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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से संत-महात्माओं ने की मुलाकात, आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्णय पर जताया आभार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब ने सौजन्य भेंट की।
इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर" जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है।
संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विवाद मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरपंच चुनाव याचिका खारिज करने का आदेश किया रद्द
बिलासपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सरपंच चुनाव के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को सीधे खारिज करने के एसडीएम कोर्ट के आदेश को कानूनन गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। साथ ही मामले में नए सिरे से सुनवाई करते हुए गवाही दर्ज करने और 60 दिनों के भीतर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जब चुनाव न्यायाधिकरण किसी मामले में विवाद के बिंदु तय कर देता है, तब बिना दोनों पक्षों की गवाही और विस्तृत सुनवाई के चुनाव याचिका को मनमाने ढंग से बंद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए एसडीएम कोर्ट भेजने का निर्देश रजिस्ट्री को दिया है।
सरपंच चुनाव से जुड़ा है मामला
मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के जनपद पंचायत कसडोल अंतर्गत ग्राम पंचायत हसुवा का है। यहां पिछले वर्ष हुए पंचायत चुनाव में गायत्री शर्मा और रितु अतुल केशरवानी सरपंच पद के लिए चुनाव मैदान में थीं। मतगणना के बाद पीठासीन अधिकारी ने रितु केशरवानी को विजयी घोषित किया था।
चुनाव परिणाम से असंतुष्ट गायत्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 122 के तहत एसडीएम न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी।
नामांकन पत्र में हस्ताक्षर को लेकर उठाया था सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचित सरपंच रितु केशरवानी ने अपने नामांकन पत्र में स्वयं हस्ताक्षर नहीं किए थे। उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए गए, जो भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।
सुनवाई के दौरान एसडीएम कोर्ट ने विवाद के बिंदु तय कर दिए थे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर विवादित हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराने की मांग की थी।
एसडीएम कोर्ट ने बंद कर दी थी सुनवाई
मामले की सुनवाई के बीच एसडीएम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर चुनाव याचिका पर आगे की सुनवाई बंद कर दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए गायत्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि एसडीएम का आदेश छत्तीसगढ़ पंचायत (निर्वाचन याचिका, भ्रष्ट आचरण और सदस्यता के लिए अयोग्यता) नियम, 1995 के नियम 11 और 12 का उल्लंघन है।
60 दिन में निपटारे के निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एसडीएम कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया और निर्देश दिया कि दोनों पक्षों की गवाही दर्ज कर नियमानुसार सुनवाई पूरी की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि मामले का निराकरण 60 दिनों के भीतर किया जाए।
हाईकोर्ट के इस फैसले को पंचायत चुनाव विवादों और चुनाव याचिकाओं की सुनवाई प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव पर बवाल: युवा कांग्रेस ने लगाया लोकतंत्र की हत्या का आरोप, राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार
इंदौर। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के मुद्दे पर युवा कांग्रेस ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। युवा कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
इंदौर शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित पटेल के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई घटनाओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि जिस तरह से नामांकन निरस्त किया गया, उससे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों के बीच असंतोष और नाराजगी बढ़ी है।
ज्ञापन में कहा गया कि लोकतंत्र की मजबूती स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों पर टिकी होती है, लेकिन इस मामले में कई ऐसे सवाल खड़े हुए हैं जिनका जवाब देश की जनता जानना चाहती है। युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यदि चुनावी प्रक्रिया में समान नियमों का पालन नहीं किया जाता तो इससे संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति से मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
कलेक्टर कार्यालय परिसर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा। इस प्रदर्शन के दौरान इंदौर शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित पटेल, इंदौर ग्रामीण युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आज से सभी टाइगर रिजर्व और अभ्यारण्य बंद, एक अक्टूबर तक जंगल सफारी पर रोक
