प्रदेश
छत्तीसगढ़ के इस परंपरागत त्योहार के बारे में जानिये, आस्था और परंपरा के साथ हरेली का ये है खेती-किसानी से अनूठा संबंध
रायपुर। प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी कर रिकॉर्ड कायम किया है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा।
परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है।
हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गूंथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।
पिहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद होता है। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।
हरेली तिहार पर मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक उल्लास के साथ होगा विशेष आयोजन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और कृषि परंपरा से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार इस वर्ष 24 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक और उल्लासपूर्ण रूप से मनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष आयोजन में लोकजीवन की विविध रंगतें, सांस्कृतिक विरासत और किसानों के प्रति सम्मान का भाव सजीव रूप में प्रकट होगा। हरेली त्यौहार के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री निवास परिसर को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के रंगों से सजाया गया है। पारंपरिक तोरण, हरियाली से सजे द्वार और ग्रामीण शिल्प कला से समृद्ध इस वातावरण में हरेली की वास्तविक आत्मा को अनुभव किया जा सकेगा।



आयोजन में छत्तीसगढ़ के विविध अंचलों से आए लोक कलाकारों द्वारा गेड़ी नृत्य, राउत नाचा आदि लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। सावन की फुहारों के बीच सावन झूला और सवनाही रामायण पाठ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होंगे। यह कार्यक्रम ना केवल एक सांस्कृतिक आयोजन होगा, बल्कि यह प्रदेश की लोकभावना और पारंपरिक धरोहर का जीवंत उत्सव भी होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस आयोजन में शामिल होकर कृषि यंत्रों एवं औजारों की पूजा करेंगे, जो हरेली पर्व की मुख्य परंपरा रही है। पारंपरिक से लेकर आधुनिक यंत्रों की एक विस्तृत प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिससे नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की कृषि परंपराओं और यांत्रिकी प्रगति से परिचय मिलेगा।
कार्यक्रम में बच्चों के लिए परंपरागत खेल और लोककला प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही हैं। हरेली तिहार को इस बार केवल एक त्योहार नहीं बल्कि पर्यावरण, परंपरा और प्रगति के मिलन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को हरेली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हरेली पर्व केवल खेती और हरियाली का नहीं, बल्कि हमारे लोकजीवन, परंपरा और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का उत्सव है। हमारी सरकार इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में होने वाला यह आयोजन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण लोकसंस्कृति को न केवल संरक्षित करने की दिशा में एक प्रयास है, बल्कि उसे सार्वजनिक जीवन के केंद्र में लाने की प्रेरक पहल भी है।
रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत बिलासपुर संभाग के 850 श्रद्धालुओं का जत्था अयोध्या धाम के लिए हुआ रवाना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी योजना श्री रामलला दर्शन के अंतर्गत श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के अयोध्या धाम में दर्शन करने का सौभाग्य निरंतर प्राप्त हो रहा है। इसी कड़ी में आज बिलासपुर संभाग से 850 श्रद्धालुओं का जत्था अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ।
यह जत्था बिलासपुर रेलवे स्टेशन से चलने वाली विशेष ट्रेन के लिए रवाना किया गया। अयोध्या धाम जाने वाली इस विशेष ट्रेन को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, विधायक धरमजीत सिंह, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस विशेष ट्रेन में बिलासपुर संभाग के सभी आठ जिलों से कुल 850 श्रद्धालु शामिल है। जिसमें बिलासपुर जिले से 225, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से 49, कोरबा जिले से 146, जांजगीर-चांपा से 187, मुंगेली से 64, रायगढ़ से 112, सक्ती से 37 एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से 30 श्रद्धालु शामिल है। श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। अयोध्या धाम की इस पावन यात्रा की उत्तम व्यवस्था के लिए श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेशवासियों को उनके जीवनकाल में एक बार भगवान श्रीराम लला के अयोध्या धाम दर्शन कराने का संकल्प लिया गया था, जिसे मूर्त रूप देने के लिए 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पाेरेशन के बीच एमओयू हस्ताक्षरित किया गया था।
इस योजना का विधिवत शुभारंभ 5 मार्च 2024 को रायपुर रेलवे स्टेशन से विशेष ट्रेन को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा वरिष्ठ मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर किया गया था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक लगभग 22,100 श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा एवं बस्तर-दुर्ग (संयुक्त) संभागों के श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम ले जाने के लिए साप्ताहिक विशेष ट्रेनें नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं।
इस योजना के तहत शासन द्वारा यात्रियों को पूर्णतः निःशुल्क यात्रा, खानपान एवं सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे यह यात्रा सुगम, सुरक्षित और सुखद बन सके। यह योजना श्रद्धा, सेवा और सुशासन का अद्वितीय संगम है, जो प्रदेशवासियों को रामभक्ति से जोड़ने का एक प्रेरणादायक माध्यम बन चुकी है।
प्राचार्य पदोन्नति विवाद की सुनवाई अब 28 जुलाई को, अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण टली सुनवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई अब 28 जुलाई (सोमवार) को होगी। इससे पहले यह सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित थी, लेकिन याचिकाकर्ता नारायण प्रकाश तिवारी की अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी के उच्च न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया.
यह मामला छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 30 अप्रैल 2024 को जारी प्राचार्य पदोन्नति आदेश के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। अब यह सुनवाई बिलासपुर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ में 28 जुलाई को होगी।
प्राचार्य पदोन्नति फोरम की सक्रियता
आज की सुनवाई के दौरान प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से अनिल शुक्ला, आकाश राय, संतोष कुमार चिंचोलकर, विकाश नायक और आर.के. बंजारे न्यायालय में उपस्थित रहे और मामले की अगली तारीख में प्रभावी सुनवाई की उम्मीद जताई।
क्रेडा सीईओ ने अंबिकापुर एवं सूरजपुर में सोलर संयंत्रों का किया निरीक्षण
रायपुर। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की सौर आधारित महत्तवपूर्ण योजनाओं के माध्यम से राज्य के नागरिकों को लाभ पहुंचाने का कार्य गैर परम्परागत ऊर्जा स्त्रोतों के क्रियान्वयन हेतु राज्य एवं केन्द्र सरकार की नोडल एजेंसी क्रेडा द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं क्रेडा अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी के मंशानुसार कार्यों की उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं इसमे जीरो टॉलरेंस नीति को फलीभूत करने का कार्य क्रेडा सी.ई.ओ. राजेश सिंह राणा द्वारा सत्त रूप से किया जा रहा है। इस जीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत संयंत्रों के गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए श्री राणा द्वारा स्वयं ही ताबड़तोड दौरे किये जा रहे है।
इसी की निरंतरता में राजेश सिंह राणा, सी.ई.ओं, क्रेडा द्वारा दिनांक 23.07.2025 को तड़के सुबह सरगुजा संभाग के अंबिकापुर जिलें के विभिन्न ग्रामों में जल जीवन मिशन योजना ,सौर सुजला योजना, इत्यादि योजनाओं के अंतर्गत स्थापित सोलर संयंत्रों का औचक निरीक्षण किया गया। सर्वप्रथम सी.ई.ओ. क्रेडा द्वारा जिला अंबिकापुर के ग्राम सितकालो में क्रेडा की पंजीकृत इकाई मेसर्स दुर्गेश सोलर द्वारा स्थापित 08 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि उक्त संयंत्र के माध्यम से आर.व्ही. विलेजों में प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु संयंत्र की स्थापना की गई है। जिससे उनके घरों में निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ती मिल रही है, एवं इससे हम बहुत खुश है। साथ ही उनके द्वारा क्रेडा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए क्रेडा सी.ई.ओ. श्री राणा एवं विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
अपने स्वास्थ्य की परवाह किये बिना क्रेडा सी.ई.ओ. ने किया सघन दौरा पूर्ण
गौरतलब है कि क्रेडा सी.ई.ओ. श्री राणा की तबियत सरगुजा में स्थापित सौर संयंत्रों के के ताबड़तोड़ निरीक्षण के दरम्यान बिगड़ गई थी, किन्तु अपनी कर्मठता के लिए मशहूर श्री राणा ने अपने खराब स्वास्थ्य की परवाह किये बगैर दौरे के मध्य में ही स्वास्थ्य लाभ लेकर लक्षित समस्त स्थलों में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों का निरीक्षण कार्य पूर्ण किया। यह निश्चित रूप से क्रेडा के सभी षासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक प्रेरणा का एक स्त्रोत साबित होगा।
तत्पश्चात श्री राणा द्वारा ग्राम सितकालो (खर्रापारा) में क्रेडा की पंजीकृत इकाई मेसर्स आर.बी.पी. द्वारा स्थापित 08 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि उक्त संयंत्र अकार्यशील है जिस पर वहॉ उपस्थित ग्रामीणों द्वारा क्रेडा सी.ई.ओ. से संयंत्र को कार्यशील करने का अनुरोध किया जिस पर श्री राणा द्वारा क्रेडा के अधिकारियों को निर्देशित किया की संयंत्र को यथाशीघ्र कार्यशील कर ग्रामीणों को प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया साथ ही संयंत्र को कार्यशील कर प्रधान कार्यालय को सूचित करने का निर्देश दिया। जिला अंबिकापुर अंतर्गत स्थापित सौर संयंत्रों के निरीक्षण के दौरान पाये गये कमियों को दुरूस्त करने के लिए सम्पूर्ण प्रस्ताव 3 दिवस के भीतर क्रेडा के प्रधान कार्यालय को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश वहां उपस्थित क्रेडा के अधिकारियों को क्रेडा सी.ई.ओ. श्री राणा द्वारा दिया गया, उक्त हेतु संबंधित क्षेत्रों के निवासियों को श्रीराणा द्वारा आश्वस्त किया गया कि उक्त संयंत्रों की खराबियों को शीघ्र ही ठीक करा लिया जायेगा।
