प्रदेश
संशोधित भूमि गाइडलाइन को लेकर रियल एस्टेट सहित प्रतिनिधिमंडलों में उत्साह : वित्त मंत्री का विभिन्न संगठनों ने किया सम्मान
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूमि की गाइडलाइन दरों के युक्तिकरण एवं सरलीकरण के तहत रायपुर एवं कोरबा जिलों के लिए जारी संशोधित भूमि गाइडलाइन को लेकर रियल एस्टेट क्षेत्र, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं व्यवसायिक संगठनों में उत्साहजनक माहौल है। नई गाइडलाइन को जनहितकारी बताते हुए छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) सहित विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने रायपुर स्थित वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के शासकीय निवास पहुंचकर उनसे सौजन्य मुलाकात की और आभार व्यक्त किया।
क्रेडाई द्वारा 30 जनवरी 2026 से प्रदेश में लागू संशोधित भूमि गाइडलाइन के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का सम्मान किया गया। एसोसिएशन ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर एवं आम नागरिकों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा गाइडलाइन दरों में यथार्थपरक एवं संतुलित संशोधन किया गया है। इससे प्रदेश में मकान, प्लॉट एवं अन्य अचल संपत्तियों के क्रय-विक्रय में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मयंक आहुजा, सचिव विक्रांत डोसी, कोषाध्यक्ष दीपक जैन सहित राज्य सलाहकार समिति के सदस्य हेमंत सेठिया, गुरुदास सत्रे, योगेश बोथरा, विनोद छिपा, मनोज महंती एवं संजय निलांजने उपस्थित रहे।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि नई भूमि गाइडलाइन से जमीन की दरों में संतुलन स्थापित हुआ है, जिससे आम नागरिकों, मध्यम वर्ग, किसानों एवं व्यापारियों को लाभ मिलेगा। विशेष रूप से आवास, व्यवसाय तथा औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यों में अब अधिक सुगमता और स्पष्टता आएगी।
इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आमजन के हितों की रक्षा करते हुए विकास को गति देना है। भूमि गाइडलाइन का निर्धारण व्यापक विचार-विमर्श, स्थानीय परिस्थितियों एवं जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि निवेश को प्रोत्साहन मिले और जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी सभी नीतिगत निर्णयों में जनहित सर्वोपरि रहेगा।
प्रतिनिधिमंडलों एवं एसोसिएशन ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन के इस निर्णय से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी, निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ के समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।
बिलासपुर: हिंदू शौर्य कवि सम्मेलन पर विवाद, 'गैर-हिंदुओं के प्रवेश वर्जित' के एलान पर मचा बवाल
बिलासपुर। शहर में 31 जनवरी को आयोजित होने जा रहे अखिल भारतीय हिंदू शौर्य कवि सम्मेलन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आयोजन के प्रचार-प्रसार के दौरान किए जा रहे अनाउंसमेंट को लेकर सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।
आरोप है कि कार्यक्रम के प्रचार में किए जा रहे अनाउंसमेंट में कहा जा रहा है कि “कार्यक्रम में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है”। इस बयान के सामने आने के बाद इसे संविधान और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ बताते हुए कई सामाजिक संगठनों ने आयोजन पर आपत्ति दर्ज कराई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि सार्वजनिक स्थल पर इस तरह का आयोजन और इस प्रकार की शर्तें समाज में विभाजन और तनाव पैदा कर सकती है। इसके साथ ही पुलिस ग्राउंड जैसे सरकारी परिसर को इस आयोजन के लिए उपलब्ध कराए जाने पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

नियमों के उल्लंघन पर रद्द किया जा सकता है आयोजन : एसएसपी
विवाद बढ़ने के बाद पूरे मामले पर पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया सामने आई है। बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी आयोजनों को नियमानुसार ही अनुमति दी जाती है। अगर किसी भी तरह से नियमों का उल्लंघन हुआ तो आयोजक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आयोजन को रद्द भी किया जा सकता है।
"बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: 16 साल पुराने मामले में सजा निरस्त, मंशा साबित करना अनिवार्य"
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल किसी व्यक्ति की जाति का नाम लेना ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनता, जब तक यह साबित न हो कि ऐसा सार्वजनिक स्थान पर जानबूझकर अपमान और अपदस्थ करने की नीयत से किया गया हो। कोर्ट ने 16 साल पुराने प्रकरण में सत्र न्यायालय द्वारा दी गई सजा को निरस्त करते हुए आरोपी को बरी किया। यह फैसला न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने सुनाया।
बीते 3 सितंबर 2008 को पथरिया स्थित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल सब-स्टेशन में पदस्थ जूनियर इंजीनियर उत्तरा कुमार धृतलहरे ने शिकायत दर्ज कराई थी कि दुर्गा पूजा के लिए 1000 रुपये चंदा मांगे जाने पर इनकार करने पर आरोपी मनोज पांडे ने कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। पुलिस जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा और सत्र न्यायालय ने 28 अगस्त 2010 को आरोपी को एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(10) के तहत दोषी ठहराया था, जबकि सह-आरोपी कृष्णा साहू को उसी साक्ष्य पर बरी कर दिया गया था।
हाईकोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सभी स्वतंत्र गवाह अभियोजन के पक्ष में नहीं आए और उन्हें होस्टाइल घोषित किया गया। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने केवल शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहरा दिया, जो कानूनन उचित नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि जब आईपीसी की सभी धाराओं 451, 384, 294 एवं 506 से आरोपी को बरी कर दिया गया, तब केवल एससी/एसटी एक्ट के तहत दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन यह सिद्ध करने में असफल रहा है कि आरोपी द्वारा कथित रूप से बोले गए शब्द सार्वजनिक स्थान पर शिकायतकर्ता को जानबूझकर अपमानित या भयभीत करने के उद्देश्य से कहे गए हों। केवल जाति का उल्लेख करना बिना अपमान या अपदस्थ करने की मंशा सिद्ध हुए एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जब स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया और स्वयं ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं में अपराध घटित न होना माना, तब एससी/एसटी अधिनियम के तहत दी गई सजा टिकाऊ नहीं है। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय के निर्णय को निरस्त कर आरोपी मनोज पांडे को दोषमुक्त कर दिया है।
14 करोड़ की जीएसटी चोरी : DGGI रायपुर की बड़ी कार्रवाई, विजय लक्ष्मी ट्रेड कंपनी का संचालक संतोष वाधवानी गिरफ्तार
रायपुर। माल एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) रायपुर जोनल यूनिट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संतोष वाधवानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने बेटे के नाम पर पंजीकृत फर्म मेसर्स विजय लक्ष्मी ट्रेड कंपनी का संचालन कर रहा था। उसे 29 जनवरी की शाम लगभग 9 बजे रायपुर से बड़े पैमाने पर कर चोरी के मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया है कि इस मामले में फर्जी इनवॉइस का मूल्य लगभग 80 करोड़ रुपये है और कर चोरी की राशि 14 करोड़ रुपये है। आरोपी द्वारा बिना किसी माल या सेवा की वास्तविक आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाते हुए पाया गया, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हुआ।
विश्वसनीय खुफिया जानकारी और डेटा एनालिटिक्स के आधार पर माल एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) रायपुर जोनल यूनिट के समस्त अधिकारियों ने एक विस्तृत जांच की, जिसमें आपूर्तिकर्ताओं के बैंक स्टेटमेंट और करदाता के ई-वे बिल डेटा और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच करने के बाद, यह निष्कर्ष निकाला गया कि आरोपी फर्जी इनवॉइस के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने में लिप्त था।
पर्याप्त सबूत इकट्ठा करने के बाद, चूंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि 5 करोड़ से अधिक हैं, इसलिए आरोपी को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के प्रावधानों के तहत अधिनियम की धारा 132 के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया गया। संतोष वाधवानी को रायपुर जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और गिरफ्तार व्यक्ति को 30 जनवरी की शाम को रायपुर की सेंट्रल जेल ले जाया गया।
वस्तु एवं सेवा कर डीजीजीआई रायपुर जोनल यूनिट, विभाग कर चोरी और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ अपना अभियान जारी है। जीएसटी कानूनों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। विभाग व्यवसायों से कर नियमों का पालन करने का आग्रह किया है और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी भी दी है। इस मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।
उदंती-सीतानदी में दिखा दुनिया का सबसे तेज़ उड़ने वाला पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन
रायपुर। पेरेग्रीन फाल्कन दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी है, जो शिकार करते समय गोता लगाते हुए अविश्वसनीय गति प्राप्त कर सकता है। यह बाज़ प्रजाति ऊँचाई से शिकार पर झपट्टा मारने में माहिर है और इसे 'आसमान का चीता' भी कहा जाता है। पेरेग्रीन बाज़ तेज़ और बड़े शिकारी पक्षी होते हैं। इनके मज़बूत, नुकीले पीले पंजे इन्हें उड़ते हुए भी दूसरे पक्षियों को पकड़ने में सक्षम बनाते हैं। छत्तीसगढ़ अब दुनिया भर के पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है। अनुकूल जलवायु और समृद्ध जैव विविधता के कारण कई दुर्लभ पक्षी लंबी दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक अत्यंत उत्साहजनक जानकारी सामने आई है। यहां दुनिया के सबसे तेज़ उड़ने वाले पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन (स्थानीय नाम शाहीन बाज) को एक बार फिर देखा गया है।
इस दुर्लभ दृश्य को वन रक्षक ओमप्रकाश राव ने अपने कैमरे में कैद किया है। इससे पूर्व भी इस पक्षी को आमामोरा ओड़ क्षेत्र के पास शेष पगार जलप्रपात के समीप ड्रोन कैमरों में दर्ज किया गया था, जो इस क्षेत्र में इसकी सक्रिय उपस्थिति की पुष्टि करता है। उल्लेखनीय है कि पेरेग्रीन फाल्कन अपनी अद्भुत तेज़ उड़ान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शिकार का पीछा करते समय यह लगभग 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गोता लगा सकता है, जबकि सामान्य उड़ान में इसकी गति करीब 300 किमी प्रति घंटा रहती है। यह छोटे पक्षियों, कबूतरों और तोतों का शिकार करता है। ऊंचाई से तेज़ी से गोता लगाकर सटीक प्रहार करना इसकी सबसे प्रभावी शिकार तकनीक है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी न केवल अपनी गति बल्कि अपनी वफादारी के लिए भी जाना जाता है। ये आमतौर पर अकेले या जोड़े में रहते हैं और अक्सर जीवनभर एक ही साथी चुनते हैं। लगभग 12 से 15 वर्ष के जीवनकाल वाले इस पक्षी का उदंती-सीतानदी के वनों में दिखना यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ का पर्यावरण वन्यजीवों के लिए कितना अनुकूल है। हाल ही में आयोजित बर्ड सर्वे के दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य में भी दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी ऑरेंज ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन तथा ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर देखे गए हैं।
गौरतलब है कि वन मंत्री केदार कश्यप वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं। वन मंत्री के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की पूरी टीम सतत प्रयासों में जुटी है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
वन विभाग की यह उपलब्धि न केवल अभिलेखीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारायणपुर में जवानों के साथ किया रात्रि भोज, बढ़ाया हौसला
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नारायणपुर प्रवास के दौरान आईटीबीटी बटालियन परिसर नारायणपुर में आईटीबीटी, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, बीएसएफ, डीआरजी, सीएएफ़ के जवानों एवं अधिकारियों से मुलाकात और बस्तर की शांति और सुरक्षा के स्थापना में उनके योगदान की सराहना करते हुए सुरक्षा बल के जवानों की हौसला अफजाई की। मुख्यमंत्री श्री साय एवं मत्रीगणों ने बटालियन परिसर में जवानों के साथ रात्रि भोज किया और उनसे आत्मीय चर्चा की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जवानों से चर्चा करते हुए कहा कि नैसर्गिक संसाधनों से और सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण बस्तर के कई इलाकें माओवाद आतंक के चलते विकास की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़े थे। आप सबके अदम्य साहस, शौर्य, पराक्रम के कारण ही यहां शांति और सुरक्षा का वातावरण निर्मित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है। उन्होंने देश की सुरक्षा में सुरक्षा बलों के जवानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में सेवा कर रहे जवानों का मनोबल बनाए रखना हम सबकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने जवानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके कल्याण और सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयासरत है। जवानों ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और इस आत्मीय मुलाकात को प्रेरणादायक बताया।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प को यहां साकार करने का काम पूरी दृढ़ता से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब बम गोलियों की आवाज की जगह अब आमजन की चहल-पहल, स्कूलों में ककहरा की गूंज और गांवों में मांदर की थाप सुनाई दे रही हैं। कार्यक्रम में अतिथियों ने जवानों को उपहार भेंट किए। सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को स्मृति चिह्न भेंट किए।
ज्ञात हो कि नक्सल गतिविधि को नियंत्रण के लिए सुरक्षा कैम्प स्थापित कर केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य के सुरक्षा बलों के दस्तों को तैनात किया गया है।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर महेश कश्यप, लघु वनोपज के अध्यक्ष रूपसाय सलाम सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आई जी सुंदरराज पी, आईटीबीटी, सीआरपीएफ, बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी एवं कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया, केन्द्रीय सुरक्षा बलों के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। आईजी सुंदरराज पी ने कार्यक्रम की रूपरेखा और बस्तर संभाग में शांति के लिए जवानों के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में पुलिस बैंड ने स्वागत में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी।
मावली मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं के संरक्षण के लिए सरकार देगी हरसंभव सहयोग: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारायणपुर के ऐतिहासिक मावली मेला के संरक्षण, संवर्धन एवं उसकी पारंपरिक परंपराओं के निर्वहन के लिए शासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान आज विश्राम भवन में जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों से चर्चा कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मावली मेला जिले की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे पुरातन मेलों और मड़ई की परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए आवश्यक सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के संपूर्ण उन्मूलन के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और साहसिक कार्रवाई के परिणामस्वरूप नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक बस्तर की धरती से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का संकल्प लिया गया है, जो अब साकार होने की दिशा में है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के सर्वांगीण विकास के लिए लगभग सवा लाख करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इसके अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास तथा अधोसंरचना को सुदृढ़ करने का विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि माओवाद के उन्मूलन के साथ-साथ उसकी विचारधारा को समाप्त करना भी आवश्यक है, जिसके लिए सतत संपर्क और सतत विकास की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। शासन का उद्देश्य सुरक्षा के साथ-साथ विकास को समान रूप से आगे बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग में पर्यटन एवं लघु उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि धुड़मारास जैसे ग्रामों ने वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर पहचान बनाई है। क्षेत्र में होम-स्टे को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त कमरे निर्माण हेतु सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी एवं नजूल पट्टा प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है तथा गत वर्ष किए गए वृक्षारोपण से प्रदेश में वनों का रकबा बढ़ा है।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रताप सिंह मण्डावी, छोटेडोंगर सरपंच संध्या पवार, वरिष्ठ नागरिक बृजमोहन देवांगन सहित समाज प्रमुख एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
“VB G RAM G से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प, गांवों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता”: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। खरोरा में भारतीय जनता पार्टी जिला ग्रामीण द्वारा VB G RAM G जनजागरण अभियान के अंतर्गत जिला सम्मेलन एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे “जी राम जी” के उद्देश्य और लाभों को गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचाएं और ग्रामीणों को इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि, कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान जन-जन का अभियान बनेगा।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित गांवों के बिना विकसित भारत की कल्पना संभव नहीं है।
