धर्म /अध्यात्म
छत्तीसगढ़ में है दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, हर साल बढ़ रहा आकार
रायपुर। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग गरियाबंद जिले में स्थित है. भगवान भोलेनाथ की महिमा ऐसी है कि यह शिवलिंग हर साल अपने आप बढ़ रहा है. इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 70 फीट है, जो दुनियाभर में चर्चित है. यहां सावन और महाशिवरात्रि में सबसे ज्यादा भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है.
भूतेश्वर महादेव एक अर्धनारीश्वर प्राकृतिक शिवलिंग है. यहां भूतेश्वर नाथ महादेव को भकुर्रा महादेव के नाम से भी जाना जाता है. छत्तीसगढ़ की भाषा मे हुंकारना (आवाज़ देना) की ध्वनि को भकुर्रा कहा जाता है इसलिए भूतेश्वर महादेव को भकुर्रा महादेव के नाम से भी पुकारा जाता है. इस शिवलिंग में हल्की सी दरार भी है, इसलिए इसे अर्धनारीश्वर के रूप मे पूजा जाता है. इस शिवलिंग का बढ़ता हुआ आकार आज भी शोध का विषय बना हुआ है. भूतेश्वर नाथ महादेव का इतिहास भूतेश्वर महादेव शिवलिंग स्वयं-भू शिवलिंग है, क्योंकि इस शिवलिंग की उत्पत्ति व स्थापना के विषय में आज तक कोई सटीक तर्क नहीं मिल सका है, परंतु जानकारों व पूर्वजों के अनुसार कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज लगभग 30 वर्ष पहले हुई थी, जब यहां चारों तरफ घने जंगल थे.
इन घने जंगलों के बीच मौजूद एक छोटे से टीले से आसपास के गांव वालों को किसी बैल के हुंकारने की आवाज सुनाई देती थी, परंतु जब ग्रामीणों ने जाकर देखा तो वहां न कोई बैल था और न कोई अन्य जानवर. ऐसी स्थिति को देख धीरे-धीरे ग्रामीणों की आस्था उस टीले के प्रति बढ़ती गई और उन्होंने उसे शिव का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना आरंभ कर दिया. तभी से वह छोटा सा शिवलिंग बढ़ते-बढ़ते विशालकाय शिवलिंग का रूप ले चुका है. अब इसे भक्तों की आस्था कहे या भगवान का चमत्कार, तब से लेकर अब तक शिवलिंग का बढ़ना जारी है. मंदिर में शिव परिवार विराजमान है. भूतेश्वर नाथ महादेव के पीछे भगवान शिव की प्रतिमा स्थित है, जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिक, नंदी जी के साथ विराजमान हैं. बाबा के समीप एक गुफा है, जिसमें तपस्वी साधु का चित्र अंकित किया गया है. यहां पर कभी कोई साधु ने भोले बाबा के लिए तप किया था. मंदिर के समीप कई अन्य मंदिर भी हैं.
राजिम कुंभ में विराट सनातन संस्कृति के होते हैं दर्शन - शंकराचार्य श्री सदानंद
रायपुर। राजिम कुम्भ कल्प में आज विराट संत समागम का शुभारंभ हुआ। संत समागम में अनंत श्री विभूषित ज्योतिष मठ द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज एवं अनंत श्री विभूषित ज्योतिष मठ बद्रीनाथ पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज सहित देशभर के साधु-संत शामिल हो रहे हैं। संत समागम के प्रारंभ में दोनों शंकराचार्यों ने भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना की। मुख्य मंच पर दोनों शंकराचार्यों की विधि-विधान से अगुवानी खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजिम विधायक रोहित साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की।
संत समागम में द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि धर्म रूपी कल्पवृक्ष का बीज प्रभु श्रीराम हैं। श्रीराम ने मनुष्य बनकर वो दिखाया, जो मनुष्य को करना चाहिए। हमारे वेदों का ज्ञान संतों से ही मिलता है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ में विराट सनातन संस्कृति के दर्शन होते हैं। ऐसे आयोजनों से संस्कृति की रक्षा होती है। धर्म की रक्षा करनी है तो धर्म का पालन करें। धर्म की स्वयं रक्षा हो जाएगी। धर्म मार्ग पर चलने की शिक्षा हमें कुंभ से मिलती है। बद्रीनाथ पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि संतों की वाणी से लोगों को सदाचार व्यवहार की शिक्षा मिलती है। राजिम का त्रिवेणी संगम, आचार्य का समागम, अध्यात्मिक लाभ से पवित्र स्थल बन चुका है। कुंभ कल्प का मतलब कुंभ जैसा होना है। कुंभ कल्प बोलने से मान घटता नहीं है बल्कि और बढ़ जाता है।
इस अवसर पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल और स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि सौभाग्य की बात है कि राजिम कुंभ कल्प में दोनों शंकराचार्य का दर्शन लाभ श्रद्धालुओं को मिल रहा है। उन्होंने जगतगुरूओं से छत्तीसगढ़ और सभी लोगों के सुख और समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र राजिम के विधायक रोहित साहू ने आभार प्रदर्शन किया।
राजिम कुंभ कल्प के पहली बार सुनी और देखी जाएगी श्री राम मंदिर के 500 वर्षों का इतिहास
राजिम कुम्भ कल्प में 3 मार्च हो होगी प्रस्तुति
रायपुर। पूरे देश और दुनियाभर में प्रभु श्री राम के आने की खुशी मना रहे हैं। यह गौरवशाली पल को सभी रामोत्सव के रूप में मना रहे है जब अयोध्या में भगवान श्री राम 500 से अधिक वर्षों के बाद मंदिर में पुनः विराजमान हुए हैं।
राम महोत्सव को लेकर देश भर में विभिन्न तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। इसी के तहत भगवान श्री राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में त्रिवेणी संगम राजिम के चल रहे कुंभ कल्प के मुख्यमंच में 03 मार्च को ‘गाथा श्रीराम मंदिर की’ का आयोजन होने जा रहा है। इस गाथा में श्रीराम जन्मभूमि के 500 साल के इतिहास से लेकर प्रभु श्रीराम लला की प्राणप्रतिष्ठा तक की कथा सुनाई जाएगी।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि राजिम कुंभ कल्प में मुख्य मंच से “गाथा श्रीराम मंदिर की संगीतमय महागाथा का संध्याकाल में आयोजन होने जा रहा है। इसमें अयोध्या के राम मंदिर की पिछले 500 वर्षों से लेकर जनवरी 2024 तक की गाथा की संगीतमयी प्रस्तुति होगी। यह प्रस्तुति एक लाइव म्यूजिकल बैंड के साथ होगी। श्रीराम जन्मभूमि की तपस्या एवं संघर्ष की सत्य गाथा के इस कार्यक्रम में प्रवेश निःशुल्क रहेगा। श्रीराम मंदिर की महागाथा को सुर-संगीत में श्रद्धालु देख और सुन सकेंगे।
संगीतमयी गाथा में श्रीराम और अयोध्या से जुड़ी हर घटना का उल्लेख होगा साथ ही राजा विक्रमादित्य और माँ अहिल्याबाई होल्कर द्वारा मंदिर के जीर्णाेद्धार, बैरागी साधुओं के संघर्ष, गर्भगृह से रामलला का निकाला जाना, गर्भगृह में रामलला का प्रकट होना, कार सेवक, कोठारी बन्धुओं के बलिदान से लेकर वर्तमान निर्माणाधीन मंदिर की भव्यता, दिव्यता का चित्रण किया जाएगा।
भव्य गंगा आरती के साथ राजिम कुंभ कल्प 2024 का हुआ शुभारंभ
रामोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है राजिम कुंभ कल्प
तीर्थनगरी राजिम के पवित्र कुंभ में देशभर के साधू-संतों ने लिया हिस्सा
प्रसिद्ध भजन गायिका पौडवाल ने कर्णप्रिय भजन की प्रस्तुति नृत्य नाटिका ‘गीतक दर्शन’ ने किया भावविभोर
रायपुर। जीवन दायिनी महानदी, पैरी नदी और सोंढूर नदी के त्रिवेणी संगम छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम में राजिम कुंभ कल्प-2024 का गंगा आरती के साथ भव्य शुभारम्भ हुआ। संगम नगरी राजिम कुंभ कल्प में अयोध्या धाम का आकर्षक वैभव दिखा। यह राजिम कुंभ कल्प रामोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
इस मौके पर मंत्रीगण बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री रामविचार नेताम, टंक राम वर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक अजय चंद्राकर, विधायक रोहित यादव विशेष रूप से मौजूद थे।
संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि राजिम कुंभ कल्प में संत महात्मा अमृतवाणी, शिव वर्षा करते हैं मैं उनका अभिनंदन और स्वागत करता हूं। पूरे देश में नदियों, पानी को बचाने जुटी साध्वी प्रज्ञा भारती का आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि नदियों के त्रिवेणी संगम की तरह ही राजिम में तीन जिलों का भी संगम है।
छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि है, प्रभु श्रीराम का वन गमन मार्ग है यह पूरे देश और विश्व को पता लगे इसी उद्देश्य से राजिम कुंभ कल्प का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माघी पुन्नी मेला हमारे देश के हजारों लाखों साल का इतिहास है परंतु इतिहास को समृद्ध बनाना हमारी जिमेदारी हैं। इसीलिए हमारी सरकार ने संत महात्माओं के सुझाव पर इसके साथ में कल्प शब्द जोड़ा और राजिम कुंभ कल्प के रूप में आयोजन किया जा रहा है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि आगामी 15 दिनों तक संत समागम, सहित विभिन्न आयोजन चलता रहेगा। महाशिव रात्रि के शुभ अवसर पर कुंभ मेला का समापन होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन से प्रदेश का सम्मान बढे, देश भक्ति की भावना बड़े क्योंकि देश है तो धर्म है और धर्म है तो देश है। बिना धर्म के देश भी नहीं है और बिना देश के धर्म भी नहीं है। इसके देश को भी हमको बचाना है देश को भी समृद्धिशाली बनाना है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि हम सबके लिए गौरव का पल है कि आज राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ सभी सम्माननीय साधु-संत-महात्माओं की उपस्थिति और महामंडलेश्वर अग्नि पीठाधीश्वर कृष्णानंद महाराज जी की उपस्थिति में शुभारम्भ हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार धार्मिक आध्यात्मिक और सबकी आस्था का सम्मान करने वाली है। कुम्भ मेला के माध्यम से प्रदेश और देश का मान बढे़ ऐसी कामना करता हूं।
पूर्व मंत्री व विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अथक प्रयासों से अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला को प्रतिस्थापित करने में सफल हुए हैं। श्री चंद्रकार ने कहा कि पिछली सरकार ने प्रबुद्धजनों से सुझाव लिए बिना की कुछ स्थानों पर राम वन गमन मार्ग बना दिया। हमारी सरकार लोगों की आस्था और विश्वास को टूटने नहीं देगी। कार्यक्रम को सांसद चुन्नीलाल साहू और विधायक रोहित साहू ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल ने कर्णप्रिय भजन की प्रस्तुति दी और नृत्य नाटिका ‘गीतक दर्शन’ ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में विधायक इन्द्र कुमार साहू, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संभागायुक्त संजय अलंग, प्रबंध संचालक पर्यटन मंडल जितेंद्र शुक्ला, संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

आस्था का संगम छत्तीसगढ़ का राजिम कुंभ कल्प प्रारंभ
•पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री
राजिम कुंभ में इस बार नया क्या ? जाने सब कुछ
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ कल्प के आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरणों में है. धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने जानकारी दी कि,राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ 24 फरवरी से होने वाला है, जो 8 मार्च तक चलेगा. इस भव्य आयोजन में हरिद्वार, काशी, मथुरा, अयोध्या, चित्रकुट समेत देशभर के कई स्थानों से साधु-संत, पीठाधीश्वर, मठाधीश, महात्मा और शंकराचार्य शामिल होने वाले हैं. इस बार कुंभ की थीम अयोध्या धाम होगा, यही कारण है कि कुंभ का मुख्य मंच प्रभु श्री राम के अयोध्या मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है. इस बार का राजिम कुंभ पहले से काफी भव्य रूप में होगा. कुंभ सुगम, सुशासित और सुसज्जित रूप में होगा.
श्री अग्रवाल ने यह भी बताया कि, पहले कुंभ में सड़के काफी छोटी होती थी, जिससे आने-जाने वाले भक्तों को काफी परेशानी होती थी. लेकिन अब कुंभ जाने वाली सड़कों को काफी चौड़ा कर दिया गया है. जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो. इतना ही नहीं इलहाबाद कुंभ की तर्ज पर ऑर्गनाइज स्ट्रक्चर तैयार कर दुकानें भी बनाई गई है, जिसका लाभ कुंभ में दुकान लगाने वाले छोटे-छोटे दुकानदारों को हो.
इतना ही नहीं कुंभ में स्नान करने आने वाले लोगों को परेशानी न हो इसके लिए एनजीओ हायर किए गए है, इनका काम लगातार नदी की सफाई करना होगा, जिससे साफ पानी में भक्त स्नान कर सके.
वहीं राजिम कुंभ स्थल में मौजूद लक्ष्मण झूले को भी एलईडी लाईट से सजाया गया है. वहीं 3 डी मैपिंग शो भी आयोजित किए जाएंगे, जिसके लिए विशेष रूप से मुंबई की एक्सपर्ट टीम को बुलाया गया है. इस शो में श्री राम के संदर्श से जुड़े शो प्रदर्शित किए जाएंगे. इसे 3 डी प्रोजेक्शन मैपिंग कहा जाता है.
वहीं मुख्य मंच अयोध्या राम मंदिर की तर्ज पर भव्य रूप से बनाया गया है. जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा.
जगह जगह होंगे पोर्टेबल टॉयलेट
कुंभ में इस बार विशेष रूप से अधिक से अधिक पोर्टेबल टॉयलेट की व्यवस्था की गई है. जिससे वहां आने वाले भक्तों को गंदगी का सामना न करना पड़े. वहीं कुंभ स्थल में बड़ी संख्या में चेंजिंग रूम भी बनाएं गए है. जहां स्नान के बाद वे अपने कपड़े चेंज कर सके. इसके अलावा महिलाओं को अपने बच्चे को स्तनपान करने में परेशानी न हो इसके लिए फिडिंग रूम भी बनाए गए है.साथ ही रायपुर, गरियाबंद और धमतरी जिलों को कलस्टर बनाकर स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जा रहे है. इसके अलावा 10-10 बेड के छोटे-छोटे अस्पताल तैयार किए गए है, जहां इमरजेंसी में प्रारंभिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलबब्ध कराई जा सके.
रामोत्सव की थीम पर होगी भव्य झांकी
श्री अग्रवाल ने कहा कि, राजिम कुंभ में इस बार रामोत्सव थीम पर भव्य झांकी तैयार की गई है. इसमें प्रभु श्री राम के छत्तीसगढ़ आए हुए तमाम पलों को झांकी के माध्यम से बताया जाएगा. इसके लिए विशेष लाईट और साउंड इफेक्ट भी होंगे, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे. इसके लिए राजिम कुंभ को भव्य रूप में आयोजित करने के लिए कंसल्टेंट हायर किए गए है, इनका काम राजिम कुंभ को भव्य स्वरूप में लाने के लिए प्लानिंग करना और प्रशासन के साथ मिलकर इसे एग्जिक्यूट करना है, जिससे राजिम कुंभ केवल देश ही नहीं विदेशों में भी प्रख्यात हो.
माघ पूर्णिमा पर स्नान का ब्रह्म मुहूर्त जानें, इस दिन अभिजीत मुहूर्त का भी बन रहा शुभ योग …
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 23 फरवरी दोपहर 03:33 से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 24 फरवरी शाम 05:59 पर होगा. हिन्दू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है, ऐसे में माघ पूर्णिमा व्रत 24 फरवरी 2024, शनिवार के दिन रखा जाएगा.
पंचांग बताया गया है कि पूर्णिमा तिथि के दिन सूर्योदय सुबह 06:42 पर होगा. वहीं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:11 से सुबह 06:02 के बीच रहेगा. पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को बहुत ही उपयुक्त समय माना जाता है. साथ ही बता दें कि दान-पुण्य के लिए अभिजीत मुहूर्त को विशेष महत्व दिया गया है. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से दोपहर 12:55 तक रहेगा.
माघ पूर्णिमा पूजा महत्व
शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि के महत्व को विस्तार से बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति पूर्णिमा तिथि के दिन पूजा-पाठ और स्नान-दान करता है. उन्हें सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिल जाती है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु की उपासना करने से धन ऐश्वर्य और आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत का पालन करने से और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करने से ग्रह दोष भी दूर होते हैं.
