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शिक्षक एलबी पेंशन विवाद : हाईकोर्ट ने खारिज की रिट अपील, कहा – नीतिगत निर्णय लेना सरकार का काम

बिलासपुर। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षक एलबी संवर्ग की पेंशन पात्रता के लिए सेवा अवधि की गणना से जुड़े मामले में राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सिंगल बेंच ने सरकार को नीतिगत निर्णय लेने का आदेश देकर कोई न्यायिक अतिक्रमण नहीं किया था, बल्कि शासन को एक ‘आदर्श नियोक्ता’ की तरह काम करने का अवसर दिया था। यह निर्णय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया है।

दरअसल, परमेश्वर प्रसाद जायसवाल व्याख्याता एलबी और अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पेंशन की मांग की थी, जिसमें कहा गया कि अपनी सेवाएं ‘शिक्षाकर्मी’ के रूप में शुरू की थी। फिर 1 जुलाई 2018 से उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में नियमित शासकीय सेवा में समाहित कर लिया गया था। नियमों के अनुसार, पेंशन पात्रता के लिए 10 वर्ष की न्यूनतम शासकीय सेवा अनिवार्य है। इन कर्मचारियों की सेवा की गणना समावेशन की तिथि 01 जुलाई 2018 से की जा रही थी, जिससे वे 2028 से पहले पेंशन के पात्र नहीं हो रहे थे, भले ही वे शिक्षाकर्मी के रूप में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हों। इसके खिलाफ शिक्षकों ने याचिका दायर की थी।

राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के इस पुनर्विचार के आदेश को रिट अपील के जरिए चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि यह मामला पहले ही तय हो चुका है और सिंगल बेंच का आदेश सरकार को एक तय हो चुके पुराने मुद्दे को दोबारा खोलने के लिए मजबूर कर रहा है। डिवीजन बेंच ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया।

तर्कसंगत आदेश पारित करने से प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी : कोर्ट

कोर्ट ने अपने पूर्व के एक समान फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि सिंगल बेंच ने किसी नीति में बदलाव नहीं किया था और न ही सीधे पेंशन देने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच ने केवल सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने को कहा था, जो कि पूरी तरह न्याय संगत है। डिवीजन बेंच ने कहा है कि यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के एक पूरे वर्ग से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा है, जिसके बार-बार सिविल परिणाम सामने आ रहे हैं और मुकदमेबाजी बढ़ रही है। शासन स्तर पर इस विषय में एक स्पष्ट और तर्कसंगत आदेश पारित करने से प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।