रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 और 48 घंटों के लिए भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट घोषित किया है।
बिलासपुर और बस्तर संभाग के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, प्रदेश में अब तक मौसमी वर्षा सामान्य से 46 प्रतिशत कम रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई जिलों में झमाझम बारिश होने की संभावना है।
अगले 24 घंटे के लिए जारी रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट
रेड अलर्ट वाले जिले
मौसम विभाग ने रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, बेमेतरा, महासमुंद, बालोद, धमतरी, गरियाबंद और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में एक-दो स्थानों पर बहुत भारी से अत्यंत भारी वर्षा की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।
ऑरेंज अलर्ट वाले जिले
कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा तथा बिलासपुर संभाग के अन्य जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
येलो अलर्ट वाले जिले
सुकमा, बीजापुर और जशपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।
अगले 48 घंटे के लिए जारी अलर्ट
रेड अलर्ट
अगले 48 घंटों के दौरान कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और मुंगेली जिलों में बहुत भारी से अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है।
ऑरेंज अलर्ट
बिलासपुर, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद, नारायणपुर, बीजापुर, कोरबा, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया और कांकेर जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
येलो अलर्ट
रायपुर, बलरामपुर, सरगुजा और सूरजपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है।
संभावित प्रभाव और सावधानियां
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़कें फिसलनभरी हो सकती हैं। जलभराव के चलते प्रमुख शहरों में यातायात प्रभावित होने और यात्रा का समय बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा दृश्यता कम होने, निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने, नहरों पर बने निचले पुलों को बंद करने तथा खेतों में जलभराव होने की आशंका भी जताई गई है।
रायपुर। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष रामकिशुन सिंह ने किया।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में विगत 4 जून को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष आयोजन किया गया।
पैनल चर्चा में विकसित भारत-2047 के लिए सहकारिता क्षेत्र से अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों की भूमिका, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिला सशक्तिकरण में दुग्ध सहकारी संस्थाओं के योगदान, ग्रामीण रोजगार सृजन में मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका तथा नाबार्ड, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक श्री नाग, अपर आयुक्त सावित्री भगत, उपायुक्त किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त बसंत कुमार, मुकेश ध्रुव, श्री तिग्गा, श्री बुनकर, गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों, लघु वनोपज संघ, दुग्ध महासंघ, सहकारी शक्कर कारखानों, एनसीडीसी तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।
दुर्ग। पद्म विभूषण और पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई रविवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गई. उनके गृहग्राम गनियारी स्थित मुक्तिधाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.
अंतिम संस्कार के दौरान लोक कलाकारों, शिष्यों और उपस्थित जनसमूह ने “चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गीत गाकर अपनी प्रिय लोकगायिका को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. पूरा वातावरण गमगीन हो गया और हर आंख नम नजर आई. डॉ. तीजन बाई को उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी. इस दौरान उनके पति तुलसी राम देशमुख भी मौजूद रहे. बताया गया कि तीजन बाई की अंतिम इच्छा थी कि वे सुहागिन के रूप में ही इस दुनिया से विदा लें.
अंतिम दर्शन के लिए राजनीति और कला जगत की कई हस्तियां पहुंचीं. इनमें पद्मश्री उषा बारले, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत अनेक जनप्रतिनिधि, कलाकार और उनके शिष्य शामिल रहे. सभी ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर छत्तीसगढ़ की इस महान लोक कलाकार को अंतिम प्रणाम किया.
डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा. साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने बचपन से ही पंडवानी के प्रति अपने जुनून और समर्पण के दम पर देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई. अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. उनके निधन से लोक संस्कृति जगत को ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई करना कठिन माना जा रहा है.