रायपुर। मानसून के आगमन और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए हर साल की तरह इस वर्ष भी देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में जंगल सफारी 15 जून से 1 अक्टूबर तक साढ़े 3 महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई है। पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया, हर साल मानसून के पहले टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों को बंद कर दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ में प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा तथा उनके प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) और वन्यजीव अभयारण्यों को आज (15 जून) से पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मानसून के आगमन के साथ ही जंगलों में पर्यटन गतिविधियों पर यह अस्थायी रोक आगामी 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 से जंगल सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी।
वन विभाग के अनुसार, इस रोक के पीछे दो मुख्य कारण हैं। वर्षा ऋतु के दौरान जंगलों के भीतर स्थित कच्चे मार्ग और सफारी ट्रैक बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। लगातार बारिश से नदी-नालों में उफान और रास्तों में जलभराव के कारण आवागमन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। मानसून का समय वन्यप्राणियों के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। यह अवधि अधिकांश वन्य प्रजातियों के प्रजनन और उनके शावकों के पालन-पोषण का समय होती है। इस दौरान इंसानी दखल को रोककर वन्यजीवों को एक शांत और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
ये प्रमुख पर्यटन स्थल रहेंगे बंद
अगले साढ़े तीन महीनों के लिए प्रदेश के इन प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जिनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, प्रदेश के अन्य सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।
बंद के दौरान वन विभाग चलाएगा विशेष अभियान
पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद रहने के दौरान वन विभाग शांत बैठेने के बजाय जंगलों के भीतर कई महत्वपूर्ण कार्य संपादित करेगा। अवैध शिकार को रोकने के लिए गश्त तेज की जाएगी और वन्यजीवों की क्लोज मॉनिटरिंग होगी। जंगलों के भीतर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा। आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए सफारी मार्गों, ट्रैकों और रिसॉर्ट्स की मरम्मत व रखरखाव किया जाएगा, ताकि 2 अक्टूबर से पर्यटकों को बेहतर और सुरक्षित अनुभव मिल सके।
वन्यजीव संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता
वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून ब्रेक इस अनुभव को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भले ही यह कुछ महीनों का इंतजार है, लेकिन पारिस्थितिकी संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से मानसून का यह ग्रीन ब्रेक बेहद जरूरी और सराहनीय कदम माना जा रहा है। आगामी 2 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ के जंगल एक बार फिर नए रोमांच के साथ सैलानियों के स्वागत के लिए तैयार होंगे।
स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान, 30 वाहनों की हुई जांच, 45 संचालकों को नोटिस जारी
रायपुर। स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण एक सुरक्षा अभियान है, जिसे परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों की फिटनेस जांचना और छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।
संयुक्त टीम ने 15 जून से जिले में संचालित स्कूल बसों का करेगी निरीक्षण
विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुरूप संचालित किया गया। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला सेनानी कार्यालय की संयुक्त टीम ने 15 जून को जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों और परमिट संबंधी शर्तों की जांच की।

30 बसों का निरीक्षण सुरक्षा मानकों की हुई विस्तृत जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पंजीकृत 75 स्कूल बसों में से 30 बसों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों में निर्धारित सड़क सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवश्यक उपकरणों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण प्रमाण-पत्र, कर (टैक्स), बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि विद्यार्थियों के परिवहन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
चालक-परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की दी जानकारी
जिला सेनानी कार्यालय द्वारा बसों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई तथा चालक-परिचालकों को इनके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
अनुपस्थित बस संचालकों पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान 45 स्कूल बसें उपस्थित नहीं मिलीं। इस पर संबंधित स्कूल बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने कहा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। संयुक्त निरीक्षण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
रिश्वतखोरी मामले में ACB की बड़ी कार्रवाई : CEO, बाबू और चपरासी 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
सक्ती। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में एसीबी बिलासपुर की टीम ने सक्ती जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) निखिल कश्यप, कार्यालय लिपिक अविनाश सिंह ठाकुर और चपरासी लछन भानु को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से जनपद पंचायत कार्यालय में हड़कंप मच गया है।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार, प्रार्थी अरुण कुमार भारद्वाज, निवासी ग्राम लिमतरा, जिला सक्ती ने एसीबी बिलासपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी माता ग्राम पंचायत लिमतरा की सरपंच हैं। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत पंचायत में निर्मला घाट, नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 8 लाख रुपये का चेक पहले ही जारी किया जा चुका था।
12 लाख रुपये का चेक जारी करने मांगी रिश्वत
शेष 12 लाख रुपये का चेक जारी कराने के लिए अरुण भारद्वाज को उनकी माता ने अधिकृत किया था। जब उन्होंने जनपद पंचायत सक्ती के सीईओ निखिल कश्यप और बाबू अविनाश ठाकुर से चेक जारी करने का अनुरोध किया, तो आरोपियों ने उससे 2 लाख रुपये कमीशन की मांग की। लेकिन प्रार्थी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने इसकी शिकायत एसीबी से की।
शिकायत का ACB ने पहले सत्यापन कराया। जांच में पता चला कि आरोपियों द्वारा 2 लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी, जिसमें से 1 लाख रुपये पहले ही कार्यालय के भृत्य लच्छन भानु के माध्यम से ले लिए गए थे। शेष 1 लाख रुपये लेने के लिए एसीबी ने योजना बनाकर प्रार्थी को जनपद पंचायत कार्यालय भेजा।
ACB ने जाल बिछाकर रिश्वत लेते पकड़ा
एसीबी के अनुसार, सीईओ निखिल कश्यप ने रिश्वत की शेष राशि बाबू अविनाश ठाकुर को लेने के लिए कहा। वहीं अविनाश ठाकुर ने यह राशि कार्यालय के भृत्य लच्छन भानु को लेने के निर्देश दिए। जैसे ही प्रार्थी ने 1 लाख रुपये की रिश्वत राशि भृत्य लच्छन भानु को सौंपी, पहले से मौजूद एसीबी बिलासपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए सीईओ निखिल कश्यप, बाबू अविनाश ठाकुर और भृत्य लच्छन भानु को गिरफ्तार कर लिया। टीम ने मौके से 1 लाख रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद कर ली।
रिश्वत मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ एसीबी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में एसीबी बिलासपुर इकाई की यह 51वीं सफल ट्रैप कार्रवाई है।
बिजली दरों में वृद्धि के बावजूद छत्तीसगढ़ में सस्ती रहेगी बिजली, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना से लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा की है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की है। आयोग का कहना है कि पिछले वर्षों में बढ़ी महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन एवं आपूर्ति लागत तथा पूर्व वर्षों के घाटे की भरपाई को देखते हुए यह मामूली वृद्धि आवश्यक और न्यायसंगत है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कितनी बढ़ीं दरें ?
बता दें कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि, उपभोग के अलग-अलग स्लैब के अनुसार यह बढ़ोतरी 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक रहेगी। शून्य से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 पैसे प्रति यूनिट, 201 से 600 यूनिट तक खपत करने वालों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि निर्धारित की गई है। राज्य के लाखों परिवारों पर बढ़े हुए टैरिफ का वास्तविक प्रभाव केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के आसपास होगा। टैरिफ वृद्धि करते समय आयोग ने आम जनता और निम्न आय वर्ग के हितों का विशेष ध्यान रखा है।
ऊर्जा राहत योजना से मिलेगा बड़ा सहारा
सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार अपेक्षाकृत कम रहेगा। अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं के बिल पर प्रभाव औसतन केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा।
सोलर उपभोक्ताओं पर कम पड़ेगा असर
इसी प्रकार 201 से 600 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले कई उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर अपनी ग्रिड आधारित खपत 400 यूनिट के भीतर कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर भी बढ़ोतरी का प्रभाव बहुत कम होने की संभावना है।
गैर-घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए नई दरें
गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में औसतन 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं कृषि पंपों के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी घोषित की गई है। हालांकि, कृषि उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण इस वृद्धि का सीधा प्रभाव किसानों पर नहीं होगा।
उद्योगों के लिए भी टैरिफ में संशोधन
उच्च दाब (एचटी) श्रेणी के औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली शुल्क में संशोधन किया गया है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे प्रति यूनिट तथा डिमांड चार्ज में 25 रुपये प्रति केवीए की वृद्धि की गई है। 33 केवी श्रेणी में 40 पैसे प्रति यूनिट और 11 केवी श्रेणी में 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।
आदिवासी क्षेत्रों और उपभोक्ताओं को विशेष राहत
नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ विशेष रियायतें भी दी गई हैं। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित छात्रावासों को व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत प्रदान की गई है। इसके अलावा विलंबित भुगतान अधिभार की व्यवस्था को भी उपभोक्ता हित में सरल बनाया गया है। अब अतिरिक्त शुल्क केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगेगा। घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी के 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट भी मिलेगी।
आम उपभोक्ताओं पर सीमित रहेगा प्रभाव
आयोग के अनुसार संशोधित दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड की तुलना में अभी भी कम है। ऐसे में राज्य में उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए बिजली दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। कुल मिलाकर बिजली दरों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन राहत योजनाओं, सब्सिडी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा।
सड़कों-पुलों के निर्माण में देरी पर बिफरे डिप्टी सीएम : दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त, आठ को नोटिस जारी
रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव द्वारा सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जाहिर करने और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद विभाग ने दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले 8 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं पूर्व में दो ठेकेदारों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया गया है।
लोक निर्माण विभाग ने 10 जून को भी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर केशलूर के पास बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज में काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स के अनुरूप नहीं होने पर ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस जारी कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पिछले सप्ताह चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान अपने चारों विभागों के कार्यों का निरीक्षण कर गहन समीक्षा की थी। उन्होंने निरीक्षण और बैठकों के दौरान सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने काम में लापरवाही, देरी और अनुबंध के अनुसार अपेक्षित तेजी नहीं लाने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
पुलों के काम पिछड़ने पर दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार मेसर्स गुप्ता कन्सट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। कंपनी द्वारा भवरडींग नदी पर अदनार-तोतर मार्ग, कोंडागांव के घोटिया-मुंडा-चांदाबेड़ा मार्ग और बड़े राजपुर विकासखंड के पलना-मरीगांव-कुंडई मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी कबीरधाम जिले के बांटीपथरा से कुई (दमगढ़) मार्ग में हॉफ नदी पर भी उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कर रही है। चारों कार्यस्थलों पर कंपनी का काम अपेक्षित गति से काफी पीछे है।
विभाग ने कांकेर के आमाबेड़ा-सेमर गांव सड़क पर नेरूल नदी तथा बोड़ागांव-खासगांव-तरादुल मार्ग में डुमरीकेल नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के कार्य में लेट-लतीफी पर ठेकेदार निर्भय राम साहू का पंजीयन आगामी दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद इन दोनों ठेकेदारों के काम की गति असंतोषजनक है।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा मार्ग के चौड़ीकरण व सुधार कार्य की धीमी गति पर ठेकेदार पंकज हालदार को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के उत्तर का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है। प्रमुख अभियंता ने सुकमा में पैकपारा-धनीकोड़ता मार्ग तथा केरलापाल-पटेलपारा-सिरसट्टी सड़क के कार्य में भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर ठेकेदार आशीष भदौरिया को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है।
सड़कों के निर्माण में लेट-लतीफी पर इन ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी
विभाग ने कांकेर-अमोड़ा-नरहरपुर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बी.एम.एस. प्रोजेक्ट, कोंडागांव में हडेली-कुदूर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स सुराना एंड कंपनी और जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग के ठेकेदार मेसर्स एस.के. अरोरा को कार्यों में धीमी प्रगति के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कार्यस्थलों पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं होने पर सुकमा के चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क के ठेकेदार के. मोहन रेड्डी, ट्रांससॉफ्ट इन्फ्रा और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन, कोंटा-गोलापल्ली मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन तथा भेज्जी-चिंतागुफा सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार के. मोहन रेड्डी एवं गोविन्द्र सिंह देशमुख को लोक निर्माण विभाग के सुकमा संभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
”सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी प्रकार की लेट-लतीफी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित समयावधि में निर्माण कार्यों के पूरे नहीं होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में निर्माणाधीन सड़कों और पुलों को तेजी से पूरे कर बेहतर कनेक्टीविटी सुनिश्चित करने पर जोर है। वहां काम कर रहे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को अनुबंध के अनुसार निर्धारित प्रगति तथा माइलस्टोन्स पूरे करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। काम में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है।“ - अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री
छत्तीसगढ़ में बिजली हुई महंगी, 1 जुलाई से बढ़ी दरें लागू
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगी बिजली का झटका लगा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है।
1 जुलाई से लागू होंगी नई बिजली दरें
छत्तीसगढ़ में आगामी महीने से बिजली उपभोक्ताओं को अधिक बिल का भुगतान करना पड़ेगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी।राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्य विवेक गनोदवाले और अजय सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान नई टैरिफ दरों की जानकारी देते हुए बताया कि बिजली कंपनी की वित्तीय स्थिति और बढ़ते घाटे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

बिजली कंपनी ने मांगी थी 24 प्रतिशत वृद्धि
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) ने आयोग के समक्ष बिजली दरों में करीब 24 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। कंपनी का तर्क था कि उत्पादन, वितरण और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण उसे भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।हालांकि आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए कंपनी की मांग को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और केवल 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी।
घरेलू उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ
नई टैरिफ दरों के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल में प्रति यूनिट 30 पैसे से लेकर 50 पैसे तक की वृद्धि की गई है। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लाखों उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने के कारण नए टैरिफ का असर सीधे मासिक घरेलू बजट पर दिखाई देगा।
व्यावसायिक और गैर-घरेलू उपभोक्ता भी प्रभावित
घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा गैर-घरेलू और व्यावसायिक श्रेणी के उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिली है। इस वर्ग के लिए बिजली दरों में 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि स्वीकृत की गई है।इसका असर छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, संस्थानों और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों पर भी पड़ेगा। बिजली लागत बढ़ने से कई क्षेत्रों में परिचालन खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
घाटे की भरपाई बना मुख्य कारण
बिजली दरों में वृद्धि के पीछे राज्य बिजली वितरण कंपनी का बढ़ता वित्तीय घाटा प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंपनी ने आयोग के समक्ष प्रस्तुत याचिका में बताया था कि बढ़ती लागत, बिजली खरीद व्यय, रखरखाव खर्च और अन्य वित्तीय दायित्वों के कारण उसकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।आयोग ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपभोक्ताओं से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद नई दरों को अंतिम रूप दिया।
1 जुलाई से दिखाई देगा असर
नई दरें लागू होने के बाद जुलाई माह से आने वाले बिजली बिलों में इसका सीधा असर दिखाई देगा। उपभोक्ताओं को अपनी खपत के अनुसार पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा।राज्य विद्युत नियामक आयोग का कहना है कि बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। हालांकि आने वाले दिनों में इस बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।
ई-ऑफिस एवं समयबद्धता के लिए मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारियों को मुख्य सचिव ने दिए प्रशंसा पत्र…
रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों का निराकरण करने और कार्यालयीन समय पर उपस्थित होने वाले श्रेष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों को मई माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किये है। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सभी अधिकारी-कर्मचारियों से अपेक्षा की है कि वे ई-ऑफिस पर अच्छे से अच्छा कार्य करें। उन्होंने सभी अधिकारी-कर्मचारियों को निर्धारित कार्यालय में समय पर उपस्थित होने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने कार्यक्रम में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया और उन्हें प्रशंसा पत्र प्राप्त करने के लिए बधाई दी।
विभागों में ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम स्थान पर गृह विभाग और दूसरे स्थान पर समाज कल्याण और तीसरे स्थान पर सामान्य प्रशासन रहा। प्रशंसा पत्र समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार ने प्राप्त किया।
मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस पर श्रेष्ठ कार्य करने के लिए विभागीय सचिव को सम्मानित किया। इसमें श्रेष्ठ फाईल निष्पादन के लिए ई-ऑफिस पर सामान्य प्रशासन विभाग एवं उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव रजत कुमार को प्रथम स्थान पर सम्मानित किया। वहीं पर विधि एवं विधायी की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत को दूसरे स्थान ई-ऑफिस पर श्रेष्ठ कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। इसी तरह से तीसरे स्थान पर गृह एवं श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता को ई-ऑफिस पर श्रेष्ठ कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य सचिव ने संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी, वरिष्ठ सचिवालय सहायक एवं कनिष्ठ सचिवालय सहायक सहित अन्य कर्मचारियों को भी ई-ऑफिस पर श्रेष्ठ कार्य करने के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किए है।
संयुक्त सचिव श्रेणी में ई-ऑफिस पर श्रेष्ठ कार्य करने के लिए अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव अनुपम त्रिवेद्वी को प्रथम, दूसरे स्थान पर अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के भूपेन्द्र कुमार राजपूत को सम्मानित किया गया। वहीं पर परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव कमलेश बंसोड को तीसरे स्थान पर सम्मानित किया गया है। उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव दूरदेशी राम सोन्टापर को प्रथम स्थान पर, दूसरे स्थान पर सामान्य प्रशासन विभाग-एक के उप सचिव किशोर कुमार भूआर्य को सम्मानित किया गया। तीसरे स्थान पर सामान्य प्रशासन विभाग-6 की उप सचिव ऋतु वर्मा को सम्मानित किया गया। अवर सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान पर विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव अरूण कुमार मिश्रा को सम्मानित किया गया। दूसरे स्थान पर गृह विभाग के उप सचिव पूरन लाल साहू को सम्मानित किया गया। तीसरे स्थान पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अवर सचिव मगनलाल पवार को सम्मानित किया गया।
मुख्य सचिव ने अनुभाग अधिकारी श्रेणी में ई-ऑफिस में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अनुभाग अधिकारी प्रथम स्थान पर सामान्य प्रशासन विभाग-4 व 1 के अनुभाग अधिकारी नंदकुमार मेश्राम को सम्मानित किया। दूसरे स्थान पर स्वास्थ्य विभाग के अनुभाग अधिकारी विरेन्द्र कुमार को और तीसरे स्थान के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुभाग अधिकारी भोलेनाथ सारथी को सम्मानित किया। इसी तरह से वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक दूर्गेश रात्रे को सम्मानित किया गया। दूसरे स्थान पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक रामगोपाल सेन और तीसरे स्थान पर स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ कार्यालय सहायक कमलेश यदु सम्मानित हुए।
इसी प्रकार से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान पर नगरीय प्रशासन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक उमेश यादव, दूसरे स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक भानुप्रसाद और तीसरे स्थान पर सामान्य प्रशासन विभाग-2 के कनिष्ठ सहायक सुरेन्द्र कुमार सम्मानित हुए। इसी प्रकार से टेक्नीकल सेक्शन (सेकेट्रीयेट) के ग्रेड-1,2,3 कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रेणी में दीपेश कुमार को प्रथम स्थान पर सम्मानित किया गया।
समयबद्धता के लिए कार्यालयीन समय पर उपस्थिति के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया गया है। इसमें नगरीय प्रशासन विभाग के अवर सचिव आनंद कुमार पटेल, राजस्व विभाग के स्टोनोटायपिस्ट भावना यादव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक हरि प्रसाद, सामान्य प्रशासन विभाग के निज सचिव हरिश देवांगन, सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य लेखा अधिकारी जयंत कुमार देवांगन को सम्मानित किया गया। इसी तरह से सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य जीधन राम साहू, उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी लोक नारायण शर्मा, मुख्य सचिव कार्यालय के अवर सचिव ओम प्रकाश पात्रे को सम्मानित किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक पुरूषोत्तम लाल निषाद, वित्त विभाग की सहायक ग्रेड-2 पुष्पांजलि गजभिये, सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य राजकुमार सोरी, पशुपालन विभाग की सेक्शन ऑफिसर राजेश कुमार जैन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्टोनोटायपिस्ट रमाकांत, सामान्य प्रशासन विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी रमेश कुमार पटेल, अनुसूचित जनजाति एवं विकास विभाग के सहायक ग्रेड-2 शेष नारायण साहू और वित्त विभाग के अनुभाग अधिकारी सुनील मैत्री और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी उमेश कुमार ठाकरे को समयबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।
परिवहन विभाग में तबादला, दो अधिकारियों को सौंपी गई नई जिम्मेदारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग ने दो अधिकारियों का तबादला किया है। इस संबंध में परिवहन विभाग मंत्रालय ने आदेश जारी किया है।
जारी आदेश के अनुसार मृत्युंजय पटेल क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय रायपुर को क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय दुर्ग और प्रतीक शुक्ला सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन आयुक्त कार्यालय से जिला परिवहन अधिकारी, जिला परिवहन कार्यालय, महासमुंद पदस्थ किया गया है।
देखिये आदेश की कॉपी-

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ली कोर ग्रुप की बैठक, संगठनात्मक मजबूती और सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार पर जोर
रायपुर। सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को रायपुर जिला ग्रामीण भाजपा कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक ली। इस बैठक में संगठनात्मक मजबूती, आगामी अभियानों की कार्ययोजना और केंद्र व राज्य सरकार की जनहितैषी नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने पर विस्तृत चर्चा की गई।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा हर नागरिक: बृजमोहन अग्रवाल
बैठक को संबोधित करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ और राज्य सरकार के लोकलुभावन फैसलों ने छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदली है। इन उपलब्धियों को ‘जन-जागरण अभियान’ के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है।"
संगठनात्मक मजबूती ही हमारी शक्ति
श्री अग्रवाल ने उन्होंने संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुए कार्यकर्ताओं को सक्रियता बढ़ाने और बूथ स्तर तक संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्टी की असली ताकत उसके कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बूथ स्तर से लेकर मंडल स्तर तक संगठन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "रायपुर जिला ग्रामीण क्षेत्र में संगठन को एक नई ऊर्जा और सक्रियता के साथ कार्य करना होगा ताकि केंद्र की राष्ट्रीय नीतियों और राज्य सरकार के जनसेवा कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।"
आगामी अभियानों की रूपरेखा
बैठक में आगामी समय में चलाए जाने वाले विभिन्न अभियानों पर भी मंथन हुआ। श्री अग्रवाल ने आह्वान किया कि वे जनसंपर्क अभियानों के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के विजन और राज्य सरकार के विकास कार्यों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर जनता के विश्वास को और अधिक पुख्ता करना है।
बैठक में मंत्री टंक राम वर्मा, मंत्री गुरु खुशवंत साहब विधायक अनुज शर्मा, अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज, सह संभाग प्रभारी राजीव सिंह, रायपुर ग्रामीण जिला प्रभारी सुरेंद्र पाटनी, जिला ग्रामीण अध्यक्ष श्याम नारंग उपस्थित रहें।
नए शैक्षणिक सत्र पर मुख्यमंत्री साय का शुभकामना संदेश, विद्यार्थियों से कहा- मन लगाकर करें पढ़ाई
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें पूरी लगन और उत्साह के साथ पढ़ाई करने का संदेश दिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि आप सभी बच्चों के सपनों को आकार देने और उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने का माध्यम है। उन्होंने बच्चों से पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और उत्साह के साथ नियमित रूप से विद्यालय जाने तथा मन लगाकर पढ़ाई करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का परिश्रम और शिक्षा ही आने वाले समय में बच्चों की सफलता का आधार बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने तथा ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से प्रदेश और देश के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के बच्चे अपनी प्रतिभा, मेहनत और संकल्प के बल पर भविष्य में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश का नाम गौरवान्वित करेंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के सफल, उज्ज्वल और प्रेरणादायी भविष्य की कामना की।
वायुसेना के विशेष विमान से पहुंचे NEET-UG के प्रश्नपत्र, कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रांग रूम में बंद
जगदलपुर। देशभर में 21 जून को आयोजित होने वाली नीट यूजी (NEET-UG) 2026 री-एग्जाम को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस बीच छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में सोमवार को वायु सेना के विशेष विमान से प्रश्नपत्रों को पहुंचाया गया. प्रश्नपत्रों को सीलबंद पेटियों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विमान से उतारा गया.

जानकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्रों की बंद पेटी को विमान से उतारने के बाद कड़ी सुरक्षा में सीधे सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम तक रवाना किया गया. हर चरण में गोपनीयता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया ताकि किसी भी प्रकार की चूक की संभावना न रहे. पिछले वर्षों में दो बार सामने आए पेपर लीक मामलों के बाद इस बार प्रशासन अतिरिक्त सतर्क नजर आ रहा है.
एडमिट कार्ड हुआ जारी
एनटीए ने नीट यूजी 2026 री-एग्जाम के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. 21 जून को सुबह परीक्षा आयोजित की जाएगी. अभ्यर्थी neet.nta.nic. in पर अपने लॉगिन विवरण जैसे आवेदन संख्या और पासवर्ड का उपयोग कर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. स्टूडेंट्स को कहा गया है कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करने से पहले रिफंड के लिए अपने बैंक खाते के विवरण को भी सत्यापित कर लें.
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से, पांच बैठकों में संपादित होंगे वित्तीय और शासकीय कार्य…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र की अधिसूचना जारी हो गई है. सत्र 13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा. इस दौरान कुल 5 बैठकें होंगी. सत्र के दौरान वित्तीय कार्य के साथ अन्य शासकीय कार्य संपादित होंगे.


शाला प्रवेश उत्सव को जनआंदोलन बनाने आगे आएं जनप्रतिनिधि : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर 16 जून से 27 जून 2026 तक आयोजित होने वाले "शाला प्रवेश उत्सव" में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त आधार है तथा यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में प्रदेश के समस्त विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं शिक्षा से जुड़े सभी लोगों को नवीन शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि नए शैक्षणिक सत्र के साथ प्रदेशभर में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बालक-बालिका का विद्यालय में प्रवेश तथा नियमित अध्ययन सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष, महापौर तथा नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे अपने क्षेत्र के किसी विद्यालय में सुविधानुसार उपस्थित होकर अभियान में सहभागी बनें तथा ऐसे बच्चों की पहचान और नामांकन के लिए प्रेरित करें, जो अभी तक विद्यालय से नहीं जुड़े हैं अथवा बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सहभागिता इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम श्री विद्यालयों के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षण वातावरण विकसित किया जा रहा है तथा वर्ष 2026 से 150 विवेकानंद विद्यालयों की स्थापना कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए मानक स्थापित किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शासकीय विद्यालयों को आधुनिक, तकनीक-संपन्न और छात्र-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है। विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, गणवेश तथा बालिकाओं के लिए सरस्वती साइकिल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग और व्यापक जनभागीदारी से शाला प्रवेश उत्सव को सफल बनाते हुए प्रदेश के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा का अधिकार पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में मंगलसूत्र को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस बोली- महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़
बालोद। कांग्रेस ने मनेंद्रगढ़ चिरमिरी जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत हुए 184 जोड़ों के विवाह में मंगलसूत्र घोटाले का आरोप लगाया है। महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने इस घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, यह महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस आरोप को झूठा बताते हुए सभी प्रावधानों के तहत विवाह संपन्न कराने की बात कही है।
कांग्रेस अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा है कि लगातार भाजपा की सरकार में इस तरह की घटनाएं सामने आ रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने मंगलसूत्र के लॉकेट को चांदी का होना बताया, लेकिन बेटियों का कहना है कि चैन तो गिलेट का है। लॉकेट को जब चेक कराया गया तो बताया गया कि उसमें चांदी का परत डाला गया है, जिसे उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता के लिए दुर्भाग्यजनक बताया।
संगीता सिन्हा ने कहा, जिस विश्वास से बेटियां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत विवाह करती हैं तो यह जनता के विश्वास में खरा नहीं उतरना दुर्भाग्यजनक है। एक मंगलसूत्र की राशि 15 हजार के हिसाब से 27 लाख रुपए होता है और ये 17-18 हजार में निपटा दिए। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और इसमें बड़े अधिकारी और मंत्रियों की भी संलिप्तता हो तो उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
नवविवाहितों ने कहा – हमारे साथ धोखा हुआ, दोषियों पर कार्रवाई हो
बता दें कि सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों को सम्मान के साथ विवाह सहायता प्रदान करना है, लेकिन रतनपुर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह के बाद जब हितग्राहियों ने मिले आभूषणों की जांच कराई तो कथित तौर पर उनकी वास्तविकता सामने आ गई। पीड़ित नवविवाहिताओं का आरोप है कि उन्हें सोना-चांदी के नाम पर गिलेट के आभूषण दिए गए। यह केवल आर्थिक धोखा नहीं बल्कि उनके सम्मान और भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। नवविवाहिताओं का कहना है कि हमें बताया गया था कि शादी में सोना-चांदी के आभूषण मिलेंगे, लेकिन बाद में पता चला कि वे नकली हैं। हमारे साथ धोखा हुआ है, दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि खरीद प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ। वहीं इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा है कि सारे आरोप झूठे हैं।
निर्धारित निर्देशों और वित्तीय प्रावधानों का किया गया पालन
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को दी गई उपहार सामग्री को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग ने तथ्यात्मक जानकारी जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत कुल 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। कार्यक्रम में शासन द्वारा निर्धारित सभी दिशा-निर्देशों और वित्तीय प्रावधानों का पालन किया गया।
50 हजार की सहायता, डीबीटी से सीधा भुगतान
योजना के तहत प्रति कन्या 50 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है, इसमें से 35 हजार रुपये सीधे हितग्राही के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए जाते हैं। शेष राशि से विवाह आयोजन, भोजन, आवास, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं। कार्यक्रम में प्रति विवाहित जोड़े के लिए 20 अतिथियों के भोजन, वर-वधू के वस्त्र, चांदी के बिछिया-पायल, श्रृंगार सामग्री और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया था। विभागीय अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर ही सामग्री वितरित की गई। चांदी के बाजार मूल्य बढ़ने के कारण स्वीकृत प्रावधानों के अनुरूप कृत्रिम मंगलसूत्र दिए गए थे।
साथ ही, यदि किसी सामग्री की गुणवत्ता में कमी मिली तो संबंधित फर्म पर प्रति हितग्राही 100 रुपये की दर से कुल 18 हजार 400 रुपये की कटौती की गई। प्रति कन्या 1000 रुपये सीधे हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए गए। इस प्रक्रिया के तहत कुल 36 हजार रुपये सीधे खातों में जमा हुए और लगभग 14 हजार रुपये विवाह आयोजन व अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक योजना है।