प्रदेश
बच्चों को लू से बचाने पहल, आंगनबाड़ी संचालन समय घटाया गया
रायपुर। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए त्वरित और संवेदनशील निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के स्पष्ट निर्देश पर ग्रीष्मकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव करते हुए इसे 6 घंटे से घटाकर 4 घंटे कर दिया गया है।
निर्देशानुसार 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगे। विशेष रूप से 23 अप्रैल से 30 जून 2026 तक बच्चों की उपस्थिति का समय केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि वे भीषण गर्मी और लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।
इस निर्धारित अवधि में बच्चों को पूर्व तय समय-सारिणी के अनुसार प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (ECCE गतिविधियां) के साथ-साथ पूरक पोषण आहार का नियमित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्य आवश्यक सेवाएं प्रातः 11:00 बजे तक जारी रहेंगी। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने निर्धारित जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। साथ ही, गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श देने की महत्वपूर्ण सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के बाद घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। गर्म हवाओं और उच्च तापमान के बीच बच्चों को सुरक्षित रूप से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।
इसके साथ ही, सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें और जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
ग्रीष्मकाल समाप्त होने के बाद 01 जुलाई से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित होंगे।
मनमानी फीस वसूली पर एक्शन मोड में सरकार, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूली के मामलों को लेकर अब राज्य सरकार का रुख सख्त होता नजर आ रहा है। इस संबंध में चीफ सेक्रेटरी विकासशील ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को एक कड़ा पत्र जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इस आदेश के बाद निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है।
चीफ सेक्रेटरी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि हाल ही में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और शिकायतों के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है कि कई निजी विद्यालय पालकों से नियमों के विरुद्ध अधिक शुल्क वसूल रहे हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
ज्ञात हो कि राज्य में 26 अगस्त 2020 से छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 लागू है। इस कानून के तहत प्रत्येक निजी स्कूल में विद्यालय फीस समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। यह समिति हर वर्ष पिछले वर्ष की फीस के आधार पर अधिकतम 8 प्रतिशत तक ही फीस वृद्धि की अनुमति दे सकती है। यदि कोई स्कूल इससे अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे जिला फीस विनियमन समिति से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी निजी स्कूलों में फीस विनियमन समिति को सक्रिय रूप से कार्यरत किया जाए। साथ ही, निजी स्कूलों के समन्वय और निगरानी के लिए नोडल प्राचार्य की भूमिका को भी अहम बताया गया है। नोडल प्राचार्य न केवल स्कूल फीस समिति के सदस्य होते हैं, बल्कि वे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, जिला शिक्षा अधिकारी को जिला शुल्क विनियमन समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है, जिन्हें इस पूरे तंत्र की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी और नोडल प्राचार्यों के माध्यम से सभी निजी स्कूलों में इस कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
चीफ सेक्रेटरी ने अपने पत्र में यह भी साफ किया है कि यदि कोई निजी विद्यालय नियमों के विरुद्ध फीस वृद्धि करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता रद्द करने से लेकर अन्य कानूनी कार्रवाई तक शामिल हो सकती है।
सरकार के इस सख्त रुख से जहां अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं निजी स्कूल प्रबंधन पर भी अब नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।

जल संकट से त्रस्त इंदौर, कांग्रेस ने निगम पर लापरवाही का लगाया आरोप
इंदौर। शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह के नेतृत्व में “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मोती तबेला चौराहा, छत्रीबाग पर मटका फोड़कर नगर निगम का ध्यान आकर्षित किया गया। गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर में पानी की किल्लत को लेकर कांग्रेस और राजीव विकास केंद्र ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर खाली मटके फोड़े और नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ये रहे मुख्य आरोप:
शहर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निगम पूरे महीने का बिल वसूल रहा है, लेकिन पानी केवल 15 दिन ही मिल रहा है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन तक नहीं पहुंची है, जिससे लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। आरोप है कि आम जनता को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा, जबकि लोग अपने खर्च पर टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।
निगम के टैंकर होटलों और निर्माण कार्यों में
कांग्रेस ने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों जैसे भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर में ड्रेनेज लीकेज के कारण गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है। टैंकरों को लेकर भी बड़ा आरोप लगाया गया। कहा गया कि आम जनता पानी के लिए तरस रही है, जबकि निगम के टैंकर होटलों और निर्माण कार्यों में लगाए जा रहे हैं।
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप, चेतावनी भी दी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़ी फाइलें लंबित हैं और अधूरे कार्यों के कारण कई वार्डों में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा और टैंकर भी कई गलियों तक नहीं पहुंच रहे। कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी का समाधान नहीं हुआ तो इंदौर नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा।
वेदांता प्लांट हादसे में मौतों का आंकड़ा 25 पहुंचा, रायपुर में एक और श्रमिक ने तोड़ा दम
रायपुर। सक्ती जिला स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण हादसे में मरने वाले मजदूरों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. हादसे में गंभीर रूप से झुलसे पश्चिम बंगाल के मजदूर विश्वजीत साहू की मौत के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 25 पहुंच गया है.
जानकारी के अनुसार, हादसे में गंभीर रूप से झुलसे पश्चिम बंगाल के रहने वाले विश्वजीत साहू को रायपुर के श्री शंकरा हॉस्पिटल में अंडर ऑब्जर्वेशन में रखा गया था. इलाज के दौरान उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई.
बता दें कि 14 अप्रैल को वेदांता पावर प्लांट में बायलर के फर्नेस में अत्यधिक ईंधन जमा हो जाने से दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया था. इसी दबाव के कारण बायलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया और विस्फोट हो गया. हादसे में घायल मजदूरों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था.
वेदांता पावर प्लांट हादसे में पुलिस ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है. सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है.
बरसात से पहले नगरीय प्रशासन विभाग अलर्ट: जलभराव रोकने और बाढ़ प्रबंधन की व्यापक तैयारी के निर्देश, डिप्टी सीएम साव ने कहा-
रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बरसात से पहले नगरीय निकायों में नाले-नालियों की सफाई तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने संचालनालय से परिपत्र जारी कर सभी निकायों को जलभराव रोकने, बाढ़ की स्थिति में आपदा प्रबंधन की तैयारी और बरसात में संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी कार्रवाई करने को कहा है।
उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने विगत 20-21 अप्रैल को नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा के दौरान आगामी 31 मई तक बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए थे। बैठक में उन्होंने कहा कि जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम निकायों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी।
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा है कि वर्षा ऋतु में बारिश के पानी के निकासी के लिए निर्मित नालियों की समय पूर्व समुचित सफाई न होने तथा पानी निकासी के रास्तों के अवरोधों को दूर नहीं करने के कारण आकस्मिक वर्षा से बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है। इन स्थितियों से बचाव के लिए वर्षा ऋतु के पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लेवें।
विभाग ने इसके लिए शहरों के मुख्य मार्गों के साथ-साथ गलियों व चौराहों की अच्छी साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी नाले व नालियों की पूर्ण एवं नियमित रूप से अंतिम छोर तक गहराई से साफ-सफाई कराने के साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि नदी या अन्य जलस्रोत किसी भी प्रकार से प्रदूषित न हों। पानी के बहाव में निरंतरता के लिए निर्माणाधीन नाले व नालियों में पानी बहाव के रास्ते में से निर्माण सामग्रियों को हटाने तथा नाले-नालियों में निर्मित कच्चे एवं पक्के अतिक्रमित अवरोधों को हटाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग ने बरसात के पहले बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर आवश्यक अमले, टूल, मशीन आदि के साथ नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा है। विभाग ने बाढ़ नियंत्रण कक्षों के 24 घंटे कार्यरत रहना सुनिश्चित करने के साथ ही इसके दूरभाष नम्बर आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए हैं। निचली बस्तियों, बाढ़ संभावित क्षेत्रों व प्रभावितों का चिन्हांकन कर प्रभावितों के लिए सुरक्षित स्थलों को भी चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने बाढ़ की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। अन्य क्षेत्रों में भी बाढ़ के दौरान एवं बाढ़ के प्रभाव के समाप्त होने पर संक्रामक बीमारियों की आशंका बनी रहती है। इन स्थितियों में संबंधित विभागों को तत्परता से इसकी सूचना देने को कहा गया है। विभाग ने वर्षा ऋतु के पहले पेड़ों में लगे सभी साइन-बोर्डों, विज्ञापनों, किसी भी प्रकार के अन्य बोर्ड या साइनेज, बिजली वायर, हाईटेंशन लाइन या अन्य सामग्रियों को हटाने के निर्देश सभी निकायों को दिए हैं।
छत्तीसगढ़ कैडर के दो प्रमोटी IAS अफसरों को बैच अलॉट, आदेश जारी …
रायपुर। केंद्रीय लोक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने छत्तीसगढ़ कैडर के दो प्रमोटी आईएएस अधिकारियों को बैच आवंटित किया है। दोनों अधिकारी एलाइड सर्विसेस संवर्ग से पदोन्नत किए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार, राज्य वित्त सेवा से आईएएस पद पर पदोन्नत ऋषभ पराशर को 2020 बैच आवंटित किया गया है। वे कैडर सूची में गोपाल वर्मा से नीचे क्रम में रहेंगे।
इसके अलावा तरुण कुमार किरण को 2021 बैच अलॉट किया गया है। वे इस बैच के प्रमोटी अधिकारी आशीष टिकरिया के बाद और (सीधे भर्ती आरआर) अधिकारी नम्रता चौबे से पहले क्रम में होंगे।
आदेश की कॉपी-


रायपुर स्काईवॉक ब्रिज का शेष निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी, उच्च अधिकारियों की निगरानी में हो रहा काम
रायपुर। राजधानी के मुख्य मार्गों पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुट ओवर ब्रिज (स्काईवॉक ब्रिज) का शेष निर्माण कार्य अब तेजी से पूरा किया जा रहा है। वर्ष 2017 में प्रारंभ यह निर्माण कार्य शासन के आदेशानुसार 2018 से 2025 तक लगभग 6 वर्षों तक बंद रहा था। उक्त जानकारी लोक निर्माण विभाग सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस के कोरी ने दी।
श्री कोरी ने कहा कि शासन के आदेश दिनांक 19.07.2024 के परिपालन में शेष निर्माण कार्य के लिए 21.05.2025 को पी.एस.ए.ए. कंस्ट्रक्शन कम्पनी प्रा.लि. को कार्यादेश जारी किया गया। वर्तमान में उच्च अधिकारियों एवं मैदानी स्तर के अभियंताओं द्वारा कार्य की सतत् निगरानी की जा रही है।

स्काईवॉक के खराब हुए भागों में आवश्यकतानुसार सुधार एवं प्रतिस्थापन का कार्य भी साथ-साथ किया जा रहा है। चूंकि यह निर्माण कार्य शहर के मध्य अत्यधिक यातायात वाले क्षेत्र में हो रहा है, इसलिए नागरिकों की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर कार्य रात्रिकालीन समय में कराया जा रहा है।
स्काईवॉक ब्रिज का शेष कार्य शासन के निर्देशानुसार प्राथमिकता से कराया जा रहा है। गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखते हुए कार्य में तेजी लाई गई है। विगत वर्षों में प्रभावित हुए हिस्सों की मरम्मत कर निर्माण किया जा रहा है। रात्रिकालीन शिफ्ट में कार्य कराने से आम जनता को यातायात में असुविधा नहीं होगी। कार्य पूर्ण होने पर शहरवासियों को पैदल आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
काम में लापरवाही पड़ा भारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का रेडियोग्राफर निलंबित
राजनांदगांव। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव में पदस्थ रेडियोग्राफर भोज कुमार साहू को काम में घोर लापरवाही एवं गंभीर अनुशासनहीनता बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर संभाग रायपुर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर की है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डोंगरगांव के रेडियोग्राफर भोज कुमार साहू द्वारा शासकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करने, पदीय दायित्वों का निर्वाहन नहीं करने, शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, उच्च अधिकारियों से अनुचित वार्तालाप करने एवं असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनका कृत्य गंभीर अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं कर्तव्यों के प्रति लापरवाही के श्रेणी में होने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के शर्तों का उल्लंघन है।
निलंबन अवधि के दौरान भोज कुमार का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन जिला दुर्ग निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का तबादला, देखें लिस्ट…
राजनांदगांव। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का तबादला किया है। जारी आदेश के मुताबिक, डिप्टी कलेक्टर प्रभारी तहसीलदार अमिय श्रीवास्तव को लाल बहादुर नगर से तहसील कार्यालय डोंगरगढ़ भेजा गया है।
देखें लिस्ट –

किसानों को तोहफा: केंद्र ने बढ़ाया गेहूं खरीदी का कोटा, 100 लाख मीट्रिक टन होगी खरीदी, CM मोहन ने जताया आभार
भोपाल। मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के लिए एक राहत भरी खबर आई है। प्रदेश में इस वर्ष गेहूं के बंपर उत्पादन को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के अनुरोध पर गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ा दिया है। अब राज्य में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की सीमा 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दी गई है।
CM मोहन ने जताया आभार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाताओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय किसानों के परिश्रम का सम्मान है, उन्हें उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सशक्त कदम है।
चरणबद्ध तरीके से होगी खरीदी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गेहूं की खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सबसे पहले छोटे किसान, दूसरे चरण में मध्यम श्रेणी के किसान और तीसरे चरण में बड़े किसानों से गेहूं की खरीद की जाएगी।
रायपुर में GST अपीलीय अधिकरण की शुरुआत, अब यहीं होगी अपीलों की सुनवाई
रायपुर। राजधानी रायपुर में वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (GSTAT) की रायपुर पीठ ने आधिकारिक रूप से कार्य करना शुरू कर दिया है। इस संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए सभी हितधारकों, करदाताओं, विभागीय अधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी गई है।
जारी सूचना के अनुसार, रायपुर पीठ का अस्थायी कार्यालय नवा रायपुर के अटल नगर स्थित वाणिज्यिक कर-जीएसटी भवन (पूर्व वैट अधिकरण भवन) में संचालित होगा। अब छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़े सभी जीएसटी मामलों की अपीलें इसी पीठ में सुनी जाएंगी।
बताया जा रहा कि यह पीठ केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम 2017 और राज्य जीएसटी कानूनों के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई करेगी। साथ ही अब सभी अपील, आवेदन और संबंधित प्रक्रियाएं जीएसटी अपीलीय अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2025 के तहत रायपुर पीठ में ही दायर की जाएंगी।
सुविधा के लिए ई-फाइलिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। संबंधित नियम, एडवाइजरी और आदेश GSTAT के आधिकारिक पोर्टल पर “NOTICE” सेक्शन में देखे जा सकते हैं। अपील दाखिल करने में किसी प्रकार की परेशानी होने पर आवेदक टोल-फ्री नंबर 1800-103-4782 पर संपर्क कर सकते हैं या ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।
सार्वजनिक सूचना के माध्यम से व्यापारियों, करदाताओं और विभागीय अधिकारियों को नई व्यवस्था की जानकारी दी गई है। साथ ही व्यापार एवं उद्योग संगठनों से अपील की गई है कि वे इस सूचना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें। यह पहल राज्य में जीएसटी से जुड़े मामलों के त्वरित और सुव्यवस्थित निपटारे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुरानी पेंशन योजना में शिक्षकों को राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील, जानिए पूरा मामला…
बिलासपुर। हाईकोर्ट से शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। कोर्ट ने पूर्व सेवा गणना को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी।
मामला चिरमिरी नगर निगम में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल से जुड़ा है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल किया जाए। याचिका में कहा गया था कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में नहीं जोड़ा जा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है।
मामले में पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार करे। इसके लिए सरकार को 120 दिनों का समय भी दिया गया था। राज्य सरकार ने इस निर्देश पर अमल करने के बजाय सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील की, जहां मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ में हुई।
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविलियन की शर्तों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि संविलियन के समय जो शर्तें तय की गई थी, उसी के आधार पर पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। डबल बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब संविलियन के दौरान पूर्व सेवा की गणना को मान्यता दी गई है तो फिर पुरानी पेंशन योजना में उसे शामिल करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने माना कि पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्याय संगत नहीं है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है।
राज्यपाल रमेन डेका ने ली रायपुर जिले में विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठक
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर जिले की विकासखण्ड स्तरीय समीक्षा बैठक ली। राज्यपाल ने कहा कि सभी अधिकारी जनता से मिलें और उनके बीच जाएं तथा हितग्राहियों से मुलाकात करें एवं उनकी समस्याओं की जानकारी लेकर योजनाओं का फीडबैक लें। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत जानने का सबसे बेहतर तरीका लोगों से लगातार संवाद है। राज्यपाल ने जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट ग्रीन पालना और प्रोजेक्ट रचना की सराहना की। श्री डेका ने योजनाओं में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
राज्यपाल श्री डेका ने कलेक्टरेट परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधरोपण किया।

राज्यपाल को कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा चलाए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। श्री डेका ने जिले के विभिन्न विकासखण्डों में हो रहे डबरी निर्माण की भी सराहना करते हुए कहा कि हमें बड़े किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करना चाहिए इससे रायपुर के जलस्तर में सुधार आएगा और भविष्य में होने वाले संभावित पेयजल की समस्या का सामना करने में सहयोग मिलेगा।
उन्होंने अन्य राज्यों के सफल मॉडलों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को व्यवहारिक और प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में धान की खेती अधिक होती है, जो पानी की खपत बढ़ाती है। इसलिए बड़े किसानों को अन्य फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा है और आने वाले वर्षों में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाएगा। उन्होंने जल जागरूकता, संसाधनों के संरक्षण और उनके सही उपयोग पर विशेष जोर दिया। साथ ही निर्देश दिए कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर जल स्रोतों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि उसी आधार पर बेहतर योजना और रणनीति बनाई जा सके।
श्री डेका ने कहा कि हमें ग्राम पंचायत स्तर पर छोटी-छोटी डबरी बनानी चाहिए। इस कार्य में समुदाय की भागीदारी अवश्य सुनिश्चित करें और जनप्रतिनिधियों को भी ऐसे कार्यों के लिए शामिल करें। सभी शासकीय कार्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग करें और अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने जल जागरूकता, संसाधनों के संरक्षण और उनके सही उपयोग पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष से मिशन मोड के तहत कुओं के निर्माण का कार्य तेजी से किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत घरों में अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग को शामिल किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि वृक्षारोपण को अधिक से अधिक बढ़ावा दें। एम्स, डॉ. भीमराव अंबेडकर हॉस्पिटल एवं स्कूलों में वृक्षारोपण करें। सड़कों के किनारे भी वृक्षारोपण किया जा सकता है इससे प्रदूषण की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। उन्होंनेे कहा कि विकास की निशानी अधिक से अधिक पेड़ लगाना और हरियाली है।
प्रोजेक्ट हर घर मुनगा की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा दें, नेचुरल फार्मिंग में वैल्यू एडिशन जरूरी है। हमें विशेष रूप से हाइड्रोपोनिक्स को बढ़ावा देना चाहिए। आने वाला समय में इसकी अच्छी संभावना है। उन्होंने नर्सरी हाइड्रोपोनिक्स विकसित करने का सुझाव दिया।
“ग्रीन पालना” परियोजना की चर्चा के दौरान राज्यपाल ने जानकरी ली कि नवप्रसूता महिलाओं को दिए गए पौधों की निगरानी कैसे होती है कि वे जीवित हैं या नहीं। इस पर कलेक्टर ने बताया कि एआई आधारित प्रणाली के तहत मितानिन घर-घर जाकर पौधों की फोटो लेकर उनका फॉलोअप करती हैं। राज्यपाल ने कहा कि पेड़ लगाना हम सभी की जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। राज्यपाल ने योग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आम जनता से कहा कि योग की कक्षाओं तक ही सीमित न रहें बल्कि योग सीखने के बाद नियमित रूप से घर में भी इसका अभ्यास करें।
