असम में ईद से पहले मस्जिद कमेटियों का फैसला, कहा- इस्लाम में गाय की कुर्बानी देना अनिवार्य नहीं
गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को होजई, धुबरी, बोंगाईगांव और उधरबोंड सहित पूरे असम में कई ईदगाह और कब्रिस्तान समितियों का स्वागत किया, जिन्होंने औपचारिक अपील जारी कर मुस्लिम समुदाय से आगामी बकरीद के दौरान गोहत्या न करने की अपील की। सरमा ने इस पहल की जमकर सराहना करते हुए इसे राज्य के सामाजिक-धार्मिक ताने-बाने को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
असम की मस्जिद समितियों ने आगामी बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे सांप्रदायिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण बताया।
असम के कई जिलों में मस्जिद समितियों ने घोषणा की है कि आगामी 28 मई को आने वाली बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे स्वैच्छिक निर्णय बताया है, जो बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं का सम्मान करता है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब शनिवार को धुबरी से पूर्व विधायक अली अकबर मियां को गिरफ्तार किया गया है। उन पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालने का आरोप है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि अगर अधिकारियों ने कुर्बानी में हस्तक्षेप किया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ भी अभद्र टिप्पणी की थी।
मुख्यमंत्री सरमा ने गोकशी के खिलाफ मस्जिदों द्वारा की गई अपील की सराहना की और इसके पीछे के कानूनी और धार्मिक कारणों को समझाते हुए कहा कि ऐसे कदम सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर उन क्षेत्रों की खबरों की कतरनें साझा करते हुए लिखा, “मैं इस प्रयास का स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि अन्य समितियां भी इसी तरह की अपील जारी करेंगी।”
धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी ने 23 मई, 2026 को जारी एक आधिकारिक नोटिस में राज्य के मौजूदा कानूनों के तहत इस प्रथा से जुड़े सख्त कानूनी दंडों का विस्तार से वर्णन किया। समिति के बयान में कहा गया है कि असम सरकार ने पशु संरक्षण अधिनियम लागू कर दिया है। इस कानून के प्रावधानों के तहत गायों की बलि देना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। धार्मिक पहलू पर चर्चा करते हुए समिति ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी देना अनिवार्य नहीं है।
इससे पहले दिल्ली सहित कई राज्यों ने पशु बलि, स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था को विनियमित करने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं।