़ा करने से अन्य वाहन चालकों की दृश्यता प्रभावित होती है, यातायात बाधित होता है तथा सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसे गंभीरता से लेते हुए यातायात पुलिस द्वारा यह अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है।
दी गई अंतिम चेतावनी
कार्रवाई के दौरान संबंधित ट्रक चालकों एवं वाहन मालिकों को सड़क पर अवैध पार्किंग नहीं करने, निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करने तथा यातायात नियमों का पूर्णतः पालन करने की समझाइश दी गई। साथ ही उन्हें स्पष्ट रूप से अंतिम चेतावनी दी गई कि भविष्य में पुनः इस प्रकार का उल्लंघन पाए जाने पर उनके विरुद्ध अधिक कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यातायात पुलिस, रायपुर ने आम नागरिकों एवं वाहन चालकों से अपील की है कि सड़क एवं सर्विस रोड पर किसी भी प्रकार की अवैध पार्किंग न करें, क्योंकि थोड़ी-सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। यातायात नियमों का पालन कर सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में अपना सहयोग दें।
छत्तीसगढ़ में UCC पर तेज़ी, शीतकालीन सत्र में लाने की तैयारी: CM साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बैठक होगी, जिसके बाद आने वाले शीतकालीन सत्र में इसे पारित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कर्नाटक रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर कहा कि कांग्रेसी कश्मीर की तरह पत्थरबाजी में उतर आए हैं. लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन कश्मीर में जैसे पत्थरबाजी होती है, कांग्रेसी भी वैसे ही पत्थरबाजी में उतर आए हैं. कानून हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई तो होगी ही.
वहीं अपने कर्नाटक दौरे के लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज कर्नाटक के सत्य साईं ग्राम में स्वर्ण जयंती समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इस मौके पर सभी प्रबुद्धजनों से भी मुलाकात होगी.
रेलवन ऐप से आसान हुई रेल यात्रा, टिकट, PNR, लाइव स्टेटस और फूड ऑर्डर की सुविधा एक ही प्लेटफॉर्म पर
रायपुर। भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों को आधुनिक, त्वरित और सुविधाजनक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित ‘रेलवन’ ऐप (RailOne App) यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले वर्ष जुलाई में लॉन्च किए गए इस एकीकृत मोबाइल ऐप को देशभर में करोड़ों लोग डाउनलोड कर चुके हैं और इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
RailOne App की प्रमुख विशेषताएं और लाभ
इस ऐप के माध्यम से यात्री आरक्षित, अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट आसानी से बुक कर सकते हैं। साथ ही टिकट रद्द करने और रिफंड की प्रक्रिया भी सरल एवं त्वरित है।
यात्रियों को पीएनआर स्टेटस, वेटिंग स्थिति, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, ट्रेन के आगमन और प्रस्थान का समय, प्लेटफॉर्म नंबर तथा कोच पोजिशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां रियल टाइम में उपलब्ध होती हैं।
रेलवन ऐप सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान की सुविधा प्रदान करता है।
डिजिटल टिकटिंग की सुविधा से यात्रियों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं। साथ ही टिकट काउंटरों पर भीड़ और लंबी कतारों से भी राहत मिल रही है।
यात्री कहीं से भी अपने मोबाइल के माध्यम से आसानी से टिकट बुक कर सकते हैं।
यह ऐप पारदर्शी और कैशलेस टिकटिंग व्यवस्था को बढ़ावा देता है तथा खुले पैसे और नकली मुद्रा (फेक करेंसी) जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है।
यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए रेलवन ऐप के माध्यम से यात्रा के दौरान भोजन ऑर्डर करने की सुविधा भी उपलब्ध है। यात्री अपनी पसंद का भोजन सीधे अपनी सीट तक मंगवा सकते हैं।
रेलवन ऐप डिजिटल इंडिया अभियान को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रेलवन ऐप के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक कर डिजिटल भुगतान करने पर यात्रियों को 3 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। यह सुविधा 24 अगस्त 2028 तक प्रभावी रहेगी।
रेलवे के अनुसार, रेलवन ऐप भारतीय रेल की सभी डिजिटल सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे यात्रियों को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं मिल रही हैं। रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है कि अधिक से अधिक यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा सके।
BA-LLB छात्रों को बड़ी राहत, गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी ने रद्द किया री-एग्जाम
बिलासपुर। छात्रों के विरोध के बाद गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने BA-LLB के छठवें सेमेस्टर की परीक्षा फिर से कराए जाने का फैसला वापस ले लिया है. इस फैसले के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली है.
इसके पहले गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में एलएलबी के छात्रों ने री-एग्जाम कराने के फैसले का छात्रों ने जमकर विरोध किया था. पर्याप्त समय नहीं होने की वजह से दोबारा परीक्षा के लिए तैयारी असंभव बताते हुए छात्रों ने विभागाध्यक्ष से चर्चा की थी. लेकिन कोई समाधान नहीं निकलने पर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया था.
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को चेतावनी दी थी कि यदि री-एग्जाम का नोटिफिकेशन वापस नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे. छात्रों के बढ़ते विरोध और हंगामे को देखते हुए आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन ने री-एग्जाम के नोटिफिकेशन को रद्द करने की घोषणा कर दी.
बता दें कि करीब दो महीने पहले हुए पेपर लीक मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 6 जून को अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी थी. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अचानक परीक्षा निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया था.
राजीव भवन विवाद: FIR के विरोध में खम्हारडीह थाने के बाहर कांग्रेस का धरना, भाजपा नेताओं पर भी केस की मांग
रायपुर। राजधानी रायपुर में भाजपा के कांग्रेस कार्यालय घेराव के दौरान हुए विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में आज बड़ी संख्या में कांग्रेसी खम्हारडीह थाना पहुंचे और थाने के बाहर धरने पर बैठे हैं। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे।

धरने में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज भी पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है। साथ ही भाजपा नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की जा रही है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पत्थरबाजी का आरोप
दरअसल, भाजपा की ओर से राजीव भवन घेराव के दौरान हुए झड़प को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पत्थरबाजी का आरोप लगाया गया है। झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसी कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने खम्हारडीह थाने के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
कांग्रेस ने लगाया एकतरफा कार्रवाई का आरोप
कांग्रेसियों का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा की गई है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाए। वहीं, कांग्रेसी की ओर से प्रदर्शन में शामिल भाजपा नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की मांग की जा रही है। थाने के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नारेबाजी और प्रदर्शन के चलते मौके पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
राजीव भवन में पत्थर फेंकने से कई कांग्रेस कार्यकर्ता घायल
खम्हारडीह थाना प्रभारी को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा है कि हम कांग्रेस कार्यकर्ता 22 जुलाई को दोपहर लगभग 2 बजे रोज की तरह अपने कार्यालय में संगठन के कार्य में व्यस्त थे, तभी अचानक माईक के माध्यम से जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनाई देने लगा। हम सभी लोग जब बाहर गए तो हमने देखा कि बाहर सड़क पर बैरिकैड किया हुआ है, जहां पर भाजपा एवं भाजयुमो के कार्यकर्ता अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए राजीव भवन की ओर इशारा करते हुए और जोर-जोर से अश्लील गालियां देने लगे, फिर अचानक से उधर से छाता, चप्पल, पत्थर, पानी पाउच, पानी बोतल हम लोगों के उपर फेकने लगे, जिसके कारण हमारे बहुत से कार्यकर्ता घायल हो गए।
भाजपाइयों ने पुलिस वालों को पहुंचाई चोटें
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि कई लोगों के हाथ, पैर में चोट आई है। भारतीय जनता पार्टी के लोग लगातार राजीव भवन की ओर पत्थर फेंक रहे थे। उसके बाद हमने देखा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैरिकैड तोड़कर पुलिस वालों पर भी फेंके, जिससे पुलिसवालों को भी चोटें आई है। साथ ही कुछ भाजपाइयों ने पुलिसवालों से जबरन लाठियां छीनकर तथा पुलिसवालों को शारीरिक क्षति पहुंचाकर लाठी हाथ में लेकर राजीव भवन की तरफ बढ़ने लगे।
BJP नेताओं पर भाजपा कार्यकर्ताओं को उकसाने का आरोप
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, उप-मुख्यमंत्री अरूण साय, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, मंत्री ओपी चौधरी, विधायक पुरन्दर मिश्रा, भाजयुमो अध्यक्ष राहुल टिकरिहा आदि भाजपा के कार्यकर्ता घटना स्थल पर मौजूद थे और उक्त नेताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं को राजीव भवन में हमला करने, पत्थरबाजी करने और गाली-गलौच करने तथा क्षति पहुंचाने के लिए उकसा रहे थे, जिसके कारण भाजपा कार्यकर्ता राजीव भवन में पत्थरबाजी, पानी बोतल आदि को फेंककर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को क्षति पहुंचाने के नियत से बलवा कर रहे थे। उक्त घटना की फुटेज शंकर नगर चौक में लगे सीसीटीवी/ राडार में देखा जा सकता है। राजीव भवन में उपस्थित लोगों को क्षतिग्रस्त करने की नियत से एकराय होकर आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया, इसलिए भाजपा के विधायक, मंत्री एवं भाजपा नेताओं के विरूध्द अपराध पंजीबध्द किया जाए।
