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CGPSC 2021 भर्ती विवाद : हाईकोर्ट के आदेश के बाद 11 चयनित डिप्टी कलेक्टरों को मिली पोस्टिंग, जानिए पूरा मामला…

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021 भर्ती विवाद मामले में चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से जांच और कानूनी विवाद के चलते इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी हुई थी। बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने 11 चयनित डिप्टी कलेक्टरों को पोस्टिंग और जॉइनिंग आदेश जारी कर दिए हैं।

दरअसल सीजीपीएससी 2021 परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी समेत कुल 44 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। इनमें से चार अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर चुकी है। ये चारों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। बाकी 40 चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियुक्ति देने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके खिलाफ अब तक न तो आरोप तय हुए हैं और न ही किसी प्रकार के ठोस साक्ष्य मिले हैं। केवल जांच लंबित होने के आधार पर उन्हें अनिश्चितकाल तक नियुक्ति से वंचित नहीं रखा जा सकता।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई ने अब तक कोई आरोपपत्र दायर नहीं किया है, उन्हें नियुक्ति से रोका नहीं जा सकता। इसके बाद राज्य सरकार ने चयनित 11 डिप्टी कलेक्टर अभ्यर्थियों को जॉइनिंग की अनुमति दे दी।

जानिए क्या है पूरा मामला?

CGPSC 2021 भर्ती परीक्षा के जरिए 44 पदों पर डिप्टी कलेक्टर और DSP के लिए अभ्यर्थियों का चयन हुआ। चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगने के बाद CBI को जांच सौंप दी गई। जांच की वजह से चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति को रोक दिया गया था। इसी के बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

बिलासपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई ने अब तक कोई चार्जशीट पेश नहीं की है और जिनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, उन्हें नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे चयनित उम्मीदवारों को तय समय सीमा के भीतर जॉइनिंग दी जाए।

इधर सीजीपीएससी घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। राज्य सरकार ने 9 जुलाई को यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा था। जांच में तत्कालीन पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक और उद्योगपति श्रवण गोयल को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में रिश्तेदारों और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया।

जांच में सोनवानी के कई रिश्तेदारों के चयन की बात सामने आई थी। इनमें उनके भतीजे नितेश सोनवानी, बड़े भाई के बेटे साहिल, बहू निशा कोसले, भाई की बहू दीपा अजगले और बहन की बेटी सुनीता जोशी के नाम शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा कुछ नेताओं, अफसरों और उद्योगपतियों के परिजनों के चयन को लेकर भी जांच जारी है। सीबीआई ने कुछ चयनित उम्मीदवारों के घरों से प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज और बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड भी जब्त किए थे। जिन उम्मीदवारों के खिलाफ अब तक ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।