VB G RAM G (ग्रामीण आजीविका एवं रोजगार मिशन) उसी संकल्प का सशक्त प्रमाण है, जो ग्रामीण रोजगार, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, आत्मनिर्भर पंचायत और समृद्ध एवं सशक्त गांव की मजबूत नींव रखेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और स्वावलंबी बनाने की दिशा में लगातार ठोस और ऐतिहासिक कदम उठा रही है, और यह अभियान ग्रामीण भारत के नवयुग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सांसद श्री अग्रवाल ने कहा कि यह देश के इतिहास में पहली बार लाया गया ऐसा कानून है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, रोजगार की गारंटी, भ्रष्टाचार पर रोक और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था सुनिश्चित करता है। इसके तहत ग्रामीणों को 15 दिन के भीतर रोजगार की गारंटी, 100 से बढ़ाकर 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार तथा एक माह में भुगतान नहीं होने की स्थिति में ब्याज सहित भुगतान का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि जहां मनरेगा के अंतर्गत कार्यों की सीमा तय थी, वहीं VB G RAM G के माध्यम से अब गांवों में सड़क, स्कूल भवन, स्वास्थ्य केंद्र, नहर, पंचायत भवन, पेयजल, बिजली सहित सभी प्रकार के विकास कार्य किए जा सकेंगे। ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य तय करने का अधिकार मिलेगा, जिससे गांवों का तेज़ी से विकास होगा, आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा।
सांसद श्री अग्रवाल ने बताया कि VB G RAM G का अर्थ विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण है। यह योजना राम राज्य की भावना के अनुरूप गांवों में न्याय, रोजगार और समृद्धि सुनिश्चित करेगी तथा आजीविका की सुरक्षा की ठोस गारंटी देगी।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को राम नाम से ही नफरत रही है—पहले श्रीराम मंदिर, फिर रामसेतु और अब जी-राम जी का विरोध। कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा को भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया गया था, जिसमें न टिकाऊ निर्माण हुआ और न ही पारदर्शिता रही। VB G RAM G डिजिटल शासन के माध्यम से भ्रष्टाचारमुक्त ग्रामीण विकास सुनिश्चित करेगा।
सांसद श्री अग्रवाल ने कहा कि पहले रोजगार गारंटी योजनाओं के लिए 30 से 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान होता था, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह राशि बढ़कर 60 से 90 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची है। आने वाले समय में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश किए जाएंगे, जिससे गांवों का सर्वांगीण विकास होगा।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज की अवधारणा को सशक्त करते हुए उनके सपनों को साकार करने वाला है। VB G RAM G गांवों के गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण की योजना है और विकसित ग्राम–विकसित भारत के संकल्प को नई गति देगी।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में VB G RAM G विधेयक पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रथम वक्ता के रूप में अपना प्रभावशाली पक्ष रखा था।
कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष श्याम नारंग, संजय ढीढी, अंजय शुक्ला, भाजपा युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नवा रायपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक हुई सम्पन्न
रायपुर। नवा रायपुर में आज हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17 वीं बैठक में परिषद के सदस्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चारों राज्यों में सामाजिक- आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित विषयों के निराकरण और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान मध्य क्षेत्र के इन चारों राज्यों से संबंधित प्रशासनिक, आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों का समाधान निकालने तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में मौजूद अधिकारी चारों राज्यों के नवाचारों और बेस्ट प्रेस्टिसेस से भी रू-ब-रू हुए।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की इस बैठक का विशेष महत्व है क्योंकि इसमें मध्य क्षेत्रीय परिषद की मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है, इसमें लिए गए निर्णय और सिफारिशें परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं। बैठक में परिषद के सदस्य राज्यों के लंबित अंतर्राज्यीय मामलों के समाधान, नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करने तथा विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर किया जाता है।
मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील, केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव शुभा ठाकुर, मध्यप्रदेश की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शामी, उत्तरप्रदेश के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और उत्तराखंड के प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुंधाशु सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी तथा चारों राज्यों के संबंधित विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए।
मुख्य सचिव विकास शील ने मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में कहा कि आज चारों राज्यों एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच राज्य सरकारों और भारत सरकार से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर रचनात्मक और उपयोगी चर्चा हुई है। निरंतर संवाद और अंतर्राज्यीय सहयोग के जरिए मध्य क्षेत्र के राज्यों के साझा हितों को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि आज हुई चर्चा के निष्कर्षों के अनुरूप चारों राज्य तत्काल कार्यवाही प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि चारों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच विचार-विमर्श से आपसी संवाद बेहतर होंगे। केंद्र सरकार एवं मध्य क्षेत्रों के राज्यों की साझा समस्याओं के समाधान के लिए ठोस व व्यावहारिक निर्णय लेने में इससे मदद मिलेगी।
इन मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़े विषयों पर हुई चर्चा
मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ ही केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, आवास और शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, खान मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल जीवन मिशन, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अभिकरण, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, वित्त सेवा विभाग, डाक विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, वाणिज्य विभाग तथा मछली पालन विभाग से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
चारों राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस से रू-ब-रू हुए अधिकारी
मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में अंतर्राज्यीय समन्वय, विकास और सुशासन के साथ-साथ चारों राज्यों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रेक्टिसेस की भी प्रस्तुति हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड एवं उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों के नवाचारों और प्रभावी योजनाओं की जानकारी साझा की।
छत्तीसगढ़ द्वारा वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 की प्रस्तुति दी गई, जिसे जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा लॉन्च किया गया है। यह उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को एकीकृत करता है, जिससे औद्योगिक निवेश, भूमि प्रबंधन, पर्यावरणीय स्वीकृति और सब्सिडी प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा मॉडल के तहत ब्लॉक-चेन आधारित सुरक्षित भूमि अभिलेख प्रणाली और एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की अभिनव पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
मध्यप्रदेश ने ग्रामीण पर्यटन विकास को अपनी प्रमुख बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में प्रस्तुत किया। इसके तहत 125 गांवों में होम-स्टे और स्थानीय संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही ऊर्जा बचत एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति- 2025 के माध्यम से 2030 तक 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने के लक्ष्य तथा पीएम श्री टूरिज्म हेली सर्विस के जरिए पर्यटन एवं क्षेत्रीय संपर्क को सशक्त बनाने की पहल की जानकारी दी गई।
उत्तराखंड द्वारा किसान-से-आईटीबीपी आपूर्ति श्रृंखला योजना के माध्यम से सीमावर्ती किसानों की आय वृद्धि, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARA) द्वारा जल स्रोतों के पुनर्जीवन की पहलों का प्रस्तुतीकरण किया गया। उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने शहरी क्षेत्रों में आवासीय सुधारों की नई पहलों, श्रम न्याय सेतु पोर्टल तथा सेवा मित्र जैसे नवाचारों पर प्रस्तुतिकरण दिया।
कुरुषनार में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बनेगा अतिरिक्त कक्ष, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बालक आश्रम के निरीक्षण के दौरान मौके पर ही दी स्वीकृति
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कुरुषनार स्थित बालक आश्रम पहुंचकर छात्रों से रूबरू हुए आश्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रों की मांग पर यहां अतिरिक्त कक्ष निर्माण की स्वीकृति प्रदान की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यहां उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण किया। इस मौके पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि कहा आप सभी खूब पढ़ाई करें और अपने माता पिता सहित देश प्रदेश का नाम गौरव करें। उन्होंने आश्रम में रहने वाले विद्यार्थी रामजी से कहा की आप पढ़ लिखकर क्या बनना चाहते हैं तब रामजी ने कहा की मैं बड़ा होकर शिक्षक बनना चाहता हूँ। तब मुख्यमंत्री ने उनकी प्रशंसा की और मेहनत से पढ़ाई करने की समझाइश दी। इसी तरह छात्र सोप सिंह ने मुख्यमंत्री को पहाड़ा सुनाया। स्कूली बच्चों से संवाद के दौरान कक्षा दूसरी में पढ़ने वाला आदित्य ने मुख्यमंत्री से पूछा आपको स्कूल जाने में कैसा लगता था? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था। बचपन में पढ़ाई को भरपूर समय दे, बड़ा आदमी बनने के लिए पढ़ाई आवश्यक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता की जानकारी ली और कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री को अंतरिक्ष अभियान के मॉडल की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने मॉडल प्रदर्शित करने वाले सभी विद्यार्थियों को खूब पढ़ाई करने और वैज्ञानिक बनने का प्रयास के लिए बधाई दी।
उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शासकीय कार्यक्रमों की क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत देखने कुरूषनार के शासकीय उचित मूल्य दुकान पहुंचे। उचित मूल्य दुकान में मौजूद राशनकार्डधारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि उन्हें नियमित रूप से समय पर राशन मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने उचित मूल्य दुकान में मौजूद डुटाखार के मेहरो, दशरी, तिलो एवं सुनिता, गुमियाबेड़ा की रजनी बाई एवं अनिता और ग्राम कंदाड़ी की वीणाबाई से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की और उनके परिवार के सदस्यों की जानकारी भी ली। इन सभी ने बताया कि उन्हें हर माह चांवल मिल रहा है और इसकी गुणवत्ता अच्छी है।
मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान उचित मूल्य दुकान में स्टॉक की उपलब्धता, रखरखाव, साफ सफाई, स्टॉक रजिस्टर, भंडारण क्षमता आदि की जानकारी ली। गौरतलब है कि शासकीय उचित मूल्य दुकान से आसपास के 12 गांव आलवर, कंदाड़ी, कुरुषनार, कोडोली (विरान), गुमियबेड़ा, जिवलापदर, अरसगढ़, डुटाखार, कंकाल, जामपारा, कावड़वार और नदीपारा संलग्न है तथा 408 राशन कार्ड धारकों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने नारायणपुर जिले को दी 351 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर के नारायणपुर जिले के दो दिवसीय प्रवास पर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां पर उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर जिलावासियों को अनेक सौगातें दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हाई स्कूल मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में 351 करोड़ 49 लाख 45 हजार रूपए के 357 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लाल आतंक समाप्ति की ओर है, जिससे विकास को गति मिल रही है। माओवाद के कारण यह क्षेत्र लम्बे समय से विकास से अछूता रहा, अब यहां नवाचार हो रहे हैैं।