पुनः राजिम कुंभ 'कल्प' अपने वैभव और गौरव को प्राप्त करेगा: बृजमोहन अग्रवाल
राजिम माघी पुन्नी मेला संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने जवाब देते हुए कहा कि, पूरे छत्तीसगढ़ में 5 हजार स्थानों पर माघी पुन्नी मेला का आयोजन होता है। और पूरे देश में लाखों स्थानों पर पुन्नी मेले का आयोजन होता हैं। जबकि कुंभ देश में सिर्फ चार स्थानों पर ही होता है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि, छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए कुंभ का नाम दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि, वेद पुराणों में महानदी को चित्रोत्पला कहा गया है। राजिम का धार्मिक महत्व है, यहां लोग अस्थि विसर्जन करते हैं। हम इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। माघी पुन्नी मेले के स्थान पर कुंभ कल्प मेला नाम दिया जा रहा है।
धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में विधेयक पेश किया जिस पर कुरूद से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पक्ष रखते हुए कहा कि, पिछली सरकार ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और इतिहास से छेड़छाड़ किया। जिसके बाद पक्ष और विपक्ष में तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई।
कांग्रेस सदस्यों ने नाम बदलने का विरोध किया। जिसके बाद मत विभाजन हुआ और विधेयक के पक्ष में 43 और विपक्ष में 30 वोट पड़े। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, मैं सभी देशवासियों, साधु संत महात्माओं, मंडलेश्वर को बधाई देता हूं कि उनकी कल्पना फिर से साकार होने जा रही है। राजिम कुंभ कल्प के माध्यम से पूरे देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की जो पहचान बनी थी। उसको पुनः स्थापित करने के लिए विधानसभा में राजिम माघी पुन्नी मेला संशोधन विधेयक पारित हुआ है। और राजिम कुंभ अपने पुराने वैभव और गरिमा के साथ 24 फरवरी से प्रारंभ होगा। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही पक्ष विपक्ष के सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें बधाई देता हूं।
श्री अग्रवाल ने कहा कि, कांग्रेस पार्टी आत्मग्लानि से पीड़ित है। 13 साल से राजिम कुंभ के नाम से चले आ रहे आयोजन को उसने अपने राजनीतिक प्रतिशोध और महत्वाकांक्षा के चलते बदलकर पुन्नी मेला कर दिया था। हम छत्तीसगढ़ के पुराने वैभव को लौटाने के लिए राजिम कुंभ को वापस लाए हैं। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस को अपनी गलती को मान लेना चाहिए था और बगैर मत विभाजन के ही संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पास कर देना चाहिए था।
हिंदू पंचांग में जया एकादशी का है विशेष महत्त्व, करें भगवान विष्णु की आराधना, होंगे अनेकों लाभ…
आज माघ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है और इसे जया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार आज 20 फरवरी 2024 को माघ माह की आखिरी एकादशी है. शास्त्रों में इस एकादशी का बड़ा ही महत्व बताया गया है. जो व्यक्ति भगवान श्री विष्णु के निमित्त व्रत कर उनकी उपासना करता है तो उसकी सुंदर और स्वस्थ संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है.
इसके आलावा जो व्यक्ति ऐश्वर्य, संतति, स्वर्ग, मोक्ष, सब कुछ पाना चाहता है, उसे भी यह व्रत करना चाहिए. एकादशी के दिन क्या-क्या उपाय करना चाहिए जानिए…
इन उपायों से भी होगा लाभ
- इस दिन लक्ष्मी माता और तुलसी माता को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. जया एकादशी पर दान करने का विशेष महत्व माना जाता है. इसलिए अपने जीवन की सभी मुश्किलों को दूर करने के लिए जया एकादशी के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन कराएं.
- जया एकादशी पर श्रीमद् भागवत कथा का पाठ करना पुण्यदायक माना जाता है.अगर आप संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, तो एकादशी के दिन पीले ताजा फूलों की माला बनाकर भगवान विष्णु को चढ़ाएं.साथ ही भगवान को चंदन का तिलक लगाएं.
- अगर आप अपने जीवन में सफलता और रिश्तों के बीच सामंजस्य बनाये रखना चाहते हैं, तो एकादशी के दिन आपको पांच मुखी रुद्राक्ष की पूजा करके उसे गले में धारण करना चाहिए.
- अगर आप अपनी संतान के करियर की बेहतरी सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो एकादशी के दिन अपने बच्चे के मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं. साथ ही जरूरतमंद को पीला कपड़ा गिफ्ट करें.
- अपनी संतान के आर्थिक पक्ष को मजबूत करना चाहते हैं, तो एकादशी के दिन 5 सफेद कौड़ियाँ लेकर, उनकी उचित प्रकार से पूजा करें. पूजा के बाद उन्हें एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी संतान को संभालकर रखने के लिये दे दें.
गुप्त नवरात्रि के दौरान हुआ श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन, तुलसी वर्षा के साथ कथा समाप्त हुई
रायपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्यय नगर सेक्टर 3 में रविवार को गीता, सहस्रधारा तुलसी वर्षा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का समापन हुआ। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई।
समापन दिवस पर कथावाचक पंडित प्रेम शास्त्री जी महाराज ने भागवत भगवान के महत्व को बताते हुये कहा कि भागवत का सार तत्व है भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तपस्या, जो कभी भी खत्म नहीं होता है। भगवान श्रीकृष्ण भक्ति के अटूट प्रेम थे। पूरी संसार में श्रीकृष्ण के लिए ऐसा भक्ति जो कि जीवन ही तार कर दे। श्रीकृष्ण से जितना प्रेम करोगे उतना ही प्रेम का रंग चढ़ता जायेगा।
उन्होंने कहा कि श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ का यह आयोजन सेवानृवित्त शासकीय अधिकारी रमन गिरि गोस्वामी के द्वारा उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय शकुंतला देवी की स्मृति में आयोजित किया गया था। यह पुण्यात्मा का प्रताप ही है कि इस दौरान विलक्षण संयोग बना। 10 फरवरी को कथा की शुरुआत गुप्त नवरात्रि के दिन हुई और कथा का समापन भी देवी उपासना के पर्व के अंतिम दिवस ही हुआ।
कथा के आयोजक रमन गिरि गोस्वामी ने बताया कि संपूर्ण आयोजन के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर समेत आसपास के नागरिकों ने बढ़चढ़कर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा को प्रकट किया और कथा का श्रवण किया। उन्होंने बताया कि 19 फरवरी 2024 को स्वर्गीय शकुंतला देवी का वार्षिक श्राद्ध और शंतिभोज का आयोजन होगा। वह विख्यात भूजलविद वीरेंद्र गिरि गोस्वामी ,शिवलिका योगेश्वरी,रामेश्वरी और पत्रकार धीरेन्द्र गिरि गोस्वामी की माता थीं।
भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार, यहां कीजिए दर्शन
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया।
बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भस्म चढ़ाई गई। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्प से बनी फूलों की माला धारण। फल और मिष्ठान का भोग लगाया।
भस्म आरती में सुबह सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। लोगों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की जयकारे भी लगा रहे थे। पूरा मंदिर बाबा की जयकारे से गुंजायमान हो रहा था।
डीडीयू नगर सेक्टर 3 में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन, भगवान की बाललीलाओं का भक्तों ने किया श्रवण
रायपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, सेक्टर 3 में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन हो रहा है। बुधवार को कथा के छठवें दिन कथा व्यास पंडित प्रेम शास्त्री जी महाराज ने भागवत श्रोताओं को गुरुवार को छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला,कालिया मर्दन, गोवर्धन पूजा प्रसंग से जुड़ी कथा सुनाई गई। वही भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गएप्रसंग सुनाया। ज्ञात हो कि पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग के सेवानिवृत उप संचालक रमन गिरि गोस्वामी के निज आवास में उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय शकुंतला देवी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर और पूर्वजो की स्मृति में यह आयोजन करवाया जा रहा है। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ 10 फरवरी 2024 को भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ था। जिसका समापन 18 फरवरी को हवन पूजन और शोभायात्रा के साथ होगा,जबकि 19 फरवरी 2024 को स्वर्गीय शकुंतला देवी का वार्षिक श्राद्ध और शंतिभोज का आयोजन होगा। वह भूजलविद वीरेंद्र गिरि गोस्वामी और पत्रकार धीरेन्द्र गिरि गोस्वामी की माता थीं।
राहु को प्रसन्न करने के लिए आज करें मां सरस्वती की पूजा
ज्ञान की देवी सरस्वती को राहु की इष्ट देवी माना गया है, सरस्वती पूजा से भी राहु दोष दूर होता है. ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि जब राहु ग्रह की स्थिति जन्म कुण्डली में खराब, अशुभ हो तो व्यक्ति की बुद्धि विपरीत हो जाती है और वाणी से शब्द विष के समान निकलने लगते हैं. जिससे उसके सभी कार्य बिगड़ने लगते हैं सभी बने बनाए रिश्ते टूटने लगते हैं.
मनुष्य अपने आप को दुःख कष्टों के चक्रव्यूह में फंसा हुआ महसूस करने लगता है तो ऐसी परिस्थिति में बताया गया है कि बुद्धि ज्ञान वाणी की देवी मां सरस्वती का ध्यान यदि ऐसा जातक करता है तो अवश्य ही वह राहु ग्रह के इस चक्रव्यूह से निकल जाता है और साथ ही राहु ग्रह की मायावी शक्तियों से लाभान्वित होकर 1 नए जीवन के साथ ऊंचाईयों को छूने की ओर अग्रसर होता है.
कई ग्रंथों में तो राहु ग्रह की प्रिय अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को बताया गया है जिनकी आराधना करने से राहु ग्रह कभी भी जातक को परेशान नहीं करते व अपना शुभ चमत्कारी फल जातक को प्रदान करते हैं.
बसंत पंचमी सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी तिथि का आरंभ 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से आरंभ हो जाएगी.14 फरवरी को पंचमी तिथि दोपहर में 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगी.उदया तिथि में पंचमी तिथि 14 फरवरी को होने के कारण बसंत पंचमी और सरस्वती पूजन 14 फरवरी को ही है. वहीं, 14 फरवरी को पंचक समाप्त सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर होगा.शाम में 14 फरवरी को 8 बजे तक शुभ योग है. सरस्वती पूजन के लिए सुबह 10 बजकर 46 मिनट से 12 बजे तक शुभ मुहूर्त रहने वाला है.पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शुभ चौघडिया 10 बजकर 25 मिनट से 11 बजकर 51 मिनट पर आरंभ होगा.जो लोग पंचक में पूजा करना चाहते हैं वह सुबह 6 बजकर 9 मिनट से सुबह 9 बजे तक पूजा कर सकते हैं.
इन मंत्रों का करें जाप
माता सरस्वती को प्रसन्न करने हेतु उनके मन्त्रों का जाप करना चाहिए अन्यथा: श्री मां सरस्वतये नमः
इस मन्त्र की 1 माला या 3 माला या इससे अधिक माला का प्रतिदिन प्रातः काल जाप करना चाहिए 1 माला 108 की होती है यह तो हम सभी लोग जानते हैं.इसी के साथ राहु के मंत्रों का जप करना भी विशेष रुप से लाभकारी रहेगा.
दुर्ग से अयोध्या के लिए रवाना हुई आस्था स्पेशल ट्रेन, रामनाम की गूंज से राममय हुआ माहौल
रायपुर। श्री रामलला के दर्शन योजना के अंतर्गत पहली आस्था स्पेशल ट्रेन आज बुधवार दोपहर 12:20 बजे दुर्ग से अयोध्या के लिए रवाना हो गई। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, मंत्री दयाल दास बघेल, समिति संयोजक धरमलाल कौशिक ने हरी झंडी दिखाकर आस्था स्पेशल ट्रेन को अयोध्या के लिए रवाना किया।
इस बीच रामनाम की गूंज और जयकारे से स्टेशन का पूरा माहौल राममय हो गया। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। राम भक्तों की टोली में छह वर्षीय बच्चों से लेकर 70 साल के बुजुर्गों भी शामिल रहे। वहीं दूसरे प्लेटफार्म पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी जयकारे लगाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
भजन कीर्तन से गूंज उठा दुर्ग रेलवे स्टेशन
दुर्ग रेलवे स्टेशन में सुबह 9:00 बजे से भाजपाइयों एवं श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। संभाग के सभी 20 विधानसभा क्षेत्र से श्रद्धालु पहुंचे हैं। इनमें से कुछ श्रद्धालु अपने साथ ढोल मंजीरा लेकर पहुंचे। वह भजन कीर्तन करते हुए स्टेशन पर पहुंचे। इसके बाद आईआरसीटीसी ने सभी श्रद्धालुओं के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद सभी यात्री ट्रेन में सवार हो गए हैं।
इस ट्रेन में दुर्ग संभाग के अंतर्गत आने वाले जिले के 1344 दर्शनार्थियों का पंजीयन किया गया है। ट्रेन में सुरक्षा प्रहरी और आइआरसीटीसी के कर्मचारी भी यात्रा के दौरान साथ रहेंगे। पंजीकृत यात्रियों के अलावा अन्य कोई भी यात्री ट्रेन में यात्रा नहीं कर सकेंगे। रेलवे द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
बच्चे का पढ़ाई में नहीं लगता मन या बच्चे को बोलने में है समस्या, तो बसंत पंचमी के दिन करें ये उपाय …
बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस साल 14 फरवरी को वसंत पंचमी है. इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. मां सरस्वती विद्या, ज्ञान, संगीत और कला की देवी हैं. माता की कृपा जिस व्यक्ति पर होती है उसे संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में खूब सफलता मिलती है. मां सरस्वती की पूजा करने से अज्ञानी में भी ज्ञान का दीप जल उठता है.
बसंत पंचमी के दिन से छोटे बच्चों को शिक्षा देने की शुरुआत भी की जाती है. इसे ‘अक्षर अभ्यासम’ या ‘विद्या आरंभंम’ भी कहा जाता है. छात्रों के लिए यह दिन खास होता है. जिन छात्रों का मन पढ़ाई में नहीं लगता या वो ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते उन्हें वसंत पंचमी के दिन कुछ विशेष उपाय करने चाहिए. यदि आपका बच्चा छोटा है तो माता-पिता बच्चे से ये उपाय करवा सकते हैं.
बच्चा पढ़ाई से चुराता है जी तो करें ये उपाय
यदि आपका बच्चा पढ़ाई से जी चुराता है या उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता है तो वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को बच्चे के हाथ से पीले रंग के फल अर्पित करवाएं. साथ ही माता सरस्वती का एक चित्र बच्चे के स्टडी टेबल के पास लगाएं. इससे पढ़ाई में उसका मन लगने लगेगा.
बच्चे को बोलने में है समस्या तो करें ये उपाय
यदि आपके बच्चे की वाणी स्पष्ट नहीं है या थोड़ा रुक कर बोलता है तो वसंत पंचमी के दिन उसकी जिह्वा पर चांदी की सलाई या पेन की नोक से केसर द्वारा ऊं ह्रीं श्री सरस्वत्यै नमः’ मंत्र लिख दें. इस उपाय को करने से बच्चा वाणी दोष से मुक्त हो जाएगा और उसकी भाषा स्पष्ट हो जाएगी.
इस मंत्र का करें जाप
अगर विद्यार्थी का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो उन्हें वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के मूल मंत्र ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः का जाप करना चाहिए. इससे लाभ मिलेगा.
भगवान महाकालेश्वर के मस्तक पर ॐ अर्पित कर किया दिव्य श्रृंगार, यहां करें बाबा के दर्शन
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। भगवान महाकाल का सबसे पहले जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया।
बाबा महाकाल को चंदन आभूषण और मस्तक पर ॐ अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया। श्री महाकालेश्वर को भस्म चढ़ाई गई। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्प से बनी फूलों की माला धारण। फल और मिष्ठान का भोग लगाया।
सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। लोगों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे भी लगा रहे थे। पूरा मंदिर बाबा की जयकारे से गुंजायमान हो रहा था।
3 फरवरी महाकाल आरती: कण-कण में महादेव
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। भगवान महाकाल का सबसे पहले जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया।
बाबा महाकाल का भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट और आभूषण से श्रृंगार किया गया। श्री महाकालेश्वर को भस्म चढ़ाई गई। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्प से बनी फूलों की माला धारण की और बाबा को फल और मिष्ठान का भोग लगाया। इसके बाद भांग चन्दन और त्रिपुण्ड अर्पित कर श्रृंगार किया।
सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। लोगों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे भी लगा रहे थे। पूरा मंदिर बाबा की जयकारे से गुंजायमान हो रहा था।