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रायपुर में त्योहारों पर तीन दिन की स्थानीय छुट्टी, शासकीय कार्यालय और संस्थाएं रहेंगी बंद
रायपुर। रायपुर जिले में वर्ष 2026 के लिए तीन स्थानीय अवकाश घोषित किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर की ओर से जारी आदेश के तहत इन अवकाशों की घोषणा की गई है। आदेश के अनुसार नुआखाई पर्व, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर रायपुर जिले के संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में स्थानीय अवकाश रहेगा।
जारी आदेश के मुताबिक 15 सितंबर 2026, मंगलवार को नुआखाई पर्व के अवसर पर स्थानीय अवकाश रहेगा। इसके बाद 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को महाअष्टमी के लिए छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, 9 नवंबर 2026, सोमवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर भी स्थानीय अवकाश रहेगा। आदेश में गोवर्धन पूजा को दीपावली के दूसरे दिन होने वाले पर्व के रूप में उल्लेखित किया गया है।

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू की रफ्तार तेज, रायपुर में मिले 19 नए मरीज
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में 39 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अब तक संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 344 हो गई है। इनमें से 122 मरीजों का इलाज अभी जारी है।
राजधानी रायपुर में सबसे ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। बीते 24 घंटे में यहां 19 नए मरीज मिले हैं। वहीं महासमुंद में 10 एक्टिव केस बताए गए हैं। बिलासपुर में भी दो नए मरीजों की पुष्टि हुई है।
बिलासपुर में स्वाइन फ्लू से एक और मौत
बिलासपुर जिले में स्वाइन फ्लू से एक और मरीज की मौत हो गई है। इसके साथ ही जिले में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। मृतक 33 वर्षीय महिला थी, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जिले में दो नए मरीज मिलने के बाद अब तक स्वाइन फ्लू के 96 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 40 एक्टिव केस हैं। लगातार बढ़ते मामलों के चलते जिले में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी बढ़ाई गई है।
रायपुर में सबसे अधिक मामले
प्रदेश में अब तक सामने आए मामलों में रायपुर सबसे आगे है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में अब तक 127 मरीज मिल चुके हैं। इसके बाद बिलासपुर में 96, दुर्ग में 40, कोरबा में 19 और रायगढ़ में 12 मरीज सामने आए हैं।
इसके अलावा धमतरी में 9, महासमुंद में 7, राजनांदगांव में 6, बस्तर में 5, बलौदाबाजार और जांजगीर-चांपा में 4-4, जबकि बालोद और बेमेतरा में 3-3 मरीज मिले हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में भी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए हैं।
स्वाइन फ्लू और डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों और बिलासपुर में हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू और डेंगू को लेकर अलर्ट जारी किया है। विभाग लगातार नए मामलों और मरीजों की स्थिति पर नजर रख रहा है। फिलहाल प्रदेश में 122 एक्टिव मरीजों का इलाज चल रहा है।
छत्तीसगढ़ में RPI का संगठन विस्तार प्लान, केंद्रीय मंत्री अठावले बोले- मजबूत हुए तो BJP से सीटों पर करेंगे बात
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) अपनी जमीन मजबूत करने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री और RPI प्रमुख रामदास अठावले ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सभी समाजों को साथ लेकर संगठन को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ उन्होंने संकेत दिया कि यदि पार्टी प्रदेश में मजबूत होगी तो भाजपा के साथ 4 से 5 सीटों पर गठबंधन को लेकर विचार किया जा सकता है।
रामदास अठावले ने मीडिया से चर्चा में कहा कि RPI छत्तीसगढ़ में अपना संगठन खड़ा करने और उसे मजबूत करने पर काम करेगी। पार्टी का फोकस सभी समाजों को साथ लेकर चलने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन के विस्तार के बाद चुनावी समीकरणों को देखते हुए भाजपा के साथ सीटों को लेकर बातचीत की संभावना बन सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले चुनाव में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ छत्तीसगढ़ में कैंपेन कर चुके हैं। उन्होंने भाजपा के साथ अपने राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी मजबूत होने के बाद गठबंधन को लेकर आगे विचार किया जाएगा।
वहीं राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अठावले ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष का काम अच्छा कर रहे हैं। उन्हें विपक्ष का नेता ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन राहुल गांधी को झूठ नहीं बोलना चाहिए।
अठावले ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को मुश्किल बताते हुए कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीत का भरोसा है।
छत्तीसगढ़ में RPI का विस्तार होने और भाजपा के साथ संभावित सीट गठबंधन का संकेत प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण की ओर इशारा है। हालांकि, अठावले ने फिलहाल गठबंधन को अंतिम रूप देने की बात नहीं कही है। उनका कहना है कि पहले पार्टी को प्रदेश में मजबूत किया जाएगा और इसके बाद चुनावी परिस्थितियों के अनुसार सीटों पर विचार होगा।
भूमिहीन मजदूर शंभू बारी के परिवार को मिला योजनाओं का संबल, पक्का घर और आर्थिक सुरक्षा से बदली जिंदगी
रायपुर। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और स्थायित्व का आधार बन रही हैं। योजनाओं का प्रभाव तब और अधिक सार्थक दिखाई देता है, जब एक परिवार को आजीविका के साथ आवास और सामाजिक सुरक्षा का लाभ एक साथ मिलता है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत पतरापारा निवासी शंभू बारी का परिवार इसका उदाहरण है।
भूमिहीन कृषि मजदूर शंभू बारी को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। सीमित आय और अनिश्चित रोजगार के बीच मिलने वाली यह सहायता परिवार के लिए जरूरत के समय महत्वपूर्ण सहारा बनी है। शंभू बारी बताते हैं कि इस राशि का उपयोग वे घरेलू जरूरतों, बीमारी के समय उपचार और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में करते हैं।
भूमिहीन परिवार को मिला पक्के आवास का सहारा
शंभू बारी का परिवार लंबे समय तक स्वयं के पक्के मकान के अभाव में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करता रहा। शासन की पहल से उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्का आवास भी मिला। अब उनका परिवार अपने सुरक्षित और पक्के घर में रह रहा है। उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे सुरक्षित आशियाने के सपने का साकार रूप है।
महतारी वंदन योजना से परिवार की महिलाओं को आर्थिक संबल
परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महतारी वंदन योजना भी सहायक बन रही है। शंभू बारी की पत्नी को योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि घरेलू जरूरतों और छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।
कई योजनाओं का लाभ बना मजबूत जीवन का आधार
शंभू बारी कहते हैं कि अलग-अलग योजनाओं से मिले लाभ ने उनके परिवार की परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव लाया है। भूमिहीन कृषि मजदूर के रूप में मिलने वाली वार्षिक आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर और पत्नी को मिल रही महतारी वंदन योजना की राशि ने परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ भविष्य के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है।
शंभू बारी ने कहा, “दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से हमें साल में 10 हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि हमारे जरूरी कामों में बहुत मदद करती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से हमें पक्का घर मिला है और मेरी पत्नी को महतारी वंदन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिल रहे हैं। इन योजनाओं से हमारे परिवार को बहुत सहारा मिला है।”
शंभू बारी ने इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके जैसे जरूरतमंद परिवारों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि पक्के आवास और सम्मानजनक जीवन की मजबूत नींव भी प्रदान की है।
शंभू बारी के परिवार की कहानी यह दर्शाती है कि जब शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की राह खुलती है। भूमिहीन परिवार को आर्थिक सहायता के साथ पक्का आवास और महिला सदस्य को नियमित आर्थिक सहयोग मिलना, समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था की सार्थक तस्वीर प्रस्तुत करता है।
छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, कई इलाकों में बारिश के साथ अंधड़ और बिजली गिरने का अलर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत दे रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में अब तक हुई मौसमी वर्षा सामान्य से 6 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग ने 10 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में वृद्धि की संभावना जताई है। इस दौरान कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा और गरज-चमक के साथ वज्रपात हो सकता है।
आज कई इलाकों में बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। वहीं, एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। कुछ इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
रायपुर में 34.2 डिग्री तापमान
पिछले 24 घंटों में रायपुर में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस पेण्ड्रा रोड में रिकॉर्ड हुआ।
इन इलाकों में हुई बारिश
पिछले 24 घंटों में पाली (कोरबा) में 4 सेमी, बेलगहना (बिलासपुर) में 3 सेमी तथा हरदीबाजार (कोरबा) और नेरहरपुर (कांकेर) में 2-2 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा सकरी और कोटा (बिलासपुर), घुमका (राजनांदगांव), जशपुरनगर (जशपुर) और छिंदगढ़ (सुकमा) में 1-1 सेमी वर्षा हुई।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उससे लगे बांग्लादेश तट के ऊपर समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से 10 सितंबर को उत्तरी बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
इसके अलावा समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका जम्मू, देहरादून, पंतनगर, बस्ती, छपरा, पुरुलिया और दीघा होते हुए दक्षिण-पूर्व दिशा में पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत है।
रायपुर में बारिश और अंधड़ के आसार
राजधानी रायपुर में गुरुवार को आकाश आंशिक रूप से मेघमय रहने की संभावना है। शहर में बारिश के साथ गरज-चमक और अंधड़ चल सकता है। अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
दो दिन बाद भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों के बाद भी प्रदेश में बारिश का दौर जारी रह सकता है। अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ वज्रपात की भी आशंका है।
27 जिलों के लिए येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने 10 सितंबर 2026 को सुबह 7:15 बजे जिला स्तरीय नाउकास्ट जारी किया है, जो सुबह 10:15 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत प्रदेश के कई जिलों में हल्की आंधी के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। इस दौरान हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।
इन जिलों में अलर्ट
सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का भी अनुमान है।
‘जन शक्ति से जल शक्ति’ का असर: छत्तीसगढ़ में भूजल संरक्षण ने रचा नया इतिहास
रायपुर। जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में अब एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं है। भूजल संसाधन आकलन-2026 में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। वर्ष 2020 में प्रदेश के 9 विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में थे और वर्ष 2025 तक भी 5 विकासखंड इस श्रेणी में बने हुए थे। वर्ष 2026 के आकलन में ये सभी पांच विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आ गए हैं।
इतना ही नहीं, इस आकलन चक्र में प्रदेश के 12 विकासखंडों की भूजल श्रेणी में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि एक भी विकासखंड की स्थिति नहीं बिगड़ी है। विकासखंडवार भूजल आकलन प्रारंभ होने के बाद यह छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा एक-चक्रीय सुधार है। प्रदेश में सुरक्षित विकासखंडों की संख्या बढ़कर अब 127 हो गई है।
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूजल सर्वेक्षण मंडल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार भूजल संसाधन आकलन-2026 को राज्य स्तरीय भूजल आकलन एवं प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान और उनके द्वारा प्रारंभ किए गए ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान ने प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और व्यापकता प्रदान की है। शासन के विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, किसानों और आम नागरिकों की भागीदारी से जल संरक्षण का प्रयास आज एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
जनभागीदारी ने असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश के किसानों, नागरिकों और मैदानी अमले को देते हुए कहा कि यह परिणाम केवल शासन की नीतियों का नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि महानदी भवन में नहीं, बल्कि खेतों और गांवों में हासिल हुई है। इसका सबसे बड़ा श्रेय बेमेतरा और राजनांदगांव सहित प्रदेश के उन किसानों को जाता है, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए अपने खेती के तौर-तरीकों में बदलाव स्वीकार किया। हमारे मैदानी अमले ने भी मौसम-दर-मौसम किसानों के साथ मिलकर निरंतर काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध किया है कि जनभागीदारी से भूजल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा शुरू किए गए जल संचय जन भागीदारी अभियान ने पूरे शासन तंत्र को एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करने का मजबूत आधार दिया। जल संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ जब किसानों और नागरिकों की भागीदारी जुड़ी, तब उसके परिणाम भूजल स्तर में हुए इस ऐतिहासिक सुधार के रूप में सामने आए हैं।
भूजल रिचार्ज 14.65 BCM के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर
भूजल संसाधन आकलन-2026 के अनुसार प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर (BCM) हो गया है, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 11.57 BCM था।
जल संरक्षण संरचनाओं के व्यापक निर्माण और पुनर्जीवन का सीधा प्रभाव भूजल रिचार्ज पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020 की तुलना में तालाबों एवं पोखरों से होने वाले भूजल रिचार्ज में 266.9 प्रतिशत तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं से होने वाले रिचार्ज में 202.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
वर्ष 2026 के भूजल आकलन के लिए प्रदेशभर में कुल 2 लाख 28 हजार 736 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं। जल संचय जन भागीदारी तथा जल शक्ति अभियान : कैच द रेन के अंतर्गत निर्मित और पुनर्जीवित जल संरचनाओं ने भूजल पुनर्भरण की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिकॉर्ड इतिहास में पहली बार भूजल दोहन में वार्षिक गिरावट
आकलन का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदेश में भूजल दोहन में भी गिरावट आई है। वर्ष 2026 में कुल भूजल दोहन 6.21 BCM दर्ज किया गया है, जबकि पिछले आकलन चक्र में यह 6.30 BCM था। उपलब्ध आकलन रिकॉर्ड में यह पहली वार्षिक गिरावट है।
प्रदेश में भूजल दोहन का स्तर वर्ष 2022 में 49.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जो अब घटकर 46.37 प्रतिशत रह गया है। यह 70 प्रतिशत की सुरक्षित सीमा से काफी नीचे है।
यह सुधार केवल बेहतर वर्षा या भूजल रिचार्ज बढ़ने का परिणाम नहीं है। भूजल दोहन में वास्तविक कमी यह दर्शाती है कि प्रदेश में जल की मांग के बेहतर प्रबंधन, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और किसानों की सहभागिता के प्रयास जमीनी स्तर पर प्रभावी हुए हैं।
फसल विविधीकरण से बेमेतरा और राजनांदगांव में बड़ा बदलाव
भूजल संसाधन आकलन में गर्मी के मौसम में धान के रकबे में आई कमी को भूजल दोहन घटाने का एक महत्वपूर्ण कारण माना गया है। विशेष रूप से बेमेतरा और राजनांदगांव जिलों में किसानों की सहभागिता से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।
बेमेतरा जिले में गर्मी के धान का रकबा लगभग 26 हजार हेक्टेयर से घटकर 5 हजार हेक्टेयर रह गया है। इसी प्रकार राजनांदगांव में यह रकबा 9,400 हेक्टेयर से घटकर लगभग 2,800 हेक्टेयर हो गया। दोनों जिलों में मिलाकर गर्मी के धान के रकबे में लगभग 27,600 हेक्टेयर की कमी आई है।
इसका प्रभाव भूजल की स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। बेमेतरा लगातार चार आकलन चक्रों के बाद क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आया है। जिले में वर्ष 2023 की तुलना में कुल भूजल दोहन में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
राजनांदगांव में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2022 में यहां भूजल दोहन का स्तर 70.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब यह विकासखंड पूर्णतः सुरक्षित श्रेणी में आ गया है। यहां सिंचाई के लिए भूजल दोहन में वर्ष 2023 की तुलना में 16.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों द्वारा फसल पद्धति में किया गया यह बदलाव केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए किया गया महत्वपूर्ण योगदान है। किसानों ने दीर्घकालिक हित को प्राथमिकता देकर पूरे प्रदेश के सामने जल संरक्षण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
11 जिलों के 19 अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर अब विशेष फोकस
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन जल सुरक्षा की दिशा में अभी आगे और काम करना है। वर्तमान में 11 जिलों के 19 विकासखंड अर्ध-संकटग्रस्त श्रेणी में हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ का कोई भी विकासखंड भूजल तनावग्रस्त नहीं रहेगा। अब हमारा विशेष ध्यान अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर होगा। जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, फसल विविधीकरण और जनभागीदारी के माध्यम से इन्हें भी सुरक्षित श्रेणी में लाया जाएगा।
इस लक्ष्य की दिशा में वर्ष 2026-27 के दौरान बेमेतरा, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों के लगभग 5,442 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में NAQUIM 2.0 के अंतर्गत जलभृत मानचित्रण अध्ययन प्रस्तावित किया गया है। इससे भूजल की उपलब्धता, जलभृतों की स्थिति और क्षेत्रवार प्रबंधन की जरूरतों का अधिक वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भूजल की स्थिति में आया सुधार किसी एक विभाग के प्रयास का परिणाम नहीं है। जल संचय जन भागीदारी अभियान तथा जल शक्ति अभियान : कैच द रेन के अंतर्गत जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित विभिन्न विभागों और जिला प्रशासन ने समन्वित रूप से कार्य किया है।
गांवों में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण एवं पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग, फसल विविधीकरण और किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रेरित करने जैसे प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाया गया। इसी समग्र दृष्टिकोण ने भूजल रिचार्ज बढ़ाने के साथ-साथ भूजल दोहन को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन के संकल्प के बाद बड़ी उपलब्धि
यह उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में 1 और 2 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे कार्यों एवं उपलब्धियों को प्रस्तुत किया था।
प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने जल सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को राष्ट्रीय समय-सीमा से पहले प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त किया है। भूजल संसाधन आकलन-2026 के परिणाम इस दिशा में प्रदेश की प्रगति को रेखांकित करते हैं।
राज्य सरकार अब इस उपलब्धि को अगले चरण में ले जाते हुए वार्षिक ‘कैच द रेन’ योजना 2026-27 को विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्यों के साथ लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र की भूजल स्थिति के अनुरूप संरक्षण एवं पुनर्भरण के कार्यों को और अधिक लक्षित तथा परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। जनभागीदारी से छत्तीसगढ़ ने क्रिटिकल विकासखंडों की संख्या शून्य तक पहुंचाई है और अब इसी सामूहिक शक्ति से वर्ष 2030 तक प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड को भूजल की दृष्टि से सुरक्षित बनाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगे।
साइबर ठगी हुई तो घबराएं नहीं, MRM पोर्टल पर तुरंत करें शिकायत, 50 हजार तक की होल्ड राशि मिल सकती है वापस, जाने पूरी प्रक्रिया
रायपुर। साइबर ठगी के मामलों में आम नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए Money Restoration Module (MRM) पोर्टल की सुविधा उपलब्ध है। यदि साइबर ठगी की राशि समय पर शिकायत करने के बाद होल्ड हो जाती है, तो पात्र पीड़ित ऑनलाइन आवेदन कर अपनी राशि वापस पाने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
विशेष रूप से ₹50,000 तक की साइबर ठगी की राशि बिना FIR कराए भी पात्रता के अनुसार MRM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर वापस प्राप्त की जा सकती है।
पीड़ित को MRM पोर्टल से मिली राहत
पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के थाना गुढ़ियारी क्षेत्र निवासी रजनीश गुप्ता के साथ हुई साइबर ठगी के मामले में ₹30,000 की राशि होल्ड हुई थी। MRM पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने पर मात्र तीन दिनों के भीतर ₹20,000 की राशि उनके बैंक खाते में वापस प्राप्त हो गई।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
साइबर ठगी होने पर आम नागरिकों को तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। यदि ठगी की राशि होल्ड हो जाती है, तो MRM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर राशि वापस पाने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि MRM पोर्टल की इस महत्वपूर्ण सुविधा की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि साइबर ठगी के पीड़ित पात्र नागरिक समय पर आवेदन कर अपनी होल्ड राशि वापस पाने की प्रक्रिया का लाभ ले सकें।

प्रधानमंत्री मोदी के सेवा भाव को जन-जन तक पहुंचाएगा ‘सेवा संकल्प अभियान’: सांसद वीडी शर्मा
रायपुर। भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूरे होने पर सेवा संकल्प अभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भाजपा सांसद एवं भाजपा प्रकोष्ठ संकुल के राष्ट्रीय संयोजक वीडी शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का सम्पूर्ण राजनीतिक जीवन जन सेवा को समर्पित रहा है। मोदी ने राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य किया है। मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत की ओर अग्रसर हो चुका है।
शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की वैश्विक छवि को एक मानबिंदु के रूप में स्थापित किया है। आज पूरी दुनिया प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना कर रही है। दुनिया की निगाहें आज भारत पर टिकी हुई है। भाजपा सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के सेवा भाव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा, जिसके तहत विभिन्न सेवा गतिविधियों, लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा युवाओं को सेवा और नवाचार से जोड़ने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘सेवा संकल्प अभियान’ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के सेवा भाव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके अंतर्गत आशीर्वाद का दीया, सेवा चित्र, नमो सेवा गाथा, सेवा स्मरण, आंगन का उत्सव, कहानी बदलाव की, विकसित भारत संकल्प यात्रा, सेवा ज्योति यात्रा, वडनगर से वाराणसी जल जन और सेवा संकल्प यात्रा आदि कार्यक्रम होंगे। इसी तरह सेवा मेरा योगदान के तहत 25 सेवा गतिविधियां, सेवा सेतु अभियान, रंगोली राष्ट्र, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज, जनसेवक महाकुंभ (पंचायत से पार्लियामेंट) कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सेवा संकल्प अभियान पूरे देश में 17 सिंतबर से चलेगा : अजय जम्वाल
भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर देशभर में ‘सेवा पखवाड़ा’ आयोजित करती है। मोदी का व्यक्तित्व निरंतर सेवा भाव से जुड़ा हुआ है, इसलिए पार्टी पिछले कई वर्षों से उनके जन्मदिवस के अवसर पर सेवा गतिविधियां आयोजित करती आ रही है। इस वर्ष एक विशेष संयोग है कि 7 अक्टूबर 2001 को मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और आगामी 7 अक्टूबर को उनके सार्वजनिक जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर भाजपा ने पूरे देश में एक महीने का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने का निर्णय लिया है।
