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भाटिया और वेलकम डिस्टलरी के 16 वाहनों को EOW ने किया जब्त, डिस्टलरियों से सीधे दुकानों तक होती थी अवैध शराब की सप्लाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में ACB-EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध शराब परिवहन में प्रयुक्त 16 वाहनों को जब्त किया है। वेलकम डिस्टलरी, कोटा बिलासपुर और भाटिया वाइंस डिस्टलरी सरगांव मुंगेली से कुल 16 वाहन जब्त किए गए हैं।
डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया है कि इन वाहनों का उपयोग अवैध शराब (पार्ट-बी) के परिवहन में किया जाता था। इन वाहनों के माध्यम से डिस्टलरियों से सीधे चयनित शासकीय शराब दुकानों तक अवैध शराब पहुंचाई जाती थी। इस कार्य के लिए डिस्टलरी मालिकों द्वारा अपनी कंपनियों, कर्मचारियों और भरोसेमंद व्यक्तियों के नाम से खरीदी गई गाड़ियों का उपयोग किया जाता था। विवेचना में वेलकम डिस्टलरी से 08 और भाटिया वाइंस डिस्टलरी से 08 वाहन चिन्हित कर जब्त किए गए हैं। केडिया डिस्टलरी में भी इस कार्य के लिए निजी गाड़ियों के उपयोग के संबंध में जांच जारी है।
जानिए क्या है पूरा मामला…
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर (छग) द्वारा विवेचनाधीन शराब घोटाला प्रकरण, अपराध क्रमांक 04/2024, धारा 7, 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 यथा संशोधित अधिनियम, 2018 तथा धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी भा.दं.वि. के अंतर्गत वेलकम डिस्टलरी, कोटा जिला बिलासपुर तथा भाटिया वाइंस डिस्टलरी, सरगांव जिला मुंगेली से कुल 16 वाहन जब्त किए गए हैं। जांच में प्राप्त डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों से यह स्थापित हुआ है कि इन वाहनों का उपयोग अवैध शराब (पार्ट-बी) के परिवहन में किया जाता था।
विवेचना में यह पाया गया है कि अवैध शराब का परिवहन डिस्टलरियों से सीधे चयनित शासकीय देशी शराब दुकानों तक कराया जाता था। इस कार्य के लिए कुछ निर्धारित वाहनों का बार-बार उपयोग किया जाता था। जांच में प्राप्त साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर ऐसे वाहनों की डिस्टलरीवार पहचान की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध परिवहन के लिए डिस्टलरी मालिकों द्वारा अपनी कंपनियों, कर्मचारियों तथा कुछ भरोसेमंद व्यक्तियों के नाम से खरीदी गई अथवा उपलब्ध कराई गई गाड़ियों का उपयोग किया जाता था। इसी आधार पर वेलकम डिस्टलरी से 08 तथा भाटिया वाइंस डिस्टलरी से 08 वाहन, कुल 16 वाहन जब्त किए गए हैं। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि केडिया डिस्टलरी में भी इस कार्य के लिए निजी गाड़ियों का उपयोग किया गया था। उन गाड़ियों के स्वामित्व एवं उपयोग के संबंध में पृथक रूप से जांच जारी है। इस प्रकरण में ब्यूरो द्वारा आगे की विवेचना एवं आवश्यक वैधानिक कार्रवाई निरंतर जारी है।
रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान ने पेश किया संतुलित बजट, विकास कार्यों पर जोर
रायगढ़। महापौर जीवर्धन चौहान ने आज नगर पालिक निगम रायगढ़ के वर्तमान परिषद के द्वितीय बजट सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया. बजट में शहर के समग्र विकास, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण एवं नागरिक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है.
प्रस्तुत बजट के अनुसार निगम की कुल आय 480 करोड़ 36 लाख रुपए आंकी गई है, जबकि कुल व्यय 458 करोड़ 11 लाख 79 हजार रुपए प्रस्तावित है. इस प्रकार निगम ने 22 करोड़ 24 लाख 21 हजार रुपए की बचत का लक्ष्य निर्धारित किया है.
राजस्व मद में 92 करोड़ 74 लाख रुपए की आय और 85 करोड़ 49 लाख 74 हजार रुपए का व्यय प्रस्तावित है. वहीं पूंजीगत मद में 387 करोड़ 62 लाख रुपए की प्राप्तियां और 372 करोड़ 62 लाख 5 हजार रुपए का व्यय निर्धारित किया गया है. सम्मेलन में पार्षदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा निगम के बजट से संबंधित किए गए प्रश्न और जिज्ञासा को शांत करने कमिश्नर बृजेश सिंह क्षत्रिय ने विस्तार से जानकारी दी. इससे पूर्व सभापति डिग्री लाल साहू के अनुमति से निगम सचिव आर एन पटेल द्वारा परिषद की विशेष सम्मेलन में प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया. परिषद की विशेष सम्मेलन में एमआईसी सदस्यगण, पाषर्दगण, जनप्रतिनिधिगण, उपायुक्त सुतीक्षण यादव, कार्यपालन अभियंता अमरेश लोहिया, निगम के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे.