इसके उपरांत श्री राणा द्वारा उदयपुर विकासखण्ड के ग्राम सितकालो (खर्रापारा) में क्रेडा की पंजीकृत इकाई मेसर्स दुर्गेश सोलर द्वारा जल जीवन मिशन फेस-01 अंतर्गत स्थापित सोलर पेयजल संयंत्र का निरीक्षण किया गया, जिसमे क्रेडा द्वारा स्थापित सोलर पम्प कार्यशील पाया गया, किन्तु संयंत्र में लिकेज होने के कारण पानी बह रहा है। जिस पर वहॉ उपस्थित ग्रामवासी रौशन राम, शेर सिंह, दीना राम, अभिषेक लोहार, धनेश्वर द्वारा पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुचने की जानकारी दी गई, जिस पर श्री राणा द्वारा वहॉ उपस्थित क्रेडा के अधिकारियों को तत्काल संयंत्र में लिकेज की समस्या को सुधार कर प्रधान कार्यालय को सूचित करने के निर्देश दिये गये।
तदोपरांत सी.ई.ओ. क्रेडा द्वारा जिला सूरजपुर ओडगी विकासखण्ड अंतर्गत चॉदनी-बिहारपुर क्षेत्र के विद्युत विहीन ग्राम महारशॉप (पटेलपारा) में क्रेडा द्वारा स्थापित 04 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि उक्त संयंत्र के माध्यम से घरों में रात्रि के समय प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित हो रही है। साथ ही उनके द्वारा क्रेडा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए क्रेडा सी.ई.ओ. श्री राणा एवं विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
श्री राणा द्वारा जिला सूरजपुर के ग्राम करौटी (इमलीपारा) में क्रेडा द्वारा स्थापित 10 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि उक्त संयंत्र के माध्यम से घरों में रात्रि के समय प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित हो रही है। साथ ही उनके द्वारा क्रेडा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए क्रेडा सी.ई.ओ. श्री राणा एवं विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
तत्पश्चात श्री राणा द्वारा जिला सूरजपुर के ग्राम करौटी (गुल्लादनपारा) में क्रेडा द्वारा स्थापित 10 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि उक्त संयंत्र के माध्यम से घरों में रात्रि के समय प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित हो रही है।
इसके उपरांत श्री राणा द्वारा जिला सूरजपुर के ग्राम कोलहुआ (खसपारा-02) में क्रेडा द्वारा स्थापित 10 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि उक्त संयंत्र के माध्यम से घरों में रात्रि के समय प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित हो रही है।
श्री राणा द्वारा निरीक्षण उपरांत वहॉ उपस्थित क्रेडा के अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि क्रेडा के विभिन्न परियोजना अंतर्गत चल रहे कार्य जैसे- जल जीवन मिशन, सौर सुजला योजना, सोलर हाई मॉस्ट संयंत्र , सोलर पॉवर प्लांट एवं अन्य संयंत्रों के स्थापना के दौरान सतत् स्थल निरीक्षण करते हुये निविदा के मापदण्डानुसार गुणवत्ता सुनिश्चित कराते हुये कार्य ससमय पूर्ण करावे।
लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रस्तुत किया जलवायु अनुकूलनशील कृषि पर प्राक्कलन समिति का प्रतिवेदन
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने आज लोकसभा में प्राक्कलन समिति (2024-25) का छठा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। यह प्रतिवेदन "कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से जलवायु अनुकूलनशील कृषि, प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा" विषय पर केंद्रित है।
श्री अग्रवाल ने बताया कि प्रतिवेदन में कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्थायित्व और किसानों की आयवृद्धि को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। प्रमुख बिंदुओं में कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता, जैविक कीटनाशकों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता, और 1968 के कीटनाशक अधिनियम के तहत प्रवर्तन को सशक्त बनाने की सिफारिशें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि समिति ने KVKs की संरचनात्मक मजबूती और वित्तीय सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल दिया है, जिससे किसानों तक उन्नत तकनीकें, प्रशिक्षण और डिजिटल माध्यमों से जानकारी प्रभावी रूप से पहुँच सके।
श्री अग्रवाल ने बताया कि देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों में 30% स्टाफ की भारी कमी पर समिति ने गहरी चिंता जताई है और रिक्तियों को शीघ्र भरने हेतु विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता बताई है। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सटीक कृषि और बहु-कौशल विशेषज्ञों की नियुक्ति पर भी बल दिया गया है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए चलाए जा रहे NICRA कार्यक्रम की सीमित पहुँच पर भी समिति ने चिंता व्यक्त की है और इसे चरणबद्ध तरीके से सभी अति संवेदनशील जिलों तक पहुँचाने के लिए अतिरिक्त बजट की सिफारिश की है।
प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में, समिति ने एक मानकीकृत लेकिन लचीले प्रोटोकॉल को विकसित करने, प्रशिक्षण बढ़ाने, और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक इसे विस्तारित करने की बात कही है।
श्री अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता को अपर्याप्त मानते हुए समिति ने DBT प्रोत्साहनों को बढ़ाने, सहायता अवधि को तीन वर्षों से आगे बढ़ाने, और जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और प्रीमियम प्राइसिंग को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की है।
इसके अतिरिक्त, समिति ने छोटे किसानों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल, सुलभ और कम लागत वाली बनाने, एकीकृत जैविक लेबल स्थापित करने, और डिजिटल प्रमाणन व्यवस्था को लागू कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।
भंडारण क्षमताओं को लेकर समिति ने PPP मॉडल में नियंत्रित वातावरण प्याज भंडारण और मल्टी-प्रोडक्ट स्टोरेज को दोहराने की सलाह दी है, जिससे खाद्य अपव्यय में कमी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
अंत में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह प्रतिवेदन देश के किसानों को सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आशा जताई कि सरकार इस प्रतिवेदन की सिफारिशों पर शीघ्र अमल करेगी।


कोल घोटाले में बड़ा झटका: सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया की याचिका हाईकोर्ट से खारिज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया सहित परिवार के लोगों की संपत्ति अटैच किए जाने की कार्रवाई को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई थी। केजेएसएल कोल पावर और इंद्रमणि मिनरल्स ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई थी, जिस पर लगातार सुनवाई के बाद सभी 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा गया था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और विभू दत्त गुरु की डबल बेंच में सभी पहलुओं पर लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया है। इस याचिका को कोर्ट ने लंबी कानूनी बहस के बाद खारिज कर दिया गया है।
दरअसल ईडी रायपुर ने अवैध कोयला लेवी घोटाले से संबंधित मामले में सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 30 जनवरी 2025 को कुल मिलाकर 49.73 करोड़ रुपए मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है, जिसमें बैंक बैलेंस, वाहन, नकदी, आभूषण और जमीन शामिल हैं। इसमें सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी, कैलाशा तिवारी, दिव्या तिवारी की भी संपति अटैच की गई है। वहीं सौम्या चौरसिया उनके भाई अनुराग चौरसिया, मां शांति देवी, समीर विश्नोई और अन्य ने अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ याचिकाएं लगाई।
कोर्ट में संबंधित अपीलकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा, निखिल वार्ष्णेय, शशांक मिश्रा, अभ्युदय त्रिपाठी और अन्य को सुना गया। इसके बाद प्रतिवादी के वकील डॉ. सौरभ कुमार पांडे को भी सुना गया। संबंधित अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं और प्रतिवादी की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं की दलीलें पूरी हो गई थी। कोर्ट ने इस मामले में याचिका को खारिज करने का निर्णय सुनाया है।
क्या है कोयला लेवी मामला
ED की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों से मिलीभगत के बाद ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से अवैध वसूली की। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयले के हर टन पर 25 रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया गया था।
खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्रोई ने आदेश जारी किया था। यह परमिट कोल परिवहन में कोल व्यापारियों को दिया जाता है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया। इसमें जो व्यापारी पैसे देता उसे ही खनिज विभाग से पीट और परिवहन पास जारी होता था, यह रकम 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा होती थी। इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपये की वसूली की गई।
कहां खर्च की अवैध कमाई
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की राशि को सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने में खर्च किया गया। साथ ही चुनावी खर्चों के लिए भी इस अवैध राशि का इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने इससे कई चल-अचल संपतियों को खरीदा।
मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य तभी साकार हो सकते हैं, जब समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में समाज कल्याण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि समय की माँग है कि शतप्रतिशत दिव्यांगजनों को कौशलयुक्त बनाया जाए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस दिशा में कार्ययोजना बनाकर त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों के लंबित पेंशन प्रकरणों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य को सेवा-भावना के साथ प्राथमिकता में रखा जाए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर उनका अधिकार प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और निराश्रितों के कल्याण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वृद्धाश्रमों, अनुदान प्राप्त दिव्यांग संस्थाओं और पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित और सुदृढ़ किया जाए। दिव्यांगजनों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार हुनरमंद बनाकर मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। इससे वे स्व-रोजगार के अवसरों से जुड़ सकेंगे और समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बैठक में कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर मिलने वाले बेघर, बेसहारा, घुमंतू, दिव्यांग, बच्चे और महिलाएं यदि पुनर्वास की आवश्यकता में हों, तो उन्हें तत्काल पुनर्वास केंद्रों में पहुंचाने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न पेंशन प्रकरणों का भौतिक सत्यापन करते हुए पात्र हितग्राहियों को वरीयता के आधार पर पेंशन का लाभ दिया जाए। साथ ही विभागीय हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने तृतीय लिंग समुदाय के पंजीयन की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा उन्हें राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य विभागीय योजनाओं से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए शिविर आयोजित कर यूडीआईडी (UDID) पंजीयन और मेडिकल बोर्ड से प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी गति देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी जरूरतमंद बच्चे, महिलाएं, युवा या बुजुर्ग कृत्रिम अंग, बैसाखी, श्रवण यंत्र, ट्राइसायकल या फिजियोथेरेपी जैसी आवश्यकताओं से जूझ रहे हों, उन्हें संबंधित उपकरण तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति बिना सहारे के न रहे, यह शासन की प्रतिबद्धता होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक में कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण प्रदाय योजना, सामर्थ्य विकास योजना, निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना, राष्ट्रीय निःशक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम, विभिन्न पेंशन योजनाओं सहित समाज कल्याण विभाग की अन्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और भविष्य की कार्ययोजना पर विमर्श किया गया।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि बीते एक वर्ष में प्रदेशभर में कुल 137 दिव्यांग विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया है। इन शिविरों के माध्यम से 7669 दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से 6671 व्यक्तियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए गए हैं। इससे उनके जीवन में आशा और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद और राहुल भगत, समाज कल्याण सचिव भुवनेश यादव, संचालक रोक्तिमा यादव सहित समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बीजेपी की नई जिला कार्यकारिणी घोषित, देखें लिस्ट…
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है, जिसमें 16 कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है. प्रदेश महामंत्री जगदीश रामू रोहरा ने प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और जिला अध्यक्ष लालजी यादव की सहमति से नई जिला कार्यकारिणी का एलान किया है. इसमें अध्यक्ष, 2 महामंत्री, 6 जिला उपाध्यक्ष और 6 जिला मंत्री बनाए गए हैं. वहीं अन्य कई नेताओं को भी संगठन में मौका दिया गया है.
देखें लिस्ट
