प्रदेश
किसानों की चिंता दूर कर रही सरकार : केंद्रीय कृषि मंत्री ने ली खेती-किसानी की जानकारी
रायपुर। अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी।
बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मंत्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर
कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
लाभकारी फसलों के प्रति चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है। परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया, सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।
शिक्षक एलबी पेंशन विवाद : हाईकोर्ट ने खारिज की रिट अपील, कहा – नीतिगत निर्णय लेना सरकार का काम
बिलासपुर। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षक एलबी संवर्ग की पेंशन पात्रता के लिए सेवा अवधि की गणना से जुड़े मामले में राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सिंगल बेंच ने सरकार को नीतिगत निर्णय लेने का आदेश देकर कोई न्यायिक अतिक्रमण नहीं किया था, बल्कि शासन को एक ‘आदर्श नियोक्ता’ की तरह काम करने का अवसर दिया था। यह निर्णय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया है।
दरअसल, परमेश्वर प्रसाद जायसवाल व्याख्याता एलबी और अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पेंशन की मांग की थी, जिसमें कहा गया कि अपनी सेवाएं ‘शिक्षाकर्मी’ के रूप में शुरू की थी। फिर 1 जुलाई 2018 से उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में नियमित शासकीय सेवा में समाहित कर लिया गया था। नियमों के अनुसार, पेंशन पात्रता के लिए 10 वर्ष की न्यूनतम शासकीय सेवा अनिवार्य है। इन कर्मचारियों की सेवा की गणना समावेशन की तिथि 01 जुलाई 2018 से की जा रही थी, जिससे वे 2028 से पहले पेंशन के पात्र नहीं हो रहे थे, भले ही वे शिक्षाकर्मी के रूप में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हों। इसके खिलाफ शिक्षकों ने याचिका दायर की थी।
राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के इस पुनर्विचार के आदेश को रिट अपील के जरिए चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि यह मामला पहले ही तय हो चुका है और सिंगल बेंच का आदेश सरकार को एक तय हो चुके पुराने मुद्दे को दोबारा खोलने के लिए मजबूर कर रहा है। डिवीजन बेंच ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया।
तर्कसंगत आदेश पारित करने से प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी : कोर्ट
कोर्ट ने अपने पूर्व के एक समान फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि सिंगल बेंच ने किसी नीति में बदलाव नहीं किया था और न ही सीधे पेंशन देने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच ने केवल सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने को कहा था, जो कि पूरी तरह न्याय संगत है। डिवीजन बेंच ने कहा है कि यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के एक पूरे वर्ग से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा है, जिसके बार-बार सिविल परिणाम सामने आ रहे हैं और मुकदमेबाजी बढ़ रही है। शासन स्तर पर इस विषय में एक स्पष्ट और तर्कसंगत आदेश पारित करने से प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
रायपुर में उच्चस्तरीय साइबर सुरक्षा कार्यशाला : डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर
रायपुर। राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा एवं महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में “Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data” विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।
साइबर सुरक्षा अब सुशासन और जनविश्वास का विषय : सचिव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनन्द ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियां सुरक्षित, विश्वसनीय और साइबर खतरों का सामना करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विषय बन चुका है। राज्य शासन का लक्ष्य केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और लचीला बनाना भी है।
राज्य के लिए तैयार हो रहा व्यापक साइबर सुरक्षा रोडमैप
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानते हुए राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर एवं नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक
तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा। गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम साइबर सुरक्षा प्रथाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा के लिए मानकीकरण, प्रमाणन और Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया।
समूह चर्चाओं से मिले महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रभावी घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी कार्यशाला की अनुशंसाएं
कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी भेजा जाएगा।कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी टीएन सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी शशांक पाण्डेय, यूएस अग्रवाल, आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
दरअसल, वक्फ बोर्ड के उस आदेश पर मंगलवार को हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें प्रदेश की तमाम दरगाहों, उर्स और अन्य मजहबी आयोजनों में डीजे, धूमाल और नाच-गाने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया था। साथ ही आदेश के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी किया गया था।
11 जून को वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सलीम राज ने जारी किया था फरमान
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने 11 जून 2026 को यह फरमान जारी किया था, जिसमें प्रदेश के तमाम दरगाहों, उर्सों और मजहबी जलसों में डीजे पर रोक लगाई गई थी। इस आदेश में नाच-गाना, डीजे और धूमाल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। आदेश के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी किया गया था।
इसके खिलाफ सूफी इस्लामिक बोर्ड के संचालक मंडल के सदस्य फिरोज शाह अहमद की ओर से वकील देवेंद्र प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी, जिसमें वक्फ बोर्ड के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका में कहा गया कि वक्फ बोर्ड का यह आदेश उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी किया गया है। वक्फ बोर्ड को इस तरह का आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई, जिसमें याचिकाकर्ता पक्ष के तर्क को वाजिब मानते हुए वक्फ बोर्ड द्वारा जारी फरमान पर रोक लगा दी गई है।
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर मुख्यमंत्री ने किया रुद्राक्ष का पौधारोपण, कहा- छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण और आधुनिक अधोसंरचना का हो रहा विकास
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर नवा रायपुर के ग्राम पलोद में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ द्वारा आयोजित वृक्षारोपण एवं खिलाड़ी सम्मान समारोह में शामिल होकर रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं खेल प्रेमियों को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए खेल और पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण के दो महत्वपूर्ण आधार बताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत ने वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी का दावा प्रस्तुत किया है। इसी राष्ट्रीय संकल्प और आकांक्षा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए कार्यक्रम में 2036 पौधों का रोपण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल वृक्षारोपण अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, हरित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य में खेलों के लिए बेहतर वातावरण और आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जा रही है ताकि युवा अपनी प्रतिभा का पूरा प्रदर्शन कर सकें।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है। वहीं बस्तर ओलंपिक जैसे अभिनव आयोजन ने दूरस्थ अंचलों की खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दी है। इस वर्ष बस्तर ओलंपिक में लाखों युवाओं ने भाग लेकर अपनी क्षमता का परिचय दिया है, जो प्रदेश में खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए खेल क्षेत्र में विशेष बजट प्रावधान कर रही है। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अधिक आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ देश एवं प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों तथा वन विभाग के खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए नई पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में खेलो इंडिया जैसी योजनाओं ने देश में खेल संस्कृति को नई पहचान दी है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में अपार प्रतिभा है और सरकार उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हर संभव अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा ओलंपिक का आयोजन भी युवाओं को नई दिशा प्रदान कर रहा है। उन्होंने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय, बीएसएफ के आईजी संजय पंत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना: साय सरकार उठाएगी श्रमिकों के बच्चों के पढ़ाई का पूरा खर्च, 3 जुलाई तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को राज्य के चयनित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक अध्ययन की सुविधा प्रदान की जाएगी। विशेष बात यह है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस, छात्रावास, भोजन, गणवेश, लेखन सामग्री तथा अन्य आवश्यक खर्चों का पूरा वहन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा किया जाएगा। इससे श्रमिक परिवारों को बच्चों की शिक्षा के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण में अध्ययन का अवसर प्राप्त होगा।
प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और श्रमिक वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना भी इसी दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है, जिससे श्रमिकों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है।
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र एवं पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को श्रम विभाग के पोर्टल www.shramevjayate.cg.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया 22 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की सुविधा श्रम विभाग के पोर्टल, निकटतम श्रम कार्यालय, लोक सेवा केंद्र तथा श्रमेव जयते एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिससे अधिक से अधिक पात्र परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।
यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाएगी तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
रायपुर ग्रामीण पुलिस के पहले पुलिस लाइन प्रभारी बने वैभव मिश्रा, कमिश्नर संजीव शुक्ला ने जारी किया आदेश
रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस को पहली बार पुलिस लाइन प्रभारी मिल गया है। रक्षित निरीक्षक वैभव मिश्रा को रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में कानून व्यवस्था और वीआईपी ड्यूटी के दौरान बल एवं आवश्यक संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने आदेश जारी किया है।
जारी आदेश के अनुसार, रक्षित निरीक्षक वैभव मिश्रा, पुलिस कमिश्नरेट रायपुर को पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण के क्षेत्राधिकार में महत्वपूर्ण व्यक्तियों के भ्रमण और कानून व्यवस्था संबंधी ड्यूटी के दौरान पुलिस बल एवं आवश्यक संसाधनों के प्रबंधन के लिए पदस्थ किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि वैभव मिश्रा, सहायक पुलिस आयुक्त लाइन नीलेश द्विवेदी के पर्यवेक्षण में कार्य करेंगे।
बता दें कि रायपुर पुलिस लाइन से अब तक पुलिस कमिश्नरेट रायपुर और ग्रामीण के लिए बल उपलब्ध कराया जा रहा था, लेकिन अब ग्रामीण पुलिसिंग के लिए आरआई की नियुक्ति के बाद पूरी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की व्यवस्था बदलेगी।

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की दो टूक चेतावनी, सभी डीईओ से कहा – स्कूल संचालन और योजनाओं में कोताही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा के लिए आज मंत्रालय में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालयों के सुचारु संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मंत्री यादव ने प्रदेश के सभी विद्यालयों में साफ-सफाई, आवश्यक मरम्मत कार्य, पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश वितरण, साइकिल वितरण तथा अति आवश्यक कार्यों के लिए जारी राशि के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शासन की सभी सुविधाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराना विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। समीक्षा के दौरान विद्यालय छोड़ चुके (ड्रॉपआउट) बच्चों को विशेष अभियान चलाकर 31 जुलाई 2026 तक पुनः विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही शिक्षकों की VSK App के माध्यम से शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को बारहखड़ी एवं 20 तक के पहाड़े तथा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को 25 तक के पहाड़े, हिंदी एवं अंग्रेजी की धाराप्रवाह रीडिंग अनिवार्य रूप से आनी चाहिए। इसके लिए विशेष प्रयास करने अधिकारियों को निर्देशित किए। शिक्षण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने तथा शिक्षण व्यवस्था की सतत निगरानी सुनिश्चित करने कहा।
जर्जर स्कूल भवनों को डिस्मेंटल करने के निर्देश
बैठक में जर्जर विद्यालय भवनों की सूची तैयार कर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ऐसे भवनों को चरणबद्ध रूप से डिस्मेंटल करने के निर्देश दिए गए। भवनविहीन विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा किए जाने के निर्देश भी दिए गए। जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों की मूल पदस्थापना स्थल पर तत्काल वापसी सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए। इसके अलावा रमसा (RMSA) प्राप्त विद्यालयों का नियमित निरीक्षण, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना अंतर्गत केंद्रीकृत किचन व्यवस्था, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना तथा अन्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
एक अप्रैल से पाठ्यपुस्तक, गणवेश एवं साइकिल का होगा वितरण
बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के सभी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया एवं शैक्षणिक सत्र का प्रारंभ 1 अप्रैल से किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2027-28 से विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश एवं साइकिल का वितरण भी 1 अप्रैल को ही सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री यादव ने कहा कि इस व्यवस्था से शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की भांति समय पर पढ़ाई प्रारंभ होगी। पाठ्यक्रम समय पर पूर्ण होगा तथा विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों में और अधिक सुधार आएगा।
App पर पंजीयन एवं नियमित उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य
बैठक में VSK App के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्णय लिया गया कि सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को App पर पंजीयन एवं नियमित उपस्थिति दर्ज करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। वर्तमान माह की उपस्थिति के आधार पर किसी भी कर्मचारी या शिक्षक के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि जुलाई माह में स्कूल शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं शिक्षकों का एप पर पंजीयन अनिवार्य होगा। जुलाई माह का वेतन App में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही देय होगा।
शिक्षा सचिव और संचालक ने भी दिए जरूरी निर्देश
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, आयुक्त समग्र शिक्षा किरण कौशल तथा लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने भी अधिकारियों को विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा शासन के निर्देशों का गंभीरता एवं समयबद्धता के साथ पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों ने भाग लिया।
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, दरगाहों और उर्स में डीजे बैन वाले आदेश पर लगाई रोक
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की ओर से 11 जून 2026 को जारी उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें प्रदेश की दरगाहों, उर्स और अन्य मजहबी आयोजनों में डीजे, धूमाल, नाच-गाने समेत कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सलीम राज ने जारी किया था फरमान
दरअसल, वक्फ बोर्ड ने प्रदेश के तमाम दरगाहों, उर्सों व मजहबी जलसों में डीजे पर रोक लगाई थी। जारी फरमान में नाच-गाना, डीजे और धूमाल के उपयोग पर पाबंदी लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इस आदेश के उल्लंघन पर पचास हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान भी किया गया था। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने यह फरमान जारी किया था।
आदेश को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
वक्फ बोर्ड के इस फरमान से आहत सूफी इस्लामिक बोर्ड के संचालक मंडल के सदस्य फिरोज शाह अहमद की ओर से वकील देवेंद्र प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी, जिसमें वक्फ बोर्ड के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दायर कर कहा गया कि वक्फ बोर्ड का यह फरमान उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिया गया है। वक्फ बोर्ड को इस तरह का आदेश जारी करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की बेंच ने आज इस मामले में याचिकाकर्ता पक्ष के तर्क को वाजिब मानते हुए वक्फ बोर्ड द्वारा जारी फरमान पर रोक लगा दी है।
GST विभाग की बड़ी कार्रवाई : कई उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मारा छापा, पकड़ी गई एक करोड़ की टैक्स चोरी
रायपुर। राज्य जीएसटी विभाग ने रायपुर जिले के आरंग और अभनपुर क्षेत्र में संचालित विभिन्न उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब एक करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा किया है। विभाग की टीम ने पिछले एक सप्ताह से लगातार छापेमारी अभियान चलाकर बिस्किट, बेकरी, बारदाना, पोल्ट्री, पेवर ब्लॉक और पेयजल कारोबार से जुड़े कई प्रतिष्ठानों की जांच की।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई कारोबारी बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यापार करने के बावजूद या तो जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे अथवा वास्तविक कारोबार की तुलना में बेहद कम कारोबार दर्शा रहे थे। स्टेट जीएसटी अधिकारियों के अनुसार अभनपुर के कोलर स्थित एक बिस्किट फैक्ट्री, सेजबहार क्षेत्र के किराना और बेकरी कारोबारियों तथा कुछ पोल्ट्री संचालकों के यहां अब तक लगभग एक करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी जा चुकी है। जांच अभी जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि कई फैक्ट्रियां ऊंची दीवारों और बंद परिसरों के भीतर संचालित की जा रही थी, जिससे बाहर से उनके वास्तविक कारोबार का अंदाजा लगाना मुश्किल था। फैक्ट्री परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक थी और कर्मचारियों को भी गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा सामान ढोने वाले वाहनों पर किसी प्रकार की पहचान नहीं होती थी और कई मामलों में बिना वैध इनवॉइस के माल की ढुलाई की जा रही थी।
पहले रेकी की फिर कार्रवाई
जीएसटी विभाग ने छापेमारी से पहले कई दिनों तक संबंधित क्षेत्रों में गोपनीय निगरानी की। अधिकारियों ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले वाहनों और गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग की, कर्मचारियों और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई तथा माल की आवाजाही पर नजर रखी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई।
नए जीएसटी नियमों से बढ़ेगी सख्ती
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी कानून में किए गए नए प्रावधानों के तहत कर चोरी और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और अधिक कठोर होगी। बार-बार कर चोरी या फर्जीवाड़े में पकड़े जाने वाले कारोबारियों के मामलों में गैर-जमानती अपराध के प्रावधान लागू किए जा सकते हैं, जिससे दोषियों को सीधे जेल जाना पड़ सकता है।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई : स्टेट GST आयुक्त
