सुपोषण की ओर अग्रसर कोरिया, कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के नेतृत्व में बदलती तस्वीर…
छत्तीसगढ़ |
10-Jan-2025
कोरिया। छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ लगातार जनभागीदारी के साथ शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत इस पर काबू पाया जा रहा है. प्रदेश के सुदूर कोरिया जिले की बात करें तो विगत एक वर्ष में कुपोषण उन्मूलन में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है.
दिसंबर 2023 में कोरिया जिले में गम्भीर बौनापन 8.49 प्रतिशत, मध्यम बौनापन 13.32 प्रतिशत था, जबकि राज्य में 12.49 प्रतिशत तथा 18.39 प्रतिशत दर्ज किया गया. दुर्बलता के मामलों में मध्यम दुर्बलता 8.64 प्रतिशत और गंभीर दुर्बलता 2.18 प्रतिशत थी, वहीं प्रदेश में गम्भीर दुर्बलता का प्रतिशत 2.18 था, मध्यम दुर्बलता 7.20 प्रतिशत रहा. अल्प वजन के मामले में मध्यम कुपोषण 11.13 प्रतिशत जबकि राज्य में मध्यम कुपोषण 12.63 प्रतिशत इसी तरह जिले में गंभीर कुपोषण 2.18 प्रतिशत था, इस दौरान राज्य में 2.87 प्रतिशत था.
कलेक्टर चन्दन त्रिपाठी ने इस संबंध में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका को लगातार दिशा-निर्देश देते रहे. जिला प्रशासन के समर्पित प्रयासों, विभिन्न योजनाओं एवं जनभागीदारी और समन्वित रणनीति के तहत किए गए कार्यों की वजह से कुपोषण दर में बेतहाशा सुधार देखने को मिला.
दिसंबर 2024 में जिले में मध्यम दुर्बलता 3.99 प्रतिशत थी, जबकि राज्य में 5.29 प्रतिशत और गंभीर दुर्बलता 0.79 प्रतिशत हो गई, जबकि राज्य में 1.61 प्रतिशत थीं. गम्भीर बौनापन जिले में 5.9 प्रतिशत, 12.15 प्रतिशत मध्यम बौनापन के दर दर्ज किया गया जबकि राज्य में 7.32 प्रतिशत थी. इसी तरह, अल्प वजन के मामले में मध्यम कुपोषण 9.19 प्रतिशत और गंभीर कुपोषण 1.67 प्रतिशत तक कम हो गया जबकि राज्य में मध्यम कुपोषण की दर 11.12 प्रतिशत और गम्भीर कुपोषण की दर 2.19 प्रतिशत रही.

उपलब्धि के पीछे की रणनीतियाँ
कोरिया जिले ने कुपोषण उन्मूलन के लिए विभिन्न योजनाओं और नवाचारों को अपनाया गया. मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत कुपोषित बच्चों को पूरक पोषण आहार, पोषण पुनर्वास केंद्रों की सुविधाएँ और सुपोषण चौपाल के माध्यम से जागरूकता प्रदान की गई. कुपोषण की चक्र में सर्वप्रथम किशोरी बालिकाओं को पौष्टिक आहार लेने हेतु लगातार शिविर आयोजित किए गए तथा गर्भवती महिलाओं को गर्म व पौष्टिक भोजन एएनसी जांच 100 प्रतिशत करने पर लगातार काम किया गया.
कुपोषित बच्चों को सप्ताह में छह उबले अंडे और गर्म भोजन उपलब्ध कराया गया. पोषण ट्रैकर के माध्यम से कुपोषण स्तर का सतत् मूल्यांकन और निगरानी की गई. आंगनबाड़ी केंद्रों और हितग्राहियों के घरों में पोषण वाटिका विकसित की गई. मुनगा (ड्रमस्टिक) के पौधे लगाने और उपयोग को प्रोत्साहित किया गया. अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान और उनके पोषण स्तर की साप्ताहिक समीक्षा की गई.
