प्रदेश
IFS मयंक अग्रवाल को सुशासन एवं अभिसरण विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया
रायपुर। भारतीय वन सेवा के 2016 बैच के आईएफएस अधिकारी मयंक अग्रवाल को प्रतिनियुक्ति पर लेते हुए उन्हें सुशासन एवं अभिसरण विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है. इसके साथ-साथ उन्हें चिप्स का चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
वन महकमे में हुए हालिया तबादले में ही मयंक अग्रवाल को कोरबा वन मंडल में वनमंडलाधिकारी बनाया गया था. इससे पहले वह बलौदाबाजार और गरियाबंद में वन मंडलाधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं. राज्य शासन ने वन विभाग से उनकी सेवाएं लेते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को सौंप दिया है. राज्य शासन ने आज इस आशय का आदेश जारी किया है.

युवाओं के भविष्य से कोई खिलवाड़ नहीं होने देंगे: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। आबकारी आरक्षक परीक्षा 2025 में गड़बड़ी पर रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) की अध्यक्ष रेणु पिल्लई को पत्र लिखकर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
यह मामला आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा 2025 से जुड़ा है, जिसके लिए 4 जून से 27 जून तक ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चलाई गई थी और परीक्षा का आयोजन 27 जुलाई को 200 पदों के लिए प्रस्तावित है। परंतु प्रदेशभर से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी सामने आए हैं जिन्होंने समय सीमा के भीतर परीक्षा शुल्क का सफलतापूर्वक भुगतान तो कर दिया, लेकिन व्यापम की तकनीकी विफलता यानी सर्वर की त्रुटि के चलते उनका फॉर्म अंतिम रूप से सबमिट नहीं हो सका।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन अभ्यर्थियों की शिकायतों को व्यापम कार्यालय द्वारा न तो स्वीकार किया जा रहा है और न ही कोई अधिकारी उनकी सुनवाई कर रहा है। इससे आहत अभ्यर्थियों ने सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल से संपर्क कर न्याय की गुहार लगाई।
श्री अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को छत्तीसगढ़ में "सुशासन तिहार" की भावना और नागरिक-केन्द्रित शासन व्यवस्था के विरुद्ध बताया है। उन्होंने व्यापम अध्यक्ष से स्पष्ट रूप से कहा है कि, जो अभ्यर्थी शुल्क का भुगतान कर चुके हैं, उन्हें परीक्षा से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। ऐसे अभ्यर्थियों को एक या दो दिन का अतिरिक्त अवसर देकर फॉर्म ऑफलाइन या ऑनलाइन पूरा करने की सुविधा तत्काल दी जाए।
साथ ही उन्होंने व्यापम को यह भी निर्देशित किया है कि, एक भी पात्र अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित न होने दिया जाए। श्री अग्रवाल ने व्यापम अध्यक्ष से यह अपेक्षा भी जताई है कि इस विषय में आवश्यक कार्यवाही कर सात दिवस के भीतर उन्हें पूर्ण विवरण सहित रिपोर्ट प्रेषित की जाए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस बात पर बल दिया कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का अन्याय न हो, यह सरकार और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आशा जताई है कि व्यापम इस मामले में शीघ्र, पारदर्शी और संवेदनशील कार्रवाई करेगा।

बीजापुर में शिक्षा को नई रफ्तार: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 16 स्कूलों का किया शुभारंभ, बच्चों को बांटी वेलकम किट
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को बीजापुर जिले में अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान 14 बंद पड़े स्कूलों को पुनः चालू करते हुए कुल 16 शालाओं का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने हाल में 13 वर्षीय छात्र की नक्सलियों द्वारा हत्या किये जाने को लेकर गहरी चिंता जाहिर की और समाज से ऐसी हिंसा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

विकास और संवेदनशीलता के बीच संतुलन
जगदलपुर से सड़क मार्ग से बीजापुर पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सबसे पहले भैरमगढ़ ब्लॉक में निर्माणाधीन पुंडरी पुल का निरीक्षण किया। कार्य में देरी को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए। इसके बाद वे पास ही स्थित सीआरपीएफ कैंप पहुंचे, जहाँ उन्होंने सुरक्षाबलों के जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया।

शिक्षा का दीप जलाने की पहल
बीजापुर के एजुकेशन सिटी स्थित नवोदय विद्यालय में आयोजित ‘शाला प्रवेश उत्सव’ कार्यक्रम में भाग लेते हुए उपमुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में बीजापुर में हो रहे सकारात्मक बदलावों की सराहना की। उन्होंने ‘वनडे स्कूल दयाकाल योजना’ के तहत प्रवासी और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वेलकम किट वितरित की और उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ने का प्रयास किया।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, “बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले में शिक्षा की लौ जलाना आसान नहीं है, लेकिन यह बदलाव संघर्ष और प्रतिबद्धता का परिणाम है। शिक्षक समाज के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। शिक्षा ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।”
नक्सली हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने हाल ही में एक 13 वर्षीय छात्र की नक्सली हत्या पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना न केवल अमानवीय है, बल्कि पूरे समाज के लिए शर्मनाक भी है। उन्होंने कहा, “अब जंगलों में हिंसा और मासूमों की हत्याओं के लिए कोई जगह नहीं बची है। समाज को एकजुट होकर इन घटनाओं को रोकना होगा।”
उन्होंने एक सीआरपीएफ जवान की मिसाल देते हुए बताया कि किस प्रकार एक सर्च ऑपरेशन के दौरान उस जवान पर एक भालू ने हमला किया, लेकिन आदेश न होने के कारण उसने गोली नहीं चलाई। उन्होंने इसे सुरक्षाबलों की मानवीय सोच और अनुशासन का प्रतीक बताया। उपमुख्यमंत्री ने कहा “हमारे जवान केवल सुरक्षा के प्रहरी नहीं हैं, वे मानवीय मूल्यों और प्रकृति के प्रति सम्मान के प्रतीक भी हैं। यही संवेदनशीलता और अनुशासन हमारी असली ताकत है।”
राजधानी में अत्याधुनिक बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर होगा स्थापित: सीएम साय की विशेष पहल पर 20.55 करोड़ की स्वीकृति
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर अग्रसर हो रहा है। भारत सरकार एवं राज्य शासन के सहयोग से रायपुर में जैव प्रौद्योगिकी पार्क परियोजना की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इस सेंटर की स्थापना के लिए भारत सरकार, राज्य शासन एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मध्य त्रिपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ जैव प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन सोसायटी है।
इस बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर का मुख्य उद्देश्य राज्य में जैव संसाधनों के दोहन के साथ-साथ नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना है। यहां युवाओं को जैव प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस इंक्युबेशन सेंटर में कुल 23 आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जिनमें बीएस-4 स्तर की जैव सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही दो सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन एवं एनालिटिकल टेस्टिंग लैब की भी स्थापना की जा रही है।
इंक्युबेशन सेंटर में 17 सूक्ष्म एवं लघु और 6 वृहद उद्योगों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। कुल 23 स्टार्टअप कंपनियों के लिए कार्यालय स्थापित किए जाएंगे, जो तीन वर्षों तक सेंटर में कार्यरत रह सकेंगी। कृषि और फार्मा बायोटेक्नोलॉजी से संबंधित स्टार्टअप को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बायोटेक इंक्युबेशन सेंटर के निर्माण एवं फर्निशिंग कार्य के लिए 20 करोड़ 55 लाख रुपये की द्वितीय पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल से छत्तीसगढ़ जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा। इससे जहां एक ओर शोध और उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित होगा, वहीं दूसरी ओर रोजगार और उद्यमिता के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य को भी नई दिशा देगी।
खेत में पलटी बच्चों से भरी स्कूल वैन, घटना स्थल पर मची अफरा-तफरी
सूरजपुर। बच्चों से भरी स्कूल वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में पलट गई. इस हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई. पूरा मामला प्रेमनगर थाना क्षेत्र का है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची.
मिली जानकारी के अनुसार स्कूल वैन ब्रह्मपुर से बच्चों को लेकर वृंदावन जा रही थी. इस दौरान फुलकोना के पास अनियंत्रित होकर स्कूल वैन खेत में जाकर पलट गई. इस वैन में कंचनपुर स्थित निजी स्कूल के 14 से 15 बच्चे सवार थे. सभी बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं. पुलिस घटना की जांच में जुटी है.
कोयला घोटाला मामला : ED की कार्रवाई को सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया ने दी चुनौती, हाइकोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला रखा सुरक्षित
बिलासपुर। प्रदेश के बहुचर्चित कोयला घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया सहित परिवार के लोगों की संपत्ति अटैच किए जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं केजेएसएल कोल पावर और इंद्रमणि मिनरल्स ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई है। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद सभी 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस विभू दत्त गुरु की डबल बेंच में सभी पहलुओं पर लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया है।
दरअसल, ईडी रायपुर ने अवैध कोयला लेवी घोटाले से संबंधित मामले में सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 30/01/2025 को कुल मिलाकर 49.73 करोड़ रुपये मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है, जिसमें बैंक बैलेंस, वाहन, नकदी, आभूषण और जमीन शामिल हैं। इसके साथ ही सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी, कैलाशा तिवारी, दिव्या तिवारी की भी संपति अटैच की गई है। वहीं सौम्या चौरसिया उनके भाई अनुराग चौरसिया, मां शांति देवी, समीर विश्नोई और अन्य ने अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ याचिकाएं लगाई। कोर्ट में संबंधित अपीलकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा, निखिल वार्ष्णेय, शशांक मिश्रा, अभ्युदय त्रिपाठी और अन्य को सुना। जिसके बाद प्रतिवादी के वकील डॉ. सौरभ कुमार पांडे को भी सुना गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बता दें कि सौम्या चौरसिया को बीते दिनों हाइकोर्ट से जमानत मिल चुकी है और कोर्ट ने उन्हें राज्य से बाहर रहने का आदेश दिया है। वहीं सूर्यकांत तिवारी अभी भी जेल में बंद हैं।
क्या है कोयला लेवी मामला
ED की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों से मिलीभगत के बाद ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से अवैध वसूली की। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयले के हर टन पर 25 रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया गया था।
खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्रोई ने आदेश जारी किया था। यह परमिट कोल परिवहन में कोल व्यापारियों को दिया जाता है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया। इसमें जो व्यापारी पैसे देता उसे ही खनिज विभाग से पीट और परिवहन पास जारी होता था, यह रकम 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा होती थी। इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपये की वसूली की गई।
कहां खर्च की अवैध कमाई
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की राशि को सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने में खर्च किया गया। साथ ही चुनावी खर्चों के लिए भी इस अवैध राशि का इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने इससे कई चल-अचल संपतियों को खरीदा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विजन – विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लिए डिजिटल क्रांति को नई गति देने पर बल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित भारत 2047 के साथ विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्यों को पूर्ण करने एवं सहज, सरल, त्वरित और पारदर्शिता के साथ सुचारू शासन की दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी का महत्वपूर्ण योगदान है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों, विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा संभागों में नए मोबाइल टॉवर लगाने तथा फाइबर नेटवर्क लाइन बिछाने जैसे कार्यों में तेजी लाई जाए। आने वाले समय में राज्य में समय सीमा के भीतर चरणबद्ध रूप से 5,000 से अधिक मोबाइल टॉवर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-डिस्ट्रिक्ट 2.0 के माध्यम से वर्तमान में विभिन्न विभागों की 85 ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार करते हुए 250 अन्य ऑफलाइन सेवाओं को भी ऑनलाइन सेवाओं में तब्दील किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि योजनाओं का लाभ लोगों को घर बैठे ही ऑनलाइन प्राप्त होगा, तो इससे समय की बचत होगी तथा कार्यालय आने-जाने में होने वाला खर्च भी कम होगा। इसके साथ ही टीयर-थ्री के अनुरूप स्टेट डाटा सेंटर को अपग्रेड करने की भी बात कही गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में प्रदेश में विभाग द्वारा संचालित प्रमुख परियोजनाओं—अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, नियद नेल्लानार एवं L.W.E. सैचुरेशन डैशबोर्ड, भारतनेट फेस-2, छत्तीसगढ़ स्टेट डाटा सेंटर (CGSDC), आधार एनरोलमेंट इन-हाउस मॉडल, ई-डिस्ट्रिक्ट 2.0, सीजी स्वान, ई-प्रोक्योरमेंट तथा कैपेसिटी बिल्डिंग सहित अन्य योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।
इस दौरान प्रमुख सचिव निहारिका बारिक ने विगत सवा साल में विभाग द्वारा अर्जित महत्वपूर्ण उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विगत 4 वर्षों से लंबित डाटा सेंटर के अपग्रेडेशन की निविदा प्रक्रिया पूर्ण की गई, खनिज 2.0 पोर्टल का गो लाइव किया गया, वाई-फाई मंत्रालय योजना तथा ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल सफलतापूर्वक शुरू हुए। इसके साथ ही भारतनेट फेज-2 परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किया गया एवं अटल मॉनिटरिंग पोर्टल डैशबोर्ड का निर्माण कर 19 विभागों की 100 योजनाओं के KPI इसमें प्रदर्शित किए गए हैं।
इस बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मलिक सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
अवैध प्लॉटिंग रोकने नया कानून लागू, नहीं बेच पाएंगे सड़क के लिए तय जमीन, बोर्ड पर देनी होगी पूरी जानकारी…
रायपुर। राज्य में अवैध प्लॉटिंग को रोकने के लिए नया कानून लाया गया है. बुधवार को जारी छत्तीसगढ़ किफायती जन आवास नियम 2025 की अधिसूचना कर दी गई. इसके साथ ही अब राज्य में अब नए नियमों के तहत ही प्लाटिंग होगी. दावा किया जा रहा है कि इससे अवैध प्लाटिंग की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी.
राज्य में पहली बार ऐसा होगा जब प्लाटिंग के दौरान आवासीय एरिया में कृषि जमीन शामिल होगी तो उसे भी तुरंत आवासीय कराया जा सकेगा. इसके लिए प्लाटिंग करने वालों को कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक शुल्क अदा करना होगा. इससे सरकार का राजस्व बढ़ेगा और कृषि जमीन पर अवैध प्लाटिंग का काम बंद हो जाएगा.
लोगों को प्लॉट काटकर तभी बेच सकेंगे जब प्लाटिंग करने या वाले के पास 2 एकड़ जमीन होगी. इससे कम जमीन पर प्लाटिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी. इतना ही नहीं प्लाटिंग करने वाले को पहले से तय करना होगा कि प्लाटिंग के किस हिस्से में कौन सा निर्माण होगा. इसके लिए बाउंड्रीवॉल बनाकर वहां बोर्ड भी लगाना होगा. इतना ही नहीं अब हर प्लाटिंग एरिया में सड़कें भी एक समान होंगी. यानी सड़क की लंबाई-चौड़ाई भी पहले से तय की जाएगी. इस नियम के बाद कोई भी बिल्डर या कॉलोनाइजर प्लाटिंग खत्म होने के बाद रोड-रास्ते की जमीन नहीं बेच पाएगा.
