फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट सख्त, सत्यापन समिति को जल्द फैसला करने के निर्देश
बिलासपुर। मध्यप्रदेश आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के जाति प्रमाण पत्र की जांच में हो रही देरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिलासपुर जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति को निर्देश दिया है कि वह मामले का जल्द से जल्द निपटारा करे और कानून के अनुसार निर्णय ले।
यह मामला भोपाल निवासी प्रभात पांडे द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश के अतिरिक्त आबकारी आयुक्त राजेश हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है। इस संबंध में 22 जून 2024 को शिकायत भी की गई थी, लेकिन लंबे समय से यह मामला बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति के पास लंबित है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सत्यापन में हो रही देरी से जांच का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। साथ ही मांग की गई कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को आरक्षण का लाभ न दिया जाए और यदि प्रमाण पत्र गलत पाया जाता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि जब कोई मामला सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित हो, तो उसे उचित समय-सीमा में निपटाना आवश्यक है। कोर्ट ने इस देरी पर असंतोष जताते हुए समिति को निर्देश दिया कि वह सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देते हुए जल्द निर्णय सुनिश्चित करे।हाईकोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और विधि के अनुरूप होनी चाहिए। अंतिम आदेश पारित करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।