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पुरानी पेंशन योजना: CGPF राशि के अंतिम भुगतान की ऑनलाइन प्रक्रिया तय, जानिये क्या है प्रक्रिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल किए जाने के बाद, अब राज्य सरकार ने सी.जी.पी.एफ. (छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि) खातों की अंतिम निकासी के लिए पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। यह व्यवस्था उन शासकीय सेवकों पर लागू होगी, जो सेवा समाप्ति, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति या मृत्यु के पश्चात CGPF राशि के आहरण के पात्र होंगे।इस नई प्रक्रिया से संबंधित तीनों स्तरों — कार्यालय प्रमुख, संचालनालय पेंशन एवं भविष्य निधि, तथा कोषालय — की जिम्मेदारियाँ और कार्यप्रणाली स्पष्ट की गई है।
ऑफिस स्तर पर क्या करना होगा?
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cps.cg.nic.in पोर्टल पर DDO/Employee ID लॉगिन से शासकीय सेवक का CGPF खाता विवरण देखा जा सकेगा।
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सेवा समाप्ति/सेवानिवृत्ति/मृत्यु के मामलों में संबंधित व्यक्ति या नॉमिनी के लिए “Online CGPF Final Payment System” पर प्रकरण तैयार किया जाएगा।
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जरूरी विवरण — जैसे व्यक्तिगत, विभागीय, गणना व दस्तावेज़ प्रविष्टियाँ — दर्ज की जाएंगी।
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अनुसूची-5 (सेवानिवृत्ति/त्यागपत्र) या अनुसूची-7 (मृत्यु) और डिजिटल हस्ताक्षरित CGPF पासबुक सहित सभी आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर अपलोड किए जाएंगे।
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दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट अनुसार पुष्टि कर संचालनालय को ऑनलाइन प्रेषित किया जाएगा।
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ई-प्राधिकार पत्र (e-CGPF Authority Letter) प्राप्त होने के बाद DDO द्वारा ई-बिल तैयार कर कोषालय भेजा जाएगा।
संचालनालय स्तर की प्रक्रिया:
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संचालनालय, पेंशन एवं भविष्य निधि अपने User ID/Password से लॉगिन कर प्रकरण की पुष्टि और परीक्षण करेगा।
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CGPF पासबुक व अन्य दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जाएगा।
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कोई भिन्नता होने पर ऑनलाईन अभिलेखों के आधार पर राशि व ब्याज का पुनः निर्धारण किया जाएगा।
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जांच पूर्ण होने के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित e-CGPF Authority Letter जारी कर DDO, कोषालय व अभिदाता को भेजा जाएगा।
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NIC के सहयोग से वेबसाइट का सुचारू संचालन व सुधार का कार्य संचालनालय द्वारा किया जाएगा।
कोषालय / उप-कोषालय स्तर पर:
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कोषालय स्तर पर प्राप्त e-CGPF Authority Letter के आधार पर ई-बिल सॉफ्टवेयर में देयक तैयार किया जाएगा।
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डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्राधिकार पत्र की पुष्टि के बाद संबंधित शासकीय सेवक/नॉमिनी के खाते में भुगतान किया जाएगा।
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भुगतान का लेखांकन लेखा शीर्ष 8009-राज्य भविष्य निधियों के अंतर्गत किया जाएगा।
इस प्रणाली के लाभ:
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प्रक्रिया पारदर्शी, ऑनलाइन व समयबद्ध है।
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शासकीय सेवकों एवं उनके परिजनों को अंतिम भुगतान के लिए क्लियर और ट्रैक करने योग्य व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
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राज्य शासन की यह पहल पुरानी पेंशन योजना की बहाली को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
सदन में कांग्रेस ने उठाया दिव्यांगजनों पर कार्रवाई का मामला, बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई की मांग…
रायपुर। राजधानी में दिव्यांगजनों के प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई को कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने पुलिस-प्रशासन की बर्बरता करार देते हुए कहा कि सरकार दिव्यांगजन पर बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की मांगों को सुने और पूरा करे.
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सदन में भी दिव्यांगजनों का मुद्दा सदन में उठाया था. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक पहुंचे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने बर्बरतापूर्वक मारपीट की. मुंगेली के एक दिव्यांग का हाथ टूट गए और कपड़े भी फट गए हैं. कई ऐसे दिव्यांगजन है जिनका मोबाइल छीनकर तोड़ दिया गया है.
इसके साथ उन्होंने सवाल किया कि पुलिस प्रशासन किसके आदेश पर यह कार्रवाई कर रही है? सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है पुलिस किसी पर हाथ नहीं उठा सकती. यह सुप्रीम कोर्ट और संविधान का उल्लंघन है. सरकार दिव्यांगजन पर बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई करें. दिव्यांगजनों की की मांगों को सुने और पूरी करे
रेत के अवैध परिवहन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 18 ट्रैक्टर जब्त
गरियाबंद। देवभोग तहसील में बहने वाले तेल नदी से अवैध रेत परिवहन में लगे 18 ट्रैक्टरों को आज माइनिंग विभाग की टीम ने जब्त किया. जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई. सभी जब्त वाहनों को देवभोग थाना के सुपुर्द किया गया है. इस कार्रवाई के बाद ट्रैक्टर वाहन मालिकों ने कार्रवाई का विरोध भी किया है. समाधान के लिए एसडीएम दफ्तर भी पहुंचे पर नियम का हवाला देकर अफसरों ने कार्रवाई को जायज ठहराया.

पीएम आवास के लिए मिली थी छूट
कार्रवाई रुकवाने एसडीएम दफ्तर पहुंचे ट्रैक्टर मालिक प्रह्लाद बीसी, सुशील पांडे ने कहा कि ट्रैक्टर मालिकों की दलील है कि सरकार ने खुद विधानसभा से पीएम आवास के लिए रेत परिवहन को छूट देने का ऐलान किया था, लेकिन कार्रवाई क्यों की जा रही है. सिनापली के विद्याधर ध्रुव समेत कुछ चालकों ने पंचायत का वह प्रमाण पत्र भी दिखाया, जिसमें आवास हितग्राहियों के लिए परिवहन का जिक्र किया गया था, लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हुई.

एकतरफा कार्रवाई का आरोप, भंडारण पर उठा सवाल
10 जून को रेत परिवहन बंद होने के बावजूद यहां कुछ रेत गिरोह द्वारा प्रति ट्रैक्टर 300 रुपए की अवैध उगाही की जा रही थी. कुछ को 600 रुपए की भंडारण रॉयल्टी पर्ची दी गई, लेकिन परिवहन भंडारण स्थल के बजाए रेत घाट से हो रही थी. यहां तक कि पुरना पानी घाट में रात के अंधेरे में फोकलेन लगाकर हाइवा से बेधड़क सप्लाई हो रही थी. इसकी शिकायत ऊपर तक हुई. इस शिकायत के बाद एक गुट ने ट्रैक्टर में हो रहे परिवहन की शिकायत कर दी. आज माइनिंग की टीम दो शिकायतों के आधार पर कार्यवाही करने पहुंची पर भंडारण और अवैध उगाही की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की.
जिला खनिज अधिकारी बोले – अवैध उगाही पर भी कार्रवाई करेंगे
मामले में जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू ने दो प्रकार से हुई शिकायत की पुष्टि की है. रोहित साहू ने कहा कि फिलहाल कुम्हड़ाई घाट पर अवैध परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों पर कार्रवाई की गई है. आगे पुरना पानी घाट में होने वाले अवैध उगाही की भी जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे.
ट्रैक्टर के चलते बंद हो गया था हाईवा कारोबार
ट्रैक्टरों के दौड़ने से हाईवा वाले बड़े रसूखदारों का कारोबार पूरी तरह से बंद हो गया था. इन दिनों ज्यादातर निर्माण पीएम आवास का चल रहा है. ऐसे में गांव गांव में छोटे हितग्राही कम कीमतों पर आसानी से रेत हासिल कर रहे थे. अब ट्रैक्टरों पर लगी रोक के बाद रात के अंधेरे का बड़ा अवैध कारोबार फिर से शुरू हो जाएगा. प्रति हाईवा 10 से 15 हजार के बीच सप्लाई की जाएगी. देवभोग में जिस समय भंडारण की अनुमति दी गई उस समय तक वैध खदान शुरू नहीं हो सका था, लेकिन बंद होने से पहले महज 10 दिनों तक वैध खदान जारी रहा. नियम अनुसार विभाग ने भंडारण स्थल का पूर्व और खदान बंद होने के बाद का सत्यापन कैसे किया है. इस पर भी ट्रैक्टर मालिकों ने सवाल खड़ा कर दिया है.
शराब घोटाला मामला : पूर्व मंत्री लखमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, EOW में दर्ज मामले पर फैसला सुरक्षित
बिलासपुर। शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई है। ईओडब्ल्यू और ईडी में दर्ज मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने EOW में दर्ज मामले में जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रखा है। वहीं ईडी में दर्ज केस में जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। दोनों ही मामले में अधिवक्ता हर्षवर्द्धन परगनिहा ने लखमा की तरफ से कोर्ट में अपना पक्ष रखा। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में रखी है।
बता दें कि ईडी, एसीबी और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को लखमा ने चुनौती दी है। विशेष कोर्ट में प्रस्तुत 1100 पन्नों की चार्जशीट में पूर्व आबकारी मंत्री को शराब घोटाले से 64 करोड़ रुपये कमीशन मिलने की बात कही गई है। चार्जशीट में बताया है कि जांच में साक्ष्यों और वित्तीय विश्लेषण से यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हुआ है कि कवासी लखमा, जो एक उत्तरदायित्वपूर्ण संवैधानिक पद पर आसीन थे, उन्होंने न केवल अपने कर्तव्यों की घोर उपेक्षा की, बल्कि मंत्री पद की शक्तियों का उपयोग कर नीतिगत निर्णयों में हस्तक्षेप, अधिकारियों की पदस्थापना में प्रभाव, टेंडर प्रक्रियाओं में विकृति और नगद लेन-देन की एक समानांतर व्यवस्था स्थापित कर पूरे विभागीय तंत्र को भ्रष्टाचार के माध्यम से संचालित किया।
चार्जशीट में कहा गया है कि मंत्री के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से सुनियोजित घोटाले को अंजाम दिया गया। कमीशन राशि को मंत्री लखमा ने अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों के लिए उपयोग कर भारी मात्रा में लाभ अर्जित किया। एसीबी ने स्पेशल कोर्ट को बताया कि घोटाले में मिले 64 करोड़ में से 18 करोड़ रुपये के अवैध निवेश और खर्च संबंधी दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी।
उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है।
अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने CM साय को दिया धन्यवाद, बिजली दामों में बढ़ोतरी पर विपक्ष ने लाया था स्थगन, सरकार के जवाब से संतुष्ट हुआ विपक्ष
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती वर्ष में इतिहास बन गया. बिजली दर में वृद्धि पर विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव आसंदी ने अस्वीकार्य कर दिया. लेकिन प्रस्ताव अस्वीकार्य होने के बाद भी विपक्ष ने हंगामा नहीं किया. वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के द्वारा विषय को गंभीरता से लेने पर आभार जताया. इस पर सत्तापक्ष ने मेजें थपथपाई।
शून्यकाल में नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने बिजली दर में वृद्धि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिजली दर में वृद्धि से पूरा छत्तीसगढ़ परेशान है. गरीबों को बिजली दर में वृद्धि आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है. विपक्ष ने जो स्थगन दिया है, उस पर चर्चा होनी चाहिए.
इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में वक्तव्य देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2025-26 हेतु घोषित बिजली टैरिफ में मात्र 1.89 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो कि विगत वर्षों में न्यूनतम वृद्धि में से एक है. यह निर्णय जनसुनवाई की प्रक्रिया के बाद पारदर्शी ढंग से लिया गया है और इसे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर स्टील और रोलिंग मिल उद्योगों तक ने सराहा है.
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि घरेलू विद्युत दरों में केवल 10 से 20 पैसे तक की मामूली वृद्धि की गई है, जबकि कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है — जिसका सीधा असर किसानों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह राशि शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में पहले से अग्रिम भुगतान की जा रही है. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के कृषक वर्ग पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े. सरकार किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा कर रही है.
उद्योगों को बढ़ावा — स्टील इंडस्ट्री की दरों में कटौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने हेतु मिनी स्टील, रोलिंग मिल और फेरो एलॉय जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों की दरों में कटौती की है. यह निर्णय उद्योगों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में औसतन 23.55 घंटे/दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 23.45 घंटे/दिन बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. विशेष रूप से कृषि फीडरों में 18 घंटे प्रतिदिन की आपूर्ति दी जा रही है, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक आंकड़ों में शामिल है. तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (AT&C Loss) को 2020-21 में 23.14% से घटाकर 2024-25 में 13.79% किया गया है. यह उपलब्धि दक्ष संचालन, पारदर्शी व्यवस्था और तकनीकी सुधारों का प्रमाण है.
कोरबा में 1320 मेगावॉट का नया प्लांट
वर्तमान टैरिफ में केपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान का भी समावेश है जिसके अंतर्गत ट्रांसमिशन कंपनी के लिए ₹2433 करोड़, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए ₹3977 करोड़ और जनरेशन कंपनी के लिए ₹2992 करोड़ का प्रावधान है. कोरबा में 1320 मेगावॉट के प्लांट की स्थापना का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है, जिसकी लागत ₹15,800 करोड़ है. इससे छत्तीसगढ़ भविष्य में ऊर्जा-सरप्लस राज्य बनेगा और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी.
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए डबल अनुदान योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹78,000 तक केंद्र सरकार से अतिरिक्त 2 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹30,000 तक राज्य शासन से अनुदान दिया जाएगा. यह योजना छत्तीसगढ़ के घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल है.
ऊर्जा के क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपए के करार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि पॉवर कंपनी/शासन द्वारा 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के करार किए गए हैं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन और रोजगार दोनों के क्षेत्र में क्रांति आएगी.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारी प्राथमिकता है कि बिजली उपभोक्ताओं को न केवल निर्बाध आपूर्ति मिले, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और टिकाऊ हो. वर्तमान और भावी योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित करेगा.
नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को दिया धन्यवाद
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने काम करने की बात कही है. उन बातों से हमें लगा कि वह ध्यान दे रहे हैं. हमें लगा कि उन्होंने इसको सीरियस माना है. इसलिए हमने उनका धन्यवाद दिया.
विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले की गूंज, नेता प्रतिपक्ष ने की CBI जांच की मांग, सदन में हंगामा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में बुधवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार और लेनदेन के आरोपों को लेकर जोरदार बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि कई जिलों में आवास स्वीकृति के बदले लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर डाली।
डॉ. महंत ने कहा कि आवास मित्रो और ग्रामीणों से शिकायतें मिली हैं कि बैगा परिवारों समेत अन्य हितग्राहियों से पैसों की वसूली की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तखतपुर, कोटा, महेंद्रगढ़ और जशपुर जैसे इलाकों में कई मकानों को अधूरा होने के बावजूद पूर्ण दिखा दिया गया है, और कई जगह मृत लोगों के नाम पर भी भुगतान हो चुका है।
डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब में कहा कि राज्य सरकार सुशासन और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार में सुशासन है और सुदर्शन भी है, किसी भी गड़बड़ी को बख्शा नहीं जाएगा। कुकदूर (कबीरधाम) क्षेत्र की शिकायत पर जांच चल रही है, तखतपुर की जानकारी आप अभी दे रहे हैं, उस पर भी कार्रवाई होगी।”
डॉ. महंत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि जहां-जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कलेक्टरों पर कार्रवाई होगी, तो अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” के दौरान भी दर्जनों शिकायतें सामने आई थीं लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
मनरेगा भुगतान पर भी उठा सवाल
महंत ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है, जबकि सरकार का दावा है कि 30 जून तक सभी भुगतान पूरे हो चुके हैं। इस पर विजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि “लेबर पेमेंट का काम समय पर हो गया है, अगर कहीं गड़बड़ी है तो जानकारी दें, कार्रवाई होगी।”
एआई डाटा को लेकर भी बहस
महंत ने कहा कि मंत्री बार-बार AI के आंकड़ों को खारिज कर रहे हैं, जबकि रिपोर्टें वास्तविक स्थिति को दर्शा रही हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि “AI की रिपोर्टें हमेशा 100% विश्वसनीय नहीं होतीं।”
सदन में हुआ हंगामा
विजय शर्मा के इस बयान पर कि “जिनकी सरकार ने पहले आवास योजना को ठुकराया, वे अब सवाल खड़े कर रहे हैं”, विपक्ष भड़क उठा और सदन में हंगामा हो गया। तीखी नोकझोंक के बीच डॉ. महंत ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार या EOW इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती, इसलिए CBI जांच की जरूरत है।
चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पर्यटकों की आवाजाही प्रतिबंधित, हादसे के बाद प्रशासन ने लगाई रोक
गरियाबंद। दोस्तों के साथ घुमने आई रायपुर की युवती सोमवार शाम को गजपल्ला वाटरफॉल की गहराई में गिर गई थी. 24 घंटे बाद उनका शव 20 फीट गहराई में पत्थरों के सुरंग के बीच से निकाला गया. इस रेस्क्यू में वन विभाग, नगर सेना, पुलिस और स्थानीय गोताखोर के 60 से ज्यादा जवान जुटे थे. वहीं इस हादसे के बाद चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल में पर्यटकों के आने पर प्रशासन ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है.
सोमवार को लगभग 4 बजे गजपल्ला वाटर फॉल के गहराई में रायपुर की 19 वर्षीय मेहवीस खान गिरी थी. एसडीआरएफ की टीम ने वाटर प्रूफ कैमरे लेकर गहरे पानी के नीचे तलाश की तो पता चला 20 फीट गहराई में मौजूद चट्टान में बने सुरंग नुमा स्थल पर मृतका का शव फंसा है. एसडीआरएफ के लांस नायक उमेश सिन्हा ने बताया कि 20 फीट नीचे पत्थरों के सुरंग में युवती का शव फंसा था, जिसे निकाल लिया गया है. रेस्क्यू में रायपुर के एसडीआरएफ की टीम समेत गरियाबंद प्रशासन के 60 से ज्यादा जवान जुटे थे.
मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर किया हमला
गजपल्ला में मौजूद वृक्ष में दर्जनभर से ज्यादा मधुमक्खियों के छत्ते मौजूद हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन के दरम्यान मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर हमला भी कर दिया. स्थानीय तीन मददगारों पर मधुमक्खी ने हमला कर दिया था, जिससे एक घंटे तक आपरेशन बाधित हुआ. मौके पर पाण्डुका थाना प्रभारी, गरियाबंद रेंजर भी मौजूद हैं.

परिजनों ने किया रतजगा, रो-रो कर बुरा हाल
हादसे की सूचना के बाद रायपुर राजापारा में रहने वाले परिजन और सगे संबंधी बड़ी संख्या में घटना स्थल पर पहुंच गए हैं. मृत्तिका के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है.
चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पूरी तरह प्रतिबंध : डीएफओ
इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. डीएफओ लक्ष्मण सिंह ने प्रतिबंध का बोर्ड लगाकर आवाजाही रोक दिया है. प्रवेश स्थानों पर वन विभाग ने जवान तैनात कर दिया है.
मेकाहारा की बंद पड़ी जांच मशीनों पर विपक्ष के सवालों पर घिरे स्वास्थ्य मंत्री
रायपुर। सदन की कार्यवाही के तीसरे दिन डॉ. भीम राव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) की बंद पड़ी जांच मशीनों और मशीनों की खरीदी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को घेरा. स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस विधायक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में पांच साल आपकी भी सरकार थी.
कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश ने प्रश्नकाल में मेकाहारा में बंद पड़ी जांच की मशीनों की मरम्मत का मामला उठाया हुए कहा कि मशीनों में से कई मशीन एक संख्या में थे जो वर्षों से ऐसी ही पड़ी है. मशीनों की खरीदी क्यों नहीं हो रही और खरीदी की प्रक्रिया क्या है? स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने बताया कि 161 मशीन स्थापित है 50 मशीन बंद है. अभी 70 करोड़ की खरीदी कर रहे हैं. 11 मशीनों का सुधार कार्य चल रहा है.
इस पर कांग्रेस विधायक ने सवाल किया कि कैंसर की जांच करने वाले मशीन क्यों नहीं है? स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वो जांच मशीन की श्रेणी में नहीं इलाज की श्रेणी में आता है, और यह मशीन विदेश से आता है. लेकिन हम उस मशीन को चालू भी करेंगे.
विधायक शेषराज ने सवाल जारी रखते हुए कहा कि यह मशीन पिछले 9 साल पहले आपके ही कार्यकाल में खरीदी गई थी. 9 साल पहले खरीदी गई मशीन अभी तक चालू क्यों नहीं कर पाए है? इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में एक अच्छे सोच के साथ मशीन की खरीदी की गई थी, लेकिन कुछ कारणवश अगर चालू नहीं कर पाए, तो अभी करवा रहे है. लेकिन 5 साल आपकी भी सरकार थी.
इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मैने पिछले 5 साल में भी यह कहा है बार-बार की वह मशीन अगर चालू होगी तो उससे कई लोगों का इलाज किया जा सकता है कोई अनियमितता होगी तो उसकी भी जांच करा सकते हैं.
टैरिफ में न्यूनतम वृद्धि, आपूर्ति में गुणवत्ता — छत्तीसगढ़ में ऊर्जा सुधारों को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2025-26 हेतु घोषित बिजली टैरिफ में मात्र 1.89 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो कि विगत वर्षों में न्यूनतम वृद्धि में से एक है। यह निर्णय जनसुनवाई की प्रक्रिया के बाद पारदर्शी ढंग से लिया गया है और इसे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर स्टील और रोलिंग मिल उद्योगों तक ने सराहा है।
आम उपभोक्ताओं को राहत, किसानों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि घरेलू विद्युत दरों में केवल 10 से 20 पैसे तक की मामूली वृद्धि की गई है, जबकि कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है — जिसका सीधा असर किसानों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह राशि शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में पहले से अग्रिम भुगतान की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के कृषक वर्ग पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े। सरकार किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा कर रही है।
उद्योगों को बढ़ावा — स्टील इंडस्ट्री की दरों में कटौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने हेतु मिनी स्टील, रोलिंग मिल और फेरो एलॉय जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों की दरों में कटौती की है। यह निर्णय उद्योगों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बेहतर आपूर्ति और घटती हानियाँ: गुणवत्तापूर्ण वितरण प्रणाली की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में औसतन 23.85 घंटे/दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 23.45 घंटे/दिन बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। विशेष रूप से कृषि फीडरों में 18 घंटे प्रतिदिन की आपूर्ति दी जा रही है, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक आंकड़ों में शामिल है। तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (AT&C Loss) को 2020-21 में 23.14% से घटाकर 2024-25 में 13.79% किया गया है। यह उपलब्धि दक्ष संचालन, पारदर्शी व्यवस्था और तकनीकी सुधारों का प्रमाण है।
अधोसंरचना विकास के लिए बड़ा निवेश, कोरबा में 1320 मेगावॉट का नया प्लांट
वर्तमान टैरिफ में केपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान का भी समावेश है जिसके अंतर्गत ट्रांसमिशन कंपनी के लिए ₹2433 करोड़, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए ₹3977 करोड़ और जनरेशन कंपनी के लिए ₹2992 करोड़ का प्रावधान है। कोरबा में 1320 मेगावॉट के प्लांट की स्थापना का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है, जिसकी लागत ₹15,800 करोड़ है। इससे छत्तीसगढ़ भविष्य में ऊर्जा-सरप्लस राज्य बनेगा और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
सौर ऊर्जा की ओर एक कदम: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए डबल अनुदान योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹78,000 तक केंद्र सरकार से अतिरिक्त 2 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹30,000 तक राज्य शासन से अनुदान दिया जाएगा। यह योजना छत्तीसगढ़ के घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल है।
ऊर्जा के क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये के करार, आएगी रोजगार क्रांति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि पॉवर कंपनी/शासन द्वारा 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के करार किए गए हैं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन और रोजगार दोनों के क्षेत्र में क्रांति आएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारी प्राथमिकता है कि बिजली उपभोक्ताओं को न केवल निर्बाध आपूर्ति मिले, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और टिकाऊ हो। वर्तमान और भावी योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित करेगा।
विधानसभा मानसून सत्र : नेता प्रतिपक्ष ने पीएम आवास पर सरकार को घेरा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने पीएम आवास योजना का मुद्दा उठाया. इस पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के जवाब से कांग्रेस विधायक आक्रोशित हो गए. इसके साथ समन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया.
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने पीएम आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत प्रगति की स्थिति पर सवाल करते हुए सवाल किया कि भुगतान करने के बाद आवास पूर्ण माना जाता है, या बिना शौचालय बनाए ही आवास पूरा मान लिया जाता है? इस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 3 किस्त के बाद लेंटल लेवल का किस्त जाता है, जो 90 दिन बाद भुगतान भी कर दिया जाता है, और कार्य अंतिम में माना जाता है. किसको कितना देना है. यह पुरानी सरकार की बात थी. वर्तमान में विष्णु देव साय की सरकार है, उसमें पूरा दिया जा चुका है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पुलिस विभाग वाले कभी कभी पूरी बात सुनते ही नहीं. इसमें दिव्यागों का जो प्रतिशत है, वो आपकी सरकार ने लिखा है उसे कितना पूरा किया गया? इस पर विजय शर्मा ने कहा कि 5 प्रतिशत दिव्यांग को ओर 14 प्रतिशत अल्पसंख्यक को देना है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिन-जिन जिलों में प्रधानमंत्री आवास के मकान में पैसे के लेन देन की शिकायत हुई है, उन जिलों के कलेक्टरों को निलंबित किया जाएगा? इस पर विजय शर्मा ने कहा मुख्यमंत्री विष्णुदेव की सरकार में सुशासन भी है, और सुदर्शन भी है. आपके पास कोई जानकारी है तो दें जांच होगी.
इस पर चरण दास महंत ने इसके बाद मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कहा कि जिन जिन स्थानों में राशि नहीं दी है, वह सूची है, उसमें जशपुर जिला भी शामिल है. बीजापुर में तो केवल 38 प्रतिशत की राशि दी है. भुगतान क्या बाद में करेंगे या नहीं करेंगे?
इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार और परीक्षण की आवश्यकता होगी, लेकिन 30 जून तक लेबर पेमेंट कर दिया गया है, अगर आपको पास कुछ जानकारी होगी उसकी जानकारी मुझे दे सकते है. इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कई ऐसी सूची है, जिसकी मेरे पास फोटो भी है. आप इजाजत देंगे तो मैं विधासभा अध्यक्ष के पटल पर भी रख दूंगा.
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पर कहा कि मुझे बड़ा कष्ट हुआ है कि मुझे नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं किसी को घूमा रहा हूं, जबकि इनके शासन काल में इन्होंने इस कार्य में लेटलतीफी की है. सारे पत्र मेरे पास हैं, जिसमें इन्होंने आवास को लेने से इनकार किया. मंत्री विजय शर्मा के जवाब से सदन में कांग्रेस विधायक आक्रोशित हो गए, और पक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ.
सदन में गूंजा सायबर अपराध का मामला, सत्ता पक्ष के विधायकों ने गृहमंत्री को घेरा…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन की कार्रवाई के दौरान एक बार फिर भाजपा के ही विधायक सरकार को घेरा. भाजपा विधायक सुनील सोनी के बाद राजेश मूणत और अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल में प्रदेश में साइबर क्राइम को लेकर सवाल किया.
रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने कहा कि प्रदेश में साइबर ठगों के चंगुल में लगातार लोग फंस रहे हैं. साइबर विशेषज्ञ नियुक्त नहीं किया गया है. आईपीएस की नियुक्ति इसके लिए नहीं है. साइबर थाना है, लेकिन कहां है, कई लोग जान नहीं पाते. अपराध दर्ज होने के आंकड़े 16 हजार से ज्यादा है, ऐसा एनसीआरबी भी बता रहा है, एआई भी बता रहा है.
डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साइबर थाना ही नहीं बल्कि रायपुर में कम्पोजिट साइबर भवन है, हम सदस्य को वहां ले जाएंगे. विशेषज्ञ की नियुक्ति भी जल्द होगी. उन्होंने कहा कि छह महीने की ट्रेनिंग लेकर साइबर के एक्सपर्ट आ चुके हैं, वो विशेषज्ञ से कम नहीं है.
गृह मंत्री ने बताया कि साइबर अपराध के 1301 आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं. एआई पर ज्यादा विश्वास नहीं करें. हम सही आंकड़े दे रहे हैं. साइबर थाने की बात नहीं, बल्कि साइबर सेल की बात हर जिले में हुई थी. एनसीआरबी का डाटा 2022 के बाद आया ही नहीं, फिर नई जानकारी कैसी आएगी?
इस पर सुनील सोनी ने सवाल किया कि जनवरी 2024 से जून 2025 तक कितने लोगों को जेल भेजा गया? इस पर विजय शर्मा ने बताया कि बैंक वालों पर 3 प्रकरण दर्ज किया गया है. 7 आरोपियों को जेल में डाला गया है.
भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि अधिकारी लगातार ट्रेनिंग लेकर आ रहे हैं, फिर भी साइबर क्राइम के मामले लगातार आ रहे हैं. 107 करोड़ राशि ठगे गए हैं, लगभग 3 करोड़ राशि ही वापस हो पाए. इसके लिए एक आईजी स्तर का अधिकारी नियुक्त होना चाहिए. विजय शर्मा ने कहा कि पैसे वापसी की प्रक्रिया कोर्ट से होकर गुजरती है. आईजी स्तर के अधिकारी की नियुक्ति इसमें होती है, जो हो चुकी है.
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल किया कि साइबर क्राइम रोकने कितने कमांडो तैयार किए गए हैं? नियुक्ति कितने की हुई? विशेषज्ञों की भर्ती कब होगी? विजय शर्मा- विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रियाधीन है.
SP ने 100 डीजे संचालकों के साथ की बैठक, नियमों का पालन नहीं करने पर होगी सख्त कार्रवाई
दुर्ग। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने आगामी त्योहारों से पहले डीजे संचालकों के साथ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की गाइडलाइन को लेकर अहम बैठक ली. संचालकों को हाइकोर्ट के नियमानुसार प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिये हैं. बैठक में जिले के लगभग 100 डीजे संचालक शामिल हुए थे, सभी को नियमो का पालन करने की जानकारी दी गई. वहीं पालन नहीं करने वालो पर सख्त कार्रवाई किए जाने की बात कही गई.
दुर्ग ग्रामीण के एएसपी अभिषेक झा और सीएसपी भिलाई नगर सत्यप्रकाश तिवारी ने पुलिस नियंत्रण कक्ष भिलाई में दुर्ग जिले को डी.जे. संचालकों की बैठक लेकर आगामी त्यौहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए जारी निर्देशो की जानकारी संचालको को दी है. जिसके तहत शासकीय संपत्ति या अन्य प्रकार की किसी वस्तुओं/ सुविधाओं का उपयोग जाने के लिए उसकी पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है.
75dB से जायदा नहीं होनी चाहिए ध्वनि
बैठक में सपष्ट किया गया कि लाउड स्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग सार्वजनिक स्थलों पर उस क्षेत्र के परिवेश ध्वनि पैमाने से 10 डी. बी. (ए) से अधिक नहीं होना चाहिये या 75 डी. बी. (ए) से अधिक नही होना चाहिए है. इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ध्वनि विस्तारक यंत्र, वाद्य यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा.
ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग के दौरान एन.जी.टी. और शासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिये निर्धारित मानकों, कोलाहल अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा. संचालकों को जानकारी दी गई कि वाहनों पर साउंड सिस्टम का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा. मार्ग ब्लाक करने पर भी पुलिस कार्रवाई करेगी.
जोन्स आफ साइलेंस घोषित
इसके अलावा शासकीय, अशासकीय अस्पताल, समस्त शासकीय, अशासकीय शैक्षणिक संस्थान, जिला एवं सत्र न्यायालय, अन्य न्यायालय, शासकीय कार्यालय की 100 मीटर की सीमा को कोलाहल प्रतिबंधित क्षेत्र (जोन्स आफ साइलेंस ) घोषित किया गया है. इसका पालन किया जाना अनिवार्य होगा.
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को कलेक्टर ने जारी किया नोटिस, फेसबुक पोस्ट पर जताई आपत्ति, कहा….तत्काल पोस्ट डिलीट करें
कोरबा। कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। आपको बता दे जयसिंह अग्रवाल ने पिछले दिनों कोरबा प्रवास पर पहुंचे राज्यपाल, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर और कलेक्टर का एक फोटो अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया। जिसमें उन्होने राज्यपाल और कलेक्टर के सामने खड़े प्रदेश के सीनियर आदिवासी नेता का अपमान बहुत की कष्टप्रद होने की बात लिखते हुए सवाल उठाया। जयसिंह अग्रवाल के इस पोस्ट के बाद एक तरफ जहां राजनीति गरमा गयी है। वहीं दूसरी तरफ कलेक्टर अजीत वसंत ने इस पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी कर तत्काल फेसबुक पोस्ट को डिलीट करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री रहे जयसिंह अग्रवाल अपने बयानों और IAS अफसरों के साथ ठनने को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रहे है। ऐसे में एक बार फिर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत एक फेसबुक पोस्ट को लेकर आमने-सामने हो गये है। दरअसल ये पूरा मामला पिछले दिनों कोरबा प्रवास पर पहुंचे राज्यपाल रामेन डेका के साथ पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के एक फोटो से जुड़ा हुआ है। 12 जुलाई को कोरबा प्रवास पर पहुंचे राज्यपाल से ननकीराम कंवर मिलने पहुंचे थे। उस वक्त राज्यपाल के साथ कमरे में कलेक्टर अजीत वसंत भी मौजूद थे। राज्यपाल से मुलाकात और बातचीत के बाद ननकीराम कंवर ने एक राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया।
ननकीराम कंवर के ज्ञापन को राज्यपाल मौके पर ही पढ़ने लगे। इस दौरान राज्यपाल और कलेक्टर बैठे हुए है और ननकीराम कंवर मौके पर खड़े थे, तभी एक फोटो क्लिक किया गया। ननकीराम कंवर का राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने का फोटो बकायदा मीडिया में जारी किया गया। लेकिन इस फोटो पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सवाल उठाते हुए प्रदेश के सीनियर आदिवासी नेता का अपमान करने का मुद्दा बता दिया। जयसिंह अग्रवाल ने अपने फेसबुक पेज पर उक्त फोटो को पोस्ट करते हुए लिखा कि…..“छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता का अपमान बहुत ही कष्टप्रद है। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता,पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर खड़े है, जबकि महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के साथ कलेक्टर अजीत वसंत बैठे हुए है। यह जान और सुनकर अत्यंत पीड़ा हुई।”
14 जुलाई को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के इस फेसबुक पोस्ट के आम होते ही राजनीति गरमा गयी। इस पूरे मामले में सीनियर आदिवासी नेता के अपमान को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सीधे तौर पर कलेक्टर अजीत वसंत पर निशाना साधा गया। लिहाजा कलेक्टर अजीत वसंत ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी कर उक्त पोस्ट पर आपत्ति जतायी है। कलेक्टर ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि जब ननकीराम कंवर राज्यपाल से मिलने कक्ष में पहुंचे, तब उन्होने उनका अभिवादन किया गया। इसके बाद ननकीराम कंवर अपने निर्धारित स्थान पर बैठे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि उक्त तस्वीर तब की है, जब ननकीराम कंवर राज्यपाल को ज्ञापन सौंप रहे थे।
नोटिस जारी कर कलेक्टर ने पूर्व मंत्री को दी चेतावनी
कलेक्टर अजीत वसंत ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी कर कहा है कि…. आपके द्वारा उक्त तस्वीर को दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्रचारित-प्रसारित किया गया है। आपका यह कृत्य सामाजिक वर्गो के बीच विद्वेष फैलाने की मंशा रखता है, साथ ही शासन और प्रशासन की छवि धूमिल कर आम नागरिकों के मन में असंतोष की भावना को जन्म देने हेतु लक्षित है। कलेक्टर ने इस पूरे प्रकरण में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को उक्त फेसबुक पोस्ट को तत्काल डिलीट करने का निर्देश दिया है। ऐसा नही करने पर शासन-प्रशासन के प्रति आम नागरिकों के मन में असंतोष की भावना उत्पन्न होने की संभावना जताते हुए भारतीय न्याय संहिता के तहत दंण्डनीय अपराध होेन की चेतावनी दी है।
ननकीराम कंवर ने किसी तरह के अपमान की बात से किया इंकार
इस पूरे मुद्दे पर पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर का बयान भी सामने आ गया है। उन्होने स्पष्ट किया कि जब वे राज्यपाल से मिलने गये, तब उन्हे सम्मान पूर्वक राज्यपाल के समक्ष ले जाया गया। कमरें में वह राज्यपाल के साथ चर्चा कर अपनी बाते रखी। इसके बाद उन्होने विधिवत राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर वापस लौट आये। इस दौरान उनके साथ किसी भी तरह का ऐसा कृत्य नही किया गया, जिससे उनके सम्मान को ठेस पहुंचा।
बस्तर क्षेत्र में बढ़ रहा मलेरिया का प्रकोप और CGMSC के वेयर हाऊसों में नहीं है मलेरिया किट।
cgmsc यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड के निर्माण का मकसद था कि प्रदेश भर के अस्पतालों में स्वस्थ्य सुविधाए बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जा सके. परतु आज यह संस्था भ्रस्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है. ऐसा कोई दिन नहीं होता जब इस संस्था की गड़बड़िया समाचार पत्रों और टीवी चैनलों की सुर्ख़ियों में स्थान नहीं आता. यह संस्था निश्चित रूप से स्वस्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के लिए लाभ का जरिया है परन्तु यह विष्णुदेव सरकार के लिए बड़ी परेशानी का कारण है. जो भविष्य में सरकार को बड़ी तकलीफ देने जा रहा है.
रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे चल रहा है इस बात का एक और प्रमाण आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा और सुकमा से आई खबर से हो रही है। जानकारी के मुताबिक दंतेवाड़ा के आश्रम और पोटा केबिन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में से 350 विद्यार्थी मलेरिया पॉजीटिव पाए गए हैं। इसी प्रकार सुकमा जिले में भी 468 लोगों में मलेरिया के लक्षण देखे गए हैं। यहां पर सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्मित संस्था सीजीएमएससी के वेयरहाउस में मलेरिया और डेंगू जांच के किट उपलब्ध नहीं है। यह केवल हम नहीं कह रहे इस संस्था की आधिकारिक वेबसाइट में आधिकारिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है। ऐसी स्थिति में स्थानीय डॉक्टर मरीजों की जांच इमरजेंसी फंड से किट खरीद कर जांच करा रहे हैं।
CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों एवं ईलाज हेतु उपकरणों की व्यवस्था खरीदी कर प्रदान करता है। अपनी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इनका प्रदेश भर में 16 वेयरहाउस है। अस्पतालों को जिन भी दवाइयां की आवश्यकता होती है वह इन वेयरहाउसों से मंगा लेते हैं।
परंतु इन दिनों सीजीएमएससी की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है। जिस अच्छी सोच के साथ इसका गठन हुआ था उस सोच पर अब पानी फिर चुका है। यह संस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई है। बेईमान अधिकारी डंके की चोट पर सरकारी खजाने में यहां डाका डाल रहे हैं। और जो भी व्यक्ति स्वास्थ्य मंत्री बनकर आता है इस CGMSC कुछ नया कांड कर जाता है। जैसे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज कर रहे हैं।
चलिए विलंब ना करते हुए छत्तीसगढ़ की आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा हूं।
आप समझने की कोशिश करिएगा कि कमीशनखोरों की करतूत के चलते आपको स्वास्थ्यगत किन-किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। CGMSC की आधिकारिक वेबसाइट cgmsc.gov.in के अनुसार आज की तारीख में इनके वेयरहाउस में रैपिड डायग्नोस्टिक किट मलेरिया, डेंगू टेस्ट किट की उपलब्धता शून्य है। वेबसाइट में जाकर इस कोड के जरिए यह हर कोई देख सकता है????
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