क्या है नए नियम में
अब 2 एकड़ से कम जमीन पर प्लाटिंग नहीं हो सकेगा. प्लाटिंग से पहले बताना होगा कि गार्डन, क्लब, स्वीमिंग पूल, मंदिर समेत बाकी निर्माण किस जमीन पर होंगे. उस जमीन पर बाउंड्रीवॉल करने के साथ ही जो निर्माण होगा, उसका बोर्ड लगाना होगा. सड़क की लंबाई-चौड़ाई भी पहले से तय होगी. 9 मीटर से कम की सड़क कहीं नहीं होगी. इसके अलावा प्लॉटिंग एरिया में कृषि जमीन होगी तो उसे कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार शुल्क लेकर आवासीय कर देंगे.
नए आवास नियम से ग्राहकों को फायदा
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के उपसंचालक विनित नायर बताते हैं कि अवैध प्लॉटिंग को पूरी तरह से खत्म करने के लिए ही नए आवास नियम बनाए गए हैं. राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया गया है. अब राज्यभर में नए नियमों के साथ ही प्लाटिंग होगी. इससे हर वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
ACB का एक्शन, 5000 रुपये घूस लेते पटवारी गिरफ्तार, नामांतरण के बदले मांगी थी रिश्वत
अभनपुर। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ACB की टीम ने रिश्वतखोरी की शिकायत पर छापेमारी कर पटवारी पुष्पेंद्र गजपाल को 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला रायपुर जिले के अभनपुर ब्लॉक का है।
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई अभनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत की गई है। ग्राम गोतियारडीह निवासी प्रार्थी जयवर्धन बघेल जो कि अभनपुर युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष हैं। जयवर्धन ने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक जमीन खरीदी थी जिसके नामांतरण करने के नाम पर पटवारी पुष्पेंद्र गजपाल रिश्वत की मांग कर रहा था। जिसकी शिकायत उन्होंने एसीबी से की थी।
शिकायत के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ धर दबोचा। फ़िलहाल, पटवारी पुष्पेंद्र गजपाल को हिरासत में लेकर एसीबी की टीम पूछताछ कर रही है।
रायपुर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, थोक में बदले गए थाना प्रभारी, देखें लिस्ट…
रायपुर। रायपुर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ है। एसएसपी लाल उमेद सिंह ने 27 थाना प्रभारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इस लिस्ट में शहर के कई थानों की कमान नए थाना प्रभारियों को सौंपी गई है।
देखिये लिस्ट –

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की महाविद्यालयों में सांसद प्रतिनिधि किये नियुक्त
रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक, सामाजिक एवं विकासात्मक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने एवं निराकरण हेतु सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं।
इन प्रतिनिधियों की नियुक्ति का उद्देश्य महाविद्यालयों में शिक्षा, संसाधन, छात्रहित तथा प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी समस्याओं की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त करना और उनका निराकरण प्राथमिकता से कराना है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा मनोनीत किए गए प्रतिनिधि...
1. शासकीय जीएनए स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भाटापारा (बलौदाबाजार) से अभिषेक मिश्रा
2. स्व. गोविंद सारंग शासकीय विधि महाविद्यालय, भाटापारा (बलौदाबाजार) से सुरेश यदु
3. शासकीय महाविद्यालय, सिमगा से नीरज शर्मा
4. नवीन महाविद्यालय, माना कैंप (रायपुर) से डॉ. निमई विश्वास
5. रामप्रसाद देवांगन शासकीय महाविद्यालय, खरोरा से विकास ठाकुर
6. स्व. नंदकुमार पटेल शासकीय महाविद्यालय, बिरगांव (रायपुर) से संजय पतिवारी
7. संत गोविंदराम सदानी शासकीय कला एवं महिला महाविद्यालय, देवेंद्रनगर से सुरेंद्र छाबड़ा
8. श्री कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय, गोबरा नयापारा से अशोक गंगवाल
9. श्री सत्यनारायण शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, कोहका नेवरा (तिल्दा) से राम पंजवानी
10. पं. श्यामा चरण शुक्ल महाविद्यालय, धरसींवा से दिलेंद्र बंछोर
11. शासकीय महाविद्यालय, अभनपुर से कचरू भट्टर
12. शासकीय नवीन महाविद्यालय, अमलीडीह से रविंद्र ठाकुर
13. शासकीय नवीन महाविद्यालय, गुढ़ियारी (रायपुर) से पुरुषोत्तम देवांगन
14. शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय, गोबरा नयापारा (रायपुर) से मधु बाफना
15. शासकीय बद्री प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, आरंग से सूरज लोधी
16. भक्तिमाता कर्मा शासकीय महाविद्यालय, समोदा (आरंग) से डॉ. नेतराम वर्मा
17. शासकीय नवीन महाविद्यालय, तामासिवनी से मिथलेश सिन्हा
18. शासकीय दाऊ कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलौदाबाजार से आलोक अग्रवाल
19. शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, बलौदाबाजार से नीलम सोनी
20. छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर से नितेश शुक्ला
21. शहीद राजीव पांडे महाविद्यालय, भाटागांव (रायपुर) से राकेश सिंह
22. डॉ. राधाबाई नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मठपारा (रायपुर) से उपेंद्र कश्यप
23. शासकीय दुर्गा बाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायपुर से संध्या वर्मा
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये प्रतिनिधि महाविद्यालयों से छात्रों की समस्याएं, योजनाओं की प्रगति तथा प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां समय-समय पर उपलब्ध कराएंगे, जिससे शिक्षा क्षेत्र में और अधिक सशक्त हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा सकेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने डीएपी की कमी पूरा करने पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था की, मुख्यमंत्री ने कहा किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं
रायपुर। देश में डीएपी खाद के आयात में कमी के चलते चालू खरीफ सीजन में राज्य में डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने का वैकल्पिक मार्ग छत्तीसगढ़ सरकार ने निकाल लिया है। किसानों को डीएपी खाद की किल्लत के चलते परेशान होने की जरूरत नहीं है। डीएपी के बदले किसानों को भरपूर मात्रा में इसके विकल्प के रूप में एनपीके और एसएसपी खाद की उपलब्धता सोसायटियों के माध्यम सुनिश्चित की जा रही है। डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एनपीके (20ः20ः013) और एनपीके (12ः32ः13) के वितरण लक्ष्य में 3.10 लाख मीट्रिक टन तथा एसएसपी के वितरण लक्ष्य में 1.80 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि करने के साथ ही इसके भण्डारण एवं वितरण की भी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की है। एनपीके और एसएसपी के लक्ष्य में वृद्धि होने के कारण चालू खरीफ सीजन में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का वितरण लक्ष्य 14.62 लाख मीट्रिक टन से 17.18 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे-एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो, इस पर कड़ी निगाह रखी जा रही है। किसानों की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि चालू खरीफ सीजन में 14.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य कृषि विभाग द्वारा निर्धारित किया गया था, जिसमें यूरिया 7.12 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 3.10 लाख मीट्रिक टन, एनपीके 1.80 लाख मीट्रिक टन, एमओपी 60 हजार मीट्रिक टन, एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल था। डीएपी के कमी को देखते हुए कृषि विभाग ने इस लक्ष्य को संशोधित किया है। डीएपी की आपूर्ति की कमी चलते इसके लक्ष्य को 3.10 लाख मीट्रिक टन से कमकर 1.03 लाख मीट्रिक टन किया गया है, जबकि एनपीके के 1.80 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को बढ़ाकर 4.90 लाख मीट्रिक टन और एसएसपी के 2 लाख मीट्रिक टन को बढ़ाकर 3.53 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यूरिया और एमओपी के पूर्व निर्धारित लक्ष्य को यथावत् रखा गया है। इस संशोधित लक्ष्य के चलते रासायनिक उर्वरकों के वितरण की मात्रा 14.62 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर अब 17.18 लाख मीट्रिक टन हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी की कमी को अन्य उर्वरकों के निर्धारित मात्रा का उपयोग कर पूरी की जा सकती है और फसल उत्पादन बेहतर किया जा सकता है। फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश सहित मात्रा में मिले तो उपज में कोई कमी नहीं आती है। डीएपी की कमी को देखते हुए किसानों को अन्य फॉस्फेट खादों के उपयोग की सलाह दी है। डीएपी के प्रत्येक बोरी में 23 किलोग्राम फॉस्फोरस और 9 किलोग्राम नाइट्रोजन होता है। इसके विकल्प के रूप में तीन बोरी एसएसपी और एक बोरी यूरिया का उपयोग करने से पौधों को पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस, कैल्सियम, नाइट्रोजन और सल्फर मिल जाता है। एसएसपी उर्वरक पौधों की वृद्धि के साथ-साथ जड़ों के विकास में भी सहायक है, इसके उपयोग से फसल की क्वालिटी और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है। डीएपी की कमी को दूर करने के लिए किसान जैव उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ-2025 में किसानों को विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 12.13 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण कराया गया है, जिसमें से 7.29 लाख मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है। राज्य में वर्तमान में सहकारी और निजी क्षेत्र में 4.84 लाख मीट्रिक टन खाद वितरण हेतु उपलब्ध है।
जमीन की मालकिन को 30 साल बाद मिला न्याय, हाईकोर्ट ने SECL को दिया नौकरी देने का आदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोरबा में सालों पहले SECL खदान के लिए सालों पहले कई लोगों की जमीनें अधिग्रहित की गई थी. इसके एवज में जमीन के मालिकों को SECL में नौकरी और मुआवजा देने का वादा किया गया था. इसी क्रम में दीपका गांव में भी एक महिला की जमीन अधिग्रहित की गई. उसे मुआवजा तो दिया गया, लेकिन नौकरी किसी फर्जी व्यक्ति को दे दी गई, जिसने महिला का बेटा होने का दावा किया था. इस मामले में महिला ने 30 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उसे आज इंसाफ मिल गया.
दरअसल, कोरबा के दीपका गांव की निर्मला तिवारी की 0.21 एकड़ जमीन 1981 में कोयला खदान के लिए अधिग्रहित की गई थी. जिसके बदले में एसईसीएल को पुनर्वास नीति के तहत उन्हें मुआवजा और उनके परिवार के सदस्य को नौकरी देनी थी. मुआवजा तो 1985 में दे दिया गया, लेकिन नौकरी एक फर्जी व्यक्ति नंद किशोर जायसवाल को दे दी गई, जिसने खुद को याचिकाकर्ता का बेटा बताकर नौकरी हासिल की थी.
याचिकाकर्ता ने एसईसीएल प्रबंधन को इस धोखाधड़ी की जानकारी दी. महिला द्वारा लंबी लड़ाई के बाद एसईसीएल ने वर्ष 2016 में नंद किशोर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया. इसके बाद महिला ने अपने बेटे उमेश तिवारी को नियुक्ति देने की मांग की. लेकिन एसईसीएल प्रबंधन ने यह कहते हुए नौकरी देने से इनकार कर दिया कि अधिग्रहण की तारीख पर जमीन याचिकाकर्ता के नाम पर म्यूटेट नहीं थी और उसके बेटे का उस वक्त जन्म नहीं हुआ था.
हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि म्यूटेशन का रिकॉर्ड सिर्फ कब्जे का सबूत है, स्वामित्व का नहीं. जब एसईसीएल ने जमीन के बदले मुआवजा दिया था, तो यह मान लिया गया था कि याचिकाकर्ता ही जमीन की मालिक है. अगर शुरू में गलत व्यक्ति को नियुक्ति दे दी गई, तो उस गलती को सुधारते समय असली हकदार को उसका हक देना चाहिए था. महज इस आधार पर कि बेटा अधिग्रहण के समय पैदा नहीं हुआ था, उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता. एसईसीएल ने न केवल अपने वादे का उल्लंघन किया बल्कि एक गलत व्यक्ति को नौकरी देकर याचिकाकर्ता के साथ अन्याय किया. मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के बेटे को 6 जुलाई 2017 से नियुक्ति देने और इसके अलावा सभी लाभ भी उस तारीख से देने कहा है.
जिला पंचायत कार्यालय के बाहर कुर्सी लगाकर बैठे DM, देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों की लगाई क्लास
कवर्धा। सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। गुरुवार सुबह उन्होंने अचानक निरीक्षण अभियान की शुरुआत की और सबसे पहले जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे। जहां कई कर्मचारी निर्धारित समय के बाद भी गैरहाज़िर थे। जिसके बाद कलेक्टर खुद कार्यालय के मुख्य द्वार पर कुर्सी लगाकर बैठ गए और जैसे ही देरी से आने वाले कर्मचारी अंदर घुसने लगे, उन्हें वहीं रोक लिया गया।
इस दौरान कलेक्टर वर्मा ने तय समय के बाद पहुंच रहे कर्मचारियों को कार्यालय के भीतर आने से रोकते हुए उनसे कारण पूछा। कुछ कर्मचारी शर्मिंदगी में मुंह छुपाते नजर आए, तो कुछ ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी मांगी और भविष्य में समय का पालन करने का वादा किया।
कलेक्टर गोपाल वर्मा का औचक निरीक्षण यहीं नहीं थमा। इसके बाद वे जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने मरीजों से सीधी बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक लिया। इसके बाद कलेक्टर स्वामी करपात्री शासकीय विद्यालय पहुंचे और वहां भी स्टाफ की उपस्थिति जांची। साथ ही बच्चों से पढ़ाई-लिखाई को लेकर प्रश्न पूछे।
कलेक्टर की चेतावनी
कलेक्टर वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि जिले के सभी शासकीय कार्यालयों में इस तरह के अकस्मात निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। जो कर्मचारी समय की अनदेखी करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई तय है।
ATR से अमरकंटक तक नया टूरिस्ट सर्किट: जंगल, जल और संस्कृति का संगम, रोजगार के नए अवसर खुलेंगे…
बैठक में विधायक धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, दिलीप लहरिया, अटल श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर संजय अग्रवाल और सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे. मंत्री साहू ने कहा कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ के मध्य में होने के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां से गुजरते हैं. पर्यटक यहां रुककर घूमना चाहते हैं, लेकिन सुविधाओं और प्रचार की कमी के कारण इन स्थलों की जानकारी और पहुंच सीमित है.
उन्होंने एनटीपीसी, एसईसीएल और अडानी फाउंडेशन से पर्यटन विकास में सक्रिय सहयोग की अपील की. कंपनियों ने इस पहल में भागीदारी के लिए सहमति जताई है. परियोजना में केंद्र सरकार की प्रसाद योजना का भी लाभ लिया जाएगा.
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि डीपीआर बनने के बाद कंपनियों को जिम्मेदारी देकर तेजी से काम शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले पर्यटकों के लिए दो-तीन दिन ठहरने योग्य इंतजाम किए जाएंगे. अचानकमार टाइगर रिजर्व करीब 1 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है, जहां खुड़िया, केंवची और शिवतराई से प्रवेश की व्यवस्था होगी.
मंत्री साहू ने कहा कि जिले में बैगा बहुल इलाकों में होम स्टे की भी योजना बनाई जा रही है. ट्राइबल संस्कृति और ट्री विलेज का कॉन्सेप्ट यहां के पर्यटन को खास पहचान देगा. इस टूरिस्ट सर्किट के विकास से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.