स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित, सरकार ने हड़ताली अतिथि शिक्षकों को दिया 27 जुलाई तक का समय
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों की जारी हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि हड़ताल पर बैठे सभी अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपनी-अपनी शालाओं में वापस लौटकर अध्यापन कार्य शुरू करें। निर्धारित समय-सीमा तक कार्य पर वापस नहीं आने वाले अतिथि शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आज 23 जुलाई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य की शासकीय शालाओं में अध्यापन व्यवस्था के तहत कार्यरत अतिथि शिक्षक पिछले कुछ दिनों से हड़ताल पर हैं। इसके कारण नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो छात्र-छात्राओं के हित में नहीं है।
शाला प्रबंध समिति को दिए गए निर्देश
डीपीआई ने अपने आदेश में कहा है कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार शाला प्रबंध समिति के माध्यम से की गई थी। ऐसे में संबंधित शाला प्रबंध समितियां सभी हड़ताली अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई 2026 तक विद्यालय में उपस्थित होकर अध्यापन कार्य प्रारंभ करने के लिए निर्देशित करें।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि निर्धारित तिथि तक कोई अतिथि शिक्षक कार्य पर वापस नहीं लौटता है, तो 24 जून 2019 को जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 7.3 के तहत उसकी अध्यापन व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। यह निर्देश प्रभारी संचालक, लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ की ओर से जारी किया गया है।
देखें आदेश

23 दिनों से जारी है आंदोलन
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के अतिथि शिक्षक पिछले 23 दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दुर्ग जिले में आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी शिक्षक संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा मानदेय में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
बुधवार को दुर्ग पुलिस धरना स्थल पहुंची थी और प्रदर्शन समाप्त करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद आंदोलनकारी शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
शिक्षकों का आरोप—बातचीत की बजाय दबाव बना रही सरकार
अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि वे पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका आरोप है कि उनकी मांगों पर निर्णय लेने के बजाय प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने का दबाव बना रहा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के कई अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह न तो सेवा सुरक्षा मिल रही है और न ही समान वेतन।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है
NEET मुद्दे पर कांग्रेस पर बरसे प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, बोले— छात्रों के आंदोलन को राजनीति की भेंट चढ़ाया
रायपुर। NEET पेपर लीक मामले में छात्रों के हितों के नाम पर कांग्रेस के पीएम आवास के समक्ष किए गए प्रदर्शन पर भाजपा अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि संसद में पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच चर्चा होना चाहिए. छात्रों की समस्याओं के समाधान के विषय में चर्चा होनी चाहिए. लेकिन निजी स्वार्थ के लिए छात्रों के आंदोलन की बलि चढ़ा दी. छात्रों के हित में कोई बात नहीं हुई है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कण्डेय, अखिलेश जैन सहित कई नेताओं की मौजूदगी में प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पिछले 2 दिनों से पूरे देश में राजनीति छाई हुई है. हमारे देश में अलग-अलग विषयों पर कहने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कांग्रेस ने उनके आंदोलन का स्वरूप बदल दिया. राहुल गांधी का व्यवहार पूरे देश ने देखा है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा प्रधानमंत्री मोदी छात्रों के हित से भलीभांति अवगत हैं. इसलिए परीक्षा फिर से कराने का निर्णय लिया गया. पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई कराने का निर्णय लिया है. PM मोदी ने निर्णय लिया है कि जो भरपाई होगी वो हम करेंगे. किरण रिजिजू ने कहा कि हम इस विषय पर चर्चा करने तैयार हैं. लेकिन सदन के बाहर हंगामा कराके छात्रों के आंदोलन को ये दूसरे दिशा में ले गए हैं.
कांक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन में किस तरह से श्रीराम का जिक्र हुआ. वहां जो हुड़दंग और मारपीट हुई है. पत्रकारों पर भी हमला किया गया. प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करना, गाली देना ये सभ्यता हमारे देश की नहीं है. सदन में इस पर चर्चा करनी चाहिए, तो उसमें भाग क्यों रहे हैं. हम सभी प्रकार से चर्चा के लिए तैयार हैं. लेकिन कांग्रेस सदन के अंदर कोई चर्चा नहीं चाहती है.
किरण सिंहदेव ने कहा कि संविधान का कोई विषय नहीं है. संविधान की छोटी सी किताब लेकर राहुल गांधी घूमते हैं. अपनी योजना के आधार पर राहुल गांधी धरने पर बैठ गए, जहां धरना प्रतिबंधित था. पीएम मोदी ने लोगों का मान सम्मान बढ़ाया है. अन्य देशों के लोग उसका अनुशरण करते हैं. विश्व में लोकप्रिय नेता के रूप में पीएम जाने जाते हैं. लेकिन किस उद्देश्य से आप गए हैं. संसद को आप चलने नहीं दे रहे हैं. अब अति हो गई है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान एम्स एमबीबीएस पेपर लीक हुआ था, हरियाणा में परीक्षा पेपर लीक हुआ था. 2012 के रेलवे ग्रुप पेपर लीक हुआ था. राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं, जो संवैधानिक पद पर है. लेकिन उन्होंने इसका मान नहीं रखा है. सदन की गरिमा तार-तार हो रही है. दरअसल, पूरे देश में अराजकता पैदा करने की इनकी साज़िश है. पहले भी देश में ऐसी घटना हो चुकी है. ये हमारा देश ऋषि मुनियों का देश है. देश में आगे कैसे बढ़े, उसके किए हम काम कर रहे हैं.
कांग्रेस के घेराव पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कौन कितने दिन का मेहमान है, यह निर्णय जनता का है. घेराव का कार्यक्रम बीजेपी का था. कांग्रेस ने पहले पुतला दहन कर लिया है. यह बहुत अनुशासित प्रदर्शन था. ये हल्ला हुआ है हम राजनीतिक दल के कार्यकर्ता है. लेकिन सवाल यह है कि इतने पत्थर वहां कैसे जमा हुए? पत्थरों की बौछार कहां से हुई है. बीजेपी के तरफ से एक भी घटना ऐसी नहीं हुई है.
छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा के लिए आईआईटी मद्रास के साथ हुआ ऐतिहासिक एमओयू
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आज रायपुर में डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप थे।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन एवं आईआईटी मद्रास CoERS के बीच कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण से कमी लाना है। कार्यशाला में अधिकारियों को बताया गया कि सड़क दुर्घटना डेटा का विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट एवं दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान की जाएगी हाइपरलोकल सड़क सुरक्षा उपाय और कम लागत वाले अभियांत्रिकी हस्तक्षेप किए जाएंगे। ‘संजय’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से ब्लैक स्पॉट की समय पर पहचान कर साक्ष्य-आधारित निर्णय लिए जाएंगे।
प्रथम चरण में राज्य के सड़क दुर्घटना की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील 10 जिलों को चिन्हित किया गया है। इन जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप डेटा-आधारित सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है, जिससे प्रत्येक नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुँच सके। यह पहल सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने कहा कि संजय प्लेटफॉर्म से दुर्घटना संभावित स्थलों की वैज्ञानिक पहचान कर समयबद्ध हस्तक्षेप संभव होगा। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयास कर दुर्घटनामुक्त छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में चयनित 10 जिलों के कलेक्टर, एसपी, आरटीओ, डीटीओ, एनआईसीसी के जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डेटा-आधारित योजना एवं त्वरित हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में प्रभावी कमी आएगी।