यातायात व्यवस्था पर राज्यपाल ने कहा कि जिले में भारी वाहनों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। रैश ड्राइविंग और हेलमेट के मामले में पहले जागरूकता बढ़ाने और फिर आवश्यक होने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि अभी से सख्ती और जागरूकता के जरिए इसे रोकना जरूरी है।
इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, डीएफओ लोकनाथ पटेल, रायपुर ग्रामीण एसपी मनीषा ठाकुर, राज्यपाल की उपसचिव निधि साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हाईकोर्ट ने खारिज की IAS रानू साहू के रिश्तेदारों की सभी याचिकाएं, मनी लांड्रिंग केस में ईडी ने अटैच की है करोड़ों की संपत्ति
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कोरबा के पूर्व व निलंबित कलेक्टर IAS रानू साहू के रिश्तेदारों की करोड़ों की संपत्ति अटैच किए जाने के खिलाफ पेश सभी याचिका को खारिज कर दिया है। मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी में सुनवाई हुई।
बता दें कि कोल लेवी वसूली व मनी लांड्रिंग के मामले में ईडी ने रानू साहू के रिश्तेदार तुषार साहू, रानू साहू, कजिन पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, रानू साहू के भाई पूनम साहू, रानू साहू की बहन, अरुण कुमार साहू रानू साहू के पिता और लक्ष्मी साहू रानू साहू की मां, सहलिनी साहू पीयूष कुमार साहू की पत्नी और रेवती साहू रानू साहू की आंटी की सम्पत्ति अटैच किया है। इस कार्रवाई के खिलाफ सभी ने अलग-अलग याचिका पेश की थी। याचिका में कहा गया है कि ईडी ने रानू साहू के कोरबा कलेक्टर रहने से पूर्व में खरीदी गई संपत्ति को अटैच किया है। अपीलेट ट्रिब्यूनल से अपील खारिज किया गया है, जो गलत है। इसके अलावा एफआईआर में उनका नाम नहीं है। अटैच प्रॉपर्टी को मुक्त कराने की मांग की गई।
मामले में चीफ जस्टिस की डीबी ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा, जुर्म से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी PMLA के तहत अपने आप अटैचमेंट से सुरक्षित नहीं होती है। सेक्शन 2(1)(u) के तहत “जुर्म से हुई कमाई” की परिभाषा में न सिर्फ़ खराब प्रॉपर्टी शामिल है, बल्कि उसकी बराबर कीमत भी शामिल है, जो एक बड़े कानूनी इरादे को दिखाता है। जहां असली कमाई मौजूद नहीं है या उसका पता नहीं चल पा रहा है, वहां अधिकारी उतनी ही कीमत की दूसरी प्रॉपर्टी अटैच कर सकते हैं, भले ही वे पहले कानूनी तौर पर खरीदी या हासिल की गई हों।
ऐसी अटैचमेंट का मकसद अपराधियों को जुर्म से होने वाले आर्थिक फ़ायदों को अपने पास रखने से रोकना है। एनफोर्समेंट अथॉरिटी के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह सीधे सबूतों से यह साबित करे कि जिस प्रॉपर्टी की बात हो रही है, वह क्राइम से हुई कमाई है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में काम करने का तरीका अक्सर घुमावदार और साफ न दिखने वाले फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से जुड़ा होता है, जिससे सीधे सबूत मिलना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ कोर्ट ने सभी याचिका को खारिज कर दिया है।
‘सिंहस्थ 2028’ की तैयारियां तेज: ट्रेन कोच से अधिकारियों ने किया स्टेशनों का निरीक्षण, तेजी से आगे बढ़ रहे काम
उज्जैन। उज्जैन में “सिंहस्थ 2028” की तैयारियों को लेकर रेलवे और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया । खास बात यह रही कि वरिष्ठ अधिकारियों ने रेलवे के अधिकारियों के साथ ट्रेन कोच में बैठकर विभिन्न स्टेशनों का दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उज्जैन जंक्शन के साथ विक्रम नगर, पिंगलेश्वर, पंवासा, चिंतामन, नईखेड़ी और मोहनपुरा सहित अन्य स्टेशनों का भ्रमण किया गया।
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि “सिंहस्थ 2028” को ध्यान में रखते हुए सभी स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है । प्लेटफॉर्म विकास, फुटओवर ब्रिज, होल्डिंग एरिया, पेयजल और टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाओं के काम शुरू हो चुके हैं और तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं ।
उन्होंने कहा कि यह संतोष की बात है कि रेलवे के कार्य अच्छी गति से चल रहे हैं और सिंहस्थ से पहले सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे । इस दौरान रेलवे और जिला प्रशासन के बीच समन्वय के तहत लंबित मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनमें अधिकांश को मंजूरी मिल चुकी है और आवश्यक एनओसी भी जारी हो गई हैं।