संपत्तिकर दर यथावत रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित
विशेष सम्मेलन के द्वितीय प्रस्ताव के रूप में संपत्ति कर को यथावत रखने संबंधित एजेंडा रखा गया. इसमें बताया गया कि वर्ष 2018-19 से लेकर 2025-26 तक कलेक्टर गाइडलाइन दरों में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है. साथ ही, छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 133 के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा संपत्तिकर में वृद्धि किए जाने संबंधी कोई आदेश भी प्राप्त नहीं हुआ है. एजेंडा को सर्वसम्मति से पारित किया गया.
पिछले वर्ष के कार्यों का उल्लेख
बजट अभिभाषण में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित अधिकांश विकास कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जबकि शेष कार्य प्रगति पर हैं एवं कुछ के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है. पिछले वर्ष सड़कों, नालियों, पुल-पुलिया निर्माण, जलमार्ग, पानी टंकी, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण और खेल मैदानों के विकास जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य कराए गए हैं.
डिजिटल सुविधा की पहल
नागरिकों की सुविधा के लिए जोहार रायगढ़, चैट बोट ऐप प्रारंभ किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी समस्याएं और सुझाव भेजकर उनका निराकरण की सुविधा ले सकते हैं.
वर्ष 2026-27 के प्रमुख प्रस्तावित कार्य
आगामी बजट में शहर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें बालसमुंद तालाब का उन्नयन एवं विकास, कोसाबाड़ी केंद्र से ऑक्सीजोन निर्माण, नगर निगम क्षेत्र में 10 सड़कों का निर्माण, डिवाइडर, नाली, फुटपाथ एवं चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, कबीर चौक सहित प्रमुख मार्गों का उन्नयन एवं विकास, चांदनी चौक से राजा महल होते हुए सर्किट हाउस तक सड़क उन्नयन, पाइपलाइन, लाइटिंग एवं गार्डन कार्य, बड़े रामपुर में खेल मैदान का विकास, संजय मार्केट का निर्माण एवं उन्नयन, रामलीला मैदान में मंच एवं पवेलियन निर्माण, भुजबंधान तालाब का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण, केवड़ाबाड़ी में मरीन ड्राइव नाला चैनलाइजेशन, रायगढ़ स्टेडियम में हाईमास्ट लाइट, अमलीभौना में ट्रक पार्किंग एवं सर्विस एरिया निर्माण शामिल है.
स्वच्छ एवं सुविधायुक्त विकसित शहर की ओर अग्रसर होता रायगढ़- महापौर चौहान
महापौर जीवर्धन चौहान ने कहा कि यह बजट शहर के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य रायगढ़ को एक आधुनिक, स्वच्छ एवं सुविधायुक्त शहर के रूप में विकसित करना है. इस बजट में नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं सड़क, पानी, प्रकाश एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है साथ ही डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए जोहार रायगढ़ ऐप के माध्यम से नागरिकों को सीधे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. आने वाले समय में सभी विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराया जाएगा.
बजट में शहर के सर्वांगीण विकास के कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान – सभापति साहू
सभापति डिग्री लाल साहू ने बजट को संतुलित एवं जनहितैषी बताते हुए कहा कि नगर निगम का यह बजट आय-व्यय के संतुलन के साथ तैयार किया गया है, जिसमें शहर के सर्वांगीण विकास कार्यों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं. परिषद की मंशा है कि प्रत्येक वार्ड में समान रूप से विकास कार्य हों और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलें. बजट में पार्षदों के सुझावों को प्रमुखता से शामिल किया गया है. शहर सरकार इस बजट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अंत में निगम द्वारा प्रस्तुत बजट को सदन के समक्ष रखा गया. लेखाधिकारी को वित्तीय आंकड़ों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए अधिकृत किया गया.
संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया।

चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया। इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि श्री वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।”
यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।
रायपुर में नए बोर खनन पर रोक, 1 अप्रैल से 15 जुलाई तक लागू आदेश
रायपुर। गर्मी के मौसम में पेयजल की कमी को देखते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर रायपुर जिले में नवीन बोर खनन (नलकूप) पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।
छत्तीसगढ़ पेयजल अधिनियम 1986 के तहत जिले को 1 अप्रैल 2026 से 15 जुलाई 2026 तक जलाभाव (पानी की कमी) वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। इस अवधि में बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति या संस्था नया बोर/नलकूप नहीं खोद सकेगी, चाहे वह पेयजल के लिए हो या किसी अन्य उपयोग के लिए।
इस नियम के अपवाद स्वरूप कुछ शासकीय विभाग जैसे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) को पूरे जिले में तथा नगर निगम और नगर पंचायतों को अपने क्षेत्र में केवल पेयजल के लिए बोर खनन हेतु अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए एडीएम रायपुर, एसडीएम रायपुर, एसडीएम आरंग, एसडीएम अभनपुर और एसडीएम तिल्दा को अपने क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियमों में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर अनुमति देने के लिए अधिकृत किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस विभाग में 16 अधिकारियों का DSP पद पर प्रमोशन, देखें सूची…
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग ने पुलिस विभाग में कार्यरत निरीक्षक स्तर के 16 अधिकारियों को डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) पद पर पदोन्नति दी है। यह फैसला 24 मार्च 2026 को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की अनुशंसा के आधार पर लिया गया।
जारी आदेश के मुताबिक, निरीक्षक संवर्ग, कंपनी कमांडर और विशेष शाखा के अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-12 (56,100 – 1,77,500रुपए) में पदोन्नति दी गई है। पदोन्नति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। प्रमोशन पाए अधिकारी निरीक्षक संवर्ग से डीएसपी संवर्ग विशेष शाखा में पदोन्नत किए गए हैं।
इन्हें मिला प्रमोशन –

नक्सलियों के नेटवर्क पर बड़ा वार, जंगल में छिपा दवाइयों का जखीरा जब्त
सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सीआरपीएफ की 217वीं बटालियन के जवानों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया दवाइयों का एक बड़ा डंप बरामद किया है। यह कार्रवाई नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह अभियान सीआरपीएफ छत्तीसगढ़ सेक्टर के पुलिस महानिरीक्षक शालीन के मार्गदर्शन, पुलिस उप महानिरीक्षक (परिचालन रेंज कोण्टा) राजेश पांडे और 217वीं बटालियन के कमांडेंट विजय शंकर के निर्देशन में चलाया गया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व सहायक कमांडेंट रवि शर्मा ने किया। अभियान में सी/217 और डी/241 बटालियन के जवानों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।
जानकारी के अनुसार, जवानों द्वारा वीरम गांव के पास जंगलों में कॉम्बिंग और सर्च अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एक छोटी पहाड़ी (टेकरी) के पास संदिग्ध वस्तुओं का ढेर दिखाई दिया। सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत बीडीडीएस (बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वाड) टीम को मौके पर बुलाया गया। पूरी सावधानी के साथ क्षेत्र की तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में दवाइयां और अन्य सामग्री बरामद की गई।
बरामद सामग्री में करीब 6 किलोग्राम ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन (50 mg/ml), दर्द निवारक दवाइयां, संक्रमण से संबंधित दवाएं जैसे फ्लुकोनाजोल और डॉक्सीडैन, तथा लगभग 10 किलोग्राम फिटकरी शामिल हैं। इन दवाइयों की मात्रा और प्रकार को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इन्हें नक्सलियों द्वारा अपने इलाज और आपातकालीन उपयोग के लिए जमा किया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के डंप नक्सलियों के मेडिकल सपोर्ट सिस्टम का हिस्सा होते हैं, जिनका इस्तेमाल वे घायल साथियों के इलाज के लिए करते हैं। साथ ही, यह भी संभावना जताई जा रही है कि इन दवाइयों के माध्यम से नक्सलियों के स्थानीय समर्थन नेटवर्क और उनकी गतिविधियों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल की जा सकती है।
अभियान के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पूरे ऑपरेशन में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई और सभी जवान सुरक्षित अपने कैंप लौट आए। यह ऑपरेशन न केवल सुरक्षा बलों की सतर्कता और रणनीतिक कौशल को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि नक्सलियों के नेटवर्क को लगातार कमजोर किया जा रहा है।
सीएम साय के दौरे में हंगामा, भाजपा नेत्री और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दौरे के दौरान रविवार रात सर्किट हाउस परिसर में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब भाजपा नेत्री गौरी गुप्ता को अंदर जाने से रोक दिया गया। इस दौरान उनकी और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई।
बताया जा रहा है कि गौरी गुप्ता ने खुद को प्रदेश युवा मोर्चा उपाध्यक्ष बताते हुए पुलिस पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें रोकना प्रोटोकॉल के खिलाफ है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा, प्रोटोकॉल नहीं जानते? एसपी भी नहीं रोकते।
घटना के दौरान माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया। हंगामे के बीच एक अन्य भाजपा नेता के हस्तक्षेप के बाद गौरी गुप्ता को सर्किट हाउस के अंदर प्रवेश मिला। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भाजपा नेत्री और पुलिसकर्मियों के बीच बहस साफ देखी जा सकती है। घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ में बदला मौसम का मिजाज: आंधी-बारिश से मिली राहत, कई इलाकों में बिजली गुल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदला है। दिनभर तेज धूप के बाद शाम को अचानक मौसम बदला है। बस्तर और बिलासपुर जिले में आंधी तूफान के साथ तेज बारिश हुई। वहीं तेज आंधी के चलते बिलासपुर के कई इलाकों में बिजली बंद हो गई है। रायपुर में भी बादल छाए हुए हैं। तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
बस्तर जिले में तेज हवाओं के साथ जगदलपुर सहित ग्रामीण इलाकों में तकरीबन एक घंटे तक जमकर बारिश हुई। मौसम विभाग ने पहले ही आज बस्तर जिले के साथ ही बीजापुर, कोंडागांव नारायणपुर और कांकेर के कुछ इलाकों में बारिश की संभावना जताई थी।
कई जगह पेड़ गिरने से राहगीर परेशान
मौसम में आए बदलाव और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर जगदलपुर चित्रकोट मार्ग पर देखा गया। तेज हवाओं के चलते मुख्य मार्ग पर जगह-जगह पेड़ गिर गए हैं, जिसके चलते राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मौसम में आए बदलाव से तापमान में गिरावट आई है।
छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास : चालू वित्तीय वर्ष में 6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास पूरे, देश में सबसे ज्यादा CG में बने घर
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए हैं, जो इस वर्ष देश में सर्वाधिक है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सशक्त एवं समन्वित क्रियान्वयन से यह उपलब्धि संभव हो पाई है, जिससे प्रदेश आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर कहा कि छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण में एक नया इतिहास रचते हुए “सबको आवास” के संकल्प को तेजी से साकार किया है। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रथम कैबिनेट निर्णय में 18 लाख आवास स्वीकृत कर इस दिशा में ठोस शुरुआत की गई और वर्तमान में सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को कवर कर लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 5.87 लाख, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 13 हजार तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं।योजनाओं के प्रभावी समन्वय से 6 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य पार किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास पूर्ण होने का रिकॉर्ड है, जो तेज क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है। “डीलर दीदी” मॉडल के तहत 9 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्य आवास निर्माण सामग्री की आपूर्ति कर “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इसके साथ ही हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, समावेशी विकास और सुशासन की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है।
उन्होंने बताया कि 6 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 1200 से अधिक “रानी मिस्त्री” शामिल हैं। साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18002331290 संचालित है। पिछले 10 महीनों में इस पर 1500 से अधिक शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त हुए, जिनका त्वरित निराकरण किया गया है। हर माह की 7 तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में “आवास दिवस” के माध्यम से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली से जानकारी सहज उपलब्ध हो रही है।
छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहकर महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, समावेशी विकास और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है, जो राज्य के सतत एवं संतुलित विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगा।
छत्तीसगढ़ की जेलों में वीडियो-ऑडियो कॉलिंग सुविधा: BSNL से MoU, बंदी अब परिवार से कर सकेंगे सीधा संवाद
रायपुर। प्रदेश के जेलों में बंदियों के मानवीय अधिकारों और उनके सामाजिक पुनर्वास को मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। जेल मुख्यालय, छत्तीसगढ़ ने भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के साथ एमओयू (MoU) कर राज्य की सभी 33 जेलों में वीडियो और ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम शुरू करने की दिशा में पहल की है। इस सुविधा के जरिए अब बंदी अपने परिवारजनों और अधिवक्ताओं से वीडियो और ऑडियो कॉल के माध्यम से आसानी से संपर्क कर सकेंगे।
इस एमओयू के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य की सभी 33 जेलों में बीएसएनएल द्वारा निःशुल्क रूप से वीडियो एवं ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। यह पहल बंदियों को उनके परिवारजनों से नियमित और सुगम संपर्क स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी। अब जेलों में निरूद्ध बंदी अपने परिजनों तथा अधिवक्ताओं से वीडियो कॉल के माध्यम से भी बात कर सकेंगे। प्रत्येक जेल में प्रिजन कॉलिंग सिस्टम की स्थापना के लिए विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री, जेल विभाग द्वारा निर्देशित किया गया है।
बंदियों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए परिवार के साथ संपर्क अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अक्सर देखा गया है कि लंबे समय तक परिजनों से दूरी बंदियों में तनाव, अवसाद एवं सामाजिक अलगाव की भावना को बढ़ाती है। ऐसे में यह तकनीकी सुविधा न केवल उनके मानसिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक होगी, बल्कि उनके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
इस पहल के माध्यम से बंदियों को मानवीय गरिमा के साथ जीवन यापन का अवसर प्रदान किया जाएगा तथा उनके पुनर्वास एवं समाज में पुनर्स्थापन की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाएगा। यह व्यवस्था जेलों में पारदर्शिता एवं सुशासन को भी बढ़ावा देगी।
जेल विभाग में वर्तमान में 17 जेलों में ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित हैं। बंदियों की संख्या के परिप्रेक्ष्य में ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम की संख्या बढ़ाया जाना आवश्यक है। वर्तमान में किसी भी जेल में वीडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित नहीं है। प्रिजन कॉलिंग सिस्टम के माध्यम से जेलों में परिरूद्ध बंदी अपने परिजनों तथा अधिवक्ताओं से बात कर सकते हैं। प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित करने से बंदियों के परिवारजनों को जेल तक आने जाने के समय तथा खर्चें में बचत होगी।
बीएसएनएल द्वारा सभी मशीन, हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर मुफ्त में प्रदाय किये जाऐंगे। ऑडियो कालिंग के लिए प्रति मिनट एक रूपये तथा वीडियो कॉलिंग के लिए पॉंच रूपये का शुल्क लिया जाएगा। हर बंदी को सप्ताह में एक बार पॉंच मिनट के लिए ऑडियो कॉलिंग/वीडियो कॉलिंग की सुविधा दी जाएगी।
एमओयू के अनुसार प्रथम चरण में वीडियो कॉलिंग तथा ऑडियो कॉलिंग सुविधा निम्नानुसार स्थापित की जावेगी, जिसे भविष्य में बढ़ाया जाएगा:-
केंद्रीय जेल : रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर – एक वीडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम तथा एक ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम।
जिला जेल : जशपुर, कबीरधाम, रायगढ़, जांजगीर, कोरबा, राजनांदगांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, रामानुजगंज – एक वीडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम तथा एक ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम।
जिला जेल : धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, पेंड्रारोड, मुंगेली, बैकुण्ठपुर, सूरजपुर, संजारी-बालोद, बेमेतरा – एक ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम।
उप जेल : कटघोरा, सक्ती, सारंगढ़, मनेन्द्रगढ़, डोंगरगढ़, खैरागढ़, नारायणपुर, बीजापुर – एक ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम।
जेल विभाग द्वारा यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि बीएसएनएल के सहयोग से स्थापित यह प्रणाली राज्य की जेलों में सुधारात्मक प्रशासन को नई दिशा प्रदान करेगी और बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
31 मार्च तक संपत्तिकर जमा करें, वरना होगी 17% अधिभार और सख्त कार्रवाई: रायपुर निगम की चेतावनी
रायपुर। रायपुर नगर पालिक निगम के राजस्व विभाग द्वारा शहर में लगातार अभियान चलाकर सभी 70 वार्डों के बड़े बकायादारों को चेतावनी दी जा रही है। निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि बकाया राशि समय पर जमा नहीं की गई, तो संबंधित बकायादारों पर नियमानुसार कुर्की और सीलबंदी जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निगम प्रशासन ने अपील की है कि कार्रवाई की परेशानी और तनाव से बचने के लिए संबंधित सभी बड़े बकायादार नगर पालिक निगम रायपुर के राजस्व विभाग को तत्काल अपना सम्पूर्ण बकाया अदा कर दें। सभी सम्पत्तिकरदाता नागरिक अपना देय सम्पत्तिकर तत्काल नगर निगम रायपुर के राजस्व विभाग को अदा करें और अंतिम नियत तिथि दिनांक 31 मार्च 2026 तक करों की अदायगी नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार 17 प्रतिशत अधिभार सहित बकाया राजस्व की वसूली की सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे मानसिक परेशानी और तनाव से बचा जा सके।
नगर पालिक निगम रायपुर के समस्त 10 जोन कार्यालयों के राजस्व विभाग और समस्त सदर काउंटर अंतिम देय तिथि 31 मार्च 2026 तक, महावीर जयंती के शासकीय अवकाश दिवस सहित, आम कार्य दिवस की तरह जनहित में जनसुविधा के लिए राजस्व वसूली के लिए सामान्य कार्यालयीन दिवस की भांति खुले रहेंगे। सभी सम्पत्तिकरदाता नागरिक जोन कार्यालय जाकर अपना देय सम्पत्तिकर तत्काल अदा कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त नगर पालिक निगम रायपुर के ‘मोर रायपुर’ ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड करके तथा ऑनलाइन लिंक https://mcraipur.in/ के माध्यम से ऑनलाइन सम्पत्तिकर भुगतान की सुविधा निरंतर उपलब्ध रहेगी। इसके माध्यम से कोई भी सम्पत्तिकरदाता नागरिक अपने सम्पत्तिकर सहित समस्त निगम करों का भुगतान घर बैठे एक क्लिक पर आसानी से नगर पालिक निगम रायपुर के राजस्व विभाग को कर सकता है। रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के सभी 10 जोनों के समस्त 70 वार्डों के रहवासी सम्पत्तिकरदाता नागरिकों को इस सहज और सरल तरीके से प्राप्त हो रही प्रशासनिक जनसुविधा का अधिकाधिक लाभ ऑनलाइन सम्पत्तिकर भुगतान करके अवश्य उठाना चाहिए।
छात्रों के अधिकारों के लिए NSUI सड़कों पर, 250 कॉलेजों में सौंपे ज्ञापन
रायपुर। छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर NSUI ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में 250 से अधिक महाविद्यालयों में ज्ञापन सौंपे गए। NSUI का कहना है कि प्रदेश में वर्ष 2016 से छात्रसंघ चुनाव बंद है, जिससे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कहा, चुनाव नहीं होने के कारण छात्रों को अपनी समस्याएं उठाने और प्रतिनिधित्व करने का मंच नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव बहाल करना छात्रों के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।
NSUI ने मांग की है कि राज्य सरकार तुरंत चुनाव बहाली का निर्णय ले, ताकि छात्र अपने प्रतिनिधि चुन सकें। संगठन ने चेतावनी भी दी है कि यदि 6 तारीख तक मांग पूरी नहीं हुई तो NSUI प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का घेराव करेगा।
कायस्थ समाज का देश-प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज चंदखुरी में कायस्थ मंगल भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कायस्थ समाज को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता कौशल्या की पावन भूमि चंदखुरी में इस मंगल भवन का शुभारंभ होना पूरे समाज के लिए खुशी और गौरव का विषय है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कायस्थ समाज सदैव से एक प्रबुद्ध और जागरूक समाज रहा है, जिसने देश एवं प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन से लेकर सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इस समाज की सक्रिय भूमिका रही है, जो प्रेरणादायी है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है और उन्हें विश्वास है कि कायस्थ समाज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि जब समाज संगठित होकर कार्य करता है, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हो रहे विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि आज अंबिकापुर से दिल्ली और कलकत्ता के लिए सीधी हवाई सेवा प्रारंभ की गई है, जिससे प्रदेशवासियों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने बजट में सीजी वायु योजना का प्रावधान किया है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के सभी हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा। साथ ही कार्गो सेवा भी प्रारंभ की गई है, जिससे किसान अपने उत्पाद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंचा सकेंगे।
इस अवसर पर नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने कहा कि कायस्थ मंगल भवन का निर्माण समाज की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह भवन किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि सर्व समाज के उपयोग के लिए बनाया गया है। यहां सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकेगा, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह भवन आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वी.वाय. हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने कहा कि इस मंगल भवन का निर्माण पूरे समाज के सहयोग से संभव हुआ है और इसके लिए सभी लोग बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या की पावन भूमि पर इस भवन का निर्माण होना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है और यह भवन निश्चित रूप से शुभ कार्यों में उपयोगी सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, सहित कायस्थ समाज के समाज के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर - दिल्ली - कोलकाता हवाई यात्रा का किया वर्चुअल शुभारंभ
रायपुर। प्रदेश में हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी से अंबिकापुर–दिल्ली - कोलकाता हवाई सेवा का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख शहरों को विमान सेवाओं से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे आमजन को भी सुलभ हवाई यात्रा का लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह परिकल्पना रही है कि “हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सके” और छत्तीसगढ़ में यह सपना अब साकार होता दिख रहा है। उन्होंने सरगुजा अंचल के नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय सांसद के प्रयासों से यह महत्वपूर्ण सुविधा संभव हो पाई है। राजधानी दिल्ली और कोलकाता से सीधा जुड़ाव होने से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश में हवाई सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है और हाल ही में बिलासपुर एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग सुविधा भी प्रारंभ हुई है। इसके साथ ही बजट में ‘सीजी वायु’ योजना के माध्यम से घरेलू विमान सेवाओं के सुचारू संचालन का प्रावधान भी किया गया है। रायपुर एयरपोर्ट पर कार्गो सेवा प्रारंभ होने से प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि अंबिकापुर (दरिमा) में 72-सीटर विमान के संचालन से दिल्ली–अंबिकापुर–कोलकाता के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश को बड़ी सुविधा प्राप्त हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि बिलासपुर में नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू होने के साथ-साथ दक्षिण छत्तीसगढ़ में जगदलपुर में भी एयर कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है।कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से मंत्री राजेश अग्रवाल एवं सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने भी मुख्यमंत्री को इस पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।
उल्लेखनीय है कि निर्धारित शेड्यूल के तहत यात्रियों को आने-जाने दोनों दिशाओं में सुविधा उपलब्ध होगी तथा बिलासपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी सुदृढ़ होगी। अम्बिकापुर सरगुजा संभाग का मुख्यालय होने के साथ उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वाणिज्यिक केंद्र है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा एवं खनिज भंडार से समृद्ध है। साथ ही मैनपाट, तातापानी एवं विविध जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों के कारण यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं।
हवाई सेवा के प्रारंभ होने से सरगुजा संभाग सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जुड़ जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा।
एलायंस एयर का फ्लाइट शेड्यूल (सप्ताह में 4 दिन)
विमानन कंपनी एलायंस एयर द्वारा इन उड़ानों का संचालन किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट बुकिंग आधिकारिक वेबसाइट पर प्रारंभ हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया, जिससे अब एटीआर जैसे बड़े विमान यहां संचालित हो सकते हैं। माँ महामाया एयरपोर्ट दरिमा, अम्बिकापुर लगभग 365 एकड़ में फैला हुआ है, एयरपोर्ट के सिविल एवं विद्युतीकरण कार्य हेतु राशि रू. 48.25 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, जिससे इस एयरपोर्ट में सभी कार्य डीजीसीए मानक अनुरूप कराया गया है। मां महामाया एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों के अनुरूप कराया गया। हवाई अड्डे में लगभग 100 वाहन की पार्किंग की व्यवस्था के साथ टर्मिनल भवन तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया है।
दिल्ली रूट (सोमवार और बुधवार)
सोमवार (फ्लाइट नं. 91613): दिल्ली से बिलासपुर होते हुए सुबह 11:35 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। वापसी में दोपहर 12:00 बजे अम्बिकापुर से सीधे दिल्ली के लिए उड़ान भरेगी। बुधवार (फ्लाइट नं. 91614): दिल्ली से सुबह 10:25 बजे अम्बिकापुर आगमन और दोपहर 12:00 बजे बिलासपुर होते हुए दिल्ली प्रस्थान करेगी।
कोलकाता रूट (गुरुवार और शनिवार)
शनिवार (फ्लाइट नं. 91763): कोलकाता से बिलासपुर होते हुए सुबह 10:00 बजे अम्बिकापुर आगमन और 10:25 बजे सीधे कोलकाता प्रस्थान करेगी। गुरुवार (फ्लाइट नं. 91765): कोलकाता से सुबह 08:50 बजे अम्बिकापुर आगमन और 09:15 बजे बिलासपुर होते हुए कोलकाता प्रस्थान करेगी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुलिस अकादमी में 859 प्रशिक्षुओं का दीक्षांत समारोह संपन्न, मुख्यमंत्री बोले- आधुनिक तकनीक के साथ संवेदनशीलता ही नई पुलिसिंग की पहचान है
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज चंदखुरी स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी में आयोजित उप निरीक्षक संवर्ग के दीक्षांत (पासिंग आउट परेड) समारोह में शामिल हुए। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। इस अवसर पर सूबेदार, उप निरीक्षक एवं प्लाटून कमांडर संवर्ग के अधिकारियों को सफल प्रशिक्षण पूर्ण करने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस सत्र में कुल 859 प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण पूर्ण किया, जिनमें 54 सूबेदार, 528 उप निरीक्षक (जीडी), 02 उप निरीक्षक (कंप्यूटर), 01 उप निरीक्षक (रेडियो), 01 उप निरीक्षक (अंगुली चिन्ह), 68 उप निरीक्षक (एसबी) तथा 205 प्लाटून कमांडर शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन सभी प्रशिक्षुओं के जीवन का एक यादगार पड़ाव है, जहाँ से वे राष्ट्र और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा के लिए संकल्पित होकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कठोर प्रशिक्षण के बाद प्राप्त यह उपलब्धि न केवल प्रशिक्षुओं के लिए, बल्कि उनके परिजनों और पूरे प्रदेश के लिए भी गर्व का विषय है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले वर्ष जब उन्होंने इन्हीं युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए थे, तब उनके पास प्रतिभा थी, और आज प्रशिक्षण के बाद उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का समावेश हो चुका है, जो उन्हें एक सफल अधिकारी बनाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पुलिस सेवा को अत्यंत प्रतिष्ठित एवं जिम्मेदारीपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी प्रतिष्ठित सेवा का आधार सत्यनिष्ठा होती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि पुलिस का मूल दायित्व नागरिकों की रक्षा करना है। जब भी कोई नागरिक असुरक्षित महसूस करता है, तो सबसे पहले पुलिस के पास ही जाता है। इसलिए जनता का विश्वास बनाए रखना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्दी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा का संकल्प और उससे जुड़ी प्रतिष्ठा का प्रतीक है, जिसे हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी कभी आसान नहीं होती, लेकिन क्षमता और समर्पण के साथ इसे सफलतापूर्वक निभाया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान किए गए कठिन परिश्रम की तरह ही सेवा में भी निरंतर प्रयास और समर्पण से संतोष और सफलता प्राप्त होती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज का यह निष्क्रमण केवल अकादमी से बाहर निकलना नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यक्षेत्र में प्रवेश का संकेत है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के ‘निष्क्रमण संस्कार’ से जोड़ते हुए बताया कि जैसे शिशु पहली बार घर से बाहर निकलता है, उसी प्रकार आज ये प्रशिक्षु सुरक्षित प्रशिक्षण वातावरण से निकलकर व्यापक जिम्मेदारियों वाले सेवा क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। पिछले दो वर्षों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं त्वरित बनाया गया है, आधुनिक तकनीक और उपकरणों को पुलिस बल में शामिल किया गया है तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। साथ ही प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक स्वरूप दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं होगी, बल्कि एक सक्रिय सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करेगी, जिसके लिए उसे प्रतिक्रियात्मक से सक्रियात्मक एजेंसी में रूपांतरित होना होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश वर्तमान में एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जिसमें औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानून लागू किए गए हैं। यह दीक्षांत समारोह इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है कि यह उप निरीक्षकों का पहला बैच है, जिसने इन नवीन संहिताओं के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये अधिकारी इन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा, विकास और विश्वास इन तीन स्तंभों पर कार्य कर रही है और पुलिस की भूमिका इन तीनों को सशक्त बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज से जुड़कर लोगों का विश्वास जीतना चाहिए, क्योंकि क्षेत्र डर से जीता जा सकता है, लेकिन दिल केवल विश्वास से ही जीता जा सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में स्मार्ट, तकनीक-संचालित और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पुलिस डिजिटल, तकनीकी और उन्नत साधनों से लैस होगी, लेकिन जनता का विश्वास केवल व्यवहार, आचरण और निष्ठा से ही अर्जित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इन प्रशिक्षुओं का जीवन केवल व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि समाज और राज्य की सेवा के लिए समर्पित हो गया है। उन्होंने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय न्याय, ईमानदारी और मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। अंत में उन्होंने सभी को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपनी निष्ठा और समर्पण से छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी केवल कानून के रक्षक ही नहीं, बल्कि प्रदेश की आशाओं और विश्वास के संरक्षक भी हैं।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके सभी उप निरीक्षकों एवं उनके परिजनों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये प्रशिक्षु छत्तीसगढ़ पुलिस की ताकत को और सुदृढ़ करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भर्ती प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हुई है, जो शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे ऐसा वातावरण बनाएँ जिसमें अपराधियों के मन में कानून का भय और आम नागरिकों के मन में पुलिस के प्रति विश्वास बना रहे।
समारोह में विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं—सर्वेश कुमार, किरण, मीताली बुग्गे, देवेन्द्र सिंह, भरत कुमार, जयप्रकाश राठौर, सचिन यादव, सुंदर मनीष, जितेन्द्र कुमार वैष्णव, जितेंद्र सिंह राजपूत एवं राकेश वैष्णव—को ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, एडीजी दीपांशु काबरा, अकादमी के संचालक अजय यादव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षुओं के परिजन उपस्थित थे।
जंगल में मिला नक्सली हथियारों का जखीरा, AK-47, इंसास रायफल समेत अन्य सामान बरामद
मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिला पुलिस को नक्सल मोर्चे पर कामयाबी हाथ लगी है। जिले के डीआरजी और आईटीबीपी के जवानों ने बस्तर के शरहदी क्षेत्र अंतर्गत जंगल में माओवादियों का डंप खोज निकाला है, जहां से एक एके 47 व एक इंसास रायफल समेत वैपन संबंधी अन्य सामान व कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह की अगुवाई में जंगल पहुंचकर जवानों ने उक्त डंप बरामद किया है।
जानकारी के मुताबिक जंगल में नक्सल डंप की सूचना उपरांत मोहला-मानपुर जिला पुलिस की डीआरजी और केंद्रीय अर्ध सैनिक बल आईटीबीपी के जवानों ने आज सुबह बस्तर सीमावर्ती जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया। आपरेशन के दौरान बस्तर के कांकेर जिला अंतर्गत ग्राम उयकाटोला व कोवाचीटोला और मानपुर ब्लॉक के ग्राम कलवर के मध्य जंगल में जवानों को गड्ढे में छुपाया गया नक्सल डंप मिला।
नक्सलियों ने दो रायफल के साथ कारतूस व वैपन संबंधी समान छुपा रखा था, जिसे बरामद कर सुरक्षा जवानों ने अपने कब्जे में लिया। गौरतलब है कि बस्तर के इसी उयकाटोला गांव से लगे जंगल से निकलकर आरकेबी डिवीजन के पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था।
निजी स्कूलों की मनमानी पर हाईकोर्ट नाराज़, शिक्षा सचिव से जवाब तलब
बिलासपुर। शहर के निजी स्कूलों में पढ़ाई और परीक्षा के अलग-अलग पैटर्न को लेकर उठे विवाद पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए राज्य के शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल तय की है।
मामला उस समय सामने आया जब अभिभावकों ने शिकायत की कि शहर के ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल और नारायणा टेक्नो स्कूल में बच्चों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई गई। लेकिन परीक्षा के समय अचानक छात्रों को 5वीं और 8वीं की सीजी बोर्ड परीक्षा में बैठा दिया गया। इस फैसले से छात्र और अभिभावक दोनों असमंजस और परेशानी में पड़ गए।
दरअसल, राज्य सरकार ने इस वर्ष 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं बोर्ड स्तर पर कराने का आदेश जारी किया था। इसके चलते वे निजी स्कूल, जिन्हें सीबीएसई की मान्यता प्राप्त नहीं है, उन्हें राज्य बोर्ड के नियमों का पालन करना पड़ा। लेकिन अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों ने पूरे साल सीबीएसई के नाम पर मोटी फीस वसूली और अंत में बच्चों को राज्य बोर्ड की परीक्षा दिला दी, जो उनके साथ अन्याय है।
इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों में काफी आक्रोश देखा गया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कलेक्टोरेट व कलेक्टर बंगले का घेराव भी किया। हालांकि, प्रशासन स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
यह पूरा प्रकरण राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि स्कूल प्रबंधन की मनमानी के कारण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि सीबीएसई ने मान्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब वही स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त कर सकते हैं, जो 12वीं तक संचालित होते हैं। ऐसे में जो स्कूल इन मानकों को पूरा नहीं करते, वे स्वतः राज्य सरकार के नियमों के अंतर्गत आ जाते हैं और उन्हें सीजी बोर्ड की परीक्षा प्रणाली अपनानी होती है।
हाईकोर्ट ने इस दलील के बावजूद मामले को गंभीर मानते हुए शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि वे पूरे घटनाक्रम पर शपथपत्र के साथ स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करें। अदालत यह जानना चाहती है कि आखिर छात्रों को पूरे साल एक पाठ्यक्रम पढ़ाकर परीक्षा किसी अन्य बोर्ड की क्यों दिलाई गई।

