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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सख्त निर्देश: पेंशन अधिकार में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर करना होगा निराकरण

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा- पेंशन अधिकार में देरी बर्दाश्त नहीं। पेंशन प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब रोकने के साथ प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी। वित्त विभाग ने राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) के तहत ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रत्येक स्तर पर अधिकतम समय-सीमा तय कर दी है। नई समय-सीमा व्यवस्था का उद्देश्य पेंशन प्रक्रिया को केवल ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि समयबद्ध और जवाबदेह बनाना है निर्धारित समय-सीमा में प्रकरणों का निराकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

सेवानिवृत्ति का इंतजार नहीं, पहले ही तैयार होगा पेंशन प्रकरण

निर्धारित समय में प्रकरण का निराकरण नहीं होने पर संबंधित स्तर की जवाबदेही तय की जाएगी। जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण 10 दिन में होंगे पूरे। सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण के लिए तीनों स्तर पर 15 कार्य दिवस की समय-सीमा तय है। 11 दिन में करना होगा वेतन निर्धारण।आगामी महीनों में सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों के अग्रिम पेंशन प्रकरणों में स्वीकृति की कार्यवाही वित्त विभाग द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तय समयावधि में पूरी करनी होंगे।

अधिकतम 5 – 5 कार्य दिवस निर्धारित

कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन शुरू होने में अनावश्यक देरी न हो। नई व्यवस्था के तहत किसी नवीन पेंशन प्रकरण को क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के तीनों स्तरों से गुजरना होगा। प्रत्येक स्तर पर अधिकतम 5 – 5 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। पुनरीक्षित पेंशन और वेतन निर्धारण के मामलों में प्रक्रिया को और तीव्र बनाया गया है। पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों के लिए क्रियेटर को अधिकतम 4 कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को 3 – 3 कार्य दिवस में कार्यवाही पूरी करनी होगी।

पेंशन फाइल रोकना पड़ेगा भारी

पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए कुल 10 कार्य दिवस की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की गई है। वेतन निर्धारण के प्रकरणों में क्रियेटर को 5 कार्य दिवस और वेरीफायर तथा एप्रूवर को 3 -3 कार्य दिवस में कार्यवाही करनी होगी इस प्रक्रिया के लिए कुल 11 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। पेंशन फाइल रोकना पड़ेगा भारी, हर स्तर पर डेडलाइन तय हुई। सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन अटकी तो जवाबदेही तय होगी। क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के लिए अधिकतम समय-सीमा निर्धारित।

2025 में बना था केंद्रीकृत पेंशन सेल

शासकीय सेवकों के पेंशन प्रकरणों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से वित्त विभाग ने 9 जून 2025 के आदेश के माध्यम से राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) का गठन किया था। 1 अप्रैल 2026 से पूर्व की व्यवस्था समाप्त कर ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों का निराकरण एससीपीपीसी के माध्यम से किया जा रहा है। राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल को नवीन पेंशन प्रकरणों के निराकरण के साथ पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों की स्वीकृति तथा सेवानिवृत्ति से 2 वर्ष पूर्व तक विभागीय सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए वेतन निर्धारण के अनुमोदन की जिम्मेदारी भी दी गई है। पेंशन प्रकरण किसी कार्यालय या अधिकारी के स्तर पर अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकेंगे.