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महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: पीएम मोदी ने मांगी माफी, विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में बिल पास न हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी, लेकिन साथ ही विपक्ष पर तीखा हमला भी बोला। उनके इस बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है और महिला आरक्षण का मुद्दा फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है।

पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भले ही संसद में बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक 66 प्रतिशत वोट नहीं मिल पाए, लेकिन उन्हें विश्वास है कि देश की 100 प्रतिशत नारी शक्ति का समर्थन उनके साथ है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकारों का विरोध कर उन्होंने नारी सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

उन्होंने “नारीशक्ति वंदन संशोधन” को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि यह देश के सभी राज्यों के संतुलित विकास के लिए जरूरी था। पीएम मोदी ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस पहल को संसद में विफल कर दिया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ “परिवारवादी पार्टियों” को डर है कि यदि महिलाएं सशक्त होंगी, तो उनका राजनीतिक वर्चस्व कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले ही आश्वासन दिया था कि किसी भी राज्य की भागीदारी या प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आएगी।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पार्टी का रवैया हमेशा “लटकाना, भटकाना और अटकाना” रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह मुद्दा श्रेय लेने का नहीं था और वे महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।

कांग्रेस पर सीधा हमला

अपने लगभग 30 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश के सामने मौजूद कई चुनौतियों की जड़ कांग्रेस का पुराना नकारात्मक दृष्टिकोण है। साथ ही आरोप लगाया कि कांग्रेस “बांटो और राज करो” की राजनीति करती रही है, जो उसे अंग्रेजों से विरासत में मिली है।

प्रधानमंत्री ने अंत में आश्वस्त किया कि महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली हर बाधा को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।