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लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न का मुद्दा

रायपुर/नई दिल्ली।    रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने आज लोकसभा में ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले डार्क पैटर्न के बढ़ते उपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री से इस विषय में प्राप्त शिकायतों का विवरण और अब तक की गई कार्यवाही की जानकारी मांगी।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी.एल. वर्म ने बताया कि 30 नवंबर 2023 को "डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन हेतु दिशानिर्देश, 2023" जारी किए गए। 5 जून 2025 को सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को स्व-ऑडिट कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके प्लेटफॉर्म पर कोई डार्क पैटर्न मौजूद न हो। तीन माह के भीतर सभी कंपनियों से स्व-घोषणा भी मांगी गई है ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और डिजिटल पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन भी किया गया है जिसमें मंत्रालयों, उपभोक्ता संगठनों, विधि विश्वविद्यालयों व विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, “डिजिटल युग में उपभोक्ताओं का हित सर्वोपरि होना चाहिए। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छिपे हुए शुल्क, झूठे डिस्काउंट, जबरन सब्सक्रिप्शन जैसे डार्क पैटर्न उपभोक्ता के विश्वास को तोड़ते हैं। सरकार द्वारा दिशा-निर्देश जारी करना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इनका सख्ती से पालन हो यह सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है। मैं इस मुद्दे पर लगातार निगरानी रखने और ज़रूरत पड़ने पर कठोर कदम उठाने की मांग करता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे भ्रामक तरीकों से न केवल उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण होता है, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता और नैतिकता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।

क्या होते हैं डार्क पैटर्न?

डार्क पैटर्न वे डिजिटल डिज़ाइन तकनीकें होती हैं जिनके माध्यम से उपभोक्ताओं को बिना उनकी स्पष्ट सहमति के कोई उत्पाद या सेवा खरीदने, सब्सक्रिप्शन लेने या अतिरिक्त भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इनमें झूठी तात्कालिकता (false urgency), प्रच्छन्न विज्ञापन (disguised ads), ट्रिक वर्डिंग (trick wording), सब्सक्रिप्शन ट्रैप, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग आदि जैसे तरीके शामिल हैं।