भोपाल। खनिज संपदा और निवेश से प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत मिशन को मध्यप्रदेश नई गति दे रहा है। बैतूल से आलीराजपुर तक ग्रेफाइट के भण्डार, प्रदेश देश का क्रिटिकल मिनरल हब बन रहा। उच्च गुणवत्ता वाले खनिज और आधुनिक खनन नीतियों से औद्योगिक विकास को नई गति मिली है। ईवी बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पूरा होगा।
देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- खनिज संपदा की प्रचुरता और निवेश अनुकूल नीतियों से मध्यप्रदेश देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बैतूल से आलीराजपुर तक फैले खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिले है। प्रदेश देश के उभरते ‘क्रिटिकल मिनरल हब’ के रूप में तेजी से मध्यप्रदेश विकसित हो रहा है। इस बेल्ट में हाई फिक्स्ड कार्बन और उत्कृष्ट फ्लेकी गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट पाया गया है।
भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र
इसे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह खोज मध्यप्रदेश को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने के साथ देश को हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन क्षेत्रों से प्राप्त ग्रेफाइट में उच्च स्थिर कार्बन की मात्रा होने के कारण यह इलेक्ट्रोड निर्माण, बैटरी उद्योग तथा अन्य उच्च तकनीकी औद्योगिक उपयोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है.
गरियाबंद। बगनई नदी के आए बाढ़ से निर्माणाधीन पुल में काम करने वाले मजदूर फंस गए. जानकारी मिलने पर एनडीआरएफ और पुलिस बल ने फंसे हुए 14 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला. इन मजदूरों ने सुरक्षित बाहर निकाले जाने तक पेड़ का सहारा लेकर अपनी जान बचाई. रेस्क्यू के दरम्यान कलेक्टर-एसपी समेत जिले का प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद था.
विकासखंड छुरा के अंतिम वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम बीजापाल में बगनई नदी पर निर्माणाधीन पुल के कार्य में लगे 14 मजदूर में नदी में अचानक आए तेज बहाव के कारण फंस गए. लगातार हुई बारिश से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे मजदूरों को अपनी जान बचाने के लिए नदी किनारे मौजूद एक पेड़ का सहारा लिया. सभी मजदूरों ने पूरी रात पेड़ पर ही बिताई और सुबह तक राहत एवं बचाव दल के पहुंचने का इंतजार किया.
फंसे हुए मजदूरों में 10 पुरुष एवं 4 महिलाएं शामिल थीं. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ, लेकिन नदी का बहाव तेज होने की वजह से रात के समय उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना संभव नहीं था. इसलिए सुबह होते ही बचाव अभियान शुरू किया गया.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गरियाबंद जिला प्रशासन और महासमुंद जिला प्रशासन ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया. महासमुंद से पहुंची विशेष रेस्क्यू टीम ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से काफी मशक्कत के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. समय रहते राहत कार्य शुरू होने से एक बड़ी अनहोनी टल गई.
रेस्क्यू अभियान के दौरान गरियाबंद कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, थाना प्रभारी तथा ग्राम पंचायत के सरपंच सहित प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद रहा. अधिकारियों ने लगातार स्थिति की निगरानी करते हुए बचाव दल को आवश्यक निर्देश दिए.
स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन और रेस्क्यू टीम के प्रयासों की सराहना की. सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली. क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से प्रदेश के कई जिलों में लगातार भारी से अतिभारी बारिश हो रही है। बस्तर संभाग के बड़े बचेली समेत कई इलाकों में पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। मौसम में आए इस बदलाव से जहां किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं दूसरी ओर राजधानी रायपुर समेत कई शहरों में जलभराव ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी है।
भारी बारिश से प्रदेश के कई जिलों में हालात बदले
प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। लगातार बारिश से जलाशयों और नदियों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है।
किसानों के लिए राहत की बारिश
जून महीने में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान चिंतित थे। कई किसानों ने धान की बुआई कर दी थी, जबकि कुछ क्षेत्रों में रोपाई की तैयारी चल रही थी। बारिश नहीं होने से बीज खराब होने और फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।
अब व्यापक बारिश होने से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है। इससे धान की बुआई और रोपाई का कार्य तेज हो गया है। किसानों का कहना है कि समय पर हुई बारिश से खेती को नई उम्मीद मिली है।
पहली ही तेज बारिश में डूबीं सड़कें
बारिश ने राजधानी रायपुर में नगर निगम की तैयारियों की भी पोल खोल दी। मुख्य मार्गों से लेकर कई कॉलोनियों तक जलभराव की स्थिति बन गई। नालियां जाम होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सबसे ज्यादा परेशानी नर्मदापारा-गुढ़ियारी अंडरब्रिज में देखने को मिली, जहां पानी भरने से दोनों ओर वाहनों की आवाजाही काफी देर तक बंद रही।
ड्रेनेज सिस्टम फिर हुआ फेल
नगर निगम ने मानसून से पहले बड़े नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पूरी होने का दावा किया था, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धराशायी हो गए।
प्रोफेसर कॉलोनी, समता कॉलोनी, वीआईपी रोड सहित कई इलाकों में अधूरे नाला निर्माण और जाम ड्रेनेज के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी। हालांकि बारिश थमने के कुछ समय बाद पानी उतर गया, लेकिन सड़कों पर कीचड़ और गंदगी फैल गई।
आगे भी बारिश का दौर जारी रहने के आसार
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), नवा रायपुर में आयोजित 'चिंतन शिविर 3.0' के दूसरे दिन 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान से जुड़कर पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरित एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण अभियानों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को देश-विदेश में स्थान दिलाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन पर उनके गांव गनियारी से लेकर दिल्ली तक शोक की लहर है. उनके निधन पर राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ तमाम दिग्गज नेताओं ने उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है.
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया. उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में विशिष्ट पहचान दिलाई. उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दिग्गज पंडवानी गायिका के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. अपनी अद्वितीय प्रतिक्षा और समर्पण से उन्होंने पंडवानी लोककला को विशिष्ट पहचान दिलाई. छत्तीसगढ़ की इस लोककला के संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि लोक कलाओं के क्षेत्र में अपनी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाली लोकप्रिय पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है. छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पंडवानी गायिका के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन अत्यंत दुखद है. उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिक्षा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा पंडवानी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.
इन नेताओं के अलावा देश-प्रदेश के तमाम दिग्गज नेताओं ने पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी के संरक्षण और संवर्धन में उनकी भूमिका की सराहना की है. इसके साथ उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ्यास के साथ की। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) नवा रायपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित विशेष योग सत्र में उन्होंने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि नियमित योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन और प्रभावी निर्णय क्षमता के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से चिंतन शिविर के दौरान दिन की शुरुआत योग से की गई, ताकि सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास के इस सामूहिक आयोजन से चिंतन शिविर 3.0 में सकारात्मक ऊर्जा के साथ अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश को नई दिशा मिलेगी।
योग सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव तथा आईआईएम रायपुर के अधिकारी भी उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाली पंडवानी की महान कलाकार और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। 70 वर्ष की उम्र में उन्होंने रायपुर एम्स में रात 3:15 बजे अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रही तीजन बाई के निधन से लोक कला जगत ने अपनी सबसे बुलंद आवाज खो दी है। उनके जाने से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में शोक की लहर है।
गांव की बेटी बनी दुनिया की पहचान
भिलाई के गनियारी गांव से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने वाली तीजन बाई ने अपने अद्भुत गायन से पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जिस जीवंत अंदाज में वे मंच पर प्रस्तुत करती थीं, उसने देश-विदेश के लाखों लोगों को भारतीय लोक परंपरा से जोड़ा। उनकी कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत विरासत थी।
जब मंच पर उतरती थीं, तो जीवंत हो उठता था महाभारत
हाथ में तंबूरा, दमदार आवाज और अभिनय से भरपूर प्रस्तुति… यही थी तीजन बाई की पहचान। उनकी पंडवानी सुनने वाले खुद को महाभारत के युद्ध, पात्रों और घटनाओं के बीच महसूस करते थे। उनकी शैली ने लोकगायन को आधुनिक मंचों तक पहुंचाया और नई पीढ़ी को भी इस परंपरा से जोड़ दिया।
समाज के विरोध को बनाया अपनी ताकत
24 अप्रैल 1956 को जन्मीं तीजन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। पारधी समाज से आने वाली तीजन बाई को एक समय पंडवानी गाने के कारण समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कला को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और विरोध को अपनी ताकत में बदल दिया।
महिलाओं के लिए बदली पंडवानी की परंपरा
उस दौर में महिलाएं बैठकर पंडवानी गाती थीं, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ा। उन्होंने पुरुष कलाकारों की तरह खड़े होकर कापालिक शैली में प्रस्तुति देना शुरू किया और इतिहास रच दिया। उनकी यह पहल भारतीय लोक कला में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई।
नाना से मिली सीख, दुनिया ने किया सम्मान
बचपन में नाना ब्रजलाल से महाभारत की कहानियां सुनते-सुनते उनमें पंडवानी के प्रति प्रेम जागा। बाद में लोकगायक उमेद सिंह देशमुख से प्रशिक्षण लिया और महज 13 साल की उम्र में पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी। शिक्षा के अवसर सीमित रहे, लेकिन कला ने उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया। कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट की उपाधियां प्रदान कीं।
सम्मानों से भरा रहा सफर
डॉ. तीजन बाई को भारतीय लोक संस्कृति में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्होंने दशकों तक भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हुए दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुति दी।
एक युग का अंत, लेकिन विरासत अमर रहेगी
डॉ. तीजन बाई भले ही इस दुनिया से विदा हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज, उनका संघर्ष और उनकी कला हमेशा जीवित रहेगी। उन्होंने पंडवानी को केवल मंच तक नहीं पहुंचाया, बल्कि उसे विश्व संस्कृति का हिस्सा बना दिया। आने वाली पीढ़ियां उन्हें भारतीय लोक कला की सबसे बड़ी प्रेरणा के रूप में हमेशा याद रखेंगी।
रायपुर। सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को दंतेवाड़ा जिले के संयुक्त कलेक्टरेट भवन के सभाकक्ष में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक चैतराम अटामी थे। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
विधायक श्री अटामी ने कहा कि सहकारिता की भावना ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की मजबूत नींव है। उन्होंने किसानों से खेती के इस महत्वपूर्ण मौसम में आपसी सहयोग से रोपाई और अन्य कृषि कार्य समय पर पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की कमी की समस्या दूर होगी और खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा।
जल संरक्षण और जैविक खेती पर दिया जोर
विधायक श्री अटामी ने किसानों को वर्षा जल संरक्षण के लिए डबरी और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण करने की सलाह दी। उन्होंने अनुभवी किसानों के मार्गदर्शन में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक और प्राकृतिक खेती से उत्पादन बढ़ने के साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है।
शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए, ताकि खेती लाभकारी बने और उनकी आय में वृद्धि हो।
खेती के साथ पौधरोपण का भी दिया संदेश
विधायक श्री अटामी ने किसानों से खेतों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पौधरोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील की।
किसानों को योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की दी गई जानकारी
संगोष्ठी में कृषि, पशुधन विकास, मत्स्य, उद्यानिकी तथा सहकारिता विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा सहकारिता से जुड़ी शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विधायक चैतराम अटामी ने छह किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं और सहकारी गतिविधियों की जानकारी भी प्रदान की।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के उप संचालक सूरज पंसारी, पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. योगेश मिश्रा, मत्स्य विभाग के सहायक संचालक योगेश देवांगन, उद्यानिकी विभाग के उद्यान अधीक्षक प्यारे लाल जुरी, प्रगतिशील जैविक कृषक सुरेश कुमार नाग, कृषक संघ के अध्यक्ष मधुसूदन ठाकुर, सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त गौतम ठाकुर, सहकारिता विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
रायपुर। चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने "इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़" विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।
कृषि विषयक सत्र "कृषि से समृद्धि" में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।
रायपुर। प्रदेश में मानसून की सक्रियता के साथ ही ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से हो रही अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से भर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ कृषि और आजीविका गतिविधियों को भी नई मजबूती मिल रही है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत विकसित 700 से अधिक सामुदायिक तालाब भी पानी से लबालब भरने लगे हैं। इन जल संरचनाओं से मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।
राज्य सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के अंतर्गत भी ऐसे कार्यों को और गति दे रही है। योजना में कुल 318 कार्य अनुमोदित किए गए हैं, जिनमें से 108 कार्य सीधे जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से संबंधित हैं। इन कार्यों से वर्षा जल के अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
मोर गांव–मोर पानी’ अभियान प्रारंभ होने के पश्चात प्रदेश में एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। मानसून की शुरुआत के साथ इन संरचनाओं में पानी भरने से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार, कृषि और आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावी परिणाम दे रहा है। आने वाले समय में इन प्रयासों का और विस्तार करते हुए प्रदेश में जल सुरक्षा तथा ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान की जाएगी।
रायपुर। ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर आय और आत्मनिर्भर जीवन का आधार देने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ने गांवों में नई उम्मीद जगाई है। रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन किए जाने और मजदूरी दर में वृद्धि से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। मुंगेली जिले के ग्राम लिम्हा की निवासी गोमती साहू ने इस योजना को ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बतया। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण परिवारों को वर्ष में केवल 100 दिनों का रोजगार मिलता था, जिससे कई बार आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। अब योजना के तहत 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की गारंटी मिलने से परिवार की आय बढ़ेगी और घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
गोमती साहू ने कहा कि बढ़ी हुई मजदूरी से बच्चों की शिक्षा, परिवार की दैनिक जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में काफी सुविधा होगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि गांव में ही अधिक दिनों तक रोजगार उपलब्ध होने से अब रोजगार की तलाश में बाहर पलायन करने की आवश्यकता भी कम होगी। यह मिशन केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के समग्र विकास की मजबूत नींव भी रखेगा। योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी। गोमती साहू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय ग्रामीण परिवारों के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आय में वृद्धि होगी और गांवों के विकास को नई गति मिलेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा दिव्यांग बच्चों के विकास, शिक्षा, अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज शनिवार 4 जुलाई 2026 को विमतारा भवन रायपुर में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के अध्यक्ष एवं रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक तथा दिव्यांग बच्चों के हित में कार्य करने वाले संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम शामिल हुए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यह संगोष्ठी आयोजित की गई है, ताकि इस बात पर चर्चा हो सके कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा कैसी हो, उन्हें किस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए और उनकी विशेष क्षमताओं को कैसे आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विकलांग” शब्द के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द दिया है। इसका अर्थ यही है कि जिन बच्चों के शरीर में किसी प्रकार की कमी है, उनमें ईश्वर ने कोई न कोई विशेष क्षमता भी दी है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी उस विशेष योग्यता को पहचानकर उसे प्रोत्साहित किया जाए। उन्हें हमारी सहानुभूति से अधिक हमारे सहयोग और प्रोत्साहन की जरूरत है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि बाल कल्याण परिषद इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सेंट्रल इंडिया में यह ऐसा महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के दिव्यांग बच्चों को बेहद कम खर्च में उपचार, प्रशिक्षण और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिस उपचार के लिए निजी अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों रुपये खर्च होते हैं, वही सुविधाएं यहां बहुत कम शुल्क में उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस केंद्र को समाज और शासन दोनों का अधिक से अधिक सहयोग मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज भी छत्तीसगढ़ में दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल शिक्षा और विशेष रूप से उच्च शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यदि हम इन बच्चों को उचित शिक्षा और अवसर देंगे तो केवल उनके जीवन में ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में खुशहाली आएगी।
सांसद श्री अग्रवाल ने नवजात एवं छोटे बच्चों की समय पर स्क्रीनिंग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि अक्सर माता-पिता को तीन-चार वर्ष बाद पता चलता है कि बच्चा सुन नहीं पा रहा है, बोल नहीं पा रहा है या किसी अन्य प्रकार की दिव्यांगता से ग्रसित है। यदि दो वर्ष की आयु से पहले ही आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग हो जाए तो समय रहते उपचार संभव है और कई प्रकार की दिव्यांगताओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो बच्चा सुन नहीं पाता, उसे सुनने योग्य बनाया जा सकता है, जो बोल नहीं पाता, उसे बोलने योग्य बनाया जा सकता है और जो चल नहीं पाता, उसे चलने योग्य बनाने का प्रयास समय रहते किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में आधुनिक स्क्रीनिंग उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रभावी रेफरल प्रणाली तथा पुनर्वास सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि इस दिशा में गंभीरता से कार्य किया जाए तो यह समाज और देश की बहुत बड़ी सेवा होगी।
श्री अग्रवाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को लेकर पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन अभी भी आवश्यक है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाली राशि का एक हिस्सा दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर अनिवार्य रूप से खर्च होना चाहिए तथा प्रत्येक विद्यालय में उनके लिए समुचित शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी विशेष शिक्षकों की उपलब्धता पर जोर दे चुका है, लेकिन छत्तीसगढ़ में आज भी बड़ी संख्या में स्पेशल एजुकेटर्स की आवश्यकता है। इस दिशा में बाल कल्याण परिषद सहित सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर सरकार के समक्ष ठोस सुझाव रखने चाहिए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा कैसे उपलब्ध कराई जाए, इस विषय पर आयोजित यह सार्थक संगोष्ठी छत्तीसगढ़ के दिव्यांग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम के दौरान परिषद के महासचिव चंद्रेश शाह ने बताया कि सेमिनार में दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास, समावेशी शिक्षा, पुनर्वास और उनके अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत दिव्यांग बच्चों के लिए निर्धारित मानकों, अवसरों और योजनाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि हमें गर्व स्पर्शी नहीं, मर्म स्पर्शी कार्य करना है। मैंने प्रण लिया था और दृष्टांत अनुभव बाल कल्याण परिषद में दिखती है। यह बच्चे हमारे दिव्यपुष्प है और इन बच्चों को सहेजने का कार्य कर रही है यह संस्था।
हमें मेरा बच्चा या इसका बच्चा जैसी सोच से ऊपर से उठकर यह देखना है कि हम भारतवासी है, जहाँ यशोदा मैया जैसी माता हुई है जिन्होंने कान्हा जी जैसे नटखट बच्चे के पालन पोषण करते वक्त भी यह नहीं देखा कि वो दूसरे का बच्चा है।
महासचिव चंद्रेश शाह ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के अधिकारों और उनके विकास से जुड़े मुद्दों पर समाज में जागरूकता बढ़ाना तथा विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद स्थापित करना है, ताकि बच्चों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
इस दौरान डॉ. कमल वर्मा ने कहा कि डाउन सिंड्रोम जैसी स्थितियों की पहचान गर्भावस्था के दौरान जांच के माध्यम से संभव है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और सुविधाओं की कमी के कारण कई मामलों का समय पर पता नहीं चल पाता। उन्होंने मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की जांच को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने जन्म के बाद छह माह के भीतर बच्चों में संभावित दिव्यांगता की जांच को अनिवार्य किए जाने की मांग भी उठाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान, उचित उपचार और पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से दिव्यांग बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
सेमिनार में इग्नू के डॉ. आलोक उपाध्याय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के योगेंद्र पांडे, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सज्जाद नकवी, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता सुगंधा जैन और डाइटिशियन डॉ. सारिका श्रीवास्तव विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने बच्चों की देखभाल और उनसे संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तूता गांव में अतिक्रमण हटाने को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही खबरों के बीच नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में वहां विस्थापन की कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। प्राप्त शिकायतों के आधार पर अभी केवल नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
प्राधिकरण के अनुसार, ग्राम तूता में अतिक्रमण संबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर विधिवत निरीक्षण कराया गया और उसके बाद संबंधित पक्षों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया।
NRDA ने बताया कि 2 जुलाई को ग्राम के प्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की। बैठक में यह सहमति बनी कि गांव में सभी पक्षों की बैठक आयोजित कर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद पुनः प्राधिकरण के अधिकारियों से चर्चा कर लोकहित में समाधान निकाला जाएगा।
प्राधिकरण ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से भी समय-समय पर गांव के विभिन्न स्थानों से अतिक्रमण हटाने के संबंध में पत्र दिए जाते रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित लोगों को प्राथमिक कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
प्राधिकरण ने कहा है कि उसका उद्देश्य किसी के साथ अन्याय करना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार सार्वजनिक हित में कार्य करना है। आगे का हर निर्णय नियमों के अनुरूप और पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाएगा, ताकि विकास कार्य भी प्रभावित न हों और सभी पक्षों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।
भोपाल। छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी मदरसा बोर्ड को बंद करने की मांग तेजी से उठने लगी है। इस मुद्दे को लेकर हिंदू धर्मगुरुओं, मुस्लिम संगठनों, कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानों का दौर शुरू हो चुका है, जिससे प्रदेश का सियासी पारा गरमा गया है। हाल ही में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर मदरसा बोर्ड को खत्म करने और उसकी जगह ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ बनाने की मांग की थी। सलीम राज का तर्क है कि मदरसों में मुस्लिम बच्चों को आधुनिक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। छत्तीसगढ़ से उठी यह चिंगारी अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है।
मदरसों में दी जा रही आतंकी शिक्षा
हिंदू धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने छत्तीसगढ़ के फैसले का समर्थन करते हुए मध्य प्रदेश में भी मदरसा बोर्ड को तुरंत बंद करने की मांग की है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा- “मदरसों में आतंकवादी शिक्षा दी जा रही है, इसलिए सारे मदरसा बोर्ड बंद होने चाहिए। अगर आपको कुछ करना है तो मुख्यधारा की शिक्षा पद्धति से जुड़िए। मदरसा बोर्ड को आतंकवादी शिक्षा का केंद्र मत बनाइए।”
सलीम राज की हो जांच, क्या यह RSS का एजेंडा है
अनिलानंद महाराज और सलीम राज के बयानों पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार संरक्षक शमशुल हसन बल्ली ने बेहद सख्त आपत्ति जताई है। उन्होंने सलीम राज की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा- सलीम राज किसके इशारे पर काम कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। क्या वे संघ (RSS) से जुड़े हैं? संवैधानिक पद पर बैठकर वे मुस्लिम बच्चों से शिक्षा छीनने का काम कर रहे हैं, उन्हें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। मदरसा बोर्ड शिक्षा के केंद्र हैं, इन्हें बंद नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि इनका आधुनिकीकरण होना चाहिए ताकि बच्चों को और बेहतर तालीम मिले।
महाराज को नसीहतः अनिलानंद महाराज पर पलटवार करते हुए बल्ली ने कहा, “मालेगांव, अजमेर और आगरा ब्लास्ट में कौन लोग निकले थे? महाराज, आप मठ और मंदिर चलाइए, लेकिन देश को बांटने और विभाजन करने की बात मत कीजिए।”
मदरसा बोर्ड अच्छा काम कर रहा है
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने भी मदरसा बोर्ड को बंद करने का विरोध किया है। उन्होंने कहा- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड बंद नहीं होना चाहिए। एमपी में मदरसा बोर्ड बेहतरीन काम कर रहा है। सरकार को इसे बंद करने के बजाय और सशक्त तथा मजबूत बनाना चाहिए।
एक हाथ में कुरान, तो दूसरे में हो लैपटॉप
इस पूरे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना रुख साफ किया है। भाजपा प्रवक्ता अजय यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मदरसों को बंद करना नहीं, बल्कि उनमें सुधार करना है। उन्होंने कहा- सरकार का स्पष्ट मत है कि मदरसों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर, ज्ञान और विज्ञान की शिक्षा मिले। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे कट्टरपंथ के रास्ते से बाहर निकलकर देश की तरक्की और उन्नति के लिए काम कर सकें, यही हमारा लक्ष्य है। भाजपा मानती है कि मदरसे के बच्चों के एक हाथ में कुरान तो दूसरे हाथ में लैपटॉप होना चाहिए। जो भी बदलाव या सुधार किए जा रहे हैं, वे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हैं और सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।