सेवा संकल्प अभियान में सबकी भूमिका अहम : पवन साय
प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कहा कि ‘सेवा में मेरा योगदान’ नाम से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से विशेषकर युवाओं और आम नागरिकों से अपील की जाएगी कि वे अभियान के दौरान किए गए सेवा कार्यों की रील्स बनाएं और उन्हें दूसरों के लिए प्रेरणा का माध्यम बनाएं। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति को मिले। इस प्रकार ‘सेवा सेतु अभियान’ सरकार की योजनाओं और उनके वास्तविक लाभार्थियों के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य करेगा।
प्रधानमंत्री का जीवन सेवा और गरीब कल्याण को समर्पित : जैन
भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं सेवा संकल्प अभियान के प्रदेश संयोजक यशवंत जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की गौरवशाली राजनीतिक यात्रा को लेकर हम सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संपूर्ण जीवन सेवा और गरीब कल्याण को समर्पित रहा है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने जितनी भी जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की है। उनका मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना रहा है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जी. वेंकटेश्वर ने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और उनकी नवाचार क्षमता को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत युवाओं को उनके स्थानीय क्षेत्रों की समस्याओं से अवगत कराया जाएगा और रिसर्च तथा इनोवेशन के माध्यम से उनके समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। यह प्रतियोगिता ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर पर आयोजित की जाएगी, जिससे स्थानीय समस्याओं के स्थानीय स्तर पर रचनात्मक और नवोन्मेषी समाधान सामने आ सकें।
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने किया। इस दौरान बैठक में भाजपा प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, सेवा संकल्प अभियान के 13 कार्यक्रमों के संयोजक, सह संयोजक एवं सदस्य मौजूद रहे।
नगरीय निकायों की समीक्षा बैठक में डिप्टी CM अरुण साव के सख्त निर्देश, बोले- जवाबदेही से करें काम
रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज राज्य के सभी नगर निगमों तथा जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शहरों के विकास, स्वच्छता, राजस्व वसूली, योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही जवाबदेही से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय केवल बजट खर्च करने वाली संस्था नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की योजनाएं बनाने, जनसुविधाएं उपलब्ध कराने तथा नागरिकों की कल्याणकारी संस्था है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और संचालक नीलेशकुमार क्षीरसागर भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में कहा कि शहरों के विकास के काम तथा राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए अधिकारी सक्रियता से काम करें। प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाएं। उन्होंने निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों के सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने और संपत्ति कर जमा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा निकायों में आनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि वे निर्माण कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा निर्माणाधीन कार्यों की कड़ाई से निरीक्षण करें। उन्होंने सप्ताह के अलग-अलग दिनों में राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए कार्य-पद्धति विकसित करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमणों का पता चलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं का अतिरिक्त भार निकाय पर पड़ता है। उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर साफ-सफाई की व्यवस्था और निर्माण कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। इससे कार्यों की मैदानी हकीकत पता चलने के साथ ही शहर की समस्याओं और लोगों के फीडबैक की भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शहरों की अधोसंरचना भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।
श्री साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक योजना बनाने पर जोर देते हुए शहरों के सभी घरों में पेयजल आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था तैयार करने को कहा। भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निकायों के अधिकारी ही शहर की छवि और विकास की दिशा तय करने वाले प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं, इसलिए पूरी क्षमता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करें।
शहरों की व्यवस्था ऐसी हो कि नागरिकों को निकाय की मौजूदगी का अहसास हो : सोनमणि बोरा
नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि नगरीय निकायों का दायित्व केवल निर्माण कार्यो और योजनाओं को पूरा करना नहीं है, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का निर्बाध और सुचारू संचालन भी है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती जनआकांक्षाओं के अनुरूप निकायों को भविष्य की जरूरतों का रोडमैप तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से अमल करना होगा। शहरवासियों को निकाय की मौजूदगी का अहसास होना चाहिए। उन्हें विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाना चाहिए।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि नगरीय निकायों का काम संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसका कार्यक्षेत्र बेहद व्यापक है। नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही शहरों में आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना भी निकायों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं और विकास कार्यों का असर कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। निगम आयुक्त और सीएमओ शहरी विकास और कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
उन्होंने शहरों में उपलब्ध खाली स्थानों का चिन्हांकन कर वहां सघन वृक्षारोपण कराने और 'अर्बन फारेस्ट' विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का गंभीरता और सक्रियता से पालन करने को कहा। उन्होंने सामान्य सभा और एमआईसी की बैठकें भी समयबद्ध तरीके से नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन सभी नालंदा परिसरों को शीघ्र शुरू करने की दिशा में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने पर भी जोर दिया गया। प्रमुख सचिव ने फर्नीचर, आइटी सुविधाओं, किताबों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए राशि स्वीकृत कर जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। सूडा के सीईओ सुमित अग्रवाल, अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता रमेश शर्मा सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों के सीएमओ, राजस्व अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता और संभागीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
इन कार्यों की हुई समीक्षा
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं की अद्यतन स्थिति, अधोसंरचना कार्यों, नालंदा परिसर, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, पीएम स्वनिधि और पीएम ई-बस सहित विभिन्न राज्य प्रवर्तित योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, एनर्जी बिल ऑडिट, एबीसी रूल्स एवं गोधाम योजना, निकायों की टीम द्वारा प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।
राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला, कई तहसीलदार हुए इधर से उधर, देखें लिस्ट…
रायपुर। राज्य सरकार ने राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया है। 57 तहसीलदार और नायब तहसीलदाराें को इधर से उधर किया गया है। इसका आदेश आज राजस्व विभाग ने जारी किया है।
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छत्तीसगढ़ में उद्योगों का महाकुंभ: 18 से 20 सितंबर तक रायपुर में होगा 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर…
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर 18 से 20 सितंबर तक देशभर के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, उद्यमियों, निवेशकों और युवाओं की मेजबानी करेगी। साइंस कॉलेज ओपन ग्राउंड में 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 का आयोजन किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फेयर में प्रदेश के MSME, स्टार्टअप, निर्माताओं, उद्यमियों और युवाओं को देशभर के उद्योगपतियों, खरीदारों और निवेशकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
यह आयोजन केवल औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, रोजगार, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को एक मंच पर लाने वाला व्यापक औद्योगिक आयोजन होगा। फेयर में उत्पाद एवं तकनीक प्रदर्शनी, B2B मीटिंग, निवेशकों से संवाद, Job Placement Drive, विशेषज्ञों के प्रेरक सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित विशिष्ट अतिथियों की रहेगी उपस्थिति
इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की भी उपस्थिति रहेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रमुख विचारक कृष्ण गोपाल की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। राष्ट्रीय स्तर के नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, उद्यमियों और निवेशकों की मौजूदगी से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास
छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा, कृषि एवं वन उत्पाद, ऊर्जा संसाधन और विकसित हो रहे औद्योगिक आधार के कारण प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बड़े बाजार तक पहुंच, नए खरीदारों से संपर्क, तकनीकी सहयोग और निवेश हासिल करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का मंच प्रदान करेगा। प्रदेश के उद्यमियों को विभिन्न राज्यों से आने वाले उद्योगपतियों, खरीदारों, वितरकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इससे नए बाजारों तक पहुंच और कारोबारी साझेदारियों की संभावनाएं मजबूत होंगी।
B2B मीटिंग से बनेंगे नए कारोबारी संबंध
फेयर में देशभर से आने वाले उद्यमी अपने उत्पादों, मशीनरी, तकनीक और सेवाओं का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ B2B मीटिंग के माध्यम से निर्माता, वितरक, डीलर, सप्लायर, खरीदार और निवेशक सीधे संवाद कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों को केवल अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर देना नहीं, बल्कि उन्हें नए खरीदार, कारोबारी साझेदार और बाजार विस्तार के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
Job Placement Drive से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
इस बार फेयर का एक प्रमुख आकर्षण Job Placement Drive होगा। इसके माध्यम से प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को उद्योगों और कंपनियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। विद्यार्थियों को उद्योग प्रतिनिधियों से सीधे संवाद, इंटरव्यू और रोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को मिलेगा प्रोत्साहन
फेयर में पारंपरिक उद्योगों के साथ स्टार्टअप और नई पीढ़ी के युवा उद्यमियों को भी विशेष अवसर दिया जाएगा। युवा उद्यमी अपने उत्पाद और नए व्यावसायिक विचार प्रदर्शित करने के साथ अनुभवी उद्योगपतियों, निवेशकों और संभावित कारोबारी साझेदारों से संपर्क स्थापित कर सकेंगे।बाजार, निवेश, तकनीक और मार्गदर्शन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह मंच नए उद्यमों को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों के सत्र देंगे नई दिशा
तीन दिवसीय आयोजन में Motivational Talks और विशेषज्ञ व्याख्यान भी होंगे। इनमें उद्यमिता, उद्योग संचालन, बाजार विस्तार, नई तकनीक, व्यवसाय प्रबंधन, नवाचार और बदलती आर्थिक परिस्थितियों जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सफल उद्यमियों और विशेषज्ञों के अनुभव युवाओं तथा नए उद्यमियों को व्यवसाय की नई संभावनाओं को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे।
औद्योगिक क्षमता के साथ दिखेगी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान
इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में औद्योगिक गतिविधियों के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा। तीनों दिनों रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें प्रदेश की लोक कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। इससे देशभर से आने वाले उद्यमियों और अतिथियों को छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता के साथ उसकी सांस्कृतिक पहचान से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
MSME क्षेत्र को मिलेगी नई ऊर्जा
MSME क्षेत्र स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फेयर में ऐसे उद्यमियों को नए बाजार, खरीदार, तकनीकी सहयोग और व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा। विभिन्न राज्यों के उद्यमियों की एक मंच पर मौजूदगी से ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग, संयुक्त उपक्रम, सप्लाई चेन साझेदारी और नए व्यापारिक संबंध विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
'लोकल से नेशनल' की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के दृष्टिकोण के अनुरूप स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इसी दिशा में प्रभावी मंच के रूप में सामने आ रहा है। प्रदेश के छोटे शहरों और जिलों में कार्यरत उद्यमियों को अपने उत्पाद देशभर के खरीदारों और उद्योग प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
निवेश और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद
फेयर के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक और निवेश क्षमता को देश के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। खनिज, कृषि, वन उत्पाद, ऊर्जा, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, निर्माण, MSME और सेवा क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से निवेशकों और उद्योगपतियों को परिचित कराया जाएगा। आयोजन से नए उद्योगों की स्थापना, निवेश, व्यापार विस्तार और रोजगार सृजन के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार होने की उम्मीद है।
तीन दिन में उद्योग, निवेश और रोजगार के अनेक अवसर
18, 19 और 20 सितंबर को आयोजित होने वाला इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर उद्योग जगत के लिए व्यापारिक संपर्क, निवेश, रोजगार, तकनीक और नवाचार के अनेक अवसर लेकर आएगा। एक ओर जहां उत्पादों और तकनीक की प्रदर्शनी होगी, वहीं दूसरी ओर B2B मीटिंग और निवेशकों से संवाद होंगे। युवाओं के लिए Job Placement Drive और उद्यमियों के लिए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के सत्र आयोजित किए जाएंगे।
14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 छत्तीसगढ़ के स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने, निवेश के नए अवसर तलाशने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने और प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को देश के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 18 से 20 सितंबर तक रायपुर का साइंस कॉलेज ओपन ग्राउंड उद्योग, उद्यमिता, निवेश, रोजगार और नवाचार के इस महाकुंभ का साक्षी बनेगा।
छत्तीसगढ़ को रेल परियोजनाओं की बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जताया आभार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 हजार 783 करोड़ रुपए की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इनमें बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन छत्तीसगढ़ के विकास की दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा तथा उद्योग और व्यापार के लिए माल परिवहन अधिक सुगम एवं प्रभावी होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक और मजबूत रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की दिशा में अभूतपूर्व गति से कार्य हो रहा है। छत्तीसगढ़ को भी इसका निरंतर लाभ मिल रहा है। नई मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को गति देने के साथ प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और रोजगार की नई संभावनाओं को विस्तार देंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
रेल नेटवर्क की क्षमता और कनेक्टिविटी में होगा विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत तीन परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन तथा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इनकी कुल अनुमानित लागत 10 हजार 783 करोड़ रुपए है और इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूर्ण करने की योजना है।
