भारत में जल्द दौड़ेंगे हुंडई और टीवीएस के इलेक्ट्रिक ऑटो, दोनों कंपनियों के बीच हुआ बड़ा समझौता
Hyundai-TVS Deal— भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर में एक बड़ी हलचल हुई है। देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई मोटर (Hyundai Motor) और दो-तिहाई पहिया वाहन निर्माता टीवीएस मोटर (TVS Motor) ने हाथ मिला लिया है। दोनों कंपनियों ने 20 अप्रैल, 2026 को एक संयुक्त विकास समझौते (JDA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के लिए किफायती और आधुनिक इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन (E3W) तैयार करना है।
डिजाइन हुंडई का और प्लेटफॉर्म टीवीएस का
इस साझेदारी के तहत काम का स्पष्ट बंटवारा किया गया है। हुंडई मोटर इन इलेक्ट्रिक वाहनों के डिजाइन और तकनीकी विकास की कमान संभालेगी। कंपनी अपने वैश्विक अनुभव और ‘ह्यूमन-सेंट्रिक’ डिजाइन फिलॉसफी का इस्तेमाल करेगी। वहीं, टीवीएस मोटर अपने मौजूदा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर प्लेटफॉर्म और भारतीय सड़कों की गहरी समझ का फायदा पहुंचाएगी।
यह समझौता विशेष रूप से भारत की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक पहुंच) को ध्यान में रखकर किया गया है। इसकी नींव साल 2018 के भारत-कोरिया बिजनेस फोरम में ही पड़ गई थी, जो अब 8 साल बाद आधिकारिक समझौते में बदली है।
भारत की सड़कों के लिए खास फीचर्स
सूत्रों के अनुसार, इन नए इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों को भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। इनमें कुछ खास फीचर्स देखने को मिल सकते हैं:
- एडैप्टिव ग्राउंड क्लीयरेंस: मानसूनी बारिश और खराब सड़कों के लिए।
- थर्मल मैनेजमेंट: भारत की भीषण गर्मी में भी बैटरी को ठंडा रखने के लिए खास तकनीक।
- फ्लेक्सिबल केबिन: इन वाहनों का उपयोग सवारी ढोने और माल ढुलाई (कार्गो) दोनों के लिए किया जा सकेगा।
ऑफिशियल स्टेटमेंट
“हुंडई मोटर लंबे समय से भारत के परिवहन तंत्र को बेहतर बनाने के रास्ते तलाश रही है। टीवीएस के साथ यह साझेदारी उसी दिशा में एक रणनीतिक कदम है। हमें उम्मीद है कि यह इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर देश भर में सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन सुनिश्चित करेगा।”
— सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी), हुंडई मोटर
आम आदमी पर क्या होगा असर?
इस साझेदारी का सीधा असर ई-रिक्शा और ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा। लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर होने के कारण इन वाहनों की कीमत कम रहने की उम्मीद है। टीवीएस अपने नेटवर्क का उपयोग करके भारत में इन वाहनों की बिक्री और सर्विस की जिम्मेदारी संभालेगा। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि प्रदूषण मुक्त यातायात को भी बढ़ावा मिलेगा।