भारतनेट प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार पर संसद में गूंजा मुद्दा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने निगरानी समिति गठन की उठाई मांग
रायपुर/नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में भारतनेट परियोजना के ठप पड़े कार्यान्वयन का मुद्दा लोकसभा में नियम 377 के तहत उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान के तहत शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना राज्य के हजारों गांवों तक अब तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और केंद्र से स्वीकृत ₹3,942 करोड़ के नए आवंटन की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के करीब 20 हजार गांवों में रहने वाले लाखों ग्रामीण आज भी डिजिटल कनेक्टिविटी के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि भारतनेट परियोजना के पहले चरण में 4,114 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाई गई थी, लेकिन इनमें से 3,519 कनेक्शन वर्तमान में बंद या निष्क्रिय हैं और केवल 595 कनेक्शन ही चालू हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में ₹1,754 करोड़ की लागत से 5,540 ग्राम पंचायतों में OFC नेटवर्क बिछाया गया, लेकिन वर्तमान में इस चरण की एक भी ग्राम पंचायत में सेवा संचालित नहीं हो रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति मुख्य रूप से चिप्स छत्तीसगढ़ और परियोजना का कार्य कर रही कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स के बीच बिल भुगतान विवाद के कारण बनी हुई है।
सांसद ने बताया कि केंद्र सरकार ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के लिए अतिरिक्त ₹3,942 करोड़ की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस राशि का पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समिति का गठन आवश्यक है, जो पुराने कार्यों की समीक्षा करने के साथ नए कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी नजर रखे।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, "देश के गांव ही देश का भविष्य हैं। ग्रामीणों तक डिजिटल सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। भारतनेट परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन की आधारशिला है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।"
उन्होंने कहा कि भारतनेट योजना के तहत बीएसएनएल ग्रामीण उपभोक्ताओं को मात्र ₹259 प्रतिमाह में विशेष ग्रामीण ब्रॉडबैंड योजना उपलब्ध कराता है, लेकिन परियोजना के अधूरे और बंद पड़े नेटवर्क के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण इस सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।