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छत्तीसगढ़ में मानसून का जोर, रायपुर समेत 10 जिलों में रेड अलर्ट; अगले 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 और 48 घंटों के लिए भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट घोषित किया है।

बिलासपुर और बस्तर संभाग के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, प्रदेश में अब तक मौसमी वर्षा सामान्य से 46 प्रतिशत कम रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई जिलों में झमाझम बारिश होने की संभावना है।

अगले 24 घंटे के लिए जारी रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट

रेड अलर्ट वाले जिले

मौसम विभाग ने रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, बेमेतरा, महासमुंद, बालोद, धमतरी, गरियाबंद और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में एक-दो स्थानों पर बहुत भारी से अत्यंत भारी वर्षा की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।

ऑरेंज अलर्ट वाले जिले

कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा तथा बिलासपुर संभाग के अन्य जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

येलो अलर्ट वाले जिले

सुकमा, बीजापुर और जशपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

अगले 48 घंटे के लिए जारी अलर्ट

रेड अलर्ट

अगले 48 घंटों के दौरान कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और मुंगेली जिलों में बहुत भारी से अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है।

ऑरेंज अलर्ट

बिलासपुर, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद, नारायणपुर, बीजापुर, कोरबा, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया और कांकेर जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

येलो अलर्ट

रायपुर, बलरामपुर, सरगुजा और सूरजपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है।

संभावित प्रभाव और सावधानियां

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़कें फिसलनभरी हो सकती हैं। जलभराव के चलते प्रमुख शहरों में यातायात प्रभावित होने और यात्रा का समय बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा दृश्यता कम होने, निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने, नहरों पर बने निचले पुलों को बंद करने तथा खेतों में जलभराव होने की आशंका भी जताई गई है।