देश

देश नक्सलवाद से मुक्त: संसद में अमित शाह का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली। देश में नक्सलवाद को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी बयान सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा करते हुए कहा कि भारत अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन तय की थी और अब उस दिशा में निर्णायक सफलता हासिल कर ली गई है।

लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद केवल विकास की कमी का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक विचारधारा से जुड़ा हुआ मुद्दा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) की जड़ें एक ऐसी सोच में हैं, जो हिंसा और अव्यवस्था को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बहुआयामी रणनीति अपनाई, जिसमें सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी गई।

गृहमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक शासन करने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं और योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेज़ी से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया।

अमित शाह ने यह भी दावा किया कि छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था, अब लगभग इस समस्या से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि एक समय ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से जाने जाने वाले क्षेत्र में 12 राज्य, देश का लगभग 70 प्रतिशत भूभाग और करीब 30 करोड़ की आबादी प्रभावित थी। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और कानून व्यवस्था बहाल हो रही है।

अपने भाषण में उन्होंने सुरक्षा बलों की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF), कोबरा बटालियन, राज्य पुलिस, विशेषकर छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों को इस उपलब्धि का श्रेय दिया। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

गृहमंत्री ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि अब देश में हथियार उठाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। “जो गोली चलाएंगे, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी,” उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार हर समस्या को सुनने और उसका समाधान करने के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।