जीएसटी कलेक्शन के सारे रिकॉर्ड टूटे, सरकारी खजाने में आए ₹2.42 लाख करोड़
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन और होर्मुज बंद होने से लगातार बढ़ते तनाव के बीच देश में जीएसटी कलेक्शन में नया रिकॉर्ड बना है। GST कलेक्शन ने अप्रैल महीने में ₹2.42 लाख करोड़ का नया रिकॉर्ड बनाया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने के मुकाबले इसमें 8.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले सबसे ज्यादा कलेक्शन अप्रैल 2025 में ₹2.23 लाख करोड़ रहा था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में भारत का कुल GST कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल के इसी महीने से 8.7% ज्यादा है। यह नए वित्त वर्ष की शुरुआत में अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार की ओर इशारा करता है।
ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि अप्रैल 2025 के 2.23 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार GST कलेक्शन में तेज बढ़ोतरी हुई है। साल-दर-साल आधार पर इसमें 8.7% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, नेट GST राजस्व 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले से 7.3% ज्यादा है। अप्रैल के ये आंकड़े मार्च महीने की वसूली से जुड़े हैं। इसी दौरान ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया, क्योंकि क्षेत्र में फिर से संघर्ष बढ़ने की आशंका थी।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात का योगदान सबसे ज्यादा
जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।
जीएसटी कलेक्शन एक नजर में
अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है
पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था
नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा
महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे.