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आय से अधिक संपत्ति का मामला : पंचायत विभाग के निलंबित ज्वॉइंट डायरेक्टर को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
बिलासपुर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निलंबित ज्वॉइंट डायरेक्टर अशोक चतुर्वेदी की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। उन्होंने एसीबी की ओर से दर्ज आय से अधिक संपत्ति के केस को निरस्त करने के लिए याचिका लगाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान एसीबी ने बताया कि सेवाकाल के दौरान अफसर की कुल आय 68 लाख रुपए थी, जबकि उनसे 31 करोड़ की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज और सबूत मिले हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया है। इससे पहले एसीबी ने उनकी संपत्ति की जांच की थी, जिसके बाद उनके ठिकानों में छापेमारी भी की थी। जांच के बाद 28 अगस्त 2023 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। यह मामला विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट), रायपुर की अदालत में ट्रायल पर है। आरोपी अफसर के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर राज्य शासन ने उसे सस्पेंड कर दिया है। साथ ही एसीबी की टीम उसकी तलाश भी कर रही थी। इस बीच आरोपी अफसर ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को निरस्त करने की मांग की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
बदले की भावना से दर्ज किया केस : याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि उनका रिकॉर्ड साफ है। वह जांच का सामना करने को तैयार है। आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना के चलते कार्रवाई की थी। पत्नी को एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया था, लेकिन अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया गया है। यह भी कहा गया कि बिना वैध पूर्व स्वीकृति के रिपोर्ट दाखिल की गई, जो कानून के खिलाफ है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप गंभीर है। आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
पेयजल की समस्या दूर करने बनाई गई कंट्रोल रूम, इन नंबरों पर कर सकते हैं शिकायत…
रायपुर। गर्मी के दिनों मैदानी स्तर पर पेयजल की समस्याओं के त्वरित निराकरण और जिले में पेयजल की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने जिला स्तर और उपखंड स्तर पर कंट्रोल रूम का गठन किया गया है. आमजनों के लिए विभागीय टोल फ्री नं. 1800-233-0008 एवं कार्यालय के कंट्रोल रूम का फोन नं. 07771-2582223 जारी किया गया है। इन नंबरों में पेयजल की समस्या, हैंडपंप बिगड़ने की सूचना दर्ज करा सकते हैं।
जिला स्तर और उपखंड स्तर पर दल का गठन किया गया है, जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड रायपुर के कंट्रोल रूम कार्यालय के प्रभारी अधिकारी आलोक जाधव, मानचित्रकार (सिविल) हैं। इसी तरह विकासखंड धरसीवा/तिल्दा की प्रभारी सहायक अभियंता रूक्मिणी सिंह, विकासखंड तिल्दा के प्रभारी उप-अभियंता अविनाश एक्का एवं ज्योति गुप्ता, विकासखंड धरसीवा के प्रभारी उप-अभियंता मिलनदास घृतलहरे एवं ज्योति गुप्ता हैं.
इसी तरह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी भू-जल संवर्धन उपखंड, रायपुर के अंतर्गत विकासखंड अभनपुर-आरंग के प्रभारी दीपक कोहली, सहायक अभियंता को बनाया गया है। विकासखंड अभनपुर की प्रभारी सरिता महेश कुमार, उप-अभियंता, भानुजा सिंह एवं उपासना सुखदेवे है. विकासखंड आरंग की प्रभारी रानू दिनकर, उप-अभियंता एवं शुभ्रा बघेल उप-अभियंता को बनाया गया है।
बोर खनन पर लगी रोक, कलेक्टर ने जारी किया आदेश
रायपुर। गर्मी के दिनों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में मंगलवार को कलेक्टर रायपुर, डॉ. गौरव सिंह ने बोर खनन पर पूर्णतः रोक लगाने का आदेश जारी किया है. जारी आदेश के अनुसार 15 जुलाई 2025 तक या मानसून के आगमन तक (दोनों तिथि में से जो बाद में आए) जलाभाव ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
कलेक्टर ने कहा, छत्तीसगढ़ पेयजल अधिनियम 1986 के अंतर्गत रायपुर जिले में इस अवधि के दौरान समक्ष अधिकारी की पूर्वानुमति की बिना कोई नया नलकूप पेयजल अथवा पेयजल के अलावा किसी अन्य प्रयोजन के लिये खनन नहीं किया जा सकेगा. केंद्रीय भूजल बोर्ड के रिपोर्ट के अनुसार रायपुर जिले के विकासखंड (धरसींवा) भूजल के उपयोग के विषय पर क्रिटिकल जोन में आ चुका है.

जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए नलकूप खनन के लिए अनुमति प्रदान करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी नियुक्ति किया जाता है, जिनमें एडीएम रायपुर, एसडीएम रायपुर, एसडीएम आरंग, एसडीएम अभनपुर और एसडीएम तिल्दा शामिल हैं. सभी अधिकारी संबंधित क्षेत्र में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी/नगरीय निकाय/तहसील से रिपोर्ट प्राप्त कर नियमानुसार अनुमति प्रदान करेंगे.
महादेव सट्टा ऐप मामले में भूपेश बघेल के खिलाफ FIR दर्ज
रायपुर। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने महादेव बेटिंग एप मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आरोपी बनाया है. इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें भूपेश बघेल छठवें आरोपी के रूप में नामित हैं. कुल 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें महादेव एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल भी शामिल हैं.
पहले से ही चल रही थी जांच
CBI की एफआईआर में रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, असीम दास, सतीश चंद्राकर, चंद्रभूषण वर्मा और भीम सिंह को भी आरोपी बनाया गया है. एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आरोपी नंबर 6 के रूप में नामित किया गया है. संभावना जताई जा रही है कि CBI जल्द ही उनसे पूछताछ कर सकती है.
राजनीतिक हलचल तेज
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर आरोप है कि उन्होंने महादेव बेटिंग एप के प्रमोटरों से करीबी संबंध रखे और उन्हें संरक्षण दिया. CBI इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है. इस मामले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है, और विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की है.
ईओडब्ल्यू से CBI को सौंपी गई जांच
इस मामले की शुरुआत में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी. बाद में राज्य सरकार ने इस केस को CBI को सौंप दिया, ताकि जांच को व्यापक स्तर पर किया जा सके और इसमें शामिल वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सके.
CBI की छापेमारी और बरामदगी
CBI ने इस मामले में विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें बड़ी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं. जब्त किए गए दस्तावेजों में वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम रिकॉर्ड शामिल हैं. CBI की जांच अभी जारी है, और आने वाले दिनों में नए खुलासे होने की संभावना है.
इन लोगों के नाम शामिल:
1. भूपेश बघेल
2. सौरभ चंद्राकर
3. रवि उप्पल
4. असीम दास
5. सतीश चंद्राकर
6. चंद्रभूषण वर्मा
7. भीम सिंह
8. नीतिश दीवान
9. अनिल कुमार अग्रवाल उर्फअतुल अग्रवाल
10. विकास छापरिया
11. रोहित गुलाटी
12. विशाल आहुजा
13. धीरज आहुजा
14. अनिल दम्मानी
15. सुनील दम्मानी
16. यादव
17. हरीशंकर तिबरवाल
18. सुरेंद्र बागड़ी
19. सूरज चोखानी
20. शुभम सोनी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नियद नेल्ला नार योजना से पुसकोंटा को मिली विकास की सौगात : छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल में आई रोशनी की नई किरण
रायपुर। घना जंगल, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, और सूरज ढलते ही छा जाने वाला घना अंधेरा – कुछ समय पहले तक बीजापुर जिले के हीरापुर ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पुसकोंटा की यही पहचान थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।




मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित "नियद नेल्लानार योजना" ने वह कर दिखाया, जो लंबे समय से सिर्फ एक सपना था। गांव के प्रत्येक घर में जब पहली बार बल्ब जला, तो वह एक नए जीवन की शुरुआत थी।
पुसकोंटा के ग्रामीण देवा कुंजाम, भीमा माड़वी, नागू पोट्टाम और जमुना मिच्चा की आँखों में यह चमक साफ़ देखी जा सकती है, जो उम्मीद और विश्वास की होती है।
देवा कुंजाम बताते हैं, “पहले अंधेरा ऐसा होता था कि जंगली जानवरों का डर हर समय बना रहता था। लेकिन अब गांव में रोशनी है, और साथ ही सुरक्षा का भी एहसास।"
पीने का पानी अब घर के द्वार पर
गृहिणी जमुना मिच्छा कहती हैं, “जल जीवन मिशन के तहत हर घर में नल होने से अब हमें पानी के लिए हैण्डपंप तक नहीं जाना पड़ता। पहले बच्चों को अकेला छोड़कर पानी लाने जाना पड़ता था, अब घर में ही पानी है, तो बच्चों का भी ठीक से ध्यान रख पाती हूं।”
सपनों को पंख देने वाला प्रशासन
भीमा माड़वी के लिए तो यह बदलाव कुछ और ही मायने रखता है। वे पहली बार रायपुर देखने गए – एक ऐसा अनुभव जो पहले कभी कल्पना में भी नहीं था। वे कहते हैं, “मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल के कारण आज पुसकोंटा जैसे दूरदराज गांव के ग्रामीण भी राजधानी के विकास कार्यों को देख पा रहे हैं।”
बिजली, पानी, सड़क, मोबाइल टावर, स्कूल, आंगनबाड़ी – एक समग्र बदलाव
नियद नेल्लानार योजना सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक विजन है – वह विजन जो हर गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ता है। अब पुसकोंटा जैसे गांवों में न सिर्फ रोशनी आई है, बल्कि संभावनाओं की नई सुबह भी हुई है। प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं अब यहां दस्तक दे रही हैं। ये बदलाव सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता का है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह स्पष्ट हो चुका है कि कोई भी गांव अब ‘दूर’ नहीं है, और कोई भी सपना अब ‘असंभव’ नहीं है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जनहित में हो रहा डीएमएफ राशि का प्रभावी उपयोग
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देश हैं कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ राज्य की जनता तक पहुँचे और सभी संसाधनों का उपयोग जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किया जाए। मुख्यमंत्री की इस जनकेंद्रित सोच के अनुरूप अब डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि का जनहित में लोगों को गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उपयोग प्रारंभ हो गया है।
इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले की डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में गीदम में नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय भवन निर्माण कार्य हेतु ₹299 करोड़ 85 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन के लिए लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। सीजीएमएससी नियमानुसार राज्य शासन एवं पीडब्ल्यूडी मैनुअल के प्रावधानों के तहत निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश और निर्धारित समय सीमा का पालन सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में यह पहल न सिर्फ गीदम और दंतेवाड़ा क्षेत्र के लोगों को अपने निवास के समीप उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराएगी, बल्कि यह संपूर्ण बस्तर अंचल के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को भी एक नई दिशा देगी।
यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जनकेंद्रित सरकार की उस अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें विकास, विश्वास और पारदर्शिता को समान रूप से महत्व देते हुए राज्य के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प झलकता है।
नक्सल प्रभावित जिलों में निर्माण कार्यों के लिए "जिला निर्माण समिति" का गठन – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा निर्णय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने एक निर्णायक कदम उठाते हुए नक्सल प्रभावित सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु "जिला निर्माण समिति" के गठन की स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनता के पैसे से चलने वाले कार्यों में गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसी तारतम्य में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जिला निर्माण समिति के गठन के सम्बन्ध में आदेश जारी किया गया है। यह समिति निर्माण कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए गठित की गई है। समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर रहेंगे। जिले के पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री, जिला कोषालय अधिकारी एवं संबंधित कार्य के जिला प्रमुख अधिकारी समिति के सदस्य रहेंगे।जिला निर्माण समिति का कार्य क्षेत्र संपूर्ण राजस्व जिला होगा।
कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति वर्तमान नियमों के तहत् सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी की जाएगी। जिला निर्माण समिति के माध्यम से किए जाने वाले कार्यों का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जायेगा। जिन कार्यों को 3 बार ऑनलाईन निविदा आमंत्रित करने के बाद भी, इच्छुक ठेकेदार उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरा कराया जाना संभव न हो, ऐसे अत्यावश्यक तथा अपरिहार्य निर्माण कार्यों को जिला निर्माण समिति के माध्यम से कराया जायेगा। जिले के जो ब्लॉक गहन रूप से नक्सल प्रभावित नहीं है उनमें जिला निर्माण समिति के माध्यम से यथासंभव कार्य नहीं कराया जाने के निर्देश हैं। स्थानीय निधि जैसे की डीएमएफ/सीएसआर इत्यादि मद से कराए जाने वाले कार्यों में भी सर्वप्रथम कार्य एजेंसी जैसे की पीडब्लूडी/ आरईएस/पीएमजीएसवाई इत्यादि को ही क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया चाहिए ना की जिला निर्माण एजेंसी को। इन एजेंसी के द्वारा अगर कार्य निष्पादन नहीं हो पाता है, लगातार 3 बार निविदा में कोई भाग नहीं लेता है तब वैसी परिस्थिति में ही कार्य स्थानीय निधि से जो कराए जाने है, में जिला निर्माण एजेंसी को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया जा सकता है।
समिति के माध्यम से रूपये 10.00 करोड़ तक का कार्य कराया जा सकेगा। अपरिहार्य तथा अत्यावश्यक निर्माण कार्यों को जिला निर्माण समिति से कराये जाने के संबंध में ई-टेण्डर द्वारा निविदा आमंत्रित की जायेगी। जिला निर्माण समिति द्वारा एक कार्य को निर्माण की सुविधा की दृष्टि से दो अथवा दो से अधिक भागों में विभाजित किया जा सकेगा, जैसे-पुल-पुलियों के कार्य सहित सड़क निर्माण का कार्य स्वीकृत हो, तो सड़क कार्य के लिये अलग ठेकेदार तथा पुल-पुलियों के लिये अलग-ठेकेदार नियुक्त करने की छूट होगी। सड़क की लंबाई अधिक होने अथवा पुल-पुलियों की संख्या अधिक होने की स्थिति में सड़क को दो अथवा दो से अधिक भागों में बांटने तथा अलग-अलग पुल-पुलियों के लिये भी अलग-अलग एजेंसी नियुक्त करने की छूट होगी, किन्तु एक कार्य को छोटे-छोटे टुकडों में विभाजित करते समय समिति द्वारा इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि समग्र रूप से कार्य की गुणवत्ता एक जैसी रहे तथा अलग-अलग टुकड़ों में कराए गए कार्यों के लागत मूल्य में समानता रहे। यदि कार्य को अलग अलग-अलग टुकड़ों में कराया जाता है तो यह ध्यान रखा जाए कि विगत तीन वर्षों में जिले में विभिन्न विभागों के द्वारा कराए गए समान प्रवृत्ति के कार्य के दर से अधिक नहीं हो।
कार्यों का निरीक्षण, पर्यवेक्षण तथा मूल्यांकन का कार्य लोक निर्माण विभाग या कलेक्टर द्वारा निर्धारित किसी सक्षम तकनीकी अधिकारी के द्वारा किया जायेगा।
पारदर्शिता को मिलेगा संस्थागत ढाँचा: दरों की समुचितता और प्रतिस्पर्धात्मकता की जाएगी सुनिश्चित
निविदा स्वीकार करने वाला प्राधिकारी निविदाओं को स्वीकार करने से पहले दरों की उचितता के बारे में खुद को संतुष्ट करेगा। दरों की उचितता का आंकलन मुख्य रूप से उचित दरों के आधार पर किया जाएगा, निविदा स्वीकार करने वाला प्राधिकारी निविदाओं पर निर्णय लेते समय पिछले तीन महीनों की अवधि के भीतर बुलाए गए कार्यों की समान प्रकृति की निविदाओं की दरों का उल्लेख कर सकता है। समान कार्यों का अर्थ है प्रकृति, मात्रा, विनिर्देशों और स्थान में समान कार्य, जो बहुत करीब है। दरों की उचितता की जांच के लिए औचित्य कथन तैयार किया जाएगा। इस विधि में श्रम, सामग्री, माल ढुलाई आदि की बाजार दरों को ध्यान में रखते हुए दरों का विस्तृत विश्लेषण तैयार करना शामिल है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगी, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार भी करेगी।
राज्य शासन के विकास, विश्वास और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों को सशक्त करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री साय की यह रणनीति एक निर्णायक कदम है।
छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय : व्यापारियों और आम जनता को राहत, ई-वे बिल की सीमा ₹1 लाख तक बढ़ाई गई, पेट्रोल पर वैट ₹1 प्रति लीटर कम
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए दो अहम निर्णय लागू किए हैं, जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर इन निर्णयों को वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया गया था।
ई-वे बिल की सीमा में वृद्धि : अब ₹1 लाख तक का माल परिवहन होगा बिना ई-वे बिल के
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के भीतर माल परिवहन के लिए अनिवार्य ई-वे बिल की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी है। यह निर्णय विशेष रूप से छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस निर्णय से व्यापारियों को ₹1 लाख तक के मूल्य के सामानों के परिवहन में अब ई-वे बिल की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से राज्य में ई-वे बिल जनरेट करने वाले लगभग 26% व्यापारियों को ई-वे बिल जनरेट करने से मुक्ति मिलेगी। इस निर्णय से ई-वे बिल जनरेशन में 54 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे अनुपालन व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी। हालांकि, कुछ विशेष वस्तुएं जैसे पान मसाला, तंबाकू उत्पाद, विशिष्ट लकड़ी उत्पाद जैसे – प्लायवुड, लेमिनेटेड शीट, पार्टिकल बोर्ड, फाइबर बोर्ड, आयरन, स्टील एवं उसके सामान, कोयला के लिए यह छूट लागू नहीं होगी।
व्यापारियों द्वारा लंबे समय से ई-वे बिल में छूट दिए जाने की मांग पर यह निर्णय लिया गया है, जो व्यापार को सुगम और लागत प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
पेट्रोल पर वैट में ₹1 प्रति लीटर की कमी : मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधी राहत
राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से पेट्रोल पर वैट की राशि में ₹1 प्रति लीटर की कटौती की है। इस निर्णय से पेट्रोल की कीमतों में सीधे कमी आएगी, जिसका लाभ विशेष रूप से मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में दुपहिया वाहनों का उपयोग करने वालों की संख्या अधिक है, जो मुख्यतः पेट्रोल पर निर्भर हैं। वैट में की गई यह कटौती इन परिवारों की रोज़मर्रा की लागत को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
यह निर्णय भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप वर्तमान आर्थिक परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया गया है।
सरकार की प्रतिबद्धता : सुगमता, सुविधा और संवेदनशीलता
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों की समस्याओं को समझते हुए लगातार ऐसे निर्णय ले रही है जो सार्थक, जनहितकारी और दूरदर्शिता से परिपूर्ण हों। व्यापारी वर्ग को सहूलियत और आम जनता को राहत देने के ये निर्णय प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण कारक सिद्ध होंगे।
गृहमंत्री अमित शाह का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा : बस्तर पंडुम में होंगे शामिल, एंटी-नक्सल अभियान के ऑपरेशन कमांडरों के साथ करेंगे संवाद, जानिए मिनट टू मिनट कार्यक्रम…
रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. वे 4 अप्रैल की शाम राजधानी रायपुर पहुंचेंगे. इस दौरान वे राज्य के प्रमुख नेताओं और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. 5 अप्रैल को गृहमंत्री शाह बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां वे बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. यहां वे मां दंतेश्वरी के दर्शन करेंगे. इसके अलावा एंटी-नक्सल अभियान के ऑपरेशन कमांडरों के साथ संवाद भी करेंगे. जानिए अमित शाह का मिनट टू मिनट कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल क्या है.
राज्य सरकार ने विभागों के लिए बजट किया जारी, वित्त विभाग ने जारी किया निर्देश, जानिये कब-कब कितना होगा बजट खर्च
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विभागों के बीच बजट का आवंटन जारी कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट आवंटन का आदेश वित्त विभाग ने जारी कर दिया है। वित्त सचिव मुकेश बंसल की तरफ से सभी एसीएस, प्रमुख सचिव, सचिव और विशेष सचिव को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया गया है।
जारी आदेश के मुताबिक पहले छमाही में विभाग बजट का सिर्फ 40 फीसदी ही खर्च कर पायेंगे, जबकि दूसरे छमाही में 60 प्रतिशत बजट खर्च होगा। प्रथम तिमाही में 25 प्रतिशत और दूसरे तिमाही में 15 प्रतिशत का व्यय होगा। तृतीय तिमाही में 25 प्रतिशत और चौथे तिमाही में 35 प्रतिशत खर्च होगा।






भारतीय वन सेवा के पांच अधिकारियों को मिली पदोन्नति, देखिए सूची…
रायपुर। राज्य शासन ने पांच अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भारतीय वन सेवा) को प्रधान मुख्य वन संरक्षक के तौर पर पदोन्नत किया है. पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में कौशलेन्द्र कुमार, आलोक कटियार, अरुण कुमार पाण्डेय, सुनील कुमार मिश्रा और प्रेम कुमार शामिल हैं. पदोन्नति आदेश वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अवर सचिव डीआर चन्द्रवंशी की ओर से जारी किया गया है.
देखिए सूची –

छत्तीसगढ़ के सुदूर पंचायत क्षेत्रों की वित्तीय सहायता पर सांसद बृजमोहन ने संसद में उठाए सवाल
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर संसद में लगातार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने छत्तीसगढ़ के सुदूर पंचायत क्षेत्रों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ जैसे अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले छोटे और दूरस्थ पंचायत क्षेत्रों को भी पर्याप्त वित्तीय सहायता पर जानकारी मांगी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने और उनके प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम
बृजमोहन अग्रवाल के सवालों के जवाब में पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. बघेल ने बताया कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के तहत वित्त वर्ष 2022-23 से अब तक छत्तीसगढ़ के 3,71,743 प्रतिभागियों सहित पूरे देश में 1,14,61,210 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण देकर पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना है।
वित्तीय सहायता और पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका
राज्य मंत्री ने आगे बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 केंद्रीय वित्त आयोग को संघ और राज्यों के संबंधित निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करने और विभिन्न उद्देश्यों के लिए वित्तीय अनुदान की सिफारिश करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग द्वारा अपनाए गए निधियों के वितरण मानदंड के तहत 90% राशि जनसंख्या के आधार पर और 10% राशि राज्यों के क्षेत्रफल के आधार पर आवंटित की जाती है।
इसके अलावा, पंचायती राज मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2022-23 से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान की संशोधित केंद्र प्रायोजित योजना को लागू किया है, जिसके तहत पंचायत प्रतिनिधियों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने और पंचायतों को अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की प्रतिक्रिया
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी पंचायत क्षेत्रों में आवंटित निधि का सही और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सुदूर पंचायत क्षेत्रों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और उनके विकास के लिए विशेष योजनाएं चलाई जाएं। उन्होंने कहा कि पंचायतों के समग्र विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रम आवश्यक हैं।
अस्पताल निर्माण के 35 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप, विधायक मंडावी ने जांच के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
रायपुर। विधायक इंद्रशाह मंडावी ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के जिला अस्पताल निर्माण के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पत्र लिखकर प्रदेश स्तरीय जांच समिति बनाकर मामले की जांच की मांग की है. पत्र में बताया गया है कि करीब 35 करोड़ से अधिक के निर्माण का सिंगल टेंडर दल्ली राजहरा की फर्म को दिया गया है.
विधायक इंद्रशाह ने कहा है कि मोहल्ला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले में प्रस्तावित 200 बिस्तर जिला अस्पताल के निर्माण टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है. करीब 35 करोड़ के अस्पताल निर्माण के लिए सीजीएमएससी के माध्यम से टेंडर आमंत्रित किए गए. इसमें तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया. इनमें रायपुर की रामराजा मिनरल्स, वीर प्रोजेक्ट कंपनी के अलावा दल्ली राजहरा की नाकोड़ा कंस्ट्रक्शन थे. दो कंपनियों को टेक्निकल त्रुटि के चलते अपात्र कर दिया गया और फिर नाकोड़ा कंस्ट्रक्शन को टेंडर दे दिया गया.
कांग्रेस विधायक इंदर शाह मंडावी ने कहा, CGMSC के एसी अखिलेश तिवारी ने नियम कानून को तोड़ मरोड़कर अपने चहेते को टेंडर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगल टेंडर मंजूर नहीं किया जा सकता है. बावजूद टेंडर दे दिया गया. उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है.
‘माता के किरपा छाए सांय-सांय’, सीएम साय ने नवरात्रि की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए साझा किया जसगीत…
रायपुर। नवरात्रि पर देश-प्रदेश में माता के भक्तों का श्रद्धाभाव देखते ही बन रहा है. माता के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से लेकर शाम तक उमड़ी पड़ी है. जगह-जगह जसगीत सुनाई पड़ रहा है. इन सबके बीच एक नया जसगीत ‘माता के किरपा छाए सांय-सांय’ अलग ही उत्साह और उमंग पैदा कर रहा है, जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट किया है.
‘माता के किरपा छाए सांय-सांय’ जसगीत के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवरात्रि की प्रदेशवासियों को हृदय से शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘छत्तीसगढ़ मा सुराज ह भाए, तोरे ममता मा समाए, समाए हो मईया, माता के किरपा छाए हो मां’. दुर्गा मईया के आसीरवाद ले हमर सरकार ह जनता के समृद्धि अउ खुशहाली बर नवा-नवा उदीम करत हे. हमर छत्तीसगढ़ ह विकास के रद्दा म आघू बढ़त हे. संगवारी हो, सुनव हमर सरकार के काम के ऊपर बने ए पचरा जसगीत ल… जय माता दी!
छत्तीसगढ़ में सस्ता हुआ पेट्रोल, मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों की दी बड़ी राहत…
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज से पेट्रोल के दाम कम हो गए हैं. साय सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल के दाम में कटौती की है. नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट सत्र में पेट्रोल के दाम 1 रुपए/लीटर सस्ता करने की घोषणा की गई थी, जो 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है.
बता दें, सोमवार रात 12 बजे के बाद से प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप में अब नए दरों पर पेट्रोल मिलना शुरू हो चुका है. रायपुर में पेट्रोल की कीमत 100.42 रुपए प्रति लीटर थी, जो अब घटकर 99.42 हो गई है. यह कटौती प्रदेशवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद हुई है. पेट्रोल की कीमत घटने से राज्य के आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है.
पेट्रोल और डीजल सस्ता होने से ट्रैक्टर, पंप सेट और अन्य कृषि यंत्रों की लागत घटेगी, जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा. इसके अलावा, चावल मिल, गन्ना फैक्ट्री और अन्य कृषि आधारित उद्योगों के लिए परिवहन और उत्पादन खर्च कम होगा, जिससे आवश्यक वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं.
वहीं राज्य सरकार-को राजस्व का घाटा होगा. वहीं, वाणिज्यक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपभोग बढ़ने से राजस्व-नुकसान की भरपाई जाएगी.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मधुसूदन दास की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महिला थाना चौक (मधुसूदन दास चौक) में उत्कल दिवस के अवसर पर महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैरिस्टर मधुसूदन दास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें सादर नमन किया।

