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लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, दो-तिहाई बहुमत न मिलने से झटका

नई दिल्ली। लोकसभा में 131 वां संविधान संशोधन बिल यानि महिला आरक्षण संशोधन बिल गिर गया है. पिछले 12 साल में मोदी सरकार को ये सबसे बड़ा झटका मिला है. बिल की वोटिंग में सदन के कुल 528 सदस्यों ने भाग लिया था. जहां बिल के पक्ष में मात्र 298 वोट जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े हैं. बता दें कि, कुल संख्या का दो तिहाई आंकड़ा न पार कर पाने के कारण बिल पास नहीं हो पाया. इसके बाद सरकार ने बाकी 2 और विधेयकों को भी वापस ले लिया. विधेयकों पर बीते दिन करीब 13 घंटे और आज सुबह से चर्चा हो रही थी. बता दें कि, इस बिल को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में पेश किया था.

28 वोटों से गिरा विधेयक

131वां संविधान संशोधन विधेयक पर कुल 489 सांसदों ने मतदान किया. विधेयक के पक्ष में 298 सदस्यों, जबकि 230 सदस्यों ने इसके विपक्ष में वोट दिया. चूंकि ये संविधान संशोधन विधेयक था, इसलिए सदन में उपस्थित और कुल मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई वोट जरूरी थे. यानी विधेयक को पारित होने के लिए 326 वोट चाहिए थे, जो नहीं मिले. इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बाकी दोनों विधेयकों को वापस ले लिया.

सरकार ने बुलाया था 3 दिन का विशेष सत्र

तीनों विधेयकों के लिए सरकार ने 3 दिन का विशेष सत्र बुलाया था. पहले विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया, जिस पर 21 घंटे चर्चा हुई. 56 महिला सांसदों समेत 130 सदस्यों ने विरोध और पक्ष में अपने तर्क रखे. इस दौरान खूब हंगामा देखने को भी मिला.

प्रधानमंत्री ने की सांसदों से की थी अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं सभी सांसदों से कहूंगा आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए. देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है. उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए. ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी, लोकतंत्र और सशक्त होगा. आइए हम मिलकर आज इतिहास रचें. भारत की नारी को देश की आधी आबादी को उसका हक दें.’

राहुल ने किया जोरदार विरोध

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि 2023 में जो महिला आरक्षण बिल पास हुआ था, उसी समय सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने संकेत दिया था कि इसे लागू करने में लंबा समय लग सकता है. उनके मुताबिक, मौजूदा प्रस्ताव के जरिए असल मुद्दे से ध्यान हटाया जा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बिल के बहाने भारत के चुनावी नक्शे (इलेक्टोरल मैप) को बदलने की कोशिश की जा रही है. राहुल गांधी का कहना था कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक गणित छिपा हुआ है, जिसे जनता के सामने लाना जरूरी है.

जहां सरकार इसे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और संरचनात्मक बदलाव के तौर पर देख रहा है.

रिजिजू बोले- महिलाओं को उनका हक दिलवा कर रहेंगे

गौरतलब है कि, जिस वक्त वोटिंग हुई उस समय सदन में पीएम मोदी मौजूद रहे. वहीं संसदीय कार्य मंत्री कीरें रिजिजू की भी प्रतिक्रिया इस वोटिंग पर आई है. रिजिजू ने कहा कि, “विपक्ष ने बड़ा मौका गंवा दिया. लेकिन हम देश की महिलाओं को उनका हक दिलवा कर रहेंगे.” वहीं राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया सामने आ गई है. उन्होंने कहा है कि, “इस बिल के जरिए देश के स्ट्रक्चर को बदलने की कोशिश हो रही थी.” उन्होंने इसपर पोस्ट भी डाला है. अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा- ‘भारत ने देखा INDIA ने रोका।

तीनों विधेयकों के बारे में जानिए

केंद्र सरकार जो 3 विधेयक लाई हैं, उसमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता खुलेगा. परिसीमन (संशोधन) विधेयक में परिसीमन आयोग के गठन और नई जनगणना आधारित सीटों का बंटवारा करने का प्रावधान है. तीसरे विधेयक में केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का प्रावधान है.