नारायणपुर के हाई स्कूल मैदान में आयोजित आज अपराह्न में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से प्रदेश सरकार ने माओवाद मुक्त करने के लगातार प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से चलते बस्तर के 400 से अधिक गांवों में विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों के विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में उन्हें कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आजीविका प्राप्त करते हुए आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही बस्तर को विकास के सभी आयामों से जोड़ने यहां पर्यटन विकास, खेती-बाड़ी, पशुपालन जैसे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया। श्री साय ने यह भी कहा कि आदिवासी संस्कृति और पारम्परिक विरासतों को सहेजने व संजोकर रखने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार बस्तर पण्डुम का आयोजन कर रही है। उन्होंने उपस्थित जनों से जनजातीय सभ्यता और धरोहरों की जड़ों से जुड़कर रहने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने की 332 करोड़ के छह निर्माण कार्यों की घोषणा
इस दौरान मुख्यमंत्री ने 06 निर्माण कार्यों की घोषणा की, जिनकी अनुमानित लागत 332 करोड़ रूपए है। इसमें 125 किलोमीटर लम्बे मार्ग नारायणपुर के ओरछा-आदेर-लंका-बेदरे -कुटरूमैमेड जिसकी लागत राशि-250 करोड़ रूपए है। यह नारायणपुर जिले को बीजापुर जिले से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के अंदरूनी क्षेत्र के ईदवाया, एडजुम, आदेर, कुड़मेल, ढोढरीबेड़ा, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका जैसे ग्राम जुड़ते हैं। इसी तरह राजनांदगांव-बैलाडिला मार्ग में सतह मजबूतीकरण कार्य की घोषणा की, इसकी लंबाई 28 कि.मी जो लगभग 34 करोड़ से तैयार होगी। यह नारायणपुर जिले को दंतेवाड़ा जिले में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसी तरह नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर 28 किमी के सतह मजबूतीकरण कार्य, लंबाई 28 कि.मी. की घोषणा (राशि-34 करोड़ 12 लाख) - यह मार्ग जिले को महाराष्ट्र बार्डर तक जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के ब्रेहबेड़ा, कुरूषनार, बासिंग, सोनपुर ग्राम जुड़ते हैं। इसके अलावा ब्रेहबेड़ा (नारायणपुर)-कंदाड़ी-कीहीकाड़-मुरनार-बेचा मार्ग पर घुड़साल नाला पर उच्चस्तरीय सेतुमय पहुंच मार्ग निर्माण कार्य, जिसकी लंबाई 80 मीटर तथा लागत राशि-12 करोड 42 लाख है। साथ ही नारायणपुर जिला अंतर्गत अबुझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों में प्रारंभ किये गए 10 वैकल्पिक प्राथमिक शाला ‘घमण्डी, वाला, जटवर, नेलनार, रोहताड़, हितावाड़ा, मोडनार, तोके, कोडटामरका एवं कोडोली‘ के स्कूल सेटअप एवं भवन, तथा तोके में आश्रम शाला भवन की स्वीकृति की घोषणा की, जो 01 करोड़ 06 लाख रूपए से तैयार होगा। इसी तरह जिले के एज्युकेशन हब, गरांजी मे खेल मैदान की घोषणा की घोषणा की जिसका निर्माण 50 लाख रूपए की लागत से होगा।
कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सशक्त और निर्णायक नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश से सशस्त्र माओवाद के आतंक का पूर्णतः अंत हो जाएगा। नारायणपुर जिला भी शीघ्र ही नक्सल मुक्त होकर शांति, विकास और समृद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से हर गांव, हर टोले को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राजस्व मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले को 351 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी है। उनके नेतृत्व में राज्य सफलता की नित नई उंचाइयों को छू रहा है और हर क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है।
इसके पहले, बस्तर सांसद महेश कश्यप ने संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बस्तर की संस्कृति और विरासत की पूरे विश्व में अलग पहचान है। आज की नई पीढ़ी हमारी सस्कृति और परंपरा को सहेजकर रखने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के 12 विधाओं में जनजातीय संस्कृति के प्रदर्शन के माध्यम से सरकार द्वारा इन परंपराओं को सहेजने और संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक के माध्यम से युवाओं को प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से आदिवासी संस्कृति व परंपरा आगे बढ़ेगी और बस्तर विकास और शांति के पथ पर सतत् आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित माओवादी नव दम्पति को दिया आशीर्वाद
मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आदिवासी व्यंजन, वेशभूषा, आभूषण तथा प्राचीन धरोहरों का अवलोकन कर संरक्षित करने की बात कही। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत माओवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटे 04 जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से आशीर्वाद प्राप्त करने वाले जोड़ों में ग्राम पोदावाड़ा की कमला गोटा तथा ग्राम ऐनमेटा के सुकलाल जुर्री, ग्राम कुर्सींग की सुशीला कोवाची और ग्राम तुषवाल के सन्नी सलाम, ग्राम पूसालामा की रीता कोवाची और इसी ग्राम के मासो मण्डावी तथा ग्राम डूंगा की कोसी मण्डावी एवं इसी ग्राम के अर्जुन सिंह शामिल थे। मुख्यमंत्री ने सभी विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने की बधाई दी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज और नगरीय संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।
सुदूर वनांचलों को मिली कनेक्टिविटी की नई ताकत : मुख्यमंत्री साय ने किया कुरूसनार से बस में यात्रियों के साथ सफर
रायपुर। राज्य के दूरस्थ और सीमांत जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बस सेवा अब नारायणपुर जिले में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिले के प्रवास के दौरान कुरूसनार से लगभग 4 किमी तक ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा की।
मुख्यमंत्री का बस सेवा से सफर करना इस योजना की विश्वसनीयता और जनोन्मुखी सोच को रेखांकित करता है। उन्होंने अपने सह यात्रियों से अब इस नक्सल प्रभावित इलाके में बस सेवा शुरू होने से हुए फायदों के बारे में भी ग्रामीणों से पूछा। मुख्यमंत्री का यह दौरा और बस सेवा से किया जाने वाला सफर नारायणपुर जिले में विकास, विश्वास और सुशासन की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में नारायणपुर जिले में मुख्यमंत्री बस सेवा के अंतर्गत चार बसें संचालित की जा रही हैं, जिनमें से तीन बसें नियद नेल्ला नार मार्गों पर नियमित परिवहन सेवाएं प्रदान कर रही हैं। ये बसें उन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं, जो बीते एक दशक से माओवादी उग्रवाद के कारण सार्वजनिक परिवहन से लगभग वंचित रहे थे।
पहला मार्ग नारायणपुर-नेलंगूर का है, जिसके अंतर्गत डूमरतराई, कुकडाझोर, आंकाबेडा, कस्तूरमेटा, मोहंदी, कोडलियार, कुत्तूल, बेडमाकोटी तथा नेलंगूर ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं। दूसरा मार्ग नारायणपुर-कुतूल का है, जिसमें कच्चापाल, कोडलियार एवं कुतूल के साथ कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, कोहकामेटा और इरकभट्टी ग्रामों को परिवहन सुविधा मिल रही है। तीसरा मार्ग नारायणपुर-गारपा का है, जिससे कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, सोनपुर, मसपुर और होरादी ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं।
यह बस सेवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें संचालन की जिम्मेदारी एक निजी बस ऑपरेटर को सौंपी गई है, जबकि शासन द्वारा मार्ग निर्धारण और निगरानी की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमांत जनजातीय समुदायों को विश्वसनीय, सुलभ और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है।
मुख्यमंत्री ने की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा आज जिला नारायणपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की 68 लाख 39 हजार 592 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 641 करोड़ 34 लाख रुपए की राशि का अंतरण किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने राशि का अंतरण करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना से छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम मिला है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 21 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।
योजना के शुभारंभ से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 14 हजार 954.42 करोड़ रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। यह व्यवस्था वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 24वीं किस्त के रूप में 641.34 करोड़ रुपए की राशि जारी किए जाने के पश्चात महतारी वंदन योजना के अंतर्गत कुल वितरित राशि बढ़कर 15 हजार 595.77 करोड़ रुपए हो जाएगी। यह राज्य सरकार की महिला कल्याण एवं सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि योजना से प्रदेश की लाखों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं। नारायणपुर जिले में महतारी हितग्राहियों की संख्या 27 हजार 272 है। इन हितग्राहियों के खातों में 2 करोड़ 72 लाख 72 हजार रुपए अंतरित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
पीएम आवास निर्माण में बलौदाबाजार अव्वल, वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को पूरा कर छत्तीसगढ़ में हासिल किया प्रथम स्थान
रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक आवास योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बेघर नागरिकों को पक्का मकान प्रदान करना है।इस योजना के तहत कच्चे मकानों में रहने वाले या बिना छत वाले परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
बलौदाबाजार- भाटापारा जिले की उपलब्धियों की फेहरिश्त में एक और कामयाबी शुमार हो गया है। जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बलौदाबाजार -भाटापारा जिला पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम स्थान पर है।
बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत के नेतृत्व में जिले ने न केवल आवासों की स्वीकृति में तेजी दिखाई है, बल्कि धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करने में भी रिकॉर्ड कायम किया है।
वर्ष 2025-26 में कुल 26843 आवास स्वीकृत किया है जिसमें 24 हजार 313 आवासों को प्रथम किश्त जारी, 20 हजार 480 आवास का निर्माण प्रारम्भ हो गया है और 15 हज़ार 120 आवास प्लिंथ स्तर तक पूर्ण हो गया है।
सर्वाधिक प्लिंथ निर्माण -
बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में 15 हजार 120 आवासों का प्लिंथ स्तर तक का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो राज्य के किसी भी जिले की तुलना में सर्वाधिक है।26 हजार 439 आवासों का एफटीओ किया जा चुका है जिसमें से 24 हजार 313 हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त का सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया जा चुका है।
कुल स्वीकृत आवासों में से 20 हजार 480 मकानों पर काम शुरू हो जाना एवं 139 आवास पूर्ण प्रशासन की मुस्तैदी और ग्रामीणों के उत्साह को दिखाता है। पीएम जनमन योजना अंतर्गत भी जिला में प्राथमिकता से कार्य कराके 25 पात्र हितग्राहियों का आवास स्वीकृत कर सभी का शतप्रतिशत आवास पूर्ण करा लिया गया है।
रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण
जिले को जल संचयन में देश मे द्वितीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ है जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राहियों का विशेष योगदान रहा है। आवास योजनान्तर्गत पूर्ण आवासो में 15 हजार 260 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण कराया गया है।
इस उपलब्धि से जिले के हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। यह न केवल ग्रामीण विकास को गति दे रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।
PWD की लापरवाही: आरंग-घूमराभाठा मार्ग निर्माण में नियमों की अनदेखी, पहली बारिश में ही धंसने का खतरा
आरंग। प्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) इन दिनों कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगातार विवादों के घेरे में हैं. ताजा मामला आरंग ब्लॉक का है, जहां 6.32 करोड़ रुपए की लागत से बन रही आरंग-घूमराभाठा सड़क के निर्माण में गंभीर अनियमितता का आरोप लग रहा है.
जानकारों का कहना है कि यह सड़क बनने के साथ ही उखड़ने की कगार पर पहुँच सकती है. सड़क निर्माण के तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार बिना पुरानी सड़क को उखाड़े उसी के ऊपर मुरूम डालकर बेस तैयार कर रहा है. विशेषज्ञों की मानें तो पुरानी डामर वाली सतह को बिना ‘स्कारिफाई’ (उखाड़े) किए नया बेस तैयार करने से सड़क की पकड़ मजबूत नहीं होती और पहली बारिश में ही सड़क धंसने का खतरा रहता है.

यही नहीं निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही मुरूम की गुणवत्ता इतनी खराब है कि ग्रामीण इसे ‘धूल और मिट्टी का मेल’ बता रहे हैं. इतना ही नहीं, कार्य योजना के अनुसार मार्ग में 10 नई पुलिया का निर्माण होना है, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार पुरानी पुलियाओं को ही लीपा-पोती कर नया रूप देने की कोशिश कर रहा है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है.
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नहर से किसानों के खेतों तक जाने वाली आपासी नालियों (Irrigation Channels) को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है. इससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो सकता है, लेकिन विभाग इस ओर आंखें मूंदे बैठा है.

जिम्मेदार अधिकारी मौन, फोन उठाने से बच रहे
जब इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सत्येंद्र साहू और उप अभियंता टीआर साहू ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा. अधिकारियों की यह चुप्पी से सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारियों के संरक्षण में ही गुणवत्ता से समझौता हो रहा है? क्या 6.32 करोड़ की राशि केवल कागजों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी?
बस्तर की संस्कृति के रंग में रंगे मुख्यमंत्री साय: गढ़बेंगाल घोटुल में चखा पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान आज ‘गढ़बेंगाल घोटुल‘ पहुंचकर बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस मौके पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री श्री साय स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और बस्तर की विभूतियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि घोटुल प्राचीन काल से ही आदिवासी समाज के लिए शैक्षणिक एवं संस्कार केंद्र रहा है। चेंद्रु पार्क के समीप स्थित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था से परिचित कराने का सशक्त माध्यम बनेगा। गढ़बेंगाल का यह घोटुल हमारी गौरवशाली विरासत को सहेजने का प्रतीक है। हमारी सरकार बस्तर की इस अनूठी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने घोटुल परिसर के लेय्योर एवं लेयोस्क कुरमा: युवाओं और युवतियों के लिए निर्मित कक्षों के साथ ही बिडार कुरमा: पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र एवं सांस्कृतिक सामग्रियों का संग्रह का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों की आग्रह पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सगा कुरमा में बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर क्षेत्र की खान-पान संस्कृति का सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के भोजन में विशेष रूप से भोजन गाटो-भात, कोदो-भात, उड़िद दार, हिरुवा दार, जीरा भाजी, कनकी पेज, भाजी घिरोल फुल, चाटी भाजी, कांदा भाजी, मुनगा भाजी, इमली आमट, मड़िया पेज, टमाटर चटनी, चिला रोटी, रागी कुरमा, रागी केक, रागी लट्टू, रागी जलेबी परोसा गया।
इस दौरान वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, पद्मश्री पंडीराम मंडावी, लोककलाकार बुटलू राम, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि संध्या पवार ने साथ बैठकर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया।
बस्तर की विभूतियों से आत्मीय भेंट
मुख्यमंत्री ने इस प्रवास को केवल एक औपचारिक दौरा न रखते हुए इसे एक आत्मीय मिलन का रूप दिया। क्षेत्र की महान प्रतिभाओं - वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, पद्मश्री पंडीराम मंडावी और सुप्रसिद्ध लोक-कलाकार बुटलू राम से भेंट कर उनका सम्मान किया। उन्होंने टाइगर ब्वॉय चेंदरू के परिवारजनो से भी मुलाकात की।
इको-फ्रेंडली घोटुल :
वन विभाग और पद्मश्री पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित यह घोटुल पूर्णतः इको-फ्रेंडली (लकड़ी, मिट्टी और बांस) सामग्री से बना है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, जिसे स्वयं पद्मश्री पंडीराम मंडावी ने उकेरा है। जिसमें नक्काशी, सांस्कृतिक जुड़ाव, विरासत का संरक्षण का प्रभावी प्रयास किया गया है।
जमीन की नई गाइडलाइन दर जारी, शहरी के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों की दर में भारी कमी, जानिए अपने क्षेत्र की दरें…
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की नई संशोधित गाइडलाइन दर जारी हो गई है. राज्य की जिला मूल्यांकन समितियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर जमीन की नई गाइडलाइन दरों को मंजूरी देने के साथ प्रकाशित कर दिया गया है. नई गाइडलाइन में शहरी के मुकबाले ग्रामीण क्षेत्रों की दर में भारी कमी आई है. नई संशोधित गाइडलाइन दरें 30 जनवरी 2026 से प्रभावशील हो गई हैं.
यहां देखें नई गाइडलाइन दरें –
























































