स्टेट जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि शहर के बाहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर संचालित कारोबारों की जानकारी मिलने के बाद विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में ही लाखों रुपये की कर चोरी सामने आई है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टैक्स चोरी और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
लखनऊ अग्निकांड के बाद इंदौर में एक्शन: फायर सेफ्टी में मिली खामियां, 12 से ज्यादा कोचिंग सेंटर सील
इंदौर। लखनऊ में बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत के बाद इंदौर जिला प्रशासन और नगर निगम अलर्ट मोड पर हैं। शहरभर में फायर सेफ्टी मानकों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में प्रशासन ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले 12 से ज्यादा संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया।
प्रशासनिक टीम ने जांच के दौरान पाया कि कई संस्थानों में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण मौजूद नहीं थे। वहीं कुछ स्थानों पर आपातकालीन निकास और सुरक्षा संबंधी अन्य व्यवस्थाएं भी अधूरी मिलीं। इसके बाद एसडीएम धनश्याम धनगर के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए कई संस्थानों को सील किया गया। नगर निगम और फायर सेफ्टी विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान माखनवाला रसोई रेस्टोरेंट और रामानुजन कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया।
वहीं फायर सेफ्टी विभाग की टीम कैटेलाइजर कोचिंग क्लास में भी जांच के लिए पहुंची। जहां सुरक्षा मानकों को लेकर शिकायतें मिली थीं। कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में कई जगह अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा संसाधनों की कमी सामने आई।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने भवन संचालकों को फायर सेफ्टी मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम धनश्याम धनगर का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट भर्ती पर हाईकोर्ट का फैसला, कहा – 10 बोनस अंक काटना अवैध, अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का आदेश
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने मेडिकल लैब टेक्नोलाजिस्ट भर्ती मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान विभाग विज्ञापन में निर्धारित शर्तों से बाहर जाकर नई पात्रता या दस्तावेज संबंधी शर्तें नहीं जोड़ सकता। कोर्ट ने कोरोनाकाल में सेवाएं देने वाले अभ्यर्थी के 10 बोनस अंक काटने की कार्रवाई को मनमाना और अवैध करार देते हुए उसे नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने मेडिकल लैब टेक्नोलाजिस्ट भर्ती मामले में रायपुर निवासी मोहम्मद हाशिम को राहत देते हुए स्वास्थ्य विभाग को उसके 10 कोविड बोनस अंक बहाल करने और 40 दिनों के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करने का निर्देश दिया है। जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने कहा कि विभाग भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शर्तों से बाहर जाकर नई शर्तें नहीं जोड़ सकता।
हाशिम ने सीएमएचओ राजनांदगांव द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें कोविड काल के दौरान छह माह से अधिक सेवा देने की पुष्टि थी। इसके आधार पर अनंतिम मेरिट सूची में उसे 80.84 अंक मिले और वह प्रथम स्थान पर था, लेकिन अंतिम चयन सूची में विभाग ने मूल नियुक्ति आदेश प्रस्तुत नहीं करने का हवाला देकर उसके 10 बोनस अंक काट दिए, जिससे वह नौवें स्थान पर पहुंच गया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिकारों को प्रभावित करने वाली सीमा तक अंतिम चयन सूची और संबंधित नियुक्ति को निरस्त कर दिया। साथ ही विभाग को निर्देश दिया कि मोहम्मद हाशिम को 10 बोनस अंक जोड़कर उसकी मेरिट का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और यदि वह चयनित श्रेणी में आता है तो 40 दिनों के भीतर नियुक्ति व पदस्थापना आदेश जारी किया करें।
सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता : कांकेर के आमाटोला जंगल में मिला नक्सलियों का विस्फोटक डंप
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षाबलों को एक बार फिर बड़ी सफलता हाथ लगी है. सर्च अभियान के दौरान आमाटोला के जंगल में नक्सलियों का खुफिया डंप बरामद हुआ है. जहां हथियार समेत अन्य नक्सल सामान छिपाकर रखी गई थी. यह पूरी कार्रवाई कांकेर पुलिस, बीएसएफ और बीडीएस की संयुक्त टीम ने की है.
जानकारी के अनुसार, वरीष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार संयुक्त अभियान संचालित किया जा रहा है. इसी कड़ी में मंगलवार को छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के आमाटोला के पास जंगल में सर्चिंग के दौरान जवानों को कुछ संधिग्ध नजर आया. जांच में नक्सलियों का विस्फोटक डंप मिला, जिसमें से कई नक्सल सामान बरामद किया गया है.
नक्सल डंप से क्या-क्या मिला?
भारमार बंदुक-04 नग
वायरलेस सेट-02
रेडियो-01नग
नक्सल वर्दी-01नग
पोच-02 नग
चार्जर-01नग
बैटरी-01नग
नक्सल साहित्य के अलावा अन्य नक्सल सामग्री बरामद किया गया. जिसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया. अभियान के बाद सभी जवान वापस कैंप लौट आए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि जिले के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में आगे भी संयुक्त सर्च अभियान लगातार जारी रहेंगे.
साय कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई बड़े फैसले, ग्रामीणों को 125 दिन रोजगार की गारंटी, शुरू होगी ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना और कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 को स्वीकृति प्रदान की।
बैठक में ये फैसले लिये गये-
1. मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ’’विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है। भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।
इस योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण, आजीविकामूलक परिसंपत्तियों के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण तथा पीएम गति शक्ति से समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। विकास कार्यों की बेहतर कार्ययोजना एवं निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्रणालियों का उपयोग करते हुए पारदर्शिता, सुशासन एवं जवाबदेही को सुदृढ़ किया जाएगा।
इस योजना के क्रियान्वयन में केंद्र एवं राज्य के व्यय का अनुपात 60ः40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
2. मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना प्रारंभ करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि), प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि), सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र आदि), विपणन केंद्र तथा आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इस योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ के माध्यम से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवा व्यवसाय, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा तथा ग्रामीण बाजारों को नई गति मिलेगी और प्रदेश की ग्रामीण आजीविका को मजबूत आधार प्राप्त होगा।
3. मंत्रिपरिषद ने आज “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप का भी अनुमोदन किया है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा।
इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव उर्वरक उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना है। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य नोडल एजेंसी तथा ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
निगम की बड़ी कार्रवाई: आउटसोर्स कर्मियों के वेतन में देरी पर सिक्योरिटी एजेंसी को ₹1 लाख का जुर्माना, सफाई में लापरवाही पर दूसरी कंपनी भी नपी
जबलपुर। नगर निगम ने कर्मचारियों के हितों से खिलवाड़ करने और कार्य में लापरवाही बरतने वाली आउटसोर्स कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। निगम प्रशासन ने समय पर वेतन न देने और घाटों की सफाई में लापरवाही बरतने के मामले में दो अलग-अलग निजी एजेंसियों पर भारी आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया है।
राज सिक्योरिटी एजेंसी पर ₹1 लाख का भारी जुर्माना
नगर निगम के तहत कार्यरत आउटसोर्स चालकों और मशीन ऑपरेटरों को समय पर वेतन न देना ‘राज सिक्योरिटी एजेंसी’ को भारी पड़ गया। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद निगम ने कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। आउटसोर्स कर्मचारियों ने समय पर वेतन का भुगतान न होने को लेकर नगर निगम से शिकायत की थी। जब कंपनी से इस देरी का कारण पूछा गया, तो एजेंसी ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ना चाहा।
जांच में खुली पोल: नगर निगम की जांच में एजेंसी की घोर लापरवाही सामने आई। जांच में पाया गया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति तत्काल प्राप्त की जा सकती थी, लेकिन कंपनी जानबूझकर भुगतान में देरी कर रही थी।
गंदगी पर अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर भी अर्थदंड
वेतन में देरी के अलावा, शहर की स्वच्छता व्यवस्था में लापरवाही को लेकर भी नगर निगम ने कड़ा एक्शन लिया है। सुप्रसिद्ध गौरीघाट के तटों पर सफाई व्यवस्था में भारी लापरवाही बरतने के चलते ‘अल्ट्रा क्लीन कंपनी’ पर भी अर्थदंड लगाया गया है। दरअसल, निगमायुक्त ने खुद गौरीघाट का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान घाटों पर गंदगी और सफाई व्यवस्था बदहाल पाई गई, जिसके बाद निगमायुक्त के निर्देश पर कंपनी के खिलाफ यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।
राजधानी के सेंट पॉल स्कूल परिसर में चला बुलडोजर, सामुदायिक भवन के नाम पर चर्च बनाने का था आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सेंट पॉल स्कूल परिसर में बने एक विवादित सामुदायिक भवन पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया है। हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वदिनी पांडेय ने सामुदायिक भवन के नाम पर चर्च बनाए जाने का आरोप लगाया था और इसकी शिकायत भी की थी, जिसके बाद नगर निगम और जिला प्रशासन ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
मौके पर भारी पुलिस बल, सड़कें की गईं ब्लॉक
बता दें कि सेंट पॉल स्कूल के पास बने विवादित भवन को बुलडोजर के जरिए जमींदोज किया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान स्थिति न बिगड़े, इसके लिए प्रशासन ने सेंट पॉल स्कूल के दोनों तरफ की सड़कों को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है। मौके पर अपर कलेक्टर, ADCP समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
सामुदायिक भवन’ की आड़ में चर्च बनाने का आरोप
इस पूरे मामले में हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वदिनी पांडेय ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है सेंट पॉल स्कूल परिसर एक शैक्षणिक संस्थान है। सेंट पॉल ट्रस्ट के पास इस जमीन की लीज़ साल 2022 में ही खत्म हो चुकी है। लीज़ समाप्त होने के बावजूद स्कूल परिसर में सामुदायिक भवन के नाम पर चर्च का निर्माण किया जा रहा था।
इस निर्माण के लिए न तो ट्रस्ट के पास परमिशन थी और न ही नगर निगम को इसकी कोई जानकारी दी गई थी। वही उन्होंने आगे कहा कि हमारी शिकायत को शासन-प्रशासन ने सही पाया।
जहां कभी आतंक और भय का माहौल था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई को विकास और जनविश्वास की विजय बताते हुए कहा है कि सरकार ने नक्सलवाद और माओवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया था और आज उसके सकारात्मक परिणाम पूरे देश के सामने हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय, हिंसा और अविश्वास का वातावरण था, वहां आज विकास, सुशासन और नई संभावनाओं का युग प्रारंभ हो चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य नागरिक निरंतर भय के साये में जीवन जीने को मजबूर थे। लोगों को अपनी सुरक्षा, आजीविका और सम्मान की चिंता रहती थी। विकास कार्यों को आगे बढ़ाना अत्यंत कठिन था। सड़क निर्माण से लेकर संचार सुविधाओं के विस्तार तक हर प्रयास का हिंसक विरोध किया जाता था। कई बार निर्माण सामग्री को जला दिया जाता था, ठेकेदारों को धमकाकर भगा दिया जाता था और विकास कार्यों को रोकने की कोशिश की जाती थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बीते वर्षों में हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया, हजारों मोबाइल टावर स्थापित किए गए और दूरस्थ गांवों तक संचार सुविधाएं पहुंचाई गईं। बैंकिंग सेवाओं, डाक सेवाओं और वित्तीय समावेशन के माध्यम से लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास और अवसरों का विस्तार है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल बम, बंदूक और गोली के सहारे नहीं लड़ी गई। सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ जनसामान्य की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबों को अधिकार दिलाने और लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत करने के निरंतर प्रयास किए गए। इसी का परिणाम है कि आज नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आमजन का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की प्रक्रिया में बढ़ा है।
प्रधानमंत्री ने बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी आतंक और हिंसा का माहौल था, वहां आज युवाओं की ऊर्जा खेल और प्रतिभा के माध्यम से सामने आ रही है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में लाखों युवाओं की भागीदारी इस परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। यह दर्शाता है कि अब वहां के युवा हिंसा के रास्ते को नहीं, बल्कि अवसर, शिक्षा, खेल और विकास के मार्ग को अपना रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने बस्तर सहित पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कभी नक्सलवाद का आतंक था, वहां आज विकास का आत्मविश्वास दिखाई देता है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, बैंकिंग और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच ने लोगों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षा बलों की वीरता तथा स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद का अध्याय अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि विकास, जनभागीदारी, खेल, पर्यटन और नई संभावनाओं से बन रही है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और अंत्योदय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विकास और सुशासन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा तथा बस्तर देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।