कलेक्टर ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान ट्रेनों की आवाजाही को लेकर भी विस्तृत प्लानिंग की गई है । मक्सी रोड, नागदा और इंदौर दिशा से आने वाली नियमित और स्पेशल ट्रेनों को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म और होल्डिंग एरिया की क्षमता तय की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सभी तैयारियां समय पर पूरी की जाएंगी, जिससे सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और सुगम सुविधाएं मिल सकें।
प्री-डिपॉजिट और अंडरटेकिंग पर स्टे, GST वसूली पर हाईकोर्ट सख्त
बिलासपुर। जीएसटी बकाया वसूली से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मामला मां काली इंडस्ट्रीज की ओर से दायर रिट याचिका से संबंधित है, जिसमें राज्य कर विभाग द्वारा पारित आदेशों और वसूली कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने 4 नवंबर 2022 और 28 मार्च 2024 के आदेशों के साथ-साथ 16 जनवरी 2026 की अटैचमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत जीएसटी बकाया की वसूली की कार्रवाई की जा रही थी।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 11 जुलाई 2024 को जारी सर्कुलर का हवाला दिया। इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि जब तक जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन नहीं होता, तब तक अपील करने वाले करदाताओं को राहत दी जा सकती है, बशर्ते वे निर्धारित प्री-डिपॉजिट जमा करें और एक अंडरटेकिंग दें। साथ ही 17 सितंबर 2025 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया गया, जिसमें अपील दायर करने की समय-सीमा 30 जून 2026 तक बढ़ाई गई है।
जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने कहा कि इस मामले में अब आगे किसी न्यायिक निर्णय की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह संबंधित अधिकारी के समक्ष अंडरटेकिंग/घोषणा प्रस्तुत करे कि ट्रिब्यूनल बनने पर अपील करेगा। जीएसटी कानून के तहत निर्धारित प्री-डिपॉजिट राशि 15 दिनों के भीतर जमा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता तय समय में प्री-डिपॉजिट जमा कर देता है और अंडरटेकिंग देता है, तो शेष बकाया राशि की वसूली पर रोक लग जाएगी।
RERA में शिकायत पर समय सीमा नहीं: हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द किया
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि रेरा यानी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी एक विशेष नियामक संस्था है, जिसे कोर्ट की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने मकान खरीदने वालों के अधिकार को लेकर कहा कि रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए समय सीमा की कोई पाबंदी नहीं है। लिहाजा देरी के आधार पर शिकायतों को खारिज नहीं कर सकता। यह फैसला जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बैंच ने सुनाया।
दरअसल, जगदलपुर निवासी निधि साव ने रायपुर की सीमा से लगे दुर्ग जिले के अमलेश्वर स्थित ग्रीन अर्थ सिटी में एक फ्लैट बुक किया था। बिल्डर पर समय पर कब्जा नहीं देने और घटिया निर्माण का आरोप लगा। उन्होंने इस मामले की शिकायत स्थानीय प्रशासन से की, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया। आखिरकार, परेशान होकर उन्होंने रेरा में शिकायत की थी। रेरा ने बिल्डर को दो महीने में काम पूरा कर कब्जा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता खरीददार को भी बकाया राशि जमा करने को कहा। इस आदेश के खिलाफ खरीददार ने रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की।
ट्रिब्यूनल ने सुनवाई करने के बजाय यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि शिकायत दर्ज करने में बहुत देरी हुई है। निधि साव ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया है। मामले को वापस ट्रिब्यूनल भेजते हुए निर्देश दिया है कि अब इस मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर नए सिरे से की जाए, न कि समय सीमा के तकनीकी आधार पर। बता दें कि रेरा एक्ट की धारा 31 के तहत शिकायत करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है।