इन तीनों परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इनसे लगभग 4 हजार 790 गांवों और करीब 56 लाख की आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
बिलासपुर-पेंड्रा रेल कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती
बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखती है। इन परियोजनाओं से इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता में वृद्धि होगी। अतिरिक्त लाइन क्षमता से ट्रेनों का परिचालन अधिक सुगम होगा, रेल यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी तथा यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय हो सकेगी। इस रेल कॉरिडोर की क्षमता में वृद्धि से छत्तीसगढ़ की देश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी। इसका लाभ आम यात्रियों के साथ प्रदेश की औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी मिलेगा।
उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई गति
स्वीकृत रेल परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात सहित महत्वपूर्ण वस्तुओं के परिवहन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। मल्टीट्रैकिंग से रेल नेटवर्क की माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। तीनों परियोजनाओं से कुल मिलाकर प्रतिवर्ष लगभग 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने का अनुमान है।
छत्तीसगढ़ खनिज और औद्योगिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। ऐसे में बेहतर रेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा। माल परिवहन अधिक सुगम होने से उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलेगी और प्रदेश में निवेश, व्यापार तथा रोजगार के नए अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यटन और आस्था के प्रमुख केंद्रों तक बेहतर होगी पहुंच
इन परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ सहित संबंधित क्षेत्रों के महत्वपूर्ण पर्यटन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की रेल कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा। इनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, मल्हार का पुरातात्विक स्थल, रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर और खुटाघाट बांध सहित अनेक प्रमुख स्थल शामिल हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिलेगी।
पीएम गति शक्ति के विजन को मिलेगी मजबूती
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना तथा लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना है।
रेलवे पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम है। इन तीनों परियोजनाओं से देश में लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत तथा करीब 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो लगभग 2.48 करोड़ वृक्ष लगाने के पर्यावरणीय प्रभाव के बराबर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क किसी भी राज्य के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। नई रेल परियोजनाएं प्रदेश में सुगम आवागमन, मजबूत कनेक्टिविटी और औद्योगिक प्रगति को गति देते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
राजनांदगांव में UCC पर जनपरामर्श शुरू, विवाह-तलाक से उत्तराधिकार तक सामाजिक संगठनों ने दिए सुझाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में राजनांदगांव के जिला पंचायत सभाकक्ष में बैठक में यूसीसी समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार एवं सेवानिवृत्त प्राचार्या डॉ. ज्योति रानी सिंह के समक्ष विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे विषयों पर खुलकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक की मुख्य बातें
पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। UCC के पक्ष और विपक्ष दोनों में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के सर्व आदिवासी समाज, बौद्ध, जैन, मुस्लिम, ईसाई, साहू, कलार, लोधी, यादव, क्रिश्चयन समाज, पटेल, गड़रिया समाज और सेन समाज, अध्यक्ष गोड़ समाज, सामाजिक कार्यकर्ता, उराव समाज, मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों सहित विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और अपने सुझाव समिति के समक्ष रखे।
विभिन्न सामाजिक संगठनों दिए गए सुझाव में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) के तहत सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसा कानून होना चाहिए।
ड्राफ्ट निर्माण की प्रक्रिया
समिति के सदस्यों ने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों के आधार पर ही अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि आम जनता से ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। विधिक सलाहकार द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से UCC की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही आम नागरिक समिति की आधिकारिक वेबसाईट https://ucc.cgstate.gov.in/: एवं ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in के माध्यम से भी अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं।
बैठक के दौरान संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ दुर्गा प्रसाद अधिकारी तथा अपर कलेक्टर सी.एल. मारकंडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर कमिश्नरेट में थाना प्रभारियों का तबादला, देखें लिस्ट
रायपुर। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर में थाना प्रभारियों का तबादला हुआ है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से 7 निरीक्षकों का तबादला आदेश जारी किया है। सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक नई पदस्थापना पर अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, निरीक्षक राजेश कुमार सिंह को आजाद चौक थाना प्रभारी से हटाकर टिकरापारा थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं निरीक्षक राजेश कुमार मराई को टिकरापारा थाना प्रभारी के पद से हटाकर रक्षित आरक्षी केंद्र भेजा गया है।
निरीक्षक अर्चना धुरंधर को प्रभारी महिला थाना से हटाकर आजाद चौक थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। निरीक्षक राजश्री मौर्य को रक्षित आरक्षी केंद्र से प्रभारी महिला थाना बनाया गया है।
इसी तरह निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू को प्रभारी जिविशा से थाना प्रभारी गोलबाजार, निरीक्षक आनंद सोनी को रक्षित आरक्षी केंद्र से यातायात और निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार तिवारी को रक्षित आरक्षी केंद्र से प्रभारी जिविशा पदस्थ किया गया है।
देखिये ट्रांसफर लिस्ट-

‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर मंत्री ओपी चौधरी ने की समीक्षा, जनभागीदारी बढ़ाने के दिए निर्देश
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की प्रशासनिक बैठक ली। उन्होंने अभियान की तैयारियों की विस्तार समीक्षा करते हुए नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, कार्ययोजना, विभागीय दायित्वों एवं प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी ली।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की यात्रा केवल वर्षों का हिसाब नहीं है, बल्कि यह 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व और भारत की क्षमता में अटूट विश्वास की कहानी है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से इस यात्रा के प्रति जन-आभार व्यक्त करने के साथ विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से साकार करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अभियान के सभी कार्यक्रमों का बेहतर विभागीय समन्वय के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान की प्रत्येक गतिविधि ग्राम, वार्ड, विकासखंड एवं जिला स्तर पर अधिकतम जनभागीदारी के साथ आयोजित करना सुनिश्चित करें। जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों सहित समाज के सभी वर्गों को अभियान से जोड़ा जाए।
17 सितंबर की शाम हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’
अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। इसके तहत प्रत्येक परिवार को दीप प्रज्वलन से जोड़ने की पहल की जाएगी। प्रत्येक दीप को 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक बनाया जाएगा। मैदानी टीमें घर-घर पहुंचकर नागरिकों को इस पहल में सहभागी बनने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।
‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ से सामने आएगी नई पीढ़ी की कल्पना
17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ पहल के तहत विकसित भारत की संकल्पना और 25 वर्षों की सेवा यात्रा पर आधारित ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बच्चों की कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा तथा उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
‘नमो सेवा गाथा’ से गांव-गांव पहुंचेगी सेवा और बदलाव की कहानी
‘नमो सेवा गाथा’ के अंतर्गत 17 सितंबर से नुक्कड़ नाट्य का आयोजन किया जाएगा। 2 अक्टूबर को देश के 100 प्रमुख स्थलों पर विशेष मंचन प्रस्तावित है। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से 25 वर्षों के सेवा कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आए सकारात्मक बदलाव की कहानियों को सरल, भावनात्मक एवं प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाया जाएगा।
‘आंगन का उत्सव’ में माताओं से संवाद और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजित होगी। इसमें माताओं एवं बच्चों की सहभागिता के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी। योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं अपने जीवन में आए बदलाव की कहानियां भी साझा करेंगी।
‘कहानी बदलाव की’ में सामने आएंगी हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियां
अभियान के दौरान ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत शासकीय योजनाओं से सकारात्मक बदलाव का अनुभव करने वाले हितग्राहियों की वास्तविक कहानियां संकलित की जाएंगी। प्रत्येक कहानी में हितग्राही का नाम, स्थान, जिला, संबंधित योजना और जीवन में आए बदलाव की जानकारी दर्ज की जाएगी। इन कहानियों का डिजिटल डेटा बैंक भी तैयार किया जाएगा।
‘सेवा ज्योति यात्रा’ से जन-जन जुड़ेगा विकसित भारत के संकल्प से
25 वर्षों की सेवा के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को मजबूत करने के लिए गांव, जिला एवं राज्य स्तर पर जनभागीदारी यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा ज्योति यात्रा’ को व्यापक जनसहभागिता के साथ आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।
‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत सेवा गतिविधियों में भाग लेंगे नागरिक
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के अंतर्गत नागरिकों एवं विभिन्न संस्थाओं की सेवा गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। नदी-घाट स्वच्छता सहित विभिन्न सेवा कार्यों को अभियान में शामिल किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ से पात्र हितग्राहियों को मिलेगा योजनाओं का लाभ
‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ के तहत विधानसभा एवं विकासखंड स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। शिविरों के माध्यम से पात्र नागरिकों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने, उन्हें योजनाओं से जोड़ने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहेगा।
विविध गतिविधियों से अभियान को मिलेगा व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप
अभियान के दौरान ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘जल जन सेवा संकल्प’, ‘रंगोली राष्ट्र/भारत मंडल’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज‘ तथा ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’ जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के अंतर्गत परिवर्तनकारी स्थलों का भ्रमण तथा ‘सेवा ज्योति यात्रा’ का आयोजन 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
इस बैठक में संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।
राज्य गठन के बाद पहली बार नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में 21 सहायक संचालकों की एक साथ नियुक्ति, CM साय ने सौंपे नियुक्ति पत्र
रायपुर। शहरों का विकास केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों के अनुरूप किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के 21 नवचयनित सहायक संचालकों (योजना) को नियुक्ति पत्र प्रदान करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी नवचयनित अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य निर्माण के बाद पहली बार नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सहायक संचालकों की नियुक्ति हुई है। यह नियुक्ति विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरीकरण को सुनियोजित दिशा देने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नवचयनित अधिकारियों के माता-पिता और परिजनों को भी विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर योग्य बनाना और उन्हें जिम्मेदार पद पर प्रदेश तथा जनता की सेवा करते देखना प्रत्येक माता-पिता के लिए गर्व और प्रसन्नता का अवसर होता है। आज इन युवाओं के जीवन में नई जिम्मेदारी की शुरुआत हो रही है और इसके साथ उनके परिवारों की अपेक्षाएं तथा प्रदेश की आशाएं भी जुड़ी हुई हैं।

राज्य गठन के बाद 25 वर्षों में 17 नियुक्तियां, अब एक साथ 21 युवा अधिकारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में कुल 17 सहायक संचालकों की नियुक्ति हुई थी, जबकि आज एक साथ 21 युवा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभागों को पर्याप्त मानव संसाधन और प्रोफेशनल क्षमता से सशक्त कर रही है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। गांवों से शहरों की ओर आबादी का विस्तार होने के साथ नगरों की सीमाएं बढ़ रही हैं और प्रमुख सड़कों तथा शहरों के आसपास नई बसाहटें विकसित हो रही हैं। आने वाले वर्षों में यह गति और तेज होगी। ऐसे में आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक गतिविधियों, सड़कों, सार्वजनिक स्थलों, परिवहन, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए दीर्घकालीन एवं वैज्ञानिक योजना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि टाउन प्लानिंग केवल नक्शे बनाने या भू-उपयोग तय करने का कार्य नहीं है। इसका सीधा संबंध नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और शहरों के भविष्य से है। एक अच्छी योजना शहर को व्यवस्थित बनाती है, नागरिक सुविधाओं को सुलभ करती है और भविष्य में अनियोजित विस्तार से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकती है। इसलिए आज नियुक्त हुए युवा अधिकारियों के कंधों पर भविष्य के छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

जनहित और पारदर्शिता को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दें
मुख्यमंत्री श्री साय ने नवचयनित अधिकारियों को दायित्वबोध का संदेश देते हुए कहा कि शासकीय सेवा जनता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। शासन में अधिकारी द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, निष्ठा, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ करें।
उन्होंने कहा कि शासन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें आम नागरिक को अपने छोटे से छोटे कार्य के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करते हुए नागरिकों की सुविधा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अधिकारियों का दायित्व है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों से अपनी तकनीकी शिक्षा, आधुनिक ज्ञान और नवाचार का उपयोग प्रदेश के बेहतर नियोजन में करने का आह्वान किया।
विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भागीदारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ देश इस लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के विकास की स्पष्ट दिशा तय करते हुए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर : विजन 2047’ तैयार किया है। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां आधुनिक अधोसंरचना के साथ बेहतर नागरिक सुविधाएं हों, युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर हों और विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसमें शासन-प्रशासन, युवाओं और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
ढाई वर्षों में 15 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में विभिन्न विभागों में 15 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। पुलिस विभाग में 7 हजार से अधिक और शिक्षा विभाग में 3 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बिजली विभाग में भी 1200 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए अवसरों का दायरा केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन के प्रावधान किए गए हैं। रोजगार मेलों, निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक युवा को उसकी योग्यता और रुचि के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले।
पारदर्शी व्यवस्था से मिली नियुक्ति, उसी पारदर्शिता का लाभ जनता तक पहुंचाएं : ओ.पी. चौधरी
वित्त तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवचयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सुनियोजित शहरीकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था के विकास के साथ शहरी आबादी और शहरों का विस्तार बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं का पहले से आकलन कर आधुनिक और वैज्ञानिक टाउन प्लानिंग करना समय की आवश्यकता है।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में पहले एक बार में तीन या चार सहायक संचालकों की नियुक्तियां होती थीं, लेकिन इस बार एक साथ 21 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। इससे विभाग की प्रोफेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश में सुनियोजित शहरी विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि उनकी भर्ती पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हुई है। अब उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि वे इसी पारदर्शिता और ईमानदारी को अपनी कार्यशैली का आधार बनाएं। जब कोई नागरिक नक्शा स्वीकृति या अपने किसी अन्य कार्य के लिए विभाग के कार्यालय आए, तो उसे व्यवस्था में सरलता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।
नई पीढ़ी के अधिकारियों की ऊर्जा से विकास को मिलेगी नई गति : मंत्री केदार कश्यप
वन मंत्री केदार कश्यप ने नवचयनित अधिकारियों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की नियुक्ति प्रदेश के सुनियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नई पीढ़ी के अधिकारियों का ज्ञान, ऊर्जा और आधुनिक दृष्टिकोण विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवचयनित अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनेंगे।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव अंकित आनंद, आयुक्त अवनीश शरण सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, नवचयनित सहायक संचालक एवं उनके परिजन उपस्थित थे।
बस संचालकों की हड़ताल से पहले मंत्री केदार कश्यप से अहम बैठक, किराया बढ़ोतरी पर जल्द समाधान का आश्वासन
रायपुर। किराए में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर बस ऑनर फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने 22 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है. इस बीच फेडरेशन पदाधिकारियों और बस संचालकों की बुधवार को मंत्री केदार कश्यप के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में यात्रियों की सुरक्षा सहित परिवहन क्षेत्र से जुड़े की विषयों पर चर्चा की गई.
परिवहन मंत्री कश्यप ने फेडरेशन के प्रतिनिधियों द्वारा रखी गई प्रत्येक मांग और व्यावहारिक समस्या को गंभीरता से सुना. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बस संचालकों की समस्याओं का नियमानुसार समाधान किया जाए. यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं.
यात्री किराए बढ़ाने की मांग पर जल्द होगा समाधान
बैठक में फेडरेशन ने साधारण यात्री बसों के किराए में 75 प्रतिशत और डीलक्स बसों के किराए में 30 प्रतिशत वृद्धि करने की मांग रखी. इसके साथ ही 11 मार्च 2025 को जारी संशोधित अधिसूचना को निरस्त करने का विषय भी मंत्री के समक्ष रखा गया.
परिवहन मंत्री कश्यप ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि यात्री किराए से जुड़े विषय का जल्द समाधान किया जाएगा. उन्होंने विभागीय अधिकारियों को सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी करते हुए इस विषय पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए.
स्लीपर बसों के टैक्स पर किया जा रहा विचार
फेडरेशन ने स्लीपर बसों में एक स्लीपर के बदले दो सीटों का टैक्स लेने की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त कर एक स्लीपर पर एक सीट के बराबर टैक्स निर्धारित करने की मांग रखी. बस संचालकों ने इस व्यवस्था से होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों की जानकारी भी मंत्री को दी.
मंत्री कश्यप ने कहा कि इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों को इसके व्यावहारिक, तकनीकी और राजस्व संबंधी सभी पहलुओं का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा.
समय-सारिणी व्यवस्थित करने के निर्देश
स्टेज कैरिज बसों के बीच समय-अंतराल निर्धारित करने के विषय पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई. फेडरेशन ने मुख्य मार्गों पर बसों के बीच 10 मिनट और ग्रामीण मार्गों पर 30 मिनट का अंतर निर्धारित करने का सुझाव दिया.
परिवहन मंत्री ने कहा कि बसों की समय-सारिणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे यात्रियों को पर्याप्त परिवहन सुविधा मिले और बस संचालकों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा की स्थिति भी उत्पन्न न हो. उन्होंने यात्रियों की सुविधा और बसों के सुव्यवस्थित संचालन को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया.
परमिट सहित अधिकाधिक सेवाएं होंगी ऑनलाइन
बैठक में स्टेज कैरिज वाली सभी यात्री बसों के लिए पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन परमिट जारी करने की सुविधा का विषय भी रखा गया. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सभी बसों के लिए ऑनलाइन परमिट जारी किए जा रहे हैं.
परिवहन मंत्री कश्यप ने परमिट सहित परिवहन विभाग की अधिकाधिक सेवाओं को ऑनलाइन करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि परिवहन सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जाए, ताकि बस संचालकों एवं आम नागरिकों को विभागीय कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें. ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से आवेदनों के निराकरण की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाया जाए.
महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
परिवहन मंत्री ने बसों में सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बस में पहली अथवा अंतिम सवारी महिला होने की स्थिति में वाहन की ऑनलाइन ट्रैकिंग की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. महिला यात्रियों के सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचने तक बस की स्थिति की निगरानी करने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रणाली विकसित की जाए.
उन्होंने बसों में कैमरे, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरणों को सक्रिय रखने तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा. मंत्री ने निर्देश दिए कि महिला सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था के क्षेत्र में तकनीक के माध्यम से उसकी प्रभावी निगरानी भी की जाए.
बस संचालक सार्वजनिक परिवहन की महत्वपूर्ण कड़ी
मंत्री कश्यप ने कहा कि बस संचालक प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में यात्री बसें आम नागरिकों के आवागमन का प्रमुख साधन हैं. इसलिए बस संचालकों की व्यावहारिक समस्याओं का नियमानुसार समाधान करते हुए यात्रियों के हितों और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाना आवश्यक है.
उन्होंने अधिकारियों को बैठक में उठाए गए सभी विषयों का बिंदुवार परीक्षण करने और जिन मांगों पर विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है, उनमें शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार परिवहन सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी, सुरक्षित और जनसुविधा केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.
बैठक में छत्तीसगढ़ फूड कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं बस ऑनर फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के संरक्षक संजय श्रीवास्तव, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, फेडरेशन के अध्यक्ष अनिल पूसदकर, अजय सिंह गिल, भावेश दुबे, सत्यानंद पाण्डेय, सुदीप शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधिगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे.
