व्यक्ति केंद्रित चुनावी घोषणाओं से टूट रहे परिवार: वृंदावन हॉल में विकसित भारत का सपना और वास्तविकता पर राष्ट्रीय संवाद हुआ संपन्न
छत्तीसगढ़ |
18-Jan-2025
रायपुर। समृद्ध भारत से ही दुनिया में वसुधैव कुटुंबकम की भावना साकार हो सकेगी। विकसित भारत में हर परिवार खुशहाल और समझदार बने तभी असली विकास साबित होगा। वर्तमान चुनावी प्रक्रिया में व्यक्ति को प्रभावित करने चुनावी घोषणाएं की जाती हैं, जिससे परिवार में बिखराव आते जा रहे हैं, जबकि यह संविधान की मूल भावना के विपरीत है। यह बातें वृंदावन हॉल सिविल लाइन में आयोजित विकसित भारत- सपना, योजना और वास्तविकता पर संवाद में वक्ताओं ने कही।
बता दें कि इस कार्यक्रम का आयोजन साधना फाउंडेशन और आचार्य सरयूकांत झा स्मृति संस्थान ने विकसित भारत संवाद श्रृंखला के अंतर्गत किया। इसमें मध्यस्थ दर्शन दिल्ली के अध्येता सोमदेव त्यागी ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात् जिस आज़ादी का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था, वह पूरी नहीं हो रही है। तब हमारे देश में परिवार संयुक्त होते थे, साथ मिलकर सहयोग और मूल्यों के साथ लोगों का जीवन होता था। आधुनिक भारत में चुनावी प्रक्रिया खर्चीली हो गई है, राजनीतिक दल धन और प्रचार तंत्र से चुनावी जीतने को प्राथमिकता देते हैं, हर घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए होती है। हर मतदाता के लिए अलग घोषणा होने से परिवार का महत्व समाप्त होने लगा है, जबकि परिवार भारत में सबसे सशक्त इकाई होती थी।
